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Sunit Singh

क्षोभमंडल  की  ऊपरी  परत  में  बहुततीव्र गति से चलने  वाले  सँकरे,  नलिकाकार व विसर्पी पवन प्रवाह को जेट-प्रवाह कहते हैं।

यह 6 से 12 किमी. की ऊँचाई पर पश्चिम        से पूर्व की ओर प्रवाहित होता है।

यह दोनों गोलार्द्धों में पाया जाता है।

परतु  उत्तरी  गोलार्द्ध  में यह अधिक शक्तिशाली होता है।

इसमें वायु 120 किमी/घंटा से चलती है।

यह  वायुमंडलीय विक्षोभों, चक्रवातों, प्रतिचक्रवातों, तूफानों और  वर्षा को     उत्पन्न करने में सहायक होते हैं।

  आधुनिक खोजों के अनुसार    एशिया में मानसून पवनों के कारण जेट-प्रवाह माना जाता है।

जेट-प्रवाह  पृथ्वी पर तापमान के वितरण  का संतुलन बनाने में भी   महत्वपूर्ण भूमिका  निभाता है।

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