क्षोभमंडल की ऊपरी परत में बहुततीव्र गति से चलने वाले सँकरे, नलिकाकार व विसर्पी पवन प्रवाह को जेट-प्रवाह कहते हैं।
यह 6 से 12 किमी. की ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व की ओर प्रवाहित होता है।
यह दोनों गोलार्द्धों में पाया जाता है।
परतु उत्तरी गोलार्द्ध में यह अधिक शक्तिशाली होता है।
इसमें वायु 120 किमी/घंटा से चलती है।
यह वायुमंडलीय विक्षोभों, चक्रवातों, प्रतिचक्रवातों, तूफानों और वर्षा को उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।
आधुनिक खोजों के अनुसार एशिया में मानसून पवनों के कारण जेट-प्रवाह माना जाता है।
जेट-प्रवाह पृथ्वी पर तापमान के वितरण का संतुलन बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।