U.P Board Class 10 Sanskrit 818 HO Question Paper 2024

U.P Board Class 10 Sanskrit 818 HO Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
संस्कृत
समय: तीन घण्टे 15 मिनट  पूर्णांक: 70

निर्देश:

i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

ii) यह प्रश्नपत्र दो खण्डों, खण्ड अ तथा खण्ड ब में विभक्त है।

iii) खण्ड अ में 1 अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके उत्तर ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर नीले अथवा काले बाल प्वाइंट पेन से सही विकल्प वाले गोले को पूर्ण रूप से भरकर चिह्नित करें।

iv) खण्ड अ के प्रत्येक प्रश्न का निर्देश पढ़कर केवल प्रदत्त ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर ही उत्तर दें। ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा ड्राइटनर का प्रयोग न करें।

v) प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।

vi) खण्ड – ब में 50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न हैं।

vii) खण्ड – ब में सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ ही करें। प्रत्येक उपभाग नये पृष्ठ से प्रारम्भ किये जायें।

viii) प्रथम प्रश्न से आरम्भ कीजिए तथा अन्तिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो उस पर समय नष्ट न कीजिए ।

खण्ड अ

(वस्तुनिष्ठ प्रश्न)
उपखण्ड क

प्रश्न सं. 1 एवं 2 गद्यांश आधारित प्रश्न हैं।

गद्यांश को ध्यान से पढ़िए और उत्तर का चयन कीजिए।

एवमेव देशान्तरादपि बहवः पक्षिणोऽत्रागत्य प्रवासं कुर्वन्ति। रूमप्रदेशस्य साडर्वाग्याप्रान्तात् सहस्त्रा विहगाः शीतकाले भारतस्य भरतपुरनिकटस्थे घानापक्षिविहारम् प्रयागस्थितं ग‌ङ्गायमुनासङ्गमं च आगच्छन्ति ।

1. उक्तगद्यांशस्य शीर्षकः अस्ति :

(A) नैतिकमूल्यानि
(B) जीवनं निहितं वने
(C) उद्भिज-परिषद्
(D) कविकुलगुरुः कालिदासः

Ans. (B) जीवनं निहितं वने

2. साइबेरियाप्रान्तः कस्मिन् देशे विद्यते ?

(A) रूसदेशे
(B) भारतदेशे
(C) बङ्गदेशे
(D) अमेरिकादेशे

Ans. (A) रूसदेशे

3. रवीन्द्रनाथस्य जन्म कुत्र अभवत् ?

(A) दिल्लीनगरे
(B) कलिकातानगरे
(C) पटनानगरे
(D) लखनऊनगरे

Ans. (B) कलिकातानगरे

4. कस्य बुद्धिः चलति ?

(A) सक्तस्य
(B) असक्तस्य
(C) विरक्तस्य
(D) गतस्य

Ans. (C) विरक्तस्य

5. धीमतां कालो गच्छति :

(A) निद्रया
(B) कलहेन
(C) काव्यशास्त्रविनोदेन
(D) व्यसनेन

Ans. (C) काव्यशास्त्रविनोदेन

6. श्रद्धावान् किं लभते ?

(A) पूजनम्
(B) ज्ञानम्
(C) गमनम्
(D) ध्यानम्

Ans. (B) ज्ञानम्

7. कस्य मार्गः नास्ति ?

(A) वृक्षस्य
(B) भूतस्य
(C) आरोगस्य
(D) अदृष्टेः

Ans. (D) अदृष्टेः

8. सुपारगः कः आसीत् ?

(A) नौसारथिः
(B) सारथिः
(C) वणिक्
(D) पथिकः

Ans. (C) वणिक्

9. आफताबः कस्य पाठस्य पात्रः अस्ति ?

(A) यौतुकं पापसञ्चयः
(B) वयं भारतीयाः
(C) कारुणिको जीमूतवाहनः
(D) महात्मनः संस्मरणानि

Ans. (A) यौतुकं पापसञ्चयः

10. रमानाथाय रक्तम् अद्दात् ?

