सरकार क्या है? : अध्याय -3


हरएक देश को विभिन्न निर्णय लेने एवं काम करने के लिए सरकार की ज़रूरत होती है। ये निर्णय कई विषयों से संबंधित हो सकते हैं – सड़कें और स्कूल कहाँ बनाए जाएँ, बहुत ज़्यादा महँगी हो जाने पर किसी चीज़ के दाम कैसे घटाए जाएँ अथवा बिजली की आपूर्ति को कैसे बढ़ाया जाए। सरकार कई सामाजिक मुद्दों पर भी कार्रवाई करती है। उदाहरण के लिए सरकार गरीबों की मदद करने के लिए कई कार्यक्रम चलाती है। इनके अलावा वह अन्य महत्त्वपूर्ण काम भी करती है, जैसे डाक एवं रेल सेवाएँ चलाना।

सरकार का काम देश की सीमाओं की सुरक्षा करना और दूसरे देशों से शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना भी है। उसकी ज़िम्मेदारी यह सुनिश्चित करना है कि देश के सभी नागरिकों को पर्याप्त भोजन और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें। जब प्राकृतिक विपदा घेरती है, जैसे सुनामी या भूकंप, तो मुख्य रूप से सरकार ही पीड़ित लोगों की सहायता करती है। अगर कहीं कोई विवाद होता है या कोई अपराध करता है तो लोग न्यायालय जाते हैं। न्यायालय भी सरकार का ही अंग है।

शायद आपको यह जानकर अचरज हो रहा होगा कि सरकार इतना सब कुछ कैसे कर पाती है और सरकार के लिए इन कामों को करना क्यों ज़रूरी है। जब लोग इकट्ठे रहते हैं और काम करते हैं तो कुछ हद तक एक व्यवस्था की ज़रूरत होती है जिससे आवश्यक निर्णय लिए जा सकें। कुछ नियमों की ज़रूरत होती है जो सब पर लागू हों। उदाहरण के लिए संसाधनों के नियंत्रण और देश की सीमा की सुरक्षा की ज़रूरत होती है ताकि लोग सुरक्षित महसूस कर सकें। लोगों के लिए सरकार कई तरह के काम करती है। वह नियम बनाती है, निर्णय लेती है और अपनी सीमा में रहने वाले लोगों पर उन्हें लागू करती है।

सरकार के स्तर

अब आपको पता है कि सरकार कितनी सारी अलग-अलग चीज़ों के लिए ज़िम्मेदार है तो क्या आप सोच सकती हैं कि सरकार ये सारे इतंज़ाम कैसे करती होगी? दरअसल सरकार अलग-अलग स्तरों पर काम करती है – स्थानीय स्तर पर, राज्य के स्तर पर एवं राष्ट्रीय स्तर पर। स्थानीय स्तर का मतलब आपके गाँव,शहर या मोहल्ले से है।

राज्य स्तर का मतलब है जो पूरे राज्य को ध्यान में रखे जैसे हरियाणा या असम की सरकार पूरे राज्य में काम करती है (मानचित्रों का देखें)। राष्ट्रीय स्तर की सरकार का संबंध पूरे देश से होता है। इस किताब में आप आगे चलकर पढ़ेंगी कि स्थानीय सरकार कैसे काम करती है और आगे की कक्षाओं में राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर सरकार के कामों के बारे में जानेंगी।

नोट- आंध्र प्रदेश राज्य के पुनर्गठन के बाद, 2 जून 2014 को तेलंगाणा भारत का 29वीं राज्य बना।

31 अक्तूबर 2019 से जम्मू और कश्मीर राज्य दो अलग-अलग केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा गया- जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख।

सरकार एवं कानून

सरकार कानून बनाती है और देश में रहने वाले सभी लोगों को वे कानून मानने होते हैं। केवल यही वह तरीका है जिससे सरकार काम कर सकती है। सरकार के पास जैसे कानून बनाने की ताकत होती है वैसे ही यह ताकत भी होती है कि लोगों को कानून मानने के लिए बाध्य करे। उदाहरण के लिए एक कानून है कि गाड़ी चलाने वाले के पास लाइसेंस होना चाहिए। अगर कोई लाइसेंस के बिना गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाए तो उसे जेल की सजा काटनी पड़ती है या जुर्माना भरना पड़ता है।

सरकार जो कार्रवाई कर सकती है, उसके अलावा अगर लोगों को लगे कि किसी कानून का ढंग से पालन नहीं हो रहा है तो वे भी कुछ कदम उठा सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति को यह लगे कि उसको उसके धर्म या उसकी जाति के कारण किसी नौकरी में नहीं लिया गया तो वह न्यायालय जा सकती है और यह दावा कर सकती है कि कानून का पालन नहीं हो रहा है। तब न्यायालय आदेश देगा कि क्या कदम उठाने की ज़रूरत है।

सरकार के प्रकार

सरकार को निर्णय लेने और कानूनों का पालन करवाने यानी उन्हें बाध्य बनाने की शक्ति कौन देता है?

इस प्रश्न का उत्तर इस बात पर निर्भर करता है कि उस देश में कैसी सरकार है। लोकतंत्र में तो लोग ही सरकार को यह शक्ति देते हैं। लोग ऐसा चुनाव के माध्यम से करते हैं। वे अपनी पसंद के नेता को वोट देकर चुनते हैं। एक बार चुन लिए जाने के बाद यही लोग सरकार बनाते हैं। लोकतंत्र में सरकार को अपने निर्णयों एवं उठाए गए कदमों का आधार बताना होता है और सफाई देनी होती है।

एक दूसरी तरह की सरकार होती है जिसे राजतंत्रीय सरकार कहते हैं। इसमें राजा या रानी के पास निर्णय लेने और सरकार चलाने की शक्ति होती है। राजा के पास सलाहकारों का एक छोटा-सा समूह होता है जिससे वह विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर सकता है। अंतिम निर्णय लेने की शक्ति उसी के पास रहती है।

लोकतंत्र के समान राजतंत्र में राजा या रानी को अपने – निर्णय के आधार नहीं बताने पड़ते और न ही अपने निर्णयों की सफ़ाई देनी पड़ती है।

लोकतांत्रिक सरकार

भारत एक लोकतंत्र है। इस लोकतांत्रिक व्यवस्था को पाने के लिए हमने लंबी लड़ाई लड़ी है। संसार में और भी कई देश हैं जहाँ लोगों ने लोकतंत्र लाने के लिए संघर्ष किए हैं। ऊपर बताया जा चुका है कि लोकतंत्र की मुख्य बात यह है कि लोगों के पास अपने नेता को चुनने की शक्ति होती है। इसलिए एक अर्थ में लोकतंत्र लोगों का ही शासन होता है।

लोकतंत्र लोकतं में मूलभूत विचार यह है कि लोग नियमों को बनाने में भागीदार बनकर खुद ही शासन करें। आज के समय में लोकतांत्रिक सरकार को प्रायः प्रतिनिधि लोकतंत्र कहते हैं। प्रतिनिधि लोकतंत्र में लोग सीधे भाग नहीं लेते हैं, बल्कि चुनाव की प्रक्रिया के द्वारा अपने प्रतिनिधि को चुनते हैं। ये प्रतिनिधि मिलकर सारी जनता के लिए निर्णय लेते हैं। आजकल कोई भी सरकार अपने आपको तब तक लोकतांत्रिक नहीं कह सकती जब तक वह देश के सभी वयस्क नागरिकों को वोट देने का अधिकार न दे।

लेकिन हमेशा ऐसा नहीं था। क्या आप विश्वास कर सकती हैं कि एक समय ऐसा था जब लोकतांत्रिक सरकारें औरतों और गरीबों को चुनाव में भाग नहीं लेने देती थीं? अपने शुरुआती दौर में सरकारें केवल उन्हीं पुरुषों को वोट देने देती थीं जो पढ़े-लिखे थे और जिनके पास अपनी संपत्ति होती थी। इसका मतलब था कि औरतों, गरीबों और अशिक्षितों को वोट देने का अधिकार नहीं था। ऐसी स्थिति में देश उन्हीं नियमों के सहारे चलते थे जो ये गिने-चुने पुरुष बनाते थे।

भारत में आज़ादी से पहले बहुत ही कम लोगों को वोट देने का अधिकार था। इसीलिए जनता ने संगठित होकर इस अधिकार की माँग की। गाँधीजी समेत कई नेताओं ने इस अन्यायपूर्ण व्यवहार का विरोध किया। उन्होंने भी ज़ोर-शोर से यह माँग उठाई। 1931 में यंग इंडिया पत्रिका में लिखते हुए गाँधीजी ने कहा था, “मैं यह विचार सहन नहीं कर सकता कि जिस आदमी के पास संपत्ति है वह वोट दे सकता है, लेकिन वह आदमी जिसके पास चरित्र है पर संपत्ति या शिक्षा नहीं, वह वोट नहीं दे सकता या जो दिनभर अपना पसीना बहाकर ईमानदारी से काम करता है वह बोट नहीं दे सकता क्योंकि उसने गरीब आदमी होने का गुनाह किया है…।”

महिलाओं के लिए मत

संसार में कहीं भी सरकारों ने स्वेच्छा से अपनी शक्ति लोगों के साथ नहीं बाँटी है। पूरे यूरोप और अमरीका में महिलाओं और गरीबों को सरकार के कार्यों में भागीदारी के लिए संघर्ष करना पड़ा। महिलाओं द्वारा मताधिकार के लिए किए गए संघर्ष ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान और मज़बूती पकड़ी।

इस आंदोलन को महिला मताधिकार आंदोलन कहते हैं और अंग्रेज़ी में इसे ‘सफ्रेज मूवमेंट’ कहते हैं। ‘सफ्रेज़’ का मतलब होता है वोट देने का अधिकार। युद्ध के दौरान बहुत-से पुरुष लड़ाई में थे, इसीलिए महिलाओं को उन कामों को करने के लिए बुलाया गया जो पहले पुरुषों के काम माने जाते थे। जब महिलाओं ने विभिन्न प्रकार के काम और उनकी व्यवस्था करना शुरू किया तो लोगों को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि उन्होंने महिलाओं और उनकी क्षमताओं के बारे में क्यों इतनी गलत रूढ़िबद्ध धारणाएँ बना रखीं थीं कि महिलाएँ ये काम नहीं कर सकतीं। इस तरह महिलाओं को निर्णय लेने में समान रूप से योग्य माना जाने लगा। महिला मताधिकार आंदोलन की साथियों ने सभी महिलाओं के लिए वोट देने के अधिकार की माँग की। उनकी आवाज़ सुनी जाए, इसके लिए उन्होंने जगह-जगह पर अपने आपको लोहे की जंजीरों से बाँधकर प्रदर्शन किया। उनमें से कई क्रांतिकारी महिलाएँ जेल गईं और भूख हड़ताल पर बैठीं।

अमरीका में औरतों को वोट देने का अधिकार 1920 में मिला, जबकि इंग्लैंड की औरतों को यह अधिकार कुछ सालों बाद 1928 में मिला।

यह भी पढ़ें : विभिधता एवं भेदभाव : अध्याय – 2

नीचे की तालिका में दिए गए कथनों पर नज़र दौड़ाइए। क्या आप पहचान सकती हैं कि वे सरकार के किस स्तर से संबंधित हैं? उनके आगे निशान लगाइए।

• भारत सरकार का रूस के साथ मैत्री संबंध बनाने का निर्णय – राष्ट्रीय

• पश्चिम बंगाल सरकार का सारे सरकारी स्कूलों में कक्षा 8 में बोर्ड की परीक्षा लेने का निर्णय – राज्य

• डिब्रूगढ़ और कन्याकुमारी के बीच में नई रेल सेवाएँ शुरू करने का निर्णय – राष्ट्रीय

• गाँव में एक सार्वजनिक कुएँ के स्थान को चुनने का निर्णय – स्थानीय

• पटना में बच्चों के लिए बड़ा-सा पार्क बनाने का निर्णय – स्थानीय

• हरियाणा सरकार का सारे किसानों को मुफ्त बिजली देने का निर्णय- राज्य

• 1000 रुपये का नया नोट शुरू करने का निर्णय- राष्ट्रीय

अभ्यास

1. आप ‘सरकार’ शब्द से क्या समझती है? एक सूची बनाइए कि किस तरह से सरकार आपके जीवन को प्रभावित करती है।
Ans.
एक व्यक्ति या व्यक्तियों का समूह जो किसी राजनीतिक इकाई (जैसे राज्य, देश या राज्य) को नियंत्रित करता है, उसे सरकार के रूप में जाना जाता है। सरकार निर्णय लेती है, कानून बनाती है, कानूनों को लागू करती है अ कानूनों के खिलाफ जाने वाले व्यक्तियों या समूहों को दंडित करती है।

• सरकार के कार्यों में शामिल हैं:

(i) पानी और बिजली की आपूर्ति, मुफ्त शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाएं, उचित सड़कें आदि जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करना।

(ii) आंतरिक कानून व्यवस्था बनाए रखना

(iii) बाहरी आक्रमण से देश की रक्षा करना

(iv) अन्य देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध बनाए रखना

(v) वंचितों और वंचितों को सहायता प्रदान करना

(vi) समाज के सभी वर्गों के लिए समानता और न्याय सुनिश्चित करना

(vii) देश की आर्थिक वृद्धि को सुनिश्चित करना और बनाए रखना

• पाँच तरीके जिनसे सरकार किसी के दैनिक जीवन को प्रभावित करती है।

(i) पानी और बिजली की आपूर्ति करना

(ii) सड़कें बनाना, रखरखाव और मरम्मत करना

(iii) एक अच्छी सार्वजनिक परिवहन प्रणाली प्रदान करना

(iv) उचित आंतरिक सुरक्षा की गारंटी देना

(v) अपने विभिन्न प्रशासनों के समुचित कामकाज को सुनिश्चित करना

2. सरकार को कानून के रूप में सबके लिए नियम बनाने की क्या ज़रूरत है?
Ans.
• नियमों को कानून के रूप में बनाना आवश्यक है:

• यह सरकार के समुचित कामकाज में मदद करता है।

• यह होने वाले अपराधों पर नियंत्रण और संतुलन रखता है।

• ताकि लोग शांति और सद्भाव से रह सकें.

3. लोकतांत्रिक सरकार के आवश्यक लक्षण क्या है?
Ans.
लोकतांत्रिक सरकार के दो आवश्यक लक्षण हैं:

• प्रतिनिधि जनता द्वारा और जनता के लिए चुने जाते हैं।

• वोट देने का अधिकार और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार।

4. महिला मताधिकार आंदोलन क्या है? उसकी उपलब्धि क्या थी?
Ans.
मताधिकार आंदोलन उन महिलाओं और गरीब लोगों का आंदोलन था जो सरकार में भाग लेने के अपने अधिकारों के लिए लड़ते थे। यह आंदोलन यूरोप और अमेरिका में प्रमुखता से देखा गया।

इस आंदोलन ने पूरा कियाः महिलाओं को वोट देने का अधिकार।

5. गांधीजी का दृढ़ विश्वास था कि भारत में हरएक वयस्क को वोट देने का अधिकार मिलना चाहिए। लेकिन बहुत सारे लोग उनके विचारों से सहमत नहीं हैं। बहुत लोगों को लगता है कि अशिक्षित लोगों को, जो ज्यादातर गरीब हैं, वोट देने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए। आपका क्या विचार है? क्या आपको लगता है कि यह भेदभाव का एक रूप होगा?
Ans.
हाँ, किसी देश के सभी वयस्क नागरिकों को वोट न देने देना एक प्रकार का भेदभाव है। भारत के प्रत्येक वयस्क नागरिक को निम्नलिखित कारणों से वोट देने का अधिकार है।

(1) निरक्षर होना किसी को वोट देने के अधिकार का प्रयोग करने से रोकने का कारण नहीं है। एक अनपढ़ व्यक्ति शायद पढ़-लिख नहीं सकता, लेकिन वह अच्छी तरह समझ सकता है कि उसके और समाज के लिए क्या अच्छा है

(1) सच्चा लोकतंत्र वह है जो अपने नागरिकों के बीच भेदभाव नहीं करता है।

(1) प्रत्येक नागरिक देश के प्रति जिम्मेदार है और मतदान देश के प्रति जिम्मेदार होने का एक तरीका है।

(iv) वोट देने का अधिकार प्रत्येक व्यक्ति का जन्मसिद्ध अधिकार है जिसने अठारह वर्ष या उससे अधिक की आयु प्राप्त कर ती है।

(v) यह सुनिश्चित करता है कि समाज के हर वर्ग का अपना प्रतिनिधि हो। यदि गरीबों और अशिक्षितों को वोट देने का अधिकार नहीं दिया गया तो असमानताएं ही बढ़ेगी। समावेशी विकास के लिए, समाज के प्रत्येक समूह (गरीब या अमीर, साक्षर या अशिक्षित) को अपनी आवाज, अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार होना चाहिए।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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