(कक्षा में अध्यापक का आगमन और सभी विद्यार्थियों द्वारा अभिवादन)
सभी विद्यार्थी – सुप्रभात अध्यापक जी!
अध्यापक – सुप्रभात बच्चो ! पिछली कक्षा में हमने चाँद और चंद्रयान के बारे में जाना था। आज हम सूर्य के बारे में कुछ बातचीत करेंगे। क्या आप लोग जानते हैं कि सूर्य क्या है?
वाणी – अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।
गौरव – हाँ, मैंने भी कुछ ऐसा ही सुना है।
राहुल – नहीं, सूर्य तो आग का एक गोला है!
सुमन – अध्यापक जी! सूरज एक ग्रह है।
रवि – नहीं, यह तो एक तारा है।

अध्यापक – उत्तम ! सूर्य एक तारा है। यह बहुत अधिक गरम भी है, इसलिए इसे लोग आग का गोला भी कहते हैं।
सभी विद्यार्थी – (आश्चर्य से) जी अध्यापक जी, यह बहुत गरम होगा!
ज्योति – सूरज पृथ्वी से बहुत दूर है, फिर भी कितनी गरमी देता है!
भास्कर – मुझे गरमी के मौसम में सूर्य बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगता।
सुमन – मुझे भी। पर सर्दियों में तो धूप से उठने का मन ही नहीं करता। मेरी नानी तो पूरे दिन धूप में रहती हैं। उन्हें बहुत सर्दी लगती है न, इसलिए !
अध्यापक – सूर्य इतना गरम क्यों है? क्या आप सबने कभी यह सोचा है?
दिनेश – सूर्य पर हमेशा आग जलती रहती है, इसलिए।
रवि – अगर ऐसा है तो वहाँ आग किसने जलाई होगी?
धरा – आप दोनों ठीक नहीं सोच रहे हैं। सूर्य पर गरमी आग के जलने से नहीं होती बल्कि सूर्य ऐसी गैसों से बना है जो बहुत गरम होती हैं। मुझे मेरी मौसी ने एक बार बताया था।
अध्यापक – सही कहा! सूर्य मुख्य रूप से हाइड्रोजन और हीलियम नाम की गैसों का एक विशाल गोला है।
साहिल – कितने बड़े नाम हैं! बोलने में भी कठिनाई हो रही है। हाई… ड्रजन… हेलम… (कुछ विद्यार्थी हँसते हैं।)
रवि – तो क्या हम चाँद की तरह सूर्य पर पर भी जा सकते हैं?। (अध्यापक की ओर अचरज से देखते हुए)
सुमन – वहाँ कैसे जाएँगे? जो जाएगा, वह जल नहीं जाएगा!
दिनेश – सूर्य तो बहुत गरम होगा, बहुत अधिक ! तभी तो वह चमकता रहता है। (आँखें बड़ी करके कहते हुए)
अध्यापक – हाँ, सूर्य तक पहुँचना आसान नहीं है। वह चंद्रमा की तरह हमारी पृथ्वी से पास नहीं है बल्कि बहुत दूर है। उसके भीतर हर समय आग जल रही है। वह कभी बुझती ही नहीं। जैसे चंद्रमा के रहस्य हैं, ठीक उसी प्रकार सूर्य के भी रहस्य हैं। इन्हीं रहस्यों का उद्घाटन करने के लिए हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण किया है।
कुछ विद्यार्थी – (एक साथ कौतूहल से) आदित्य-एल 1!
भास्कर – यह क्या है अध्यापक जी?
अध्यापक – आदित्य तुम ही तो हो। (मुस्कुराते हुए)
भास्कर – मैं कुछ समझा नहीं, अध्यापक जी।
अध्यापक – समझाता हूँ। आदित्य का अर्थ है- सूर्य। क्या आपको पता है, इसका एक अन्य नाम ‘भास्कर’ भी है। इसी तरह इस कक्षा में दो और आदित्य हैं। क्या आप लोग बता सकते हैं, मैं किनकी बात कर रहा हूँ?
राहुल – जी ‘दिनेश’ और ‘रवि’।
अध्यापक – बहुत अच्छा! आइए, आज हम लोग आदित्य-एल 1 से मिलते हैं।
वाणी – अध्यापक जी! क्या यह चंद्रयान के प्रकार का ही तो नहीं है?
अध्यापक – हाँ, आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है। इसका कार्य सूर्य के बारे में जानकारी जुटाना है, जैसे- यह किस समय कैसा होता है, इसके भीतर जलने वाली आग का ताप कितना है, इस ताप का प्रभाव आस-पास कैसा होता है या इसका प्रभाव हमारी पृथ्वी पर भी पड़ता है अथवा नहीं…।
पूर्वा – है? क्या यह सूर्य पर पहुँच गया है?
