U.P Board Class 10 Social Science 825(CU) Question Paper 2025

U.P Board Class 10 Social Science 825(CU) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2025
सामाजिक विज्ञान
समय: तीन घण्टे 15 मिनट  पूर्णांक: 70

नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

ii) यह प्रश्नपत्र दो खण्डों, खण्ड अ तथा खण्ड ब में विभक्त है।

iii) खण्ड – अ में 1 अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके सही उत्तर ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर नीले अथवा काले बाल प्वाइंट कलम से सही विकल्प वाले गोले को पूर्ण रूप से काला कर चिह्नित करें ।

iv) खण्ड – अ के प्रत्येक प्रश्न का निर्देश पढ़कर केवल प्रदत्त ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर ही उत्तर दें। ओ० एम०आर० उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा ह्वाइटनर का प्रयोग न करें।

v) प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।

vi) खण्ड ब में 50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न हैं। इस खण्ड में वर्णनात्मक-1, वर्णनात्मक-II तथा मानचित्र सम्बन्धी दो प्रश्न हैं।

vii) खण्ड व में सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ ही करें।

viii) प्रथम प्रश्न से आरम्भ कीजिए तथा अन्तिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो उस पर समय नष्ट न कीजिए ।

ix) दिए गए मानचित्रों को उत्तर-पुस्तिका के साथ मजबूती से संलग्न करना आवश्यक है।

x) दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए मानचित्र कार्य के स्थान पर अलग से प्रश्न 9(A) तथा 9(B) लिखने के लिए दिए गये हैं।

खण्ड – अ 

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

1. निम्नलिखित में से किसने 1860 ई० में दक्षिण डेटली की तरफ ‘एक्सपीडिशन ऑफ द थाउजेंड’ (हजार लोगों का अभियान) का नेतृत्व किया था ?

(A) गैरीबाल्डी
(B) काबूर
(C) मैजिनी
(D) बिस्मार्क

Ans. (A) गैरीबाल्डी

2. 1932 ई० में पूना पैक्ट किन दो नेताओं के बीच हुआ?

(A) महात्मा गाँधी और सरदार बल्लभभाई पटेलं.
(B) महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू
(C) जवाहरलाल नेहरू और सुभाष चन्द्र बोस
(D) महात्मा गाँधी और डॉ० भीमराव रामजी अम्बेडकर

Ans. (D) महात्मा गाँधी और डॉ० भीमराव रामजी अम्बेडकर

3. बेल्जियम में केन्द्रीय और राज्य सरकारों के अलावा एक तीसरे स्तर की सरकार भी काम करती है। इसे किस नाम से जाना जाता है ?

(A) प्रान्तीय सरकार
(B) स्थानीय सरकार
(C) सामुदायिक सरकार
(D) क्षेत्रीय सरकार

Ans. (C) सामुदायिक सरकार

4. संघात्मक शासन प्रणाली में शक्तियों का विभाजन निम्नलिखित में से किनके मध्य होता है ?

(A) केन्द्र और राज्य
(B) व्यवस्थापिका और कार्यपालिका
(C) व्यवस्थापिका और न्यायपालिका
(D) कार्यपालिका और न्यायपालिका

Ans. (A) केन्द्र और राज्य

5. महिला आरक्षण अधिनियम, 2023 द्वारा लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए कितने प्रतिशत सीटों का आरक्षण दिया जाएगा ?

(A) 50
(B) 30
(C) 23
(D) 33

Ans. (D) 33

6. निम्नलिखित में से कौन-से राजनीतिक दल के प्रमुख हिस्से हैं?

(A) नेता
(B) सक्रिय सदस्य
(C) अनुयायी
(D) इनमें से सभी

Ans. (D) इनमें से सभी

7. व्यक्ति की गरिमा और नागरिकों में समानता को बढ़ावा देने वाली राजनीतिक व्यवस्था निम्नलिखित में से कौन-सी है ?

(A) राजतंत्र
(B) लोकतंत्र
(C) तानाशाही
(D) इनमें से कोई नहीं

Ans. (B) लोकतंत्र

8. किस संधि के द्वारा यूनान को एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में मान्यता मिली ?

(A) पेरिस की संधि
(B) वियना की संधि
(C) वर्साय की संधि
(D) कुस्तुनतुनिया की संधि

Ans. (D) कुस्तुनतुनिया की संधि

9. भारत माता की विख्यात छवि को किसने चित्रित क्रिया था ?

(A) रवीन्द्रनाथ टैगोर
(B) बंकिमचन्द्र चटर्जी
(C) अवनीन्द्रनाथ टैगोर
(D) राजा रवि वर्मा

Ans. (C) अवनीन्द्रनाथ टैगोर

10. 1920 में कांग्रेस के किस अधिबेशन में असहयोग कार्यक्रम को स्वीकृति मिली ?

(A) कराची अधिवेशन
(B) मद्रास अधिवेशन
(C) दिल्ली अधिवेशन
(D) नागपुर अधिवेशन

Ans. (D) नागपुर अधिवेशन

11. ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ परियोजना की शुरुआत कब हुई ?

(A) 1971
(B) 1973
(C) 1985
(D) 1911

Ans. (B) 1973

12. टिहरी बाँध किस नदी पर बना है?

(A) नर्मदा
(B) भागीरथी
(C) कोसी
(D) कृष्णा

Ans. (B) भागीरथी

13. निम्नलिखित में से कौन-सी फसल मोटे अनाज के अन्तर्गत आती है ?

