U.P Board Class 12 Hindi 301(DA) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
हिंदी
समयः तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांकः 100
निर्देश :
(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) इस प्रश्न पत्र में दो खण्ड हैं। दोनों खण्डों के सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
खण्ड क
1. (क) राजा शिवप्रसाद ‘सितारे हिंद’ की रचना है:
(i) ‘राजा-भोज का सपना
(ii) ‘रानी केतकी की कहानी’
(iii) ‘प्रेमसागर’
(iv) ‘प्रेमवती’
Ans. (ii) ‘रानी केतकी की कहानी’
(ख) भारतेंदु युग के लेखक है:
(i) भगवत शरण उपाध्याय
(ii) प्रताप नारायण मिश्र
(iii) रघुवीर सहाय
(iv) मैथिलीशरण गुप्त
Ans. (ii) प्रताप नारायण मिश्र
(ग) ‘मेरी असफलताएँ’ किस विधा की रचना है?
(i) कहानी
(ii) आत्मकथा
(iii) डायरी
(iv) जीवनी-साहित्य
Ans. (ii) आत्मकथा
(घ) ‘आवारा मसीहा’ के लेखक हैं:
(i) विष्णु प्रभाकर
(ii) राहुल सांकृत्यायन
(iii) शिवदान सिंह चौहान
(iv) जैनेंद्र
Ans. (i) विष्णु प्रभाकर
(ङ) हिन्दी का प्रथम मौलिक उपन्यास है :
(i) ‘तितली’
(ii) ‘कंकाल’
(iii) ‘परीक्षा गुरु
(iv) ‘गबन’
Ans. (iii) ‘परीक्षा गुरु
2. (क) “निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।” यह काव्य पंक्ति है:
(i) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की
(ii) मैथिलीशरण गुप्त की
(iii) भारतेंदु हरिश्चन्द्र की
(iv) नरेश मेहता की
Ans. (iii) भारतेंदु हरिश्चन्द्र की
(ख) ‘स्थूल के प्रति सूक्ष्म का विद्रोह है’:
(i) भारतेंदु-युग
(ii) द्विवेदी-युग
(iii) छायावाद
(iv) प्रगतिवाद
Ans. (iii) छायावाद
(ग) ‘वैदेही वनवास’ रचना है:
(i) रामनरेश त्रिपाठी की
(ii) श्रीधर पाठक की
(iii) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ की
(iv) महावीर प्रसाद द्विवेदी की
Ans. (i) रामनरेश त्रिपाठी की
(घ) भारतेंदु ने स्त्री शिक्षा से संबंधित किस पत्रिका का प्रकाशन किया था ?
(i) ‘हरिश्चन्द्र-चंद्रिका’
(ii) ‘हंस’
(iii) ‘कविवचन सुधा
(iv) ‘बाला बोधिनी’
Ans. (iv) ‘बाला बोधिनी’
(ङ) ‘गंगालहरी’ के रचनाकार हैं :
(i) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
(ii) सूरदास
(iii) तुलसीदास
(iv) भारतेंदु हरिश्चन्द्र
Ans. (i) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
3. निम्नलिखित गद्यांश का सन्दर्भ देते हुए किसी एक के नीचे दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
यह अनुभव कितना चमत्कारी है कि यहाँ जो जितनी अधिक बूढ़ी है वह उतनी ही अधिक उत्फुल्ल, मुस्कानमयी है। यह किस दीपक की जोत है? जागरूक जीवन की ! लक्ष्यदर्शी जीवन की ! सेवा-निरत जीवन की ! अपने विश्वासों के साथ एकाग्र जीवन की। भाषा के भेद रहे हैं, रहेंगे भी, पर यह जोत विश्व की सर्वोत्तम जोत है।
(क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए ।
Ans. प्रस्तुत गद्यांश ‘राबर्ट नर्सिंग होम में’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हैं।
(ख) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans. लेखक कहते हैं कि नर्सिंग होम में उन्होंने देखा कि जो नर्स जितनी अधिक वृद्ध थी, वह उतनी ही अधिक प्रसन्न और मुस्कानमयी थी। इसका कारण उसका जागरूक, लक्ष्यपूर्ण और सेवाभावी जीवन था। वह अपने कर्तव्य और विश्वास के प्रति पूरी तरह समर्पित थी। लेखक के अनुसार सेवा, जागरूकता और निश्चित लक्ष्य के साथ जीने वाला जीवन ही वास्तविक रूप से आनन्दमय होता है।
(ग) कौन-सी ‘जोत’ विश्व की सर्वोत्तम जोत है ?
Ans. जागरूक, लक्ष्यदर्शी, सेवा-निरत और अपने विश्वासों के प्रति एकाग्र जीवन की जोत विश्व की सर्वोत्तम जोत है।
(घ) लेखक के लिए कौन-सा अनुभव चमत्कारी है ?
Ans. लेखक के लिए यह अनुभव चमत्कारी है कि नर्सिंग होम में जो नर्स जितनी अधिक वृद्ध है, वह उतनी ही अधिक प्रसन्न, उत्साहित और मुस्कानमयी दिखाई देती है।
(ङ) ‘जागरूक’ और ‘लक्ष्यदर्शी’ शब्दों के अर्थ लिखिए।
Ans.