(A) रम्भा
(B) चपला
(C) विमला
(D) सुमेधा

Ans. (C) विमला

11. ‘एच’ प्रत्याहार के वर्ण हैं:

(A) ए, ओ
(B) अ, इ, उ
(C) ए, ओ, ऐ, औ
(D) ए, ओ, ऋ, लु

Ans. (A) ए, ओ

12. ‘द’ का उच्चारण स्थान है:

(A) दन्त
(B) मूर्धा
(C) तालु
(D) कण्ठ

Ans. (A) दन्त

13. ‘त्वं पठ’ में सन्धि है :

(A) परसवर्ण सन्धि
(B) ष्टुत्व सन्धि
(C) श्चुत्व सन्धि
(D) अनुस्वार सन्धि

Ans. (C) श्चुत्व सन्धि

14. ‘सङ्कल्पः’ का सन्धि-विच्छेद है:

(A) सद् कल्पः
(B) स + कल्पः
(C) सं + कल्पः
(D) सः कल्पः

Ans. (C) सं + कल्पः

15. ‘भगवते’ पद किस विभक्ति एवं वचन का रूप है?

(A) द्वितीया विभक्ति, बहुवचन
(B) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन
(C) तृतीया विभक्ति, द्विवचन
(D) पंचमी विभक्ति, एकवचन

Ans. (B) चतुर्थी विभक्ति, एकवचन

16. ‘सरित्’ पद का तृतीया विभक्ति एकवचन का रूप है :

(A) सरितम्
(B) सरिता
(C) सरितः
(D) सरिते

Ans. (B) सरिता

17. ‘नश्यथ’ रूप किस लकार का है ?

(A) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, एकवचन
(B) लोट्लकार, उत्तम पुरुष, बहुवचन
(C) लट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन
(D) लृट्लकार, प्रथम पुरुष, एकवचन

Ans. (C) लट्लकार, मध्यम पुरुष, बहुवचन

18. ‘पास्यसि’ धातु रूप किम लकार का है

(A) लृट्लकार
(B) लट्लकार
(C) लोट्लकार
(D) लङ् लकार

Ans. (A) लृट्लकार

19. ‘प्रत्येकम’ में समास है-

(A) कर्मधारय समास
(B) बहुब्रीहि समास
(C) द्विगु समास
(D) अव्ययीभाव समास

Ans. (D) अव्ययीभाव समास

20. ‘नीलकण्ठ का ममास विग्रह है

(A) नीलः कण्ठः यस्य सः
(B) नीलम् कण्ठं यस्य सः
(C) नीलस्य कण्ठस्य यस्य सः
(D) इनमें से कोई नहीं

Ans. (A) नीलः कण्ठः यस्य सः

खण्ड ब

(वर्णनात्मक प्रश्न)
उपखण्ड क

निर्देश: सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

21. निम्नलिखित गद्यांशों में से किसी एक गद्यांश का हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

अस्य हृदि महात्मानं प्रति बहुरुचिरासीत् । तस्य विचारेषु ईश्वरस्य सम्मुखे नरनार्यों समाने स्तः । तेषु श्रेष्ठता लघुता अशोभनीया विद्यते । दलितजनानामसहायानाञ्च न्यायार्थ महापुरुषाऽयं ‘सत्यशोधकसमाजम्’ स्थापितवान् । अस्य सामाजिकसेवाकार्य विलोक्य अष्टाशीन्यधिकाष्टादशशततमे ख्रीष्टान्दे (1888 ई.) मुम्बईनगरस्य एका विशालसभा तं ‘महात्मा’ इत्युपाधिना अलंकृतवती ।
Ans. उसके हृदय में महात्माओं के प्रति बहुत गहरी श्रद्धा थी। उसके विचारों में ईश्वर के सामने पुरुष और स्त्री समान हैं। उनमें ऊँच-नीच या श्रेष्ठता-हीनता का भाव शोभनीय नहीं है। दलितों और असहाय लोगों को न्याय दिलाने के लिए इस महापुरुष ने ‘सत्यशोधक समाज’ की स्थापना की। उसके सामाजिक सेवा कार्यों को देखकर सन् 1888 ई० में मुंबई नगर की एक विशाल सभा ने उसे ‘महात्मा’ की उपाधि से सम्मानित किया।

