किरन : पाठ -1

किरन

अरी किरन तू उठकर इतनीजल्दी आज चली आई।मैं तो बिस्तर में से अपनेअब तक निकल नहीं पाई। कल तो तेरे साथ शाम तकखेल बहुत से …

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