U.P Board Class 12 Economics 329(DG) Question Paper 2024

U.P Board Class 12 Economics 329(DG) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
अर्थशास्त्र
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 100

नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

निर्देश:

i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

ii) प्रश्न संख्या 1 से 10 तक बहुविकल्पीय हैं, जिनका केवल सही उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखना है। प्रश्न संख्या 11 से 16 तक अतिलघु उत्तरीय हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में, प्रश्न संख्या 17 से 22 तक लघु उत्तरीय हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 150 शब्दों में लिखना है एवं प्रश्न संख्या 23 से 25 तक विस्तृत उत्तरीय हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 300 शब्दों में लिखना है ।

iii) प्रत्येक प्रश्न के लिये निर्धारित अंक उसके सम्मुख अंकित हैं।

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर अपनी उत्तर पुस्तिका में शिखिए:

1. रॉबिन्स अर्थशास्त्र को कैसे परिभाषित करते हैं ?

अ) बाजार विज्ञान
ब) व्यवसाय विज्ञान
स) जीवन विज्ञान
द) अभाव विज्ञान

Ans. द) अभाव विज्ञान

2. इन्वेंटरी एक ……….. अवधारणा है जबकि इन्वेंटरी में परिवर्तन एक ………….. अवधारणा है।

अ) स्टॉक, प्रवाह
ब) प्रवाह, स्टॉक
स) स्टॉक, स्टॉक
द) प्रवाह, प्रवाह

Ans. अ) स्टॉक, प्रवाह

3. उपभोग फलन वक्र है

अ) ऊपर की ओर प्रवण (ढाल)
ब) नीचे की ओर प्रवण (ढाल)
स) x-अक्ष के समांतर
द) y-अक्ष के समांतर

Ans. अ) ऊपर की ओर प्रवण (ढाल)

4. निम्नलिखित में से कौन-सा एक वित्तीय संस्थान को बैंक बनाता है ?

अ) जमा स्वीकार करना
स) माँग जमा स्वीकार करना
ब) उधार देना
द) सावधि जमा स्वीकार करना

Ans. स) माँग जमा स्वीकार करना

5. नकद आरक्षित अनुपात में कमी से

अ) समग्र माँग में गिरावट होगी
ब) समग्र माँग में वृद्धि होगी
स) समग्र माँग में कोई परिवर्तन नहीं होगा
द) सामान्य मूल्य स्तर में गिरावट होगी

Ans. ब) समग्र माँग में वृद्धि होगी

6. एकाधिकार में औसत राजस्व वक्र का आकार होता है

अ) ऊपर की ओर बढ़ता हुआ
स) नीचे की ओर झुकता हुआ
ब) U-आकार का
द) S-आकार का

Ans. स) नीचे की ओर झुकता हुआ

7. सरकारी बजट में राजकोषीय घाटा दर्शाता है

अ) करों में कमी
स) विनिवेश में कमी
ब) विनिवेश आबश्यकता
द) उधार

Ans. द) उधार

8. सरकारी बजट के माध्यम से उठाए गए कदम निम्नलिखित में किस को प्रवाहित कर सकते हैं ?

अ) असमानताएँ
स) मुद्रास्फीति
ब) संसाधनों का आवंटन
द) इनमें से सभी

Ans. द) इनमें से सभी

9. जब घरेलू मुद्रा के संदर्भ में विनिमय दर बढ़ती है

अ) निर्यात सस्ता हो जाता है
स) निर्यात महंगा हो जाता है
ब) आयात सस्ता हो जाता है
द) आयात पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता

Ans. स) निर्यात महंगा हो जाता है

10. व्यापार संतुलन बराबर है

अ) निर्यात घटा आयात
स) सेवाओं का निर्यात घटा सेवाओं का आयात
ब) वस्तुओं का निर्यात घटा वस्तुओं का आयात
द) इनमें से कोई नहीं

Ans. ब) वस्तुओं का निर्यात घटा वस्तुओं का आयात

(अति मधु उत्तरीय प्रश्न)