(ख) कदाचित् एवमपि दृश्यते यत्समाजे प्रचलिता रूढिः समेषां कृते हितकरी न भवति । अतः प्रबुद्धाः विद्वांसः तस्या रूढेः विरोधमपि कुर्वन्ति। परं तैः आचरणस्य व्यवहारे नवीनः आदर्शः स्थाप्यते । यः कालान्तरे समाजस्य कृते हितकरः भवति । परं वस्तुतः यानि नैतिकमूल्यानि सन्ति । तेषु परिवर्तनं न भवति । यथा सनातनो धर्मः न परिवर्तते तथा नैतिकमूल्यान्यपि स्थिराणि एव ।
Ans. कभी-कभी ऐसा भी देखा जाता है कि समाज में प्रचलित रूढ़ियाँ सभी के लिए हितकारी नहीं होतीं। इसलिए जागरूक विद्वान लोग उन रूढ़ियों का विरोध भी करते हैं। लेकिन वे अपने आचरण और व्यवहार में नए आदर्श स्थापित करते हैं, जो आगे चलकर समाज के लिए लाभदायक सिद्ध होते हैं। परन्तु वास्तव में जो नैतिक मूल्य होते हैं, उनमें परिवर्तन नहीं होता। जैसे सनातन धर्म नहीं बदलता, वैसे ही नैतिक मूल्य भी स्थिर रहते हैं।

22. निम्नलिखित पाठों में से किसी एक पाठ का सारांश हिन्दी में लिखिए –

(क) मदनमोहनमालवीयः
Ans.
मदनमोहन मालवीय भारत के महान राष्ट्रभक्त, समाज सुधारक और शिक्षाविद् थे। उनका जन्म प्रयाग में हुआ। वे उच्च नैतिक आदर्शों वाले, सरल स्वभाव के और धर्मनिष्ठ व्यक्ति थे। उन्होंने भारतीय संस्कृति, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना के विकास के लिए जीवन भर कार्य किया। काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना उनका सबसे महान कार्य माना जाता है। उन्होंने अस्पृश्यता, अज्ञान और सामाजिक कुरीतियों का विरोध किया तथा समाज में समानता और सद्भाव का संदेश दिया। इसलिए उन्हें श्रद्धा से ‘महामना’ कहा जाता है।

(ख) नैतिकमुल्यानि
Ans.
नैतिक मूल्य मानव जीवन की आधारशिला हैं। सत्य, अहिंसा, करुणा, परोपकार, सदाचार और संयम जैसे गुण समाज को सही दिशा प्रदान करते हैं। समय के साथ समाज की परम्पराएँ और रीति-रिवाज बदल सकते हैं, लेकिन नैतिक मूल्यों का महत्व सदैव बना रहता है। नैतिक मूल्य मनुष्य के चरित्र का निर्माण करते हैं और उसे सही-गलत का ज्ञान कराते हैं। इनके पालन से व्यक्ति, समाज और राष्ट्र का कल्याण होता है। इसलिए नैतिक मूल्यों को अपनाना प्रत्येक मानव का कर्तव्य है।

(ग) कविकुलगुरुः कालिदासः
Ans.
कालिदास संस्कृत साहित्य के महान कवि और नाटककार थे, जिन्हें ‘कविकुलगुरु’ कहा जाता है। उनकी रचनाओं में प्रकृति-चित्रण, सौन्दर्यबोध और मानवीय संवेदनाएँ अत्यन्त मधुर रूप में प्रकट होती हैं। अभिज्ञानशाकुन्तलम्, मेघदूतम्, रघुवंशम् आदि उनकी प्रसिद्ध कृतियाँ हैं। उनकी भाषा सरल, अलंकारयुक्त और भावपूर्ण है। कालिदास ने भारतीय संस्कृति और जीवन मूल्यों को अपनी रचनाओं के माध्यम से अमर बना दिया। वे आज भी विश्व के महान कवियों में गिने जाते हैं।

