इस लेख में हम कार्य, सामर्थ्य और ऊर्जा (Work, Power and Energy) के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए निम्नलिखित परिभाषाओं को पढ़ते हैं –
कार्य (Work)
सामान्य भाषा में कार्य का अर्थ किसी भी प्रकार की क्रिया के संपादन से होता है, जैसे—
हल चलाना, लकड़ी काटना, पढ़ना आदि।
भौतिकी में कार्य
भौतिकी में कार्य का एक विशेष और निश्चित अर्थ होता है—
जब किसी वस्तु पर बल लगाकर उसे बल की दिशा में विस्थापित किया जाता है, तो उस क्रिया को कार्य कहते हैं।
गणितीय रूप
यदि बल और विस्थापन एक ही दिशा में हों, तो—
या,
सामान्य स्थिति (जब बल और विस्थापन एक ही दिशा में न हों)
यह आवश्यक नहीं है कि विस्थापन सदैव बल की दिशा में ही हो।
यदि बल और विस्थापन के बीच कोण हो, तो—
अर्थात्,
कार्य = बल × विस्थापन × (बल का वह घटक जो विस्थापन की दिशा में हो)
आरेख का वर्णन (Diagram Explanation)
- मान लीजिए किसी वस्तु पर बल लगाया गया है।
- वस्तु विस्थापन करती है।
- बल और विस्थापन के बीच कोण है।
तो केवल घटक ही कार्य करता है।
विशेष स्थितियाँ (Exam Important)
- θ=0∘
- θ=90∘ उदाहरण: वृत्तीय गति में अभिकेन्द्र बल
- θ=180∘
कार्य ऋणात्मक (Negative) होता है
उदाहरण: घर्षण बल
प्रकृति एवं मात्रक
- कार्य एक अदिश (Scalar) राशि है।
- इसका SI मात्रक जूल (Joule) होता है।
- जूल = न्यूटन × मीटर

Note: कार्य तभी होता है जब बल लगाने से वस्तु में विस्थापन हो और बल का कोई घटक विस्थापन की दिशा में हो।
सामर्थ्य अथवा शक्ति (Power)
किसी कर्त्ता, मशीन अथवा निकाय द्वारा एकांक समय (सामान्यतः 1 सेकण्ड) में किए गए कार्य को उसकी शक्ति या सामर्थ्य कहते हैं।
मात्रक (Units)
- SI मात्रक : वाट (Watt – W)
- 1 वाट = 1 जूल / सेकण्ड
प्रकृति
- शक्ति एक अदिश (Scalar) राशि है।
Note: जो व्यक्ति या मशीन समान कार्य कम समय में करती है, उसकी शक्ति अधिक होती है।
ऊर्जा (Energy)
ऊर्जा एक ऐसा कारक है जो कार्य करने के लिए आवश्यक होता है।
अतः—
जिस कारण से किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है, उसे ऊर्जा कहते हैं।
ऊर्जा की व्याख्या
जब किसी वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है, तो कहा जाता है कि उस वस्तु में ऊर्जा विद्यमान है।
कार्य करने की क्षमता का अर्थ है—किसी अन्य वस्तु पर बल लगाकर उसमें विस्थापन उत्पन्न करना।
दैनिक जीवन के उदाहरण
निम्नलिखित वस्तुएँ कार्य कर सकती हैं, इसलिए इनमें ऊर्जा होती है—
- 🔨 गिरता हुआ हथौड़ा
- 🔫 चलती हुई बंदूक की गोली
- 🌬️ उच्च दाब पर या तीव्र वेग से बहती वायु
- 💧 ऊँचाई से गिरता या तीव्र वेग से बहता झरने का जल
- 🚂 ऊष्मा इंजन में जल-वाष्प
- 🔋 विद्युत सेल या बैटरी
ये सभी वस्तुएँ अन्य वस्तुओं पर बल लगाकर उनका विस्थापन कर सकती हैं, अतः इनमें ऊर्जा है।
मात्रक (Unit)
ऊर्जा की माप किए गए कार्य के द्वारा की जाती है, इसलिए—
- ऊर्जा का SI मात्रक जूल (Joule – J) होता है।
- जूल = न्यूटन × मीटर
प्रकृति
- ऊर्जा एक अदिश (Scalar) राशि है।
Note : ऊर्जा कार्य करने की क्षमता है और इसे किए गए कार्य से मापा जाता है।
ऊर्जा स्थानान्तरण से कार्य की माप