11. व्यष्टि अर्थशास्त्र तथा समष्टि अर्थशास्त्र में अंतर स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
व्यष्टि अर्थशास्त्र में अर्थव्यवस्था की व्यक्तिगत इकाइयों, जैसे उपभोक्ता, फर्म, किसी वस्तु की कीमत, माँग, पूर्ति आदि का अध्ययन किया जाता है। इसके विपरीत, समष्टि अर्थशास्त्र में पूरी अर्थव्यवस्था का अध्ययन किया जाता है। इसमें राष्ट्रीय आय, सामान्य मूल्य स्तर, रोजगार, बेरोजगारी, आर्थिक वृद्धि आदि का अध्ययन किया जाता है।

12. स्थानापन्न बस्तुओं को परिभाषित कीजिए। ऐसी हो. वस्तुओं के उदाहरण दीजिए जो एक दूसरे के स्थानापन्न हैं।
Ans.
वे वस्तुएँ जो एक-दूसरे के स्थान पर प्रयोग की जा सकती हैं, स्थानापन्न वस्तुएँ कहलाती हैं। एक वस्तु की कीमत बढ़ने पर दूसरी वस्तु की माँग बढ़ जाती है। उदाहरण के लिए चाय और कॉफी, मक्खन और मार्जरीन तथा पेन और पेंसिल एक-दूसरे की स्थानापन्न वस्तुएँ हैं।

13. बजट रेखा की प्रवणता (ढाल) नीचे की ओर क्यों होती है ? समझाइए ।
Ans.
बजट रेखा उपभोक्ता की आय तथा दो वस्तुओं की कीमतों के आधार पर उसके खरीदने की संभावनाओं को दर्शाती है। यदि उपभोक्ता एक वस्तु की अधिक मात्रा खरीदता है तो समान आय में दूसरी वस्तु की मात्रा कम करनी पड़ती है। इसलिए बजट रेखा बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुकी होती है।

बजट रेखा की ढाल:

ढाल = -{PX}/{PY}

होती है।

14. नियोजित और अनियोजित माल- सूची संचय में क्या अंतर है? व्याख्या करें।
Ans.
नियोजित माल-सूची संचय वह होता है जिसे फर्म जानबूझकर भविष्य की माँग को ध्यान में रखकर रखती है।

अनियोजित माल-सूची संचय तब होता है जब वास्तविक बिक्री और फर्म द्वारा अपेक्षित बिक्री में अंतर के कारण माल बिना बिके रह जाता है। उदाहरण के लिए, यदि फर्म ने अधिक बिक्री की आशा की थी लेकिन वास्तविक माँग कम रही, तो बचा हुआ माल अनियोजित माल-सूची संचय कहलाता है।

15. मुद्रा आपूर्ति के घटकों की व्याख्या करें ।
Ans.
मुद्रा आपूर्ति से आशय अर्थव्यवस्था में किसी समय जनता के पास उपलब्ध मुद्रा की मात्रा से है। इसके प्रमुख घटक हैं—

  1. जनता के पास मुद्रा — जनता के पास मौजूद नोट और सिक्के।
  2. बैंकों में माँग जमा — वे जमा राशियाँ जिन्हें माँगने पर निकाला जा सकता है।
  3. अन्य जमा — बैंकिंग प्रणाली में उपलब्ध ऐसी जमा राशियाँ जिन्हें मुद्रा आपूर्ति में शामिल किया जाता है।

अर्थव्यवस्था में मुद्रा आपूर्ति मुख्यतः केंद्रीय बैंक और वाणिज्यिक बैंकों की गतिविधियों से प्रभावित होती है।

16. आम जनता को केंद्रीय बैंक में खाता खोलने की अनुमति नहीं है। क्या इसका मतलब यह है कि केन्द्रीय बैंक कोई वाणिज्यिक बैंकिंग गतिविधि नहीं करता है ? स्पष्ट कीजिए।
Ans.
नहीं। केंद्रीय बैंक आम जनता से सामान्य बैंक की तरह जमा स्वीकार नहीं करता, लेकिन वह वाणिज्यिक बैंकों का बैंक होता है। वह बैंकों के खाते रखता है, उन्हें आवश्यकता पड़ने पर ऋण देता है, बैंकों के बीच भुगतान एवं समाशोधन की सुविधा देता है तथा सरकार के बैंक के रूप में भी कार्य करता है।

(लघु उत्तरीय प्रश्न)

