U.P Board Class 12 Physics 346(FS) Question Paper 2024

U.P Board Class 12 Physics 346(FS) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
भौतिक विज्ञान
समय: तीन घण्टे 15 मिनट  पूर्णांक: 70

निर्देश :

(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

(iii) इस प्रश्न-पत्र में पाँच खण्ड हैं- खण्ड अ, खण्ड ब, खण्ड स, खण्ड द और खण्ड य ।

(iv) खण्ड अ बहुविकल्पीय है तथा प्रत्येक प्रश्न का 1 अंक है।

(v) खण्ड ब अति लघु-उत्तरीय है तथा प्रत्येक प्रश्न का 1 अंक है।

(vi) खण्ड स लघु-उत्तरीय प्रकार-I का है तथा प्रत्येक प्रश्न के 2 अंक हैं।

(vii) खण्ड द लघु-उत्तरीय प्रकार-II का है तथा प्रत्येक प्रश्न के 3 अंक हैं।

(viii) खण्ड य विस्तृत-उत्तरीय है। प्रत्येक प्रश्न के 5 अंक हैं। इस खण्ड के सभी चारों प्रश्नों में आन्तरिक विकल्प का चयन प्रदान किया गया है। ऐसे प्रश्नों में आपको दिए गए चयन में से केवल एक प्रश्न ही करना है।

(ix) प्रश्न-पत्र में प्रयुक्त प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।

खण्ड अ

1. (क) E गतिज ऊर्जा के एक कण का लुइस द ब्रॉग्ली तरंगदैर्ध्य होता है :

(i) λ = h/(√2mE)
(ii) λ = h/(√mE)
(iii) λ = (√2mE)/h
(iv) λ = (√mE)/h

Ans. डी-ब्रॉग्ली समीकरण,λ=hp\lambda=\frac{h}{p}

औरE=p22mE=\frac{p^2}{2m}

अतःp=2mEp=\sqrt{2mE}

इसलिए,λ=h2mE\boxed{\lambda=\frac{h}{\sqrt{2mE}}}

उत्तर: (i) λ= h/(√2mE)

(ख) यदि इलेक्ट्रॉन का अनुगमन वेग तथा विद्युत-क्षेत्र की तीव्रता E हो, तो निम्नलिखित में से कौन-सा सम्बन्ध ओम के नियम का पालन करता है ?

(i) vd ∝ E2
(ii) Vd = नियतांक
(iii) vd ∝ E
(iv) vd ∝ √E

Ans. ओम के नियम के अनुसारJEJ\propto E

तथाJ=nevdJ=nev_d

अतःvdE\boxed{v_d\propto E}

उत्तर: (iii) vd ∝ E

(ग) प्रकीर्णित -कण का पथ होता है:

(i) वृत्ताकार
(ii) परवलयाकार
(iii) दीर्घवृत्ताकार
(iv) अतिपरवलयाकार

Ans. रदरफोर्ड के प्रकीर्णन में α\alpha-कण धनावेशित नाभिक के विद्युत क्षेत्र से प्रतिकर्षित होता है। इसका पथ अतिपरवलयाकार (Hyperbolic) होता है।

उत्तर: (iv) अतिपरवलयाकार

(घ) उत्तल लेन्स की फोकस दूरी अधिकतम है :

(i) नीले प्रकाश के लिए
(ii) हरे प्रकाश के लिए
(iii) लाल प्रकाश के लिए
(iv) पीले प्रकाश के लिए

Ans. लेंस की शक्तिP=1fP=\frac{1}{f}

और सामान्य काँच के लिए अपवर्तनांक नीले प्रकाश के लिए अधिक तथा लाल प्रकाश के लिए कम होता है। अतः लाल प्रकाश के लिए लेंस की शक्ति सबसे कम और फोकस दूरी सबसे अधिक होगी।

उत्तर: (iii) लाल प्रकाश के लिए

(ङ) यदि प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में केवल धारित्र हो, तो परिपथ में व्यय शक्ति होगी:

(i) P = -1
(ii) P = 0
(iii) P = +1
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Ans. शुद्ध धारित्रीय AC परिपथ में धारा और वोल्टता के बीच कलान्तरϕ=90\phi=90^\circ

अतः औसत शक्तिP=VrmsIrmscos90=0P=V_{\rm rms}I_{\rm rms}\cos90^\circ=0

उत्तर: (ii) P=0

(च) दो बिन्दु आवेशों को वायु में एक निश्चित दूरी पर रखने पर उनके बीच 80 न्यूटन का बल कार्य करता है। जब इन्हीं आवेशों को एक परावैद्युत माध्यम में इतनी ही दूरी पर रखा जाता है, तो इन पर 8 न्यूटन का बल कार्य करता है। माध्यम का परावैद्युतांक होगा :

(i) K = -10
(ii) K = 10
(iii) K = 0.01
(iv) K = -0.01

Ans. वायु में बलF=80NF=80N

माध्यम में बलF=8NF’=8N

परावैद्युतांकK=FFK=\frac{F}{F’}

अतःK=808=10K=\frac{80}{8}=10

उत्तर: (ii) K=10

खण्ड ब

(क) लेन्स की वायु में फोकस दूरी एवं लेन्स को द्रव में डुबोने पर उसकी फोकस दूरी का अनुपात ज्ञात कीजिए ।
Ans.
लेंस मेकर सूत्र,1f=(μlμm1)(1R11R2)\frac1f= \left(\frac{\mu_l}{\mu_m}-1\right) \left(\frac1{R_1}-\frac1{R_2}\right)

वायु में μm=1\mu_m=1, अतः1fa=(μl1)K\frac1{f_a}=(\mu_l-1)K

द्रव में,1fm=(μlμm1)K\frac1{f_m}= \left(\frac{\mu_l}{\mu_m}-1\right)K

अतःfafm=μl/μm1μl1\boxed{\frac{f_a}{f_m} = \frac{\mu_l/\mu_m-1}{\mu_l-1}}

(ख) हाइड्रोजन परमाणु में इलेक्ट्रॉन की मूल ऊर्जा स्तर में आयनन विभव कितना होता है ?
Ans.
हाइड्रोजन की मूल अवस्था में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जाE1=13.6eVE_1=-13.6\,eV

