ऊष्मा (Heat)

ऊष्मा वह ऊर्जा है, जो किसी वस्तु को गर्म या ठंडा अनुभव कराने में सक्षम होती है और विभिन्न प्रकार के कार्य संपन्न करने की क्षमता रखती है।

विशेषताएँ:

  1. ऊष्मा ऊर्जा का एक रूप है।
  2. इसे अन्य ऊर्जा रूपों में बदला जा सकता है और अन्य ऊर्जा को ऊष्मा में परिवर्तित किया जा सकता है।
  3. यह भौतिक क्रियाओं में कार्य करने की क्षमता प्रदान करती है।

उदाहरण:

  • विद्युत हीटर: विद्युत ऊर्जा → ऊष्मा ऊर्जा
  • भाप इंजन: ऊष्मा ऊर्जा → यांत्रिक ऊर्जा

ऊष्मा के मात्रक (Units Of Heat)

ऊष्मा को मापने के लिए विभिन्न मात्रक उपयोग में आते हैं, लेकिन वैज्ञानिक दृष्टि से जूल का ही मानक S.I. मात्रक है।

ऊष्मा का मात्रक (Unit of Heat)

  1. S.I. मात्रक (SI Unit):
    • चूँकि ऊष्मा ऊर्जा का ही एक रूप है, इसलिए इसका S.I. मात्रक भी जूल (Joule, J) है।
  2. अन्य प्रचलित मात्रक (Other Units):
    • कैलोरी (Calorie)
    • किलो कैलोरी (kCal)
    • ब्रिटिश थर्मल यूनिट (British Thermal Unit – B.Th.U.)

➤ कैलोरी (Calorie)

एक ग्राम शुद्ध जल का तापमान 14.5 °C से 15.5 °C तक बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को एक कैलोरी कहते हैं।

  • इसे अंतर्राष्ट्रीय कैलोरी (International Calorie) या 15 °C कैलोरी भी कहते हैं।
  • 1 कैलोरी ≈ 4.184 जूल (Joule) होती है।

➤ ब्रिटिश ऊष्मीय इकाई (British Thermal Unit)

एक पौंड (1 lb) जल का तापमान 1 °F बढ़ाने के लिए आवश्यक ऊष्मा की मात्रा को 1 B.Th.U. कहते हैं।

मुख्य बिंदु:

  • यह अमेरिका और ब्रिटेन में प्रचलित ऊष्मा की माप की इकाई है।
  • इसे जल के तापमान वृद्धि के संदर्भ में मापा जाता है।
  • 1 B.Th.U. ≈ 1055 जूल (J) होती है।

➤ ताप (Temperature)

ताप वह भौतिक राशि है जो किसी वस्तु की ऊष्मीय अवस्था (Thermal State) को दर्शाती है और यह बताती है कि वस्तु कितनी गर्म (Hot) या ठंडी (Cold) है।

मुख्य बिंदु:

  1. ताप वस्तु की ऊष्णता और शीतलता का माप है।
  2. ऊष्मा (Heat) केवल तापान्तर (Difference of Temperature) के कारण प्रवाहित होती है।
  3. जब दो वस्तुओं का ताप समान हो जाता है और ऊष्मा का प्रवाह रुक जाता है, तब वह ऊष्मीय संतुलन (Thermal Equilibrium) की स्थिति कहलाती है।

➤ ताप के मात्रक (Units of Temperature)

ताप के मुख्यतः तीन मात्रक (Units) हैं-डिग्री सेल्सियस, डिग्री फारेनहाइट व केल्विन। इन मात्रकों के आधार तीन पैमाने (Scales) हैं जो निम्नवत् हैं-

1. सेल्सियस पैमाना (Celsius / Centigrade Scale)

