U.P Board Class 10 Science 824 (IK) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
विज्ञान
समय: तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांक: 70
नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
निर्देश:
i) प्रश्नपत्र दो खण्डों – खण्ड-अ तथा खण्ड-ब में विभाजित है।
ii) खण्ड-अ तथा खण्ड-ब तीन उपभागों – उपभागों (1), (2), (3) में विभाजित हैं।
iii) प्रश्नपत्र के खण्ड-अ में बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनमें सही विकल्प का चुनाव कर ओ०एम०आर० उत्तर पत्रक पर नीले अथवा काले बॉल प्वाइंट पेन से सही विकल्प वाले गोले को पूर्ण रूप से भरें। ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा ह्राइटनर का प्रयोग न करें।
iv) खण्ड-अ में बहुविकल्पीय प्रश्न हेतु प्रत्येक प्रश्न के लिए 1 अंक निर्धारित है।
v) खण्ड-ब में वर्णनात्मक प्रश्न हैं।
vi) प्रत्येक प्रश्न के सम्मुख उनके निर्धारित अंक दिये गये हैं।
vii) खण्ड-ब के प्रत्येक उपभाग के सभी प्रश्न एक साथ करना आवश्यक है। प्रत्येक उपभाग नए पृष्ठ से प्रारम्भ किया जाए।
viii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
खण्ड अ (बहुविकल्पीय प्रश्न)
उपभाग (1)
1. अवतल दर्पण के सम्मुख ध्रुव और फोकस के बीच स्थित वस्तु का प्रतिबिम्ब बनता है :
(A) सीधा, आभासी, छोटा
(B) सीधा, आभासी, बड़ा
(C) सीधा, वास्तविक, बड़ा
(D) सीधा, वास्तविक, छोटा
Ans. (B) सीधा, आभासी, बड़ा
2. दूर दृष्टिदोष (दीर्घ दृष्टिदोष ) के निवारक में कौन सा लेंस प्रयोग होता है?
(A) अवतल लेन्सम
(B) उत्तल लेन्स
(C) द्विफ़ोकसी लेन्स
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (B) उत्तल लेन्स
3. एक लेंस से 0.2 मीटर दूर रखी वस्तु के आभासी प्रतिबिंब का आवर्धन 0.5 है-
(A) 1 मीटर फोकस दूरी का अवतल लेन्स
(B) 0.2 मीटर फोकस दूरी का अवतल लेन्स
(C) 0.1 मीटर फोकस दूरी का उत्तल लेन्स
(D) 0.2 मीटर फोकस दूरी का उत्तल लेन्स
Ans. (D) 0.2 मीटर फोकस दूरी का अवतल लेन्स
4. जब श्वेत प्रकाश काँच के प्रिज्म से गुजरता है, तो प्रिज्म के आधार की ओर अधिकतम झुकी प्रकाश किरण का रंग होता है:
(A) नीला
(B) लाल
(C) हरा
(D) बैंगनी
Ans. (D) बैंगनी
5. R₁ व R₂ प्रतिरोधों के दो तार समांतर क्रम में जोड़े जाते हैं। इनका तुल्य प्रतिरोध होगा-
(A) (R1+R₂)
(B) (R1-R₂)
(C) (R1R₂)/(R1+R₂)
(D) (R1+R₂)/(R1-R₂)
Ans. (C) (R1R₂)/(R1+R₂)
6. बिजली के बल्ब का फिलामेन्ट (तंतु) बना होता है:
(A) नाइक्रोम का
(B) लोहे का
(C) टंग्स्टन का
(D) कॉन्सटेन्टन का
Ans. (C) टंग्स्टन का
7. वैद्युत सेल में रूपान्तरण होता है:
(A) रासायनिक ऊर्जा का वैद्युत ऊर्जा में
(B) वैद्युत ऊर्जा का यांत्रिक ऊर्जा में
(C) यांत्रिक ऊर्जा का वैद्युत उर्जा में
(D) वैद्युत ऊर्जा का रासायनिक ऊर्जा में
Ans. (A) रासायनिक ऊर्जा का वैद्युत ऊर्जा में
उप-भाग 2
8. रासायनिक अभिक्रिया 2 FeCl3 + 2 H2O+Y → 2FeCl2 + H₂SO₄ +2 HCI में Y है:
(A) S
(B) H2S
(C)SO2
(D)Cl2
Ans. (B) H2S
9. निम्नलिखित में से कौन-सा अम्लीय लवण है?
