U.P Board Class 12 Nagrik Shastra 323(EQ) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
नागरिक शास्त्र
समय: तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांक: 100
निर्देश :
(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(iii) प्रश्न संख्या 1 से 10 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं।
(iv) प्रश्न संख्या 11 से 20 तक अति लघु-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 10 शब्दों (एक वाक्य) में देना है।
(v) प्रश्न संख्या 21 से 26 तक लघु-उत्तरीय-1 प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में देना है।
(vi) प्रश्न संख्या 27 से 30 तक लघु-उत्तरीय-II प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 100-125 शब्दों में देना है।
(vii) प्रश्न संख्या 31 और 32 दीर्घ उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 250 शब्दों में देना है।
(viii) सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सामने दिए गए हैं।
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
नोट: निम्नलिखित दस प्रश्नों में प्रत्येक के चार विकल्प दिए गए हैं। इनमें से सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए ।
1. सोवियन संघ का विघटन क्यों हुआ ?
(क) मोवियत संघ पर आर्थिक दबाव था
(ख) मावियत संघ में प्रशासनिक और राजनीतिक रूप से गतिरोध था
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (ग) (क) और (ख) दोनों
2. दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) की स्थापना ‘कब हुई थी ?
(क) 1966
(ख) 1967
(ग) 1968
(घ) 1969
Ans. (ख) 1967
3. श्रीलंका में बहुसंख्यक वर्ग कौन-सा है ?
(क) सिंहली
(ख) तमिल
(ग) ईसाई
(घ) मुस्लिम
Ans. (क) सिंहली
4. बांग्लादेश का गठन कब हुआ ?
(क) 1970
(ख) 1971
(ग) 1975
(घ) 1991
Ans. (ख) 1971
5. ‘वर्ल्ड सोशल फोरम’ की चौथी बैठक 2004 में कहाँ हुई थी ?
(क) मुम्बई
(ख) न्यूयॉर्क
(ग) ब्राज़ील
(घ) जर्मनी
Ans. (क) मुम्बई
6. ‘सम्पूर्ण क्रान्ति’ के जनक कौन थे ?
(क) जवाहरलाल नेहरू
(ख) विनोबा भावे
(ग) महात्मा गाँधी
(घ) जयप्रकाश नारायण
Ans. (घ) जयप्रकाश नारायण
7. राज्य पुनर्गठन अधिनियम के आधार पर 1956 में कितने, राज्य बनाए गए थे ?
(क) 12
(ख) 14
(ग) 16
(घ) 20
Ans. (ख) 14
8. 1975 में संविधान के किस अनुच्छेद के आधार परी आपातकाल (Emergency) लागू किया गया था ?
(क) 351
(ख) 352
(ग) 356
(घ) 360
Ans. (ख) 352
9. 1984 में ‘ऑपरेशन ब्लू स्टार (Operation Blue Star)’ किस राज्य में चलाया गया था ?
(क) जम्मू-कश्मीर
(ख) पंजाब
(ग) राजस्थान
(घ) दिल्ली
Ans. (ख) पंजाब
10. मंडल आयोग का गठन क्यों किया गया था ?
(क) सामाजिक एवं शैक्षिक पिछड़ेपन की व्यापकता का पता लगाने के लिए
(ख) पिछड़ेपन को दूर करने के लिए उपाय सुझाने के लिए
(ग) (क) और (ख) दोनों
(घ) उपर्युक्त में से कोई नहीं
Ans. (ग) (क) और (ख) दोनों
(अति लघु-उत्तरीय प्रश्न)
11. यूरोपीय संघ की स्थापना का क्या उद्देश्य था ?
Ans. यूरोपीय संघ का उद्देश्य यूरोपीय देशों में आर्थिक सहयोग, शांति, सुरक्षा और राजनीतिक एकता को बढ़ावा देना था।
12. वैश्वीकरण के कारण भारत में उपलब्ध खाद्य पदार्थों में आए परिवर्तनों में से किन्हीं दो का उदाहरण दीजिए ।
Ans. भारत में पिज्जा, बर्गर जैसे विदेशी खाद्य पदार्थों का प्रसार तथा विभिन्न देशों के पैक्ड और फास्ट-फूड उत्पादों की उपलब्धता बढ़ी।
13. विश्व स्वास्थ्य संगठन क्या है? इसका मुख्य उद्देश्य क्या है ?