(A) जौ
(B) गेहूँ
(C) बाजरा
(D) चावल

Ans. (C) बाजरा

14. निम्नलिखित में से कौन-सा खनिज अधात्विक है-

(A) अभ्रक
(B) लौह अयस्क
(C) सोना
(D) बाक्साइट

Ans. (A) अभ्रक

15. निम्नलिखित में से कौन ऊर्जा स्रोत गैर-परम्परागत है?

(A) कोयला
(B) पेट्रोलियम
(C) पवन ऊर्जा
(D) प्राकृतिक गैस

Ans. (C) पवन ऊर्जा

16. निम्नलिखित में से किसका कार्य अर्थव्यवस्था के द्वितीयक क्षेत्रक के अन्तर्गत आता है ?

(A) कुम्हार
(B) शिक्षक
(C) कृषक
(D) मछुआरा

Ans. (A) कुम्हार

17. विश्व में मानव विकास सूचकांक, 2016 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा देश निम्नतम स्तर पर था ?

(A) बांग्लादेश
(B) श्रीलंका
(C) भारत
(D) नेपाल

Ans. (C) भारत

18. निम्नलिखित में से किस राज्य में शिशु मृत्यु दर सबसे अधिक है?

(A) बिहार
(B) मध्य प्रदेश
(C) केरल
(D) हरियाणा

Ans. (B) मध्य प्रदेश

19. वैश्वीकरण का प्रभाव निम्नलिखित में किस पर विपरीत पड़ा है ?

(A) धनी वर्ग
(B) कुशल वर्ग
(C) शिक्षित वर्ग
(D) श्रमिक वर्ग

Ans. (D) श्रमिक वर्ग

20. सूचना पाने का अधिकार (आरटीआई) कब लागू हुआ ?

(A) 1991
(B) 2001
(C) 2005
(D) 1998

Ans. (C) 2005

खण्ड ब

(वर्णतात्मिक – 1)

1. उदारवाद से आप क्या समझते हैं? इसकी प्रमुख विशेषताओं का वर्णन करें।
Ans.
उदारवाद एक राजनीतिक-सामाजिक विचारधारा है जो व्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता और अधिकारों पर विशेष बल देती है। इसका मुख्य उद्देश्य निरंकुश शासन, सामाजिक असमानता और अन्याय का विरोध कर ऐसी व्यवस्था स्थापित करना है जिसमें व्यक्ति को अपने विचार व्यक्त करने, जीवन जीने और विकास करने की स्वतंत्रता मिले। उदारवाद की धारणा 18वीं–19वीं शताब्दी में यूरोप में विकसित हुई और इसने आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं की नींव रखी।

उदारवाद की प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं—

  1. व्यक्तिगत स्वतंत्रता – विचार, भाषण, प्रेस और धर्म की स्वतंत्रता पर जोर।
  2. कानून के समक्ष समानता – सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय।
  3. संवैधानिक शासन – शासक की शक्तियाँ संविधान द्वारा सीमित होती हैं।
  4. प्रतिनिधि सरकार – जनता द्वारा चुनी गई सरकार की व्यवस्था।
  5. निजी संपत्ति का अधिकार – व्यक्ति को संपत्ति रखने और उसका उपयोग करने की स्वतंत्रता।
  6. धार्मिक सहिष्णुता – सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार।

इस प्रकार उदारवाद मानव गरिमा, स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाली विचारधारा है।

अथवा

जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
Ans.
जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की एक अत्यन्त दुःखद और निर्णायक घटना थी। यह घटना 13 अप्रैल 1919 को अमृतसर (पंजाब) में घटित हुई। उस दिन बैसाखी के अवसर पर जलियाँवाला बाग में बड़ी संख्या में लोग शांतिपूर्वक एकत्र हुए थे।

ब्रिटिश अधिकारी जनरल डायर ने बिना किसी चेतावनी के निहत्थी भीड़ पर गोलियाँ चलाने का आदेश दे दिया। इस गोलीबारी में सैकड़ों निर्दोष लोग मारे गए और अनेक घायल हुए।

इस हत्याकाण्ड से पूरे देश में आक्रोश फैल गया। महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश सरकार के प्रति सहयोग की नीति त्याग दी और राष्ट्रीय आंदोलन को नई दिशा मिली। जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड ने भारतीय जनता को स्वतंत्रता संग्राम के लिए और अधिक एकजुट कर दिया।

2. लोकतंत्र से आप क्या समझते हैं? यह शासन की अन्य व्यवस्थाओं से क्यों बेहतर है?
Ans.
लोकतंत्र वह शासन व्यवस्था है जिसमें सत्ता जनता के हाथों में होती है और जनता अपने प्रतिनिधियों को चुनाव द्वारा चुनकर शासन करती है। इसमें सरकार जनता की इच्छा के अनुसार कार्य करती है तथा संविधान और कानून के अधीन रहती है। लोकतंत्र में नागरिकों को विचार, अभिव्यक्ति और संगठन की स्वतंत्रता प्राप्त होती है।

लोकतंत्र शासन की अन्य व्यवस्थाओं से बेहतर इसलिए है क्योंकि—

  1. इसमें जनता की भागीदारी सुनिश्चित होती है और सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी रहती है।
  2. यह व्यक्ति की गरिमा और समानता को बढ़ावा देता है।
  3. लोकतंत्र में मौलिक अधिकारों की रक्षा की जाती है।
  4. इसमें शांतिपूर्ण तरीके से सत्ता परिवर्तन संभव होता है।
  5. गलत निर्णयों को सुधारने की आत्म-संशोधन की क्षमता लोकतंत्र में होती है।