17. पूर्णतया स्थानापन्न वस्तुओं के मध्य प्रतिस्थापन की सीमाम दर (एमआरएस) स्थिर रहती है। चित्र सहित व्याख्या कीजिए ।
Ans.
पूर्णतया स्थानापन्न वस्तुएँ वे वस्तुएँ हैं जिन्हें उपभोक्ता एक-दूसरे के स्थान पर समान संतुष्टि प्राप्त करने के लिए प्रयोग कर सकता है। ऐसी वस्तुओं की स्थिति में एक वस्तु की निश्चित मात्रा को दूसरी वस्तु की निश्चित मात्रा से लगातार बदला जा सकता है।

प्रतिस्थापन की सीमांत दर (MRS) से आशय उस मात्रा से है जितनी एक वस्तु का त्याग करके दूसरी वस्तु की एक अतिरिक्त इकाई प्राप्त की जाती है।

पूर्ण स्थानापन्न वस्तुओं के मामले में MRS स्थिर रहती है, क्योंकि उपभोक्ता दोनों वस्तुओं को एक निश्चित अनुपात में बदलने के लिए तैयार रहता है। इसलिए इनकी उदासीनता वक्र सीधी रेखा होती है।

उदाहरण के लिए, यदि 1 कप चाय के बदले 1 कप कॉफी हमेशा समान संतुष्टि देता है, तो MRS = 1 रहेगी।

Y (वस्तु Y)
│
│ \ 
│   \ 
│     \  IC (उदासीनता वक्र)
│       \ 
│         \ 
└────\─────────────── X (वस्तु X)

अतः पूर्ण स्थानापन्न वस्तुओं की उदासीनता वक्र ऋणात्मक ढाल वाली सीधी रेखा होती है और MRS स्थिर रहती है।

रेखाचित्र की व्याख्या:

  • X-अक्ष: वस्तु X की मात्रा
  • Y-अक्ष: वस्तु Y की मात्रा
  • IC वक्र: बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुकती हुई एक सीधी रेखा है।
  • क्योंकि रेखा की ढाल हर बिंदु पर समान (ΔY / ΔX = स्थिर) रहती है, इसलिए MRSXY पूरी रेखा पर स्थिर (Constant) बनी रहती है।

18. नीचे दी गई तालिका एक फर्म की कुल लागत अनुसूची देर्शाती है। फर्म के कुल स्थित लागत, कुल परिवर्ती लागत, औसत परिवर्ती लागत, औसत लागत तथा सीमांत लागत की गणना कीजिए :

Qकुल लागत
010
130
245
355
470
590
6120

Ans.

गणना के सूत्र

  • कुल स्थिर लागत (TFC) = ₹10
  • कुल परिवर्ती लागत (TVC) = TC − TFC
  • औसत परिवर्ती लागत (AVC) = TVC / Q
  • औसत लागत (AC) = TC / Q
  • सीमांत लागत (MC) = ΔTC / ΔQ

चूँकि उत्पादन की प्रत्येक अतिरिक्त इकाई के लिए Q में 1 इकाई की वृद्धि है, इसलिए MC = वर्तमान TC − पिछली TC होगा।

पूर्ण तालिका

QTCTFCTVC = TC−TFCAVC = TVC/QAC = TC/QMC = ΔTC
010100
130102020.0030.0020
245103517.5022.5015
355104515.0018.3310
470106015.0017.5015
590108016.0018.0020
61201011018.3320.0030

उदाहरण द्वारा समझिए

जब Q = 4 है:

TVC = TC − TFC
= 70 − 10
= ₹60

AVC = TVC/Q
= 60/4
= ₹15

AC = TC/Q
= 70/4
= ₹17.50

MC = TC₄ − TC₃
= 70 − 55
= ₹15

19. राष्ट्रीय आय गणना की तीनों विधियों से किसी देश के सकल घरेलू उत्पाद की गणना करने की किन्हीं तीन विशिष्टताएँ लिखिए ।
Ans.
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना मुख्यतः तीन विधियों से की जाती है—

1. उत्पादन विधि

इसमें देश की घरेलू सीमा के भीतर एक निश्चित अवधि में उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को जोड़ा जाता है। दोहरी गणना से बचने के लिए केवल अंतिम वस्तुओं अथवा मूल्य-वर्धन को शामिल किया जाता है।

2. आय विधि

इसमें उत्पादन के साधनों को प्राप्त होने वाली आय को जोड़ा जाता है। इसमें मजदूरी, किराया, ब्याज और लाभ आदि शामिल होते हैं।