जागरूक— सचेत, सावधान।
लक्ष्यदर्शी— लक्ष्य को सामने रखकर कार्य करने वाला।
अथवा
मातृभूमि पर निवास करने वाले मनुष्य राष्ट्र का दूसरा अंग हैं। पृथ्वी हो और मनुष्य न हो, तो राष्ट्र की कल्पना असम्भव है। पृथ्वी और जन दोनों के सम्मिलन से ही राष्ट्र का स्वरूप सम्पादित होता है। जन के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है। पृथ्वी माता है और जन सच्चे अर्थों में पृथ्वी का पुत्र है- (माता भूमिः पुत्रोऽहं पृथिव्याः । भूमि माता है, मैं उसका पुत्र हूँ। जन के हृदय में इस सूत्र का अनुभव ही राष्ट्रीयता की कुंजी है। इसी भावना से राष्ट्रनिर्माण के अंकुर उत्पन्न होते हैं।
(क) प्रस्तुत गद्यांश के पाठ एवं लेखक का नाम लिखिए ।
Ans. प्रस्तुत गद्यांश ‘राष्ट्र का स्वरूप’ पाठ से लिया गया है। इसके लेखक डॉ. वासुदेवशरण अग्रवाल हैं।
(ख) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans. लेखक के अनुसार राष्ट्र केवल भूमि का नाम नहीं है। भूमि और उस पर निवास करने वाले जन के मेल से राष्ट्र का निर्माण होता है। मनुष्य अपनी भूमि को माता और स्वयं को उसका पुत्र मानता है। जब मनुष्य के हृदय में अपनी मातृभूमि के प्रति प्रेम, श्रद्धा और अपनत्व की भावना उत्पन्न होती है, तभी राष्ट्रीयता की भावना पैदा होती है। यही भावना राष्ट्र के निर्माण का आधार बनती है।
(ग) राष्ट्र का दूसरा अंग क्या है ?
Ans. राष्ट्र का दूसरा अंग जन अर्थात् उस मातृभूमि पर निवास करने वाले मनुष्य हैं।
(घ) राष्ट्र की कल्पना कब असम्भव है ?
Ans. जब पृथ्वी तो हो, लेकिन उस पर रहने वाले मनुष्य न हों, तब राष्ट्र की कल्पना असम्भव है।
(ङ) राष्ट्रीयता की कुंजी क्या है ?
Ans. पृथ्वी को माता और स्वयं को उसका पुत्र मानने की भावना ही राष्ट्रीयता की कुंजी है।
4. पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर लिखिए :
पूरी होवें न यदि तुझसे अन्य बातें हमारी ।
तो तू मेरी विनय इतनी मान ले और चली जा ।
छू के प्यारे कमल-पग को प्यार के साथ आ जा ।
जी जाऊँगी हृदय-तल में मैं तुझी को लगाके ।
(क) प्रस्तुत पद्यांश के पाठ एवं कवि का नाम लिखिए।
Ans. प्रस्तुत पद्यांश ‘प्रियप्रवास’ के ‘पवन-दूतिका’ प्रसंग से लिया गया है। इसके कवि अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हैं।
(ख) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans. नायिका पवन से प्रार्थना करती है कि यदि वह उसकी अन्य प्रार्थनाएँ पूरी नहीं कर सकता, तो कम-से-कम उसकी यह विनती स्वीकार करे। वह अपने प्रिय के चरण-कमलों को स्पर्श करके लौट आए। प्रिय के चरणों का स्पर्श करके आने वाले पवन को हृदय से लगाकर नायिका अपने विरह-दुःख को कुछ समय के लिए भूल सकेगी।
(ग) ‘कमल-पग’ में कौन-सा अलंकार है ?
Ans. रूपक अलंकार।
(घ) नायिका किससे और क्या विनती कर रही है ?
Ans. नायिका पवन से विनती कर रही है कि वह उसके प्रिय के चरणों को स्पर्श करके उसके पास लौट आए।
(ङ) नायिका पवन को किसके कमल-पग को छू कर आने के लिए कह रही है ?
Ans. नायिका पवन से विनती कर रही है कि वह उसके प्रिय के चरणों को स्पर्श करके उसके पास लौट आए।
अथवा
कहा मनु ने, नभ धरणी बीच बना जीवन रहस्य, निरुपायः एक उल्का-सा जलता भ्रांत शून्य में फिरता है असहाय । कौन हो तुम वसंत के दूत विरस पतझड़ में अति सुकुमार ! घन तिमिर में चपला की रेख, तपन में शीतल मंद बयार ।
(क) प्रस्तुत पद्यांश के पाठ एवं कवि का नाम लिखिए ।
Ans. प्रस्तुत पद्यांश ‘कामायनी’ के ‘श्रद्धा’ सर्ग से लिया गया है। इसके कवि जयशंकर प्रसाद हैं।
(ख) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans. मनु अपने जीवन को अत्यन्त अस्थिर, निराश और दिशाहीन अनुभव करते हैं। वे अपने आपको शून्य में भटकती हुई जलती उल्का के समान मानते हैं। ऐसे अन्धकारपूर्ण जीवन में श्रद्धा उन्हें वसंत के दूत के समान दिखाई देती है। वह घने अन्धकार में बिजली की चमक और गर्मी में ठंडी हवा के समान सुखद एवं आशाजनक है।
(ग) मनु किससे अपने जीवन के विषय में बता रहे हैं?