इस प्रकार लोकतंत्र नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने वाली और जनकल्याण पर आधारित सबसे श्रेष्ठ शासन व्यवस्था मानी जाती है।

अथवा

भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता से सम्बन्धित कौन-से प्रावधान किए गए हैं?
Ans.
भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता का अर्थ है कि राज्य का कोई अपना धर्म नहीं है और वह सभी धर्मों को समान सम्मान देता है। संविधान में धर्मनिरपेक्षता से सम्बन्धित निम्नलिखित प्रमुख प्रावधान किए गए हैं—

  1. प्रस्तावना में भारत को एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित किया गया है।
  2. अनुच्छेद 25 सभी नागरिकों को अपने धर्म को मानने, आचरण करने और प्रचार करने की स्वतंत्रता देता है।
  3. अनुच्छेद 26 धार्मिक संस्थाओं को अपने धार्मिक मामलों का प्रबंधन करने का अधिकार देता है।
  4. अनुच्छेद 27 के अनुसार किसी भी नागरिक से किसी विशेष धर्म के प्रचार हेतु कर नहीं लिया जाएगा।
  5. अनुच्छेद 28 सरकारी शिक्षण संस्थानों में धार्मिक शिक्षा देने पर रोक लगाता है।
  6. अनुच्छेद 15 धर्म के आधार पर किसी प्रकार के भेदभाव को निषिद्ध करता है।

इन प्रावधानों के माध्यम से भारतीय संविधान सभी धर्मों के प्रति समानता, सहिष्णुता और धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करता है।

3. ऊर्जा के परम्परागत एवं गैर-परम्परागत स्रोतों में विभेद कीजिए।
Ans.
ऊर्जा के परम्परागत एवं गैर-परम्परागत स्रोतों में अंतर निम्नलिखित है—

परम्परागत ऊर्जा स्रोतगैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत
इनका उपयोग लंबे समय से किया जा रहा है।इनका उपयोग अपेक्षाकृत हाल के समय में प्रारम्भ हुआ है।
जैसे—कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, लकड़ी।जैसे—सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा, बायोगैस।
ये प्रायः अक्षय नहीं होते और सीमित होते हैं।ये प्रायः अक्षय होते हैं और समाप्त नहीं होते।
इनसे प्रदूषण अधिक होता है।इनसे प्रदूषण बहुत कम होता है।
पर्यावरण पर नकारात्मक प्रभाव अधिक पड़ता है।पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

अथवा

रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले आकृतिक कारकों की समीक्षा कीजिए।
Ans.
रेल परिवहन के वितरण को प्रभावित करने वाले आकृतिक कारक वे प्राकृतिक भौगोलिक तत्व हैं जो किसी क्षेत्र में रेलमार्गों के विकास, विस्तार और घनत्व को प्रभावित करते हैं। प्रमुख आकृतिक कारक निम्नलिखित हैं—

  1. स्थलाकृति (Relief) – समतल और विस्तृत मैदानों में रेलमार्गों का निर्माण सरल और सस्ता होता है, इसलिए वहाँ रेल नेटवर्क सघन होता है। इसके विपरीत पर्वतीय और पठारी क्षेत्रों में ढाल, चट्टानें और संकीर्ण घाटियाँ होने के कारण रेलमार्गों का विकास कठिन होता है।
  2. ढाल (Slope) – कम ढाल वाले क्षेत्रों में रेल चलाना आसान होता है, जबकि अधिक ढाल वाले क्षेत्रों में इंजन की क्षमता सीमित हो जाती है, जिससे रेल परिवहन प्रभावित होता है।
  3. नदियाँ और जल निकासी – नदियों पर पुलों के निर्माण की आवश्यकता होती है, जिससे लागत बढ़ती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों में रेलमार्गों को विशेष सुरक्षा की जरूरत होती है।
  4. मिट्टी और चट्टानों की प्रकृति – मजबूत और स्थिर भूमि पर रेल पटरियाँ टिकाऊ होती हैं, जबकि दलदली या कमजोर भूमि में रेलमार्गों का निर्माण कठिन होता है।
  5. जलवायु – अत्यधिक वर्षा, हिमपात या रेगिस्तानी तूफान वाले क्षेत्रों में रेल परिवहन प्रभावित होता है।

इस प्रकार स्थलाकृतिक और प्राकृतिक कारक रेल परिवहन के वितरण को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करते हैं।

4. वैश्वीकरण का भारत में क्या प्रभाव पड़ा है? किन्हीं चार बिन्दुओं पर प्रकाश डालिये।
Ans.
वैश्वीकरण का अर्थ है विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं का आपस में जुड़ना, जिससे वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और विचारों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान संभव हो सके। 1991 की नई आर्थिक नीति के बाद भारत में वैश्वीकरण की प्रक्रिया तेज हुई, जिसका भारतीय अर्थव्यवस्था और समाज पर गहरा प्रभाव पड़ा।