इसे मुक्त करने के लिए 13.6eV13.6\,eV ऊर्जा चाहिए।

अतः आयनन विभव13.6V\boxed{13.6\,V}

है।

(ग) विद्युत चालकता की परिभाषा एवं विमीय सूत्र लिखिए ।
Ans.
किसी पदार्थ की विद्युत चालकता, उसकी प्रतिरोधकता के व्युत्क्रम को कहते हैं।σ=1ρ\sigma=\frac1\rho

चूँकि[ρ]=ML3T3I2[\rho]=ML^3T^{-3}I^{-2}

अतः[σ]=M1L3T3I2\boxed{[\sigma]=M^{-1}L^{-3}T^3I^2}

(घ) प्रत्यावर्ती धारा परिपथ में प्रयुक्त अमीटर धारा के किस मान को व्यक्त करता है ?
Ans.
AC अमीटर धारा के वर्ग माध्य मूल (RMS) मान को प्रदर्शित करता है।Irms=I02\boxed{I_{\rm rms}=\frac{I_0}{\sqrt2}}

(ङ) होल पर कितना आवेश होता है ? p-n सन्धि डायोड का परिपथ संकेत बनाइए ।
Ans.

होल का प्रभावी आवेश धनात्मक होता है और इसका परिमाण इलेक्ट्रॉन के आवेश के बराबर होता है।q=+1.6×1019C\boxed{q=+1.6\times10^{-19}C}

p-n डायोड का संकेत:

(च) रेडियो तरंगों एवं सूक्ष्म तरंगों में किसकी आवृत्ति अधिक होती है ?
Ans.
विद्युत-चुम्बकीय स्पेक्ट्रम में सूक्ष्म तरंगों की आवृत्ति रेडियो तरंगों से अधिक होती है।

खण्ड स

3. (क) नाभिक की द्रव्यमान क्षति एवं बन्धन ऊर्जा को परिभाषित कीजिए ।
Ans.
नाभिक के सभी स्वतंत्र प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग तथा वास्तविक नाभिक के द्रव्यमान के अन्तर को द्रव्यमान क्षति कहते हैं।Δm=Zmp+(AZ)mnM\boxed{\Delta m=Zm_p+(A-Z)m_n-M}

इस द्रव्यमान क्षति के तुल्य ऊर्जा को बन्धन ऊर्जा कहते हैं।Eb=Δmc2\boxed{E_b=\Delta mc^2}

यदि Δm\Delta m amu में हो तोEb=Δm×931.5MeV\boxed{E_b=\Delta m\times931.5\,MeV}

यही ऊर्जा नाभिक को उसके न्यूक्लियॉनों में अलग करने के लिए आवश्यक होती है।

(ख) क्राउन काँच से द्विअवतल लेंस बनाना है। लेन्स के पृष्ठों की त्रिज्याएँ कितनी रखी जाएँ कि लेन्स की क्षमता -2.5 D हो? क्राउन काँच का अपवर्तनांक 1.65 है।

Ans. दिया है:P=2.5D,μ=1.65P=-2.5D,\qquad \mu=1.65

लेंस मेकर सूत्र:P=(μ1)(1R11R2)P=(\mu-1) \left(\frac1{R_1}-\frac1{R_2}\right)

द्विअवतल सममित लेंस के लिएR1=R,R2=+RR_1=-R,\qquad R_2=+R

अतः2.5=(1.651)(1R1R)-2.5=(1.65-1) \left(-\frac1R-\frac1R\right)2.5=1.3R-2.5=-\frac{1.3}{R}

इसलिएR=1.32.5=0.52mR=\frac{1.3}{2.5}=0.52m

अतःR=0.52m=52cm\boxed{R=0.52m=52cm}

अर्थात दोनों पृष्ठों की त्रिज्या का परिमाण 52 cm होगा।

(ग) p-n संधि डायोड के अग्र अभिनति स्थिति में इसके प्रचालन को समझाइए ।

Ans. जब p-n संधि में p-भाग को बैटरी के धनात्मक टर्मिनल से तथा n-भाग को ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है, तो इसे अग्र अभिनति (Forward Bias) कहते हैं।

इस अवस्था में बाह्य विद्युत क्षेत्र संधि के आन्तरिक विद्युत क्षेत्र के विपरीत होता है। इससे अवक्षय परत की चौड़ाई और विभव प्राचीर कम हो जाती है।

परिणामस्वरूप बहुसंख्यक आवेश वाहक संधि को पार करने लगते हैं और डायोड में पर्याप्त धारा प्रवाहित होने लगती है।

(घ) अमीटर में शन्ट प्रतिरोध के मान को बढ़ा देने पर उसके परास तथा सुग्राहिता पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
Ans.
अमीटर में शन्ट प्रतिरोधS=IgGIIgS=\frac{I_gG}{I-I_g}

होता है।

यदि शन्ट प्रतिरोध SS बढ़ाया जाता है, तो अमीटर से मापी जा सकने वाली अधिकतम धारा का परास कम हो जाता है

दूसरी ओर, अधिक धारा गैल्वेनोमीटर से होकर गुजरने के कारण अमीटर की सुग्राहिता बढ़ती है

खण्ड द

4. (क) यदि काँच के एक पतले प्रिज़्म को जल में डुबो दें, तो सिद्ध कीजिए कि प्रिज़्म द्वारा उत्पन्न न्यूनतम विचलन, वायु के सापेक्ष एक-चौथाई रह जायेगा। दिया है ang = 3/2, anw = 4/3
Ans.
पतले प्रिज्म के लिएδ=(μ1)A\delta=(\mu-1)A

