दिल्ली सल्तनत : तुगलक वंश ( 1320 – 1398 ई.), सैय्यद वंश तथा लोदी वंश

तुगलक वंश ( 1320 – 1398 ई.)

गयासुद्दीन तुगलक ने 1320 ई. में खिलजी वंश के अंतिम शासक नासिरुद्दीन खुसरो शाह की हत्या कर के दिल्ली सल्तनत में एक नए वंश तुगलक वंश की स्थापना करता हैं। इस वंश ने दिल्ली की सत्ता पर 94 वर्ष तक राज किया। तो आइये इसके बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करते हैं।

गयासुद्दीन तुगलक ( 1320-1325 ई.)

• तुगलक वंश की स्थापना गयासुद्दीन तुगलक ने (8 सितम्बर, 1320 को) की।

• गयासुद्दीन तुगलक का वास्तविक नाम गाजी मलिक या तुगलक गाजी था।

• गयासुद्दीन तुगलक ने उन्तीस (29) बार मंगोल आक्रमण को विफल किया था।

• पहली बार गयासुद्दीन तुगलक ने सिंचाई के लिये कुएँ तथा नहरों का निर्माण करवाया।

• गयासुद्दीन तुगलक की सेना में गिज, तुर्क, मंगोल, राजपूत, ताजिक, रूमी, खुरासानी तथा मेवाती वर्ग के लोग थे।

• दिल्ली के समीप अफगानपुर में लकड़ी से निर्मित स्वागत महल के धराशायी होने से गयासुद्दीन तुगलक की मृत्यु हो गई।

• अफगानपुर के लकड़ी के महल को गयासुद्दीन के पुत्र जौना खाँ ने बनवाया था।

• मृत्यु से पूर्व गयासुद्दीन तुगलक बंगाल अभियान से लौट रहा था।

• रोमन शैली में तुगलकबाद को ग्यासुद्दीन ने बसाया।

• ‘निजामुद्दीन औलिया’ ने गयासुद्दीन तुगलक के बारे में कहा था कि ‘दिल्ली अभी बहुत दूर है’।

मुहम्मद बिन तुगलक ( 1325-1351 ई.)

• मुहम्मद बिन तुगलक 1325 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठा था।

• मुहम्मद बिन तुगलक का वास्तविक नाम जौना खाँ था।

• दिल्ली सल्तनत के सभी सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक सर्वाधिक शिक्षित, विद्वान और योग्य था।

• मुहम्मद बिन तुगलक का नाम कई संज्ञाओं से जोड़ा जाता है-‘अंतर्विरोधों का विस्मयकारी मिश्रण’, ‘रक्त का प्यासा अथवा परोपकारी’।

• मुहम्मद बिन तुगलक का शिक्षक मौलाना गयासुद्दीन था।

• मुहम्मद बिन तुगलक ने अपने चचेरे भाई फिरोज तुगलक को नायब बारबक पद प्रदान किया था।

• मुहम्मद बिन तुगलक का साम्राज्य 23 प्रान्तों में बँटा था।

• मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर की मात्रा में वृद्धि (प्रथम योजना) लागू की।

• मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास के लिये दीवान-ए-कोही विभाग की स्थापना की।

• दिल्ली से राजधानी बदलकर देवगिरि मुहम्मद बिन तुगलक ले गया।

• देवगिरि का नया नाम दौलताबाद रखा गया। देवगिरि को कुबतुल इस्लाम भी कहा गया है।

• मुहम्मद बिन तुगलक ने पुनः दौलताबाद से राजधानी बदलकर दिल्ली (1335 ई.) में स्थापित की।

• अपनी तृतीय योजना के अन्तर्गत मुहम्मद बिन तुगलक ने सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन करवाया।

• 1333 ई. में इब्नबतूता मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल में भारत आया था। इब्नबतूता ने किताब-उल-रेहला ‘रेहला’ लिखी। इसमें अपनी यात्रा का विवरण दिया।

• बरनी के अनुसार मुहम्मद तुगलक की पाँच मुख्य योजनाओं का विशेष रूप से उल्लेख करता है-

(1) दोआब मुद्रा जारी करना
(2) देवगिरि को राजधानी बनाना
(3) सांकेतिक मुद्रा जारी करना
(4) खुरासान पर आक्रमण और
(5) कराचिल की ओर अभियान

• दिल्ली के सुल्तानों में मुहम्मद बिन तुगलक प्रथम सुलतान था जो हिन्दुओं के त्योहारों, मुख्यतया होली में भाग लेता था।

• सुल्तान गुजरात में शांति-व्यवस्था स्थापित कर वहाँ के तागि को समाप्त करने के लिए सिंध रवाना हुआ। मार्ग में ही सुल्तान बीमार पड़ा और थट्टा के निकट 20 मार्च 1351 ई. को उसकी मृत्यु हो गई।

• उसके निधन पर बदायूंनी ने लिखा है “सुल्तान को उसकी प्रजा से और प्रजा को अपने सुल्तान से मुक्ति मिल गई।”

• मुहम्मद बिन तुगलक ने इब्नबतूता को दिल्ली के काजी पद पर नियुक्त किया।

• मुहम्मद बिन तुगलक के काल में ही दक्षिण (1336 ई.) में हरिहर एवं बुक्का ने विजय नगर साम्राज्य की नींव डाली।

• राजमुंदरी के अभिलेखों में जौना खां (उलुग कि खां) को ‘दुनिया का खान’ कहा जाता है।

फिरोजशाह तुगलक (1351-1388 ई.)

• फिरोजशाह तुगलक मुहम्मद बिन तुगलक का उत्तराधिकारी 1351 ई. में दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

• फिरोजशाह तुगलक ग्यासुद्दीन तुगलक के छोटे भाई रज्जब का पुत्र था।

• फिरोजशाह तुगलक की माँ बीबी जैला राजपूत सरदार रणमल की पुत्री थी।

• फिरोजशाह तुगलक का राज्याभिषेक सर्वप्रथम थट्टा में तत्पश्चात् दिल्ली में हुआ।

• उड़िसा में पुरी के जगन्नाथ मन्दिर को फिरोजशाह तुगलक ने (1360 ई. में) ध्वस्त किया।

• नगरकोट के प्रसिद्ध ज्वालामुखी मन्दिर को फिरोजशाह तुगलक ने (1361 ई. में) ध्वस्त किया।

• फिरोजशाह तुगलक ने 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर दिया।

• फिरोजशाह तुगलक सिर्फ चार प्रकार के (खराज, खुम्स, जजिया एवं जकात) कर लेता था।

• उलेमाओं के आदेश पर फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई कर (उपज का दसवाँ भाग) नामक नया कर लगाया।

• फिरोजशाह तुगलक ने सिंचाई की सुविधा के लिये पाँच लम्बी नहरें बनवाई।

• फिरोजशाह तुगलक ने लगभग 1200 बाग लगवाये।

• सुल्तान फिरोज ने लगभग 300 नये नगरों की स्थापना की।

• फिरोजाबाद, हिसार, फतेहाबाद, जौनपुर तथा फिरोजपुर नामक नगर को फिरोजशाह तुगलक ने बसाया।

• फिरोजशाह तुगलक को सबसे ज्यादा फिरोजाबाद नगर पसन्द था।

मेरठ और टोपरा से अशोक के स्तम्भों को लाकर दिल्ली में फिरोजशाह तुगलक ने स्थापित किया।

फिरोजशाह तुगलक के अन्य कार्य

• इसने रोजगार दफ्तर खुलवाया।

• अनाथ स्त्रियों, विधवाओं एवं लड़कियों की सहायता के लिये ‘दीवान-ए खैरात’ नामक विभाग का गठन किया।

• दासों की देखभाल हेतु फिरोजशाह ने ‘दीवान-ए-बंदगान’ की स्थापना की।

• सैनिकों को वेतन जागीर के रूप में दिया।

• सैन्य पदों को वंशानुगत बना दिया।

• हिन्दुओं को जिम्मी कहा तथा ब्राह्मणों पर जजिया कर लागू करने वाला पहला मुसलमान शासक था।

• लगभग 13 मकतब एवं मदरसों की स्थापना कराई।

• फिरोज ने अपनी आत्मकथा “फतुहात-ए- फिरोजशाही” लिखी।

• ज्वालामुखी मंदिर से लूटे गये ग्रन्थों का फारसी में ‘दलायते फिरोजशाही’ नाम से अनुवाद कराया।

• उसने ताँबा एवं चाँदी के मिश्रण से निर्मित सिक्के जारी करवाये, जिसे अद्धा एवं बिख कहा जाता था।

• फिरोजशाह तुगलक ने ‘शशगानी’ (6 जीतल का) नामक सिक्का चलाया।

• फिरोजशाह के पुत्र – नासिरुद्दीन ने दिल्ली से तथा नुसरत शाह ने फिरोजाबाद से शासन का संचालन किया।

• फिरोजशाह तुगलक की मृत्यु 1388 ई. में हुई।

• फिरोजशाह तुगलक को मध्यकालीन भारत का पहला ‘कल्याणकारी’ निरंकुश शासक कहा जाता है।

• हेनरी इलिएट तथा एलिफिंस्टन ने फिरोजशाह तुगलक को ‘सल्तनत युग का अकबर’ कहा है।

• तैमूर ने दिल्ली पर 1398 ई. में, नासिरुद्दीन महमूद के समय आक्रमण किया।

• तुगलक वंश का अंतिम शासक नासिरुद्दीन महमूद (1412 ई.) था।

• मलिक सरवर नामक हिजड़े ने जौनपुर नामक स्वतंत्र राज्य की स्थापना की।

सैय्यद वंश (1414ई.-1451 ई.)

सैयद वंश दिल्ली सल्तनत का चौथा वंश था जिसका कार्यकाल 1414 ई. से 1451ई. तक रहा। उन्होंने तुग़लक़ वंश के बाद राज्य की स्थापना की थी।

• सैय्यद वंश की स्थापना खिज्र खाँ ने 1414 ई. में की। खिज्र खां 1414-1421 ई. तक शासन किया।

• खिज्र खाँ ने सुल्तान की उपाधि न धारण कर “रैय्यत-ए-आला” की उपाधि धारण की।

• खिज्र खाँ अपने को तैमूर के लड़के शाहरुख का प्रतिनिधि बताता था।

• खिज्र खाँ तैमूरलंग का सेनापति था।

• खिज्र खाँ का उत्तराधिकारी मुबारकशाह हुआ। मुबारकशाह ने 1414-1433 ई. तक शासन किया।

• मुबारकशाह ने “शाह” की उपाधि ग्रहण कर अपने नाम के सिक्के जारी किये।

• मुबारकाबाद नगर की स्थापना मुबारकशाह ने की।

• “याहया बिन अहमद सरहिन्दी” को मुबारकशाह का राज्याश्रय प्राप्त था।

• ‘तारिख-ए-मुबारकशाही’ याहया बिन अहमद सरहिन्दी ने लिखी।

• मुबारक शाह का उत्तराधिकारी मुहम्मदशाह था।

• मुहम्मदशाह का वास्तविक नाम मुहम्मद बिन फरीद खाँ था।

• मुहम्मदशाह ने बहलोल को खान-ए-खाना की उपाधि दी और अपना पुत्र कहकर पुकारा।

• सैय्यद वंश का अंतिम शासक अलाउद्दीन आलमशाह (1443-1451 ई.) था।

लोदी वंश ( 1451 ई.-1526 ई.)

खिलजी अफगान लोगों की पश्तून जातीयता ने लोदी राजवंश का गठन किया। अपने अंतिम चरण में, इस राजवंश ने दिल्ली सल्तनत पर शासन किया। 1451ई. से 1526ई. तक उन्होंने शासन किया। लोदी दिल्ली का पहला अफगान शासक परिवार था। वे अपने पड़ोसियों सूर, नियाज़ी और नूहानी कुलों की तरह गिलज़ाई कबीले से संबंधित थे और सुलेमान पर्वत के पहाड़ी क्षेत्र में रहते थे। गिलज़ाई ताजिक या तुर्की वंश के थे।

बहलोल लोदी ( 1451-1489 ई.)

• दिल्ली में प्रथम अफगान राज्य का संस्थापक बहलोल लोदी था।

• बहलोल लोदी अफगानिस्तान के गिजलई कबीले की एक शाखा शाहूखेल में पैदा हुआ था।

• 1451 ई. में बहलोल “गाजी” की उपाधि के साथ दिल्ली की गद्दी पर बैठा।

• जौनपुर को एक बार फिर दिल्ली में बहलोल लोदी ने शामिल किया।

• बहलोल लोदी अपने सरदारों को मकसद-ए-अली कहकर पुकारता था।

• बहलोल लोदी द्वारा बहलोली सिक्के चलाये गये।

• बहलोल लोदी का पुत्र एवं उत्तराधिकारी सिकन्दरशाह लोदी था।

सिकन्दर लोदी ( 1489 ई. – 1517 ई.)

