U.P Board Class 12 Physics 346(FT) Question Paper 2024

U.P Board Class 12 Physics 346(FT) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
भौतिक विज्ञान
समय: तीन घण्टे 15 मिनट  पूर्णांक: 70

निर्देश :

(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

(iii) इस प्रश्न-पत्र में पाँच खण्ड हैं- खण्ड अ, खण्ड ब, खण्ड स, खण्ड द और खण्ड य ।

(iv) खण्ड अ बहुविकल्पीय है तथा प्रत्येक प्रश्न का 1 अंक है।

(v) खण्ड ब अति लघु-उत्तरीय है तथा प्रत्येक प्रश्न का 1 अंक है।

(vi) खण्ड स लघु-उत्तरीय प्रकार-I का है तथा प्रत्येक प्रश्न के 2 अंक हैं।

(vii) खण्ड द लघु-उत्तरीय प्रकार-II का है तथा प्रत्येक प्रश्न के 3 अंक हैं।

(viii) खण्ड य विस्तृत-उत्तरीय है। प्रत्येक प्रश्न के 5 अंक हैं। इस खण्ड के सभी चारों प्रश्नों में आन्तरिक विकल्प का चयन प्रदान किया गया है। ऐसे प्रश्नों में आपको दिए गए चयन में से केवल एक प्रश्न ही करना है।

(ix) प्रश्न-पत्र में प्रयुक्त प्रतीकों के सामान्य अर्थ हैं।

खण्ड अ

1. (क) विद्युत आवेश एक छोटे आयतन में एकसमान वितरित हैं। 2 सेमी त्रिज्या के गोलीय पृष्ठ से कुल आवेश को घेरते हुए विद्युत क्षेत्र का फ्लक्स 10 V x m है। 4 cm त्रिज्या के गोलीय पृष्ठ पर फ्लक्स होगा :

(i) 10 V x m
(ii) 20 V x m
(iii) 40 V x m
(iv) 80 V x m

Ans. गॉस के नियम के अनुसार,ΦE=qε0\Phi_E=\frac{q}{\varepsilon_0}

बन्द पृष्ठ के अन्दर वही कुल आवेश है, इसलिए त्रिज्या बदलने पर कुल विद्युत फ्लक्स नहीं बदलता।

ΦE​= 10​ V x m

(ख) एक गतिशील आवेश उत्पन्न करता है:

(i) केवल विद्युत क्षेत्र
(ii) केवल चुम्बकीय क्षेत्र
(iii) विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों
(iv) उपर्युक्त में से कोई नहीं

Ans. (iii) विद्युत एवं चुम्बकीय क्षेत्र दोनों

ग) निर्वात में संचरित होने वाली विद्युत चुम्बकीय तरंग E = E0 sin (kx-ωt), B = B0 sin (kx-ωt) से प्रदर्शित है, तब होगा:

(i) E0k = B0ω
(ii) Ε0Β0 = ωκ
(iii) Ε0ω = Β0k
(iv) Ε0Β0 = √ωκ

Ans. निर्वात में संचरित विद्युतचुम्बकीय तरंगE=E0sin(kxωt)E=E_0\sin(kx-\omega t)B=B0sin(kxωt)B=B_0\sin(kx-\omega t)

से प्रदर्शित है, तब—

विद्युतचुम्बकीय तरंग के लिएE0B0=ωk\frac{E_0}{B_0}=\frac{\omega}{k}

अर्थात्E0k=B0ωE_0k=B_0\omega

(घ) 1.2 अपवर्तनांक के पदार्थ से एक उभयोत्तल लेंस बना है जिसकी दोनों सतह उत्तल हैं। यदि इसको 1.33 अपवर्तनांक वाले जल में डुबोते हैं तो वह कार्य करेगा:

(i) एक अभिसारी लेंस की तरह
(ii) एक अपसारी लेंस की तरह
(iii) एक आयताकार गुटके की तरह
(iv) एक प्रिज़्म की तरह

Ans. 1.2 अपवर्तनांक के पदार्थ से बने उभयोत्तल लेंस को 1.33 अपवर्तनांक वाले जल में डुबाने पर वह किस प्रकार कार्य करेगा?

लेंस का अपवर्तनांक जल से कम है:nl=1.2,nm=1.33n_l=1.2,\qquad n_m=1.33

अतः लेंस की सापेक्ष अपवर्तन क्षमता ऋणात्मक हो जाएगी और अभिसारी लेंस अपसारी लेंस की तरह कार्य करेगा।

सही विकल्प — (ii) एक अपसारी लेंस की तरह

(ङ) समीकरण E = pC में, E – ऊर्जा तथा p- संवेग है। यह समीकरण लागू होता है :

(i) इलेक्ट्रॉन तथा फोटॉन के लिए ।
(ii) इलेक्ट्रॉन के लिए परन्तु फ़ोटॉन के लिए नहीं ।
(iii) फोटॉन के लिए परन्तु इलेक्ट्रॉन के लिए नहीं।
(iv) न तो इलेक्ट्रॉन और न ही फ़ोटॉन के लिए ।

Ans. समीकरण E=pcE=pc लागू होता है—

यह संबंध फोटॉन के लिए है, क्योंकि फोटॉन के लिएE=hν,p=hλE=h\nu,\qquad p=\frac{h}{\lambda}

औरc=νλc=\nu\lambda

अतःE=pcE=pc

सही विकल्प — (iii) फोटॉन के लिए परन्तु इलेक्ट्रॉन के लिए नहीं।

(च) p-n संधि में विसरण धारा का मान अपवाह धारा से अधिक होता है, यदि संधि संयोजित है :

