जन्तु विज्ञान (Zoology) : अध्याय – 5
जन्तु विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास (Brief History of Zoology) प्राचीनकालीन ग्रीस देश के कई दार्शनिकों ने जीवों के बारे में लिखा था। हिप्पोक्रेट्स (460-370 ईसा पूर्व) …
जन्तु विज्ञान का संक्षिप्त इतिहास (Brief History of Zoology) प्राचीनकालीन ग्रीस देश के कई दार्शनिकों ने जीवों के बारे में लिखा था। हिप्पोक्रेट्स (460-370 ईसा पूर्व) …
चाय (Tea) • अएल्कोहॉलीय पेयों में चाय (Tea) सबसे अधिक प्रचलित है। विश्व की आधी से भी अधिक आबादी को चाय की लत (addict) है। …
पुष्प के अण्डाशय के परिवर्धित भाग को फल (Fruits) कहते हैं। फल के दो भाग होते हैं- प्रथम – फलभित्ति (Pericorp) तथा दूसरा – बीज …
तेल (oil) एवं वसा (Fats) मानव को पूर्व ऐतिहासिक काल से ही ज्ञात थे। मिश्र (Egypt) में प्राचीन सभ्यता के लोग वनस्पति तेलों (vegetable oils) …
लेयुग्म (Legume) कुल की फसलों को दलहनी फसल की संज्ञा प्रदान की जाती है। ये फसलें तीन मौसमों में उगायी जाती हैं। यथा- • खरीफ …
मनुष्य के जीवन-यापन, सुख-शान्ति व समृद्धि के लिये पौधे एवं उनके उत्पाद आवश्यक हैं। जीवन की आधारभूत आवश्यकताएँ भोजन, वस्त्र व मकानों में प्रयोग आने …
जीवित पौधों की एक विशेषता यह है कि वातावरण के प्रभाव से अथवा कुछ आन्तरिक कारणों से या तो उनका सम्पूर्ण शरीर या शरीर का …
पौधों में वृद्धि, आकार एवं आयतन का चिरस्थायी (irreversible = permanent) वर्धन है जिसके साथ-साथ प्रायः शुष्क भार का तथा जीवद्रव्य (protoplasm) का भी वर्धन …
सभी जीवधारियों को चाहे वह पौधा हो या सूक्ष्मजीवी या जन्तु, अपनी क्रियाशीलता (वृद्धि, गति, जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण, इत्यादि) के लिए ऊर्जा …
जन्तुओं की भाँति पौधों को भी भोजन की आवश्यकता होती है। हरी पत्तियों वाले पौधे अपने भोजन स्वयं बनाते हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं …