U.P Board Class 10 Hindi 801 (HG) Question Paper 2024

U.P Board Class 10 Hindi 801 (HG) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
संस्कृत
समय: तीन घण्टे 15 मिनट  पूर्णांक: 70

निर्देश:

i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

ii) यह प्रश्नपत्र दो खण्डों, खण्ड अ तथा खण्ड ब में विभक्त है।

iii) खण्ड अ में 1 अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके उत्तर ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर नीले अथवा काले बाल प्वाइंट पेन से सही विकल्प वाले गोले को पूर्ण रूप से भरकर चिह्नित करें।

iv) खण्ड अ के प्रत्येक प्रश्न का निर्देश पढ़कर केवल प्रदत्त ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर ही उत्तर दें। ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा ड्राइटनर का प्रयोग न करें।

v) प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।

vi) खण्ड – ब में 50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न हैं।

vii) खण्ड – ब में सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ ही करें। प्रत्येक उपभाग नये पृष्ठ से प्रारम्भ किये जायें।

viii) प्रथम प्रश्न से आरम्भ कीजिए तथा अन्तिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो उस पर समय नष्ट न कीजिए ।

खण्ड – ‘अ’ बहुविकल्पीय प्रश्न

(वस्तुनिष्ठ) प्रश्न

1. ‘वैदेही वनवास’ के रचनाकार हैं –

(A) मैथिलीशरण गुप्त
(B) महादेवी वर्मा
(C) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
(D) सियारामशरण गुप्त

Ans. (D) सियारामशरण गुप्त

2. ‘प्रयोगवाद’ के कवि हैं-

(A) ‘भूषण’
(B) ‘अज्ञेय’
(C) सुमित्रानन्दन पन्त
(D) महादेवी वर्मा

Ans. (B) ‘अज्ञेय’

3. ‘भाव-विलास’ के रचनाकार हैं-

(A) देव
(B) बिहारी
(C) चिन्तामणि
(D) मतिराम

Ans. (A) देव

4. ‘छत्रसाल दशक’ किनकी रचना है ?

(A) पद्माकर क्री
(B) बिहारी की
(C) भूषण की
(D) मतिराम की

Ans. (C) भूषण की

5. ‘कला और बूढ़ा चाँद’ के रचनाकार हैं-

(A) जयशंकर प्रसाद
(B) गिरिजाकुमार माथुर
(C) सुभद्राकुमारी चौहान
(D) सुमित्रानन्दन पंत

Ans. (B) गिरिजाकुमार माथुर

6. ‘नीड़ का निर्माण फिर’ किस विधा की रचना है ?

(A) जीवनी
(B) आत्मकथा
(C) रेखाचित्र
(D) एकांकी

Ans. (C) रेखाचित्र

7. निम्नलिखित में से शुक्ल-युग के लेखक हैं-

(A) मोहन राकेश
(B) अमृत राय
(C) श्यामसुन्दर दासु
(D) कमलेश्वर

Ans. (C) श्यामसुन्दर दासु

8. निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन सही है ?

(A) ‘शशांक’ के रचनाकार आचार्य रामचन्द्र शुक्ल हैं।
(B) ‘आकाश दीप’ कहानी के लेखक रामकुमार वर्मा हैं।
(C) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आलोचना साहित्य के जनक माने जाते हैं।
(D) ‘क्या भूलूँ क्या याद करूँ’ निबन्ध के लेखक जयशंकर प्रसाद हैं।

Ans. (C) भारतेन्दु हरिश्चन्द्र आलोचना साहित्य के जनक माने जाते हैं।

9. ‘परीक्षा-गुरु’ किस विधा की रचना है ?

(A) आत्मकथा
(B) एकांकी
(C) उपन्यास
(D) रेखाचित्र

Ans. (C) उपन्यास

10. ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ के रचनाकार हैं-

(A) जयशंकर प्रसाद
(B) हजारीप्रसाद द्विवेदी
(C) रांगेय राघव
(D) धर्मवीर भारती

Ans. (A) जयशंकर प्रसाद

11. रस के कितने अंग होते हैं ?

(A) पाँच
(B) चार
(C) तीन
(D) इनमें से कोई नहीं

Ans. (A) पाँच

12. ‘पायो जी मैंने राम-रतन धन पायो’ पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

(A) उपमा अलंकार
(B) रूपक अलंकार
(C) उत्प्रेक्षा अलंकार
(D) यमक अलंकार

Ans. (B) रूपक अलंकार

13. सोरठा के पहले चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं ?

(A) 13
(B) 12
(C) 11
(D) 16

Ans. (A) 13

14. ‘निर्दय’ शब्द में प्रयुक्त उपसर्ग है-

(A) दय
(B) नि
(C) निर्
(D) नीर्

Ans. (C) निर्

15. ‘नीलगाय’ में कौन-सा समास है ?

(A) कर्मधारय समासु
(B) द्वन्द्व समास
(C) द्विगु समास
(D) बहुव्रीहि समास

Ans. (D) बहुव्रीहि समास

16. ‘खेत’ का तत्सम रूप है-

(A) भूमि
(B) जमीन
(C) क्षेत्र
(D) पृथ्वी

Ans. (C) क्षेत्र

17. ‘युष्मद्’ शब्द का पंचमी विभक्ति, बहुवचन का रूप होगा-

(A) युष्माकर्म
(B) युष्मासु
(C) युष्मत्
(D) त्वत्

Ans. (B) युष्मासु

18. ‘भाववाच्य’ में किसकी प्रधानता होती है ?

(A) ‘कर्ता’ की प्रधानता
(B) ‘कर्म’ की प्रधानता
(C) ‘क्रिया’ की प्रधानता
(D) इनमें से कोई नहीं

Ans. (C) ‘क्रिया’ की प्रधानता

19. वाक्य के कितने तत्व होते हैं ?

(A) दो
(B) चार
(C) तीन
(D) आठ

Ans. (A) दो

20. अविकारी पद को अन्य किस नाम से जाना जाता है ?

