U.P Board Class 10 Social Science 825(CW) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2025
सामाजिक विज्ञान
समय: तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांक: 70
नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
ii) यह प्रश्नपत्र दो खण्डों, खण्ड अ तथा खण्ड ब में विभक्त है।
iii) खण्ड – अ में 1 अंक के 20 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं जिनके सही उत्तर ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर नीले अथवा काले बाल प्वाइंट कलम से सही विकल्प वाले गोले को पूर्ण रूप से काला कर चिह्नित करें ।
iv) खण्ड – अ के प्रत्येक प्रश्न का निर्देश पढ़कर केवल प्रदत्त ओ० एम० आर० उत्तर पत्रक पर ही उत्तर दें। ओ० एम०आर० उत्तर पत्रक पर उत्तर देने के पश्चात उसे नहीं काटें तथा इरेजर अथवा ह्वाइटनर का प्रयोग न करें।
v) प्रश्न के अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।
vi) खण्ड ब में 50 अंक के वर्णनात्मक प्रश्न हैं। इस खण्ड में वर्णनात्मक-1, वर्णनात्मक-II तथा मानचित्र सम्बन्धी दो प्रश्न हैं।
vii) खण्ड व में सभी प्रश्नों के उत्तर एक साथ ही करें।
viii) प्रथम प्रश्न से आरम्भ कीजिए तथा अन्तिम प्रश्न तक करते जाइए। जो प्रश्न न आता हो उस पर समय नष्ट न कीजिए ।
ix) दिए गए मानचित्रों को उत्तर-पुस्तिका के साथ मजबूती से संलग्न करना आवश्यक है।
x) दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए मानचित्र कार्य के स्थान पर अलग से प्रश्न 9(A) तथा 9(B) लिखने के लिए दिए गये हैं।
खण्ड – अ
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. निम्न में से वह कौन है, जिसे ब्रिटेन, रूस, प्रशा और आस्ट्रिया जैसी महाशक्तियों से 1815 ई० में पराजय का सामना करना पड़ा ?
(A) आटो वॉन बिस्मार्क
(B) हिटलर
(C) नेपोलियन बोनापार्ट
(D) मेटरनिख
Ans. (C) नेपोलियन बोनापार्ट
2.. “जब फ्रांस छींकता है तो बाकी यूरोप में सर्दी जुखाम हो जाता हैं।” किसका कथन है।
(A) मेटरनिख
(B) बिस्मार्क
(C) लुई फिलिप
(D) नेपोलियन
Ans. (A) मेटरनिख
3. अन्तरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की स्थापना किस सम्मेलन में हुई थी ?
(A) गुटनिरपेक्ष सम्मेलन में
(B) वार्साय की संधि में
(C) ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में
(D) इस्ट इण्डिया कम्पनी के सम्मेलन में
Ans. (C) ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में
4. ‘रिंडरपेस्ट’ नामक बीमारी 1890 ई० में कहाँ से फैली थी ?
(A) अफ्रीका
(B) दक्षिण अमेरिका
(C) भारत
(D) रूस
Ans. (A) अफ्रीका
5. ‘स्पिनिंग जेनी’ मशीन का प्रयोग निम्न में से किस कार्य हेतु किया जाता था ?
(A) कताई की प्रक्रिया तेज करने के लिए
(B) कपड़ों की धुलाई के लिए
(C) सुरंग का निर्माण करने के लिए
(D) मिट्टी की खुदाई के लिए
Ans. (A) कताई की प्रक्रिया तेज करने के लिए
6. निम्न में से ‘गुलामगिरी’ किसकी रचना है ?
(A) डॉ० भीमराव रामजी अम्बेडकर
(B) महात्मा गाँधी
(C) ज्योतिबा फुले
(D) पं० मोतीलाल नेहरू
Ans. (C) ज्योतिबा फुले
7. भारत का संविधान के किस अनुसूची में भाषा का उल्लेख किया गया है ?
(A) पहली अनुसूची
(B) तीसरी अनुसूची
(C) बाहरवीं अनुसूची
(D) आठवीं अनुसूची
Ans. (D) आठवीं अनुसूची
8. विश्व का सबसे बड़ा लोकतान्त्रिक देश है-
(A) अमेरिका
(B) भारत
(C) रूस
(D) फ्रांस
Ans. (B) भारत
9. ‘नारी शक्ति बंदन अधिनियम’ भारतीय संसद में कब पारित किया गया ?
