U.P Board Class 12 Nagrik Shastra 323(ER) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
नागरिक शास्त्र
समय: तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांक: 100
निर्देश :
(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(iii) प्रश्न संख्या 1 से 10 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।
(iv) प्रश्न संख्या 11 से 20 तक अति लघु-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 10 शब्दों (एक वाक्य) में देना है।
(v) प्रश्न संख्या 21 से 26 तक लघु-उत्तरीय-1 प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में देना है।
(vi) प्रश्न संख्या 27 से 30 तक लघु-उत्तरीय-II प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 100-125 शब्दों में देना है।
(vii) प्रश्न संख्या 31 और 32 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 250 शब्दों में देना है।
(viii) सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सामने दिए गए हैं।
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
नोट: निम्नलिखित दस प्रश्नों में प्रत्येक के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए ।
1. विश्व में 1991 की मुख्य घटना क्या थी ?
(क) स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रकुल का गठन
(ख) बर्लिन की दीवार का तोड़ा जाना
(ग) शॉक थेरेपी नीति का प्रयोग
(घ) सोवियत संघ का विघटन
Ans. (घ) सोवियत संघ का विघटन
2. द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात विश्व राजनीति में कौन-सी दो महाशक्तियों का उदय हुआ ?
(क) ब्रिटेन – जापान
(ख) संयुक्त राज्य अमेरिका- जर्मनी
(ग) सोवियत संघ संयुक्त राज्य अमेरिका
(घ) सोवियत संघ फ्रांस
Ans. (ग) सोवियत संघ संयुक्त राज्य अमेरिका
3. निम्नलिखित में से किस देश ने सर्वप्रथम ‘खुले द्वार की नीति’ अपनाई ?
(क) चीन
(ख) दक्षिण कोरिया
(ग) भारत
(घ) जापान
Ans. (क) चीन
4. निम्नलिखित में से कौन-सा देश दक्षिण एशिया का अंग नहीं है?
(क) भारत
(ख) पाकिस्तान
(ग) चीन
(घ) श्रीलंका
Ans. (ग) चीन
5. ‘वर्ल्ड सोशल फोरम’ का मुख्य कार्य क्या है ?
(क) वैश्वीकरण का विरोध करना
(ख) वैश्वीकरण का समर्थन करना
(ग) वैश्वीकरण का न विरोध न ही समर्थन करना
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (क) वैश्वीकरण का विरोध करना
6. भारत में ‘ग़रीबी हटाओ’ का नारा किस प्रधानमंत्री ने दिया था ?
(क) वी.पी. सिंह
(ख) चौधरी चरण सिंह
(ग) राजीव गाँधी
(घ) इन्दिरा गाँधी
Ans. (घ) इन्दिरा गाँधी
7. निम्नलिखित में से कौन नक्सलवादी आन्दोलन का नेता था ?
(क) माओ-त्से-तुंग
(ख) चारू मजूमदार
(ग) जयप्रकाश नारायण
(घ) चन्द्र शेखर
Ans. (ख) चारू मजूमदार
8. राज्य पुनर्गठन अधिनियम कब पारित हुआ ?
(क) 1951
(ख) 1952
(ग) 1956
(घ) 1960
Ans. (ग) 1956
9. जब मंडल आयोग की रिपोर्ट लागू हुई तो, उस समय भारत के प्रधानमंत्री कौन थे ?
(क) वी.पी. सिंह
(ख) इन्दिरा गाँधी
(ग) चन्द्र शेखर
(घ) राजीव गाँधी
Ans. (क) वी.पी. सिंह
10. गोवा भारतीय संघ का एक स्वतंत्र राज्य कब बना ?