(A) अपव्यय पद
(B) अव्यय पट्ट
(C) व्यय पद
(D) इनमें से कोई नहीं

Ans. (A) दो

खण्ड ‘ब’

वर्णनात्मक प्रश्न

1. निम्नलिखित गद्यांश पर आधारित तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

कुसंग का ज्वर सबसे भयानक होता है। यह केवल नीति और सवृत्ति का ही नाश नहीं करता, बल्कि बुद्धि का भी क्षय करता है। किसी युवा पुरुष की संगति यदि बुरी होगी, तो वह उसके पैरों में बँधी चक्की के समान होगी, जो उसे दिन-दिन अवनति के गड्ढे में गिराती जायगी और यदि अच्छी होगी तो सहारा देने वाली बाहु के समान होगी, जो उसे निरन्तर उन्नति की ओर उठाती जाएँगी ।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का सारांश लिखिए ।
Ans.
कुसंगति अत्यन्त हानिकारक होती है। यह मनुष्य की नीति, सद्वृत्ति और बुद्धि—तीनों का नाश कर देती है। यदि कोई युवक बुरी संगति में पड़ जाता है तो वह उसके लिए पैरों में बँधी चक्की के समान बन जाती है, जो उसे निरन्तर पतन की ओर ले जाती है। इसके विपरीत, अच्छी संगति सहारा देने वाली बाहु के समान होती है, जो व्यक्ति को लगातार उन्नति और प्रगति की दिशा में आगे बढ़ाती है।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
लेखक इस पंक्ति के माध्यम से संगति के प्रभाव को स्पष्ट करना चाहता है। उसका कहना है कि यदि कोई युवा बुरी संगति में पड़ जाता है तो वह संगति उसके पैरों में बँधी हुई चक्की के समान हो जाती है, जो चलते समय उसे बोझ बनकर नीचे की ओर खींचती रहती है। ऐसी संगति व्यक्ति को धीरे-धीरे पतन और अवनति के गड्ढे में गिरा देती है। इसके विपरीत, यदि किसी युवक को अच्छी संगति प्राप्त होती है तो वह सहारा देने वाली बाहु के समान होती है, जो उसे कठिन परिस्थितियों में संभालती है और निरन्तर उन्नति, विकास तथा सफलता की ओर आगे बढ़ाती रहती है। अतः मनुष्य के जीवन में संगति का बहुत महत्त्व है।

(iii) ‘सृदृढ़ बाहु’ का क्या अर्थ है ?
Ans.
‘सृदृढ़ बाहु’ का अर्थ है — मजबूत सहारा देने वाली भुजा
यहाँ इसका आशय अच्छी संगति से है, जो मनुष्य को सहारा देकर उसे आगे बढ़ने, उन्नति करने और जीवन में सही मार्ग पर चलने में सहायता करती है।

अथवा

ईर्ष्या से बचने का उपाय मानसिक अनुशासन है। जो व्यक्ति ईर्ष्यालु स्वभाव का है, उसे फालतू बातों के बारे में सोचने की आदत छोड़ देनी चाहिए। उसे यह भी पता लगा लेना चाहिए कि जिस अभाव के कारण वह ईर्ष्यालु बन गया है. उसकी पूर्ति का रचनात्मक तरीका क्या है? जिस दिन उसके भीतर यह जिज्ञासा जगेगी, उसी दिन से वह ईर्ष्या करना कम कर देगा ।

(i) उपर्युक्त गद्यांश के पाठ का शीर्षक एवं लेखक का नाम लिखिए ।
Ans.

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
लेखक का कहना है कि मनुष्य में ईर्ष्या का जन्म किसी न किसी अभाव की भावना से होता है। इसलिए ईर्ष्या से मुक्त होने के लिए व्यक्ति को यह समझना चाहिए कि उसके भीतर किस कमी के कारण ईर्ष्या उत्पन्न हो रही है। जब वह उस कमी को पहचान लेगा और उसे दूर करने के लिए रचनात्मक एवं सकारात्मक उपाय खोजेगा, तब उसके मन में दूसरों के प्रति ईर्ष्या की भावना अपने-आप कम होने लगेगी। जैसे ही व्यक्ति के भीतर यह जिज्ञासा जाग्रत होती है कि वह अपने अभाव की पूर्ति कैसे कर सकता है, उसी दिन से वह ईर्ष्या छोड़कर आत्मविकास के मार्ग पर चलने लगता है।

(iii) ईर्ष्या से बचने के लिए लेखक किस आदत को छोड़ने की सलाह देता है।
Ans.
लेखक ईर्ष्या से बचने के लिए फालतू और अनावश्यक बातों के बारे में सोचने की आदत छोड़ने की सलाह देता है।

2. निम्नलिखित पद्यांश पर आधारित दिए गए तीन प्रश्नों के उत्तर दीजिए:

रानी मैं जानी अजानी महा, पबि पाहन हूँ ते कठोर हियो है।
राजहुँ काजु अकाजु न जान्यो, कह्यो तियको जेहिं कान कियो है ।।
ऐसी मनोहर मूरति ए, बिछुरे कैसे प्रीतम लोगु जियो है।
आँखिन में सखि राखिबो जोगु, इन्हें किमि के वनवास दियो है ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।
Ans.
प्रस्तुत पद्यांश सियारामशरण गुप्त द्वारा रचित प्रसिद्ध खण्डकाव्य ‘वैदेही वनवास’ से लिया गया है।
इस पद्यांश में सीता अपने वनवास का कारण बताते हुए रानी कौशल्या से निवेदन कर रही हैं। वे कहती हैं कि वे स्वयं को अज्ञानी और कठोर हृदय वाली मानती हैं, क्योंकि उन्होंने बिना उचित विचार किए अपने पति श्रीराम के साथ वनवास जाने का निर्णय ले लिया। सीता श्रीराम की मनोहर मूर्ति का स्मरण करते हुए उनके वियोग का दुःख प्रकट करती हैं और यह प्रश्न करती हैं कि ऐसे प्रिय पति को वनवास कैसे दिया गया।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
इन पंक्तियों में सीता अपनी अवस्था और भावनाओं को व्यक्त कर रही हैं। वे रानी से कहती हैं कि मैं अत्यन्त अज्ञानी हूँ और मेरा हृदय पत्थर से भी अधिक कठोर है। मैंने राजधर्म के कार्य और अकार्य का विचार नहीं किया और जो बात मेरे कानों में किसी ने कह दी, उसी को सत्य मानकर स्वीकार कर लिया। सीता का आशय यह है कि उन्होंने बिना सोच-विचार किए अपने पति के साथ वनवास जाने का निर्णय ले लिया, इसलिए वे स्वयं को दोषी ठहराती हैं और अपनी भूल का पश्चाताप प्रकट करती हैं।

(iii) पद्यांश में ‘ऐसी मनोहर मूरति ए’ किसके लिए प्रयुक्त है तथा इसमें कौन-सा अलङ्कार है ?
Ans.
पद्यांश में ‘ऐसी मनोहर मूरति ए’ का प्रयोग श्रीराम के लिए किया गया है।
इस पंक्ति में उत्प्रेक्षा अलंकार है, क्योंकि कवयित्री ने श्रीराम की सुंदरता की कल्पनात्मक और भावपूर्ण अभिव्यक्ति की है।

अथवा

चढ़ चेतक पर तलवार उठा,
रखता था भूतल पानी को ।
राणा प्रताप सिर काट-काट,
करता था सफल जवानी को ।।
सेना-नायक राणा के भी
रण देख देखकर चाह भरे ।
मेवाड़ सिपाही लड़ते थे
दूने तिगुने उत्साह भरे ।।

(i) उपर्युक्त पद्यांश में कवि एवं शीर्षक का नाम लिखिए ।
Ans.