  • निर्माता: एंडरस सेल्सियस (Sweden), 1742
  • विशेषताएँ:
    • शुद्ध जल का हिमांक (Freezing Point) = 0 °C
    • शुद्ध जल का क्वथनांक (Boiling Point) = 100 °C
    • दोनों बिंदुओं के बीच अंतराल को 100 बराबर भागों में बाँटा गया।
    • प्रत्येक भाग = 1 °C
  • यह पैमाना दैनिक जीवन और विज्ञान में अत्यधिक प्रचलित है।
  • 0 °C से कम और 100 °C से अधिक ताप मापन हेतु इसे बढ़ाया या घटाया जा सकता है।

2. फारेनहाइट पैमाना (Fahrenheit Scale)

  • निर्माता: डैनियल फारेनहाइट (Germany), 1717
  • विशेषताएँ:
    • शुद्ध जल का हिमांक = 32 °F
    • शुद्ध जल का क्वथनांक = 212 °F
    • दोनों बिंदुओं के बीच अंतराल को 180 बराबर भागों में बाँटा गया।
    • प्रत्येक भाग = 1 °F
  • यह पैमाना अमेरिका और ब्रिटेन में प्रचलित है।

3. केल्विन पैमाना (Kelvin / Absolute Scale)

  • निर्माता: लार्ड केल्विन (Lord Kelvin), 1852
  • विशेषताएँ:
    • शुद्ध जल का हिमांक = 273 K
    • शुद्ध जल का क्वथनांक = 373 K
    • दोनों बिंदुओं के बीच अंतराल को 100 बराबर भागों में बाँटा गया।
    • प्रत्येक भाग = 1 K (One Kelvin)
  • यह पैमाना अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली (SI) में मान्यता प्राप्त है और ताप का S.I. मात्रक है।

तीनों पैमानों में संबंध (Relation Among scales)

तीनों पैमाने – सेल्सियस (C), फारेनहाइट (F), केल्विन (K) – शुद्ध जल के हिमांक (Freezing Point) और क्वथनांक (Boiling Point) के आधार पर बनाए गए हैं।
इसलिए इनकी आपस में तुलना की जा सकती है और एक पैमाने की माप को दूसरे पैमाने में बदला जा सकता है।

रूपांतरण का सूत्र (Conversion Formula):

C100=F32180=K273100\frac{C}{100} = \frac{F – 32}{180} = \frac{K – 273}{100}

या इसे सरल रूप में लिखा जा सकता है:C5=F329=K2735\frac{C}{5} = \frac{F – 32}{9} = \frac{K – 273}{5}

परिभाषा और संकेत:

  • C = सेल्सियस पैमाने पर ताप
  • F = फारेनहाइट पैमाने पर ताप
  • K = केल्विन पैमाने पर ताप

उदाहरण (Example):

  1. अगर C=25°CC = 25\,°C हो, तो F=95C+32=9525+32=77°FF = \frac{9}{5}C + 32 = \frac{9}{5}\cdot25 + 32 = 77\,°FK=C+273=25+273=298KK = C + 273 = 25 + 273 = 298\,K
  2. अगर F=68°FF = 68\,°F हो, तो C=59(F32)=59(6832)=20°CC = \frac{5}{9}(F – 32) = \frac{5}{9}(68 – 32) = 20\,°CK=C+273=293KK = C + 273 = 293\,K

➤ परम शून्य ताप (Absolute Zero Temperature)

ताप किसी पदार्थ की ऊष्मीय अवस्था का सूचक है। ताप की अधिकतम और न्यूनतम सीमा से यह ज्ञात होता है कि किसी पदार्थ का ताप कितना बढ़ या घट सकता है।

1. अधिकतम ताप (Maximum Temperature)

  • अभी तक ज्ञात नहीं है कि ताप का कोई सीमित अधिकतम है।
  • इसलिए ताप का अधिकतम theoretically असीमित (Unlimited) माना जाता है।
  • इसका अर्थ है कि पदार्थ के अणु और परमाणु किसी भी उच्च ऊर्जा स्तर तक गर्म किए जा सकते हैं।

2. न्यूनतम ताप (Minimum Temperature / Absolute Zero)