Ans. मनु श्रद्धा से अपने जीवन के विषय में बता रहे हैं।
(घ) मनु अपने आपको क्यों असहाय महसूस करते हैं?
Ans. मनु अपने जीवन को अस्थिर, दिशाहीन और निरुद्देश्य अनुभव करते हैं। उन्हें जीवन का कोई निश्चित आधार या सहारा दिखाई नहीं देता। इसी कारण वे स्वयं को असहाय अनुभव करते हैं।
(ङ) ‘तिमिर’ और ‘चपला’ शब्दों के अर्थ लिखिए ।
Ans.
तिमिर— अन्धकार।
चपला— बिजली।
5. (क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(i) जैनेंद्र कुमार
Ans. जैनेंद्र कुमार हिन्दी के प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक कथाकार एवं उपन्यासकार थे। उनका जन्म 1905 ई. में हुआ। उन्होंने मानव-मन की सूक्ष्म भावनाओं और मानसिक द्वन्द्वों को अपनी रचनाओं का विषय बनाया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘परख’, ‘सुनीता’, ‘त्यागपत्र’, ‘कल्याणी’, ‘सुखदा’ और ‘विवर्त’। उनकी भाषा सरल, मनोवैज्ञानिक और प्रभावपूर्ण है।
(ii) कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’
Ans. कन्हैयालाल मिश्र ‘प्रभाकर’ हिन्दी के प्रसिद्ध निबंधकार, पत्रकार और संस्मरणकार थे। उनका जन्म 1906 ई. में हुआ। उनकी भाषा सरल, सरस और भावपूर्ण है। उन्होंने सामान्य जीवन की घटनाओं में मानवीय मूल्यों को अभिव्यक्त किया। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं—‘जिंदगी मुस्कराई’, ‘माटी हो गई सोना’, ‘दीप जले शंख बजे’ और ‘क्षण बोले कण मुस्काए’।
(iii) हरिशंकर परसाई
Ans. हरिशंकर परसाई हिन्दी के प्रसिद्ध व्यंग्यकार थे। उनका जन्म 1924 ई. में मध्य प्रदेश में हुआ। उन्होंने सामाजिक कुरीतियों, रूढ़ियों और विसंगतियों पर प्रभावशाली व्यंग्य किया। उनकी भाषा सरल, तीखी और व्यंग्यपूर्ण है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘भोलाराम का जीव’, ‘प्रेमचंद के फटे जूते’, ‘सदाचार का ताबीज’, ‘रानी नागफनी की कहानी’ आदि।
(ख) निम्नलिखित में से किसी एक कवि का जीवन-परिचय देते हुए उनकी कृतियों का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(i) भारतेंदु हरिश्चन्द्र
Ans. भारतेंदु हरिश्चन्द्र का जन्म 1850 ई. में काशी में हुआ। उन्हें आधुनिक हिन्दी साहित्य का जनक माना जाता है। वे कवि, नाटककार, निबंधकार और पत्रकार थे। उन्होंने हिन्दी भाषा और साहित्य को नई दिशा प्रदान की। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘अंधेर नगरी’, ‘भारत दुर्दशा’, ‘नीलदेवी’, ‘प्रेममालिका’ और ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’। उनका निधन 1885 ई. में हुआ।
(ii) जगन्नाथ दास ‘रत्नाकर’
Ans. जगन्नाथदास ‘रत्नाकर’ आधुनिक हिन्दी के प्रसिद्ध ब्रजभाषा कवि थे। उनका जन्म 1866 ई. में हुआ। उनकी रचनाओं में भक्ति, श्रृंगार और काव्य-सौन्दर्य का सुंदर समन्वय मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘उद्धव-शतक’, ‘गंगावतरण’, ‘शृंगार-लहरी’, ‘वीराष्टक’ आदि। ‘उद्धव-शतक’ उनकी प्रसिद्ध कृति है।
(iii) मैथिलीशरण गुप्त
Ans. मैथिलीशरण गुप्त का जन्म 1886 ई. में चिरगाँव, झाँसी में हुआ। वे ‘राष्ट्रकवि’ के नाम से प्रसिद्ध हैं। उनके काव्य में राष्ट्रप्रेम, भारतीय संस्कृति, मानवता और सामाजिक चेतना की प्रधानता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं—‘भारत-भारती’, ‘साकेत’, ‘यशोधरा’, ‘पंचवटी’, ‘जयद्रथ-वध’ आदि। उनका निधन 1964 ई. में हुआ।
6. कहानी-तत्त्वों के आधार पर ‘लाटी’ अथवा ‘ध्रुवयात्रा’ कहानी की समीक्षा कीजिए । (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
Ans. ‘लाटी’ एक मार्मिक एवं प्रभावशाली कहानी है। इसका कथानक नारी-जीवन की पीड़ा और सामाजिक उपेक्षा पर आधारित है। कहानी की प्रमुख पात्र बानो है, जिसके जीवन में परिस्थितियों के कारण अनेक दुःख आते हैं। कथानक क्रमबद्ध एवं रोचक है। पात्रों का चरित्र-चित्रण स्वाभाविक है। भाषा सरल और भावपूर्ण है। कहानी का उद्देश्य नारी के प्रति संवेदना तथा मानवीय व्यवहार की आवश्यकता को व्यक्त करना है।
ध्रुवयात्रा
‘ध्रुवयात्रा’ एक मनोवैज्ञानिक कहानी है। इसके कथानक में प्रेम, त्याग, कर्तव्य और मानसिक संघर्ष की प्रधानता है। कहानी के पात्र अपने जीवन के उद्देश्य और भावनात्मक द्वन्द्व से गुजरते हैं। पात्रों का मनोवैज्ञानिक चित्रण इसकी विशेषता है। संवाद प्रभावशाली हैं तथा भाषा सरल और भावपूर्ण है। कहानी मनुष्य को अपने लक्ष्य के प्रति दृढ़ रहने की प्रेरणा देती है।