  1. विदेशी निवेश और औद्योगिक विकास में वृद्धि
    वैश्वीकरण के कारण भारत में अनेक बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ आईं। इससे प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) बढ़ा, नई तकनीक आई और उद्योगों का आधुनिकीकरण हुआ। उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई और भारत विश्व बाजार से जुड़ गया।
  2. प्रतिस्पर्धा और गुणवत्ता में सुधार
    विदेशी कंपनियों के आने से भारतीय कंपनियों को प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। इसके परिणामस्वरूप वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ, कीमतें नियंत्रित हुईं और उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प प्राप्त हुए।
  3. रोजगार के नए अवसर
    सूचना प्रौद्योगिकी, बीपीओ, बैंकिंग, परिवहन, संचार और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए। विशेषकर शहरी क्षेत्रों और शिक्षित वर्ग को इससे लाभ मिला।
  4. श्रमिक वर्ग पर नकारात्मक प्रभाव
    वैश्वीकरण का सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव असंगठित और अकुशल श्रमिकों पर पड़ा। ठेका प्रणाली, अस्थायी रोजगार और छँटनी के कारण नौकरी की सुरक्षा कम हुई तथा श्रमिकों का शोषण बढ़ा।

इस प्रकार वैश्वीकरण ने भारत के आर्थिक विकास को गति दी, लेकिन इसके लाभ समान रूप से सभी वर्गों तक नहीं पहुँच पाए। इसलिए वैश्वीकरण को संतुलित और समावेशी बनाने की आवश्यकता है।

अथवा

ऋण के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों की तुलना कीजिए।
Ans.
ऋण के औपचारिक एवं अनौपचारिक स्रोतों की तुलना निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है—

आधारऔपचारिक ऋण स्रोतअनौपचारिक ऋण स्रोत
अर्थसरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थानों से लिया गया ऋणनिजी व्यक्तियों या संस्थाओं से लिया गया ऋण
उदाहरणबैंक, सहकारी समितियाँ, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकसाहूकार, रिश्तेदार, मित्र, व्यापारी
ब्याज दरकम तथा नियन्त्रितअधिक और अनियंत्रित
कानूनी सुरक्षाकानूनी नियमों के अंतर्गतप्रायः कानूनी सुरक्षा नहीं
ऋण शर्तेंस्पष्ट और लिखितअस्पष्ट या मौखिक
शोषण की संभावनाबहुत कमअधिक
गरीबों के लिए उपलब्धतादस्तावेज़ों के कारण कभी-कभी कठिनआसानी से उपलब्ध

(वर्णनात्मक – II)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक लगभग 150 शब्दों में दीजिए।)

5. नेपोलियन कौन था ? उसके द्वारा किए गए सुधारों को। वर्णन कीजिए।
Ans.
नेपोलियन बोनापार्ट फ्रांस का एक महान सेनानायक और कुशल प्रशासक था। वह फ्रांसीसी क्रांति के बाद सत्ता में आया और 1804 ई० में फ्रांस का सम्राट बना। नेपोलियन ने यूरोप के कई देशों पर विजय प्राप्त की और साथ-साथ फ्रांस में व्यापक प्रशासनिक, सामाजिक तथा कानूनी सुधार किए, जिनका प्रभाव पूरे यूरोप पर पड़ा।

नेपोलियन द्वारा किए गए प्रमुख सुधार इस प्रकार हैं—

  1. नागरिक संहिता (नेपोलियन कोड)
    1804 ई० में उसने नागरिक संहिता लागू की। इसके अंतर्गत कानून के समक्ष समानता, निजी संपत्ति की सुरक्षा और सामंती विशेषाधिकारों की समाप्ति की गई।
  2. सामंती व्यवस्था का अंत
    नेपोलियन ने जन्म आधारित विशेषाधिकारों को समाप्त किया और किसानों को सामंती करों व बेगार से मुक्ति दिलाई।
  3. प्रशासनिक सुधार
    उसने एक केंद्रीकृत प्रशासन व्यवस्था स्थापित की। योग्य अधिकारियों की नियुक्ति योग्यता के आधार पर की गई, न कि वंश या पद के आधार पर।
  4. कर और न्याय व्यवस्था में सुधार
    कर प्रणाली को सरल और समान बनाया गया। न्यायालयों को व्यवस्थित किया गया जिससे शीघ्र न्याय मिल सके।
  5. शिक्षा सुधार
    राज्य द्वारा नियंत्रित शिक्षा व्यवस्था स्थापित की गई ताकि कुशल प्रशासनिक अधिकारी तैयार हो सकें।

निष्कर्ष :
नेपोलियन के सुधारों ने फ्रांस में आधुनिक राष्ट्र-राज्य की नींव रखी। यद्यपि वह निरंकुश शासक था, फिर भी उसके सुधारों ने स्वतंत्रता, समानता और कानून के शासन को मजबूत किया।

अथवा

सविनय अवज्ञा आन्दोलन की सीमाओं पर एक संक्षिप्त निबन्ध लिखिए।
Ans.
सविनय अवज्ञा आन्दोलन महात्मा गाँधी के नेतृत्व में 1930 ई० में प्रारम्भ हुआ। इस आन्दोलन का उद्देश्य ब्रिटिश सरकार के अन्यायपूर्ण कानूनों का शांतिपूर्ण ढंग से उल्लंघन कर स्वराज्य की प्राप्ति करना था। यद्यपि यह आन्दोलन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण चरण था, फिर भी इसकी कुछ प्रमुख सीमाएँ थीं।

इस आन्दोलन में औद्योगिक श्रमिकों की भागीदारी सीमित रही। मजदूर वर्ग अपनी रोज़ी-रोटी की समस्या के कारण बड़े पैमाने पर इसमें सम्मिलित नहीं हो सका। इसी प्रकार महिलाओं की भागीदारी उत्साहपूर्ण होने के बावजूद संख्या में अपेक्षाकृत कम थी।