• सिकन्दर लोदी का वास्तविक नाम निजाम खाँ था।

• जौनपुर के हुसैनशाह शर्की को पराजित कर सिकन्दर लोदी ने बिहार तथा तिरहुत को दिल्ली में मिला लिया।

• 1504 ई. में सिकन्दर लोदी ने आगरा की नींव डाली।

• सिकन्दर लोदी ने भूमि मापने के लिये गज-ए-सिकन्दरी पैमाना जारी किया।

• सिकन्दर लोदी ने नगरकोट के ज्वालामुखी मन्दिर की मूर्ति को तोड़कर उसके टुकड़ों को कसाईयों को मांस तौलने के लिये दे दिया था।

• सिकन्दर लोदी ने मुसलमानों को ताजिया निकालने, स्त्रियों को पीरों एवं सन्तों की मजार पर जाने पर प्रतिबन्ध लगाया।

• कुतुबमीनार का निर्माण ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की स्मृति में कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवायी थी। योजनानुसार इसकी चार मंजिल बनाई जानी थीं तथा ऊंचाई 225 फीट निर्धारित थी। ऐबक इसकी एक ही मंजिल बनवा सका और शेष कार्य इल्तुतमिश ने पूरा करवाया। फिरोज तुगलक के शासनकाल में इस पर बिजली गिरी और इसके क्षतिग्रस्थ चौथी मंजिल को तोड़कर उसकी जगह दो मंजिलें और बनवा दी गईं। 1506 ई. में सिकन्दर लोदी ने भी इसकी मरम्मत करवाई थी। अब इसकी ऊँचाई 234 फीट है।

• सिकन्दर लोदी ने अपनी राजधानी आगरा बनाई।

• सिकन्दर लोदी ने संस्कृत के आयुर्वेद ग्रन्थ का ‘फरहंगे सिकन्दरी’ नाम से अनुवाद कराया।

• सिकन्दर लोदी ने कहा ‘यदि मैं अपने एक गुलाम को भी पालकी में बैठा हूं तो मेरे आदेश पर मेरे सभी सरदार उसे अपने कंधों पर बैठाकर ले जाएंगे ।

• ‘गुलरूखी’ शीर्षक से फारसी में कविताएं सिकन्दर लोदी ने लिखी।

• व्यक्तित्व को सुन्दर बनाए रखने के कारण सिकन्दर लोदी दाढ़ी नहीं रखता था।

इब्राहिम लोदी ( 1517 ई.-1526 ई.)

• सिकन्दर लोदी का उत्तराधिकारी इब्राहिम लोदी (1517 से 1526 ई.) शासक हुआ।

• बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण पंजाब के शासक दौलत खाँ लोदी एवं इब्राहिम लोदी के चाचा आलम खाँ ने दिया।

• इब्राहिम लोदी एवं बाबर के मध्य 21 अप्रैल, 1526 ई. को पानीपत के मैदान में युद्ध हुआ। जिसमें बाबर की विजय हुई।

• सिकन्दर लोदी की मृत्यु के पश्चात् उसका ज्येष्ठ पुत्र इब्राहिम लोदी 22 नवम्बर, 1517 ई. को गद्दी पर बैठा। वह लोदी वंश का अंतिम शासक था। इब्राहिम लोदी भारत का एक मात्र सुल्तान था जो युद्धभूमि में मारा गया। उसकी मृत्यु के साथ ही लोदी वंश तथा दिल्ली सल्तनत दोनों का अंत हो गया।

यह भी पढ़ें: खिलजी वंश

निष्कर्ष:

हम आशा करते हैं कि आपको यह पोस्ट तुगलक वंश जरुर अच्छी लगी होगी। तुगलक वंश के बारें में काफी अच्छी तरह से सरल भाषा में समझाया गया है। अगर इस पोस्ट से सम्बंधित आपके पास कुछ सुझाव या सवाल हो तो आप हमें कमेंट बॉक्स में ज़रूर बताये। धन्यवाद!

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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