हरियाणा के किसी गाँव में हीरासिंह नामक एक किसान था। उसकी समझ में यह नहीं आता था कि वह अपने बीवी-बच्चों और अपनी प्यारी गाय सुंदरिया की परवरिश कैसे करे?
सुंदरिया गाय डील-डौल में काफी बड़ी थी। उसे देखकर लोगों को ईर्ष्या होती थी। गरीबी के कारण हीरासिंह गाय का चारा भी नहीं जुटा पाता था। खाने-पीने की कमी होने लगी तो हीरासिंह ने सोचा ‘मैं सुंदरिया को बेच दूँ?’ पर उसका बड़ा लड़का जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहा करता था। इसलिए वह उसे बेचने से डरता था।
नौकरी की तलाश में वह दिल्ली चला आया। वहाँ उसे एक सेठ के यहाँ चौकीदार की नौकरी मिल गई। एक रोज सेठ ने हीरासिंह से कहा- “तुम तो हरियाणा के रहने वाले हो। वहाँ की गायें अच्छी होती हैं। एक गाय का बंदोबस्त कर दो।”
हीरासिंह सुंदरिया की बात सोचने लगा। उसने कहा – “एक है मेरी निगाह में।”
सेठ ने कहा- “कैसी गाय है?”
हीरासिंह बोला “गाय तो ऐसी है कि दूध देने में कामधेनु। पंद्रह सेर दूध उसके तले उतरता है। उसके दो सौ रुपए तक लग चुके हैं।”
सेठ बोला “चलो, पाँच हम ज्यादा दे देंगे?”

हीरासिंह ने तब साफ-साफ ही कह दिया “सेठ जी, सच यह है कि वह गाय अपनी ही है।”
सेठ जी ने खुश होकर कहा- “तब तो अच्छी बात है। तुम्हारे लिए जैसे दो सौ, वैसे दो सौ पाँच।”
हीरासिंह लाज से गड़ गया कि वह कैसे बताए कि सुंदरिया उसके परिवार का अंग है। पर उसने सोचा कि सेठ के यहाँ रहकर गाय तो उसकी आँखों के आगे रहेगी। सेठ ने सौ रुपए मँगाकर उसी वक्त हीरासिंह को थमा दिए। कहा “देखो हीरासिंह, आज ही चले जाओ। कब तक वापस आ जाओगे?”
हीरासिंह ने कहा- “पाँच दिन तो लगेंगे ही।” सेठ जी ने कहा “पर ज्यादा दिन मत लगाना।”
हीरासिंह उसी रोज गाय लेने चला गया। जैसे-तैसे जवाहरसिंह को समझा-बुझाकर वह गाय ले आया। गाय देखकर सेठ बहुत खुश हुए। सचमुच वैसी सुंदर, स्वस्थ गाय उन्होंने अब तक न देखी थी। हीरासिंह ने खुद उसे सानी-पानी दिया, सहलाया और अपने हाथों से दुहा। दूध पंद्रह सेर से कुछ ऊपर ही बैठा। सेठ जी ने सौ के ऊपर सात रुपए उसे और दे दिए। सौ रुपए वह पहले ही ले चुका था। घोसी को बुलाकर सेठ जी ने गाय उसके सिपुर्द कर दी।

रुपए तो ले लिए लेकिन हीरासिंह का जी भरा जा रहा था। जब घोसी गाय को ले जाने लगा, तब गाय उसके साथ जाना ही नहीं चाहती थी।
हीरासिंह बोला- “गाय की नौकरी पर मुझे लगा दीजिए। चाहे तनख्वाह कम कर दीजिए।”
सेठ जी ने कहा- “हीरासिंह, तुम्हारे जैसा ईमानदार चौकीदार हमें दूसरा कहाँ मिलेगा? तनख्वाह तो तुम्हारी हम एक रुपया और भी बढ़ा सकते हैं, पर तुमको ड्योढ़ी पर ही रहना होगा।”
हीरासिंह क्या कहता! उसने गाय को पुचकारकर कहा- “सुंदरिया जाओ, जाओ।” गाय ने उसकी ओर देखा। जैसे पूछना चाहती थी “क्या सचमुच ही इसके साथ चली जाऊँ?”
हीरासिंह ने उसे थपथपाया तो वह घोसी के पीछे-पीछे चली गई। हीरासिंह एकटक देखता रहा। लेकिन अगले दिन गड़बड़ हुई। सेठ जी ने हीरासिंह को बुलाकर कहा- “तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा? गाय से सवेरे पाँच सेर दूध भी तो नहीं उतरा।”

हीरासिंह ने कहा- “मैंने खुद पंद्रह सेर से ऊपर दूध दुहकर आपको दिया था।”
सेठ जी ने कहा- “तो जाकर गाय को देखो।”
हीरासिंह गाय के पास गया। पुचकारकर कहा- “सुंदरिया, मेरी रुसवाई क्यों कराती है?”
गाय ने मुँह ऊपर उठाया मानो पूछ रही हो “बोलो मुझे क्या करना है?” हीरासिंह ने घोसी से कहा “बालटी लाओ।”
घोसी ने कहा- “मैं तो पहले ही दुह चुका हूँ।”
“पर तुम बालटी तो लाओ।” हीरासिंह बोला। उसके बाद साढ़े तेरह सेर दूध उसके तले से तोलकर हीरासिंह ने घोसी को दे दिया। कहा- “यह दूध सेठ जी को दे देना।” फिर गाय के गले पर सिर रखकर बोला – “सुंदरिया, देख… मेरी ओछी मत करा। मैं दूर हूँ तो क्या! इसमें मुझे सुख है?”