Ans. विश्व स्वास्थ्य संगठन संयुक्त राष्ट्र की स्वास्थ्य संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य विश्व के लोगों के स्वास्थ्य में सुधार करना है।
14. भारत और चीन के मध्य विवाद के दो कारण लिखिए ।
Ans. सीमा विवाद तथा अरुणाचल प्रदेश और अक्साई चिन से संबंधित क्षेत्रीय विवाद भारत-चीन संबंधों में तनाव के प्रमुख कारण हैं।
15. संयुक्त राष्ट्र संघ के किन्हीं दो अंगों के नाम लिखिए ।
Ans. महासभा और सुरक्षा परिषद संयुक्त राष्ट्र संघ के दो प्रमुख अंग हैं।
16. 1953 में भारत में राज्य पुनर्गठन आयोग नियुक्त करने के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए ।
Ans. भाषाई आधार पर राज्यों की माँग तथा प्रशासन को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य पुनर्गठन आयोग नियुक्त किया गया।
17. 1975 में आपातकाल (Emergency) की घोषणा किसने की ?
Ans. 25 जून 1975 को राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी की सलाह पर आपातकाल घोषित किया।
18. 1975 में ‘सम्पूर्ण क्रान्ति’ की अवधारणा क्या थी ?
Ans. सम्पूर्ण क्रान्ति का उद्देश्य राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और शैक्षिक व्यवस्था में व्यापक एवं शांतिपूर्ण परिवर्तन लाना था।
19. गोवा को स्वतंत्रता कब मिली ?
Ans. गोवा को पुर्तगाली शासन से 19 दिसम्बर 1961 को मुक्ति मिली।
20. मणिपुर की मुख्य समस्या क्या है?
Ans. मणिपुर की प्रमुख समस्याओं में जातीय तनाव, उग्रवाद, क्षेत्रीय असंतोष और विभिन्न समुदायों के बीच संघर्ष शामिल हैं।
(लघु-उत्तरीय-1 प्रश्न)
21. वैश्विक राजनीति में पर्यावरण की चिंता क्यों आवश्यक है?
Ans. पर्यावरण की समस्या किसी एक देश तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन, वैश्विक तापमान में वृद्धि, वायु एवं जल प्रदूषण, वनों की कटाई तथा जैव-विविधता की कमी का प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ता है। इसलिए इन समस्याओं का समाधान अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बिना संभव नहीं है। विकसित और विकासशील देशों को मिलकर प्रदूषण कम करने, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और सतत विकास को बढ़ावा देने के प्रयास करने चाहिए। पर्यावरण की सुरक्षा वर्तमान और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित जीवन के लिए आवश्यक है।
22. “साझी परन्तु अलग-अलग ज़िम्मेदारियों” का सिद्धांत किस क्षेत्र से सम्बन्धित है? इसकी व्याख्या कीजिए ।
Ans. “साझी परन्तु अलग-अलग जिम्मेदारियों” का सिद्धांत मुख्य रूप से पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से संबंधित है। इसका अर्थ है कि सभी देशों की पर्यावरण को बचाने की जिम्मेदारी समान रूप से साझा है, लेकिन सभी देशों की जिम्मेदारी समान मात्रा में नहीं हो सकती। विकसित देशों ने औद्योगिकीकरण के दौरान अधिक मात्रा में प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग और प्रदूषण किया है। इसलिए उनसे प्रदूषण कम करने तथा विकासशील देशों को तकनीकी और आर्थिक सहायता देने की अधिक अपेक्षा की जाती है। विकासशील देशों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।
23. वैश्वीकरण की अवधारणा क्या है? उदाहरणों सहित लिखिए ।
Ans. वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व के विभिन्न देश आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से एक-दूसरे से अधिक जुड़ते जा रहे हैं। इसमें वस्तुओं, सेवाओं, पूँजी, तकनीक और सूचनाओं का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आदान-प्रदान बढ़ता है। उदाहरण के लिए भारत में विदेशी कंपनियों के उत्पाद उपलब्ध होना, भारतीय कंपनियों का विदेशों में व्यापार करना और इंटरनेट के माध्यम से दुनिया के विभिन्न देशों से तत्काल संपर्क स्थापित होना वैश्वीकरण के उदाहरण हैं। वैश्वीकरण ने व्यापार, रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर पैदा किए हैं, लेकिन इससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है।
24. “वर्तमान समय में गठबंधन की राजनीति एक आवश्यकना है।” क्यों? इसे स्पष्ट कीजिए ।
Ans. बहुदलीय लोकतंत्र में कई बार किसी एक राजनीतिक दल को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में सरकार बनाने के लिए विभिन्न दलों को मिलकर गठबंधन करना पड़ता है। गठबंधन की राजनीति विभिन्न सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक हितों को प्रतिनिधित्व देने का अवसर देती है। इससे क्षेत्रीय दलों की भूमिका भी बढ़ती है और सरकार को विभिन्न वर्गों की माँगों पर विचार करना पड़ता है। हालांकि गठबंधन सरकारों में मतभेद और अस्थिरता की संभावना रहती है, फिर भी विविधतापूर्ण भारतीय समाज में गठबंधन राजनीति लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है।
25. आपातकाल की घोषणा के बाद शासन व्यवस्था में क्या परिवर्तन आए ?