3. व्यय विधि

इसमें अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं पर किए गए कुल व्यय को जोड़ा जाता है। इसमें उपभोग व्यय, निवेश व्यय, सरकारी व्यय तथा शुद्ध निर्यात को शामिल किया जाता है।

तीनों विधियों से सैद्धान्तिक रूप से GDP का समान मूल्य प्राप्त होना चाहिए।

20. राजस्व घाटा और राजकोषीय घाटा में संबंध बताइए। क्या राजकोषीय घाटा स्फीतिकारी है ?
Ans.
राजस्व घाटा तब होता है जब सरकार का राजस्व व्यय उसके राजस्व प्राप्तियों से अधिक होता है।

[ राजस्व घाटा = राजस्व व्यय – राजस्व प्राप्तियाँ ]

राजकोषीय घाटा सरकार के कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच का अंतर है।

[ राजकोषीय घाटा = कुल व्यय – कुल प्राप्तियाँ ]

इन दोनों में संबंध यह है कि राजस्व घाटा राजकोषीय घाटे का एक महत्वपूर्ण भाग हो सकता है।

राजकोषीय घाटा हमेशा स्फीतिकारी नहीं होता। यदि घाटे की पूर्ति से अर्थव्यवस्था में कुल माँग बहुत बढ़ जाती है और उत्पादन की तुलना में माँग अधिक हो जाती है, तो मूल्य स्तर बढ़ सकता है और मुद्रास्फीति उत्पन्न हो सकती है। परंतु यदि अतिरिक्त व्यय से उत्पादन क्षमता बढ़ती है, तो उसका प्रभाव अलग हो सकता है।

21. आधिकारिक आरक्षित लेन-देन क्या हैं? भुगतान संतुलन में इनके महत्व का वर्णन कीजिए ।
Ans.
विदेशी मुद्रा भंडार में परिवर्तन तथा केंद्रीय बैंक द्वारा विदेशी मुद्रा की खरीद-बिक्री से संबंधित लेन-देन को आधिकारिक आरक्षित लेन-देन कहा जाता है।

इनका प्रमुख महत्व है—

  1. भुगतान संतुलन के असंतुलन को समायोजित करना।
  2. विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बनाए रखना।
  3. विनिमय दर को स्थिर रखने में सहायता करना।
  4. विदेशी भुगतान संबंधी दायित्वों को पूरा करने में सहायता करना।
  5. देश के विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति को प्रभावित करना।

इस प्रकार आधिकारिक आरक्षित लेन-देन भुगतान संतुलन को संतुलित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

22. कुल आगम, औसत आगम और सीमान्त आगम का वर्णन कीजिए ।
Ans.
किसी फर्म को वस्तुओं एवं सेवाओं की बिक्री से प्राप्त होने वाली आय को आगम (Revenue) कहते हैं। आगम के प्रमुख तीन प्रकार हैं—कुल आगम, औसत आगम तथा सीमान्त आगम।

1. कुल आगम (Total Revenue—TR):
किसी फर्म द्वारा एक निश्चित मात्रा में वस्तु बेचने से प्राप्त कुल आय को कुल आगम कहते हैं।
सूत्र:
TR = P × Q
जहाँ P = प्रति इकाई कीमत तथा Q = बेची गई मात्रा।

2. औसत आगम (Average Revenue—AR):
प्रति इकाई वस्तु की बिक्री से प्राप्त आगम को औसत आगम कहते हैं।
सूत्र:
AR = TR/Q
चूँकि TR = P × Q, इसलिए AR = P। अतः औसत आगम वस्तु की कीमत के बराबर होता है।

3. सीमान्त आगम (Marginal Revenue—MR):
एक अतिरिक्त इकाई वस्तु बेचने से कुल आगम में होने वाली वृद्धि को सीमान्त आगम कहते हैं।
सूत्र:
MR = ΔTR/ΔQ

उदाहरण: यदि 10 इकाइयाँ बेचने पर कुल आगम ₹500 है और 11 इकाइयाँ बेचने पर कुल आगम ₹540 हो जाता है, तो 11वीं इकाई का सीमान्त आगम ₹40 होगा।

(विस्तुत उत्तरीय प्रश्न)