अथवा
‘खून का रिश्ता’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
Ans. ‘खून का रिश्ता’ कहानी का उद्देश्य पारिवारिक सम्बन्धों में स्वार्थ और सामाजिक भेदभाव को उजागर करना है। लेखक बताते हैं कि केवल खून का सम्बन्ध ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि सच्चे सम्बन्धों के लिए प्रेम, सहयोग और मानवता आवश्यक है। कहानी सामाजिक रूढ़ियों, दहेज और आर्थिक विषमता की ओर भी ध्यान आकर्षित करती है। लेखक समानता और मानवीय संवेदना का संदेश देते हैं।
7. स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों में से किसी एक प्रश्न का संक्षिप्त उत्तर दीजिए: (अधिकतम शब्द-सीमा 80 शब्द)
(क) ‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य के आधार पर कर्ण की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
Ans. कर्ण ‘रश्मिरथी’ का प्रमुख पात्र है। वह अत्यन्त वीर, साहसी, दानी, स्वाभिमानी और मित्रता निभाने वाला व्यक्ति है। वह विपरीत परिस्थितियों में भी अपने आत्मसम्मान को बनाए रखता है। वह दानवीर के रूप में प्रसिद्ध है और अपने वचन का पालन करता है। दुर्योधन के प्रति उसकी मित्रता अटूट है। उसका जीवन संघर्ष, त्याग और वीरता का प्रतीक है।
अथवा
‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटना का वर्णन कीजिए ।
Ans. ‘रश्मिरथी’ की प्रमुख घटना कर्ण और अर्जुन का युद्ध है। दोनों महान योद्धा युद्धभूमि में आमने-सामने आते हैं। कर्ण अत्यन्त वीरता से युद्ध करता है, लेकिन उसके रथ का पहिया धरती में धँस जाता है। वह कठिन परिस्थिति में फँस जाता है और अन्ततः अर्जुन के हाथों मारा जाता है। यह घटना कर्ण की वीरता और करुण नियति को व्यक्त करती है।
(ख) ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य के आधार पर प्रमुख पात्र का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans. ‘सत्य की जीत’ का प्रमुख पात्र सत्यनिष्ठ, साहसी, धर्मपरायण और कर्तव्यनिष्ठ है। वह कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का मार्ग नहीं छोड़ता। उसमें त्याग, धैर्य और आत्मविश्वास की भावना है। उसका चरित्र यह संदेश देता है कि मनुष्य को किसी भी परिस्थिति में सत्य और न्याय का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।
अथवा
‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटना का उल्लेख कीजिए ।
Ans. ‘सत्य की जीत’ की प्रमुख घटना सत्य और धर्म की विजय से सम्बन्धित है। पात्र अनेक कठिनाइयों का सामना करते हुए भी सत्य के मार्ग पर अडिग रहता है। अन्ततः सत्य की विजय होती है और असत्य पराजित होता है। इस घटना के माध्यम से सत्य, धर्म और न्याय की महत्ता को स्पष्ट किया गया है।
(ग) ‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य की प्रमुख विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
Ans. ‘मुक्तियज्ञ’ में स्वतंत्रता, राष्ट्रप्रेम, त्याग और बलिदान की भावना प्रमुख है। इसमें देश की मुक्ति के लिए संघर्ष करने वाले वीरों के आदर्शों का चित्रण किया गया है। काव्य की भाषा ओजपूर्ण एवं प्रभावशाली है। इसमें राष्ट्रीय चेतना और देशभक्ति का संदेश मिलता है। कवि ने स्वतंत्रता के लिए सर्वस्व त्याग करने की प्रेरणा दी है।
अथवा
‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए ।
Ans. ‘मुक्तियज्ञ’ का नायक देशभक्त, साहसी, त्यागी और संघर्षशील है। वह अपने व्यक्तिगत सुखों की अपेक्षा राष्ट्रहित को अधिक महत्त्व देता है। कठिनाइयों से विचलित हुए बिना स्वतंत्रता के लक्ष्य की ओर बढ़ता है। उसके चरित्र में दृढ़ संकल्प, साहस, त्याग और आत्मबल की प्रधानता है।
(घ) ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के प्रमुख नारी-पात्र की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
Ans. ‘त्यागपथी’ का प्रमुख नारी-पात्र त्याग, धैर्य, सहनशीलता और कर्तव्यपरायणता की प्रतिमूर्ति है। वह व्यक्तिगत सुखों का त्याग करके परिवार और समाज के हित को प्राथमिकता देती है। कठिन परिस्थितियों में भी वह अपने आदर्शों से विचलित नहीं होती। उसके चरित्र में ममता, करुणा और आत्मबल का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।