हम जानते हैं कि किसी भी बल को लगाने की क्रिया में सदैव दो वस्तुएँ सम्मिलित होती हैं—
- एक वस्तु जो बल लगाती है, तथा
- दूसरी वस्तु जिस पर बल लगाया जाता है।
उदाहरण : हॉकी खिलाड़ी
जब एक हॉकी खिलाड़ी स्थिर गेंद को स्टिक से प्रहार कर आगे फेंकता है, तो स्टिक द्वारा गेंद पर कार्य किया जाता है।
इससे—
- गेंद की ऊर्जा में वृद्धि होती है, तथा
- खिलाड़ी (या स्टिक) की ऊर्जा का व्यय होता है।
अर्थात्, ऊर्जा का स्थानान्तरण स्टिक से गेंद में हो जाता है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि—
कार्य होने की प्रक्रिया में ऊर्जा का स्थानान्तरण होता है।
जब एक वस्तु दूसरी वस्तु पर कार्य करती है, तो
- कार्य करने वाली वस्तु की ऊर्जा घटती है, तथा
- जिस वस्तु पर कार्य किया जाता है उसकी ऊर्जा बढ़ जाती है।
यदि दोनों वस्तुओं को मिलाकर एक निकाय (System) माना जाए, तो उस निकाय की कुल ऊर्जा में कोई परिवर्तन नहीं होता।
एक वस्तु द्वारा जितनी ऊर्जा व्यय की जाती है, उतनी ही ऊर्जा दूसरी वस्तु को प्राप्त हो जाती है।
कार्य = ऊर्जा स्थानान्तरण
अतः हम कह सकते हैं कि—
ऊर्जा के मात्रक (Units of Energy)
1️⃣ C.G.S. पद्धति
- ऊर्जा का मात्रक अर्ग (erg) होता है।
- 1 erg=10−7 J
2️⃣ M.K.S. तथा S.I. पद्धति
- ऊर्जा का मात्रक जूल (Joule – J) होता है।
3️⃣ वाट-घंटा (Watt hour – Wh)
- प्रति सेकण्ड 1 जूल कार्य होने की दर को 1 वाट कहते हैं।
- यदि यही कार्य 1 घंटे तक हो, तो उसे 1 वाट-घंटा कहते हैं।
4️⃣ किलोवाट-घंटा (Kilowatt hour – kWh)
👉 यही विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक (Commercial Unit) है, जिसे सामान्यतः “एक यूनिट” कहा जाता है।
5️⃣ अश्वशक्ति-घंटा (Horse Power Hour – HPA)
यदि कोई मशीन या इंजन 1 अश्वशक्ति (Horse Power = 746 वाट) की दर से 1 घंटे तक कार्य करे, तो उस दौरान खर्च हुई ऊर्जा को 1 अश्वशक्ति–घंटा कहते हैं।
महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Points)
- अश्वशक्ति–घंटा ऊर्जा का मात्रक है, शक्ति का नहीं।
- यह प्रायः इंजनों और मशीनों द्वारा खर्च की गई ऊर्जा व्यक्त करने में प्रयुक्त होता है।
अश्वशक्ति–घंटा = शक्ति × समय, अतः यह ऊर्जा का मात्रक है।
Note : जूल ऊर्जा का SI मात्रक है, जबकि किलोवाट-घंटा विद्युत ऊर्जा का व्यावसायिक मात्रक है।
ऊर्जा के विभिन्न रूप (Different forms of Energy)
1️⃣ द्रव्यमान–ऊर्जा (Mass–Energy)
प्रत्येक द्रव्य (Matter) में उसके द्रव्यमान के कारण ऊर्जा संचित रहती है।
इस ऊर्जा की गणना आइंस्टीन के प्रसिद्ध सूत्र से की जाती है—
जहाँ—
= पदार्थ में निहित ऊर्जा
= पदार्थ का द्रव्यमान
= प्रकाश का वेग
इस सूत्र के अनुसार द्रव्यमान और ऊर्जा एक-दूसरे में परिवर्तित हो सकते हैं।
नाभिकीय (परमाणु) ऊर्जा इसी द्रव्यमान–ऊर्जा सिद्धान्त पर आधारित है।
2️⃣ सौर ऊर्जा (Solar Energy)
हमारे सौरमण्डल में ऊर्जा का सबसे बड़ा एवं प्रत्यक्ष स्रोत सूर्य है।
पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व मुख्यतः सूर्य पर ही निर्भर करता है।
- हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की सहायता से प्रकाश-संश्लेषण द्वारा भोजन बनाते हैं।