23. विभिन्न प्रकार की लागतें (स्थिर, परिवर्तनशील, कुल, औसत, सीमांत) क्या हैं और वे किस प्रकार संबंधित हैं ? आरेखों की सहायता से समझाइए ।
Ans.
उत्पादन की प्रक्रिया में फर्म द्वारा उत्पादन के साधनों पर किए गए व्यय को उत्पादन लागत कहते हैं। अल्पकाल में लागतों को मुख्यतः स्थिर लागत, परिवर्तनशील लागत, कुल लागत, औसत लागत तथा सीमांत लागत में बाँटा जाता है।

1. स्थिर लागत (Fixed Cost)

वह लागत जो उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर भी स्थिर रहती है, स्थिर लागत कहलाती है। उत्पादन शून्य होने पर भी यह लागत देनी पड़ती है।

उदाहरण: भवन का किराया, मशीन का बीमा, स्थायी कर्मचारियों का वेतन आदि।

इसे कुल स्थिर लागत (TFC) कहते हैं।

TFC = स्थिर

2. परिवर्तनशील लागत (Variable Cost)

वह लागत जो उत्पादन की मात्रा के साथ बदलती है, परिवर्तनशील लागत कहलाती है। उत्पादन बढ़ने पर यह सामान्यतः बढ़ती है और उत्पादन शून्य होने पर यह भी शून्य हो जाती है।

उदाहरण: कच्चा माल, बिजली की लागत, उत्पादन से संबंधित मजदूरी आदि।

इसे कुल परिवर्तनशील लागत (TVC) कहते हैं।

3. कुल लागत (Total Cost)

कुल स्थिर लागत तथा कुल परिवर्तनशील लागत के योग को कुल लागत (TC) कहते हैं।

TC = TFC + TVC

उत्पादन बढ़ने पर TVC बढ़ती है, इसलिए TC भी बढ़ती है। TC और TVC के बीच ऊर्ध्वाधर दूरी TFC के बराबर रहती है।

4. औसत लागत (Average Cost)

प्रति इकाई उत्पादन पर होने वाली लागत को औसत लागत (AC) कहते हैं।

AC = TC/Q

औसत लागत को इस प्रकार भी लिखा जा सकता है—

AC = AFC + AVC

जहाँ AFC = TFC/Q तथा AVC = TVC/Q

उत्पादन बढ़ने पर AFC लगातार घटती है। AC और AVC सामान्यतः U-आकार के वक्र होते हैं।

5. सीमांत लागत (Marginal Cost)

उत्पादन की एक अतिरिक्त इकाई उत्पन्न करने पर कुल लागत में होने वाली वृद्धि को सीमांत लागत (MC) कहते हैं।

MC = ΔTC/ΔQ

चूँकि स्थिर लागत में परिवर्तन नहीं होता, इसलिए—

MC = ΔTVC/ΔQ

सीमांत लागत वक्र सामान्यतः पहले घटता है और एक न्यूनतम बिंदु के बाद बढ़ने लगता है।

लागतों में संबंध

इन लागतों के बीच निम्न संबंध पाए जाते हैं—

  1. TC = TFC + TVC
  2. AC = AFC + AVC
  3. MC = ΔTC/ΔQ
  4. MC = ΔTVC/ΔQ
  5. AFC उत्पादन बढ़ने के साथ लगातार घटती है।
  6. MC, AVC को उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।
  7. MC, AC को भी उसके न्यूनतम बिंदु पर काटता है।
  8. जब MC < AC, तब AC घटती है।
  9. जब MC > AC, तब AC बढ़ती है।
  10. जब MC = AC, तब AC न्यूनतम होती है।

अथवा

बाजार आपूर्ति से आप क्या समझते हैं? आपूर्ति के निर्धारक तत्वों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
किसी वस्तु की विभिन्न कीमतों पर किसी निश्चित समयावधि में सभी विक्रेताओं द्वारा बाजार में बिक्री के लिए प्रस्तुत की जाने वाली वस्तु की कुल मात्रा को बाजार आपूर्ति कहते हैं। दूसरे शब्दों में, किसी बाजार में कार्यरत सभी फर्मों की व्यक्तिगत आपूर्ति का योग बाजार आपूर्ति कहलाता है।