अध्यापक – सूर्य पर तो नहीं किंतु सूर्य से पर्याप्त दूरी पर रुककर इसने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं जिन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।
सुमन – अध्यापक जी, फिर भी यह सूर्य के पर्याप्त पास पहुँचकर चित्र कैसे भेज रहा है? उसकी इतनी गरमी से जल नहीं रहा?
अध्यापक – नहीं, सूर्य से आदित्य-एल 1 को कोई हानि नहीं पहुँच सकती क्योंकि यह एक सुरक्षित दूरी पर स्थित है और वह अपने स्थान से समय-समय पर उसके विभिन्न चित्र लेता रहता है।
भास्कर – यह तो एक अनन्य प्रकार का यंत्र है जो अपने को जलने भी नहीं दे रहा और इतने गरम सूर्य के चित्र भी ले रहा है!

ज्योति – आदित्य-एल 1 में ‘एल 1’ का क्या अर्थ है?
अध्यापक – एल 1 का अर्थ है- लगरांज 1…।
रवि – अध्यापक जी! लगरांज 1 क्या होता है?
अध्यापक – एल 1 अर्थात् लगरांज 1 बिंदु अंतरिक्ष का एक विशिष्ट स्थान होता है जो सूर्य और पृथ्वी के केंद्रों को जोड़ने वाली रेखा पर होता है। इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी की आकर्षण शक्तियाँ इस प्रकार संतुलित होती हैं कि इस स्थान पर प्रक्षिप्त कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ ही सूर्य की परिक्रमा करती जाती है। हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य अंतरिक्ष यान को इसी बिंदु पर प्रक्षिप्त कर दिया है जहाँ से वह सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ सूर्य के चित्र खींचता रहता है।
दीपक – अध्यापक जी, यह तो आपने बहुत ही रोचक बात बताई परंतु इस ‘लगरांज’ शब्द का क्या अर्थ है?
अध्यापक – वास्तव में ‘लगरांज’ 18वीं सदी में इटली का एक गणितज्ञ था जिसने इस विशिष्ट बिंदु के विषय में बताया था। इसीलिए इस बिंदु को उसके नाम से जाना जाता है। उसने इस प्रकार के चार और बिंदुओं का पता लगाया था, इसलिए इन पाँच बिंदुओं को एल 1, 2, 3, 4, 5 – इन पाँच नामों से जाना जाता है।
सुमन – अच्छा, अब मैं समझ गई कि क्यों ‘आदित्य’ के नाम के अंत में एल 1 लगाया गया है। पर यह अंतरिक्ष यान अंतरिक्ष में कब भेजा गया था?
अध्यापक – आदित्य-एल 1 का प्रक्षेपण 2 सितंबर 2023 को हमारे देश के अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया था। लगरांज बिंदु पर स्थित यह अंतरिक्ष यान लगभग 5 वर्ष तक सूर्य के चारों ओर घूमता हुआ उसके विभिन्न चित्र खींचता रहेगा जिनका अध्ययन करके हमारे वैज्ञानिक सूर्य के रहस्यों का पता लगाएँगे।
दीपक – बहुत अच्छा अध्यापक जी, इतनी मनोरंजक बातें सुनकर मुझे बहुत कौतूहल हो रहा है कि सूर्य कैसा दिखता होगा। आदित्य-एल 1 ने जो चित्र खींचे हैं, वे बहुत अच्छे होंगे। मैंने आज तक सूर्य का चित्र नहीं देखा।
अन्य विद्यार्थी – हमने भी नहीं देखा।
रफत – चाँद का देखा है… पृथ्वी का देखा है… चंद्रयान का देखा है… अपने बचपन का चित्र देखा है पर सूरज का तो मैंने कभी नहीं देखा।
दिनेश – मैंने तो अपने माता-पिता के बचपन के चित्र भी देखे हैं पर सूर्य का भी चित्र होता है, मुझे तो पता ही नहीं था। पिताजी ने सूर्य की ओर देखने के लिए मना किया है।
अध्यापक – सही कहा आपके पिताजी ने। सूर्य को कभी भी प्रत्यक्ष देखने का प्रयास मत करना बच्चो। यह आँखों के लिए ठीक भी नहीं है लेकिन आदित्य-एल । ने आप सभी की यह इच्छा सुन ली है। इसने सूर्य के ग्यारह रंगों के चित्र भेजे हैं जो देखने में बहुत सुंदर हैं। मैं उनका रंगीन चित्र भी आप सबके लिए लाया हूँ। (अध्यापक कक्षा में टैब/मोबाइल पर भिन्न-भिन्न समय पर लिए गए सूर्य के ग्यारह रंगों वाले चित्र दिखाते हैं।)

सिल्विया – ये तो सचमुच बहुत अद्भुत चित्र हैं। आदित्य यान इतने अच्छे चित्र लेता है, यह एक चमत्कार-सा लगता है। अध्यापक जी, चित्र लेने के अतिरिक्त आदित्य-एल 1 और क्या-क्या करेगा?