अथवा
‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य की विशेषताएँ लिखिए ।
Ans. ‘त्यागपथी’ में त्याग, कर्तव्य, आदर्शवाद और नैतिकता की प्रधानता है। इसमें नारी के त्याग और संघर्ष का मार्मिक चित्रण किया गया है। पात्रों के मानसिक द्वन्द्व को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भाषा काव्यात्मक और भावपूर्ण है। भारतीय संस्कृति एवं नैतिक मूल्यों का सुंदर चित्रण इसकी प्रमुख विशेषता है।
(ङ) ‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए ।
Ans. ‘आलोकवृत्त’ में नायक के जीवन-संघर्ष और उसके आदर्शों की घटनाओं का चित्रण मिलता है। नायक कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सत्य, न्याय और नैतिकता के मार्ग पर आगे बढ़ता है। उसके संघर्षों के माध्यम से समाज में ज्ञान, जागरूकता और मानवीय मूल्यों का प्रकाश फैलता है। यही इसकी प्रमुख घटनाओं का आधार है।
अथवा
‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य की सामान्य विशेषताओं का उल्लेख कीजिए ।
Ans. ‘आलोकवृत्त’ में आदर्शवाद, नैतिकता, सामाजिक चेतना और मानवीय मूल्यों की प्रधानता है। इसकी भाषा प्रभावपूर्ण और काव्यात्मक है। पात्रों के माध्यम से सत्य, कर्तव्य, ज्ञान और मानवता का संदेश दिया गया है। काव्य में सामाजिक जागरण और जीवन-मूल्यों की स्थापना पर विशेष बल दिया गया है।
(च) ‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य की विशेषताएँ लिखिए ।
Ans. ‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य माता-पिता की सेवा और पुत्रधर्म पर आधारित है। श्रवणकुमार आदर्श पुत्र, आज्ञाकारी, सेवाभावी और त्यागी है। वह अपने अंधे माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए कंधे पर लेकर चलता है। काव्य में माता-पिता के प्रति प्रेम, सेवा और त्याग की भावना का सुंदर चित्रण है। भाषा सरल और भावपूर्ण है।
अथवा
‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य की प्रमुख घटना को अपने शब्दों में लिखिए ।
Ans. श्रवणकुमार अपने अंधे माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए उन्हें लेकर जा रहा था। एक दिन वह उनके लिए जल लेने गया। उसी समय राजा दशरथ ने शब्दभेदी बाण चलाया, जो श्रवणकुमार को लग गया। घायल श्रवणकुमार ने अपने माता-पिता के लिए जल पहुँचाने की चिंता की। उसके माता-पिता को पुत्र-वियोग का अत्यन्त दुःख हुआ। यह घटना पुत्रधर्म और माता-पिता की सेवा की महानता को व्यक्त करती है।
खण्ड ख
8. (क) निम्नलिखित संस्कृत-गद्यांश का सन्दर्भ-सहित हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
जन्मतः दशमे दिने ‘शिवं भजेदयम्’ इति बुद्धया पिता स्वसुतस्य मूलशङ्कर इति नाम अकरोत्, अष्टमे वर्षे चास्योपनयनमकरोत् । त्रयोदशवर्षं प्राप्तवतेऽस्मै मूलशङ्कराय पिता शिवरात्रिव्रतमाचरितुम् अकथयत् । पितुराज्ञानुसारं मूलशङ्करः सर्वमपि व्रतविधानमकरोत् ।
Ans. सन्दर्भ: प्रस्तुत गद्यांश संस्कृत पाठ से उद्धृत है।
हिन्दी अनुवाद: जन्म के दसवें दिन ‘यह शिव की पूजा करे’ इस विचार से पिता ने अपने पुत्र का नाम मूलशंकर रखा। आठवें वर्ष में उसका उपनयन संस्कार किया। जब वह तेरह वर्ष का हुआ, तब पिता ने मूलशंकर को शिवरात्रि का व्रत करने के लिए कहा। पिता की आज्ञा के अनुसार मूलशंकर ने व्रत की सभी विधियों का पालन किया।
अथवा
अतीते प्रथमकल्पे जनाः एकमभिरूपं सौभाग्यप्राप्तं सर्वाकारपरिपूर्ण पुरुषं राजानमकुर्वन् । चतुष्पदा अपि सन्निपत्य एकं सिंह राजानमकुर्वन् । ततः शकुनिगणाः हिमवत्-प्रदेशे एकस्मिन् पाषाणे सन्निपत्य ‘मनुष्येषु’ राजा प्रज्ञायते तथा चतुष्पदेषु च। अस्माकं पुनरन्तरे राजा नास्ति । अराजको वासो नाम न वर्तते ।
Ans. हिन्दी अनुवाद: प्राचीन काल में लोगों ने एक सुन्दर, सौभाग्यशाली और सभी प्रकार से सम्पन्न पुरुष को राजा बनाया। चार पैर वाले पशुओं ने भी एकत्र होकर सिंह को अपना राजा बनाया। इसके बाद पक्षियों के समूह ने हिमालय प्रदेश में एक पत्थर पर एकत्र होकर विचार किया कि मनुष्यों में राजा होता है और चार पैर वाले पशुओं में भी राजा है, लेकिन हमारे समूह में कोई राजा नहीं है। अतः हमारे यहाँ अराजकता का निवास है।
