मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था। नन्ही-सी धारा के रूप में मैं उत्तराखंड के उत्तरकाशी जनपद में स्थित गंगोत्री हिमनद के उस स्थान से निकली जिसे गोमुख कहते हैं। गोमुख से थोड़ा नीचे गंगोत्री में मेरा भव्य मंदिर है जहाँ देशभर से तीर्थयात्री आते हैं। राजा भगीरथ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। इसलिए मेरा नाम भागीरथी भी है। यहाँ से मैं नीचे ढुलकती चली और मेरा रूप और निखरने लगा। पहाड़ों को चीरती, चट्टानों से टकराती हुई, उछलती-कूदती मैं आगे बढ़ती गई।

देवप्रयाग में मुझसे अलकनंदा आ मिली। ऋषिकेश पहुँचने पर मैं मैदान में उतर आई। यहाँ मेरे किनारों पर साधु-संतों और महात्माओं के आश्रम हैं। बहुत से नगर मेरे तट पर बस गए हैं। कई कारखाने खुल गए हैं। इन सबको मैं ही पानी पहुँचाती हूँ।

ऋषिकेश और हरिद्वार मेरे किनारों पर बसे प्रसिद्ध तीर्थ हैं। यहाँ का प्राकृतिक दृश्य और वातावरण बहुत शांत है। हरिद्वार में हर बारह वर्ष बाद कुंभ का मेला लगता है। हरिद्वार के पास से एक नहर निकाली गई है जिसे गंगानहर कहते हैं। लाखों एकड़ भूमि को सींचती हुई यह नहर उत्तर प्रदेश के कानपुर जनपद पहुँचती है। मैं भी घूमती-घामती कानपुर पहुँच जाती हूँ।

कानपुर भारत का प्रसिद्ध औद्योगिक नगर यहाँ कपड़े, चमड़े और लोहे के कारखाने हैं। इन कारखानों को पानी मुझसे ही मिलता है।

कानपुर से चलकर मैं प्रयागराज पहुँचती हूँ। यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है। इस संगम पर भी प्रत्येक बारहवें वर्ष कुंभ का मेला लगता है। इस मेले में देश के कोने-कोने से लाखों लोग आते हैं।
मैं फिर आगे बढ़ती हूँ। चलते रहना, बहते रहना ही मेरा काम है। मैं वाराणसी पहुँचती हूँ। इस नगर का दूसरा नाम काशी है। यह बहुत बड़ा तीर्थ है।

वाराणसी से आगे बढ़ने पर मैं कई नदियों को अपनी गोद में लेती हुई बिहार राज्य में पहुँचती हूँ। यहाँ से पटना, भागलपुर आदि नगरों से होती हुई मैं पश्चिम बंगाल में प्रवेश करती हूँ।
पश्चिम बंगाल में मेरी दो धाराएँ हो जाती हैं। एक धारा बांग्लादेश को चली जाती है। वहाँ उसका नाम पद्मा पड़ गया है। दूसरी धारा कोलकाता (कलकत्ता) की ओर जाती है। वहाँ मुझे हुगली भी कहते हैं। अंत में से मिल में मैं बंगाल की खाड़ी में समुद्र से जाती हूँ।