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
इन पंक्तियों में कवि महाराणा प्रताप की अद्भुत वीरता और युद्ध-कौशल का चित्रण करता है। कवि कहता है कि राणा प्रताप अपने प्रिय घोड़े चेतक पर सवार होकर हाथ में तलवार लिए हुए युद्धभूमि में इस प्रकार आगे बढ़ते थे मानो धरती पर पानी की तरह सहज गति से चलते हों। वे शत्रुओं के सिर काट-काट कर अपने पराक्रम से अपनी जवानी को सफल बना रहे थे। इन पंक्तियों के माध्यम से कवि ने राणा प्रताप की निर्भीकता, शौर्य और मातृभूमि के लिए बलिदान भावना को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया है।

(iii) उपर्युक्त पद्यांश में किस योद्धा का वर्णन किया गया है ?
Ans.
उपर्युक्त पद्यांश में महाराणा प्रताप नामक वीर योद्धा का वर्णन किया गया है।

3. निम्नलिखित संस्कृत गद्यावतरणों में से किसी एक अवतरण का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:

वाराणस्यां प्राचीनकालादेव गेहे गेहे विद्यायाः दिव्यं ज्योतिः द्योतते । अधुनाऽपि अत्र संस्कृतवाग्धारा सततं प्रवहति, जनानां ज्ञानश्च वर्द्धयति । अत्र अनेके आचार्याः मूर्धन्याः विद्वांसः वैदिकवाङ्‌मयस्य अध्ययने अध्यापने च इदानीं निरताः । न केवलं भारतीयाः अपितु वैदेशिकाः गीर्वाणवाण्याः अध्ययनाय अत्र आगच्छन्ति, निःशुल्कं च विद्यां गृह्णन्ति ।

Ans. सन्दर्भ : प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत भाषा की महिमा और वाराणसी की प्राचीन विद्या-परम्परा का वर्णन करता है। इसमें बताया गया है कि वाराणसी प्राचीन काल से ही ज्ञान और संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केन्द्र रही है।

हिन्दी अनुवाद : वाराणसी में प्राचीन काल से ही घर-घर में विद्या का दिव्य प्रकाश प्रकाशित होता रहा है। आज भी यहाँ संस्कृत भाषा की धारा निरन्तर प्रवाहित हो रही है और लोगों के ज्ञान को बढ़ा रही है। यहाँ अनेक महान आचार्य और श्रेष्ठ विद्वान वर्तमान में वैदिक साहित्य के अध्ययन और अध्यापन में लगे हुए हैं। यहाँ केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि विदेशी भी संस्कृत भाषा के अध्ययन के लिए आते हैं और निःशुल्क शिक्षा प्राप्त करते हैं।

अथवा

‘विश्वस्य स्रष्टा ईश्वरः एक एव’ इति भारतीयसंस्कृतेः मूलम् । विभिन्नमतावलम्बिनः विविधैः नामभिः एकम् एव ईश्वरं भजन्ते । अग्निः, इन्द्रः, कृष्णः, करीमः, रामः, रहीमः, जिनः, बुद्धः, ख्रिस्तः, इत्यादीनि नामानि एकस्य एव परमात्मनः सन्ति । तम् एव ईश्वरं जनाः गुरुः इत्यपि मन्यते । अतः सर्वेषां मतानाम् समभावः सम्मानश्च अस्माकं संस्कृतेः सन्देशः ।

Ans. सन्दर्भ : प्रस्तुत गद्यांश भारतीय संस्कृति की उदार और समन्वयवादी भावना को प्रकट करता है। इसमें बताया गया है कि ईश्वर एक ही है और विभिन्न धर्मों के अनुयायी उसे अलग–अलग नामों से पूजते हैं।

हिन्दी अनुवाद : संपूर्ण संसार का सृष्टिकर्ता ईश्वर एक ही है’—यह भारतीय संस्कृति का मूल सिद्धान्त है। विभिन्न मतों को मानने वाले लोग अलग–अलग नामों से उसी एक ईश्वर की आराधना करते हैं। अग्नि, इन्द्र, कृष्ण, करीम, राम, रहीम, जिन, बुद्ध, ख्रिस्त आदि नाम उसी एक परमात्मा के हैं। लोग उसी ईश्वर को गुरु भी मानते हैं। इसलिए सभी मतों के प्रति समान भाव और सम्मान रखना ही हमारी संस्कृति का संदेश है।

4. दिए गए संस्कृत पद्यांशों में से किसी एक का सन्दर्भ सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए:

रात्रिर्गमिष्यति भविष्यति सुप्रभातं भास्वानुदेश्यति हसिष्यति पंकजालिः ।

इत्थं विचिन्तयति कोशगते द्विरेफे हा हन्त! हन्त! नालिनीं गज उज्जहार ।।

Ans. सन्दर्भ :
प्रस्तुत पद्यांश संस्कृत काव्य से लिया गया है। इसमें एक मधुमक्खी (भ्रमर) की कल्पना के माध्यम से आशा और निराशा का भाव व्यक्त किया गया है। भ्रमर कमल के कोष में बैठकर उज्ज्वल भविष्य की कल्पना करता है।

हिन्दी अनुवाद :
रात्रि बीत जाएगी, सुन्दर प्रभात होगा, सूर्य उदित होगा और कमलों की पंक्तियाँ खिल उठेंगी। ऐसी बातें सोचता हुआ कमल के कोष में बैठा हुआ भ्रमर मन ही मन विचार कर रहा था। तभी हाय! हाय! एक हाथी ने कमलिनी को उखाड़ फेंका।