(i) अग्रदिशिक बायस में
(ii) पश्चदिशिक बायस में
(iii) बायस नहीं (unbiased)
(iv) किसी में नहीं

Ans. (i) अग्रदिशिक बायस में

खण्ड ब

2. (क) विशिष्ट चालकता (σ) एवं अपवाह वेग (vd) में संबंध के लिए समीकरण लिखिए ।
Ans.
विद्युत धारा घनत्व,J=nevdJ=nev_d

तथाJ=σEJ=\sigma E

अतःσ=nevdE\boxed{\sigma=\frac{nev_d}{E}}

जहाँ nn = इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रति इकाई आयतन, ee = इलेक्ट्रॉन का आवेश तथा vdv_d = अपवाह वेग।

(ख) ऐम्पियर परिपथीय नियम का उल्लेख कीजिए ।
Ans.
किसी बन्द पथ के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र का रेखीय समाकलन उस पथ द्वारा घिरी कुल धारा के μ0\mu_0 गुने के बराबर होता है।Bdl=μ0I\boxed{\oint \vec B\cdot d\vec l=\mu_0 I}

(ग) 1 kWh का मान जूल में निकालिए ।
Ans.
1kWh=1000W×3600s1\,kWh=1000W\times3600s=3.6×106J=3.6\times10^6J

अतः1kWh=3.6×106J\boxed{1\,kWh=3.6\times10^6J}

(घ) स्व-प्रेरकत्व का विमीय समीकरण निकालिए ।
Ans.
स्व-प्रेरकत्व,L=NϕIL=\frac{N\phi}{I}

विमीय रूप में,[L]=ML2T2I2\boxed{[L]=ML^2T^{-2}I^{-2}}

अतः स्व-प्रेरकत्व का विमीय सूत्रML2T2A2\boxed{ML^2T^{-2}A^{-2}}

है।

(ङ) हाइड्रोजन परमाणु की आयनन ऊर्जा 13.6 eV है। इसके इलेक्ट्रॉन की n = 2 अवस्था में आयनन ऊर्जा क्या होगी ?
Ans.
हाइड्रोजन की nnवीं कक्षा की आयनन ऊर्जा,En=13.6n2eVE_n=\frac{13.6}{n^2}eV

n=2n=2 के लिए,E2=13.64E_2=\frac{13.6}{4}E2=3.4eV\boxed{E_2=3.4eV}

(च) एक तरंग के ‘नरंगाग्र’ की परिभाषा दीजिए ।
Ans.
किसी तरंग में समान कला (same phase) में कंपन करने वाले निकटवर्ती बिन्दुओं को मिलाने पर प्राप्त पृष्ठ को तरंगाग्र (Wavefront) कहते हैं।

खण्ड स

3. (क) दिए गए परिपथ में 10 Ω वाले प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा का मान ज्ञात कीजिए जबकि स्विच S खुला हो तथा बंद हो ।

Ans. दिया है:

  • 10Ω10\,\Omega प्रतिरोध
  • 30Ω30\,\Omega प्रतिरोध
  • बैटरी का विभव V=20VV=20V

दिया है:

  • 10Ω10\,\Omega प्रतिरोध
  • 30Ω30\,\Omega प्रतिरोध
  • बैटरी का विभव V=20VV=20V

(i) जब स्विच (S) खुला हो

स्विच खुला होने पर 10Ω10\,\Omega और 30Ω30\,\Omega प्रतिरोध श्रेणीक्रम (Series) में जुड़े हैं।

अतः तुल्य प्रतिरोध,R=10+30=40ΩR=10+30=40\Omega

ओम के नियम से,I=VRI=\frac{V}{R}I=2040I=\frac{20}{40}I=0.5A\boxed{I=0.5A}

अतः 10 Ω प्रतिरोधक में धारा = 0.5A

(ii) जब स्विच (S) बंद हो

स्विच बंद करने पर 30Ω30\,\Omega प्रतिरोधक के समान्तर एक शॉर्ट सर्किट बन जाता है। इसलिए 30Ω30\,\Omega प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर शून्य हो जाता है और उसमें धारा नहीं बहती।

अब परिपथ में केवल 10Ω10\,\Omega प्रतिरोध प्रभावी है।R=10ΩR=10\Omega

अतः,I=VRI=\frac{V}{R}I=2010I=\frac{20}{10}I=2A\boxed{I=2A}

(ख) एकीकृत परमाणु द्रव्यमान मात्रक (amu) की समतुल्य ऊर्जा परिकलित कीजिए ।
Ans.
1amu=1.66×1027kg1amu=1.66\times10^{-27}kg

आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा संबंध से,E=mc2E=mc^2E=1.66×1027(3×108)2E=1.66\times10^{-27}(3\times10^8)^2E=1.66×1027×9×1016E=1.66\times10^{-27}\times9\times10^{16}E=1.494×1010JE=1.494\times10^{-10}J

अतः1amu=1.494×1010J\boxed{1amu=1.494\times10^{-10}J}

इसे eV में:1amu931.5MeV\boxed{1amu\approx931.5MeV}

(ग) एकसमान चुंबकीय आघूर्ण (m₁ = m2) के दो चुंबक दिए गए चित्र की भाँति रखे हैं। यदि चुंबक A₁ के द्वारा बिन्दु P पर चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता 2 × 10-3 टेस्ला हो, तो दोनों चुंबकों के कारण P पर परिणामी चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता ज्ञात कीजिए ।


Ans. चित्र के अनुसार दोनों चुंबकों के चुंबकीय आघूर्ण समान हैं:m1=m2m_1=m_2

तथा दोनों चुंबकों से बिन्दु PP की दूरी भी समान है:d1=d2=dd_1=d_2=d

चुंबक A1A_1 के N ध्रुव के कारण PP पर चुंबकीय क्षेत्र बाहर की ओर, अर्थात् दाईं ओर होगा।