Ans. 1975 में आपातकाल लागू होने के बाद शासन व्यवस्था में केन्द्र की शक्ति काफी बढ़ गई। नागरिकों के कई मौलिक अधिकारों पर प्रतिबंध लगाया गया तथा प्रेस पर सेंसरशिप लागू की गई। विपक्षी नेताओं और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारियाँ हुईं। संसद और राज्य सरकारों की स्वतंत्र राजनीतिक गतिविधियों पर भी प्रभाव पड़ा। प्रशासन पर केन्द्र सरकार का नियंत्रण अधिक मजबूत हो गया। आपातकाल के दौरान लोकतांत्रिक स्वतंत्रताओं में कमी आई। इसके कारण भारतीय लोकतंत्र में नागरिक अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता और संवैधानिक नियंत्रण के महत्व पर व्यापक बहस हुई।
26. भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति की मुख्य विशेषताएँ, क्या है ?
Ans. भारत की गुट-निरपेक्षता की नीति का अर्थ किसी शक्ति-गुट का स्थायी सदस्य न बनकर स्वतंत्र विदेश नीति अपनाना था। भारत ने शीतयुद्ध के दौरान अमेरिका और सोवियत संघ दोनों से आवश्यकतानुसार संबंध बनाए। इस नीति की प्रमुख विशेषताएँ राष्ट्रीय हितों की रक्षा, स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता, उपनिवेशवाद और साम्राज्यवाद का विरोध, विश्व शांति का समर्थन तथा देशों के बीच शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना थीं। भारत ने विकासशील देशों की समस्याओं को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
(लघु-उत्तरीय-II प्रश्न)
27. दक्षिण एशिया में सार्क (SAARC) की भूमिका की आलोचनात्मक विवेचना कीजिए ।
Ans. सार्क अर्थात् दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन की स्थापना 1985 में दक्षिण एशिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से हुई थी। इसके सदस्य देशों में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और बाद में अफगानिस्तान शामिल हुए।
सार्क का मुख्य उद्देश्य क्षेत्रीय आर्थिक विकास, व्यापार, सामाजिक कल्याण, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और सांस्कृतिक सहयोग को बढ़ावा देना है। इस संगठन ने दक्षिण एशियाई देशों को एक साझा मंच प्रदान किया है। इसके माध्यम से गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास जैसे विषयों पर सहयोग की संभावनाएँ बनी हैं।
हालाँकि सार्क की सफलता सीमित रही है। भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव, सीमा विवाद, आतंकवाद और आपसी अविश्वास के कारण कई बार सार्क की बैठकें और कार्यक्रम प्रभावित हुए हैं। इसलिए सार्क में व्यापक संभावनाएँ होने के बावजूद राजनीतिक मतभेद इसकी प्रभावशीलता में बड़ी बाधा हैं।
28. वर्तमान विश्व व्यवस्था के सन्दर्भ में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका का परीक्षण कीजिए ।
Ans. संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना 1945 में विश्व शांति और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हुई थी। वर्तमान विश्व व्यवस्था में भी संयुक्त राष्ट्र की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह विभिन्न देशों के बीच विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने, अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने तथा मानवाधिकारों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
संयुक्त राष्ट्र की विभिन्न संस्थाएँ स्वास्थ्य, शिक्षा, बाल कल्याण, शरणार्थी सहायता और आर्थिक विकास के क्षेत्र में कार्य करती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनिसेफ और यूनेस्को जैसी संस्थाएँ इसके उद्देश्यों को आगे बढ़ाती हैं।
फिर भी संयुक्त राष्ट्र की कुछ सीमाएँ हैं। सुरक्षा परिषद में कुछ देशों को विशेषाधिकार प्राप्त होने के कारण निर्णय प्रक्रिया में असमानता दिखाई देती है। कई अंतरराष्ट्रीय संघर्षों को रोकने में भी संयुक्त राष्ट्र पूरी तरह सफल नहीं रहा है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में संयुक्त राष्ट्र में सुधार और अधिक प्रतिनिधित्व की आवश्यकता है।