(A) NaCl
(B) NaHSO4
(C) Na2SO
(D) KCN
Ans. (B) NaHSO4
10. मैट में मुख्यतः होता है:
(A) FeS
(B) Cu2S
(C) Cu2S तथा FeS
(D) Cu2S तथा Fe2S3
Ans. (C) Cu2S तथा FeS
11. निम्नलिखित रासायनिक समीकरण को पूरा कीजिए:
……… + PCl5 → CH3COCI + POCl3 + HCl
(A) CH3OH
(B) CH3COOH
(C) C2H5OH
(D) CH3CH2COOH
Ans. (B) CH3COOH
12. उभयधर्मी ऑक्साइड है :
(A) Na2O
(B) MgO
(C) Al2O3
(D) P2O5
Ans. (C) Al2O3
13. प्रोपेन का रासायनिक सूत्र है:
(A) CH
(B) CH
(C) C4H10
(D)C2H6
Ans. (C) C4H10
उप-भाग 3
14. हाइड्रा में प्रजनन होता है:
(A) मुकुलन द्वारा
(B) विखण्डन द्वारा
(C) खण्डन द्वारा
(D) कायिक प्रवर्धन द्वारा
Ans. (A) मुकुलन द्वारा
15. पाइरुवेट के विखंडन की प्रक्रिया सम्पन्न होती है :
(A) कोशिकाद्रव्य में
(B) माइटोकॉन्ड्रिया में
(C) हरितलवक में
(D) केंद्रक में
Ans. (B) माइटोकॉन्ड्रिया में
16. मनुष्य में वृक्क किस तंत्र से संबंधित है ?
(A) पोषण
(B) श्वसन
(C) उत्सर्जन
(D) परिवहन
Ans. (C) उत्सर्जन
17. मेंडल ने प्रारम्भिक शिक्षा प्राप्त की थी:
(A) मन्दिर में
(B) स्कूल में
(C) गुरुकुल में
(D) गिरजाघर में
Ans. (D) गिरजाघर में
18. मादा जनन-तंत्र के किस भाग में लूप स्थापित किया जाता है ?
(A) अण्डाशय में
(B) अण्डवाहिनी में
(C) गर्भाशय में
(D) योनि में
Ans. (C) गर्भाशय में
19. निम्न में से कौन-सा अंग पौधों में नर जननांग का प्रतिनिधित्व करता है?
(A) जायांग
(B) पुंकेसर
(C) वर्तिकाग्र
(D) अण्डाशय
Ans. (B) पुंकेसर
20. निम्न में से कौन-सा/से पर्यावरण-मित्र व्यवहार कहलाता / कहलाते है/हैं?