(क) 1972
(ख) 1973
(ग) 1987
(घ) 1980
Ans. (ग) 1987
(अति लघु-उत्तरीय प्रश्न)
11. सोवियत संघ के विघटन का कोई एक परिणाम लिखिए ।
Ans. सोवियत संघ के विघटन से विश्व में द्विध्रुवीय राजनीति समाप्त होकर अमेरिकी वर्चस्व बढ़ा।
12. ऐसा कोई एक कारण लिखिए जिसने पर्यावरण के मुद्दे को वैश्विक राजनीति की चिन्ता बना दिया।
Ans. पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन का प्रभाव किसी एक देश तक सीमित नहीं रहता।
13. वैश्वीकरण का कोई एक कारण लिखिए ।
Ans. सूचना एवं संचार तकनीक के तीव्र विकास ने वैश्वीकरण को बढ़ावा दिया।
14. संयुक्त राष्ट्र की उस एजेन्सी का नाम लिखिए, जिसका सम्बन्ध शिक्षा एवं संस्कृति से है।
Ans. यूनेस्को (UNESCO) शिक्षा, विज्ञान एवं संस्कृति से सम्बन्धित संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी है।
15. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य देशों का उल्लेख कीजिए ।
Ans. संयुक्त राज्य अमेरिका और रूस सुरक्षा परिषद के दो स्थायी सदस्य हैं।
16. पूर्वोत्तर भारत की सीमा के साथ लगे हुए किन्हीं दो राज्यों के नाम लिखिए ।
Ans. असम और अरुणाचल प्रदेश पूर्वोत्तर भारत के दो प्रमुख राज्य हैं।
17. गठबंधन सरकार का क्या आशय है ?
Ans. जब दो या अधिक राजनीतिक दल मिलकर सरकार बनाते हैं, तो उसे गठबंधन सरकार कहते हैं।
18. मणिपुर की मुख्य समस्या क्या है ?
Ans. मणिपुर की प्रमुख समस्याओं में जातीय तनाव, अलगाववादी गतिविधियाँ और स्वायत्तता की माँग शामिल हैं।
19. ऐसी दो रियासतों के नाम लिखिए, जिन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में विलय का डटकर विरोध किया ।
Ans. हैदराबाद और जूनागढ़ ने भारत में विलय का विरोध किया था।
20. महात्मा गाँधी की हत्या कब और किसने की ?
Ans. महात्मा गाँधी की हत्या 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने की थी।
(लघु-उत्तरीय-I प्रश्न)
21. पर्यावरण के मसले पर भारत का पक्ष स्पष्ट कीजिए ।
Ans. भारत पर्यावरण संरक्षण को महत्त्वपूर्ण मानता है, लेकिन उसका पक्ष यह है कि पर्यावरण की वर्तमान समस्याओं के लिए विकसित देशों की ऐतिहासिक जिम्मेदारी अधिक है। औद्योगिक विकास के दौरान विकसित देशों ने लंबे समय तक प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक उपयोग किया और अधिक मात्रा में कार्बन उत्सर्जन किया। इसलिए भारत का मानना है कि विकासशील देशों को विकास का उचित अवसर मिलना चाहिए। भारत ने समान लेकिन विभेदित उत्तरदायित्व के सिद्धान्त का समर्थन किया है। इसके साथ ही भारत सतत विकास, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा देता है।
22. ‘साझी संपदा संसाधन’ से आप क्या समझते हैं ?
Ans. साझी संपदा संसाधन वे प्राकृतिक संसाधन हैं जिनका उपयोग किसी एक व्यक्ति या देश के बजाय अनेक लोग या समुदाय सामूहिक रूप से करते हैं। इन पर सामान्यतः किसी एक व्यक्ति का पूर्ण स्वामित्व नहीं होता। उदाहरण के लिए वायुमंडल, समुद्र, नदियाँ और कुछ अंतरराष्ट्रीय प्राकृतिक संसाधन साझा संपदा के रूप में देखे जाते हैं। इन संसाधनों का संरक्षण सभी देशों की सामूहिक जिम्मेदारी है, क्योंकि इनके प्रदूषण या अत्यधिक दोहन का प्रभाव पूरी मानवता पर पड़ सकता है।
23. वैश्वीकरण क्यों आवश्यक है? संक्षेप में लिखिए।
Ans. वैश्वीकरण के कारण विश्व के विभिन्न देश आर्थिक, सामाजिक, तकनीकी और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से अधिक जुड़ते हैं। इससे वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और ज्ञान का आदान-प्रदान बढ़ता है। विकासशील देशों को नई तकनीक, विदेशी निवेश और अंतरराष्ट्रीय बाजार प्राप्त हो सकते हैं। वैश्वीकरण से रोजगार तथा व्यापार के अवसर भी बढ़ सकते हैं। इसके माध्यम से देशों के बीच सहयोग और पारस्परिक निर्भरता बढ़ती है। हालांकि इसके लाभों का समान वितरण सुनिश्चित करना आवश्यक है।
24. बहुजन समाज पार्टी (बी.एस.पी.) के संस्थापक कौन थे ? इसका उद्देश्य क्या था ?