दूसरे चुंबक A2A_2 का N ध्रुव भी PP के सामने है, इसलिए उसके कारण PP पर चुंबकीय क्षेत्र बाईं ओर होगा।

अर्थात् दोनों चुंबकीय क्षेत्र समान परिमाण के तथा विपरीत दिशाओं में हैं।

दिया है,B1=2×103TB_1=2\times10^{-3}T

चूँकि m1=m2m_1=m_2 और दोनों की दूरी dd समान है,B2=B1=2×103TB_2=B_1=2\times10^{-3}T

अतः परिणामी चुंबकीय क्षेत्र,B=B1B2B=B_1-B_2B=2×1032×103B=2\times10^{-3}-2\times10^{-3}B=0\boxed{B=0}

अतः बिन्दु PP पर दोनों चुंबकों के कारण परिणामी चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता

0 T

उत्तर: 00 टेस्ला ✓

(घ) सिलिकॉन p-n संधि डायोड में, 20 V का अग्र विभव लगाने पर उत्पन्न अग्र धारा 10 mA हो, तो इसका अग्र प्रतिरोध परिकलित कीजिए ।
Ans.
दिया है:V=20VV=20VI=10mA=10×103A=0.01AI=10mA=10\times10^{-3}A=0.01A

ओम के नियम से,Rf=VIR_f=\frac VIRf=200.01R_f=\frac{20}{0.01}Rf=2000Ω\boxed{R_f=2000\Omega}

अतः अग्र प्रतिरोध2kΩ\boxed{2k\Omega}

है।

खण्ड द

4. (क) एकसमान विद्युत क्षेत्र में रखे वैद्युत द्विध्रुव पर लगने वाले बल-आघूर्ण का व्यंजक प्राप्त कीजिए।
Ans.
मान लीजिए +q+q तथा q-q के दो आवेश 2a2a दूरी पर रखे हैं। विद्युत द्विध्रुव आघूर्ण,p=q(2a)p=q(2a)

है।

इसे एकसमान विद्युत क्षेत्र EE में θ\theta कोण पर रखा गया है।

दोनों आवेशों पर समान परिमाण के विपरीत बल लगेंगे:F=qEF=qE

इन दोनों बलों के कारण बल-युग्म उत्पन्न होगा। दोनों बलों की प्रभावी दूरी2asinθ2a\sin\theta

है।

अतः बल-आघूर्ण,τ=F(2asinθ)\tau=F(2a\sin\theta)τ=qE(2asinθ)\tau=qE(2a\sin\theta)

चूँकिp=q(2a)p=q(2a)

अतःτ=pEsinθ\boxed{\tau=pE\sin\theta}

सदिश रूप में,τ=p×E\boxed{\vec\tau=\vec p\times\vec E}

जब θ=90\theta=90^\circ, तब बल-आघूर्ण अधिकतम होता है:τmax=pE\boxed{\tau_{\max}=pE}

(ख) 12 सेमी त्रिज्या के धारावाही वृत्ताकार कुण्डली के केन्द्र में उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र B की तीव्रता 

0.5×10-4 टेस्ला कुण्डली के तल के लम्बवत् ऊपर की ओर है। कुण्डली में प्रवाहित धारा के मान तथा दिशा का परिकलन कीजिए ।
Ans.
दिया है:R=12cm=0.12mR=12cm=0.12mB=0.5×104TB=0.5\times10^{-4}T

एक फेरे वाली वृत्ताकार कुण्डली के केन्द्र पर,B=μ0I2RB=\frac{\mu_0 I}{2R}

अतःI=2RBμ0I=\frac{2RB}{\mu_0}

दिया है,μ04π=107\frac{\mu_0}{4\pi}=10^{-7}

इससेμ0=4π×107\mu_0=4\pi\times10^{-7}

अतःI=2(0.12)(0.5×104)4π×107I=\frac{2(0.12)(0.5\times10^{-4})} {4\pi\times10^{-7}}I9.55AI\approx9.55A

अतःI9.55A\boxed{I\approx9.55A}

दिशा: दाहिने हाथ के अंगूठे के नियम के अनुसार, यदि चुंबकीय क्षेत्र कुण्डली के तल के लम्बवत ऊपर की ओर है, तो ऊपर से देखने पर धारा वामावर्त (anticlockwise) होगी।

(ग) पूर्ण-आंतरिक परावर्तन तथा क्रान्तिक कोण क्या होता है? प्रकाशिक तन्तु (Optical fibre) किस सिद्धान्त पर कार्य करता है ?
Ans.
जब प्रकाश सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाता है और आपतन कोण क्रान्तिक कोण से अधिक हो जाता है, तब प्रकाश का अपवर्तन न होकर पूर्णतः उसी माध्यम में परावर्तित हो जाता है। इस घटना को पूर्ण आंतरिक परावर्तन कहते हैं।

वह आपतन कोण जिसके लिए विरल माध्यम में अपवर्तन कोण 9090^\circ हो जाता है, क्रान्तिक कोण कहलाता है।

यदि सघन माध्यम का अपवर्तनांक nn है, तोsinC=1n\boxed{\sin C=\frac1n}

प्रकाशिक तन्तु (Optical Fibre) पूर्ण आंतरिक परावर्तन के सिद्धान्त पर कार्य करता है। इसमें प्रकाश बार-बार पूर्ण आंतरिक परावर्तन करके बहुत दूर तक संचरित होता है।