(A) बाज़ार जाते समय खरीदे गए सामान को रखने के लिए कपड़े का थैला ले जाना
(B) अनावश्यक ऊर्जा खर्च बचाने के लिए लाइटों तथा पंखों का स्विच बंद करना
(C) वाहन के बजाय विद्यालय तक पैदल जाना
(D) उपर्युक्त सभी
Ans. (D) उपर्युक्त सभी
खण्ड ब , वर्णनात्मक प्रश्न
उप-भाग 1
21. एक 10 सेमी फोकस दूरी वाले अवतल दर्पण से कितनी दूरी पर एक वस्तु रखी जाए, ताकि उसका 5 गुना बड़ा प्रतिबिम्ब बने, जबकि प्रतिबिम्ब वास्तविक हो । प्रतिबिम्ब की स्थिति भी ज्ञात कीजिए ।
Ans. दिया:
f = –10 cm, m = –5
सूत्र:
वस्तु 12 सेमी पर रखी जाएगी, प्रतिबिम्ब 60 सेमी पर बनेगा।
22. एक उत्तल लेन्स की फोकस दूरी 50 सेमी है। उस वस्तु के प्रतिबिम्ब की स्थिति बताइए ‘जो लेन्स से 25 सेमी की दूरी पर अक्ष के लम्बवत् है तथा प्रतिबिम्ब का आवर्धन भी ज्ञात कीजिए ।
Ans. f = +50 cm, u = –25 cm
प्रतिबिम्ब 50 सेमी पर, आभासी व 2 गुना बड़ा।
23. 2Ω, 3Ω तथा 5Ω के प्रतिरोधों को श्रेणीक्रम में जोड़ा गया है। यदि संयोजन के दोनों सिरों पर 30 बोल्ट का विभवान्तर लगा है, तो प्रत्येक प्रतिरोध के सिरों के बीच विभवान्तर ज्ञात कीजिए ।
Ans. R = 2 + 3 + 5 = 10Ω
I = V/R = 30/10 = 3 A
विभवान्तर:
2Ω → 6V
3Ω → 9V
5Ω → 15V
24. घरेलू वैद्युत वितरण परिपथ में प्रयुक्त निम्नलिखित तारों की कार्यप्रणाली एवं आवरण (विद्युत्-रोधन) के रंग लिखिए :
(i) जीवित (विद्युन्मय) तार
Ans. कार्यप्रणाली: यह तार विद्युत् आपूर्ति स्रोत से उपकरण तक धारा पहुँचाता है। इसमें उच्च विभव होता है, इसलिए यह सबसे खतरनाक तार होता है।
आवरण (रंग): लाल या भूरा
(ii) भू-सम्पर्क तार
Ans. कार्यप्रणाली: यह सुरक्षा हेतु होता है। उपकरण में रिसाव धारा को पृथ्वी तक पहुँचाकर विद्युत् झटके से बचाता है।
आवरण (रंग): हरा (या हरा-पीला)
(iii) उदासीन तार
Ans. कार्यप्रणाली: यह उपकरण से धारा को वापस विद्युत् स्रोत तक लौटाता है तथा परिपथ को पूर्ण करता है।
आवरण (रंग): काला या नीला
अथवा
(i) फ्लेमिंग के बाएँ हाथ का नियम तथा (ii) दाहिने हाथ के अंगुष्ठ नियम को स्पष्ट कीजिए। यह किन भौतिक राशियों की दिशा को ज्ञात करने में प्रयुक्त होते हैं ?
Ans. (i) फ्लेमिंग का बायाँ हाथ नियम
यदि बाएँ हाथ की पहली उँगली, अंगूठा तथा मध्य उँगली को इस प्रकार परस्पर लम्बवत् फैलाएँ कि—
- पहली उँगली चुंबकीय क्षेत्र की दिशा दर्शाए,
- मध्य उँगली धारा की दिशा दर्शाए,
तो अंगूठा चालक पर लगने वाले बल/गति की दिशा बताता है।
प्रयोग:
इस नियम का उपयोग विद्युत मोटर में चालक पर लगने वाले बल की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
भौतिक राशियाँ:
चुंबकीय क्षेत्र, धारा और बल (गति) की दिशा।
(ii) दाहिने हाथ का अंगुष्ठ नियम
यदि दाहिने हाथ के अंगूठे को चालक में प्रवाहित धारा की दिशा में रखें और शेष उँगलियों को मोड़ें, तो मुड़ी हुई उँगलियाँ चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा बताती हैं।
प्रयोग:
इस नियम का उपयोग धारा वहन करने वाले सीधे चालक के चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र की दिशा ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
भौतिक राशियाँ:
धारा तथा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा।