मुस्लिम समुदाय का समर्थन भी पूर्ण रूप से नहीं मिला। खिलाफत आन्दोलन की समाप्ति और राजनीतिक मतभेदों के कारण कई मुस्लिम संगठन इससे दूर रहे। इसके अलावा दलित वर्ग की समस्याओं को आन्दोलन में पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया, जिससे सभी वर्गों का व्यापक समर्थन नहीं मिल सका।

ब्रिटिश सरकार की कठोर दमनकारी नीति, गिरफ्तारी, लाठीचार्ज और आर्थिक दंड के कारण आन्दोलन की गति कमजोर पड़ गई। अंततः 1934 ई० में इसे स्थगित कर दिया गया।

इस प्रकार सविनय अवज्ञा आन्दोलन ऐतिहासिक महत्व का होते हुए भी अपनी सामाजिक सीमाओं और सरकारी दमन के कारण अपने उद्देश्य को पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सका।

6. आधुनिक लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं में सत्ता की साझेदारी के विविध रूपों की विवेचना कीजिए।
Ans.
आधुनिक लोकतंत्र की एक प्रमुख विशेषता सत्ता की साझेदारी है। सत्ता की साझेदारी का अर्थ है कि शासन की शक्ति किसी एक व्यक्ति, संस्था या समूह के हाथों में न होकर विभिन्न स्तरों, संस्थाओं और सामाजिक समूहों के बीच बाँटी जाए। इससे तानाशाही की संभावना कम होती है और लोकतंत्र मजबूत होता है।

सत्ता की साझेदारी के प्रमुख रूप निम्नलिखित हैं—

  1. शासन के विभिन्न स्तरों के बीच साझेदारी
    संघीय लोकतंत्रों में सत्ता का विभाजन केंद्र सरकार और राज्य सरकारों के बीच किया जाता है। भारत, अमेरिका और बेल्जियम इसके प्रमुख उदाहरण हैं। इससे क्षेत्रीय विविधताओं का सम्मान होता है।
  2. शासन के अंगों के बीच साझेदारी
    लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच सत्ता का बँटवारा होता है। प्रत्येक अंग एक-दूसरे पर नियंत्रण और संतुलन बनाए रखता है।
  3. विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच साझेदारी
    आधुनिक लोकतंत्र में अल्पसंख्यकों, महिलाओं, पिछड़े वर्गों और अनुसूचित जाति-जनजाति को सत्ता में भागीदारी देने के लिए आरक्षण और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाती है।
  4. राजनीतिक दलों के बीच साझेदारी
    बहुदलीय व्यवस्था में सत्ता का साझा उपयोग गठबंधन सरकारों के माध्यम से होता है, जिससे विभिन्न विचारधाराओं को प्रतिनिधित्व मिलता है।

निष्कर्ष :
सत्ता की साझेदारी लोकतंत्र को अधिक समावेशी, संतुलित और स्थायी बनाती है। यह सामाजिक सौहार्द बनाए रखने और शासन को जनहितकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अथवा

भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका की विवेचना कीजिए।
Ans.
भारतीय समाज की संरचना प्राचीन काल से ही जाति व्यवस्था पर आधारित रही है। स्वतंत्रता के बाद भी जाति भारतीय राजनीति का एक महत्वपूर्ण और प्रभावशाली तत्व बनी रही है। राजनीति और जाति का संबंध परस्पर गहरा तथा बहुआयामी है, जिसने राजनीतिक दलों, चुनावी प्रक्रियाओं, नेतृत्व और नीतियों को व्यापक रूप से प्रभावित किया है।

1. राजनीतिक जागरूकता में वृद्धि
जाति के आधार पर संगठित होने से पिछड़े वर्गों, दलितों और वंचित समुदायों में राजनीतिक चेतना का विकास हुआ। उन्होंने अपने अधिकारों, प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के लिए संगठित होकर राजनीति में भागीदारी बढ़ाई।

2. चुनावी राजनीति में जाति का प्रभाव
भारत में चुनावों के दौरान जाति एक महत्वपूर्ण कारक बन जाती है। राजनीतिक दल उम्मीदवार चयन, चुनावी रणनीति और गठबंधन बनाते समय जातिगत समीकरणों को ध्यान में रखते हैं। कई क्षेत्रों में मतदाता अपनी जाति के उम्मीदवार या दल को प्राथमिकता देते हैं।

3. राजनीतिक दलों का गठन
कई राजनीतिक दल जातिगत आधार पर उभरे हैं, जैसे—बहुजन समाज पार्टी (दलित राजनीति), समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (पिछड़ा वर्ग आधारित राजनीति)। इन दलों ने हाशिए पर रहे वर्गों को राजनीतिक मंच प्रदान किया।

4. आरक्षण और सामाजिक न्याय की राजनीति
जाति आधारित आरक्षण नीति भारतीय राजनीति का एक प्रमुख मुद्दा रही है। अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण ने सामाजिक न्याय को बढ़ावा दिया, परंतु साथ ही राजनीतिक विवाद और ध्रुवीकरण भी उत्पन्न किया।

5. जातिवाद के नकारात्मक प्रभाव
जाति आधारित राजनीति से राष्ट्रीय हितों की अपेक्षा संकीर्ण जातिगत हितों को बढ़ावा मिलता है। इससे समाज में विभाजन, वैमनस्य और राजनीतिक अवसरवादिता बढ़ती है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौती बन सकती है।