23. निम्नलिखित श्लोकों में से किसी एक श्लोक की हिन्दी में व्याख्या कीजिए:

(क) यो दुर्लभतरं प्राप्य मानुषं द्विषते नरः ।
धर्मावमन्ता कामात्मा भवेत् स खलु वञ्चते ।।
Ans.
इस श्लोक में कवि मानव जीवन के महत्व को बताता है। कवि कहता है कि मनुष्य जन्म अत्यन्त दुर्लभ है। यदि कोई व्यक्ति ऐसा बहुमूल्य मानव जीवन पाकर भी धर्म का तिरस्कार करता है और केवल भोग-विलास में लिप्त रहता है, तो वह वास्तव में स्वयं को ही धोखा देता है। ऐसा व्यक्ति अपने जीवन का उद्देश्य नहीं समझ पाता और अपने कर्मों से अपना ही विनाश करता है। इसलिए मनुष्य को धर्म और सदाचार के मार्ग पर चलना चाहिए।

(ख) लक्ष्मीर्नया याचकदुःखहारिणी विद्या न याप्यच्युतक्तिकारिणी ।
पुत्रो न यः पण्डितमण्डलाग्रणीः सा नैव सा नैव स नैव नैव ।।
Ans.
इस श्लोक में कवि सच्ची सम्पन्नता का वर्णन करता है। कवि के अनुसार वह लक्ष्मी व्यर्थ है जो जरूरतमंदों के दुःख को दूर न करे। वह विद्या निरर्थक है जो विनय और सदाचार उत्पन्न न करे। वह पुत्र भी पुत्र नहीं कहलाता जो विद्वानों में श्रेष्ठ न बने। कवि अंत में स्पष्ट करता है कि जो व्यक्ति इन गुणों से रहित है, वह वास्तव में न लक्ष्मी है, न विद्या है और न ही सच्चा पुत्र। इससे यह शिक्षा मिलती है कि धन, ज्ञान और संतान तभी सार्थक हैं जब वे सद्गुणों से युक्त हों।

24. निम्नलिखित सूक्तियों में से किसी एक सूक्ति की हिन्दी में व्याख्या कीजिए:

(क) क्षीयन्ते खलु भूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम् ।
Ans.
इस सूक्ति का अर्थ है कि आभूषण समय के साथ नष्ट हो जाते हैं, घिस जाते हैं या खो भी सकते हैं, परन्तु वाणी का आभूषण अर्थात् मधुर, सत्य और शिष्ट भाषा कभी नष्ट नहीं होती। सुशील वाणी मनुष्य के व्यक्तित्व को सदा सुशोभित करती है। इसलिए भौतिक आभूषणों की अपेक्षा अच्छी वाणी ही सच्चा और स्थायी आभूषण है।

(ख) पादैः पिबति पादपः ।
Ans.
इस सूक्ति का भाव यह है कि वृक्ष अपने पैरों अर्थात् जड़ों के माध्यम से जल को ग्रहण करता है। इससे यह शिक्षा मिलती है कि जैसे वृक्ष नीचे से जल लेकर ऊपर तक फल-फूल देता है, वैसे ही मनुष्य को भी विनम्र रहकर ज्ञान और सद्गुण ग्रहण करने चाहिए तथा उनका उपयोग समाज के हित में करना चाहिए।

(ग) एकाकी चिन्तयानो हि परं श्रेयोऽधिगच्छति ।
Ans.
इस सूक्ति का अर्थ है कि जो व्यक्ति एकान्त में बैठकर गहन चिन्तन करता है, वह श्रेष्ठ लक्ष्य को प्राप्त करता है। एकान्त में मनुष्य शांत होकर आत्ममंथन करता है, जिससे उसे सही दिशा और उत्तम मार्ग का ज्ञान होता है। इसलिए आत्मचिन्तन और मनन से जीवन में उन्नति संभव होती है।