उप-भाग 2
25. निम्नलिखित अभिक्रियाओं के लिए सन्तुलित रासायनिक समीकरण लिखिए :
(i) लेड नाइट्रेट को गर्म करना
(ii) एथेनोइक अम्ल की सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया
(iii) ज़िक की सिल्वर नाइट्रेट से अभिक्रिया
(iv) सोडियम सल्फेट विलयन की बेरियम क्लोराइड विलयन से अभिक्रिया
Ans. (i) लेड नाइट्रेट को गर्म करने पर :
(ii) एथेनोइक अम्ल की सोडियम कार्बोनेट से अभिक्रिया :
(iii) जिंक की सिल्वर नाइट्रेट से अभिक्रिया :
(iv) सोडियम सल्फेट विलयन की बेरियम क्लोराइड विलयन से अभिक्रिया :
26. निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए :
(i) समजातीय श्रेणी
Ans. समान कार्यात्मक समूह, समान सामान्य सूत्र तथा समान रासायनिक गुणों वाले कार्बनिक यौगिकों के समूह को समजातीय श्रेणी कहते हैं। इस श्रेणी के क्रमागत सदस्यों के आणविक द्रव्यमान में –CH₂ (14 इकाई) का अंतर होता है। इनके भौतिक गुणों (जैसे गलनांक, क्वथनांक) में क्रमिक परिवर्तन होता है।
उदाहरण:
अल्केन श्रेणी – CH₄, C₂H₆, C₃H₈, C₄H₁₀
(ii) कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति
Ans. कार्बन की वह विशेषता जिसके कारण वह अनेक प्रकार के यौगिकों का निर्माण करता है, कार्बन की सर्वतोमुखी प्रकृति कहलाती है। यह गुण मुख्यतः दो कारणों से होता है—
- श्रृंखलन (Catenation): कार्बन-कार्बन के मजबूत सहसंयोजक बन्ध बनाकर लंबी, शाखित एवं चक्रीय शृंखलाएँ बनाता है।
- चतुर्संयोजकता: कार्बन चार सहसंयोजक बन्ध बनाकर विभिन्न तत्वों (H, O, N, Cl आदि) से जुड़ सकता है।
इसी कारण कार्बन के असंख्य यौगिक पाए जाते हैं।
27. (क) निम्नलिखित यौगिकों के IUPAC नाम लिखिए :
(i) CH3COOH
Ans. एथेनोइक अम्ल (Ethanoic acid)
(ii) CH3CH2CH2Cl
Ans. 1-क्लोरोप्रोपेन (1-Chloropropane)
(iii) CH≡CH
Ans. एथाइन (Ethyne)
(ख) साबुन क्या है? साबुन बनाने की रासायनिक अभिक्रिया लिखिए तथा साबुन की दो विशेषताएँ लिखिए।
Ans. साबुन उच्च वसा अम्लों (जैसे स्टीयरिक, पामिटिक आदि) के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं, जो वसा/तेल की क्षार (NaOH या KOH) से अभिक्रिया द्वारा बनते हैं।
साबुन बनाने की रासायनिक अभिक्रिया (सैपोनिफिकेशन):
(उदाहरण)
साबुन की दो विशेषताएँ:
- साबुन की प्रकृति क्षारीय होती है।
- साबुन जल में मैल व चिकनाई को इमल्सीकरण द्वारा हटाता है।
अथवा
(क) ऊष्माक्षेपी एवं ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ स्पष्ट कीजिए।
Ans. ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया (Exothermic Reaction):
वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के दौरान ऊष्मा का उत्सर्जन होता है, ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इन अभिक्रियाओं में उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों से कम होती है।
उदाहरण:
ऊष्माशोषी अभिक्रिया (Endothermic Reaction):
वे रासायनिक अभिक्रियाएँ जिनमें अभिक्रिया के लिए ऊष्मा का अवशोषण किया जाता है, ऊष्माशोषी अभिक्रियाएँ कहलाती हैं। इन अभिक्रियाओं में उत्पादों की ऊर्जा अभिकारकों से अधिक होती है।
उदाहरण:
(ख) pH मान क्या है? इसका हाइड्रोजन आयन सान्द्रण से क्या सम्बन्ध है?