6. लोकतंत्र पर प्रभाव
एक ओर जाति ने लोकतंत्र को समावेशी बनाया, वहीं दूसरी ओर उसने राजनीति को समूहवाद और पहचान की राजनीति तक सीमित करने का भी कार्य किया। आज भी जाति राजनीतिक निर्णयों को प्रभावित करती है, हालांकि शहरीकरण, शिक्षा और मीडिया के प्रभाव से इसका स्वरूप बदल रहा है।

निष्कर्ष
भारतीय राजनीति में जाति की भूमिका न तो पूर्णतः सकारात्मक है और न ही पूर्णतः नकारात्मक। जाति ने वंचित वर्गों को राजनीतिक सशक्तिकरण दिया है, लेकिन इसके दुरुपयोग से लोकतंत्र की गुणवत्ता प्रभावित हुई है। आवश्यकता इस बात की है कि राजनीति जाति से ऊपर उठकर विकास, समानता और राष्ट्रीय हितों पर केंद्रित हो।

7. भू-संसाधन को परिभाषित कीजिए एवं भारत में भू-उपयोग प्रारूप की समीक्षा कीजिए।
Ans.
भू-संसाधन से आशय पृथ्वी की सतह पर उपलब्ध उस भूमि से है जिसका उपयोग मानव अपनी विभिन्न आवश्यकताओं—जैसे कृषि, आवास, उद्योग, परिवहन, वन, खनन आदि—के लिए करता है। भूमि एक सीमित और मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है, जिसका सही एवं संतुलित उपयोग मानव जीवन और आर्थिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है।

भारत में भू-उपयोग प्रारूप की समीक्षा
भारत एक विशाल और विविध भौगोलिक देश है, जहाँ भू-उपयोग का प्रारूप प्राकृतिक परिस्थितियों, जनसंख्या घनत्व, कृषि पर निर्भरता और आर्थिक गतिविधियों के अनुसार भिन्न-भिन्न है। भारत में भूमि का उपयोग मुख्यतः निम्नलिखित वर्गों में किया जाता है—

  1. कृषि भूमि
    भारत की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है, इसलिए देश का सबसे बड़ा भाग कृषि भूमि के रूप में प्रयुक्त होता है। इसमें शुद्ध बोया गया क्षेत्र तथा एक से अधिक बार बोया गया क्षेत्र शामिल है।
  2. वन भूमि
    वन पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक हैं। भारत में वन क्षेत्र का विस्तार बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं, परंतु जनसंख्या वृद्धि और औद्योगीकरण के कारण वनों पर दबाव बना हुआ है।
  3. चरागाह एवं घास के मैदान
    पशुपालन के लिए यह भूमि महत्वपूर्ण है, किंतु कृषि विस्तार के कारण इस प्रकार की भूमि में कमी आई है।
  4. बंजर एवं अनुपयोगी भूमि
    यह वह भूमि है जो प्राकृतिक कारणों या मानवीय गतिविधियों के कारण कृषि या अन्य उपयोग के योग्य नहीं रह गई है, जैसे—मरुस्थलीय क्षेत्र, क्षरित भूमि आदि।
  5. गैर-कृषि उपयोग की भूमि
    इसमें आवासीय क्षेत्र, सड़कें, रेलमार्ग, उद्योग, बाँध आदि शामिल हैं। शहरीकरण और औद्योगीकरण के कारण इस श्रेणी की भूमि में निरंतर वृद्धि हो रही है।
  6. परती भूमि
    यह वह भूमि है जिसे कुछ समय के लिए कृषि से बाहर रखा गया हो ताकि उसकी उर्वरता पुनः प्राप्त हो सके।

निष्कर्ष
भारत में भू-उपयोग प्रारूप जनसंख्या वृद्धि, कृषि विस्तार, शहरीकरण और औद्योगीकरण से निरंतर प्रभावित हो रहा है। भूमि सीमित है, इसलिए इसके संरक्षण, नियोजित उपयोग और सतत विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है, ताकि वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं के बीच संतुलन बनाए रखा जा सके।

अथवा

भारत के कुछ भागों में जल दुर्लभता एक गम्भीर समस्या है।’ समीक्षा कीजिए एवं इसके समाधान हेतु कोई चार उपाय सुझाइए।
Ans.
भारत के कुछ भागों में जल दुर्लभता आज एक गम्भीर और चुनौतीपूर्ण समस्या बन चुकी है। देश में जल संसाधनों का वितरण असमान है तथा बढ़ती जनसंख्या, शहरीकरण और औद्योगीकरण ने इस समस्या को और अधिक गहरा कर दिया है।

जल दुर्लभता की समीक्षा
भारत के अनेक क्षेत्र—जैसे राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र के मराठवाड़ा क्षेत्र, बुंदेलखंड, तमिलनाडु के कुछ भाग और कर्नाटक—जल संकट से गंभीर रूप से प्रभावित हैं। इसके प्रमुख कारणों में अनियमित और कम वर्षा, मानसून पर अत्यधिक निर्भरता, भू-जल का अंधाधुंध दोहन, परंपरागत जल स्रोतों की उपेक्षा तथा जल प्रबंधन की कमी शामिल हैं। कृषि में अत्यधिक सिंचाई, जल-अपव्यय और प्रदूषण भी जल उपलब्धता को कम करते हैं। जल दुर्लभता का प्रभाव कृषि उत्पादन, पेयजल आपूर्ति, उद्योग और जन-स्वास्थ्य पर स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