बाजार आपूर्ति = सभी फर्मों की व्यक्तिगत आपूर्ति का योग

सामान्यतः अन्य बातें समान रहने पर वस्तु की कीमत बढ़ने पर उसकी आपूर्ति बढ़ती है तथा कीमत घटने पर आपूर्ति घटती है। इसलिए आपूर्ति वक्र सामान्यतः बाएँ से दाएँ ऊपर की ओर चढ़ता हुआ होता है।

आपूर्ति के निर्धारक तत्व

किसी वस्तु की आपूर्ति को निम्नलिखित प्रमुख तत्व प्रभावित करते हैं—

1. वस्तु की कीमत:
वस्तु की कीमत बढ़ने पर उत्पादक को अधिक लाभ मिलने की संभावना होती है, इसलिए वह अधिक मात्रा में वस्तु की आपूर्ति करना चाहता है। कीमत घटने पर आपूर्ति सामान्यतः घट जाती है।

2. उत्पादन के साधनों की कीमत:
कच्चे माल, श्रम, मशीन आदि की कीमत बढ़ने पर उत्पादन लागत बढ़ जाती है और आपूर्ति घट सकती है। इनकी कीमत घटने पर आपूर्ति बढ़ सकती है।

3. तकनीक:
नई एवं उन्नत तकनीक से उत्पादन अधिक कुशलता से और कम लागत पर किया जा सकता है। इससे वस्तु की आपूर्ति बढ़ सकती है।

4. संबंधित वस्तुओं की कीमत:
यदि उत्पादक को किसी दूसरी वस्तु के उत्पादन में अधिक लाभ दिखाई देता है, तो वह संसाधनों को उस वस्तु की ओर स्थानांतरित कर सकता है। इससे पहली वस्तु की आपूर्ति प्रभावित होती है।

5. उत्पादकों की संख्या:
बाजार में उत्पादकों की संख्या बढ़ने पर बाजार की कुल आपूर्ति बढ़ती है। उत्पादकों की संख्या घटने पर बाजार आपूर्ति घट सकती है।

6. सरकार की कर एवं सब्सिडी नीति:
करों में वृद्धि से उत्पादन लागत बढ़ सकती है और आपूर्ति कम हो सकती है। इसके विपरीत, सरकारी सब्सिडी से उत्पादन लागत कम होने पर आपूर्ति बढ़ सकती है।

7. भविष्य की कीमतों के संबंध में अपेक्षाएँ:
यदि उत्पादकों को भविष्य में कीमत बढ़ने की आशा हो, तो वे वर्तमान में कम मात्रा बेचकर भंडारण कर सकते हैं। इसके विपरीत, भविष्य में कीमत घटने की आशंका होने पर वर्तमान आपूर्ति बढ़ सकती है।

8. प्राकृतिक परिस्थितियाँ:
कृषि उत्पादों की आपूर्ति पर वर्षा, तापमान, बाढ़, सूखा आदि प्राकृतिक परिस्थितियों का विशेष प्रभाव पड़ता है। अनुकूल परिस्थितियों में आपूर्ति बढ़ती है और प्रतिकूल परिस्थितियों में घट सकती है।

24. उपभोक्ता संतुलन क्या है? उदासीनता वक्र और बजट रेखाओं की अबधारणा का उपयोग करके उपभोक्ता संतुलन प्राप्त करने की शर्तों की व्याख्या कीजिए। चित्र द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Ans.
उपभोक्ता संतुलन से आशय उस स्थिति से है जिसमें उपभोक्ता अपनी निश्चित आय, वस्तुओं की दी हुई कीमतों तथा अपनी पसंद एवं प्राथमिकताओं के आधार पर वस्तुओं का ऐसा संयोजन चुनता है, जिससे उसे अधिकतम संतुष्टि प्राप्त होती है। इस स्थिति में उपभोक्ता अपनी खरीद में परिवर्तन करके अपनी संतुष्टि को और अधिक नहीं बढ़ा सकता।

उदासीनता वक्र एवं बजट रेखा की सहायता से उपभोक्ता संतुलन को निम्न प्रकार समझाया जा सकता है।

1. उदासीनता वक्र

उदासीनता वक्र दो वस्तुओं के उन विभिन्न संयोजनों को दर्शाता है जिनसे उपभोक्ता को समान संतुष्टि प्राप्त होती है। सामान्यतः उदासीनता वक्र बाएँ से दाएँ नीचे की ओर झुका हुआ तथा मूल-बिंदु की ओर उत्तल होता है।