(A) 1950
(B) 2014
(C) 1999
(D) 2023
Ans. (D) 2023
10. बहुजन समाज पार्टी है-
(A) क्षेत्रीय दल
(B) राष्ट्रीय दल
(C) अल्पसंख्यकों का दल
(D) महिलाओं की पार्टी
Ans. (B) राष्ट्रीय दल
11. आर्थिक संवृद्धि की कौन-सी माप में देश की जनसंख्या को भी शामिल किया जाता है ?
(A) राष्ट्रीय आय
(B) प्रति व्यक्ति आय
(C) सकल घरेलू उत्पाद
(D) शुद्ध राष्ट्रीय आय
Ans. (B) प्रति व्यक्ति आय
12. ऑनलाइन फूड डिलिवरी का कार्य किस क्षेत्रक का व्यवसाय है ?
(A) प्राथमिक
(B) द्वितीयक
(C) तृतीयक
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (C) तृतीयक
13. निम्नलिखित में से कौन अनौपचारिक साख का स्रोत है ?
(A) मित्र से लिया गया ऋण
(B) व्यावसायिक बैंक से लिया गया ऋण
(C) सहकारी समितियों से लिया गया ऋण
(D) क्रेडिट कार्ड द्वारा नकद निकासी
Ans. (A) मित्र से लिया गया ऋण
14. अन्तरराष्ट्रीय व्यापार से लाभ होता है-
(A) छोटे देशों को
(B) बड़े देशों को
(C) (A) और (B) दोनों
(D) किसी को नहीं
Ans. (C) (A) और (B) दोनों
15. उपभोक्ता अदालतें-
(A) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करती हैं
(B) अन्तरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देती हैं
(C) मानवाधिकारों की रक्षा करती हैं
(D) उद्योगों के बीच प्रतिस्पर्धा को नियंत्रित करती हैं
Ans. (A) उपभोक्ता अधिकारों की रक्षा करती हैं
16. भारत में कुल क्षेत्रफल का कितना हिस्सा पर्वतीय है?
(A) 40%
(B) 30%
(C) 27%
(D) 16%
Ans. (B) 30%
17. निम्नलिखित में से कौन भारत में लुप्त अस्तित्व वर्ग में है?
(A) एशियाई हाथी
(B) चीता
(C) गैंडा
(D) नीली भेड़
Ans. (B) चीता
18. निम्नलिखित में से कौन-सा मोटे अनाज का उदाहरण नहीं है ?
(A) ज्वार
(B) बाजरा
(C) रागी
(D) अरहर
Ans. (D) अरहर
19. सोहन अपने पशुओं के गोबर से ऊर्जा प्राप्त करने हेतु बायो गैस प्लांट लगाता है। ऊर्जा प्राप्ति का यह तरीका है-
(A) परम्परागत
(B) गैर-परम्परागत
(C) जुगाडू
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (B) गैर-परम्परागत
20. जीवाश्म ईंधन द्वारा होता है-
(A) मृदा प्रदूषण
(B) वायु प्रदूषण
(C) जल प्रदूषण
(D) ध्वनि प्रदूषण
Ans. (B) वायु प्रदूषण
खण्ड ब
(वर्णनात्मक – 1)
1. भारतीय अर्थव्यवस्था पर महामंदी के दो प्रमुख प्रभावों का उल्लेख करें।
Ans. महामंदी (1929–33) का भारतीय अर्थव्यवस्था पर गहरा प्रभाव पड़ा। इसके दो प्रमुख प्रभाव निम्नलिखित हैं—
- कृषि संकट एवं किसानों की आय में गिरावट:
महामंदी के कारण विश्व बाजार में कृषि उत्पादों की माँग घट गई, जिससे भारत में कृषि उपज के मूल्य बहुत गिर गए। परन्तु भूमि कर व लगान में कमी नहीं हुई, परिणामस्वरूप किसानों की आय घट गई और वे ऋणग्रस्त होते चले गए। - उद्योग, व्यापार एवं रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव:
निर्यात घटने से भारतीय उद्योगों का उत्पादन कम हो गया। कई कारखाने बंद हो गए, व्यापार मंद पड़ गया और बड़ी संख्या में लोगों को बेरोजगारी व आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।
यह दोनों प्रभाव भारतीय अर्थव्यवस्था को लंबे समय तक कमजोर बनाए रहे।
अथवा
विश्व की अर्थव्यवस्था के विकास में तकनीकी के प्रमुख दो योगदानों का उल्लेख करें।
Ans. विश्व की अर्थव्यवस्था के विकास में तकनीकी की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण रही है। इसके दो प्रमुख योगदान निम्नलिखित हैं—
- उत्पादन क्षमता एवं गुणवत्ता में वृद्धि:
तकनीकी प्रगति के कारण आधुनिक मशीनों और स्वचालित प्रणालियों का उपयोग बढ़ा, जिससे कम समय में अधिक उत्पादन संभव हुआ। इससे वस्तुओं की गुणवत्ता में सुधार हुआ और उत्पादन लागत कम हुई, परिणामस्वरूप आर्थिक विकास को गति मिली। - परिवहन एवं संचार का विकास:
तकनीक के विकास से परिवहन के साधन तेज, सस्ते और सुरक्षित हुए तथा संचार के माध्यम (इंटरनेट, मोबाइल आदि) सुलभ बने। इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार बढ़ा, बाजारों का विस्तार हुआ और विश्व की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में अधिक जुड़ गईं।
2. ‘लोकतंत्र उत्तरदायी, जिम्मेदार तथा वैध सरकार का गठन करता है।’ स्पष्ट कीजिए।
Ans. लोकतंत्र वह शासन प्रणाली है जिसमें सरकार का गठन जनता द्वारा किया जाता है। इसलिए लोकतांत्रिक सरकार उत्तरदायी, जिम्मेदार तथा वैध मानी जाती है। लोकतंत्र में जनता नियमित चुनावों के माध्यम से अपने प्रतिनिधियों का चयन करती है। यदि सरकार जनता की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरती, तो उसे चुनावों द्वारा बदला जा सकता है। इससे सरकार जनता के प्रति उत्तरदायी बनी रहती है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार संविधान, कानून और संसद के प्रति जिम्मेदार होती है। स्वतंत्र न्यायपालिका, विपक्षी दल और स्वतंत्र मीडिया सरकार के कार्यों पर नियंत्रण रखते हैं, जिससे सत्ता का दुरुपयोग नहीं हो पाता।
चूँकि लोकतांत्रिक सरकार जनता की सहमति से बनती है, इसलिए उसे जनता की स्वीकृति प्राप्त होती है और वह वैध सरकार कहलाती है। इस प्रकार लोकतंत्र एक उत्तरदायी, जिम्मेदार और वैध शासन प्रणाली का निर्माण करता है।
अथवा
गठबन्धन सरकार से आप क्या समझते हैं? गठबन्धन सरकार में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Ans. जब किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता और दो या दो से अधिक दल मिलकर सरकार का गठन करते हैं, तो उसे गठबन्धन सरकार कहा जाता है। ऐसी सरकार साझा कार्यक्रम और आपसी समझौते के आधार पर कार्य करती है।
गठबन्धन सरकार में क्षेत्रीय राजनीतिक दलों की भूमिका:
- क्षेत्रीय दल गठबन्धन सरकार को बहुमत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ये दल अपने क्षेत्र के हितों और समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाते हैं।
- गठबन्धन सरकार में शामिल होकर क्षेत्रीय दल नीतिनिर्माण में भाग लेते हैं और विकास कार्यों को प्रभावित करते हैं।
- ये दल संघीय व्यवस्था को मजबूत बनाते हैं तथा केन्द्र और राज्यों के बीच संतुलन बनाए रखते हैं।
इस प्रकार, गठबन्धन सरकार में क्षेत्रीय राजनीतिक दल लोकतंत्र को अधिक सहभागी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाते हैं।
3. वैश्वीकरण को परिभाषित कीजिए। इसके दो लाभ लिखिए।
Ans. वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके अंतर्गत विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ आपस में जुड़ जाती हैं। इसके माध्यम से वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और श्रम का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान होता है, जिससे विश्व एक साझा बाजार के रूप में विकसित होता है।
वैश्वीकरण के दो लाभ:
- विदेशी निवेश एवं व्यापार में वृद्धि: वैश्वीकरण से विदेशी कंपनियाँ विभिन्न देशों में निवेश करती हैं, जिससे उद्योगों का विकास होता है और रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होते हैं।
- उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प और बेहतर गुणवत्ता: वैश्वीकरण के कारण उपभोक्ताओं को सस्ते, टिकाऊ और गुणवत्तापूर्ण उत्पाद अधिक विकल्पों के साथ उपलब्ध होते हैं।
इस प्रकार वैश्वीकरण ने विश्व अर्थव्यवस्था को गति और विस्तार प्रदान किया है।
अथवा
एक आम उपभोक्ता से किस प्रकार से छल हो सकता है? वह अपने हितों की रक्षा कैसे कर सकता है ?
