U.P Board Class 12 Chemistry 347(GB) Question Paper 2024

U.P Board Class 12 Chemistry 347(GB) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
रसायन विज्ञान
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 70

निर्देश :

(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न के निर्धारित अंक उसके समक्ष दिए गए हैं।

(iii) गणनात्मक प्रश्नों में, गणना के समस्त पद दीजिए ।

(iv) प्रश्नों के प्रासंगिक उत्तर दीजिए ।

(v) जहाँ आवश्यक हो, रासायनिक समीकरण दीजिए ।

1. इस प्रश्न के प्रत्येक खण्ड में चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए ।

(क) 180 ग्राम जल में मोलों की संख्या है :

(i) 180
(ii) 1000
(iii) 100
(iv) 10

Ans. जल का मोलर द्रव्यमान = 18 g mol⁻¹n=18018=10 moln=\frac{180}{18}=10\text{ mol}

Ans. (iv) 10 ✓

(ख) ρ (रो) की SI इकाई है:

(i) Ωm
(ii) Ohm m-1
(iii) Ohm-1
(iv) cm-1

Ans. (i) Ωm

(ग) द्वितीय कोटि अभिक्रिया के वेग स्थिरांक की इकाई है:

(i) लीटर मोल 1 सेकण्ड -1
(ii) मोल सेकण्ड -1
(iii) लीटर सेकण्ड-1
(iv) लीटर मोल सेकण्ड -1

Ans. द्वितीय कोटि अभिक्रिया के लिए—k=1mol L−1 s=L mol−1s−1k=\frac{1}{mol\,L^{-1}\,s} =L\,mol^{-1}s^{-1}

Ans. (i) लीटर मोल⁻¹ सेकण्ड⁻¹

(घ) [Cr(C2O4)3]³– आयन में Cr की समन्वय संख्या है :

(i) 0
(ii) 1
(iii) 2
(iv) 3

Ans. एक C2O42−C_2O_4^{2-} लिगैण्ड द्विदन्तुक है। तीन ऑक्सेलेट लिगैण्ड—3×2=63\times2=6

इसलिए समन्वय संख्या = 6

नोट: दिए गए विकल्पों में 6 नहीं है, अतः प्रश्न/विकल्प में मुद्रण त्रुटि प्रतीत होती है। सही उत्तर 6 है।

(ङ) RMgX तथा जल की अभिक्रिया से बनता है:

(i) RR
(ii) RH
(iii) RX
(iv) ROH

Ans. (ii) RH

(च) 2° ऐमीन है :

(i) H–NH₂
(ii) R–NH₂
(iii) R–NH–R
(iv) R₃N

Ans. (iii) R–NH–R

2. (क) मोलरता तथा मोललता में उदाहरण देते हुए विभेद कीजिए।
Ans.

आधारमोलरतामोललता
परिभाषाएक लीटर विलयन में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्याएक किलोग्राम विलायक में उपस्थित विलेय के मोलों की संख्या
सूत्रM=nVM=\frac{n}{V}m=nWm=\frac{n}{W}
इकाईmol L⁻¹ या Mmol kg⁻¹ या m
ताप का प्रभावताप के साथ बदलती हैताप से लगभग अप्रभावित रहती है

उदाहरण: यदि 1 L विलयन में 1 mol NaCl है, तो उसकी मोलरता 1 M होगी। यदि 1 kg जल में 1 mol NaCl घुला है, तो उसकी मोललता 1 m होगी।

(ख) क्या फेरिक आयन द्वारा ब्रोमाइड आयन का ब्रोमीन में ऑक्सीकरण सम्भव है ?
Ans.
फेरिक आयन की अपचयन अभिक्रिया—Fe3++e−→Fe2+Fe^{3+}+e^-\rightarrow Fe^{2+}

ब्रोमाइड के ऑक्सीकरण की अभिक्रिया—2Br−→Br2+2e−2Br^-\rightarrow Br_2+2e^-

मानक अपचयन विभव लगभग—E∘(Fe3+/Fe2+)=+0.77VE^\circ(Fe^{3+}/Fe^{2+})=+0.77VE∘(Br2/Br−)=+1.07VE^\circ(Br_2/Br^-)=+1.07V