जल दुर्लभता के समाधान हेतु उपाय
इस समस्या के समाधान के लिए समन्वित और दीर्घकालिक प्रयास आवश्यक हैं। इसके प्रमुख उपाय निम्नलिखित हैं—

  1. वर्षा जल संचयन
    वर्षा के जल को तालाबों, टंकियों, छतों और जलाशयों के माध्यम से संग्रहित कर भू-जल स्तर को बढ़ाया जा सकता है।
  2. भू-जल संरक्षण एवं संतुलित उपयोग
    ट्यूबवेल और बोरवेल के अनियंत्रित उपयोग पर नियंत्रण आवश्यक है तथा भू-जल पुनर्भरण की योजनाओं को बढ़ावा देना चाहिए।
  3. सिंचाई के आधुनिक तरीके
    ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी सूक्ष्म सिंचाई प्रणालियों को अपनाकर जल की बचत की जा सकती है।
  4. जल प्रबंधन एवं जन-जागरूकता
    जल के विवेकपूर्ण उपयोग, अपव्यय रोकने और जल स्रोतों की स्वच्छता के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाए जाने चाहिए।

निष्कर्ष
जल दुर्लभता एक गंभीर राष्ट्रीय समस्या है, जिसका समाधान केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बल्कि जनसहभागिता और वैज्ञानिक जल प्रबंधन से ही संभव है। यदि समय रहते प्रभावी कदम उठाए जाएँ, तो इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

8. भारतीय अर्थव्यवस्था के तृतीयक क्षेत्रक में कौन-सी गतिविधियाँ सम्मिलित हैं? इस क्षेत्रक के बढ़ते महत्व की समीक्षा कीजिए।
Ans.
तृतीयक क्षेत्रक की गतिविधियाँ
भारतीय अर्थव्यवस्था का तृतीयक क्षेत्रक सेवा क्षेत्र कहलाता है। इसमें वे सभी गतिविधियाँ सम्मिलित हैं जो वस्तुओं का प्रत्यक्ष उत्पादन नहीं करतीं, बल्कि प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक को सहयोग प्रदान करती हैं तथा उपभोक्ताओं को विभिन्न सेवाएँ उपलब्ध कराती हैं। तृतीयक क्षेत्रक की प्रमुख गतिविधियाँ निम्नलिखित हैं—

  • परिवहन एवं संचार सेवाएँ (रेल, सड़क, वायु, जल परिवहन, डाक, दूरसंचार)
  • व्यापार, थोक एवं खुदरा बिक्री
  • बैंकिंग, बीमा और वित्तीय सेवाएँ
  • शिक्षा, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सेवाएँ
  • पर्यटन एवं होटल उद्योग
  • सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) और सॉफ्टवेयर सेवाएँ
  • प्रशासनिक, सुरक्षा एवं रक्षा सेवाएँ

तृतीयक क्षेत्रक के बढ़ते महत्व की समीक्षा
वर्तमान समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में तृतीयक क्षेत्रक का महत्व निरंतर बढ़ रहा है। इसके प्रमुख कारण एवं प्रभाव इस प्रकार हैं—

  1. आर्थिक विकास और आय में वृद्धि
    जैसे-जैसे लोगों की आय बढ़ी है, वैसे-वैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और मनोरंजन जैसी सेवाओं की मांग भी बढ़ी है।
  2. औद्योगीकरण और कृषि का सहयोग
    कृषि और उद्योग के विकास के साथ परिवहन, भंडारण, बैंकिंग और विपणन सेवाओं की आवश्यकता बढ़ी, जिससे तृतीयक क्षेत्रक का विस्तार हुआ।
  3. रोजगार सृजन
    यह क्षेत्रक बड़े पैमाने पर रोजगार उपलब्ध कराता है, विशेषकर शहरी क्षेत्रों में। आईटी, पर्यटन और सेवा उद्योगों ने युवाओं को नए अवसर दिए हैं।
  4. वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति
    सूचना प्रौद्योगिकी, इंटरनेट और संचार साधनों के विकास ने भारत को वैश्विक सेवा केंद्र के रूप में स्थापित किया है।
  5. राष्ट्रीय आय में योगदान
    आज तृतीयक क्षेत्रक राष्ट्रीय आय में सबसे बड़ा योगदान देने वाला क्षेत्र बन गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की संरचना में परिवर्तन को दर्शाता है।

निष्कर्ष
तृतीयक क्षेत्रक भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ बनता जा रहा है। इसके विकास से न केवल आर्थिक प्रगति को गति मिली है, बल्कि जीवन स्तर में भी सुधार हुआ है। अतः संतुलित आर्थिक विकास के लिए तृतीयक क्षेत्रक का सुदृढ़ और सतत विकास अत्यंत आवश्यक है।

अथवा

उपभोक्ता अधिकार पर टिप्पणी लिखिए।
Ans.
उपभोक्ता वह व्यक्ति होता है जो वस्तुओं या सेवाओं का उपयोग अपने व्यक्तिगत अथवा पारिवारिक उपयोग के लिए करता है। आधुनिक बाजार व्यवस्था में उपभोक्ताओं का शोषण रोकने और उनके हितों की रक्षा के लिए उपभोक्ता अधिकारों की अवधारणा विकसित हुई है। भारत में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत उपभोक्ताओं को कई महत्वपूर्ण अधिकार प्रदान किए गए हैं।