Ans. बहुजन समाज पार्टी की स्थापना कांशीराम ने 1984 में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य समाज के वंचित, पिछड़े, दलित और कमजोर वर्गों को राजनीतिक रूप से संगठित करना तथा उन्हें सत्ता और शासन में उचित भागीदारी दिलाना था। पार्टी सामाजिक समानता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय की स्थापना पर बल देती है। इसके माध्यम से उन वर्गों को राजनीतिक शक्ति प्रदान करने का प्रयास किया गया जिन्हें लंबे समय तक सामाजिक और राजनीतिक रूप से पिछड़ा माना जाता रहा।
25. भारत की परमाणु नीति क्या है ?
Ans. भारत की परमाणु नीति का प्रमुख आधार शांतिपूर्ण परमाणु उपयोग, विश्वसनीय न्यूनतम परमाणु प्रतिरोध और परमाणु निरस्त्रीकरण है। भारत परमाणु ऊर्जा का उपयोग बिजली, चिकित्सा, कृषि तथा वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे शांतिपूर्ण कार्यों में करता है। भारत ने परमाणु हथियारों के प्रथम प्रयोग न करने की नीति की घोषणा की है। भारत विश्व स्तर पर परमाणु हथियारों में कमी और अंततः पूर्ण परमाणु निरस्त्रीकरण का समर्थन करता है।
26. 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा करते हुए सरकार ने इसके क्या कारण बताए थे ?
Ans. 25 जून 1975 को राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते समय सरकार ने देश में आंतरिक अशांति को प्रमुख कारण बताया। सरकार का कहना था कि विपक्षी आन्दोलन, व्यापक राजनीतिक विरोध, हड़तालों तथा देश की राजनीतिक एवं आर्थिक व्यवस्था में उत्पन्न अस्थिरता से राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यवस्था को खतरा उत्पन्न हो रहा था। सरकार ने दावा किया कि आपातकाल आवश्यक प्रशासनिक स्थिरता बनाए रखने और देश में कानून-व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए लगाया गया।
(लघु-उत्तरीय-II प्रश्न)
27. 1971 में बांग्लादेश की स्वतंत्रता के लिए उत्तरदायी परिस्थितियों की व्याख्या कीजिए ।
Ans. 1971 में बांग्लादेश के निर्माण के पीछे कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारण थे। पाकिस्तान के निर्माण के बाद पूर्वी पाकिस्तान और पश्चिमी पाकिस्तान के बीच भौगोलिक दूरी के साथ-साथ भाषा, संस्कृति और आर्थिक विकास में भी काफी अंतर था। पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को लगता था कि पश्चिमी पाकिस्तान की सरकार उनके साथ भेदभाव कर रही है। 1970 के चुनाव में शेख मुजीबुर्रहमान की अवामी लीग को बहुमत प्राप्त हुआ, लेकिन सत्ता हस्तांतरण नहीं किया गया। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान में व्यापक आन्दोलन शुरू हुआ। पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई से स्थिति और गंभीर हो गई तथा बड़ी संख्या में लोग भारत आए। भारत ने शरणार्थियों को सहायता दी और अंततः भारत-पाकिस्तान युद्ध हुआ। दिसंबर 1971 में पाकिस्तानी सेना ने आत्मसमर्पण किया और बांग्लादेश एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आया।
28. भारत की विदेश नीति तैयार करने एवं लागू करने में भारत के प्रथम प्रधानमंत्री, जवाहरलाल नेहरू की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
Ans. जवाहरलाल नेहरू ने स्वतंत्र भारत की विदेश नीति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति और गुट-निरपेक्षता के प्रमुख समर्थक थे। उनका उद्देश्य भारत को किसी भी महाशक्ति गुट का हिस्सा बनाए बिना स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम बनाना था। उन्होंने विश्व शांति, उपनिवेशवाद के विरोध, नस्लवाद के विरोध तथा राष्ट्रों की संप्रभुता और समानता का समर्थन किया। नेहरू ने एशिया और अफ्रीका के नवस्वतंत्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने का प्रयास किया। उन्होंने पंचशील के सिद्धान्तों को भी महत्त्व दिया। भारत को शीत युद्ध की राजनीति से दूर रखते हुए उन्होंने गुट-निरपेक्ष आन्दोलन को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इस प्रकार नेहरू ने भारत की विदेश नीति में स्वतंत्रता, शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रमुख स्थान दिया।
29. भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद के प्रमुख कारण क्या हैं ?