ख) निम्नलिखित श्लोकों का हिन्दी में संदर्भ-सहित अनुवाद कीजिए :
उदेति सविता ताम्रस्ताम् एवास्तमेति च ।
सम्पत्तौ च विपत्तौ च महतामेकरूपता ।।
Ans. सन्दर्भ: प्रस्तुत श्लोक में महान पुरुषों की समभावना का वर्णन किया गया है।
हिन्दी अनुवाद: सूर्य लाल रंग का उदय होता है और उसी लाल रंग का होकर अस्त भी होता है। उसी प्रकार महान पुरुष सम्पत्ति और विपत्ति दोनों में समान रहते हैं। सुख और दुःख में उनके व्यवहार में विशेष परिवर्तन नहीं आता।
अथवा
मत्ता गजेन्द्राः मुदिता गवेन्द्राः वनेषु विक्रान्ततरा मृगेन्द्राः ।
रम्या नगेन्द्राः निभृता नरेन्द्राः प्रकीडितो वारिधरैः सुरेन्द्रः ।।
Ans. हिन्दी अनुवाद: हाथी मदमस्त हैं, गायें प्रसन्न हैं और वन में सिंह अत्यन्त पराक्रमी हैं। पर्वत सुन्दर दिखाई दे रहे हैं, राजा शान्त हैं और बादलों से इन्द्र प्रसन्न होकर क्रीड़ा कर रहे हैं।
9. निम्नलिखित में से किन्हीं दो प्रश्नों के उत्तर संस्कृत में दीजिए:
(क) वर्षा काले के मत्ताः भवन्ति ?
Ans. वर्षाकाले गजेन्द्राः मत्ताः भवन्ति।
(ख) दुर्योधनः कः आसीत् ?
Ans. दुर्योधनः कौरवाणां ज्येष्ठः पुत्रः आसीत्।
(ग) मालवीयः कुत्र अध्यापनम् आरब्धवान् ?
Ans. मालवीयः प्रयागस्य राजकीयविद्यालये अध्यापनम् आरब्धवान्।
(घ) का भाषा सर्वासाम् आर्यभाषाणां जननी ?
Ans. संस्कृतभाषा सर्वासाम् आर्यभाषाणां जननी अस्ति।
10. (क) ‘शांत’ अथवा ‘वात्सल्य’ रस की परिभाषा लिखकर उसका उदाहरण दीजिए ।
Ans. परिभाषा: संसार की नश्वरता का ज्ञान होने पर जब मन में वैराग्य अथवा निर्वेद का भाव उत्पन्न होता है, तब शांत रस होता है। इसका स्थायी भाव निर्वेद है।
उदाहरण:
“मन रे! तन कागद की नाव,
एक दिवस यह मिट जाना है।”
यहाँ संसार की नश्वरता से वैराग्य का भाव उत्पन्न होता है।
वात्सल्य रस
परिभाषा: माता-पिता का अपनी संतान के प्रति प्रेम, स्नेह और ममता व्यक्त होने पर वात्सल्य रस होता है।
उदाहरण:
“मैया मोरी, मैं नहीं माखन खायो।”
(ख) ‘अनुप्रास’ अथवा ‘अतिशयोक्ति’ अलंकार की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए ।
Ans. परिभाषा: जहाँ एक ही वर्ण या ध्वनि की बार-बार आवृत्ति होने से काव्य में सौन्दर्य उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण:
“चारु चन्द्र की चंचल किरणें।”
यहाँ ‘च’ वर्ण की आवृत्ति हुई है।
अतिशयोक्ति अलंकार
परिभाषा: जहाँ किसी वस्तु या घटना का वर्णन वास्तविकता से बहुत अधिक बढ़ा-चढ़ाकर किया जाए, वहाँ अतिशयोक्ति अलंकार होता है।
उदाहरण:
“हनुमान की पूँछ में लगन न पाई आग,
लंका सारी जल गई, गए निशाचर भाग।”
(ग) ‘सवैया’ अथवा ‘बरवै’ छन्द की परिभाषा उदाहरण सहित लिखिए ।
Ans. परिभाषा: सवैया एक वर्णिक छन्द है। इसके चार चरण होते हैं। इसके विभिन्न भेद होते हैं और प्रत्येक भेद में वर्णों की संख्या तथा गणों का निश्चित विधान होता है।
उदाहरण:
“किधौं व्योम वीथिका बीच कहूँ विधु-मण्डल में उजियारो है।”
बरवै छन्द
परिभाषा: बरवै एक अर्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 12-12 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 7-7 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण:
“प्रेम प्रीति को बिरवा, चले लगाय।
सींचन की सुधि लीजो, मुरझि न जाय॥”
11. निम्नलिखित में से किसी एक विषय पर निबन्ध लिखिए :
(क) मेरा प्रिय खेल
Ans. खेल हमारे जीवन का महत्त्वपूर्ण अंग हैं। खेलों से शरीर स्वस्थ और मन प्रसन्न रहता है। विभिन्न खेलों में मेरा प्रिय खेल क्रिकेट है। क्रिकेट मुझे बहुत पसंद है, क्योंकि इसमें शारीरिक क्षमता के साथ धैर्य, एकाग्रता और टीम भावना की आवश्यकता होती है।
क्रिकेट दो टीमों के बीच खेला जाता है। प्रत्येक टीम में ग्यारह खिलाड़ी होते हैं। बल्लेबाज रन बनाने का प्रयास करते हैं तथा गेंदबाज और क्षेत्ररक्षक उन्हें रोकने का प्रयास करते हैं। इस खेल में प्रत्येक खिलाड़ी की अपनी महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है।
क्रिकेट हमें सहयोग, अनुशासन और नेतृत्व की भावना सिखाता है। जीत मिलने पर विनम्र रहना और हारने पर निराश न होना भी खेल से सीखा जा सकता है। नियमित अभ्यास से खिलाड़ी में आत्मविश्वास और धैर्य बढ़ता है।
