चाँद का बच्चा : पाठ – 19

वह देखो वह निकला चाँद,
अम्मा तुमने देखा चाँद !
यह भी क्या बच्चा है अम्मा,
छोटा-सा मुन्ना-सा चाँद।

इतना दुबला, इतना पतला,
कब होता है ऐसा चाँद !
अम्मा उस दिन जो निकला था,
वह था गोल बड़ा-सा चाँद।
बादल से हँस-हँसकर उस दिन,
कैसा खेल रहा था चाँद !

छुप जाता था, निकल आता था
करता था यह तमाशा चाँद।
अपने बच्चे को भेजा है,
घर में बैठा होगा चाँद।
यह भी एक दिन बन जाएगा,
अच्छा गोल बड़ा-सा चाँद।

अच्छा अम्मा कल क्यों तुमने,
मुझको कहा था मेरा चाँद।

यह भी पढ़ें : कितनी प्यारी है ये दुनिया: पाठ-18

बातचीत के लिए

1. यह कविता किसके विषय में है?
Ans.
यह कविता चाँद के बारे में है। इसमें एक बच्चा अपनी अम्मा से बात करते हुए कहता है कि आज जो चाँद निकला है, वह छोटा और दुबला-पतला है, जैसे चाँद का बच्चा हो।

2. कविता का नाम ‘चाँद का बच्चा’ क्यों रखा गया होगा?
Ans.
कविता में चाँद छोटा और पतला दिखाई देता है। बच्चा सोचता है कि यह असली चाँद नहीं बल्कि उसका बच्चा है, इसलिए कविता का नाम ‘चाँद का बच्चा’ रखा गया है।

3. आप इस कविता को क्या नाम देना चाहेंगे और क्यों?
Ans.
मैं इस कविता को “छोटा-सा चाँद” नाम देना चाहूँगा, क्योंकि कविता में बार-बार चाँद के छोटे, दुबले और प्यारे रूप की बात की गई है।

4. क्या चाँद हमेशा गोल ही दिखता है?
Ans.
नहीं, चाँद हमेशा गोल नहीं दिखता। चाँद हर दिन आकार बदलता है—कभी आधा, कभी तिकोना, और कभी पूरा गोल। इसे चाँद के कलाएँ कहते हैं।

5. आपकी माँ आपको क्या कहकर पुकारती हैं?
Ans.
(इस उत्तर में आप अपना व्यक्तिगत जवाब भर सकते हैं। उदाहरण:)
मेरी माँ मुझे “राजू”, “लाडो”, “चंदा”, या “बिट्टू” कहकर पुकारती हैं। वह प्यार से मुझे “मेरा राजा बेटा” भी कहती हैं।

शब्दों का खेल

नीचे दी गई वस्तुएँ कैसी हैं- गोल, चौकोर, तिकोनी? रेखा खींचकर मिलाइए –

Ans.

तुक मिलने वाले शब्दों क शब्दों को खोजकर लिखिए –

गोल – बोल
चाँद – माँद
बड़ा –  खड़ा
छोटा – लोटा

चित्र और  बातचीत

कौए की कहानी

चित्र 1: गर्मियों के दिन थे। एक प्यासा कौआ आसमान में उड़ रहा था। उसे बहुत जोर की प्यास लगी थी। वह पानी की तलाश में इधर-उधर उड़ता रहा।

चित्र 2: उड़ते-उड़ते उसे एक मटका दिखाई दिया। वह मटके के पास गया और झाँककर देखा कि उसमें थोड़ा-सा पानी है, लेकिन उसकी चोंच वहाँ तक नहीं पहुँच पा रही थी।

चित्र 3: कौए ने सोचा और तरकीब निकाली। पास पड़े छोटे-छोटे कंकड़ उठाकर उसने एक-एक करके मटके में डालने शुरू किए। धीरे-धीरे पानी ऊपर आ गया। अब उसकी चोंच पानी तक पहुँच सकती थी।

चित्र 4: कौए ने जी भरकर पानी पिया और उड़ गया। वह बहुत खुश था। अपनी अक्ल और मेहनत से उसने अपनी प्यास बुझा ली थी।

शिक्षा: समझदारी और मेहनत से हर मुश्किल हल हो सकती है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

Leave a Comment