अथवा

श्वेतकेतुर्हारूणेय आस तं ह पितोवाच श्वेतकेतो वस ब्रह्मचर्यम् ।

न वै सोभ्याम्मत्कुलीनोऽननुच्य ब्रह्मबन्धुरिव भवतीति ।

Ans. सन्दर्भ : यह पद्यांश संस्कृत ग्रंथ से लिया गया है। इसमें श्वेतकेतु और उनके पिता के बीच संवाद है, जिसमें ब्रह्मचर्य और नैतिक अनुशासन का महत्व बताया गया है।

हिन्दी अनुवाद : श्वेतकेतु हारूणेय (श्वेतकेतु के पिता) वहाँ उपस्थित थे। उनके पिता ने श्वेतकेतु से कहा — “हे श्वेतकेतु! तुम ब्रह्मचर्य का पालन करो।
जो सुंदर और कुलीन नहीं है, वह ब्रह्मबंधु (ज्ञान और धर्म के अनुयायी) की तरह नहीं बन सकता।”

यहाँ यह संदेश है कि ब्रह्मचर्य और नैतिक अनुशासन के बिना व्यक्ति आदर्श जीवन नहीं जी सकता।

5. अपने पठित खण्डकाव्य के आधार पर दिए गए प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का उत्तर दीजिए:

(क) (i) ‘मुक्तिदूत’ खण्डकाव्य के आधार पर उसके प्रमुख पात्र का चरित्र चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘मुक्तिदूत’ खण्डकाव्य का प्रमुख पात्र मुक्तिदूत है। वह अत्यन्त साहसी, धर्मनिष्ठ और निस्वार्थ भाव वाला व्यक्ति है। उसके मन में सत्य, न्याय और धर्म का गहरा विश्वास है। वह अपने कर्तव्यों के प्रति सजग है और कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और बुद्धिमत्ता से कार्य करता है। उसके कार्यों में सद्भावना और मानव कल्याण की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

(ii) ‘मुक्तिदूत’ खण्डकाव्य के तृतीय सर्ग का कथानक अपने शब्दों में लिखिए ।
Ans.
तृतीय सर्ग में मुक्तिदूत अपने मिशन को पूरा करने के लिए संकटपूर्ण मार्ग से गुजरता है। इसमें उसकी धैर्य, पराक्रम और रणनीति का वर्णन है। वह शत्रु का सामना करता है और अपने धर्म एवं कर्तव्य की रक्षा करता है। इस सर्ग में पाठक को पात्र के साहस और बुद्धिमत्ता का सजीव चित्र मिलता है और यह दिखाया गया है कि कैसे मुक्तिदूत सतर्कता और विवेक से अपने उद्देश्य की प्राप्ति करता है

(ख) (i) ‘ज्योति जवाहर’ खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक का चरित्र चित्रण कीजिए।
Ans.
‘ज्योति जवाहर’ खण्डकाव्य का नायक ज्योति है। वह साहसी, दीनदयालु और सत्यनिष्ठ है। उसके मन में धर्म और न्याय की गहरी श्रद्धा है। वह कठिन परिस्थितियों में भी धैर्य और साहस नहीं खोता और हमेशा सत्य के मार्ग पर चलने का प्रयास करता है। उसकी संकल्प शक्ति और संघर्ष करने की क्षमता उसे अन्य पात्रों से विशेष बनाती है। वह समाज में दूसरों के कल्याण के लिए काम करता है और अपने आदर्शों पर अडिग रहता है।

(ii) ‘ज्योति जवाहर’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
Ans.
‘ज्योति जवाहर’ खण्डकाव्य में नायक ज्योति के जीवन, संघर्ष और साहस का वर्णन है। कथा में बताया गया है कि ज्योति अपने साहस, ज्ञान और न्यायप्रियता के बल पर समाज में अच्छाई और सत्य की स्थापना करता है। वह कठिन परिस्थितियों का सामना करता है, अन्याय के विरुद्ध खड़ा होता है और अपने आदर्शों से कभी विचलित नहीं होता। इस खण्डकाव्य में धैर्य, साहस, नैतिकता और कर्तव्यपरायणता के संदेश को प्रमुखता दी गई है।

(ग) (i) ‘मेवाड़ मुकुट’ खण्डकाव्य के ‘लक्ष्मी सर्ग’ की कथा संक्षेप में लिखिए ।
Ans.
‘लक्ष्मी सर्ग’ में मेवाड़ के राज्य और उसके समृद्धि के प्रतीक लक्ष्मी का आगमन और स्थापना का वर्णन है। कथा में बताया गया है कि कैसे मेवाड़ में कठिन परिश्रम, धर्म और न्याय के पालन के कारण समृद्धि आती है। इस सर्ग में राज्य की सुरक्षा, प्रजा की भलाई और समृद्धि के लिए किये गए प्रयासों का विवरण है। राजा और उसके दरबारी अपनी सूझबूझ, वीरता और धर्मपरायणता से राज्य में समृद्धि और सुख-शांति लाते हैं।

(ii) ‘मेवाड़ मुकुट’ खण्डकाव्य के आधार पर ‘दौलत’ का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘दौलत’ खण्डकाव्य का एक प्रमुख पात्र है। वह धन और संपत्ति का प्रतिनिधि है, लेकिन उसके चरित्र में नैतिकता, परिश्रम और विवेक का मिश्रण दिखाई देता है। दौलत न केवल संपत्ति का संचय करता है, बल्कि उसका उपयोग समाज के कल्याण और राज्य की भलाई के लिए करता है। उसका स्वभाव सजग, सतर्क और उदार है। वह अपने कर्तव्यों और धर्म के प्रति निष्ठावान है और केवल स्वार्थ के लिए कार्य नहीं करता।

(घ) (i) ‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
Ans.
‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य में सर्वप्रथम पूजा और सम्मान का महत्व बताया गया है। कथा में दर्शाया गया है कि कैसे समाज और व्यक्ति सत्य, धर्म और संस्कारों के मार्ग पर अग्रसर होकर अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं। इसमें नायक के माध्यम से यह संदेश मिलता है कि सभी कार्यों में प्रथम पूजा और आध्यात्मिक समर्पण का होना आवश्यक है।

(ii) ‘अग्रपूजा’ खण्डकाव्य के आधार पर ‘श्रीकृष्ण’ का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘अग्रपूजा’ में श्रीकृष्ण का चरित्र धर्मप्रिय, बुद्धिमान, साहसी और प्रेमपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया गया है। वे अपने भक्तों और सहयोगियों के प्रति स्नेही हैं, जबकि अन्याय और अत्याचार के सामने निडर और सतर्क रहते हैं। उनका व्यक्तित्व सच्चाई, धर्म और न्याय के मार्गदर्शन वाला है, और वे कठिन परिस्थितियों में भी अपने आदर्शों और कर्तव्यों से विचलित नहीं होते।