(घ) दर्शाए गए परिपथ में, A तथा B के मध्य विभवांतर ज्ञात कीजिए ।

Ans. तीनों शाखाओं मेंr1=r2=r3=1Ωr_1=r_2=r_3=1\Omega

तथा सेल के विद्युत वाहक बल हैं—E1=3V,E2=2V,E3=1VE_1=3V,\quad E_2=2V,\quad E_3=1V

सभी सेलों के धनात्मक टर्मिनल BB की ओर हैं।

मान लेते हैं,V=VAVBV=V_A-V_B

और A से B की ओर प्रवाहित धाराएँ क्रमशः I1,I2,I3I_1,I_2,I_3 हैं।

किसी शाखा के लिए,VAIiri+Ei=VBV_A-I_ir_i+E_i=V_B

अतःIi=VAVB+EiriI_i=\frac{V_A-V_B+E_i}{r_i}

A पर किर्चॉफ के प्रथम नियम के अनुसार,I1+I2+I3=0I_1+I_2+I_3=0

इसलिए,VAVB+31+VAVB+21+VAVB+11=0\frac{V_A-V_B+3}{1} +\frac{V_A-V_B+2}{1} +\frac{V_A-V_B+1}{1}=03(VAVB)+6=03(V_A-V_B)+6=03(VAVB)=63(V_A-V_B)=-6VAVB=2VV_A-V_B=-2V

अतः,VBVA=2V\boxed{V_B-V_A=2V}

निष्कर्ष:

VAB=2V\boxed{|V_{AB}|=2V}

अर्थात् B बिन्दु का विभव A बिन्दु से 2 वोल्ट अधिक है।

तुल्य सेल

तीनों सेलों के समान आन्तरिक प्रतिरोध के कारण,1req=11+11+11=3\frac1{r_{\rm eq}} =\frac11+\frac11+\frac11=3

अतः,req=13Ω\boxed{r_{\rm eq}=\frac13\Omega}

तुल्य विद्युत वाहक बल,Eeq=3+2+13=2VE_{\rm eq} =\frac{3+2+1}{3} =\boxed{2V}

इसलिए यह संयोजन 2V विद्युत वाहक बल तथा (1/3)Ω आन्तरिक प्रतिरोध वाले तुल्य सेल के समान है।

अंतिम उत्तर: VAB= 2V (परिमाण में)।

(ङ) अन्योन्य प्रेरकत्व की परिभाषा दीजिए ।

सिद्ध कीजिए,
हेनरी/मीटर =  न्यूटन /ऐम्पियर2

Ans. जब एक कुण्डली में धारा परिवर्तन के कारण दूसरी समीपस्थ कुण्डली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है, तो दोनों कुण्डलियों के बीच इस गुण को अन्योन्य प्रेरकत्व कहते हैं।e=MdIdte=-M\frac{dI}{dt}

जहाँ MM अन्योन्य प्रेरकत्व है।

अब,1H=1VsA1H=1\frac{V\,s}{A}

और1V=1JC1V=1\frac{J}{C}

इसलिए,1H=JsCA1H=\frac{J\,s}{C\,A}

चूँकिA=CsA=\frac{C}{s}

अतः1H=JA21H=\frac{J}{A^2}

और1J=1Nm1J=1Nm

इसलिए,1H=NmA21H=\frac{Nm}{A^2}

अतःHm=NA2\boxed{\frac{H}{m}=\frac{N}{A^2}}

सिद्ध हुआ।

5. क) आदर्श अमीटर तथा आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोध कितना होता है? ऐमीटर तथा वोल्टमीटर को क्रमशः परिपथ के श्रेणीक्रम तथा समान्तर क्रम में क्यों जोड़ा जाता है?
Ans.
आदर्श अमीटर का प्रतिरोधRA=0\boxed{R_A=0}

होता है।

आदर्श वोल्टमीटर का प्रतिरोधRV=\boxed{R_V=\infty}

होता है।

अमीटर को श्रेणीक्रम में जोड़ा जाता है क्योंकि उसके द्वारा परिपथ में बहने वाली पूरी धारा को मापना होता है। उसका प्रतिरोध बहुत कम होने के कारण परिपथ की धारा पर लगभग कोई प्रभाव नहीं पड़ता।

वोल्टमीटर को समान्तर क्रम में जोड़ा जाता है क्योंकि वह किसी घटक के दोनों सिरों के बीच विभवांतर मापता है। उसका प्रतिरोध बहुत अधिक होने के कारण उसमें नगण्य धारा बहती है।

(ख) एक कुण्डली का प्रेरकत्व 0.4 हेनरी एवं प्रतिरोध 10 ओम है। यह 30 हर्ट्ज़, 6.5 वोल्ट के प्रत्यावर्ती स्रोत से जुड़ी है। इस परिपथ में व्यय औसत विद्युत शक्ति की गणना कीजिए ।
Ans.
दिया है:L=0.4H,R=10ΩL=0.4H,\quad R=10\Omegaf=30Hz,V=6.5Vf=30Hz,\quad V=6.5V

प्रेरकीय प्रतिघात,XL=2πfLX_L=2\pi fL=2π(30)(0.4)=2\pi(30)(0.4)XL75.4ΩX_L\approx75.4\Omega

प्रतिबाधा,Z=R2+XL2Z=\sqrt{R^2+X_L^2}Z=102+75.42Z=\sqrt{10^2+75.4^2}Z76.06ΩZ\approx76.06\Omega

धारा,I=VZI=\frac VZI=6.576.060.0855AI=\frac{6.5}{76.06} \approx0.0855A

औसत शक्ति,P=I2RP=I^2RP=(0.0855)2(10)P=(0.0855)^2(10)P0.073W\boxed{P\approx0.073W}