अतः क्रिकेट केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक विकास का भी अच्छा माध्यम है। इसलिए क्रिकेट मेरा प्रिय खेल है।
(ख) शिक्षा का महत्त्व
Ans. शिक्षा मनुष्य के जीवन का आधार है। शिक्षा केवल पढ़ना-लिखना सीखने का साधन नहीं है, बल्कि यह मनुष्य के विचार, चरित्र और व्यक्तित्व का निर्माण करती है। शिक्षित व्यक्ति सही और गलत में अन्तर समझ सकता है तथा अपने कर्तव्यों का उचित पालन कर सकता है।
शिक्षा व्यक्ति में आत्मविश्वास, विवेक, अनुशासन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण उत्पन्न करती है। शिक्षा के द्वारा व्यक्ति ज्ञान और कौशल प्राप्त करके आत्मनिर्भर बन सकता है। शिक्षित नागरिक समाज और राष्ट्र की उन्नति में महत्त्वपूर्ण योगदान देते हैं।
शिक्षा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में भी सहायक है। अंधविश्वास, भेदभाव और रूढ़ियों को शिक्षा के माध्यम से कम किया जा सकता है। स्त्री-शिक्षा से परिवार और समाज दोनों का विकास होता है।
अतः प्रत्येक व्यक्ति के लिए शिक्षा आवश्यक है। शिक्षा व्यक्ति के वर्तमान को सुधारने के साथ-साथ राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करती है।
(ग) भ्रष्टाचार: कारण और निवारण
Ans. भ्रष्टाचार समाज और राष्ट्र की प्रगति में बाधक एक गंभीर समस्या है। जब कोई व्यक्ति अपने पद या अधिकार का अनुचित लाभ लेकर निजी स्वार्थ की पूर्ति करता है, तो उसे भ्रष्टाचार कहा जाता है।
भ्रष्टाचार के प्रमुख कारणों में लालच, स्वार्थ, नैतिक मूल्यों में कमी, पारदर्शिता का अभाव तथा कानूनों का प्रभावी पालन न होना शामिल हैं। इससे सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंद लोगों तक ठीक से नहीं पहुँचता और विकास कार्य प्रभावित होते हैं।
भ्रष्टाचार को रोकने के लिए प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ानी चाहिए। सरकारी सेवाओं को अधिक से अधिक डिजिटल बनाना चाहिए। भ्रष्टाचार के विरुद्ध बने कानूनों का निष्पक्ष और प्रभावी पालन होना चाहिए। नागरिकों में ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की भावना विकसित करना भी आवश्यक है।
यदि प्रशासन और नागरिक दोनों ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करें, तो भ्रष्टाचार को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
(घ) सादा जीवन उच्च विचार
Ans.“सादा जीवन उच्च विचार” भारतीय जीवन-दर्शन का महत्त्वपूर्ण आदर्श है। इसका अर्थ है कि मनुष्य का जीवन दिखावे और अनावश्यक विलासिता से दूर हो तथा उसके विचार ऊँचे और श्रेष्ठ हों।
सादा जीवन मनुष्य को अनावश्यक इच्छाओं और भौतिक प्रतिस्पर्धा से बचाता है। इससे जीवन में शांति और संतुलन आता है। उच्च विचार मनुष्य को सत्य, ईमानदारी, परोपकार, करुणा और कर्तव्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।
महात्मा गांधी के जीवन में सादगी और उच्च विचारों का सुंदर उदाहरण मिलता है। उन्होंने साधारण जीवन जीते हुए महान आदर्श स्थापित किए।
आज के भौतिकवादी युग में सादा जीवन और उच्च विचारों का महत्त्व और अधिक बढ़ गया है। हमें अनावश्यक दिखावे से बचकर अपने चरित्र और विचारों को श्रेष्ठ बनाने का प्रयास करना चाहिए।
अतः सादा जीवन मनुष्य को शांति देता है और उच्च विचार उसके जीवन को महान बनाते हैं।
12. (क) (i) ‘हरये’ का सन्धि-विच्छेद है :
(अ) हरे + ए
(ब) हर + ए
(स) हरे + ऐ
(द) हर + ऐ
Ans. (अ) हरे + ए
(ii) ‘वनेऽत्र’ का सन्धि-विच्छेद है :
(अ) वन + अत्र
(ब) वने + अत्र
(स) वने + एत्र
(द) वन आत्र
Ans. (ब) वने + अत्र
(iii) ‘रामश्चलति’ में सन्धि है:
(अ) स्वर
(ब) व्यंजन
(स) विसर्ग
(द) यण
Ans. (स) विसर्ग
(ख) निम्नलिखित में से किसी एक का विग्रह करके समास का नाम लिखिए :
(i) आजीवनम्
Ans. विग्रह— जीवन-पर्यन्तम् / जीवन भर
समास— अव्ययीभाव समास।
(ii) श्वेताम्बरम्
Ans. विग्रह— श्वेतम् अम्बरम् यस्य सः।
समास— बहुव्रीहि समास।
(iii) महाशयः
Ans. विग्रह— महान् आशयः यस्य सः।
समास— बहुव्रीहि समास।
13. अपने क्षेत्र के पार्क को विकसित कराने के लिए नगर-निगम के मुख्य उद्यान-निरीक्षक को एक पत्र लिखिए ।
Ans.