29. भारतीय विदेश नीति की किन्हीं चार विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
Ans. भारतीय विदेश नीति की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
1. गुट-निरपेक्षता: भारत ने शीतयुद्ध के दौरान किसी भी शक्ति-गुट में शामिल होने के बजाय स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई।
2. शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: भारत अन्य देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंध और सहयोग स्थापित करने का समर्थक रहा है।
3. उपनिवेशवाद का विरोध: भारत ने औपनिवेशिक शासन और साम्राज्यवाद का विरोध किया तथा स्वतंत्रता आंदोलनों का समर्थन किया।
4. राष्ट्रीय हितों की रक्षा: भारत अपनी सुरक्षा, आर्थिक विकास और क्षेत्रीय अखंडता को ध्यान में रखकर विदेश नीति बनाता है।
इसके अतिरिक्त भारत निरस्त्रीकरण, संयुक्त राष्ट्र की भूमिका, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और विकासशील देशों के हितों का भी समर्थन करता रहा है।
30. जम्मू-कश्मीर की समस्या के कारण क्या हैं? भारतीय सरकार इस किस प्रकार से हल करने का प्रयास कर रही है?
Ans. जम्मू-कश्मीर की समस्या के पीछे ऐतिहासिक, राजनीतिक, क्षेत्रीय और सुरक्षा संबंधी अनेक कारण रहे हैं। 1947 में भारत के विभाजन के समय जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय हुआ, जिसके बाद भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद उत्पन्न हुआ। पाकिस्तान द्वारा समर्थित घुसपैठ और आतंकवाद ने समस्या को और गंभीर बनाया। क्षेत्रीय असंतोष तथा विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक समूहों की अलग-अलग माँगें भी समस्या का कारण रही हैं।
भारत सरकार ने इस समस्या के समाधान के लिए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, आतंकवाद पर नियंत्रण, विकास कार्यों को बढ़ाने, रोजगार और शिक्षा के अवसर उपलब्ध कराने तथा लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया है। केन्द्र सरकार का प्रयास है कि क्षेत्र में शांति, विकास और सामान्य राजनीतिक वातावरण स्थापित हो तथा जनता को विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।
(दीर्घ-उत्तरीय प्रश्न)
31. यूरोपीय संघ को शक्तिशाली संगठन बनाने वाले किन्हीं चार कारकों की व्याख्या कीजिए ।
Ans. यूरोपीय संघ विश्व के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। इसके शक्तिशाली बनने के पीछे अनेक कारण हैं।
1. मजबूत आर्थिक व्यवस्था: यूरोपीय संघ के सदस्य देशों के बीच व्यापक व्यापारिक संबंध हैं। वस्तुओं, सेवाओं और पूँजी के आवागमन में अनेक बाधाएँ कम हुई हैं। इससे यूरोप का एक बड़ा साझा बाजार विकसित हुआ है।
2. साझा मुद्रा: अनेक सदस्य देशों ने यूरो को अपनी मुद्रा के रूप में अपनाया है। इससे आपसी व्यापार और आर्थिक सहयोग को बढ़ावा मिला तथा मुद्रा विनिमय की कठिनाइयाँ कम हुईं।
3. राजनीतिक एवं संस्थागत सहयोग: यूरोपीय संघ में विभिन्न संस्थाएँ हैं जो सदस्य देशों के बीच नीतियों में समन्वय स्थापित करती हैं। इससे संगठन की सामूहिक निर्णय लेने की क्षमता बढ़ती है।
4. तकनीकी एवं औद्योगिक विकास: यूरोपीय देशों ने विज्ञान, तकनीक, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। इनके कारण यूरोपीय संघ की आर्थिक और वैश्विक शक्ति मजबूत हुई है।
इसके अतिरिक्त यूरोपीय संघ विश्व व्यापार, अंतरराष्ट्रीय राजनीति, पर्यावरण, मानवाधिकार और वैश्विक कूटनीति में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस प्रकार आर्थिक शक्ति, राजनीतिक सहयोग, तकनीकी विकास और सामूहिक संस्थागत व्यवस्था ने इसे एक शक्तिशाली संगठन बनाया है।
अथवा
भारत और पाकिस्तान के मध्य विवाद के क्या कारण हैं? इन्हें सुलझाने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं ?