Ans. pH किसी विलयन की अम्लीय या क्षारीय प्रकृति को दर्शाने वाला मान है। यह 0 से 14 के बीच होता है।
- pH = 7 → तटस्थ
- pH < 7 → अम्लीय
- pH > 7 → क्षारीय
हाइड्रोजन आयन सान्द्रण से सम्बन्ध:
pH मान हाइड्रोजन आयन की सान्द्रण का लघुगणकीय व्युत्क्रम होता है।
सम्बन्ध का अर्थ:
- अधिक ⇒ pH कम ⇒ विलयन अधिक अम्लीय
- कम ⇒ pH अधिक ⇒ विलयन अधिक क्षारीय
इस प्रकार pH मान और हाइड्रोजन आयन सान्द्रण के बीच व्युत्क्रम सम्बन्ध होता है।
(ग) खनिज तथा अयस्क में अन्तर बताइए।
Ans. खनिज तथा अयस्क में अन्तर
| खनिज (Mineral) | अयस्क (Ore) |
|---|---|
| प्रकृति में पाए जाने वाले धातु या उसके यौगिक को खनिज कहते हैं। | वह खनिज जिससे धातु को आर्थिक रूप से लाभपूर्वक निकाला जा सके, अयस्क कहलाता है। |
| सभी खनिजों से धातु निकालना आवश्यक या संभव नहीं होता। | प्रत्येक अयस्क से धातु निकाली जाती है। |
| खनिज में धातु की मात्रा कम हो सकती है। | अयस्क में धातु की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक होती है। |
| उदाहरण: बॉक्साइट में अशुद्धियाँ अधिक हो सकती हैं। | बॉक्साइट एल्युमिनियम का अयस्क है। |
उप-भाग 3
28.(क) भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?
Ans. लार भोजन के पाचन की प्रारम्भिक प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- लार में उपस्थित टायलिन (सलाइवरी अमाइलेज) एन्ज़ाइम भोजन में मौजूद स्टार्च को माल्टोज़ (शर्करा) में बदल देता है।
- लार भोजन को नम और चिकना बनाती है, जिससे उसे निगलना आसान हो जाता है।
- यह मुखगुहा को साफ रखती है तथा भोजन को बोलस के रूप में गले तक पहुँचाने में सहायता करती है।
(ख) ओज़ोन परत हमारे लिए क्यों महत्त्वपूर्ण है?
Ans. ओज़ोन परत पृथ्वी के वायुमंडल की एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण परत है, जो सूर्य से आने वाली हानिकारक पराबैंगनी (UV) किरणों को अवशोषित कर लेती है।
महत्त्व:
- यह जीवों को त्वचा कैंसर, नेत्र रोग (आँखों की क्षति) तथा अन्य गंभीर रोगों से बचाती है।
- पौधों और सूक्ष्मजीवों को UV किरणों से होने वाले नुकसान से संरक्षण देती है।
- पृथ्वी पर जीवन के संतुलन एवं अस्तित्व को बनाए रखने में सहायक है।
29. (क) स्व-परागण तथा पर-परागण में विभेद कीजिए।
Ans. स्व-परागण तथा पर-परागण में विभेद
| स्व-परागण | पर-परागण |
|---|---|
| परागकण उसी फूल या उसी पौधे के किसी अन्य फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। | परागकण एक पौधे के फूल से दूसरे पौधे के फूल के वर्तिकाग्र पर पहुँचते हैं। |
| बाह्य परागण कारकों (हवा, कीट आदि) की आवश्यकता नहीं होती। | हवा, कीट, जल आदि परागण कारकों की आवश्यकता होती है। |
| आनुवंशिक विविधता कम होती है। | आनुवंशिक विविधता अधिक होती है। |
| शुद्ध जाति के लक्षण बने रहते हैं। | नई किस्मों का निर्माण संभव होता है। |
| उदाहरण: मटर | उदाहरण: मक्का, पपीता |
(ख) परिवार नियोजन की किन्हीं दो स्थायी विधियों पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Ans. परिवार नियोजन की स्थायी विधियाँ वे विधियाँ हैं जिनसे स्थायी रूप से संतान उत्पत्ति को रोका जाता है। इनमें से दो प्रमुख विधियाँ निम्नलिखित हैं—