Ans. एक आम उपभोक्ता से विभिन्न तरीकों से छल किया जा सकता है। व्यापारी अधिक लाभ कमाने के लिए कई बार अनैतिक साधनों का प्रयोग करते हैं, जिससे उपभोक्ता को हानि होती है।
उपभोक्ता से होने वाले छल के तरीके:
- वस्तुओं में मिलावट करना।
- कम तौल या कम माप देना।
- नकली या घटिया गुणवत्ता की वस्तुएँ बेचना।
- अधिक मूल्य वसूलना या गलत जानकारी देना।
उपभोक्ता अपने हितों की रक्षा कैसे कर सकता है:
- खरीदारी के समय बिल लेना और सुरक्षित रखना।
- वस्तु पर अंकित एम०आर०पी०, गुणवत्ता चिह्न (ISI, AGMARK) आदि की जाँच करना।
- अपने उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूक रहना।
- धोखाधड़ी होने पर उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कराना।
इस प्रकार जागरूकता और कानूनी उपायों द्वारा उपभोक्ता अपने हितों की प्रभावी रूप से रक्षा कर सकता है।
4. परिवहन व्यवस्था का विकास क्यों आवश्यक है? कोई दो कारण बताइये।
Ans. परिवहन व्यवस्था किसी भी देश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। इसके विकास के दो प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं—
- व्यापार और उद्योग के विकास के लिए:
परिवहन के साधनों से कच्चा माल कारखानों तक तथा तैयार माल बाजारों तक आसानी से पहुँचाया जाता है। इससे आंतरिक एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा मिलता है और आर्थिक विकास तेज होता है। - राष्ट्रीय एकता और क्षेत्रीय विकास के लिए:
उन्नत परिवहन व्यवस्था विभिन्न क्षेत्रों को आपस में जोड़ती है। इससे दूर-दराज़ के क्षेत्रों का विकास होता है और लोगों के बीच संपर्क बढ़ने से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।
अथवा
आधारभूत उद्योग तथा उपभोक्ता उद्योगों में विभेद कीजिए।
Ans. आधारभूत उद्योग तथा उपभोक्ता उद्योगों में अंतर
| आधारभूत उद्योग | उपभोक्ता उद्योग |
|---|---|
| ये उद्योग अन्य उद्योगों को कच्चा माल या आधार प्रदान करते हैं। | ये उद्योग सीधे उपभोक्ताओं के उपयोग की वस्तुएँ बनाते हैं। |
| इनका उत्पादन आगे के औद्योगिक विकास के लिए आवश्यक होता है। | इनका उत्पादन दैनिक जीवन की आवश्यकताओं को पूरा करता है। |
| इनका विकास होने पर अन्य उद्योग भी विकसित होते हैं। | इनका विकास उपभोक्ता माँग पर निर्भर करता है। |
| उदाहरण: लोहा–इस्पात, सीमेंट, कोयला, बिजली उद्योग। | उदाहरण: कपड़ा, चीनी, साबुन, जूते, कागज उद्योग। |
(वर्णनात्मक – II)
(निम्न प्रश्नों के उत्तर प्रत्येक) लगभग 150 शब्दों में दीजिए।)
5. असहयोग आन्दोलन से आप क्या समझते हैं? इसके प्रमुख कारणों का उल्लेख करें।
Ans. असहयोग आन्दोलन भारत का एक प्रमुख राष्ट्रीय आन्दोलन था, जिसे महात्मा गाँधी के नेतृत्व में सन् 1920 में प्रारम्भ किया गया। इस आन्दोलन का उद्देश्य ब्रिटिश शासन को बिना हिंसा के कमजोर करना था। इसमें भारतीयों से अपील की गई कि वे ब्रिटिश सरकार द्वारा दी गई उपाधियों, सरकारी नौकरियों, न्यायालयों, विद्यालयों तथा विदेशी वस्त्रों का बहिष्कार करें और स्वदेशी वस्तुओं को अपनाएँ।
असहयोग आन्दोलन के प्रमुख कारण:
- जलियाँवाला बाग हत्याकाण्ड (1919): इस अमानवीय घटना ने भारतीयों को ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आक्रोश से भर दिया।
- रॉलेट एक्ट: इस कानून द्वारा बिना मुकदमा चलाए लोगों को गिरफ्तार करने का अधिकार सरकार को दिया गया, जिससे जन असंतोष बढ़ा।
- खिलाफत आन्दोलन: तुर्की के खलीफा के पद को बचाने हेतु मुस्लिम समुदाय में असंतोष था, जिसे गाँधी जी ने असहयोग आन्दोलन से जोड़ा।
- ब्रिटिश शासन की दमनकारी नीतियाँ: आर्थिक शोषण, नस्लीय भेदभाव और राजनीतिक अधिकारों की कमी ने आन्दोलन को जन्म दिया।
इस प्रकार असहयोग आन्दोलन ने स्वतंत्रता संघर्ष को जन-आन्दोलन का रूप दिया।
अथवा