(ङ) (i) ‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के आधार पर उसके नायक का चरित्र चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य का नायक सुभाष एक साहसी, दीनदयालु और प्रेरणादायक व्यक्ति है। वह धर्म, न्याय और समाजसेवा के मार्ग पर चलता है। कठिन परिस्थितियों में भी उसका धैर्य, साहस और साहसिक निर्णय लेने की क्षमता अवलंबनीय है। सुभाष अपने आदर्शों और कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान है और अपने समाज तथा राष्ट्र के कल्याण के लिए हमेशा सक्रिय रहता है।

(ii) ‘जय सुभाष’ खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग का कथानक लिखिए ।
Ans.
द्वितीय सर्ग में नायक सुभाष की संकल्प शक्ति और साहसिक कार्यों का वर्णन है। इसमें दिखाया गया है कि सुभाष ने संकट और विरोधियों का सामना करते हुए अपने मिशन को आगे बढ़ाया। इस सर्ग में पाठक को नायक के धैर्य, साहस और नैतिक मूल्य की झलक मिलती है। सुभाष कठिनाइयों का सामना करते हुए भी सत्य और न्याय की रक्षा करता है और समाज में प्रेरणा और आदर्श का प्रतीक बनता है।

(च) (i) ‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के ‘संकल्प’ सर्ग का सारांश लिखिए ।
Ans.
‘संकल्प’ सर्ग में नायक देशभक्ति और कर्तव्यपरायणता के महत्व को प्रस्तुत करता है। इसमें यह दिखाया गया है कि कैसे नायक ने मातृभूमि के प्रति अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का संकल्प लिया। उसने अपने समाज और देश की सेवा, सुरक्षा और उन्नति के लिए संकल्प किया और अपने कार्यों में कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों का सामना धैर्य और साहस के साथ किया। यह सर्ग देशभक्ति, साहस और दृढ़ निश्चय का संदेश देता है।

(ii) ‘मातृभूमि के लिए’ खण्डकाव्य के आधार पर नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘मातृभूमि के लिए’ का नायक एक साहसी, कर्तव्यपरायण और निस्वार्थ देशभक्त है। वह अपने देश और समाज के कल्याण के लिए तत्पर रहता है। नायक में धैर्य, साहस, दृढ़ संकल्प और उच्च नैतिक मूल्य दिखाई देते हैं। कठिन परस्थितियों और विपरीत परिस्थितियों में भी वह अपने आदर्शों से कभी विचलित नहीं होता और मातृभूमि की सेवा को अपने जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य मानता है।

(छ) (i) ‘कर्ण’ खण्डकाव्य के आधार पर कुन्ती का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘कर्ण’ खण्डकाव्य में कुन्ती एक धर्मपरायण, करूणा और साहसी स्त्री के रूप में प्रस्तुत की गई हैं। वह अपने पुत्र कर्ण के प्रति स्नेही और उसकी भलाई की चिन्ता करती हैं। कुन्ती में धैर्य, विवेक और मातृत्व का उच्च आदर्श दिखाई देता है। कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों से विचलित नहीं होती और अपने पुत्र और परिवार के कल्याण के लिए सही निर्णय लेती हैं।

(ii) ‘कर्ण’ खण्डकाव्य के तृतीय सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
Ans.
तृतीय सर्ग में कथा का मुख्य केन्द्र कर्ण के संघर्ष और वीरता पर है। इसमें वर्णित है कि कैसे कर्ण अपने कठिन जीवन और समाजिक बाधाओं के बावजूद सत्य, धर्म और वीरता के मार्ग पर चलता है। वह अपने आदर्शों से कभी विचलित नहीं होता और अपने कर्तव्य का पालन करता है। इस सर्ग में कर्ण की साहसिक कार्यवाही, युद्ध कौशल और नैतिक दृढ़ता को उजागर किया गया है।

(ज) (i) ‘कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य के आधार पर भरत का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य का नायक भरत एक कर्तव्यपरायण, साहसी और निष्ठावान व्यक्तित्व का प्रतीक है। वह अपने धर्म और कर्तव्यों के प्रति अडिग विश्वास रखता है। भरत सत्यनिष्ठ, निर्भीक और समाजसेवी है। कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने आदर्शों और नैतिक मूल्यों से विचलित नहीं होता। उसका जीवन संकल्प, परिश्रम और निस्वार्थ भाव का उदाहरण है।

(ii) ‘कर्मवीर भरत’ खण्डकाव्य के ‘आगमन’ सर्ग की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए ।
Ans.
‘आगमन’ सर्ग में भरत का स्वदेश लौटना और अपने कर्तव्यों का पालन करना वर्णित है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे भरत धैर्य, साहस और विवेक के साथ अपने घर लौटता है और अपने राज्य और समाज की भलाई के लिए कार्य करता है। इस सर्ग में पाठक को भरत के संकल्प, साहस और कर्तव्यपरायणता की झलक मिलती है, जो उसे आदर्श नायक बनाती है।

(झ) (i) ‘तुमुल’ खण्डकाव्य के आधार पर प्रतिनायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans.
‘तुमुल’ खण्डकाव्य में प्रतिनायक एक साहसी, पराक्रमी और संघर्षशील व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया है। उसका व्यक्तित्व धैर्य, निडरता और संघर्ष करने की क्षमता से पूर्ण है। प्रतिनायक अपने आदर्शों और कर्तव्यों के प्रति निष्ठावान है और कठिन परिस्थितियों में भी अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए साहसपूर्वक लड़ता है। वह अपने समाज और देश के कल्याण के लिए निस्वार्थ भाव से कार्य करता है।

(ii) ‘तुमुल’ खण्डकाव्य के लक्ष्मण मेघनाथ युद्ध का वर्णन कीजिए ।
Ans.
खण्डकाव्य ‘तुमुल’ में लक्ष्मण और मेघनाथ का युद्ध अत्यन्त वीरतापूर्ण और रोमांचक रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें लक्ष्मण अपने साहस, शक्ति और युद्ध कौशल का प्रदर्शन करता है। मेघनाथ भी निडर और पराक्रमी योद्धा के रूप में सामने आता है। युद्ध में दोनों के बीच तीव्र संघर्ष और रणनीति दिखाई देती है। कवि ने इस युद्ध को वीरता, पराक्रम और साहस के उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में चित्रित किया है, जिससे पाठक युद्ध की भव्यता और नायक की वीरता का अनुभव कर सके।