गाय मुँह झुकाए वैसी ही खड़ी रही। दूसरे दिन फिर वही हुआ। लाख कोशिश के बाद भी गाय ने पूरा दूध नहीं दिया। सेठ जी ने हीरासिंह को बुलाकर कहा- “क्यों हीरासिंह, यह क्या है? यह तो सरासर धोखा है।” हीरासिंह चुप रहा।
सेठ जी ने कहा- “ऐसा ही है तो ले जाओ अपनी गाय और मेरे रुपए वापस करो।” लेकिन रुपए हीरासिंह गाँव भेज चुका था। उसमें से काफी रुपया मकान की मरम्मत में लग गया था। अब सेठ जी को देने के लिए रुपए कहाँ से लाए?
उसे चुप देख, सेठ जी बोले- “अच्छा, तनख्वाह में से रकम कटती जाएगी। जब पूरी हो जाएगी तो अपनी गाय ले जाना।”
अगले दिन सवेरे बहुत-सा दूध ड्योढ़ी में बिखरा हुआ था। उससे पहली शाम गाय ने दूध देने से बिलकुल इनकार कर दिया था।
सेठ जी ने पूछा- “हीरा, यह क्या बात है?” हीरासिंह सिर झुकाकर रह गया।
फिर उसने पूछा- “रात गाय खुली तो नहीं रह गई थी? आप इसकी खबर तो लीजिए।”
घोसी को बुलाकर पूछा गया तो उसने कहा- “कल रात मैंने गाय को खुद खूँटे से बाँधा था।”
हीरासिंह ने कहा- “नहीं, ऐसा नहीं हो सकता। गाय रात को आकर ड्योढ़ी में खड़ी रही है और अपना दूध गिरा गई है।”
सेठ जी बोले- “ऐसी मसनूई बातें औरों से कहना। जाओ, खबर लगाओ कि वह कौन आदमी है, जिसकी करतूत है?”
हीरासिंह चुपचाप अपनी कोठरी में जाकर लुढ़क गया। कब आँख लगी, कुछ पता नहीं। रात को अचानक लगा कि दरवाजे की ओर से रगड़ की आवाज आई। उठकर दरवाजा खोला। देखा, सुंदरिया खड़ी है। मुँह ऊपर उठाकर सुंदरिया उसे अपराधी की आँखों से देख रही थी। मानो क्षमा याचना कर रही हो। जैसे कहती हो- ‘मैं अपराधिनी हूँ। लेकिन मुझे क्षमा कर देना। मैं बड़ी दुखिया हूँ।’