मुझे भारतवासी पवित्र नदी मानते हैं। गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है। कारखानों और शहरों का गंदा पानी मेरे जल को दूषित कर देता है।
लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है। मेरे जल को शुद्ध करने के प्रयास आरंभ हो गए हैं। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा है जब मेरा जल वैसा ही स्वच्छ और निर्मल हो जाएगा जैसा गंगोत्री से निकलते समय रहता है।
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बातचीत के लिए
2. आपके निवास स्थान के आस-पास कौन-सी नदी/नदियाँ बहती है/हैं?
Ans. मेरे निवास स्थान के आस-पास गंगा नदी बहती है।
(विद्यार्थी अपने क्षेत्र के अनुसार नदी का नाम लिख सकते हैं।)
3. आपके घर में पानी कहाँ से आता है?
Ans. हमारे घर में पानी नल, हैंडपंप या जलापूर्ति विभाग द्वारा आता है।
4. आप नदियों के जल को प्रदूषित होने से किस प्रकार बचा सकते हैं? इस बारे में कक्षा में चर्चा कीजिए।
Ans.
- नदियों में कचरा नहीं डालेंगे।
- गंदा पानी नदी में नहीं बहाएँगे।
- प्लास्टिक का उपयोग कम करेंगे।
- लोगों को स्वच्छता के लिए जागरूक करेंगे।
पाठ से
1. निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर जल की बूँद का चित्र (💧) बनाइए। एक से अधिक विकल्प भी सही हो सकते हैं-
(क) “मेरा जन्म हिमालय की गोद में हुआ था।” इस वाक्य में ‘मेरा’ शब्द किसके लिए आया है?
(i) गोमुख
(ii) गंगा नदी (💧)
(iii) पर्वत
(iv) नगर
(ख) “लेकिन मुझे अब इस बात की प्रसन्नता है कि इस ओर लोगों का ध्यान गया है।” यहाँ किस ओर ध्यान जाने की बात कही गई है?
(i) गंगा में प्रदूषण की ओर (💧)
(ii) गंगा के चमकीले रंग की ओर
(iii) गंगा जल की पवित्रता की ओर (💧)
(iv) गंगा की धाराओं की ओर
(ग) जल प्रदूषण किन कारणों से होता है?
(i) कारखानों और नगरों द्वारा नदियों में डाले जाने वाले अपशिष्ट से (💧)
(ii) कारखानों के धुएँ से
(iii) नदी तथा तालाब में स्नान करने से (💧)
(iv) तेज आवाज में भोंपू बजाने से
(घ) “यहाँ यमुना से मेरा संगम होता है।” इस वाक्य में ‘संगम’ शब्द का भाव है-
(i) एक से अधिक नदियों का आपस में मिलना (💧)
(ii) विपरीत दिशा की ओर बहना
(iii) दो धाराओं में बँट जाना
(iv) दो धाराओं का मिलकर बहना (💧)
2. नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए –
(क) गंगा नदी के किनारे बसे कुछ नगरों के नाम लिखिए।
Ans. ऋषिकेश, हरिद्वार, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, पटना, भागलपुर, कोलकाता।
(ख) गंगा के तट पर बसे औद्योगिक नगरों से गंगा को क्या हानि हुई है?
Ans. कारखानों का गंदा पानी गंगा में मिलने से उसका जल प्रदूषित हो गया है।
(ग) कुंभ का मेला कब-कब और कहाँ-कहाँ लगता है?
Ans. कुंभ का मेला प्रत्येक बारह वर्ष बाद हरिद्वार और प्रयागराज में लगता है।
(घ) “गंगोत्री से निकलते समय मेरा चाँदी जैसा चमकीला रूप रहता है। किंतु मुझे दुख है कि काशी पहुँचते-पहुँचते मेरा चमकीला रंग मटमैला हो जाता है।”
उपर्युक्त वाक्य से संबंधित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(i) यहाँ पर चाँदी जैसे चमकीले रूप से क्या तात्पर्य है?
Ans. गंगा का जल बहुत स्वच्छ, निर्मल और चमकदार होता है।
(ii) काशी पहुँचते-पहुँचते गंगा का चमकीला रंग मटमैला क्यों हो जाता है?
Ans. कारखानों और शहरों का गंदा पानी मिलने से गंगा का जल प्रदूषित हो जाता है।
3. पाठ के आधार पर सही कथन के आगे (√) का और गलत कथन के आगे (x) का चिह्न लगाइए –
(क) गंगा के किनारे कई तीर्थ स्थान हैं। (√)
(ख) गंगा का जन्म अरावली की गोद में हुआ है। (x)
(ग) कारखानों का गंदा पानी गंगा के जल को दूषित कर रहा है। (√)
(घ) गंगा का एक नाम भागीरथी है। (√)
(ङ) पश्चिम बंगाल में गंगा की तीन धाराएँ हो जाती हैं। (x)