अध्यापक – बहुत अच्छा प्रश्न पूछा। सूर्य पर गैसों की टकराहट से बहुत विशाल विस्फोट होते हैं। इनसे बहुत सारी ऊर्जा निकलती है। जैसे धरती पर
आँधियाँ आती रहती हैं, वैसे ही सूर्य की ऊर्जा से भी आती रहती हैं। सूर्य पर आने वाली आँधियों और उससे पृथ्वी पर पड़ने वाले प्रभावों के विषय में आदित्य-एल 1 में लगे उपकरणों द्वारा हमें जानकारी मिलेगी।
कुछ विद्यार्थी – यह तो सचमुच बहुत अच्छा यंत्र है। (कक्षा में बातचीत होने लगती है।)
दीपक – अध्यापक जी, मुझे तो ये सब अद्भुत बातें जानकर बहुत आनंद आ रहा है। मैं तो बड़ा होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगा और दूर-दूर के तारों के विषय में पहूँगा और वहाँ अंतरिक्ष यान भेजूंगा।
सुमन – अध्यापक जी, मैं भी बड़ी होकर अंतरिक्ष वैज्ञानिक बनूँगी। मुझे आज के पाठ में बहुत आनंद आया। मैं तो ऐसा अंतरिक्ष यान बनाऊँगी जिसमें बैठकर मैं एल । बिंदु से सूर्य को स्वयं जाकर देख सकूँ।
अन्य विद्यार्थी – हम भी ऐसा ही अंतरिक्ष यान बनाएँगे !
अध्यापक – आप सब लोग बड़े मेधावी हैं। आप बहुत अच्छे वैज्ञानिक बनेंगे, मुझे पूरा विश्वास है। पर बच्चो, अपने अंतरिक्ष यान में मुझे ले जाना मत भूलना।
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बातचीत के लिए
1. आपने आकाश में अनेक तारे देखे होंगे। ऐसा कौन-सा तारा है जो हमें सुबह-सुबह जगाने का काम करता है? हमें इस तारे से कौन-से लाभ होते हैं?
Ans. सुबह-सुबह हमें जगाने वाला तारा सूर्य है।
लाभ:
● सर्दियों में उसकी धूप से गर्मी मिलती है।
● सूर्य हमें प्रकाश देता है।
● उसकी उष्णता से पृथ्वी पर जीवन संभव है।
● पौधे सूर्य के प्रकाश से भोजन बनाते हैं।
2. भारत में मनाए जाने वाले ऐसे त्योहारों या मेलों के बारे में अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए जिनका संबंध सूर्य अथवा चंद्रमा से है।
Ans.
● छठ पूजा (सूर्य को अर्घ्य देने का त्योहार)
● मकर संक्रांति (सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व)
● करवा चौथ (चंद्रमा को देखकर व्रत खोलना)
● शरद पूर्णिमा
● होली (चंद्र मास के अनुसार)
3. आपने कक्षा तीन की पाठ्यपुस्तक ‘वीणा, भाग ।’ में चंद्रयान पर पाठ पढ़ा है न! अपने सहपाठियों को चंद्रयान के बारे में कुछ याद करके बताइए।
Ans. चंद्रयान भारत का चंद्र मिशन है, जिसने चाँद की सतह की तस्वीरें लीं, वहाँ के तत्वों और क्रेटरों का अध्ययन किया। चंद्रयान-3 ने चाँद के दक्षिणी ध्रुव पर सफलतापूर्वक उतरकर भारत का नाम विश्व में ऊँचा किया।
4. चंद्रयान-3 की सफलता के बाद सूर्य का अध्ययन करने वाले यान आदित्य-एल । के विषय में आपने जो भी सुना, पढ़ा या देखा है, बताइए।
Ans. आदित्य-एल 1 भारत का पहला सौर मिशन है। इसे 2 सितंबर 2023 को लॉन्च किया गया। यह अंतरिक्ष में लगरांज-1 बिंदु पर जाकर सूर्य के ग्यारह रंगों में चित्र ले रहा है और सूर्य के ताप, गैसों, विकिरण और सौर तूफानों का अध्ययन कर रहा है।
5. नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए और बताइए कि –
(क) इसमें क्या दिखाया गया है?