2. बजट रेखा

बजट रेखा उपभोक्ता की निश्चित आय और वस्तुओं की दी हुई कीमतों के आधार पर उन सभी वस्तु-संयोजनों को दर्शाती है जिन्हें वह अपनी पूरी आय खर्च करके खरीद सकता है।

बजट रेखा का समीकरण है—

PₓX + PᵧY = M

जहाँ Pₓ और Pᵧ दोनों वस्तुओं की कीमतें तथा M उपभोक्ता की आय है।

उपभोक्ता संतुलन की शर्तें

पहली शर्त — स्पर्श की शर्त:
उपभोक्ता का संतुलन उस बिंदु पर होता है जहाँ बजट रेखा किसी उच्चतम संभव उदासीनता वक्र को स्पर्श करती है।

दूसरी शर्त — MRS की शर्त:

MRSₓᵧ = Pₓ/Pᵧ

अर्थात् संतुलन बिंदु पर दो वस्तुओं के बीच प्रतिस्थापन की सीमांत दर, दोनों वस्तुओं की कीमतों के अनुपात के बराबर होनी चाहिए।

तीसरी शर्त — उदासीनता वक्र की उत्तलता:
संतुलन के लिए उदासीनता वक्र मूल-बिंदु की ओर उत्तल होना चाहिए, अर्थात् MRS घटती हुई होनी चाहिए।

अथवा

किसी वस्तु की बाजार माँग को प्रभावित करने वाले छः कारकों की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
बाजार माँग से आशय किसी वस्तु की उस कुल मात्रा से है, जिसे किसी निश्चित समय में बाजार के सभी उपभोक्ता विभिन्न कीमतों पर खरीदना चाहते और खरीदने में सक्षम होते हैं। किसी वस्तु की बाजार माँग को निम्नलिखित प्रमुख कारक प्रभावित करते हैं—

1. वस्तु की कीमत
वस्तु की कीमत बाजार माँग का प्रमुख निर्धारक है। सामान्यतः कीमत बढ़ने पर माँग घटती है तथा कीमत घटने पर माँग बढ़ती है, अन्य बातें समान रहने पर।

2. उपभोक्ताओं की आय
उपभोक्ताओं की आय बढ़ने पर सामान्य वस्तुओं की माँग बढ़ती है। आय घटने पर सामान्य वस्तुओं की माँग कम हो सकती है। निम्न कोटि की वस्तुओं में इसका प्रभाव विपरीत हो सकता है।

3. संबंधित वस्तुओं की कीमतें
स्थानापन्न वस्तुओं तथा पूरक वस्तुओं की कीमतें भी माँग को प्रभावित करती हैं। जैसे चाय की कीमत बढ़ने पर कॉफी की माँग बढ़ सकती है। इसी प्रकार कार की कीमत में कमी होने पर पेट्रोल की माँग बढ़ सकती है।

4. उपभोक्ताओं की रुचि एवं पसंद
फैशन, आदत, विज्ञापन, सामाजिक परंपराएँ तथा उपभोक्ताओं की पसंद में परिवर्तन होने से वस्तु की माँग में परिवर्तन होता है।

5. जनसंख्या तथा खरीदारों की संख्या
बाजार में उपभोक्ताओं की संख्या बढ़ने पर सामान्यतः बाजार माँग बढ़ती है। जनसंख्या कम होने पर बाजार माँग घट सकती है।

6. भविष्य की कीमत एवं आय की अपेक्षाएँ
यदि उपभोक्ताओं को भविष्य में वस्तु की कीमत बढ़ने की आशा हो, तो वे वर्तमान में अधिक मात्रा खरीद सकते हैं। इसी प्रकार भविष्य में आय बढ़ने की उम्मीद भी वर्तमान माँग को प्रभावित कर सकती है।

25. अर्थव्यवस्था के न्यून माँग क्या है? इसे नियंत्रित करने के उपाय समझाइए ।
Ans.
जब किसी अर्थव्यवस्था में पूर्ण रोजगार के स्तर पर उपलब्ध उत्पादन को खरीदने के लिए समष्टि माँग आवश्यक स्तर से कम होती है, तो इस स्थिति को न्यून माँग (Deficient Demand) कहते हैं। इसके कारण अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की माँग कम हो जाती है, उत्पादन घटता है और बेरोजगारी तथा मंदी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