Ans. भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का सबसे प्रमुख कारण कश्मीर समस्या है। 1947 में विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर दोनों देशों के बीच संघर्ष हुआ। इसके कारण दोनों देशों के बीच कई युद्ध और लगातार तनाव की स्थिति बनी रही। इसके अतिरिक्त सीमा विवाद, आतंकवाद, सीमा-पार घुसपैठ, जल संसाधनों से जुड़े मतभेद और दोनों देशों के बीच अविश्वास भी प्रमुख कारण हैं। सियाचिन और कुछ अन्य सीमा क्षेत्रों को लेकर भी विवाद रहा है। भारत आतंकवाद को द्विपक्षीय सम्बन्धों में बड़ी बाधा मानता है, जबकि पाकिस्तान कश्मीर को प्रमुख विवाद का विषय मानता है। इन समस्याओं के कारण दोनों देशों के सम्बन्धों में समय-समय पर तनाव उत्पन्न होता रहा है।
30. “भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति वर्तमान में भी प्रासंगिक है।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।
Ans. भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति आज भी प्रासंगिक मानी जाती है क्योंकि इसका मूल उद्देश्य किसी एक शक्ति-गुट का स्थायी समर्थक बनने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना है। वर्तमान विश्व में अनेक शक्तियाँ और विभिन्न प्रकार के अंतरराष्ट्रीय विवाद मौजूद हैं। ऐसी स्थिति में भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर अलग-अलग देशों के साथ सम्बन्ध स्थापित कर सकता है। भारत रूस, अमेरिका, यूरोप और अन्य देशों के साथ अपने हितों के अनुसार सहयोग करता है। गुट-निरपेक्षता भारत को रणनीतिक स्वायत्तता प्रदान करती है। साथ ही विकासशील देशों के हितों, विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवाज उठाने में भी यह नीति उपयोगी है। इसलिए बदलती विश्व राजनीति में इसके मूल सिद्धान्त आज भी महत्वपूर्ण हैं।
(दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न)
31. ‘आसियान’ की स्थापना कब की गई? इसके किन्हीं चार सदस्य देशों के नाम लिखिए। भारत और आसियान के मध्य सम्बन्धों की विवेचना कीजिए ।
Ans. Ans.
आसियान (ASEAN) अर्थात दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्रों का संगठन की स्थापना 8 अगस्त 1967 को बैंकॉक घोषणा के माध्यम से हुई थी। इसके संस्थापक देशों में इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड शामिल थे। इसके चार सदस्य देशों के नाम हैं—इंडोनेशिया, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड।
भारत और आसियान के सम्बन्ध ऐतिहासिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। भारत ने 1990 के दशक में अपनी लुक ईस्ट नीति के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों के साथ सम्बन्धों को मजबूत करना शुरू किया। बाद में इसे एक्ट ईस्ट नीति के रूप में अधिक सक्रिय बनाया गया। भारत और आसियान के बीच व्यापार एवं निवेश सम्बन्ध लगातार बढ़े हैं। दोनों पक्ष शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, पर्यटन, संस्कृति तथा सुरक्षा के क्षेत्र में सहयोग करते हैं।
भारत की पूर्वोत्तर नीति में भी आसियान का विशेष महत्व है। भारत म्यांमार और थाईलैंड के माध्यम से दक्षिण-पूर्व एशिया से सड़क एवं अन्य संपर्क बढ़ाने का प्रयास करता है। समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग और क्षेत्रीय स्थिरता भी दोनों के सम्बन्धों के महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। इस प्रकार आसियान भारत की विदेश नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका का महत्वपूर्ण भाग है।
अथवा
विश्व में चीन के उभरते प्रभाव का आकलन वर्तमान परिप्रेक्ष्य में कीजिए ।
Ans. चीन वर्तमान विश्व राजनीति में एक प्रमुख आर्थिक, राजनीतिक और सामरिक शक्ति के रूप में उभरा है। 1978 के बाद चीन ने आर्थिक सुधारों को अपनाया, जिससे उसके उद्योग, व्यापार और विदेशी निवेश में तेजी से वृद्धि हुई। चीन विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गया है और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
चीन ने अपनी आर्थिक शक्ति के आधार पर एशिया, अफ्रीका, यूरोप और लैटिन अमेरिका के अनेक देशों के साथ सम्बन्ध मजबूत किए हैं। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के माध्यम से चीन विभिन्न देशों में बुनियादी ढाँचे से सम्बन्धित परियोजनाओं में निवेश करता है। चीन संयुक्त राष्ट्र सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में प्रभावशाली भूमिका निभाता है।
सैन्य दृष्टि से भी चीन ने अपनी क्षमताओं में वृद्धि की है। उसकी नौसेना और तकनीकी क्षमता में विस्तार हुआ है। दक्षिण चीन सागर और ताइवान जैसे मुद्दों के कारण चीन की सामरिक भूमिका पर विशेष ध्यान दिया जाता है। भारत के लिए भी चीन एक महत्वपूर्ण पड़ोसी और प्रमुख आर्थिक तथा सामरिक शक्ति है। इसलिए चीन का बढ़ता प्रभाव 21वीं सदी की विश्व राजनीति की प्रमुख विशेषताओं में से एक है।
32. प्रथम पंचवर्षीय योजना कब लागू की गई? इसमें किस बात पर अधिक बल दिया गया ? द्वितीय पंचवर्षीय योजना से यह किस प्रकार भिन्न थी ?