अतःEcell∘=0.77−1.07=−0.30VE^\circ_{\text{cell}}=0.77-1.07=-0.30V

क्योंकि Ecell∘E^\circ_{\text{cell}} ऋणात्मक है, इसलिए Fe³⁺ द्वारा Br⁻ का Br₂ में ऑक्सीकरण स्वतः सम्भव नहीं है।

(ग) किसी अभिक्रिया के वेग स्थिरांक को समझाइए ।
Ans.
किसी रासायनिक अभिक्रिया के वेग तथा अभिकारकों की सांद्रता के बीच सम्बन्ध में समानुपाती स्थिरांक को वेग स्थिरांक (k) कहते हैं।

यदि—Rate=k[A]m[B]nRate=k[A]^m[B]^n

तोk=Rate[A]m[B]nk=\frac{Rate}{[A]^m[B]^n}

किसी निश्चित ताप पर kk का मान स्थिर रहता है।

(घ) सीरियम (Ce) परमाणु क्रमांक 58 की 3 तथा +4 ऑक्सीकरण अवस्था स्थायी क्यों होती है?
Ans.
सीरियम का परमाणु क्रमांक 58 है तथा इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लगभग—[Xe]4f15d16s2[Xe]4f^15d^16s^2

है।

  • +3 अवस्था में 4f14f^1 विन्यास प्राप्त होता है।
  • +4 अवस्था में 4f04f^0 विन्यास प्राप्त होता है।
  • 4f04f^0 विन्यास विशेष रूप से स्थायी होता है।
  • Ce की आयनीकरण ऊर्जाओं तथा 4f कक्षक की ऊर्जा के कारण Ce दोनों अवस्थाएँ प्रदर्शित करता है।

अतः Ce की +3 और +4 दोनों ऑक्सीकरण अवस्थाएँ अपेक्षाकृत स्थायी होती हैं।

3. (क) समन्वय संख्या को एक उदाहरण द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Ans.
किसी समन्वय यौगिक में केन्द्रीय धातु आयन से सीधे जुड़े हुए दाता परमाणुओं की संख्या को समन्वय संख्या कहते हैं।

उदाहरण—[Co(NH3)6]Cl3[Co(NH_3)_6]Cl_3

में Co से 6 NH3NH_3 अणु जुड़े हैं।

अतः Co की समन्वय संख्या = 6

(ख) प्राथमिक, द्वितीयक तथा तृतीयक बेन्ज़िलिक ऐल्कोहॉल का संरचना सूत्र लिखिए ।
Ans.
प्राथमिक बेन्जिलिक ऐल्कोहॉल:C6H5CH2OHC_6H_5CH_2OH

द्वितीयक बेन्जिलिक ऐल्कोहॉल:C6H5CH(OH)CH3C_6H_5CH(OH)CH_3

तृतीयक बेन्जिलिक ऐल्कोहॉल:C6H5C(OH)(CH3)2C_6H_5C(OH)(CH_3)_2

(ग) ऐल्कोहॉल के क्वथनांक कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर बढ़ते हैं लेकिन ऐल्कोहॉल के शाखन में बढ़ने पर कम क्यों हो जाते हैं ?
Ans.
ऐल्कोहॉल के अणुओं के बीच हाइड्रोजन बन्ध पाया जाता है। कार्बन परमाणुओं की संख्या बढ़ने पर अणु का आणविक द्रव्यमान तथा वान डर वाल्स बल बढ़ता है। इसलिए क्वथनांक बढ़ता है।

लेकिन समान आणविक द्रव्यमान वाले ऐल्कोहॉल में शाखन बढ़ने पर अणु अधिक सघन और लगभग गोलाकार हो जाता है। इससे अणुओं के बीच संपर्क क्षेत्र कम होता है और वान डर वाल्स बल घटता है। इसलिए शाखन बढ़ने पर क्वथनांक घटता है।

