1761 ई. में हैदर अली मैसूर का शासक बना।
हैदर अली की मृत्यु 1782 ई. में द्वितीय आँग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान हो गयी।
हैदर अली का उत्तराधिकारी उसका पुत्र टीपू सुल्तान हुआ।
1787 ई. में टीपू ने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में 'पादशाह' की उपाधि धारण की।
टीपू ने अपनी राजधानी श्रीरंगपट्टनम में स्वतंत्रता का वृक्ष लगवाया और साथ ही जैकोबिन क्लब का सदस्य बना ।
टीपू की मृत्यु श्रीरंगपट्टम की आखिरी युद्ध यानी चतुर्थ आँग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान 1799 ई. में हो गयी।
टीपू सुल्तान को शेर-ए-मैसूर कहा जाता था।
टीपू सुल्तान के राजसी झंडे पर शेर की तस्वीर होती थी।