वायु में काँच का अपवर्तनांकμga=32\mu_{ga}= \frac32

अतःδa=(321)A=A2\delta_a=\left(\frac32-1\right)A =\frac A2

अब जल में प्रिज्म का सापेक्ष अपवर्तनांकμgw=μgμw\mu_{gw}=\frac{\mu_g}{\mu_w}

दिया है,μw=43\mu_w=\frac43

इसलिएμgw=3/24/3=98\mu_{gw} = \frac{3/2}{4/3} = \frac98

अतःδw=(981)A=A8\delta_w= \left(\frac98-1\right)A = \frac A8

इसलिएδwδa=A/8A/2=14\frac{\delta_w}{\delta_a} = \frac{A/8}{A/2} = \frac14

अतःδw=14δa\boxed{\delta_w=\frac14\delta_a}

अर्थात जल में डुबाने पर विचलन वायु के विचलन का एक-चौथाई रह जाता है।

(ख) विस्थापन धारा की सार्थकता की विवेचना कीजिए तथा इसके और चालन धारा के बीच कलान्तर ज्ञात कीजिए ।
Ans.
मैक्सवेल ने बताया कि परिवर्ती विद्युत क्षेत्र भी चुम्बकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। विद्युत क्षेत्र के परिवर्तन के कारण उत्पन्न धारा को विस्थापन धारा कहते हैं।Id=ϵ0dΦEdt\boxed{I_d=\epsilon_0\frac{d\Phi_E}{dt}}

जबकि वास्तविक आवेशों के प्रवाह के कारण उत्पन्न धारा को चालन धारा कहते हैं।

संधारित्र के AC परिपथ में चालन धारा और विस्थापन धारा का मान समान होता है तथा दोनों एक ही कला (in phase) में होती हैं।

अतः कलान्तरϕ=0\boxed{\phi=0^\circ}

है।

(ग) नाभिकीय विखण्डन एवं नाभिकीय संलयन को उदाहरण सहित समझाइए ।
Ans.
नाभिकीय विखण्डन

किसी भारी नाभिक को धीमे न्यूट्रॉन से बमबारी करने पर वह दो लगभग समान द्रव्यमान वाले हल्के नाभिकों में टूट जाता है और अत्यधिक ऊर्जा तथा न्यूट्रॉन निकलते हैं।

उदाहरण:92235U+01n56141Ba+3692Kr+301n+Energy{}^{235}_{92}U+{}^1_0n \rightarrow {}^{141}_{56}Ba+ {}^{92}_{36}Kr+ 3{}^1_0n+Energy

इसका उपयोग परमाणु रिएक्टर में ऊर्जा उत्पादन के लिए किया जाता है।

नाभिकीय संलयन

दो हल्के नाभिक अत्यधिक ताप और दाब में मिलकर भारी नाभिक बनाते हैं तथा बहुत अधिक ऊर्जा मुक्त करते हैं।

उदाहरण:12H+13H24He+01n+17.6MeV{}^2_1H+{}^3_1H \rightarrow {}^4_2He+{}^1_0n+17.6MeV

सूर्य और तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत नाभिकीय संलयन है।

(घ) प्लास्टिक की एक गोली P जिसका द्रव्यमान 3.2 × 10-15 किग्रा है, दो क्षैतिज समान्तर आविष्ट प्लेटों के बीच स्थिर अवस्था में संतुलित है। गोली पर कितने इलेक्ट्रॉन सामान्य से कम या अधिक होंगे ? (g = 10 मी/से²)

Ans. चित्र से,

  • प्लेटों के बीच विभवान्तर:

V=1000VV=1000\,V

  • प्लेटों के बीच दूरी:

d=2cm=2×102md=2\,cm=2\times10^{-2}m

अतः प्लेटों के बीच विद्युत क्षेत्र,E=VdE=\frac{V}{d}E=10002×102=5×104N/CE=\frac{1000}{2\times10^{-2}} =5\times10^4\,N/C

गोली संतुलन में है, इसलिए विद्युत बल और गुरुत्वीय बल बराबर होंगे:qE=mgqE=mg

अतःq=mgEq=\frac{mg}{E}

दिया है,m=3.2×1015kg,g=10m/s2m=3.2\times10^{-15}kg,\qquad g=10m/s^2

इसलिएq=3.2×1015×105×104q=\frac{3.2\times10^{-15}\times10}{5\times10^4}q=3.2×10145×104q=\frac{3.2\times10^{-14}}{5\times10^4}q=6.4×1019Cq=6.4\times10^{-19}C

एक इलेक्ट्रॉन का आवेशe=1.6×1019Ce=1.6\times10^{-19}C

अतः इलेक्ट्रॉनों की संख्या:n=qen=\frac{q}{e}n=6.4×10191.6×1019=4n=\frac{6.4\times10^{-19}} {1.6\times10^{-19}} =4

चूँकि गोली पर विद्युत बल ऊपर की ओर है, इसलिए गोली धनावेशित है। धनावेशित होने का अर्थ है कि उसमें सामान्य अवस्था की तुलना में इलेक्ट्रॉनों की कमी है।

(ङ) विद्युत-चुम्बकीय तरंगें क्या होती हैं? इनका संचरण आरेख बनाइए । संचरण आरेख में विद्युत-क्षेत्र आयाम तथा चुम्बकीय क्षेत्र आयाम को दिखाइए ।
Ans.
विद्युत-चुम्बकीय तरंगें (Electromagnetic Waves) वे तरंगें होती हैं जो परस्पर लंबवत दोलन करने वाले विद्युत क्षेत्र (Electric Field) और चुम्बकीय क्षेत्र (Magnetic Field) के संयोजन से बनती हैं।

ये तरंगें अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और इन्हें संचरण के लिए किसी भौतिक माध्यम (जैसे हवा, जल आदि) की आवश्यकता नहीं होती; ये निर्वात (Vacuum) में भी प्रकाश की चाल (c ≈ 3* 108 m/s) से गति करती हैं।

संचरण आरेख

नीचे दिए गए चित्र में तरंग के संचरण की दिशा तथा विद्युत व चुम्बकीय क्षेत्र के घटकों को 3D अक्ष पर दिखाया गया है:

5. (क) व्यतिकरण को परिभाषित कीजिए । संपोषी व्यतिकरण तथा विनाशी व्यतिकरण की दशाएँ लिखिए ।
Ans.
समान आवृत्ति, समान आयाम तथा स्थिर कलान्तर वाली दो या अधिक प्रकाश तरंगों के अध्यारोपण से तीव्रता के पुनर्वितरण की घटना को व्यतिकरण कहते हैं।