(घ) RNA पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Ans.
RNA का पूरा नाम राइबोन्यूक्लिक अम्ल (Ribonucleic Acid) है। इसमें राइबोज शर्करा, फॉस्फेट तथा नाइट्रोजनी क्षार पाए जाते हैं। RNA में चार प्रमुख क्षार—एडेनिन (A), ग्वानिन (G), साइटोसिन (C) तथा यूरेसिल (U) होते हैं।

RNA सामान्यतः एकल-रज्जुक होता है। यह प्रोटीन संश्लेषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके प्रमुख प्रकार mRNA, tRNA तथा rRNA हैं।

4. (क) हैलोऐरीन में इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापनं अभिक्रिया की क्रियाविधि उदाहरण की सहायता से समझाइए ।
Ans.
हैलोऐरीन में हैलोजन परमाणु के स्थान पर कोई इलेक्ट्रॉनरागी समूह प्रवेश करता है। इसे इलेक्ट्रॉनरागी प्रतिस्थापन अभिक्रिया कहते हैं।

उदाहरण के लिए क्लोरोबेन्जीन में नाइट्रो समूह का प्रवेश—C6H5Cl+HNO3→H2SO4o–ClC6H4NO2+p–ClC6H4NO2+H2OC_6H_5Cl+HNO_3 \xrightarrow{H_2SO_4} o\text{-}ClC_6H_4NO_2+p\text{-}ClC_6H_4NO_2+H_2O

क्रियाविधि:

पहले इलेक्ट्रॉनरागी NO2+NO_2^+ का निर्माण होता है—HNO3+H2SO4→NO2++HSO4−+H2OHNO_3+H_2SO_4\rightarrow NO_2^++HSO_4^-+H_2O

इसके बाद NO2+NO_2^+, बेंजीन वलय पर आक्रमण करता है और अंत में प्रोटॉन निकलने से प्रतिस्थापित उत्पाद प्राप्त होता है।

हैलोजन का -I प्रभाव वलय को निष्क्रिय करता है, परन्तु उसका +R प्रभाव उसे ortho तथा para निर्देशक बनाता है।

(ख) हैलोऐल्केन के विलोपन अभिक्रिया तथा प्रतिस्थापन अभिक्रिया में उदाहरण द्वारा अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
प्रतिस्थापन अभिक्रिया

इसमें हैलोऐल्केन के हैलोजन परमाणु को कोई अन्य समूह प्रतिस्थापित कर देता है।C2H5Br+KOH(aq)→C2H5OH+KBrC_2H_5Br+KOH_{(aq)} \rightarrow C_2H_5OH+KBr

विलोपन अभिक्रिया

इसमें हैलोऐल्केन से HX के निकलने पर द्विबन्ध बनता है।C2H5Br+KOH(alc)→CH2=CH2+KBr+H2OC_2H_5Br+KOH_{(alc)} \rightarrow CH_2=CH_2+KBr+H_2O

अतः प्रतिस्थापन में नया समूह जुड़ता है, जबकि विलोपन में छोटा अणु हटकर द्विबन्ध बनता है।

(ग) फीनॉल को निम्नलिखित से प्राप्त करने की क्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए :

(i) क्लोरोबेन्ज़ीन
Ans.

C6H5Cl+NaOH→300 atm623KC6H5ONa+NaClC_6H_5Cl+NaOH \xrightarrow[300\,atm]{623K} C_6H_5ONa+NaCl

फिर—C6H5ONa+HCl→C6H5OH+NaClC_6H_5ONa+HCl\rightarrow C_6H_5OH+NaCl

(ii) ऐनिलीन
Ans.
पहले ऐनिलीन का डायजोनीकरण—C6H5NH2+NaNO2+2HCl→273−278KC6H5N2+Cl−+NaCl+2H2OC_6H_5NH_2+NaNO_2+2HCl \xrightarrow{273-278K} C_6H_5N_2^+Cl^-+NaCl+2H_2O

फिर जल अपघटन—C6H5N2+Cl−+H2O→ΔC6H5OH+N2+HClC_6H_5N_2^+Cl^-+H_2O \xrightarrow{\Delta} C_6H_5OH+N_2+HCl

(iii) बेन्ज़ीन
Ans.
पहले बेन्जीन का क्लोरोबेन्जीन में परिवर्तन—C6H6+Cl2→FeCl3C6H5Cl+HClC_6H_6+Cl_2\xrightarrow{FeCl_3}C_6H_5Cl+HCl

