चाँद का कुरता : पाठ -3

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,
“सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।
सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता हूँ,
ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यात्रा पूरी करता हूँ।

आसमान का सफर और यह मौसम है जाड़े का,
न हो अगर तो ला दो कुरता ही कोई भाड़े का।”
बच्चे की सुन बात कहा माता ने, “अरे सलोने !
कुशल करें भगवान, लगें मत तुझको जादू-टोने।

जाड़े की तो बात ठीक है, पर मैं तो डरती हैं,
एक नाप में कभी नहीं तुझको देखा करती हूँ।
कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा,
बड़ा किसी दिन हो जाता है और किसी दिन छोटा।

घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।
अब तू ही तो बता, नाप तेरी किस रोज लिवाएँ,
सी दें एक झिंगोला जो हर रोज बदन में आए?”

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बातचीत के लिए

1. आकाश आपको कब-कब बहुत सुंदर दिखाई देता है और क्यों?
Ans.
आकाश सुबह सूर्योदय के समय, शाम को सूर्यास्त के समय और रात में चाँद-तारों से भरा होने पर बहुत सुंदर दिखाई देता है, क्योंकि उस समय रंग-बिरंगे दृश्य और चमकते तारे मन को आकर्षित करते हैं।

2. चाँद को ठंड लगती है इसलिए वह झिंगोला माँग रहा है। सूरज क्या कहकर अपनी माँ से कपड़े माँगेगा?
Ans.
सूरज अपनी माँ से कहेगा—
“माँ, मुझे बहुत गरमी लगती है, मेरे लिए हल्के और सूती कपड़े सिलवा दो।”

3. आपने आकाश में क्या-क्या परिवर्तन होते देखे हैं?
Ans.
हमने आकाश में दिन-रात का बदलना, बादलों का आना-जाना, चाँद का घटना-बढ़ना, तारे चमकते देखे हैं।

4. जब आप अपने अभिभावक के साथ नए कपड़े खरीदने जाते हैं तब किन-किन बातों का ध्यान रखते हैं?
Ans.
हम कपड़ों के नाप, रंग, मौसम, आराम और कीमत का ध्यान रखते हैं।

कविता से

नीचे दिए गए प्रश्नों में चार विकल्प हैं। इनमें एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।

सही विकल्प पर चाँद का चित्र (🌙) बनाइए-

1. चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं दे पा रही है?

(क) चाँद के पास पहले से ही बहुत से झिंगोले हैं।
(ख) चाँद के शरीर का आकार घटता-बढ़ता रहता है। (🌙)
(ग) चाँद अपने वस्त्र सँभालकर नहीं रखता है।
(घ) चाँद की माँ अभी कोई नया वस्त्र नहीं सिलवाना चाहती है।

2. कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन करने के लिए किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?

(क) एक अंगुल-भर चौड़ा (🌙)
(ख) एक फुट मोटा (🌙)
(ग) किसी दिन बड़ा (🌙)
(घ) किसी दिन छोटा (🌙)

3. कविता में ठंड के मौसम का वर्णन करने के लिए किन-किन शब्दों का प्रयोग किया गया है?

(क) ऊन का मोटा झिंगोला (🌙)
(ख) सन-सन चलती हवा (🌙)
(ग) ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा (🌙)
(घ) भाड़े का कुरता

सोचिए और लिखिए

1. कविता की किन पंक्तियों से पता चलता है कि चाँद किसी एक दिन बिलकुल दिखाई नहीं देता है?
Ans.

“घटता-बढ़ता रोज किसी दिन ऐसा भी करता है,
नहीं किसी की भी आँखों को दिखलाई पड़ता है।”

2. सर्दी से बचने के लिए चाँद, माँ से ऊन के झिंगोले के अतिरिक्त और कौन-से कपड़े माँग सकता है?
Ans.
चाँद स्वेटर, मफलर, टोपी और दस्ताने माँग सकता है।

3. जाड़े के मौसम में चाँद को क्या कठिनाई होती है?
Ans.
जाड़े में चाँद को बहुत ठंड लगती है और उसे ठिठुर-ठिठुरकर यात्रा करनी पड़ती है।

4. चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात कर रहा है?
Ans.
चाँद आकाश की अपनी रोज़ की यात्रा पूरी करने की बात कर रहा है।

अनुमान और कल्पना

1. आप अपनी माँ से चाँद का दुखड़ा कैसे बताएँगे?
Ans.
मैं माँ से कहूँगा कि चाँद को रात में बहुत ठंड लगती है और वह ऊन का झिंगोला चाहता है।

2. गरमी और वर्षा से बचने के लिए चाँद अपनी माँ से क्या कहेगा? वह किस प्रकार के कपड़ों एवं वस्तुओं की माँग कर सकता है?
Ans.
चाँद कहेगा—
“माँ, गरमी में हल्के कपड़े और बारिश में रेनकोट व छाता दिला दो।”

3. चाँद ने माँ से कुरता किराए पर लाने के लिए क्यों कहा होगा?
Ans.
क्योंकि चाँद का आकार रोज बदलता रहता है, इसलिए एक ही नाप का कुरता हमेशा फिट नहीं आएगा।

4. यदि माँ ने चाँद का कुरता सिलवा दिया होता तो क्या होता?
Ans.
कुरता किसी दिन बड़ा और किसी दिन छोटा पड़ जाता, इसलिए चाँद उसे ठीक से पहन नहीं पाता।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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