किसान की होशियारी : पाठ -14

किसान की होशियारी

एक किसान अपना खेत जोत रहा था। अचानक कहीं से एक भालू आ गया। भालू किसान को मारने झपटा। किसान ने कहा, “मुझे क्यों मारते …

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अपना-अपना काम:  पाठ -12

अपना-अपना काम

सिमरन बाग में बैठी स्कूल का काम कर रही थी। “ओ हो! मैं तो थक गई। इतना सारा लिखने-पढ़ने का काम !” वह सोचने लगी, …

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एक जादुई पिटारा : पाठ -11

एक जादुई पिटारा

एक पिटारा हमने खोला,उसमें से निकला गप्पू गोला।गोले पर जब बाँधी सुतली,लगा नाचने बन कठपुतली। कठपुतली ने गाड़े खूँट,उसमें निकले नौ सौ ऊँट।उन ऊँटों पर …

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रस्साकशी: पाठ -10

रस्साकशी

जोर लगाओ, हेई सा!हेई सा! भई, हेई सा! सीना ताने रहो अकड़ कर,रस्सा दोनों ओर पकड़ कर,तिरछे पड़ कर, कमर जकड़ कर,जोर लगाओ, हेई सा!हेई …

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चतुर गीदड़ : पाठ-8

चतुर गीदड़

(स्थान – तालाब का किनारा)मगरमच्छ – (तालाब की ओर देखते हुए, अपने आप से) तालाब की सारी मछलियाँ तो मैं धीरे-धीरे चट कर गया। अब …

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मित्र को पत्र : पाठ -7

मित्र को पत्र

प्रिय मित्र अभिषेक, नमस्ते ! आशा है कि तुम और परिवार में सभी सकुशल होंगे और गरमी की छुट्टियों का आनंद ले रहे होंगे। मैं …

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बीरबल की खिचड़ी : पाठ -6

बीरबल की खिचड़ी

अकबर के दरबार में अनेक विद्वान् थे। बीरबल उन्हीं में से एक थे। वे अपनी चतुराई के लिए बड़े प्रसिद्ध थे। अपनी चतुराई से वे …

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आम का पेड़: पाठ -5

आम का पेड़

गरमियों के दिन थे। सौरभ के चाचाजी ने अपने बगीचे के एक टोकरी आम भेजे। आम बहुत मीठे थे। सौरभ को आम बहुत अच्छे लगे। …

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