इटली और जर्मनी के एकीकरण में यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय के योगदान का विश्लेषण कीजिए।
Ans. 19वीं शताब्दी में यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय ने इटली और जर्मनी के एकीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राष्ट्रवाद ने लोगों में समान भाषा, संस्कृति, इतिहास और एकता की भावना को जाग्रत किया, जिससे विभाजित राज्यों को एक राष्ट्र में संगठित करने की प्रेरणा मिली।
इटली के एकीकरण में राष्ट्रवाद का योगदान:
इटली अनेक छोटे-छोटे राज्यों में विभाजित था और विदेशी शक्तियों के अधीन था। राष्ट्रवादी नेताओं जैसे ज्यूसेपे मेज़िनी, कावूर और गैरीबाल्डी ने इटलीवासियों में राष्ट्रीय चेतना जाग्रत की। राष्ट्रवाद के प्रभाव से जनता ने विदेशी शासन का विरोध किया और अंततः 1871 में इटली का एकीकरण पूर्ण हुआ।
जर्मनी के एकीकरण में राष्ट्रवाद का योगदान:
जर्मनी भी अनेक राज्यों में बँटा हुआ था। जर्मन भाषा, संस्कृति और परंपराओं ने राष्ट्रवाद को मजबूत किया। प्रशा के नेतृत्व में आटो वॉन बिस्मार्क ने राष्ट्रवादी भावना का उपयोग कर युद्ध और कूटनीति के माध्यम से जर्मन राज्यों को एकजुट किया। 1871 में जर्मनी एकीकृत राष्ट्र बना।
निष्कर्ष:
इस प्रकार यूरोप में राष्ट्रवाद के उदय ने इटली और जर्मनी के एकीकरण की नींव रखी और आधुनिक राष्ट्र-राज्यों के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाई।
6. भारत के संघात्मक शासन व्यवस्था की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।
Ans. भारत में संघात्मक शासन व्यवस्था अपनाई गई है, जिसमें शक्तियों का विभाजन केन्द्र और राज्यों के बीच किया गया है। भारतीय संविधान ने देश की एकता बनाए रखते हुए संघीय ढाँचे को सुदृढ़ किया है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- लिखित एवं सर्वोच्च संविधान:
भारत का संविधान लिखित है और देश का सर्वोच्च कानून है। केन्द्र तथा राज्य दोनों को संविधान के अनुसार ही कार्य करना होता है। - शक्तियों का विभाजन:
संविधान में केन्द्र और राज्यों के अधिकारों को संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची में बाँटा गया है, जिससे दोनों अपने-अपने क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से कार्य कर सकें। - द्विस्तरीय शासन प्रणाली:
भारत में दो स्तरों पर सरकारें हैं—केन्द्र सरकार और राज्य सरकारें, जो अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में कार्य करती हैं। - स्वतंत्र न्यायपालिका:
सुप्रीम कोर्ट और उच्च न्यायालय संविधान की रक्षा करते हैं तथा केन्द्र–राज्य विवादों का समाधान करते हैं। - लचीलापन और शक्तिशाली केन्द्र:
भारतीय संघात्मक व्यवस्था में आपातकालीन प्रावधानों के कारण केन्द्र को अधिक शक्तियाँ दी गई हैं, जिससे राष्ट्रीय एकता बनी रहती है।
इस प्रकार भारत की संघात्मक शासन व्यवस्था एकता और विविधता के संतुलन पर आधारित है।
अथवा
लैंगिक असमानता से आप क्या समझते हैं? भारत की राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर प्रकाश डालिए।
Ans. लैंगिक असमानता से तात्पर्य समाज में पुरुषों और महिलाओं के बीच अधिकारों, अवसरों, सम्मान तथा संसाधनों के वितरण में होने वाले भेदभाव से है। इसमें महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, राजनीति और निर्णय-निर्माण की प्रक्रियाओं में पुरुषों की तुलना में कम अवसर प्राप्त होते हैं।
भारत की राजनीतिक व्यवस्था में महिलाओं का प्रतिनिधित्व:
भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था होने के बावजूद राजनीति में महिलाओं का प्रतिनिधित्व अपेक्षाकृत कम रहा है। लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या लंबे समय तक सीमित रही। हालाँकि स्थानीय स्वशासन संस्थाओं—पंचायती राज व्यवस्था और नगर निकायों—में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण (कुछ राज्यों में 50%) ने उनके राजनीतिक सहभाग को बढ़ाया है।