अतः औसत विद्युत शक्ति लगभग7.3×102W\boxed{7.3\times10^{-2}W}

है।

(ग) मैक्सवेल की विस्थापन धारा की व्याख्या कीजिए तथा इसका समीकरण लिखिए। इसके एवं चालन धारा के बीच कलान्तर कितना होता है ?
Ans.
समय के साथ परिवर्तित विद्युत क्षेत्र के कारण उत्पन्न समतुल्य धारा को विस्थापन धारा कहते हैं। मैक्सवेल ने इसकी संकल्पना प्रस्तुत की।

विस्थापन धारा,Id=ε0dΦEdt\boxed{I_d=\varepsilon_0\frac{d\Phi_E}{dt}}

जहाँ ΦE\Phi_E विद्युत फ्लक्स है।

विस्थापन धारा विशेष रूप से संधारित्र की प्लेटों के बीच महत्वपूर्ण होती है।

चालन धारा और विस्थापन धारा के बीच सामान्यतः कोई स्थायी 90° कलान्तर नहीं माना जाता; दिए गए आदर्श AC संधारित्र की स्थिति में संबंधित धाराओं का चरण-संबंध प्रसंग पर निर्भर करता है।

घ) प्रकाश का व्यतिकरण क्या होता है ? (i) संपोषी व्यतिकरण तथा (ii) विनाशी व्यतिकरण की दशाएँ दर्शाइए ।
Ans.
जब समान आवृत्ति, समान तरंगदैर्ध्य तथा स्थिर कलान्तर वाली दो सुसंगत प्रकाश तरंगें अध्यारोपित होती हैं, तो कुछ स्थानों पर प्रकाश की तीव्रता बढ़ जाती है और कुछ स्थानों पर घट जाती है। इस घटना को प्रकाश का व्यतिकरण कहते हैं।

(i) संपोषी व्यतिकरण

जब दोनों तरंगें समान कला में मिलती हैं, तब परिणामी आयाम अधिकतम होता है।

पथांतर:Δ=nλ\boxed{\Delta=n\lambda}

जहाँ n=0,1,2,3,n=0,1,2,3,\ldots

(ii) विनाशी व्यतिकरण

जब दोनों तरंगें विपरीत कला में मिलती हैं, तब परिणामी आयाम न्यूनतम होता है।

पथांतर:Δ=(2n+1)λ2\boxed{\Delta=(2n+1)\frac{\lambda}{2}}

जहाँ n=0,1,2,n=0,1,2,\ldots

अथवा

प्रकाश के ध्रुवण से क्या तात्पर्य है? पोलेरॉइड के सिद्धान्त तथा दो उपयोगों का उल्लेख कीजिए ।
Ans.
प्रकाश तरंग के विद्युत क्षेत्र के कंपनों को एक विशेष दिशा में सीमित करने की घटना को प्रकाश का ध्रुवण कहते हैं। इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश अनुप्रस्थ तरंग है।

पोलेरॉइड का सिद्धान्त

पोलेरॉइड केवल एक निश्चित दिशा में कंपन करने वाले प्रकाश को पारित करता है तथा अन्य दिशाओं के कंपनों को रोक देता है।

उपयोग

  1. धूप के चश्मों में चकाचौंध कम करने के लिए।
  2. कैमरा एवं फोटोग्राफी में चमक कम करने के लिए।
  3. LCD तथा ऑप्टिकल उपकरणों में।

(ङ) 2.5 eV के कार्य फलन वाले धातु में 4000 Å की तरंगदैर्ध्य का प्रकाश डालने पर उत्सर्जित फोटो-इलेक्ट्रॉन के अधिकतम वेग तथा रेखीय संवेग की गणना कीजिए।

Ans. दिया है:ϕ=2.5eV\phi=2.5eVλ=4000A˚=4000×1010m\lambda=4000\AA=4000\times10^{-10}m=4×107m=4\times10^{-7}m

फोटॉन की ऊर्जा,E=hcλE=\frac{hc}{\lambda}=6.6×1034×3×1084×107=\frac{6.6\times10^{-34}\times3\times10^8} {4\times10^{-7}}E=4.95×1019JE=4.95\times10^{-19}J

eV में,E=4.95×10191.6×10193.09eVE=\frac{4.95\times10^{-19}} {1.6\times10^{-19}} \approx3.09eV

अतः अधिकतम गतिज ऊर्जा,Kmax=3.092.5K_{\max}=3.09-2.5=0.59eV=0.59eV

जूल में,Kmax=0.59×1.6×1019K_{\max}=0.59\times1.6\times10^{-19}=9.44×1020J=9.44\times10^{-20}J

अब,Kmax=12mv2K_{\max}=\frac12mv^2

अतःv=2Kmv=\sqrt{\frac{2K}{m}}v=2(9.44×1020)9.1×1031v=\sqrt{\frac{2(9.44\times10^{-20})} {9.1\times10^{-31}}}v4.56×105m/s\boxed{v\approx4.56\times10^5m/s}

रेखीय संवेग,p=mvp=mvp=(9.1×1031)(4.56×105)p=(9.1\times10^{-31})(4.56\times10^5)p4.15×1025kgm/s\boxed{p\approx4.15\times10^{-25}kg\,m/s}

खण्ड य

6. स्थिर-वैद्युतिकी में गॉस नियम को लिखकर स्पष्ट कीजिए। इसकी सहायता से एकसमान आवेशित पतले गोलीय खोल ( आवेश = q तथा त्रिज्या R) के कारण विद्युत क्षेत्र का मान (i) खोल के बाहर (ii) खोल के भीतर तथा (iii) खोल की सतह पर ज्ञात कीजिए ।