Ans. भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का सबसे प्रमुख कारण जम्मू-कश्मीर का प्रश्न है। 1947 में विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर पाकिस्तान ने विरोध किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव की स्थिति बनी रही।
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर तनाव, जल संसाधनों से संबंधित मतभेद और आपसी अविश्वास भी विवाद के प्रमुख कारण हैं। आतंकवादी गतिविधियों और सीमा पार से होने वाली हिंसा ने दोनों देशों के संबंधों को और कठिन बनाया है।
इन विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों को नियमित वार्ता करनी चाहिए। आतंकवाद और हिंसा को समाप्त करना, सीमा पर शांति बनाए रखना तथा आपसी व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाना आवश्यक है। जल संबंधी विवादों को मौजूदा समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए। दोनों देशों को सैन्य टकराव से बचकर कूटनीतिक माध्यमों से समस्याओं का समाधान करना चाहिए। जनता के बीच संपर्क बढ़ाना भी विश्वास बहाली में सहायक हो सकता है।
32. भारत के आर्थिक विकास में प्रथम और द्वितीय पंचवर्षीय योजनाओं की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
Ans. भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद का सबसे प्रमुख कारण जम्मू-कश्मीर का प्रश्न है। 1947 में विभाजन के बाद जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय को लेकर पाकिस्तान ने विरोध किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्ध और तनाव की स्थिति बनी रही।
दोनों देशों के बीच सीमा विवाद, आतंकवाद, नियंत्रण रेखा पर तनाव, जल संसाधनों से संबंधित मतभेद और आपसी अविश्वास भी विवाद के प्रमुख कारण हैं। आतंकवादी गतिविधियों और सीमा पार से होने वाली हिंसा ने दोनों देशों के संबंधों को और कठिन बनाया है।
इन विवादों को सुलझाने के लिए दोनों देशों को नियमित वार्ता करनी चाहिए। आतंकवाद और हिंसा को समाप्त करना, सीमा पर शांति बनाए रखना तथा आपसी व्यापार और सांस्कृतिक संबंधों को बढ़ाना आवश्यक है। जल संबंधी विवादों को मौजूदा समझौतों के अनुसार शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाया जाना चाहिए। दोनों देशों को सैन्य टकराव से बचकर कूटनीतिक माध्यमों से समस्याओं का समाधान करना चाहिए। जनता के बीच संपर्क बढ़ाना भी विश्वास बहाली में सहायक हो सकता है।
अथवा
स्वतंत्रता के समय विकास के प्रश्न पर प्रमुख मतभेद क्या थे? उन्हें कैसे सुलझाया गया ?
Ans. स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के सामने आर्थिक विकास की दिशा तय करने की बड़ी चुनौती थी। विकास के प्रश्न पर मुख्य रूप से इस बात को लेकर मतभेद था कि देश का विकास कृषि आधारित होना चाहिए या औद्योगिक।
एक विचारधारा कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्राथमिकता देती थी। इसके अनुसार गाँवों, किसानों, कुटीर उद्योगों और छोटे उत्पादकों का विकास देश की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक था। महात्मा गाँधी ग्राम-आधारित और विकेन्द्रीकृत विकास के समर्थक थे।
दूसरी ओर, आधुनिक उद्योगों और वैज्ञानिक तकनीक के माध्यम से तीव्र औद्योगीकरण पर जोर दिया गया। जवाहरलाल नेहरू आधुनिक उद्योग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और बड़े सार्वजनिक क्षेत्र के विकास को भारत के आर्थिक विकास के लिए आवश्यक मानते थे।
इन मतभेदों को पूरी तरह किसी एक पक्ष को स्वीकार करके नहीं, बल्कि मिश्रित अर्थव्यवस्था के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया। भारत ने कृषि और उद्योग दोनों के विकास को महत्व दिया। सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों को आर्थिक गतिविधियों में स्थान दिया गया तथा पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से विकास की प्राथमिकताएँ निर्धारित की गईं। इस प्रकार भारत ने संतुलित और नियोजित आर्थिक विकास का मार्ग अपनाया।