फिर—C6H5Cl+NaOH→C6H5ONa→C6H5OHC_6H_5Cl+NaOH \rightarrow C_6H_5ONa \rightarrow C_6H_5OH

(घ) निम्नलिखित अभिक्रियाओं के रासायनिक समीकरण लिखिए :

(i) रोज़ेनमुंड अपचयन
Ans.
ऐसिल क्लोराइड को H2/Pd−BaSO4H_2/Pd-BaSO_4 द्वारा अपचयित करने पर ऐल्डिहाइड बनता है।RCOCl+H2→Pd/BaSO4RCHO+HClRCOCl+H_2 \xrightarrow{Pd/BaSO_4} RCHO+HCl

(ii) स्टीफैन अभिक्रिया
Ans.
नाइट्राइल का अपचयन करके इमीन हाइड्रोक्लोराइड बनाया जाता है, जिसका जल अपघटन करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।RCN→SnCl2/HClRCH=NH⋅HClRCN\xrightarrow{SnCl_2/HCl}RCH=NH\cdot HClRCH=NH⋅HCl+H2O→RCHO+NH4ClRCH=NH\cdot HCl+H_2O\rightarrow RCHO+NH_4Cl

(iii) गाटरमान-कोख अभिक्रिया
Ans.
बेन्जीन अथवा उसके व्युत्पन्न की CO तथा HCl के साथ AlCl3/CuClAlCl_3/CuCl की उपस्थिति में अभिक्रिया कराने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है।C6H6+CO+HCl→AlCl3/CuClC6H5CHOC_6H_6+CO+HCl \xrightarrow{AlCl_3/CuCl} C_6H_5CHO

5. (क) मोलर चालकता को समझाइए। 0.02 mol L-1 KCI विलयन से भरे सेल का प्रतिरोध 480Ω है। विलयन की मोलर चालकता परिकलित कीजिए। (सेल स्थिरांक 1.29 cm-1)
Ans.
किसी विलयन में उपस्थित एक मोल विद्युत अपघट्य द्वारा उत्पन्न आयनों की चालकता को उस विलयन की मोलर चालकता कहते हैं।Λm=κ×1000C\Lambda_m=\frac{\kappa\times1000}{C}

दिया है—C=0.02 mol L−1C=0.02\,mol\,L^{-1}R=4802 ΩR=4802\,\OmegaCell constant=1.29 cm−1\text{Cell constant}=1.29\,cm^{-1}

चालकता—κ=Cell constantR\kappa=\frac{\text{Cell constant}}{R}κ=1.294802\kappa=\frac{1.29}{4802}κ=2.686×10−4 S cm−1\kappa=2.686\times10^{-4}\,S\,cm^{-1}

अब,Λm=2.686×10−4×10000.02\Lambda_m=\frac{2.686\times10^{-4}\times1000}{0.02}Λm≈13.43 S cm2 mol−1\boxed{\Lambda_m\approx13.43\,S\,cm^2\,mol^{-1}}

(ख) प्रथम कोटि की अभिक्रिया को समझाइए । प्रथम कोटि की एक अभिक्रिया के लिए वेग स्थिरांक k का मान 5.5 × 10-14s-1 है। अभिक्रिया के अर्ध-आयु काल की गणना कीजिए ।
Ans.
जिस अभिक्रिया का वेग केवल एक अभिकारक की प्रथम घात की सांद्रता पर निर्भर करता है, उसे प्रथम कोटि की अभिक्रिया कहते हैं।Rate=k[A]Rate=k[A]

प्रथम कोटि अभिक्रिया का अर्ध-आयु सूत्र—t1/2=0.693kt_{1/2}=\frac{0.693}{k}

दिया है—k=5.5×10−14s−1k=5.5\times10^{-14}s^{-1}

अतःt1/2=0.6935.5×10−14t_{1/2}=\frac{0.693}{5.5\times10^{-14}}t1/2=1.26×1013s\boxed{t_{1/2}=1.26\times10^{13}s}