- पौधों को खाकर अन्य जीवधारी ऊर्जा एवं जीवन प्राप्त करते हैं।
- सूर्य से प्राप्त ऊर्जा को सौर ऊर्जा कहते हैं।
3️⃣ नाभिकीय ऊर्जा (Nuclear Energy)
परमाणु का नाभिक ऊर्जा का विशाल भंडार होता है।
इस ऊर्जा को दो प्रक्रियाओं द्वारा प्राप्त किया जा सकता है—
- नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission)
- नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion)
इसी सिद्धान्त के आधार पर—
- परमाणु बम,
- हाइड्रोजन बम आदि बनाए जाते हैं।
नाभिकीय ऊर्जा का शांतिपूर्ण उपयोग नाभिकीय रिएक्टरों में विद्युत ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है।
Note: द्रव्यमान, ऊर्जा का एक रूप है तथा नाभिकीय प्रक्रियाओं में द्रव्यमान ऊर्जा में परिवर्तित होता है।
4️⃣ ध्वनि ऊर्जा (Sound Energy)
- जब कोई वस्तु कंपन करती है, तो उसके कंपनों के कारण ध्वनि उत्पन्न होती है, जिसमें ऊर्जा निहित रहती है।
- तेज ध्वनि में पर्याप्त ऊर्जा होने पर—
- कान के पर्दे फट सकते हैं,
- तेज आवाज से घर की खिड़कियाँ चटक सकती हैं।
- किसी के बोलने से उत्पन्न ध्वनि हमारे कान के पर्दों को कंपित करती है और हम ध्वनि सुन पाते हैं।
5️⃣ रासायनिक ऊर्जा (Chemical Energy)
- विभिन्न तत्वों और पदार्थों के रासायनिक संयोग या अभिक्रिया से ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसे रासायनिक ऊर्जा कहते हैं।
- उदाहरण :
- चूने को पानी में डालने पर पानी का गरम होना या खौलना,
- अम्ल और क्षार के संयोग से सेल बनाकर बल्ब जलाना,
- ईंधन (कोयला, पेट्रोल, गैस) का जलना।
6️⃣ प्रकाश ऊर्जा (Light Energy)
- विभिन्न प्रकाश स्रोतों जैसे सूर्य, दीपक, विद्युत बल्ब आदि से उत्सर्जित प्रकाश में ऊर्जा निहित होती है। इसे प्रकाश ऊर्जा कहते हैं।
- उदाहरण :
- फोटो-इलेक्ट्रिक सेल में प्रकाश ऊर्जा का उपयोग,
- सौर कुकर में भोजन पकाना,
- हरे पौधों द्वारा प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) से भोजन निर्माण।
7️⃣ विद्युत ऊर्जा (Electrical Energy)
- विद्युत आवेशों के प्रवाह से उत्पन्न ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा कहते हैं।
- उदाहरण :
- पंखा चलाना,
- बल्ब जलाना,
- हीटर, मोटर आदि का संचालन।
8️⃣ ऊष्मीय ऊर्जा (Heat Energy / Thermal Energy)
- विभिन्न स्रोतों से ऊष्मा (Heat) उत्पन्न होती है, जैसे—
- किसी वस्तु का जलना (Combustion),
- सौर ऊर्जा का विकिरण,
- दो सतहों का घर्षण (Friction)।
- यह ऊर्जा किसी वस्तु के तापमान को बढ़ाने की क्षमता रखती है।
- उदाहरण :
- हथेलियों को रगड़ने पर हथेलियों का गर्म होना,
- आग में जलती लकड़ी,
- स्टोव या हीटर से निकलती गर्मी।
9️⃣ यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
- यांत्रिक क्रियाओं (Mechanical work) के माध्यम से प्राप्त ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं।
- उदाहरण :
- ऊँचाई पर रखा हुआ पत्थर,
- गिरता हुआ पत्थर,
- दबी हुई स्प्रिंग।
यांत्रिक ऊर्जा के प्रकार
- गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy)
- गति में रहने वाली वस्तु की ऊर्जा।
- उदाहरण : चलती हुई गाड़ी, बहता हुआ पानी।