प्रमुख उपभोक्ता अधिकार

  1. सुरक्षा का अधिकार – उपभोक्ता को ऐसी वस्तुएँ और सेवाएँ प्राप्त करने का अधिकार है जो उसके जीवन और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित हों।
  2. जानकारी का अधिकार – उपभोक्ता को वस्तु या सेवा की गुणवत्ता, मात्रा, मूल्य, शुद्धता और मानक के संबंध में पूर्ण जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।
  3. चयन का अधिकार – उपभोक्ता को विभिन्न विकल्पों में से अपनी इच्छा के अनुसार वस्तु या सेवा चुनने की स्वतंत्रता है।
  4. सुने जाने का अधिकार – उपभोक्ता की शिकायतों को उचित मंच पर सुना जाना और उनका निवारण किया जाना चाहिए।
  5. प्रतितोष का अधिकार – दोषपूर्ण वस्तु या सेवा के कारण हुए नुकसान की भरपाई पाने का अधिकार उपभोक्ता को है।
  6. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार – उपभोक्ता को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है।

निष्कर्ष
उपभोक्ता अधिकार उपभोक्ताओं को शोषण से बचाने, निष्पक्ष व्यापार को बढ़ावा देने और बाजार में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। एक जागरूक उपभोक्ता ही अपने अधिकारों की रक्षा कर सकता है, इसलिए उपभोक्ता शिक्षा और जागरूकता आज के समय की प्रमुख आवश्यकता है।

(मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न)
निर्देश: प्रश्न संख्या 9 (A) तथा 9 (B) मानचित्र से संबंधित हैं।

9(A). निम्नलिखित स्थानों को भारत के दिये गये रेखा मानचित्र में चिह्न द्वारा नाम सहित दर्शाइए। सही नाम तथा अंकन के लिए, अंक निर्धारित हैं :

i) वह स्थान जहाँ नील की खेती करने वाले किसानों कुसानों का आन्दोलन हुआ था।
Ans.
चंपारण (बिहार)

ii) वह स्थान जहाँ सूती मिल श्रमिकों ने सत्याग्रह किया।
Ans.
अहमदाबाद (गुजरात)

iii) वह स्थान जहाँ दिसम्बर, 1920 में काँग्रेस को अधिवेशन हुआ था।
Ans.
नागपुर (महाराष्ट्र)

iv) वह स्थान जहाँ सर्वप्रथम सविनय अवज्ञा अल्दिोलन प्रारंभ हुआ था।
Ans.
दांडी (गुजरात)

v) वह स्थान जहाँ पर काँग्रेस के अधिवेशन में ‘पूर्ण स्वराज्य’ की माँग की गई थी।
Ans.
लाहौर (अब पाकिस्तान)

9(B). निर्देश: दिये गये भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित को दर्शाइए :

i) ताप्ती नदी नाम सहित ¢ चिह्न द्वारा।
Ans.
ताप्ती नदी (मध्य प्रदेश के सतपुड़ा क्षेत्र से निकलकर महाराष्ट्र एवं गुजरात से होती हुई अरब सागर में गिरती है)

ii) राजस्थान की राजधानी नाम सहित © चिह्न द्वारा।
Ans.
जयपुर

iii) कांडला बन्दरगाह नाम सहित § चिह्न द्वारा।
Ans.
कांडला (गुजरात)

iv) कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान नाम सहित ∆ चिह्न द्वारा।
Ans.
जिम कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखण्ड)

v) अरावली श्रेणी नाम सहित £ चिह्न द्वारा।
Ans.
अरावली पर्वत श्रेणी (दिल्ली से गुजरात तक विस्तृत)

( केवल दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों की लिये मानचित्र कार्य के विकल्प के रूप में)

9(A). निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में लिखिए। मानचित्र का प्रयोग न कीजिए।

i) किस स्थान पर नील की खेती करने वाले किसानों का आंदोलन हुआ था ?
Ans.
चंपारण (बिहार)

ii) सूती मिल श्रमिकों ने कहाँ पर सत्याग्रह किया था ?
Ans.
अहमदाबाद (गुजरात)

iii) किस स्थान पर दिसम्बर, 1920 में काँग्रेस का अधिवेशन हुआ था ?
Ans.
नागपुर (महाराष्ट्र)

iv) किस स्थान पर सर्वप्रथम सविनय अर्वी आन्दोलन प्रारंभ हुआ था ?
Ans.
दांडी (गुजरात)

v) किस स्थान पर काँग्रेस के अधिवेशन में पूर्ण स्वराज्य की माँग सर्वप्रथम की गई थी ?
Ans.
लाहौर (अब पाकिस्तान)

9(B). निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए। मानचित्र का प्रयोग न कीजिए।

i) ताप्ती नदी किस सागर में गिरती है ?
Ans.
ताप्ती नदी अरब सागर में गिरती है।

ii) राजस्थान की राजधानी का नाम क्या हैं?
Ans.
राजस्थान की राजधानी जयपुर है।

iii) कांडला बन्दरगाह भारत में किस तट पर स्थित है ?
Ans.
कांडला बन्दरगाह पश्चिमी तट (अरब सागर तट) पर स्थित है।

iv) कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान कहाँ है ?
Ans.
कॉरबेट राष्ट्रीय उद्यान उत्तराखण्ड राज्य में स्थित है।

v) अरावली श्रेणी कहाँ है ?
Ans.
अरावली पर्वत श्रेणी दिल्ली से राजस्थान होते हुए गुजरात तक फैली हुई है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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