Ans. गॉस का नियम

गॉस के नियम के अनुसार किसी बन्द पृष्ठ से गुजरने वाला कुल विद्युत फ्लक्स उस पृष्ठ के अन्दर उपस्थित कुल आवेश को ε0\varepsilon_0 से भाग देने पर प्राप्त होता है।ΦE=qε0\boxed{\Phi_E=\frac{q}{\varepsilon_0}}

याEdS=qε0\boxed{\oint\vec E\cdot d\vec S=\frac{q}{\varepsilon_0}}

(i) गोलीय खोल के बाहर (r>R)(r>R)

त्रिज्या rr का एक काल्पनिक गोलीय गॉसीय पृष्ठ लेते हैं।

सममिति के कारण प्रत्येक बिन्दु पर विद्युत क्षेत्र समान होगा।

अतः,E(4πr2)=qε0E(4\pi r^2)=\frac q{\varepsilon_0}

इसलिए,E=q4πε0r2\boxed{E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0r^2}}

अर्थात् बाहर का क्षेत्र ऐसा है जैसे पूरा आवेश गोले के केन्द्र पर स्थित हो।

(ii) गोलीय खोल के भीतर (r<R)(r<R)

गॉसीय पृष्ठ के अन्दर कोई आवेश नहीं है।qenclosed=0q_{\text{enclosed}}=0

अतः,E(4πr2)=0E(4\pi r^2)=0

इसलिए,E=0\boxed{E=0}

(iii) गोलीय खोल की सतह पर (r=R)(r=R)

गोले की सतह के ठीक बाहर,E=q4πε0R2\boxed{E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0R^2}}

और ठीक भीतर,E=0\boxed{E=0}

अतः सतह पर विद्युत क्षेत्र का बाहरी मानE=q4πε0R2\boxed{E=\frac{q}{4\pi\varepsilon_0R^2}}

है।

अथवा

दिए गए परिपथ में निम्नलिखित की गणना कीजिए :

i) परिपथ की तुल्य धारिता

(ii) 3µF तथा 2µF वाले संधारित्रों पर आवेश

Ans. यदि बैटरी L–R के बीच 10 V लगी है। इस स्थिति में ब्रिज संतुलित है और बीच के 2μF2\,\mu F संधारित्र पर विभवांतर शून्य होगा।

अंतिम उत्तर

CLTCLB=126=2\frac{C_{LT}}{C_{LB}}=\frac{12}{6}=2

औरCRTCRB=63=2\frac{C_{RT}}{C_{RB}}=\frac{6}{3}=2

अतःVT=VB\boxed{V_T=V_B}

इसलिए TBT-B के बीच का 2μF2\,\mu F संधारित्र आवेशित नहीं होगा

1. ऊपर की शाखा

Cऊपर=12×612+6=4μFC_{\text{ऊपर}}=\frac{12\times6}{12+6}=4\,\mu F

अतःQऊपर=4×10=40μCQ_{\text{ऊपर}}=4\times10=\boxed{40\,\mu C}

इसलिएQ12μF=40μC\boxed{Q_{12\mu F}=40\,\mu C}Q6μF(ऊपर)=40μC\boxed{Q_{6\mu F(\text{ऊपर})}=40\,\mu C}

2. नीचे की शाखा

Cनीचे=6×36+3=2μFC_{\text{नीचे}}=\frac{6\times3}{6+3}=2\,\mu F

अतःQनीचे=2×10=20μCQ_{\text{नीचे}}=2\times10=\boxed{20\,\mu C}

इसलिएQ6μF(नीचे)=20μC\boxed{Q_{6\mu F(\text{नीचे})}=20\,\mu C}Q3μF=20μC\boxed{Q_{3\mu F}=20\,\mu C}

3. बीच का 2μF2\,\mu F

क्योंकिVT=VBV_T=V_B

इसलिएVTB=0V_{TB}=0

औरQTB=CVTB=2×0=0μCQ_{TB}=CV_{TB} =2\times0 =\boxed{0\,\mu C}

तुल्य धारिता

दोनों शाखाएँ समानांतर हैं:Ceq=4+2=6μFC_{eq}=4+2 =\boxed{6\,\mu F}

अतः बैटरी का कुल आवेश:Q=CeqV=6×10=60μCQ=C_{eq}V =6\times10 =\boxed{60\,\mu C}

अतः L–R के बीच 10 V बैटरी होने पर सही परिणाम है:Ceq=6μF,Qtotal=60μC\boxed{C_{eq}=6\,\mu F,\quad Q_{\text{total}}=60\,\mu C}Q12=40μC,Q6(ऊपर)=40μC\boxed{Q_{12}=40\,\mu C,\quad Q_{6(\text{ऊपर})}=40\,\mu C}Q6(नीचे)=20μC,Q3=20μC\boxed{Q_{6(\text{नीचे})}=20\,\mu C,\quad Q_{3}=20\,\mu C}Q2=0\boxed{Q_{2}=0}

ध्यान दें: आपके अंत में दिया गया Ceq=8μFC_{eq}=8\,\mu F वाला परिणाम दूसरे सर्किट के लिए है—जब 2μF2\,\mu F सीधे 10 V स्रोत के समानांतर जुड़ा हो। उसे इस L–R वाले सर्किट के उत्तर में नहीं मिलाना चाहिए।