- स्थितिज ऊर्जा (Potential Energy)
- किसी वस्तु की स्थिति या संरचना में निहित ऊर्जा।
- उदाहरण : ऊँचाई पर रखा पत्थर, खिंची हुई स्प्रिंग।
• गतिज ऊर्जा की माप (Measurement of kinetic Energy)
यदि किसी वस्तु का द्रव्यमान = m और उसकी गति = v है, तो उसकी गतिज ऊर्जा निम्नलिखित सूत्र से व्यक्त की जाती है—
जहाँ—
- KE = गतिज ऊर्जा (Joule में)
- m = वस्तु का द्रव्यमान (kg में)
- v = वस्तु की गति (m/s में)
उदाहरण
मान लीजिए—
- m = 5 kg
- v = 2 m/s
तो गतिज ऊर्जा होगी—
Note : गतिज ऊर्जा केवल गतिमान वस्तु में निहित ऊर्जा है और यह वेग के वर्ग पर निर्भर करती है।
(क) स्थितिज ऊर्जा की माप (Measurement of Potential Energy)
- सापेक्ष मापन
- किसी वस्तु की स्थितिज ऊर्जा की माप उस कार्य (Work) से की जाती है जो वह वस्तु अपनी विशेष अवस्था से प्रारंभिक अवस्था (Reference / Normal State) में आने पर कर सकती है।
- अर्थात्, स्थितिज ऊर्जा सापेक्ष (Relative) होती है।
- प्रारंभिक अवस्था का चयन
- वस्तु की प्रारंभिक अवस्था कुछ भी मानी जा सकती है—
- जमीन की सतह,
- तनावरहित स्प्रिंग की स्थिति,
- संपीडित (Compressed) या तनी हुई (Expanded) स्प्रिंग।
- स्प्रिंग के मामले में आवश्यक नहीं कि तनावरहित स्थिति को ही प्रारंभिक स्थिति माना जाए।
- वस्तु की प्रारंभिक अवस्था कुछ भी मानी जा सकती है—
- ऊर्जा के विभिन्न रूप
- स्थितिज ऊर्जा विभिन्न रूपों में निहित हो सकती है और हर रूप की माप अलग-अलग तरीके से की जाती है।
- उदाहरण :
- गुरुत्वाकर्षण स्थितिज ऊर्जा (Gravitational PE) → ऊँचाई पर आधारित
- स्प्रिंग/लोचीय स्थितिज ऊर्जा (Elastic PE) → खिंचाव या संपीड़न पर आधारित
- विद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical PE) → आवेशों के बीच दूरी पर आधारित
Note : किसी वस्तु की स्थितिज ऊर्जा = उस वस्तु द्वारा प्रारंभिक अवस्था तक पहुँचने पर किया जाने वाला कार्य।
यह माप हमेशा सापेक्ष प्रारंभिक अवस्था के आधार पर की जाती है।
(ख) स्थितिज ऊर्जा के विभिन्न स्वरूप (Different forms of Potential Energy)
(a) गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (Gravitational Potential Energy – GPE)
- यदि कोई वस्तु पृथ्वी से ऊँचाई hhh पर होती है, तो उसे ऊपर उठाने के लिए पृथ्वी के गुरुत्व बल (mg) के विरुद्ध कार्य करना पड़ता है।
- यह कार्य संपन्न होने पर वस्तु में गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा संचित हो जाती है।
- सतह के सापेक्ष, भूमि पर पड़ी वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा = 0।
सूत्र (Formula):
जहाँ—
- = वस्तु का द्रव्यमान (kg)
- = गुरुत्वीय त्वरण (9.8 m/s²)
- = ऊँचाई (m)
विशेषताएँ:
- वस्तु जितनी ऊँची होगी, उसकी स्थितिज ऊर्जा उतनी अधिक होगी।
(b) प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा (Elastic Potential Energy – EPE)
- संपीडित (Compressed) या तनी हुई वस्तुएँ जैसे—
- स्प्रिंग,
- तनी हुई कमान (bow),
- खिंची हुई रबर पट्टी,
- मुड़ी हुई धातु की छड़,
- संपीडित गैस
- इनकी प्रत्यास्थता (Elasticity) के कारण ऊर्जा निहित रहती है।