सेवा में,
मुख्य उद्यान-निरीक्षक,
नगर निगम, __________।
विषय— क्षेत्रीय पार्क के विकास एवं सौन्दर्यीकरण के सम्बन्ध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं __________ क्षेत्र का निवासी हूँ। हमारे क्षेत्र का पार्क उचित देखभाल के अभाव में काफी समय से खराब स्थिति में है। पार्क में गंदगी तथा झाड़ियाँ हैं और बच्चों के खेलने के उपकरण भी टूटे हुए हैं। बैठने के लिए पर्याप्त बेंच तथा प्रकाश की उचित व्यवस्था भी नहीं है।
पार्क के विकसित होने से क्षेत्र के बच्चों, युवाओं तथा बुजुर्गों को स्वच्छ एवं स्वस्थ वातावरण मिल सकेगा। अतः आपसे निवेदन है कि पार्क की नियमित सफाई, घास की कटाई, वृक्षारोपण, प्रकाश व्यवस्था तथा टूटे हुए उपकरणों की मरम्मत कराने की कृपा करें। पार्क में आवश्यकतानुसार नई बेंच और खेल उपकरण भी लगवाए जाएँ।
आशा है कि आप जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
नाम— __________
पता— __________
दिनांक— __________
अथवा
विद्यालय की वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने पर अपने छोटे भाई को बधाई देते हुए एक पत्र लिखिए ।
Ans.
प्रिय छोटे भाई,
सप्रेम आशीर्वाद।
तुम्हारी विद्यालय की वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने की खबर सुनकर मुझे बहुत प्रसन्नता हुई। तुम्हारी इस सफलता से पूरे परिवार को गर्व हुआ है। यह उपलब्धि तुम्हारी मेहनत, नियमित अभ्यास और आत्मविश्वास का परिणाम है।
वाद-विवाद प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करना तुम्हारी अच्छी तर्कशक्ति और प्रभावशाली अभिव्यक्ति को दर्शाता है। मुझे विश्वास है कि तुम भविष्य में भी इसी प्रकार परिश्रम करके अनेक सफलताएँ प्राप्त करोगे।
मेरी ओर से तुम्हें हार्दिक बधाई और उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ।
तुम्हारा बड़ा भाई
14. (क) (ⅰ) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द के धातु एवं प्रत्यय का योग स्पष्ट कीजिए:
(अ) लिखितः
Ans. लिख् + क्त = लिखितः
धातु— लिख्
प्रत्यय— क्त
(ब) कृत्वा
Ans. कृ + त्वा = कृत्वा
धातु— कृ
प्रत्यय— त्वा
(स) द्रष्टव्य
Ans. दृश् + तव्य = द्रष्टव्य
धातु— दृश्
प्रत्यय— तव्य
(ii) निम्नलिखित में से किसी एक शब्द में प्रत्यय लिखिए :
(अ) श्रवणीयः
Ans. अनीयर् प्रत्यय
(ब) बन्धुत्वम्
Ans. त्व प्रत्यय
(स) बलवान्
Ans. मतुप् प्रत्यय
(ख ) रेखांकित (बोल्ड) पदों में से किसी एक पद में प्रयुक्त विभक्ति तथा संबंधित नियम का उल्लेख कीजिए :
(i) गृहं प्रति गच्छ ।
Ans. ‘गृहम्’ में द्वितीया विभक्ति है।
नियम: ‘प्रति’ के योग में द्वितीया विभक्ति होती है।
अर्थ: घर की ओर जाओ।
(ii) रामेण सह सीता वनम् अगच्छत ।
Ans. ‘रामेण’ में तृतीया विभक्ति है।
नियम: ‘सह’ के योग में तृतीया विभक्ति होती है।
अर्थ: सीता राम के साथ वन गई।
(iii) अग्नये स्वाहा ।
Ans. ‘अग्नये’ में चतुर्थी विभक्ति है।
नियम: ‘स्वाहा’ के योग में चतुर्थी विभक्ति होती है।
अर्थ: अग्नि के लिए स्वाहा।