हाल ही में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान किया गया है, जिससे भविष्य में महिला प्रतिनिधित्व में उल्लेखनीय वृद्धि की संभावना है।
इस प्रकार, यद्यपि भारत में लैंगिक असमानता अब भी एक चुनौती है, परन्तु संवैधानिक एवं कानूनी प्रयासों से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी धीरे-धीरे सशक्त हो रही है।
7. सार्वजनिक वस्तु से क्या आशय है? एक औसत व्यक्ति के जीवन स्तर में सार्वजनिक वस्तुओं के किन्हीं दो प्रभावों की चर्चा कीजिए।
Ans. सार्वजनिक वस्तु से तात्पर्य उन वस्तुओं और सेवाओं से है, जिन्हें सरकार या सार्वजनिक संस्थाओं द्वारा समाज के सभी लोगों के लिए उपलब्ध कराया जाता है। इन वस्तुओं का लाभ किसी एक व्यक्ति तक सीमित नहीं होता, बल्कि समाज का प्रत्येक सदस्य बिना भेदभाव के इनका उपयोग कर सकता है। सार्वजनिक वस्तुओं में शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएँ, सड़कें, पुल, स्वच्छ पेयजल, बिजली, पुलिस सुरक्षा, सार्वजनिक परिवहन आदि शामिल हैं। इनका मुख्य उद्देश्य लाभ कमाना नहीं, बल्कि जनता के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और सामाजिक कल्याण करना होता है।
एक औसत व्यक्ति के जीवन स्तर पर सार्वजनिक वस्तुओं के प्रभाव:
- स्वास्थ्य और शिक्षा के स्तर में सुधार:
सरकारी अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, विद्यालय और महाविद्यालय जैसी सार्वजनिक वस्तुएँ आम व्यक्ति को कम खर्च में बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा प्रदान करती हैं। इससे व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है, कार्यक्षमता बढ़ती है और रोजगार के बेहतर अवसर प्राप्त होते हैं। स्वस्थ और शिक्षित व्यक्ति का जीवन स्तर स्वतः ही ऊँचा हो जाता है। - सामाजिक एवं आर्थिक समानता को बढ़ावा:
सार्वजनिक वस्तुएँ समाज के गरीब और कमजोर वर्गों के लिए अत्यंत उपयोगी होती हैं। सड़क, परिवहन, जल आपूर्ति और बिजली जैसी सुविधाएँ सभी को समान रूप से उपलब्ध होने से अमीर और गरीब के बीच की खाई कम होती है। इससे समाज में समान अवसर, सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को बढ़ावा मिलता है।
अथवा
क्या निजी क्षेत्र के विकास में सरकारी समर्थन की आवश्यकता पड़ती है? किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
Ans. हाँ, निजी क्षेत्र के विकास में सरकारी समर्थन की आवश्यकता अवश्य पड़ती है। केवल निजी पूँजी और प्रयासों से उद्योगों का संतुलित व दीर्घकालीन विकास संभव नहीं होता। सरकार की नीतियाँ और सहयोग निजी क्षेत्र को स्थिरता, सुरक्षा और विस्तार प्रदान करते हैं।
सरकारी समर्थन की आवश्यकता के दो प्रमुख कारण:
- आधारभूत संरचना की उपलब्धता:
निजी क्षेत्र को उद्योग स्थापित करने के लिए सड़क, बिजली, जल, परिवहन, संचार और औद्योगिक भूमि जैसी सुविधाओं की आवश्यकता होती है। इन आधारभूत संरचनाओं का विकास सरकार द्वारा किया जाता है। यदि सरकार सहयोग न करे तो निजी क्षेत्र का विकास बाधित हो जाता है। - वित्तीय एवं नीतिगत सहायता:
सरकार कर में छूट, सब्सिडी, सस्ते ऋण, निवेश प्रोत्साहन तथा उद्योग-हितैषी नीतियाँ बनाकर निजी क्षेत्र को बढ़ावा देती है। इससे उद्यमियों का जोखिम कम होता है और वे नए उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
निष्कर्ष:
इस प्रकार सरकारी समर्थन के बिना निजी क्षेत्र का विकास न तो संतुलित हो सकता है और न ही देश की अर्थव्यवस्था को अपेक्षित गति मिल सकती है।
8. बहु-उद्देशीय नदी परियोजना क्या होती है? यह जल का संरक्षण एवं प्रबन्धन में किस प्रकार सहायता करती है ?