संपोषी व्यतिकरण

जब दोनों तरंगें समान कला में मिलती हैं, तो परिणामी तीव्रता अधिकतम होती है।

पथान्तर:Δ=nλ\boxed{\Delta=n\lambda}

कलान्तर:ϕ=2nπ\boxed{\phi=2n\pi}

विनाशी व्यतिकरण

जब दोनों तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं, तो परिणामी तीव्रता न्यूनतम होती है।

पथान्तर:Δ=(2n+1)λ2\boxed{\Delta=(2n+1)\frac{\lambda}{2}}

कलान्तर:ϕ=(2n+1)π\boxed{\phi=(2n+1)\pi}

(ख) 8O16 का परमाणु द्रव्यमान 16.0000 amu है। इसकी प्रति न्यूक्लियान बंधन-ऊर्जा ज्ञात कीजिए । इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान 0.00055 amu, प्रोटॉन का द्रव्यमान 1.007593 amu तथा न्यूट्रॉन का द्रव्यमान 1.008982 amu तथा 1 amu = 931 MeV.

Ans. दिया है:A=16,Z=8A=16,\quad Z=8

प्रोटॉन का द्रव्यमानmp=1.007593um_p=1.007593u

न्यूट्रॉन का द्रव्यमानmn=1.008982um_n=1.008982u

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमानme=0.00055um_e=0.00055u

परमाणु द्रव्यमानM=16.0000uM=16.0000u

8 प्रोटॉन का द्रव्यमान:8mp=8(1.007593)=8.060744u8m_p=8(1.007593)=8.060744u

8 न्यूट्रॉन का द्रव्यमान:8mn=8(1.008982)=8.071856u8m_n=8(1.008982)=8.071856u

8 इलेक्ट्रॉनों का द्रव्यमान:8me=8(0.00055)=0.00440u8m_e=8(0.00055)=0.00440u

नाभिक का द्रव्यमान:MN=16.00000.00440=15.99560uM_N=16.0000-0.00440 =15.99560u

द्रव्यमान क्षति:Δm=8.060744+8.07185615.99560\Delta m=8.060744+8.071856-15.99560Δm=0.137000u\Delta m=0.137000u

बन्धन ऊर्जा:Eb=0.137×931E_b=0.137\times931Eb127.55MeVE_b\approx127.55MeV

प्रति न्यूक्लियान बन्धन ऊर्जा:127.55167.97MeV\frac{127.55}{16} \approx7.97MeV

अतःप्रति न्यूक्लियान बन्धन ऊर्जा7.97MeV\boxed{\text{प्रति न्यूक्लियान बन्धन ऊर्जा}\approx7.97MeV}

(ग) दो समान्तर धारावाही चालकों के बीच लगने वाले बल की प्रकृति ज्ञात कीजिए जब :

(i) चालकों में धारा की दिशा समान है,

(ii) चालकों में धारा की दिशा विपरीत है।

Ans. (i) धाराओं की दिशा समान हो

दो समान्तर चालकों में धाराएँ एक ही दिशा में हों तो दोनों चालक एक-दूसरे को आकर्षित करते हैं।समान दिशा की धाराएँ → आकर्षण\boxed{\text{समान दिशा की धाराएँ → आकर्षण}}

(ii) चालकों में धारा की दिशा विपरीत हो

यदि दोनों चालकों में धाराएँ विपरीत दिशाओं में हों तो दोनों चालक एक-दूसरे को प्रतिकर्षित करते हैं।विपरीत दिशा की धाराएँ → प्रतिकर्षण\boxed{\text{विपरीत दिशा की धाराएँ → प्रतिकर्षण}}

दो अनन्त लम्बे समान्तर चालकों के लिएFL=μ0I1I22πd\boxed{\frac FL=\frac{\mu_0I_1I_2}{2\pi d}}

(घ) ह्वीट स्टोन सेतु की सन्तुलन अवस्था में उसकी भुजाओं के प्रतिरोधों के बीच सम्बन्ध स्थापित कीजिए ।
Ans.
व्हीटस्टोन सेतु में चार प्रतिरोध P,Q,R,SP,Q,R,S जुड़े हैं।

संतुलन अवस्था में गैल्वेनोमीटर से धारा नहीं बहती।

अतः दोनों मध्य बिन्दुओं का विभव समान होता है।

विभव-विभाजन के आधार पर,PQ=RS\frac{P}{Q}=\frac{R}{S}

अतःPS=QR\boxed{PS=QR}

यही व्हीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था की शर्त है।

अथवा

एक तार का प्रतिरोध 16 ओम है। इसे पिघला कर पहले से आधी लम्बाई का तार खींचा जाता है। नए तार का प्रतिरोध क्या होगा ?
Ans.
यदि तार का प्रारम्भिक प्रतिरोधR=16ΩR=16\Omega

और उसे पिघलाकर उसकी लंबाई आधी कर दी जाती है।

आयतन नियत रहने से क्षेत्रफल दोगुना होगा।R=ρLAR=\rho\frac LA

नए तार के लिएR=ρL/22AR’=\rho\frac{L/2}{2A}

अतःR=R4R’=\frac R4R=164R’=\frac{16}{4}R=4Ω\boxed{R’=4\Omega}

(ङ) किसी समान्तर प्लेट धारित्र की धारिता के लिए व्यंजक प्राप्त कीजिए। इसकी धारिता कैसे बढ़ाएँगे ?
Ans.
मान लीजिए दो समान्तर प्लेटों का क्षेत्रफल AA तथा उनके बीच दूरी dd है।

प्लेटों पर आवेश +Q+Q तथा Q-Q हैं।

पृष्ठ आवेश घनत्वσ=QA\sigma=\frac QA

विद्युत क्षेत्रE=σϵ0=Qϵ0AE=\frac{\sigma}{\epsilon_0} =\frac{Q}{\epsilon_0A}

प्लेटों के बीच विभवान्तरV=EdV=Ed

अतःV=Qdϵ0AV=\frac{Qd}{\epsilon_0A}

अबC=QVC=\frac QV

इसलिएC=ϵ0Ad\boxed{C=\frac{\epsilon_0A}{d}}

धारिता बढ़ाने के उपाय

  1. प्लेटों का क्षेत्रफल AA बढ़ाएँ।
  2. प्लेटों के बीच दूरी dd घटाएँ।
  3. प्लेटों के बीच उच्च परावैद्युतांक वाला पदार्थ भरें।

परावैद्युत पदार्थ लगाने परC=Kϵ0Ad\boxed{C=\frac{K\epsilon_0A}{d}}

हो जाता है।

खण्ड य

6. बोर की क्वांटमीकरण अभिगृहीत क्या है? इसका स्पष्टीकरण दे ब्रॉग्ली द्वारा कैसे किया गया ? बोर के परमाणु मॉडल की कमियाँ क्या हैं?