  • न्यूनतम संभव ताप परम शून्य (Absolute Zero) है।
  • इसे 0 K (Kelvin) या −273.15 °C माना जाता है।
  • परम शून्य ताप वह स्थिति है जिसमें किसी पदार्थ के अणुओं की संपूर्ण गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) समाप्त हो जाती है।
  • इस ताप पर अणु बिल्कुल स्थिर हो जाते हैं और कोई ऊष्मा का प्रवाह नहीं होता।

महत्वपूर्ण बिंदु:

  1. ताप की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, इसलिए पदार्थ असीमित रूप से गर्म किया जा सकता है।
  2. न्यूनतम ताप −273.15 °C या 0 K है, जिसे परम शून्य ताप कहते हैं।
  3. परम शून्य ताप विज्ञान और थर्मोडायनामिक्स का आधार है।
  4. Fahrenheit पैमाने में परम शून्य ताप = −459.67 °F

➤ ताप व ऊष्मीय ऊर्जा में संबंध (Relation between Temperature and Thermal Energy)

किसी पदार्थ का ताप (Temperature) और उसकी ऊष्मीय ऊर्जा (Thermal Energy) आपस में धनात्मक (Positive) संबंध रखते हैं।

मुख्य बिंदु:

  1. किसी वस्तु का ताप बढ़ाने पर उसकी ऊष्मीय ऊर्जा भी बढ़ती है।
  2. ऊष्मीय ऊर्जा का वृद्धि अणुओं की गतिज ऊर्जा (Kinetic Energy) और संभाव्य ऊर्जा (Potential Energy) में होती है।
  3. इसी कारण उच्च ताप वाली वस्तु में अणु अधिक तेजी से गति करते हैं और अधिक ऊर्जा रखते हैं।

तापमापी (Thermometer)

तापमापी वह यंत्र है जिससे किसी वस्तु या पदार्थ का तापमान मापा जाता है। इसमें प्रायः किसी तरल पदार्थ के उष्मीय प्रसारगुण का उपयोग किया जाता है, जिससे तरल के फैलने या सिकुड़ने से ताप का सटीक पता लगाया जा सकता है। तापमापी कई प्रकार के होते हैं, जैसे

➤ द्रवतापमापी (Liquid Thermometer)

द्रवतापमापी में प्रायः पारा (Mercury-Hg) या ऐल्कोहॉल (Alcohol-C₂H₅OH) का उपयोग किया जाता है। इन दोनों पदार्थों का मापनीय तापमान परास अलग-अलग होता है। पारा −39 °C पर जमता है और 357 °C पर उबलता है, इसलिए पारद तापमापी का तापमान परास लगभग 30 °C से 350 °C तक होता है। ऐल्कोहॉल −115 °C पर जमता है, इसलिए ऐल्कोहॉल तापमापी का प्रयोग निम्न तापमान के मापन (−40 °C से −110 °C) के लिए किया जाता है।

➤ डॉक्टरी तापमापी (Clinical Thermometer)

मानव और अन्य जानवरों का शरीर ताप मापने के लिए एक विशेष पारद तापमापी बनाई जाती है, जिसे डॉक्टरी तापमापी (Clinical Thermometer) या ज्वरमापी कहा जाता है। इसका तापमान परास 35 °C से 43 °C (95 °F से 110 °F) तक होता है। इसमें 37 °C (98.6 °F) पर लाल निशान होता है, जो सामान्य शरीर ताप दर्शाता है, और यदि पारा इससे ऊपर चढ़ता है तो यह ज्वर का संकेत होता है।

➤ गैस तापमापी (Gas Thermometer)

गैस तापमापी में प्रायः हाइड्रोजन या नाइट्रोजन गैस का उपयोग किया जाता है। हाइड्रोजन गैस के साथ यह लगभग 500 °C तक के ताप को माप सकती है, जबकि नाइट्रोजन गैस के साथ इसका उपयोग 1500 °C तक के उच्च तापमान मापन के लिए किया जाता है।