(ग) लैन्थेनॉयड आकुंचन की स्पष्ट रूप से व्याख्या कीजिए तथा कारण बताइए कि संक्रमण तत्त्वों के अनेक यौगिक रंगीन क्यों होते हैं।
Ans.
लैन्थेनाइड श्रेणी में La से Lu तक परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु तथा Ln3+Ln^{3+} आयनों की त्रिज्या में क्रमिक कमी को लैन्थेनॉयड आकुंचन कहते हैं।

कारण

लैन्थेनाइडों में इलेक्ट्रॉन क्रमशः 4f4f कक्षकों में भरते हैं। 4f4f इलेक्ट्रॉनों की परिरक्षण क्षमता कम होती है। इसलिए प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ता जाता है और इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक आकर्षित होते हैं। फलतः परमाणु तथा आयनिक त्रिज्या घटती जाती है।

संक्रमण तत्त्वों के यौगिक रंगीन क्यों होते हैं?

संक्रमण तत्त्वों के आयनों में आंशिक रूप से भरे हुए dd-कक्षक होते हैं। प्रकाश पड़ने पर d−dd-d संक्रमण के कारण दृश्य प्रकाश के कुछ भाग का अवशोषण होता है। शेष प्रकाश का रंग हमें दिखाई देता है। इसलिए अनेक संक्रमण धातु यौगिक रंगीन होते हैं।

(घ) उपसहसंयोजन यौगिकों में संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (VBT) को समझाइए ।
Ans.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त के अनुसार केन्द्रीय धातु आयन अपने रिक्त या अर्ध-भरे कक्षकों को लिगैण्ड के दाता परमाणुओं के कक्षकों के साथ अतिव्यापन कराकर समन्वय आबन्ध बनाता है।

लिगैण्ड अपने एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को केन्द्रीय धातु आयन को प्रदान करता है।

उदाहरण—[Co(NH3)6]3+[Co(NH_3)_6]^{3+}

में Co3+Co^{3+} के कक्षक संकरण करके छह संकर कक्षक बनाते हैं और छह NH3NH_3 लिगैण्ड इनसे समन्वय आबन्ध बनाते हैं।

अतः VBT के आधार पर यौगिकों की ज्यामिति तथा चुम्बकीय गुणों की व्याख्या की जा सकती है।

6. (क) राउल्ट के नियम की परिभाषा लिखिए। इस नियम के आधार पर विलेय के मोलर द्रव्यमान को परिकलित करने का व्यंजक प्राप्त कीजिए ।
Ans.
किसी आदर्श विलयन में किसी वाष्पशील घटक का आंशिक वाष्प दाब उसके मोल अंश के समानुपाती होता है।pi=xipi0p_i=x_i p_i^0

जहाँ pi0p_i^0 शुद्ध घटक का वाष्प दाब है।

अवाष्पशील विलेय के लिए—p0−pp0=x2\frac{p^0-p}{p^0}=x_2

यदि विलेय का द्रव्यमान w2w_2, मोलर द्रव्यमान M2M_2 तथा विलायक का द्रव्यमान w1w_1, मोलर द्रव्यमान M1M_1 है, तो—p0−pp0=w2/M2w1/M1\frac{p^0-p}{p^0} = \frac{w_2/M_2}{w_1/M_1}

अतः—M2=w2M1p0w1(p0−p)\boxed{M_2= \frac{w_2M_1p^0}{w_1(p^0-p)}}

यह विलेय के मोलर द्रव्यमान का व्यंजक है।

अथवा

वाष्प दाब में. अवनमन का कारण समझाइए । किसी ताप पर शुद्ध विलायक का वाष्प दाब 0.745 bar है। 0.5 g अवाष्पशील विद्युत-अनपघट्य ठोस को 39.0g विलायक (मोलर द्रव्यमान 78 g mol-1) में घोला गया। प्राप्त विलयन का वाष्प दाब 0.740 bar है। ठोस का मोलर द्रव्यमान ज्ञात कीजिए ।
Ans.
जब किसी शुद्ध विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाया जाता है तो विलायक की सतह पर विलायक के अणुओं की संख्या कम हो जाती है। फलतः वाष्प अवस्था में जाने वाले विलायक अणुओं की संख्या कम हो जाती है और वाष्प दाब घट जाता है। इसे वाष्प दाब में अवनमन कहते हैं।