25. निम्नलिखित में से किसी एक श्लोक का संस्कृत में अर्थ लिखिए :

(क) ये क्रोधं सन्नियच्छन्ति क्क्रुद्धान् संशमयन्ति च ।
      न कुप्यन्ति च भूतानां दुर्गाण्यतितरन्ति ते ।।
Ans.
ये जनाः स्वक्रोधं नियन्त्रयन्ति, क्रुद्धान् अपि शमयन्ति, सर्वेषु भूतेषु न कुप्यन्ति, ते एव सर्वाणि दुर्गाणि (कठिनाइयाँ) अतिक्रम्य पारं गच्छन्ति।
अर्थात् जो लोग क्रोध को वश में रखते हैं, दूसरों के क्रोध को शांत करते हैं और किसी से भी द्वेष नहीं करते, वही जीवन की सभी कठिनाइयों को पार कर लेते हैं।

(ख) “पृथिव्यां त्रीणि रत्नानि जलमन्नं सुभाषितम् ।
मूढैः पाषाणखण्डेषु रत्नसंज्ञा विधीयते ।।”
Ans.
अस्मिन् जगति पृथिव्यां त्रयः एव रत्नाः सन्ति—जलम्, अन्नम्, सुभाषितम् च। परन्तु मूढजनाः तु पाषाणखण्डेषु एव रत्नसंज्ञां कुर्वन्ति।
अर्थात् वास्तव में पृथ्वी पर जल, अन्न और मधुर वाणी ही सच्चे रत्न हैं, परन्तु मूर्ख लोग पत्थरों (आभूषणों) को ही रत्न समझते हैं।

26. (क) निम्नलिखित में से किसी एक पात्र का चरित्र-चित्रण हिन्दी में लिखिए :

(i) “यौतुकं पापसञ्चयः” पाठ के आधार पर ‘विनय’ का ।
Ans.
विनय इस पाठ का प्रमुख पात्र है। वह शिक्षित, संस्कारी और नैतिक मूल्यों को मानने वाला युवक है। विनय दहेज प्रथा का घोर विरोधी है और इसे समाज के लिए पाप मानता है। वह विवाह को लेन-देन नहीं, बल्कि पवित्र संस्कार समझता है। विनय का स्वभाव साहसी और दृढ़ निश्चयी है, क्योंकि वह समाज की कुरीतियों के सामने झुकता नहीं। वह समानता, न्याय और मानवता में विश्वास रखता है। विनय का चरित्र युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है।

(ii) “वयं भारतीयाः” पाठ के आधार पर ‘पीटर’ का ।
Ans.
पीटर एक विदेशी युवक है, जो भारत की संस्कृति, सभ्यता और जीवन-मूल्यों से अत्यन्त प्रभावित है। वह भारतीयों के सरल स्वभाव, अतिथि-सत्कार और सहनशीलता की प्रशंसा करता है। पीटर निष्पक्ष, जिज्ञासु और खुले विचारों वाला व्यक्ति है। वह भारतीयों को एकता, भाईचारे और देशभक्ति का प्रतीक मानता है। उसके विचारों से यह स्पष्ट होता है कि भारतीय संस्कृति विश्व में सम्माननीय है। पीटर का चरित्र भारत की महानता को उजागर करता है।

(iii) “भोजस्य शल्यचिकित्सा” पाठ के आधार पर ‘भोज’ का ।
Ans.
भोज एक पराक्रमी, साहसी और प्रसिद्ध राजा था। वह युद्ध में वीर होने के साथ-साथ आत्मसम्मानी भी था। जब वह गंभीर रूप से घायल हुआ, तब भी उसने धैर्य नहीं खोया। शल्यचिकित्सा के समय वह असहनीय पीड़ा को चुपचाप सहन करता है, जिससे उसका साहस और दृढ़ता प्रकट होती है। भोज विद्वानों का सम्मान करने वाला और कला-प्रेमी शासक था। उसका चरित्र वीरता, सहनशीलता और राजधर्म का आदर्श प्रस्तुत करता है।