(क) दिए गए लेखकों में से किसी एक लेखक का जीवन परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए :

(i) जयप्रकाश भारती
Ans.
पूरा नाम: जयप्रकाश भारती
जन्म: 20वीं सदी के आरंभ में (सटीक तिथि उपलब्ध नहीं)
जन्म स्थान: भारत (सटीक स्थान उपलब्ध नहीं)

जीवन परिचय:

जयप्रकाश भारती आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक हैं। वे विशेष रूप से खण्डकाव्य, कहानी और आलोचना के क्षेत्र में विख्यात हैं। उनके लेखन में देशभक्ति, नैतिकता, समाजसेवा और मानवीय मूल्य की झलक मिलती है। वे अपनी रचनाओं के माध्यम से सत्य और धर्म के मार्ग पर पाठकों को प्रेरित करते हैं।

साहित्यिक योगदान:

  • खण्डकाव्य और गद्य में महत्वपूर्ण योगदान।
  • उनकी रचनाएँ सामाजिक चेतना और राष्ट्रीय मूल्य को उजागर करती हैं।

प्रमुख रचना:

  • मातृभूमि के लिए (खण्डकाव्य)

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • सरल और स्पष्ट भाषा।
  • देशभक्ति और मानवीय मूल्य प्रमुख।
  • समाज और देश की उन्नति पर ध्यान।

(ii) पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
Ans.

पूरा नाम: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी
जन्म: 20वीं सदी के मध्य (सटीक तिथि उपलब्ध नहीं)
जन्म स्थान: भारत

जीवन परिचय:

पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध लेखक और आलोचक हैं। वे मुख्यतः खण्डकाव्य और गद्य रचनाओं के लिए जाने जाते हैं। उनका लेखन सामाजिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों पर आधारित होता है। उनकी रचनाएँ समाज में सकारात्मक संदेश और प्रेरणा देती हैं।

साहित्यिक योगदान:

  • खण्डकाव्य में प्रमुख योगदान।
  • उनके काव्य और गद्य में नैतिक शिक्षा और सांस्कृतिक चेतना प्रमुख है।

प्रमुख रचना:

  • मेवाड़ मुकुट (खण्डकाव्य)

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली भाषा।
  • समाज और संस्कृति के प्रति जागरूक दृष्टिकोण।
  • नैतिकता और कर्तव्यपरायणता का संदेश।

(iii) जयशंकर प्रसाद ।
Ans.
पूरा नाम: जयशंकर प्रसाद
जन्म: 30 जनवरी 1889
जन्म स्थान: तिलहरी, प्रयाग (वर्तमान प्रयागराज, उत्तर प्रदेश)
निधन: 15 नवम्बर 1937

जीवन परिचय:

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य के छायावादी युग के प्रमुख कवि, नाटककार और कहानीकार थे। वे अपने समय के अत्यन्त प्रतिभाशाली लेखक माने जाते हैं। उनके साहित्य में भाव, सौंदर्यबोध, देशभक्ति और दार्शनिक चिंतन की स्पष्ट झलक मिलती है।

शिक्षा में वे उत्कृष्ट थे। प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत और हिंदी में शिक्षा प्राप्त करने के बाद उन्होंने साहित्यिक जीवन को अपनाया। उनका जीवन साहित्य, शिक्षा और समाजसेवा में समर्पित रहा।

साहित्यिक योगदान:

जयशंकर प्रसाद ने काव्य, खण्डकाव्य, नाटक और कहानी सभी विधाओं में उल्लेखनीय योगदान दिया। उनका लेखन प्रकृति, प्रेम, देशभक्ति और मानव मूल्यों का सुंदर चित्रण करता है। वे छायावाद आंदोलन के तीसरे चरण के प्रमुख कवि माने जाते हैं।

प्रमुख रचनाएँ:

  1. काव्य / खण्डकाव्य:
    • वैदेही वनवास
    • कामायनी
  2. नाटक:
    • अंधार भ्रम
    • कर्मभूमि
  3. कहानियाँ और निबंध:
    • सामाजिक और दार्शनिक कथाएँ

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • काव्य में भाव और विचार का सुंदर मिश्रण
  • छायावादी शैली में गहन भावुकता और दार्शनिकता
  • भाषा सरल, स्पष्ट और प्रभावशाली।
  • मानव जीवन, नैतिकता और संस्कृति पर ध्यान।

सार:

जयशंकर प्रसाद हिंदी साहित्य का अमूल्य रत्न हैं। उनके काव्य और रचनाएँ सत्य, प्रेम, धर्म और मानव मूल्यों का संदेश देती हैं।

(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी एक प्रमुख रचना का उल्लेख कीजिए:

(i) सूरदास
Ans.
पूरा नाम: सूरदास
जन्म: 1478 ई. (अंदाजित)
जन्म स्थान: सूरसर (उत्तर प्रदेश)
निधन: 1583 ई.

जीवन परिचय:

सूरदास हिंदी साहित्य के प्रसिद्ध भक्ति कवी और राधा-कृष्ण भक्ति पर आधारित साहित्यकार हैं। वे अन्धकवासी या अंधे थे, लेकिन उनकी दृष्टि से परे भावना और कविताओं की गहनता अद्वितीय थी। उनके काव्य में भक्ति, प्रेम और लीलाओं का सुंदर चित्रण मिलता है। सूरदास ने हिंदी साहित्य में भक्ति आंदोलन को नई ऊँचाइयाँ दी।

प्रमुख रचना:

  • सूरसागर (कृष्ण भक्ति पर आधारित काव्य संग्रह)

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • राधा-कृष्ण प्रेम और भक्ति प्रधान।
  • सरल और भावपूर्ण भाषा।
  • संगीत और भाव का समन्वय।

(ii) मैथिलीशरण गुप्त
Ans.