7. किरण आरेख की सहायता से परावर्ती दूरदर्शी में प्रतिबिंब बनने की व्याख्या कीजिए। अपवर्ती दग्दर्शी से इसकी विशेषताओं की तुलना कीजिए ।
Ans.
परावर्ती दूरदर्शी में प्रकाश को एक बड़े अवतल दर्पण द्वारा परावर्तित करके प्रतिबिंब बनाया जाता है। दूर स्थित वस्तु से आने वाली लगभग समान्तर किरणें मुख्य दर्पण पर गिरती हैं और परावर्तन के बाद फोकस के निकट एक वास्तविक प्रतिबिंब बनाती हैं। फिर सहायक दर्पण/दर्पण व्यवस्था द्वारा प्रकाश को नेत्रिका तक भेजा जाता है।

परावर्ती एवं अपवर्ती दूरदर्शी में अंतर

परावर्ती दूरदर्शीअपवर्ती दूरदर्शी
इसमें दर्पण का उपयोग होता है।इसमें लेंस का उपयोग होता है।
इसमें परावर्तन की घटना होती है।इसमें अपवर्तन की घटना होती है।
वर्ण विपथन नहीं होता।वर्ण विपथन हो सकता है।
बड़े आकार में बनाना अपेक्षाकृत आसान है।बहुत बड़े लेंस का निर्माण कठिन होता है।
इसमें मुख्य दर्पण के पीछे प्रकाश नहीं जाता।इसमें प्रकाश मुख्य लेंस से होकर गुजरता है।
खगोलीय अवलोकन के लिए अत्यधिक उपयोगी है।छोटे एवं मध्यम आकार के दूरदर्शी में उपयोगी है।

अथवा

तरंगों के विवर्तन तथा व्यतिकरण में अन्तर स्पष्ट कीजिए। एकल झिरी विवर्तन प्राम्प का गुणात्मक अवलोकन कीजिए ।
Ans.
विवर्तन में प्रकाश तरंग किसी संकीर्ण छिद्र या अवरोध के किनारों से मुड़कर ज्यामितीय छाया के क्षेत्र में पहुँचती है। व्यतिकरण में दो सुसंगत तरंगों के अध्यारोपण से अधिकतम और न्यूनतम तीव्रता की धारियाँ बनती हैं।

व्यतिकरणविवर्तन
दो या अधिक सुसंगत तरंगों के अध्यारोपण से होता है।एक ही तरंग के विभिन्न भागों के अध्यारोपण से हो सकता है।
धारियाँ लगभग समान चौड़ाई की हो सकती हैं।केंद्रीय अधिकतम सबसे चौड़ा और अधिक तीव्र होता है।
अधिकतमों की तीव्रता सामान्यतः अधिक समान होती है।केंद्रीय अधिकतम के दोनों ओर तीव्रता घटती जाती है।

एकल झिरी विवर्तन

जब एकवर्णी प्रकाश को बहुत संकीर्ण एकल झिरी से गुजारा जाता है, तो पर्दे पर एक चौड़ा केंद्रीय चमकीला अधिकतम प्राप्त होता है। इसके दोनों ओर अपेक्षाकृत कम तीव्रता वाले द्वितीयक अधिकतम तथा अंधकार पट्टियाँ प्राप्त होती हैं।

अंधकार की दशा:asinθ=nλ\boxed{a\sin\theta=n\lambda}

जहाँ aa झिरी की चौड़ाई है।

8. हाइड्रोजन परमाणु के लिए बोहर मॉडल के अभिग्ग्रहीतों को स्पष्ट कीजिए। हाइड्रोजन परमाणु के ऊर्जा स्तर n = 1 तथा n = 4  के बीच संक्रमण के संगत (i) उत्सर्जन तथा (ii) अवशोषण स्पेक्ट्रम में प्राप्त स्पेक्ट्रमी रेखाओं को दर्शाइए ।
Ans.
बोहर मॉडल के अभिगृहीत

  1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं।
  2. इन स्थिर कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करता।
  3. इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग क्वांटीकृत होता है:

mvr=nh2π\boxed{mvr=\frac{nh}{2\pi}}

जहाँ n=1,2,3,n=1,2,3,\ldots

  1. इलेक्ट्रॉन एक स्थिर कक्षा से दूसरी कक्षा में जाता है तो ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।

उत्सर्जन के लिए,hν=EiEfh\nu=E_i-E_f

अवशोषण के लिए,hν=EfEih\nu=E_f-E_i

हाइड्रोजन के ऊर्जा स्तर,En=13.6n2eVE_n=-\frac{13.6}{n^2}eV

n=4n=4 से n=1n=1 उत्सर्जन

यदि इलेक्ट्रॉन n=4n=4 से n=1n=1 आता है, तो एक स्पेक्ट्रमी रेखा प्राप्त होती है:41\boxed{4\rightarrow1}

यह लाइमन श्रेणी की रेखा है।

n=1n=1 से n=4n=4 अवशोषण

अवशोषण में इलेक्ट्रॉन14\boxed{1\rightarrow4}

संक्रमण करता है।

अतः दिए गए n=1n=1 और n=4n=4 स्तरों के बीच संबंधित उत्सर्जन एवं अवशोषण रेखाएँ एक-दूसरे के विपरीत संक्रमण से संबंधित होती हैं।

अथवा

नाभिक की बंधन ऊर्जा से क्या अभिप्राय है? बंधन ऊर्जा प्रति न्यूक्लिऑन की द्रव्यमान संख्या के संगत विचरण दर्शाइए । विखण्डन एवं संलयन अभिक्रियाओं की इस विचरण की महायता में विवेचना कीजिए ।
Ans.
बोहर मॉडल के अभिगृहीत

  1. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कुछ निश्चित स्थिर कक्षाओं में घूमते हैं।
  2. इन स्थिर कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करता।
  3. इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग क्वांटीकृत होता है:

mvr=nh2π\boxed{mvr=\frac{nh}{2\pi}}

जहाँ n=1,2,3,n=1,2,3,\ldots

  1. इलेक्ट्रॉन एक स्थिर कक्षा से दूसरी कक्षा में जाता है तो ऊर्जा का उत्सर्जन या अवशोषण होता है।

