चंदा मामा: पाठ-23

चंदा मामा

लो रात हो गई।देखो, आकाश में चारों तरफ़ कितना अँधेरा है!अहा! ये छत पर कैसा सुंदर प्रकाश!तो ये चंदा मामा हैं। आओ चंदा मामा!अरे, ये …

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चार दिशाएँ: पाठ -22

चार दिशाएँ

उगता सूरज जिधर सामनेउधर खड़े हो मुँह करके तुमठीक सामने पूरब होताऔर पीठ पीछे है पश्चिमबायीं ओर दिशा उत्तरकी दायीं ओर तुम्हारे दक्षिणचार दिशाएँ होती …

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हाथी साइकिल चला रहा था : पाठ -21

हाथी साइकिल चला रहा था

हाथी साइकिल चला रहा था,पीछे चींटी बैठी थी,झूम रहा था हवा में हाथी,चींटी शान से ऐंठी थी। तभी चढ़ाई सीधी आई,लगे हाँफने हाथी दद्दा,चरर-मरर-चूं रूकी …

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छुपन-छुपाई: पाठ -20

छुपन-छुपाई

एक दिन सब छुपन-छुपाई खेल रहे थे।उस दिन जीत की बारी थी।जीत सौ तक गिनकर सबको ढूँढ़ने निकला। मोहित दरवाज़े के पीछे मिल गया। जीत …

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आउट: पाठ -19

आउट

छुट्टी का दिन था। जीत और बबली सुबह से खेल रहे थे। उन्होंने कई सारे खेल खेले। दोनों ने रस्सी कूदी। फिर छुपन-छुपाई खेली। उसके …

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बरसात और मेंढक : पाठ -17

बरसात और मेंढक

सोमारू और कमली जंगल घूमने गए। लौटते समय उन्हें ज़ोर की भूख लगी। उन्हें एक गाय दिखी। कमली ने गाय से कहा, “ज़रा-सा दूध दे …

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मूली : पाठ -16

मूली

नानाजी ने बगीचे में मूली बोयी। मूली से नानाजी बोले, “उगो-उगो मूली। मज़बूत बनो और लंबी हो।” उग आयी मोटी और लंबी मूली। नानाजी गए …

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किसान: पाठ -15

किसान

नहीं हुआ है अभी सवेरा,पूरब की लाली पहचान,चिड़ियों के जगने से पहले,खाट छोड़ उठ गया किसान। खिला-पिलाकर बैलों को ले,करने चला खेत पर काम,नहीं कभी …

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बीज : पाठ -14

बीज

मुझे एक बीज मिला।मैंने उसको गमले में डाला।मैंने उसे पानी दिया और बहुत सारी धूप।क्या यह पेड़ है?क्या यह झाड़ी है?क्या इसमें फूल होंगे?क्या इसमें …

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