Ans. बोर के अनुसार परमाणु में इलेक्ट्रॉन केवल कुछ निश्चित स्थायी कक्षाओं में ही घूम सकता है। इन कक्षाओं में इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग क्वांटित होता है।mvr=nh2π\boxed{mvr=\frac{nh}{2\pi}}

जहाँn=1,2,3,n=1,2,3,\ldots

है।

इसे बोर का क्वांटमीकरण अभिगृहीत कहते हैं।

दे-ब्रॉग्ली द्वारा स्पष्टीकरण

दे-ब्रॉग्ली के अनुसार गतिमान इलेक्ट्रॉन के साथ पदार्थ तरंग जुड़ी होती है जिसकी तरंगदैर्ध्यλ=hmv\lambda=\frac hm v

याλ=hp\lambda=\frac hp

होती है।

स्थायी कक्षा में इलेक्ट्रॉन की तरंग का पूरा चक्र पूर्ण होना चाहिए।

अतः2πr=nλ2\pi r=n\lambda2πr=nhmv2\pi r=n\frac h{mv}

इससेmvr=nh2πmvr=\frac{nh}{2\pi}

प्राप्त होता है।

अर्थात बोर का क्वांटमीकरण नियम दे-ब्रॉग्ली की पदार्थ तरंग परिकल्पना से समझाया जा सकता है।

बोर मॉडल की कमियाँ

  1. यह केवल हाइड्रोजन जैसे एक-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के लिए सफल है।
  2. बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणुओं के स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं करता।
  3. सूक्ष्म संरचना तथा स्पेक्ट्रम की तीव्रताओं की संतोषजनक व्याख्या नहीं करता।
  4. ज़ीमान प्रभाव और स्टार्क प्रभाव की पूर्ण व्याख्या नहीं करता।
  5. इलेक्ट्रॉन को निश्चित कक्षा में मानना हाइजेनबर्ग के अनिश्चितता सिद्धान्त के अनुकूल नहीं है।

अथवा

निरपेक्ष ताप T पर किसी कण की ऊर्जा (KT) कोटि की है। 27°C पर ऊष्मीय न्यूट्रॉन के तरंगदैर्ध्य की गणना कीजिए। इसी तरंगदैर्ध्य के फोटॉन की ऊर्जा ज्ञात कीजिए। यहाँ पर k बोल्ट्ज़मैन नियतांक है।
Ans.
दिया है—T=27CT=27^\circ C

केल्विन में,T=27+273=300KT=27+273=300K

न्यूट्रॉन की ऊर्जा kTkT कोटि की है, अतःE=kTE=kT

न्यूट्रॉन की गतिज ऊर्जा,E=p22mE=\frac{p^2}{2m}

अतःp22m=kT\frac{p^2}{2m}=kTp=2mkTp=\sqrt{2mkT}

डी-ब्रॉग्ली समीकरण से,λ=hp\lambda=\frac hp

इसलिएλ=h2mkT\boxed{\lambda=\frac{h}{\sqrt{2mkT}}}

जहाँh=6.626×1034Jsh=6.626\times10^{-34}Jsmn=1.675×1027kgm_n=1.675\times10^{-27}kgk=1.38×1023J/Kk=1.38\times10^{-23}J/K

औरT=300KT=300K

मान रखने पर,λ=6.626×10342(1.675×1027)(1.38×1023)(300)\lambda= \frac{6.626\times10^{-34}} {\sqrt{2(1.675\times10^{-27})(1.38\times10^{-23})(300)}}λ1.78×1010m\boxed{\lambda\approx1.78\times10^{-10}m}

अर्थातλ1.78A˚\boxed{\lambda\approx1.78\,\text{Å}}

इसी तरंगदैर्ध्य के फोटॉन की ऊर्जा

फोटॉन की ऊर्जा,Eγ=hcλE_\gamma=\frac{hc}{\lambda}

जहाँc=3×108m/sc=3\times10^8m/s

अतःEγ=(6.626×1034)(3×108)1.78×1010E_\gamma= \frac{(6.626\times10^{-34})(3\times10^8)} {1.78\times10^{-10}}Eγ1.12×1015J\boxed{E_\gamma\approx1.12\times10^{-15}J}

इसे eV में:Eγ=1.12×10151.6×1019E_\gamma= \frac{1.12\times10^{-15}} {1.6\times10^{-19}}Eγ7.0×103eV\boxed{E_\gamma\approx7.0\times10^3eV}

अंतिम उत्तर

λneutron1.78×1010m\boxed{\lambda_{\text{neutron}}\approx1.78\times10^{-10}m}

और इसी तरंगदैर्ध्य के फोटॉन की ऊर्जाEγ1.12×1015J7.0keV\boxed{E_\gamma\approx1.12\times10^{-15}J \approx7.0\,keV}

7. यौगिक (संयुक्त) सूक्ष्मदर्शी में प्रतिबिम्ब का बनना किरण-आरेख बनाकर समझाइए । इसके लिए आवर्धन क्षमता के सूत्र की स्थापना कीजिए ।
Ans.
यौगिक सूक्ष्मदर्शी (Compound Microscope) एक ऐसा प्रकाशीय यंत्र है, जिसका उपयोग अत्यन्त छोटी वस्तुओं को बड़े आकार में देखने के लिए किया जाता है। इसमें दो उत्तल लेंस लगे होते हैं—अभिदृश्यक (Objective) और नेत्रिका (Eyepiece)। अभिदृश्यक की फोकस दूरी बहुत कम तथा नेत्रिका की फोकस दूरी अपेक्षाकृत अधिक होती है।