देखकर हीरासिंह विहवल हो उठा। उसके आँस रोके न रुके। वह सुंदरिया की गर्दन से लिपट देर तक सिसकता रहा।
अगले सवेरे उसने सेठ जी से कहा-
“आप मुझसे जितने महीने चाहें कसकर चाकरी करवाएँ, पर गाय आज ही यहाँ से गाँव चली जाएगी। रुपए जब आपके चुकता हो जाएँ, मुझसे कह दीजिएगा। तब मैं भी छुट्टी कर लूँगा।”
और सेठ जी कुछ कहें, इससे पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर चल दिया।
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बातचीत के लिए
1. जवाहरसिंह अपनी गाय को मौसी कहकर बुलाता है। आप अपने घर या आस-पास के पशु-पक्षियों को क्या कहकर पुकारते हैं?
Ans. मैं अपने घर के कुत्ते को प्यार से शेरू और पास की गाय को गौ-माता कहकर पुकारता हूँ। पक्षियों को दाना डालते समय प्यार से बुलाता हूँ।
2. सुंदरिया के दूर चले जाने के बाद जवाहरसिंह को कैसा लगा होगा? जब आपका कोई प्रिय आपसे दूर हो जाए तो आपको कैसा लगता है?
Ans. सुंदरिया के दूर चले जाने के बाद जवाहरसिंह को बहुत दुःख और खालीपन महसूस हुआ होगा। जब मेरा कोई प्रिय मुझसे दूर हो जाता है तो मुझे भी उदासी लगती है और मन बेचैन रहता है।
3. जवाहरसिंह सुंदरिया की देखभाल के लिए क्या-क्या करता होगा?
Ans. जवाहरसिंह सुंदरिया को चारा-पानी देता होगा, उसे सहलाता होगा, समय पर दुहता होगा और उसकी बीमारी में देखभाल करता होगा।
4. आप अपने आस-पास के पशु-पक्षियों के लिए क्या-क्या करते हैं?
Ans. मैं पशु-पक्षियों के लिए पानी रखता हूँ, पक्षियों को दाना डालता हूँ और किसी घायल पशु को देखकर बड़ों को सूचना देता हूँ।
पाठ से
नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर पर (✔) का चिह्न बनाइए। प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी सही हो सकते हैं-
1. लोग सुंदरिया को देखकर ईर्ष्या क्यों करते थे?
(क) सुंदरिया को खाने-पीने को बहुत कुछ मिलता था।
(ख) सुंदरिया बहुत आकर्षक थी। (✔)
(ग) सुंदरिया बहुत दूध देती थी। (✔)
(घ) सुंदरिया सभी से प्रेम करती थी।
2. हीरासिंह के मन में सुंदरिया को बेचने की बात क्यों आई?
(क) सुंदरिया सभी को परेशान करने लगी थी।
(ख) सुंदरिया के लिए चारे का प्रबंध करना कठिन हो गया था। (✔)
(ग) सुंदरिया हीरासिंह के घर नहीं रहना चाहती थी।
(घ) सुंदरिया पड़ोसियों को परेशान करती थी।
3. हीरासिंह ने स्वयं को गाय की नौकरी पर लगाने की बात क्यों कही?
(क) सुंदरिया को ठीक से चारा नहीं मिलता था।
(ख) वह गाय से बिछोह सहन नहीं कर पा रहा था। (✔)
(ग) उसे रुपयों की आवश्यकता थी।
(घ) गाय घोसी के व्यवहार से प्रसन्न नहीं थी।
4. गाय घोसी के साथ क्यों नहीं जाना चाहती थी?
(क) गाय हीरासिंह और उसके परिवार से अलग नहीं होना चाहती थी। (✔)
(ख) गाय को भय था कि घोसी उसे स्नेह से नहीं पालेगा। (✔)
(ग) गाय को अपने गाँव के सभी लोगों की याद आ रही थी।
(घ) गाय बीमार थी और चल नहीं पा रही थी।
सोचिए और लिखिए
1. हीरासिंह गाय को बेचने से क्यों डर रहा था?
Ans. हीरासिंह गाय को बेचने से इसलिए डर रहा था क्योंकि सुंदरिया उसके परिवार का सदस्य थी और उसका बेटा उसे मौसी कहकर बुलाता था।
2. सेठ हीरासिंह की गाय को देखकर क्यों प्रसन्न हुआ?
Ans. सेठ गाय की सुंदरता, स्वास्थ्य और अधिक दूध देने की क्षमता देखकर बहुत प्रसन्न हुआ।
3. “तुमने मुझे धोखे में क्यों रखा?” सेठ ने हीरासिंह से ऐसा क्यों कहा?
Ans. सेठ ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि गाय उससे उतना दूध नहीं दे रही थी जितना हीरासिंह ने बताया था।
4. सेठ के कुछ कहने से पहले ही हीरासिंह गाय को लेकर क्यों चल दिया?
Ans. हीरासिंह गाय को दुःखी और परेशान देखकर उसे अपने गाँव ले जाना चाहता था, इसलिए वह बिना कुछ सुने गाय को लेकर चल दिया।
समझ और अनुभव
1. क्या आपको लगता है कि पशु-पक्षी भी हमारी भावनाएँ समझते हैं? कोई अनुभव साझा कीजिए।
Ans. हाँ, पशु-पक्षी हमारी भावनाएँ समझते हैं। जब हम उन्हें प्यार करते हैं तो वे पास आ जाते हैं और दुःखी होने पर हमारे आस-पास मंडराने लगते हैं।
2. जवाहरसिंह सुंदरिया को मौसी कहकर क्यों संबोधित करता होगा?
Ans. वह सुंदरिया से बहुत प्रेम करता था और उसे परिवार का सदस्य मानता था, इसलिए मौसी कहकर बुलाता था।
3. हम देखते हैं कि नगरों में बड़े पशुओं (गाय, भैंस, ऊँट आदि) को पालतू बनाने वाले लोगों की संख्या बहुत कम है। आपको इसके क्या कारण लगते हैं?
Ans. नगरों में जगह की कमी, चारे-पानी की समस्या और व्यस्त जीवन के कारण लोग बड़े पशु नहीं पाल पाते।
4. पशु-पक्षी मनुष्य की तरह बोल तो नहीं पाते परंतु वे भी आपस में अपनी बातें करते होंगे। क्या आप इस बात से सहमत हैं? अपने उत्तर के लिए उदाहरण भी दीजिए।
Ans. हाँ, मैं सहमत हूँ। कुत्तों का भौंकना, पक्षियों का चहचहाना और गाय का रंभाना उनके आपसी संवाद के उदाहरण हैं।
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