Ans. भारत में प्रथम पंचवर्षीय योजना 1951 से 1956 तक लागू की गई। स्वतंत्रता के बाद देश के सामने खाद्यान्न की कमी, गरीबी, बेरोजगारी और आर्थिक पिछड़ेपन जैसी अनेक समस्याएँ थीं। इसलिए प्रथम पंचवर्षीय योजना में मुख्य रूप से कृषि, सिंचाई, बिजली तथा ग्रामीण विकास पर बल दिया गया। कृषि उत्पादन बढ़ाना और देश की खाद्य समस्या का समाधान करना इसका प्रमुख उद्देश्य था। इस योजना के अंतर्गत सिंचाई तथा बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को भी महत्व दिया गया।
इसके विपरीत द्वितीय पंचवर्षीय योजना 1956 से 1961 तक लागू हुई और इसमें औद्योगीकरण को अधिक महत्व दिया गया। प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पी. सी. महालनोबिस के दृष्टिकोण से प्रभावित इस योजना में भारी उद्योगों और सार्वजनिक क्षेत्र के विकास पर विशेष जोर दिया गया।
इस प्रकार दोनों योजनाओं में मुख्य अंतर यह था कि प्रथम योजना का प्रमुख जोर कृषि और सिंचाई पर था, जबकि द्वितीय योजना का प्रमुख जोर भारी उद्योग एवं औद्योगिक विकास पर था।
अथवा
राष्ट्रीय आपातकाल के परिणामों की व्याख्या मूल अधिकारों तथा कार्यपालिका न्यायपालिका के सम्बन्धों के आधार पर कीजिए ।
Ans. भारत में 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक राष्ट्रीय आपातकाल लागू रहा। इसका भारतीय लोकतंत्र और नागरिक स्वतंत्रताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा। आपातकाल के दौरान सरकार ने प्रेस पर सेंसरशिप लगाई और अनेक राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार किया गया। नागरिकों के मौलिक अधिकारों के प्रयोग पर गंभीर प्रतिबंध लगाए गए।
आपातकाल के दौरान कार्यपालिका की शक्ति में काफी वृद्धि हुई। सरकार ने प्रशासन और राजनीतिक गतिविधियों पर अधिक नियंत्रण स्थापित किया। न्यायपालिका के साथ भी तनावपूर्ण सम्बन्ध उत्पन्न हुए। ए.डी.एम. जबलपुर बनाम शिवकांत शुक्ला मामले में सर्वोच्च न्यायालय के बहुमत ने आपातकाल के दौरान बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार के संबंध में सरकार के पक्ष को स्वीकार किया, जिसे बाद में लोकतांत्रिक अधिकारों के दृष्टिकोण से व्यापक आलोचना मिली।
आपातकाल के अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में मौलिक अधिकारों, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता अत्यंत आवश्यक हैं। इसके बाद संवैधानिक व्यवस्था में कुछ महत्वपूर्ण सुधार किए गए ताकि भविष्य में आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग कठिन हो सके। इस प्रकार आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास की एक महत्वपूर्ण घटना रही।