अधिक स्पष्ट रूप में प्रकाश की दिशा में प्रक्रिया इस प्रकार समझी जाती है—

वस्तु → अभिदृश्यक → वास्तविक, उल्टा और आवर्धित प्रतिबिम्ब → नेत्रिका → आभासी एवं अत्यधिक आवर्धित अंतिम प्रतिबिम्ब

प्रतिबिम्ब का बनना

वस्तु AB को अभिदृश्यक के फोकस FoF_o के बाहर तथा उसके निकट रखा जाता है। वस्तु से आने वाली किरणें अभिदृश्यक से अपवर्तित होकर दूसरी ओर वास्तविक, उल्टा तथा आवर्धित प्रतिबिम्ब A1B1A_1B_1 बनाती हैं।

यह मध्यवर्ती प्रतिबिम्ब A1B1A_1B_1, नेत्रिका के लिए वस्तु का कार्य करता है। इसे नेत्रिका के फोकस FeF_e के भीतर रखा जाता है। नेत्रिका एक सरल सूक्ष्मदर्शी की तरह कार्य करती है और अंतिम प्रतिबिम्ब आभासी, उल्टा तथा बहुत अधिक आवर्धित बनाती है।

आवर्धन क्षमता का सूत्र

यौगिक सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता को अभिदृश्यक तथा नेत्रिका के आवर्धनों के गुणनफल के रूप में लिखा जाता है—M=mo×meM=m_o\times m_e

जहाँ
mom_o = अभिदृश्यक का रैखिक आवर्धन
mem_e = नेत्रिका का कोणीय आवर्धन।

यदि अभिदृश्यक की फोकस दूरी fof_o, नेत्रिका की फोकस दूरी fef_e तथा दोनों लेंसों के बीच दूरी LL हो, तो अभिदृश्यक द्वारा प्राप्त मध्यवर्ती प्रतिबिम्ब का आवर्धन लगभगmo=Lfom_o=\frac{L}{f_o}

होता है।

(i) अंतिम प्रतिबिम्ब स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी D पर हो

नेत्रिका का कोणीय आवर्धनme=1+Dfem_e=1+\frac{D}{f_e}

अतः यौगिक सूक्ष्मदर्शी की कुल आवर्धन क्षमताM=Lfo(1+Dfe)\boxed{M=\frac{L}{f_o} \left(1+\frac{D}{f_e}\right)}

होगी।

(ii) अंतिम प्रतिबिम्ब अनन्त पर हो

इस स्थिति में नेत्रिका का कोणीय आवर्धनme=Dfem_e=\frac{D}{f_e}

अतःM=LDfofe\boxed{M=\frac{LD}{f_o f_e}}

जहाँ DD स्पष्ट दृष्टि की न्यूनतम दूरी है, जिसका सामान्य मान लगभगD=25cmD=25\,cm

लिया जाता है।

निष्कर्ष

अतः संयुक्त सूक्ष्मदर्शी की आवर्धन क्षमता अभिदृश्यक और नेत्रिका की फोकस दूरियों को कम करने तथा लेंसों के बीच दूरी बढ़ाने पर बढ़ती है। सामान्यतः अंतिम प्रतिबिम्ब को अनन्त पर बनाने की स्थिति में इसका सूत्रM=LDfofe\boxed{\displaystyle M=\frac{LD}{f_o f_e}}

होता है।

अथवा

किसी परिपथ में एक प्रत्यावर्ती वोल्टेज V समीकरण V = 40 sin (100 πt) वोल्ट द्वारा प्रदर्शित होता है। यहाँ समय सेकंड में है। समय वोल्टता (t-V) ग्राफ उचित पैमाने पर पूरे एक चक्र के लिए बनाइए । वोल्टेज का वर्ग माध्य मूल मान ज्ञात कीजिए ।
Ans.
दिया है—V=40sin(100πt)V=40\sin(100\pi t)

प्रत्यावर्ती वोल्टेज का सामान्य समीकरण है—V=V0sinωtV=V_0\sin\omega t

अतः,V0=40V\boxed{V_0=40V}

औरω=100π  rad/s\omega=100\pi\;rad/s

अब,ω=2πf\omega=2\pi f

इसलिए100π=2πf100\pi=2\pi ff=50Hz\boxed{f=50\,Hz}

अतः आवर्तकालT=1f=150=0.02sT=\frac1f=\frac1{50}=0.02\,s

इसलिए एक पूरा चक्र 00 से 0.02 s तक होगा।

tVt-V ग्राफ के लिए मान

समय tt100πt100\pi tV=40sin(100πt)V=40\sin(100\pi t)
0000^\circ0V0V
0.005s0.005s9090^\circ+40V+40V
0.010s0.010s180180^\circ0V0V
0.015s0.015s270270^\circ40V-40V
0.020s0.020s360360^\circ0V0V

अतः ग्राफ शून्य से शुरू होकर +40V+40V, फिर शून्य, फिर −40V-40V, और पुनः शून्य होगा।

प्रत्यावर्ती वोल्टेज का t–V ग्राफ

RMS मान

साइनाकार प्रत्यावर्ती वोल्टेज का वर्ग माध्य मूल मान—Vrms=V02V_{\rm rms}=\frac{V_0}{\sqrt2}

जहाँ V0=40VV_0=40V

अतः,Vrms=402V_{\rm rms}=\frac{40}{\sqrt2}=401.414=\frac{40}{1.414}Vrms28.28V\boxed{V_{\rm rms}\approx28.28V}

8. चुम्बकत्व का परमाण्विक मॉडल क्या है? इसके आधार पर अनुचुम्बकीय, प्रतिचुम्बकीय और लौह-चुम्बकीय पदार्थों में विभेद कीजिए। प्रत्येक का एक-एक उदाहरण भी दीजिए ।
Ans.
चुम्बकत्व का परमाण्विक मॉडल इस विचार पर आधारित है कि प्रत्येक परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की गति के कारण सूक्ष्म चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण उत्पन्न होता है। इलेक्ट्रॉन का अपनी धुरी पर घूमना (स्पिन) तथा नाभिक के चारों ओर उसकी गति चुम्बकीय प्रभाव उत्पन्न करती है। इसलिए प्रत्येक परमाणु को एक छोटे चुम्बकीय द्विध्रुव के रूप में माना जा सकता है।

बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र की अनुपस्थिति में इन सूक्ष्म चुम्बकीय द्विध्रुवों की दिशाएँ अलग-अलग होती हैं, इसलिए पदार्थ का कुल चुम्बकीय आघूर्ण सामान्यतः शून्य हो सकता है। बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर इनकी व्यवस्था में परिवर्तन होता है और पदार्थ अलग-अलग प्रकार का चुम्बकीय व्यवहार प्रदर्शित करता है।

विभिन्न पदार्थों में विभेद

गुणअनुचुम्बकीय पदार्थप्रतिचुम्बकीय पदार्थलौह-चुम्बकीय पदार्थ
चुम्बकीय क्षेत्र के प्रति व्यवहारबाहरी क्षेत्र की ओर आकर्षित होते हैंबाहरी क्षेत्र से थोड़ा प्रतिकर्षित होते हैंबहुत अधिक आकर्षित होते हैं
परमाण्विक चुम्बकीय द्विध्रुवकुछ स्थायी द्विध्रुव उपस्थित होते हैंस्थायी परिणामी द्विध्रुव आघूर्ण लगभग शून्य होता हैपरमाणु/चुम्बकीय द्विध्रुवों के समूह एक ही दिशा में व्यवस्थित हो सकते हैं
बाहरी क्षेत्र का प्रभावद्विध्रुव कुछ हद तक क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित होते हैंप्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण क्षेत्र की विपरीत दिशा में उत्पन्न होता हैद्विध्रुवों के बड़े-बड़े समूह (डोमेन) क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं
चुम्बकीय संवेदनशीलता χ\chiधनात्मक और छोटीऋणात्मक और छोटीबहुत अधिक धनात्मक
क्षेत्र हटाने परचुम्बकत्व लगभग समाप्त हो जाता हैचुम्बकत्व समाप्त हो जाता हैचुम्बकत्व कुछ हद तक बना रह सकता है
उदाहरणएल्युमिनियम (Al)बिस्मथ (Bi)लोहा (Fe)

1. अनुचुम्बकीय पदार्थ

जिन पदार्थों के परमाणुओं में स्थायी चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण होता है और जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र में क्षीण रूप से आकर्षित होते हैं, उन्हें अनुचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। बाहरी क्षेत्र लगाने पर उनके चुम्बकीय द्विध्रुव आंशिक रूप से क्षेत्र की दिशा में व्यवस्थित हो जाते हैं।

उदाहरण— एल्युमिनियम (Al)।

2. प्रतिचुम्बकीय पदार्थ

जिन पदार्थों में स्थायी परिणामी चुम्बकीय द्विध्रुव आघूर्ण नहीं होता और बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र लगाने पर उनमें ऐसा प्रेरित चुम्बकीय आघूर्ण उत्पन्न होता है जो बाहरी क्षेत्र की विपरीत दिशा में होता है, उन्हें प्रतिचुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। इसलिए ये चुम्बकीय क्षेत्र से बहुत कम प्रतिकर्षित होते हैं।

उदाहरण— बिस्मथ (Bi)।

3. लौह-चुम्बकीय पदार्थ

जिन पदार्थों में परमाण्विक चुम्बकीय द्विध्रुव एक-दूसरे के समान्तर व्यवस्थित होकर चुम्बकीय डोमेन बनाते हैं और जो बाहरी चुम्बकीय क्षेत्र से बहुत अधिक आकर्षित होते हैं, उन्हें लौह-चुम्बकीय पदार्थ कहते हैं। बाहरी क्षेत्र के प्रभाव से इनके डोमेन एक दिशा में अधिक व्यवस्थित हो जाते हैं, जिससे बहुत प्रबल चुम्बकत्व उत्पन्न होता है।

उदाहरण— लोहा (Fe)।

अथवा

एक प्रकाश किरण प्रिज़्म (n = √3) में गुज़रने पर न्यूनतम विचलित होती है। यदि इस किरण के लिए आपतन कोण, अपवर्तन कोण का दुगुना हो, तो प्रिज़्म का कोण तथा अपवर्तन कोण क्या होंगे ?
Ans.
दिया है—μ=3\mu=\sqrt3

न्यूनतम विचलन की स्थिति में प्रिज़्म के लिएi=ei=e

औरr1=r2=rr_1=r_2=r

अतः प्रिज़्म कोणA=r1+r2=2rA=r_1+r_2=2r

प्रश्नानुसार आपतन कोण ii, अपवर्तन कोण rr का दुगुना है—i=2ri=2r

अब स्नेल के नियम से,μ=sinisinr\mu=\frac{\sin i}{\sin r}

अतः3=sin2rsinr\sqrt3=\frac{\sin 2r}{\sin r}3=2sinrcosrsinr\sqrt3=\frac{2\sin r\cos r}{\sin r}3=2cosr\sqrt3=2\cos r

इसलिएcosr=32\cos r=\frac{\sqrt3}{2}

अतःr=30\boxed{r=30^\circ}

अब प्रिज़्म का कोणA=2rA=2rA=2×30A=2\times30^\circA=60\boxed{A=60^\circ}

और आपतन कोणi=2r=60i=2r=60^\circ

9. p-टाइप तथा n-टाइप अर्धचालकों के अभिलक्षणों की तुलना कीजिए । p-n सन्धि डायोड की अर्धतरंग दिष्टकरण प्रक्रिया को परिपथ आरेख खींचकर समझाइए ।
Ans.
अर्धचालक में अशुद्धि मिलाकर उसकी विद्युत चालकता बढ़ाने की प्रक्रिया को अपमिश्रण (Doping) कहते हैं। अपमिश्रण के आधार पर अर्धचालक मुख्यतः p-टाइप और n-टाइप होते हैं।

p-टाइप तथा n-टाइप अर्धचालकों में अंतर

आधारp-टाइप अर्धचालकn-टाइप अर्धचालक
मिलाई जाने वाली अशुद्धित्रिसंयोजी अशुद्धिपंचसंयोजी अशुद्धि
उदाहरणबोरॉन, एल्युमिनियमफॉस्फोरस, आर्सेनिक
मुख्य आवेश वाहकछिद्र (Holes)इलेक्ट्रॉन
अल्पसंख्यक वाहकइलेक्ट्रॉनछिद्र
अशुद्धि परमाणुग्राही (Acceptor)दाता (Donor)
फर्मी स्तरसंयोजकता बैंड के निकटचालन बैंड के निकट
आवेश की प्रकृतिछिद्र धनात्मक प्रभाव देते हैंइलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश रखते हैं

p-n सन्धि डायोड द्वारा अर्धतरंग दिष्टकरण

दिष्टकरण (Rectification) वह प्रक्रिया है जिसमें प्रत्यावर्ती धारा (AC) को एकदिशीय धारा (DC) में बदला जाता है। p-n सन्धि डायोड का उपयोग अर्धतरंग दिष्टकारी के रूप में किया जा सकता है।