(i) नसबंदी (Vasectomy)
यह पुरुषों में की जाने वाली स्थायी विधि है। इसमें शुक्रवाहिनी नलिकाओं को काटकर बाँध दिया जाता है, जिससे शुक्राणु वीर्य में नहीं पहुँच पाते और गर्भधारण नहीं होता। यह एक सरल तथा सुरक्षित प्रक्रिया है।
(ii) बन्ध्याकरण (Tubectomy)
यह स्त्रियों में अपनाई जाने वाली स्थायी विधि है। इसमें अण्डवाहिनी नलिकाओं को काटकर बाँध दिया जाता है, जिससे अण्डाणु और शुक्राणु का मिलन नहीं हो पाता तथा गर्भधारण रुक जाता है।
30. (क) किन्हीं दो पादप हॉमोंनों के नाम एवं कार्य लिखिए।
Ans. (i) ऑक्सिन (Auxin):
कार्य: यह पौधों की लंबाई में वृद्धि करता है तथा कोशिकाओं के दीर्घीकरण में सहायक होता है। यह प्रकाशानुवर्तन में भी सहायक है।
(ii) जिबरेलिन (Gibberellin):
कार्य: यह तने की वृद्धि, बीजों के अंकुरण तथा कुछ पौधों में फूल आने को प्रोत्साहित करता है।
(ख) पौधों में रन्ध्रों की उपयोगिता का उल्लेख कीजिए।
Ans. पौधों में रन्ध्रों की उपयोगिता
रन्ध्र पत्तियों की सतह पर पाए जाने वाले सूक्ष्म छिद्र होते हैं। इनकी उपयोगिता निम्नलिखित है—
- गैसों का आदान-प्रदान: रन्ध्रों के द्वारा पौधे ऑक्सीजन तथा कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करते हैं, जो श्वसन और प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक है।
- वाष्पोत्सर्जन: रन्ध्रों के माध्यम से जल का वाष्प रूप में निष्कासन होता है, जिससे पौधे का ताप नियंत्रित रहता है।
- जल-संतुलन: वाष्पोत्सर्जन द्वारा पौधों में जल का संतुलन बनाए रखने में सहायता मिलती है।
31. मानव में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रियाविधि का वर्णन कीजिए ।
Ans. रचना (Structure of Nephron):
नेफ्रॉन मानव वृक्क की कार्यात्मक इकाई है। प्रत्येक वृक्क में लगभग 1–1.5 मिलियन नेफ्रॉन पाए जाते हैं। यह निम्नलिखित भागों से मिलकर बना होता है—
- बोमैन कैप्सूल (Bowman’s Capsule):
- एक कप्सूल जैसी संरचना जो ग्लोमेरुलस (毛细血管 गुच्छा) को घेरे रहती है।
- यह रक्त से निस्यंदन (filtration) करती है।
- ग्लोमेरुलस (Glomerulus):
- रक्त की महीन रक्तवाहिकाओं का जाल।
- यह उच्च दाब के तहत पानी, लवण, ग्लूकोज, अम्ल, और अपशिष्ट पदार्थों को छानता है।
- संधिक नलिका (Proximal Convoluted Tubule, PCT):
- यहाँ से अधिकतर पानी, लवण और ग्लूकोज पुनः अवशोषित होते हैं।
- लूप ऑफ हेनले (Loop of Henle):
- इसमें पानी और नमक का पुनः अवशोषण होता है, जिससे मूत्र का सान्द्रण नियंत्रित होता है।
- दूरस्थ संधिक नलिका (Distal Convoluted Tubule, DCT):
- यहाँ सोडियम, पोटैशियम और अन्य लवणों का संतुलन नियंत्रित होता है।
- संग्रह नलिका (Collecting Duct):
- कई नेफ्रॉनों से आने वाले मूत्र को एकत्र करता है और मूत्राशय तक पहुँचाता है।
क्रियाविधि (Functioning of Nephron):
नेफ्रॉन मूत्र का निर्माण तीन चरणों में करता है—
- निस्यंदन (Filtration):