न्यून माँग को नियंत्रित करने के उपाय

न्यून माँग को दूर करने के लिए सरकार तथा केंद्रीय बैंक द्वारा निम्नलिखित उपाय किए जा सकते हैं—

1. सरकारी व्यय में वृद्धि
सरकार सार्वजनिक निर्माण, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क आदि पर अधिक व्यय करके अर्थव्यवस्था में माँग बढ़ा सकती है।

2. करों में कमी
करों में कमी करने से लोगों की प्रयोज्य आय बढ़ती है। इससे उनकी उपभोग माँग बढ़ती है और समष्टि माँग में वृद्धि होती है।

3. हस्तांतरण भुगतान में वृद्धि
सरकार पेंशन, छात्रवृत्ति, बेरोजगारी सहायता आदि हस्तांतरण भुगतानों में वृद्धि करके लोगों की आय और क्रय-शक्ति बढ़ा सकती है।

4. सस्ती मुद्रा नीति
केंद्रीय बैंक बैंक दर, रेपो दर तथा अन्य नीतिगत दरों में कमी करके ऋण को सस्ता कर सकता है। इससे निवेश और उपभोग को बढ़ावा मिलता है।

5. खुले बाजार में प्रतिभूतियों की खरीद
केंद्रीय बैंक सरकारी प्रतिभूतियाँ खरीदकर अर्थव्यवस्था में मुद्रा की मात्रा बढ़ा सकता है। इससे लोगों और बैंकों के पास अधिक धन उपलब्ध होता है तथा माँग बढ़ती है।

6. नकद आरक्षित अनुपात (CRR) में कमी
CRR में कमी करने से वाणिज्यिक बैंकों के पास ऋण देने के लिए अधिक धन उपलब्ध होता है। इससे ऋण, निवेश और समष्टि माँग में वृद्धि हो सकती है।

अथवा

पूर्णकालीन रोजगार का अर्थ लिखिए। पूर्णकालीन रोजगार के उत्तरदायी कारकों का उल्लेख कीजिए ।
Ans.
पूर्ण रोजगार (Full Employment) से आशय उस स्थिति से है जिसमें अर्थव्यवस्था में उपलब्ध काम करने के इच्छुक एवं योग्य व्यक्तियों को प्रचलित मजदूरी दर पर रोजगार प्राप्त हो जाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी बिल्कुल शून्य हो जाती है, क्योंकि घर्षणात्मक तथा संरचनात्मक बेरोजगारी कुछ मात्रा में बनी रह सकती है।

पूर्ण रोजगार की स्थिति में अर्थव्यवस्था अपने उपलब्ध श्रम, पूँजी और अन्य संसाधनों का प्रभावी एवं लगभग पूर्ण उपयोग करती है। इस स्थिति में उत्पादन और आय का स्तर भी अपेक्षाकृत ऊँचा रहता है।

पूर्ण रोजगार के लिए उत्तरदायी प्रमुख कारक

1. समष्टि माँग का पर्याप्त स्तर
वस्तुओं और सेवाओं की माँग पर्याप्त होने पर उत्पादक उत्पादन बढ़ाते हैं और अधिक श्रमिकों को रोजगार देते हैं।

2. निवेश का स्तर
निवेश में वृद्धि से उत्पादन क्षमता बढ़ती है और नए रोजगार के अवसर उत्पन्न होते हैं।

3. पूँजी निर्माण
मशीनों, कारखानों, परिवहन तथा अन्य उत्पादक साधनों में वृद्धि से उत्पादन और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं।

4. तकनीकी विकास
उचित तकनीकी प्रगति से उत्पादन क्षमता बढ़ती है और नए उद्योगों तथा क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।

5. सरकारी नीतियाँ
सरकार की राजकोषीय एवं मौद्रिक नीतियाँ रोजगार को प्रभावित करती हैं। सार्वजनिक व्यय और विकास योजनाओं में वृद्धि से रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं।

6. श्रमिकों का कौशल एवं शिक्षा
शिक्षित, प्रशिक्षित और कुशल श्रमिक अर्थव्यवस्था की उत्पादकता बढ़ाते हैं तथा रोजगार प्राप्त करने की क्षमता में वृद्धि करते हैं।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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