Ans. इसमें इंद्रधनुष दिखाया गया है।
(ख) क्या आपने इसे कभी देखा है? इसमें कितने रंग होते हैं? अपनी लेखन-पुस्तिका में उन रंगों के नाम क्रम से लिखिए।
Ans. इंद्रधनुष में सात रंग होते हैं:
बैंगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी, लाल
(ग) आकाश में ऐसा कब और कैसे होता है?
Ans. जब बारिश के बाद सूर्य की किरणें जल की बूँदों पर गिरती हैं, तब आकाश में इंद्रधनुष बनता है।
पाठ के भीतर
निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर पर सूर्य का चित्र () बनाइए। यहाँ एक से अधिक विकल्प सही हो सकते हैं।
1. सूरज मुख्य रूप से किन गैसों का एक विशाल गोला है?
(क) हाइड्रोजन (☀)
(ख) नाइट्रोजन
(ग) ऑक्सीजन
(घ) हीलियम (☀)
2. राहुल के अनुसार सूर्य एक गोला है-
(क) रुई का
(ख) ऊन का
(ग) आग का (☀)
(घ) बर्फ का
3. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कितने रंगों के चित्र भेजे हैं?
(क) आठ
(ख) सात
(ग) दस
(घ) ग्यारह (☀)
4. आदित्य-एल 1 मिशन का कार्य कौन-सी जानकारी जुटाना है?
(क) सूर्य किस समय कैसा होता है (☀)
(ख) सूर्य के भीतर जलने वाली आग का ताप कैसा है (☀)
(ग) चाँद के रहस्य जुटाना
(ख) सूर्य के ताप का प्रभाव कैसा होता है (☀)
सोचिए और लिखिए
1. पाठ से बनी समझ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए –
(क) हमारे वैज्ञानिकों ने आदित्य-एल 1 का निर्माण क्यों किया?
Ans. वैज्ञानिकों ने सूर्य के रहस्यों—उसके ताप, गैसों, ऊर्जा, सौर आँधियों और उनके पृथ्वी पर असर—का अध्ययन करने और सूर्य के चित्र प्राप्त करने के लिए आदित्य-एल 1 का निर्माण किया।
(ख) “आदित्य-एल 1 चंद्रयान के प्रकार का ही एक यान है।” अध्यापक ने ऐसा अपने विद्यार्थियों से क्यों कहा?
Ans. क्योंकि आदित्य-एल 1 भी चंद्रयान की तरह एक अंतरिक्ष यान है, जिसे अंतरिक्ष में भेजा गया है और जो किसी खगोलीय पिंड (यहाँ सूर्य) का अध्ययन करता है।
(ग) आदित्य-एल 1 में ‘एल 1’ क्या है और उसका क्या कार्य है?
Ans. एल 1 एक लगरांज बिंदु है जहाँ सूर्य और पृथ्वी की गुरुत्वाकर्षण शक्तियाँ संतुलित रहती हैं। यहाँ रखा गया यान पृथ्वी की तरह सूर्य की परिक्रमा करता है और सुरक्षित दूरी से सूर्य का अध्ययन कर सकता है।
(घ) “अध्यापक जी! मैंने सुना है कि सूर्य सात घोड़ों के रथ पर आकाश में यात्रा करने वाला एक राजा है।” वाणी ने अध्यापक से ऐसा क्यों कहा होगा?
Ans. क्योंकि प्राचीन कथाओं व पुराणों में सूर्य देव को सात घोड़ों के रथ पर सवार बताया गया है। वाणी ने वही कहानी सुन रखी थी।
(ङ) निम्नलिखित वाक्यों में नीचे दिए गए शब्दों का प्रयोग करते हुए रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए –
i. हम और बड़े होकर वैज्ञानिक बनेंगे।
ii. रवि अध्यापक की ओर अचरज से देखता है।
iii. आदित्य-एल 1 ने सूर्य के कुछ अद्भुत चित्र भेजे हैं, उन्हें यदि आप लोग देखेंगे तो देखते ही रह जाएँगे।
iv. भारत के ओडिशा के पुरी जिले में सूर्य देवता का एक बहुत सुंदर मंदिर बना हुआ है।
v. अध्यापक ने भास्कर से कहा कि इस कक्षा में दो और आदित्य हैं।