Ans. बहु-उद्देशीय नदी परियोजना वह परियोजना होती है जिसमें किसी नदी पर बाँध अथवा जलाशय का निर्माण करके जल का उपयोग एक से अधिक उद्देश्यों के लिए किया जाता है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य केवल सिंचाई ही नहीं, बल्कि जलविद्युत उत्पादन, बाढ़ नियंत्रण, पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक उपयोग, मत्स्य पालन तथा क्षेत्रीय विकास भी होता है। उदाहरण के रूप में भाखड़ा-नांगल, हीराकुंड और दामोदर घाटी परियोजनाएँ प्रमुख हैं।
जल के संरक्षण एवं प्रबन्धन में सहायता:
- जल संग्रहण एवं संरक्षण:
बाँधों में वर्षा के जल को संग्रहित किया जाता है, जिससे पानी व्यर्थ बहकर समुद्र में नहीं जाता। सूखे समय में यही जल सिंचाई, पेयजल और उद्योगों के लिए उपयोग में लाया जाता है। - बाढ़ एवं सूखा नियंत्रण:
बहु-उद्देशीय परियोजनाएँ वर्षा ऋतु में अतिरिक्त जल को रोककर बाढ़ की तीव्रता को कम करती हैं तथा कम वर्षा वाले क्षेत्रों में नियंत्रित रूप से जल छोड़कर सूखे की समस्या को घटाती हैं। - सिंचाई एवं जल वितरण का नियमन:
इन परियोजनाओं से नहरों द्वारा खेतों तक जल पहुँचाया जाता है। इससे जल का नियोजित और समान वितरण संभव होता है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार बहु-उद्देशीय नदी परियोजनाएँ जल संरक्षण, जल प्रबन्धन और राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
अथवा
गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन से आप क्या समझते हैं? किन्हीं दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोतों पर प्रकाश डालिए।
Ans. गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन वे ऊर्जा स्रोत होते हैं जो प्रकृति में निरन्तर उपलब्ध रहते हैं, बार-बार उपयोग किए जा सकते हैं और जिनसे पर्यावरण को न्यूनतम क्षति पहुँचती है। ये ऊर्जा स्रोत पारम्परिक जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस) का विकल्प हैं तथा प्रदूषण कम करने और ऊर्जा संकट को दूर करने में सहायक होते हैं।
दो गैर-परम्परागत ऊर्जा स्रोत:
- सौर ऊर्जा:
सौर ऊर्जा सूर्य के प्रकाश से प्राप्त की जाती है। सोलर पैनलों की सहायता से सूर्य किरणों को विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित किया जाता है। यह ऊर्जा प्रदूषण-रहित, अक्षय और ग्रामीण तथा दूर-दराज़ क्षेत्रों के लिए अत्यंत उपयोगी है। भारत जैसे उष्णकटिबंधीय देश में सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। - पवन ऊर्जा:
पवन ऊर्जा तेज़ हवा की शक्ति से प्राप्त की जाती है। पवन चक्कियों के माध्यम से हवा की गतिज ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदला जाता है। यह भी एक स्वच्छ और अक्षय ऊर्जा स्रोत है तथा इससे वायु प्रदूषण नहीं होता। भारत में तमिलनाडु, गुजरात और राजस्थान में पवन ऊर्जा का व्यापक विकास हुआ है।
निष्कर्ष:
इस प्रकार गैर-परम्परागत ऊर्जा संसाधन पर्यावरण संरक्षण, ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
( मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न )
निर्देश: प्रश्न संख्या 9 (A) तथा 9 (B) मानचित्र से संबंधित हैं।