(ख) निम्नलिखित में से किसी एक प्रश्न का उत्तर संस्कृत में लिखिए :

(i) मोहनदासस्य मातुः नाम किम् आसीत् ?
Ans.
मोहनदासस्य मातुः नाम पुतलीबाई आसीत्।

(ii) शंखचूड़ः कः आसीत् ?
Ans.
शंखचूड़ः एकः दैत्यः आसीत्। सः अत्यन्तः शक्तिशालीः तथा दानवकुलस्य वीरः आसीत्।

(iii) कथासरित्सागरस्य रचयिता कः ?
Ans.
कथासरित्सागरस्य रचयिता सोमदेवः आसीत्।

उपखण्ड ख

27. (क) निम्नलिखित रेखांकित पदों में से किसी एक में निर्देशानुसार विभक्ति का नाम लिखिए :

(i) रमा निर्धनाय वस्त्रं ददाति ।
Ans.
रेखांकित पद — निर्धनाय
विभक्ति का नाम : 👉 चतुर्थी विभक्ति (दान/संप्रदान)

(ii) सः नेत्राभ्यां पश्यति ।
Ans.
रेखांकित पद — नेत्राभ्यां
विभक्ति का नाम : 👉 तृतीया विभक्ति (करण)

(iii) सः ग्रामे वसति ।
Ans.
रेखांकित पद — ग्रामे
विभक्ति का नाम : 👉 सप्तमी विभक्ति (अधिकरण)

(ख) निम्नलिखित में से किसी एक पद में प्रत्यय लिखिए :

(i) पातुम्
Ans.
प्रत्यय : 👉 तुमुन्

(पा + तुमुन् = पातुम्)

(ii) दृष्ट्वा
Ans.
प्रत्यय : 👉 क्त्वा

(दृश् + क्त्वा = दृष्ट्वा)

(iii) सुता
Ans.
प्रत्यय : 👉 टा (ताप्)

(सु + टा = सुता)

28. निम्नलिखित में से किसी एक का वाच्य परिवर्तन कीजिए:

(क) सः विभेति ।
Ans.
वाच्य परिवर्तन : 👉 भाववाच्य
तेन भीयते ।

(ख) रामः वेदं पठति ।
Ans.
वाच्य परिवर्तन : 👉 कर्मवाच्य
रामेण वेदः पठ्यते ।

(ग) वयं जलं पास्यामः ।
Ans.
वाच्य परिवर्तन : 👉 कर्मवाच्य
अस्माभिः जलं पास्यते ।

29. निम्नलिखित वाक्यों में से किन्हीं तीन वाक्यों का संस्कृत में अनुवाद कीजिए :

(क) मैं आँखों से देखता हूँ।
Ans.
अहं नेत्राभ्यां पश्यामि।

(ख) उसने रामायण पढ़ी ।
Ans.
सः रामायणं अपठत्।

(ग) वह माता का स्मरण करता है।
Ans.
सः मातुः स्मरणं करोति।

(घ) सड़क के दोनों ओर पेड़ हैं।
Ans.
मार्गस्य उभयतः वृक्षाः सन्ति।

(ङ) पिता पुत्र के साथ आया ।
Ans.
पिता पुत्रेण सह आगच्छत्।

30. निम्नलिखित पदों में से किन्हीं दो पदों का संस्कृत वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

(क) वयम
Ans.
वयम् विद्यालयं गच्छामः।

(ख) करोति
Ans.
सः सत्कर्म करोति।

(ग) सर्वत्र
Ans.
ईश्वरः सर्वत्र वर्तते।

(घ) आदाय
Ans.
सः पुस्तकम् आदाय विद्यालयं गच्छति।

(ड) स्वस्ति
Ans.
स्वस्ति भवतु सर्वेभ्यः।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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