हवा : पाठ -17
ऊपर-नीचे दाएँ-बाएँ,हवा चली साँय-साँय। मुन्नी को छेड़कर,चढ़ गई पेड़ पर। हाथ नहीं आऊँगी,दूर मैं उड़ जाऊँगी। मुन्नी बोली हँसकर,हवा रानी बस कर। पकड़ तुझे मैं …
ऊपर-नीचे दाएँ-बाएँ,हवा चली साँय-साँय। मुन्नी को छेड़कर,चढ़ गई पेड़ पर। हाथ नहीं आऊँगी,दूर मैं उड़ जाऊँगी। मुन्नी बोली हँसकर,हवा रानी बस कर। पकड़ तुझे मैं …