परिपथ आरेख

यहाँ DD = p-n सन्धि डायोड तथा RLR_L = 10Ω लोड प्रतिरोध है।

कार्यविधि

1. धनात्मक अर्धचक्र में—

जब AC का धनात्मक अर्धचक्र आता है, तब डायोड का p-क्षेत्र धनात्मक तथा n-क्षेत्र ऋणात्मक होता है। इस स्थिति में डायोड अग्र अभिनति (Forward Bias) में होता है। इसलिए डायोड में धारा प्रवाहित होती है और लोड प्रतिरोध RLR_L के सिरों पर वोल्टेज प्राप्त होता है।

2. ऋणात्मक अर्धचक्र में—

जब AC का ऋणात्मक अर्धचक्र आता है, तब p-क्षेत्र ऋणात्मक और n-क्षेत्र धनात्मक हो जाता है। डायोड उल्टी अभिनति (Reverse Bias) में आ जाता है। इस कारण डायोड में धारा लगभग नहीं बहती और लोड के सिरों पर आउटपुट वोल्टेज लगभग शून्य रहता है।

इस प्रकार डायोड केवल AC के एक अर्धचक्र को प्रवाहित होने देता है और दूसरे अर्धचक्र को रोक देता है।

अतः अर्धतरंग दिष्टकारी में एक अर्धचक्र प्राप्त होता है तथा दूसरा अर्धचक्र अवरुद्ध हो जाता है। इसलिए प्राप्त आउटपुट एकदिशीय स्पंदित धारा होती है, जिसे उपयुक्त फिल्टर की सहायता से अधिक सुचारु DC में बदला जा सकता है।

अथवा

स्थिरवैद्युतिकी में गाउस नियम का उल्लेख कीजिए। इसका उपयोग करके (i) एक बिन्दु स्रोत आवेश (q) के कारण विद्युत-क्षेत्र का मान ज्ञात कीजिए तथा (ii) स्रोत आवेश (q) तथा टेस्ट आवेश (q0) के बीच कूलॉम नियम का निगमन कीजिए ।
Ans.
गाउस का नियम

गाउस के नियम के अनुसार, किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के भीतर स्थित कुल आवेश का 1/ε0 गुना होता है।

गणितीय रूप में,EdS=qinε0\boxed{\oint \vec E\cdot d\vec S=\frac{q_{\text{in}}}{\varepsilon_0}}

जहाँ ε0\varepsilon_0 निर्वात की विद्युतशीलता है।

(i) बिन्दु आवेश q के कारण विद्युत-क्षेत्र

मान लीजिए निर्वात में एक बिन्दु आवेश qq रखा है। उससे rr दूरी पर विद्युत-क्षेत्र ज्ञात करना है।

आवेश qq के चारों ओर rr त्रिज्या की एक गोलीय गाउसियन सतह लेते हैं।

सममिति के कारण गोलीय पृष्ठ के प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत-क्षेत्र का परिमाण समान होगा तथा विद्युत-क्षेत्र की दिशा पृष्ठ के अभिलम्ब की दिशा में होगी।

अतःEdS=EdS\oint \vec E\cdot d\vec S =E\oint dS

गोलीय पृष्ठ का क्षेत्रफलS=4πr2S=4\pi r^2

इसलिएEdS=E(4πr2)\oint \vec E\cdot d\vec S =E(4\pi r^2)

गाउस के नियम से,E(4πr2)=qε0E(4\pi r^2)=\frac{q}{\varepsilon_0}

अतःE=q4πε0r2E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0r^2}

इसलिए बिन्दु आवेश qq से rr दूरी पर विद्युत-क्षेत्र—E=q4πε0r2\boxed{E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0r^2}}

और सदिश रूप में,E=14πε0qr2r^\boxed{\vec E=\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{q}{r^2}\hat r}

(ii) कूलॉम नियम का निगमन

अब उसी बिन्दु आवेश qq से rr दूरी पर एक टेस्ट आवेश q0q_0 रखा गया है।

टेस्ट आवेश पर लगने वाला विद्युत बल,F=q0EF=q_0E

ऊपर प्राप्त विद्युत-क्षेत्र का मान रखने पर,F=q0(q4πε0r2)F=q_0\left(\frac{q}{4\pi\varepsilon_0r^2}\right)

अतःF=14πε0qq0r2\boxed{F=\frac{1}{4\pi\varepsilon_0} \frac{qq_0}{r^2}}

यदिk=14πε0k=\frac{1}{4\pi\varepsilon_0}

तोF=kqq0r2\boxed{F=k\frac{qq_0}{r^2}}

यही कूलॉम का नियम है।

निर्वात मेंk=9×109  Nm2/C2k=9\times10^9\;N\,m^2/C^2

अतः,F=9×109qq0r2\boxed{F=9\times10^9\frac{qq_0}{r^2}}

निष्कर्ष

इस प्रकार गाउस के नियम से बिन्दु आवेश के कारण विद्युत-क्षेत्रE=q4πε0r2\boxed{E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0r^2}}

तथा दो बिन्दु आवेशों के बीच कूलॉम बलF=14πε0qq0r2\boxed{F=\frac{1}{4\pi\varepsilon_0}\frac{qq_0}{r^2}}

प्राप्त होता है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

Leave a Comment