- ग्लोमेरुलस में रक्त का द्रव, जिसमें पानी, लवण, ग्लूकोज और अपशिष्ट पदार्थ शामिल होते हैं, बोमैन कैप्सूल में छाना जाता है।
- बड़ी अणु जैसे प्रोटीन और रक्त कोशिकाएँ निस्यंदित नहीं होतीं।
- पुनः अवशोषण (Reabsorption):
- PCT, लूप ऑफ हेनले और DCT में आवश्यक जल, ग्लूकोज और लवण रक्त में पुनः अवशोषित किए जाते हैं।
- स्राव/अपशिष्ट का निष्कासन (Secretion & Excretion):
- DCT और संग्रह नलिका में अतिरिक्त हाइड्रोजन आयन, पोटैशियम आयन और अन्य अपशिष्ट पदार्थ मूत्र में स्रावित होते हैं।
- अंततः मूत्र (Urine) संग्रह नलिका के माध्यम से मूत्राशय में पहुँचता है।
निष्कर्ष: नेफ्रॉन रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को निकालने, जल और लवण का संतुलन बनाए रखने और मूत्र का निर्माण करने के लिए वृक्क का मुख्य कार्य करता है।
अथवा
लक्षणों की वंशागति के नियम में मेंडल के प्रयोगों के महत्त्व की व्याख्या कीजिए।
Ans. रचना: नेफ्रॉन वृक्क की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई है। प्रत्येक नेफ्रॉन मुख्यतः निम्न भागों से बना होता है—
- बोमैन कैप्सूल (Bowman’s Capsule): एक कप्सूलाकार संरचना जिसमें ग्लोमेरुलस (रक्त की छोटी नलिकाओं का जाल) स्थित होता है।
- ग्लोमेरुलस: यह रक्त को फ़िल्टर करता है और अनावश्यक पदार्थ निकालता है।
- प्रॉक्सिमल कर्व्ड ट्यूब (Proximal Convoluted Tubule): फ़िल्टर किए गए उपयोगी पदार्थों का पुनः अवशोषण करता है।
- हैन्स का लूप (Loop of Henle): मूत्र में पानी और लवण का संतुलन बनाए रखता है।
- डिस्टल कर्व्ड ट्यूब (Distal Convoluted Tubule): अतिरिक्त लवणों और अम्ल/क्षार का संतुलन करता है।
- संग्राही नलिका (Collecting Duct): तैयार मूत्र को वृक्क की नलियों में ले जाता है।
क्रियाविधि:
- रक्त ग्लोमेरुलस में उच्च दबाव से फ़िल्टर होता है।
- फ़िल्टर किए गए पदार्थों में से उपयोगी पदार्थ (ग्लूकोज, अमीनो एसिड, आवश्यक लवण) प्रॉक्सिमल ट्यूब में पुनः अवशोषित होते हैं।
- हैन्स के लूप और डिस्टल ट्यूब में जल और लवण का संतुलन बनाए रखा जाता है।
- अंततः मूत्र संग्राही नलिका के माध्यम से मूत्राशय में पहुँचता है और शरीर से उत्सर्जित होता है।
मेंडल के प्रयोगों का महत्त्व (लक्षणों की वंशागति के नियम में):
- विषय की स्पष्ट पहचान: मेंडल ने मटर के पौधों पर नियंत्रित प्रयोग कर लक्षणों के विरासत के पैटर्न को स्पष्ट किया।
- अनुवांशिक नियमों की स्थापना: उसने सिंहावलोकन और गणितीय परिणामों के माध्यम से वंशानुगत लक्षणों के नियम खोजे – जैसे प्राथमिकता का नियम (Law of Dominance), पृथक्करण का नियम (Law of Segregation), स्वतंत्र वितरण का नियम (Law of Independent Assortment)।
- अनुवांशिकता का विज्ञान: मेंडल के प्रयोगों से यह सिद्ध हुआ कि लक्षण अलग-अलग जीन द्वारा नियंत्रित होते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी नियमबद्ध रूप से चलते हैं।
- आधारभूत अनुसंधान: इनके प्रयोगों ने आधुनिक आनुवंशिकी के लिए नींव रखी।
निष्कर्ष: मेंडल के प्रयोगों ने वंशागति की प्रक्रिया को समझने में वैज्ञानिक आधार प्रदान किया और अनुवांशिकी के नियमों की स्थापना की।