पूरा नाम: मैथिलीशरण गुप्त
जन्म: 3 अगस्त 1886
जन्म स्थान: चिरगांव, उत्तर प्रदेश
निधन: 12 अगस्त 1964

जीवन परिचय:

मैथिलीशरण गुप्त आधुनिक हिंदी साहित्य के प्रमुख राष्ट्रवादी और काव्य लेखक थे। वे देशभक्ति, भारतीय संस्कृति और सामाजिक चेतना पर आधारित कविताओं के लिए प्रसिद्ध हैं। उनकी रचनाएँ हिंदी को राष्ट्रीय और सांस्कृतिक पहचान देने में मददगार रही।

प्रमुख रचना:

  • वैष्णव जन तो (काव्य संग्रह)
  • खण्डकाव्य: वीरेंद्र

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • देशभक्ति और सामाजिक चेतना प्रमुख।
  • सरल, भावपूर्ण और प्रेरक भाषा।
  • भारतीय संस्कृति और इतिहास का आदर्श चित्रण।

(iii) माखनलाल चतुर्वेदी ।
Ans.
पूरा नाम: माखनलाल चतुर्वेदी
जन्म: 4 अप्रैल 1889
जन्म स्थान: खंडवा, मध्य प्रदेश
निधन: 18 जनवरी 1968

जीवन परिचय:

माखनलाल चतुर्वेदी आधुनिक हिंदी साहित्य के कवि, पत्रकार और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्हें ‘युग पुरुष’ और ‘काव्यरत्न’ के रूप में जाना जाता है। उनका लेखन देशभक्ति, वीर रस और सामाजिक चेतना से ओत-प्रोत है।

प्रमुख रचना:

  • हिमालय की पुत्रियां (काव्य संग्रह)
  • खण्डकाव्य: प्रह्लाद

साहित्यिक विशेषताएँ:

  • वीर रस प्रधान काव्य।
  • देशभक्ति और समाज सुधारक दृष्टि।
  • भावपूर्ण और प्रेरक लेखन शैली।

7. अपनी पाठ्यपुस्तक में से कण्ठस्थ कोई एक श्लोक लिखिए जो इस प्रश्नपत्र में न आया हो।
Ans.
श्लोक:
सत्यं वद धर्मं चर मित्रं प्रियम्।
स्वाध्यायान्मा प्रमदः।

अर्थ:

  • सत्य बोलो।
  • धर्म का पालन करो।
  • मित्रों के प्रति स्नेहशील और प्रिय बनो।
  • स्वाध्याय (अध्ययन) में कभी प्रमाद (आलस्य) मत करो।

8. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए:

(i) सर्वे यात्रिणः कं दृष्ट्वा अहसन् ?
Ans.
सर्वे यात्रिणः तं दृष्ट्वा अहसन्।

(ii) पुरुराज ! गीतायाः कं सन्देशम् अकथयत् ?
Ans.
गीतायाः सन्देशः पुरुराजाय अकथितः।

(iii) कूपः किमर्थं दुःखम् अनुभवति ?
Ans.
कूपः सूक्ष्मत्वात् दुःखं अनुभवति।

(iv) रिपुः कया वर्धते ?
Ans.
रिपुः अस्य दुर्बलतया वर्धते।

9. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए :

(i) विज्ञान : वरदान या अभिशाप
Ans.
विज्ञान मानव जीवन में एक अद्भुत वरदान है। इसके माध्यम से हमने अनेकों कठिन समस्याओं का समाधान किया है और जीवन को सरल, सुगम और सुखद बनाया है। आधुनिक विज्ञान ने चिकित्सा, संचार, परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। उदाहरण के लिए, रोगों का इलाज, लंबी दूरी के संचार, इंटरनेट और मोबाइल जैसी तकनीकें हमारे जीवन को आसान और तेज़ बना रही हैं।

विज्ञान ने हमारी सोच और ज्ञान की सीमा को बढ़ाया है। नए-नए आविष्कारों और खोजों के कारण मानव जीवन की गुणवत्ता और जीवनकाल दोनों में वृद्धि हुई है। इसके अलावा विज्ञान ने सामाजिक विकास और आर्थिक उन्नति के रास्ते भी खोले हैं।

लेकिन विज्ञान केवल वरदान नहीं है। इसका दुरुपयोग मनुष्य और समाज के लिए अभिशाप भी बन सकता है। उदाहरण के लिए, हथियारों का निर्माण और उनका युद्ध में प्रयोग, पर्यावरण का विनाश, प्रदूषण और तकनीकी असंतुलन मानवता के लिए खतरा बन गए हैं। अगर विज्ञान को जिम्मेदारी और नैतिकता के साथ उपयोग न किया जाए, तो यह विनाशकारी हो सकता है।

इस प्रकार, विज्ञान एक द्विधा साधन है। यह मानव जीवन के लिए वरदान है यदि हम इसका सदुपयोग और नैतिक उपयोग करें। वहीं, इसका दुरुपयोग हमें अभिशाप की ओर ले जा सकता है। इसलिए विज्ञान को सीखने, समझने और सही दिशा में प्रयोग करने की आवश्यकता है।

निष्कर्ष:
विज्ञान मानव जीवन का वरदान है, लेकिन इसे अनुचित प्रयोग से अभिशाप बनने से रोकना आवश्यक है। सही दिशा और नैतिकता के साथ विज्ञान मानवता के लिए हमेशा लाभकारी रहेगा।

(ii) नारी-सशक्तीकरण
Ans.
नारी-सशक्तीकरण का अर्थ केवल महिलाओं को अधिकार देना ही नहीं है, बल्कि उन्हें समाज में समान अवसर, शिक्षा, रोजगार और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करना भी है। एक शिक्षित और सशक्त महिला अपने परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में महत्वपूर्ण योगदान कर सकती है। आधुनिक समय में महिलाएँ सिर्फ घर तक सीमित नहीं रह गई हैं, बल्कि वे शिक्षा, विज्ञान, खेल, प्रशासन और कला के क्षेत्र में पुरुषों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल रही हैं।

नारी-सशक्तीकरण से समाज में सकारात्मक बदलाव आते हैं। यह महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाता है और सामाजिक बुराइयों जैसे घरेलू हिंसा, भेदभाव और अत्याचार को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, सशक्त नारी अपने बच्चों को भी सही शिक्षा और संस्कार दे सकती है, जिससे पूरे समाज का विकास संभव होता है।

सरकार और विभिन्न संगठन भी नारी-सशक्तीकरण के लिए अनेक योजनाएँ चला रहे हैं, जैसे महिलाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम। नारी-सशक्तीकरण केवल महिलाओं का अधिकार नहीं है, बल्कि यह समाज और राष्ट्र की प्रगति का भी आधार है। जब महिला सशक्त होती है, तो समाज और राष्ट्र दोनों उन्नति की ओर बढ़ते हैं।

निष्कर्ष:
नारी-सशक्तीकरण केवल एक उद्देश्य नहीं है, बल्कि यह समाज, परिवार और राष्ट्र के लिए आवश्यक परिवर्तन है। महिलाओं को समान अवसर देकर और उन्हें सशक्त बनाकर ही हम एक सशक्त, समृद्ध और विकसित राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं।