➤ ताप युग्म तापमापी (Thermo-couple Thermometer)

ताप युग्म तापमापी (Thermo-couple Thermometer) सीबेक प्रभाव (Seebeck Effect) पर आधारित होता है और इससे −200 °C से 1600 °C तक के ताप का मापन किया जा सकता है।

• सीबेक प्रभाव (Seebeck Effect)

सीबेक प्रभाव (Seebeck Effect) वह प्रभाव है जिसमें जब दो अलग-अलग धातु के तारों के सिरों को जोड़कर एक बंद परिपथ (Closed Circuit) बनाया जाता है और इस परिपथ की संधियों (Joints) को अलग-अलग ताप पर रखा जाता है, तो परिपथ में एक धारा (Thermo-Electric Current) उत्पन्न होती है। इसी सिद्धांत पर आधारित तापमापी को ताप युग्म तापमापी (Thermo-couple Thermometer) कहते हैं।

➤ प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum-Resistant Thermometer)

प्लेटिनम प्रतिरोध तापमापी (Platinum-Resistant Thermometer) प्लेटिनम तार के वैद्युत प्रतिरोध (Electric Resistance) के ताप बढ़ने पर समान रूप से बढ़ने के गुण पर आधारित होती है। यह प्रतिरोध ताप गुणांक (Resistant Temperature Coefficient) के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका तापमान परास −200 °C से 1200 °C तक होता है।

➤ पूर्ण विकिरण उत्तापमापी (Total Radiation Pyrometer)

पूर्ण विकिरण उत्तापमापी (Total Radiation Pyrometer) स्टीफॅन के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार उच्च ताप पर किसी वस्तु द्वारा उत्सर्जित विकिरण की मात्रा उसके परमताप (Absolute Temperature) के चतुर्थ घात के अनुपाती होती है। इस तापमापी से उत्सर्जित विकिरण ऊर्जा मापकर वस्तु का ताप ज्ञात किया जाता है। यह दूर स्थित अत्यंत उच्च ताप वाली वस्तुओं का ताप मापने में उपयोगी है और केवल 800 °C या उससे अधिक ताप पर प्रभावी होती है।

➤ ताप के प्रभाव (Effects of Temperature)

  1. ऊष्मा का संचय और गर्मी का अनुभव
    किसी वस्तु का ताप बढ़ाने पर उसमें ऊष्मा ऊर्जा का संचय होता है।
    • इसका परिणाम यह होता है कि वस्तु पहले से अधिक गर्म प्रतीत होती है।
    • उदाहरण: पानी को गरम करने पर उसका ताप बढ़ता है और हम उसे छूने पर गर्म महसूस करते हैं।
  2. आयतन में वृद्धि (Expansion)
    सामान्यतः ताप बढ़ने पर वस्तु का आयतन बढ़ता है
    • इसे विस्तार (Thermal Expansion) कहते हैं।
    • उदाहरण: लोहे की रेलें गर्मी में लंबी हो जाती हैं।
  3. अवस्था परिवर्तन (Change in State)
    ताप बढ़ाने से कुछ पदार्थ अपनी अवस्था बदल सकते हैं, जैसे-
    • ठोस → द्रव (गलना)
    • द्रव → गैस (उबालना)
    • उदाहरण: बर्फ को गर्म करने पर पानी बन जाता है।
  4. पदार्थ का अवयवों में विभाजन
    कुछ पदार्थों को अधिक ताप देने पर वे अपने अवयवों (components) में अलग हो जाते हैं
    • उदाहरण: मिश्र धातु को गर्म करने पर उसके तत्व अलग हो सकते हैं।
  5. ध्वनि का वेग (Speed of Sound)
    वायु में ध्वनि का वेग ताप पर निर्भर करता है:
    • ताप बढ़ने पर → ध्वनि का वेग बढ़ता है
    • ताप घटने पर → ध्वनि का वेग घटता है

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मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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