9(A). निम्नलिखित स्थानों को भारत के दिये गये रेखा मानचित्र में चिह्न द्वारा नाम सहित दर्शाइए। सही नाम तथा स्थान अंकन के लिए 1/2, 1/2 अंक निर्धारित हैं:
i) वह जनपद जहाँ चौरी-चौरा की घटना घटी थी।
ii) वह स्थान जहाँ नील की खेती करने वाले किसानों का आन्दोलन हुआ था।
iii) बह स्थान जहाँ सर्वप्रथम महात्मा गाँधी ने नमक बनाया था।
iv) वह स्थान जहाँ दिसम्बर, 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ था।
v) वह स्थान जहाँ चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुये थे।
Ans. मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों को सही स्थान पर चिह्नित कर नाम लिखिए—
i) चौरी-चौरा (जनपद–गोरखपुर, उत्तर प्रदेश)
ii) चम्पारण (बिहार) – नील की खेती करने वाले किसानों का आन्दोलन
iii) दांडी (गुजरात) – जहाँ सर्वप्रथम महात्मा गाँधी ने नमक बनाया
iv) लाहौर (अब पाकिस्तान) – दिसम्बर 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन
v) इलाहाबाद/प्रयागराज (अल्फ्रेड पार्क, उत्तर प्रदेश) – जहाँ चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुए
9 (B). निर्देश दिये गये भारत के रेखा मानचित्र में बिम्नलिखित को दर्शाइए सही नाम तथा :
i) महानदी को λ चिह्न द्वारा राज्य के नाम सहित।
ii) तेलंगाना राज्य की राजधानी नगर © चिह्न द्वारा नाम सहित।
iii) दक्षिण भारत का एक सूती वस्त्र उद्योग का केन्द्र § चिह्न द्वारा नाम सहित।
iv) उत्तर भारत में स्थित एक राष्ट्रीय पार्क ¢ चिह्न द्वारा नाम सहित।
v) मध्य भारत में स्थित एक नदी घाटी परियोजना = चिह्न द्वारा नाम सहित।
Ans. भारत के रेखा मानचित्र में निम्नलिखित को निर्धारित चिह्नों के साथ नाम सहित दर्शाइए—
i) महानदी – ओडिशा राज्य (λ)
ii) हैदराबाद – तेलंगाना की राजधानी (©)
iii) कोयम्बटूर (तमिलनाडु) – दक्षिण भारत का सूती वस्त्र उद्योग केन्द्र (§)
iv) जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान (उत्तराखण्ड) – उत्तर भारत में स्थित राष्ट्रीय पार्क (¢)
v) भाखड़ा–नांगल नदी घाटी परियोजना (मध्य/उत्तर भारत) (=)
( केवल दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिये मानचित्र कार्य के विकल्प के रूप में)
9(A). निर्देश: निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए। मानचित्र का प्रयोग न कीजिए।
i) किस जनपद में चौरी-चौरा की घटना हुई थी ?
Ans. चौरी-चौरा की घटना उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जनपद में हुई थी।
ii) किस स्थान पर नील की खेती करने वाले किसानों का आन्दोलन हुआ था ?
Ans. नील की खेती करने वाले किसानों का आन्दोलन चम्पारण (बिहार) में हुआ था।
iii) किस स्थान पर गाँधी जी ने सर्वप्रथम नमक बनाया ?
Ans. महात्मा गाँधी ने सर्वप्रथम दांडी (गुजरात) में नमक बनाया था।
iv) किस स्थान पर दिसम्बर, 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन हुआ ?
Ans. दिसम्बर, 1929 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन लाहौर में हुआ था।
v) किस स्थान पर चन्द्रशेखर आजाद शहीद हुए थे ?
Ans. चन्द्रशेखर आज़ाद इलाहाबाद (वर्तमान प्रयागराज) के अल्फ्रेड पार्क में शहीद हुए थे।