- यह ऊर्जा वस्तु को सामान्य प्रारंभिक अवस्था में लाने के प्रयास के दौरान कार्य कर सकती है।
सूत्र (Spring / Elastic Energy):
जहाँ—
- = स्प्रिंग स्थिरांक (N/m)
- = खिंचाव/संपीड़न (m)
(c) वैद्युत स्थितिज ऊर्जा (Electrical Potential Energy – EEP)
- विद्युत क्षेत्र (Electric Field) में रखी आवेशित वस्तु पर वैद्युत बल (Coulomb force) लगता है।
- इस बल के कारण वस्तु विस्थापित हो सकती है और ऊर्जा संचित हो जाती है।
सूत्र (Formula):
जहाँ—
- = दो आवेशित वस्तुओं के आवेश (C)
- = दोनों के बीच की दूरी (m)
- = कूलॉम्ब स्थिरांक (Coulomb constant)
नोट: विस्तार के लिए देखें अध्याय 7 – स्थिर वैद्युतिकी।
(d) चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा (Magnetic Potential Energy – MPE)
- चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) में स्थित गतिशील आवेश या धारावाही चालक पर चुम्बकीय बल कार्य करता है।
- इस बल से उत्पन्न कार्य करने की क्षमता को चुम्बकीय स्थितिज ऊर्जा कहते हैं।
ऊर्जा के विभिन्न स्वरूपों में रूपान्तरण
यांत्रिक ऊर्जा (Mechanical Energy)
- किसी वस्तु की गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा , प्रत्यास्थ स्थितिज ऊर्जा और गतिज ऊर्जा (KE) का योग उस वस्तु की यांत्रिक ऊर्जा (ME) कहलाता है।
- यांत्रिक ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में रूपांतरित हो सकती है, लेकिन कुल ऊर्जा संरक्षण का नियम हमेशा लागू होता है।
ऊर्जा रूपांतरण (Energy Transformation)
- घर्षण और टक्कर में ऊर्जा रूपांतरण
- जब दो गतिमान वस्तुएँ एक-दूसरे से टकराती हैं, तो—
- यांत्रिक ऊर्जा का कुछ भाग ध्वनि ऊर्जा में बदल जाता है।
- कुछ भाग ऊष्मीय ऊर्जा (Heat) में बदल जाता है।
- जब दो गतिमान वस्तुएँ एक-दूसरे से टकराती हैं, तो—
- ताप और प्रकाश ऊर्जा
- किसी वस्तु को बहुत गर्म करने पर उसमें से प्रकाश ऊर्जा (Light Energy) का उत्सर्जन होता है।
- भौतिक जगत में सामान्य सिद्धांत
- किसी भी प्रक्रिया में ऊर्जा का एक या अधिक स्वरूपों में रूपांतरण होता है।
- ऊर्जा का कुल योग हमेशा स्थिर रहता है (ऊर्जा संरक्षण का नियम)।
उदाहरण:
| उपकरण | ऊर्जा का स्वरूप परिवर्तन |
| • विद्युत बल्ब | वैद्युत ऊर्जा से ऊष्मा एवं प्रकाश |
| • विद्युत सेल* | रासायनिक ऊर्जा से वैद्युत ऊर्जा |
| • मोमबत्ती* | रासायनिक ऊर्जा से प्रकाश तथा ऊष्मा |
| • फोटो इलेक्ट्रिक सेल | प्रकाश ऊर्जा से वैद्युत ऊर्जा |
| • माइक्रोफोन * | ध्वनि ऊर्जा से वैद्युत ऊर्जा |
| • लाउडस्पीकर* | वैद्युत ऊर्जा से ध्वनि ऊर्जा |
| • सितार एवं अन्य * वाद्य यंत्र | यांत्रिक ऊर्जा से ध्वनि ऊर्जा |
| • भाप, पेट्रोल एवं* डीजल का इंजन | ऊष्मा से यांत्रिक ऊर्जा |
ऊर्जा संरक्षण का नियम (Principle of Conservation of Energy)
- परिभाषा:
- ऊर्जा न तो सृजित (Created) की जा सकती है और न ही विनष्ट (Destroyed)।
- ऊर्जा केवल एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित होती है।
- किसी भी बंद प्रणाली (isolated system) में ऊर्जा का कुल परिमाण स्थिर रहता है।
- उदाहरण:
- हथौड़े से कील ठोंकना:
- हथौड़े की यांत्रिक ऊर्जा का कुछ अंश कील की गतिज ऊर्जा में बदल जाता है,
- कुछ ऊष्मा (Heat) में,
- कुछ ध्वनि ऊर्जा (Sound) में,
- और अन्य ऊर्जा रूपों में।
- कुल ऊर्जा हमेशा स्थिर रहती है, केवल रूपांतरण होता है।
- हथौड़े से कील ठोंकना:
- विशेषताएँ:
- ऊर्जा का कुल योग हमेशा समान रहता है।
- किसी ऊर्जा रूप के घटने का अर्थ नहीं कि ऊर्जा खो गई, बल्कि यह किसी अन्य रूप में परिवर्तित हो गई है।
ऊर्जा के प्रमुख स्रोत (Main Sources of Energy)
ऊर्जा का स्रोत वह जगह या वस्तु है जहाँ से ऊर्जा प्राप्त होती है। कुछ महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत निम्नलिखित हैं:
1. मांसपेशियाँ (Muscles): हमारी मांसपेशियों में ऊर्जा जमा रहती है। यह ऊर्जा भोजन से प्राप्त होती है। भोजन के पाचन और स्वांगीकरण की प्रक्रिया से रासायनिक ऊर्जा मांसपेशियों में परिवर्तित हो जाती है। इस ऊर्जा का उपयोग चलने, दौड़ने, उठाने जैसे कार्यों में किया जाता है।
2. बहती हवा (Wind): हवा में गतिज ऊर्जा निहित होती है। पवनचक्कियों द्वारा इसे यांत्रिक ऊर्जा में और फिर जनित्र की मदद से विद्युत ऊर्जा में बदला जा सकता है। पाल वाली नाव भी हवा की गतिज ऊर्जा से चलती है।
3. बहता जल (Flowing Water): नदियों और झरनों के बहते जल में ऊर्जा होती है। पुराने समय में पनचक्कियों द्वारा आटा पीसने के लिए इसका उपयोग किया जाता था। आजकल गिरते जल की मदद से जल-विद्युत उत्पन्न की जाती है।
4. अग्नि और ईंधन (Fire & Fuel): लकड़ी, कोयला, पेट्रोल, LPG, CNG और जैव गैस जैसे ईंधन जलाने पर ऊष्मीय ऊर्जा देते हैं। भाप इंजन और तापीय शक्ति संयंत्रों में इसे यांत्रिक और विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। इसका उपयोग खाना बनाने, वाहन चलाने और बिजली उत्पादन में किया जाता है।
5. सूर्य (Sun): सूर्य ऊर्जा का मूल स्रोत है। सूर्य की सौर ऊर्जा से पौधे अपना भोजन बनाते हैं, जो जीवों और मानवों के लिए ऊर्जा का स्रोत है। इसके अलावा, सौर पैनल से विद्युत उत्पादन, सोलर कुकर और गीजर से गर्मी प्राप्त की जाती है।
6. परमाणु नाभिक (Nuclear Energy): परमाणु के नाभिक में बंधन ऊर्जा होती है। नाभिकीय विखंडन (Fission) या संलयन (Fusion) से भारी मात्रा में ऊष्मीय ऊर्जा निकलती है। इसे नियंत्रित करके विद्युत बनाई जाती है। परमाणु बम में भी यही ऊर्जा काम करती है। सूर्य की ऊर्जा का स्रोत भी नाभिकीय ऊर्जा है।
7. समुद्र (Ocean): महासागर ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। ज्वार-भाटा और समुद्र की तरंगों की ऊर्जा से टरबाइन चलाकर विद्युत बनाई जाती है। महासागर के सतह और गहराई में ताप के अंतर का उपयोग सागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण संयंत्रों (OTEC) में किया जाता है।
8. पृथ्वी (Earth – Geothermal Energy): भूगर्भीय ताप और तप्त स्थलों से ऊर्जा प्राप्त होती है। जब भूमिगत जल तप्त चट्टानों के संपर्क में आता है, तो भाप बनती है। इस भाप से टरबाइन घुमाकर विद्युत उत्पादन किया जाता है। गेसर और हॉट स्प्रिंग इसी ऊर्जा के उदाहरण हैं।
यह भी पढ़ें: मशीन के प्रकार (Types of Machines)
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