उत्सर्जन के लिए,hν=EiEfh\nu=E_i-E_f

अवशोषण के लिए,hν=EfEih\nu=E_f-E_i

हाइड्रोजन के ऊर्जा स्तर,En=13.6n2eVE_n=-\frac{13.6}{n^2}eV

n=4n=4 से n=1n=1 उत्सर्जन

यदि इलेक्ट्रॉन n=4n=4 से n=1n=1 आता है, तो एक स्पेक्ट्रमी रेखा प्राप्त होती है:41\boxed{4\rightarrow1}

यह लाइमन श्रेणी की रेखा है।

n=1n=1 से n=4n=4 अवशोषण

अवशोषण में इलेक्ट्रॉन14\boxed{1\rightarrow4}

संक्रमण करता है।

अतः दिए गए n=1n=1 और n=4n=4 स्तरों के बीच संबंधित उत्सर्जन एवं अवशोषण रेखाएँ एक-दूसरे के विपरीत संक्रमण से संबंधित होती हैं।

9. n-टाइप अर्धचालक की चालकता की गणना निम्नलिखित आंकड़ों से कीजिए।

चालन इलेक्ट्रॉमों का घनत्व = 8×1013 cm-3

कोटरों का घनत्व = 5 × 1012 cm-3

इलेक्ट्रॉनों की गतिशीलता (mobility) = 2.3 × 104 cm²/V-s

कोटरों की गतिशीलता (mobility) =  100 cm²/V-s

Ans. दिया है:n=8×1013cm3n=8\times10^{13}cm^{-3}p=5×1012cm3p=5\times10^{12}cm^{-3}μe=2.3×104cm2/Vs\mu_e=2.3\times10^4cm^2/V-sμh=100cm2/Vs\mu_h=100cm^2/V-s

चालकता का सूत्र:σ=e(nμe+pμh)\boxed{\sigma=e(n\mu_e+p\mu_h)}

जहाँe=1.6×1019Ce=1.6\times10^{-19}C

अब,nμe=(8×1013)(2.3×104)n\mu_e =(8\times10^{13})(2.3\times10^4)=18.4×1017=1.84×1018=18.4\times10^{17} =1.84\times10^{18}

तथाpμh=(5×1012)(100)=5×1014p\mu_h=(5\times10^{12})(100) =5\times10^{14}

अतः,nμe+pμh=1.8405×1018n\mu_e+p\mu_h =1.8405\times10^{18}

इसलिए,σ=(1.6×1019)(1.8405×1018)\sigma=(1.6\times10^{-19})(1.8405\times10^{18})σ0.2945  (Ωcm)1\boxed{\sigma\approx0.2945\;(\Omega\,cm)^{-1}}

अतः n-टाइप अर्धचालक की चालकता लगभग0.295  S/cm\boxed{0.295\;S/cm}

है।

अथवा

p-n संधि के निर्माण में हासी स्तर तथा विभव रोधक की व्याख्या कीजिए। अग्रदिशिक बायस तथा पश्चदिशिक बायस की दशा में दोनों में क्या परिवर्तन होना है?

भौतिक स्थिरांक :

इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान = 9.1 × 10-31 kg

प्लांक नियतांक (h) = 6.6 x 10-34 J-s

प्रकाश चाल (c) = 3 x 108 ms-1

रिडबर्ग नियतांक (R) = 1.097x 107 m-1

सिलिकॉन के लिए विभव राधक = 0.7 वोल्ट

μo/4π = 10-7 N/A2

Ans. जब p-प्रकार तथा n-प्रकार के अर्धचालकों को जोड़ा जाता है, तब n-पक्ष के इलेक्ट्रॉन p-पक्ष की ओर तथा p-पक्ष के होल n-पक्ष की ओर विसरण करते हैं। संधि के पास इलेक्ट्रॉन एवं होल के पुनर्संयोजन के कारण ऐसे क्षेत्र का निर्माण होता है जिसमें गतिशील आवेश वाहक बहुत कम रह जाते हैं। इस क्षेत्र को ह्रास क्षेत्र (Depletion Region) कहते हैं।

इस क्षेत्र में स्थिर आयनों के कारण एक विद्युत क्षेत्र और विभवांतर उत्पन्न होता है, जिसे विभव रोधक (Potential Barrier) कहते हैं।

अग्रदिशिक बायस

p-पक्ष को बैटरी के धनात्मक तथा n-पक्ष को ऋणात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है।

इससे:

  • ह्रास क्षेत्र की चौड़ाई घटती है।
  • विभव रोधक घटता है।
  • बहुसंख्यक आवेश वाहकों का विसरण बढ़ता है।
  • धारा तेजी से बढ़ती है।

सिलिकॉन के लिए विभव रोधक लगभग0.7V\boxed{0.7V}

होता है।

पश्चदिशिक बायस

p-पक्ष को ऋणात्मक तथा n-पक्ष को धनात्मक टर्मिनल से जोड़ा जाता है।

इससे:

  • ह्रास क्षेत्र की चौड़ाई बढ़ती है।
  • विभव रोधक बढ़ता है।
  • बहुसंख्यक आवेश वाहकों का प्रवाह रुकता है।
  • केवल अल्पसंख्यक वाहकों के कारण बहुत छोटी धारा बहती है।

इस प्रकार p-n संधि डायोड में अग्रदिशिक बायस चालकता बढ़ाता है जबकि पश्चदिशिक बायस चालकता को बहुत कम कर देता है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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