(iii) स्वच्छ भारत अभियान
Ans.
स्वच्छ भारत अभियान भारत सरकार की एक महत्त्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य भारत को स्वच्छ, स्वस्थ और हरा-भरा बनाना है। यह अभियान न केवल सड़कों, घरों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई पर केंद्रित है, बल्कि लोगों में स्वच्छता के प्रति जागरूकता भी पैदा करता है। स्वच्छता का महत्व केवल सुंदरता के लिए नहीं है, बल्कि यह हमारे स्वास्थ्य और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए भी आवश्यक है।

स्वच्छ भारत अभियान के अंतर्गत लोगों को कचरा उचित स्थान पर डालने, प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, जल स्रोतों की सफाई और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाता है। इस अभियान से बीमारियों का फैलाव कम होता है और जीवन स्वस्थ बनता है। स्वच्छता केवल सरकारी प्रयासों पर निर्भर नहीं है, बल्कि हर नागरिक की जिम्मेदारी भी है। यदि प्रत्येक नागरिक अपने घर और आस-पास के क्षेत्र को साफ रखे, तो देश स्वच्छ और स्वस्थ बन सकता है।

स्वच्छ भारत अभियान से न केवल स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि यह देश की छवि को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर बनाता है। यह हमें यह संदेश देता है कि सफाई और स्वच्छता केवल व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं, बल्कि राष्ट्रीय कर्तव्य भी है।

निष्कर्ष:
स्वच्छ भारत अभियान केवल सफाई का अभियान नहीं है, बल्कि यह समाज, स्वास्थ्य और राष्ट्रभक्ति का संदेश है। यदि हम सभी नागरिक मिलकर इस अभियान में योगदान दें, तो भारत एक स्वच्छ, स्वस्थ और विकसित राष्ट्र बन सकता है।

(iv) छात्र और अनुशासन ।
Ans.
छात्र जीवन व्यक्ति के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील समय होता है। यह समय ज्ञान, संस्कार और चरित्र निर्माण का होता है। इस समय अनुशासन का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। अनुशासन का अर्थ केवल नियमों का पालन करना ही नहीं है, बल्कि समय का सदुपयोग करना, अपने कर्तव्यों का पालन करना और आत्म-नियंत्रण रखना भी है।

अनुशासन के बिना शिक्षा और ज्ञान का पूर्ण लाभ नहीं लिया जा सकता। अनुशासित छात्र समय पर पढ़ाई करता है, अध्यापक और सहपाठियों का सम्मान करता है, और अपने लक्ष्यों की ओर ध्यान केंद्रित करता है। अनुशासन छात्र में संयम, धैर्य, ईमानदारी और नैतिकता का विकास करता है। इसके अतिरिक्त, अनुशासित जीवन व्यक्ति को मानसिक रूप से मजबूत बनाता है और उसे सभी कठिनाइयों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

छात्रों का अनुशासन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह समाज और राष्ट्र के विकास में भी योगदान देता है। अनुशासित छात्र अपने जीवन में आदर्श बनते हैं, और उनके कार्य दूसरों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनते हैं। इसलिए छात्र जीवन में अनुशासन का पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष:
छात्रों के लिए अनुशासन जीवन की नींव है। एक अनुशासित छात्र न केवल अपने जीवन में सफल होता है, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी आदर्श बनता है। अनुशासन का पालन करके ही छात्र अपने जीवन को सार्थक और सफल बना सकता है।

10. अपने जन्मदिन पर मित्र द्वारा भेजे गए उपहार के लिए मित्र को धन्यवाद पत्र लिखिए ।
Ans.
प्रेषक:
सुनित
ग्राम/नगर: _______
तारीख: 15 जनवरी 2026

प्रति:
प्रिय मित्र [मित्र का नाम],
[मित्र का पता]

विषय: उपहार के लिए धन्यवाद

प्रिय मित्र,

सस्नेह नमस्कार।

मुझे अपने जन्मदिन पर भेजे गए सुंदर उपहार के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद। आपने जो उपहार भेजा, वह मेरे लिए न केवल उपयोगी है, बल्कि मेरे दिल को भी बहुत प्रसन्न किया। आपका स्नेह और मित्रता मेरे जीवन में हमेशा प्रेरणा का स्रोत रहेगी।

आपके द्वारा भेजे गए उपहार ने मेरे जन्मदिन को और भी खास बना दिया। मैं आपके इस अनमोल स्नेह को कभी नहीं भूलूँगा। मैं आशा करता हूँ कि हमारा मित्रता का यह बंधन हमेशा इसी तरह मजबूत और मधुर बना रहे।

एक बार पुनः आपके स्नेह और उपहार के लिए धन्यवाद। मैं भी जल्द ही आपको मिलकर अपनी खुशी व्यक्त करना चाहूँगा।

आपका मित्र,
सुनित

अथवा

राज्य परिवहन निगम के मुख्य प्रबन्धक को बस चालक के अप्रंशमनीय व्यवहार का उल्लेख करते हुए शिकायती पत्र लिखिए ।
Ans.
प्रेषक:
सुनित
ग्राम/नगर: _______
तारीख: 15 जनवरी 2026

प्रति:
मुख्य प्रबंधक,
[राज्य परिवहन निगम का नाम]
[संपर्क पता]

विषय: बस चालक के अनुचित व्यवहार के संबंध में शिकायत

महोदय,

सस्नेह निवेदन है कि मैं [बस संख्या/मार्ग] में 14 जनवरी 2026 को यात्रा कर रहा था। उस दौरान बस चालक का व्यवहार अत्यंत अनुचित और अप्रसंमनीय था। उसने यात्रियों के प्रति असभ्य और कठोर रवैया अपनाया। वह बार-बार तेज आवाज़ में बोलता और यात्रियों को धमकाता रहा। इसके अलावा, बस चलाते समय उसने यातायात नियमों की भी अनदेखी की, जिससे यात्रियों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई।

इस घटना से मैं और अन्य यात्री बहुत असहज और चिंतित हुए। ऐसे व्यवहार से निगम की छवि भी प्रभावित होती है और यात्रियों का भरोसा कम होता है। मैं आपसे अनुरोध करता हूँ कि संबंधित बस चालक के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए और सुनिश्चित किया जाए कि भविष्य में ऐसी घटनाएँ न हों।

आपके शीघ्र उत्तर और आवश्यक कार्रवाई की प्रतीक्षा रहेगी।

भवदीय,
सुनित

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

Leave a Comment