दिया है—p0=0.745 barp^0=0.745\,barp=0.740 barp=0.740\,barw2=0.5gw_2=0.5gw1=39.0gw_1=39.0gM1=78g mol−1M_1=78g\,mol^{-1}

राउल्ट के नियम से—p0−pp0=w2M1M2w1\frac{p^0-p}{p^0} = \frac{w_2M_1}{M_2w_1}

अतः—M2=w2M1p0w1(p0−p)M_2= \frac{w_2M_1p^0}{w_1(p^0-p)}M2=0.5×78×0.74539.0×(0.745−0.740)M_2= \frac{0.5\times78\times0.745} {39.0\times(0.745-0.740)}M2=29.0550.195M_2= \frac{29.055}{0.195}M2≈149 g mol−1\boxed{M_2\approx149\,g\,mol^{-1}}

(ख) ऐल्डिहाइड के विरचन की पाँच विधियों की अभिक्रियाओं का रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.

1. प्राथमिक ऐल्कोहॉल का ऑक्सीकरण

RCH2OH+[O]→RCHO+H2ORCH_2OH+[O]\rightarrow RCHO+H_2O

2. रोज़ेनमुंड अपचयन

RCOCl+H2→Pd/BaSO4RCHO+HClRCOCl+H_2 \xrightarrow{Pd/BaSO_4} RCHO+HCl

3. स्टीफेन विधि

RCN→SnCl2/HClRCH=NH⋅HClRCN\xrightarrow{SnCl_2/HCl}RCH=NH\cdot HClRCH=NH⋅HCl+H2O→RCHO+NH4ClRCH=NH\cdot HCl+H_2O\rightarrow RCHO+NH_4Cl

4. गाटरमान-कोख अभिक्रिया

C6H6+CO+HCl→AlCl3/CuClC6H5CHOC_6H_6+CO+HCl \xrightarrow{AlCl_3/CuCl} C_6H_5CHO

5. ऐल्कीन का ओजोनी अपघटन

RCH=CHR′→O3/Zn,H2ORCHO+R′CHORCH=CHR’ \xrightarrow{O_3/Zn,H_2O} RCHO+R’CHO

अथवा

ऐल्डिहाइड तथा कीटोन में नाभिकरागी योगज अभिक्रिया की क्रियाविधि एक उदाहरण द्वारा समझाइए । ऐल्डोल संघनन तथा क्रॉस ऐल्डोल संघनन की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.
ऐल्डिहाइड और कीटोन में C=OC=O समूह ध्रुवीय होता है। ऑक्सीजन पर आंशिक ऋणात्मक तथा कार्बन पर आंशिक धनात्मक आवेश होता है। इसलिए नाभिकरागी कार्बन पर आक्रमण करता है।

सामान्य अभिक्रिया—R2C=O+Nu−→R2C(O−)NuR_2C=O+Nu^- \rightarrow R_2C(O^-)Nu

उदाहरण—CH3CHO+HCN→CH3CH(OH)CNCH_3CHO+HCN \rightarrow CH_3CH(OH)CN

इसे सायनोहाइड्रिन निर्माण कहते हैं।

ऐल्डोल संघनन

एसीटैल्डिहाइड तनु NaOH की उपस्थिति में ऐल्डोल देता है—2CH3CHO→dil.NaOHCH3CH(OH)CH2CHO2CH_3CHO \xrightarrow{dil.NaOH} CH_3CH(OH)CH_2CHO

गर्म करने पर—CH3CH(OH)CH2CHO→CH3CH=CHCHO+H2OCH_3CH(OH)CH_2CHO \rightarrow CH_3CH=CHCHO+H_2O

क्रॉस ऐल्डोल संघनन

दो भिन्न ऐल्डिहाइड/कीटोन के बीच होने वाले ऐल्डोल संघनन को क्रॉस ऐल्डोल संघनन कहते हैं।

उदाहरण—C6H5CHO+CH3CHO→dil.NaOHC6H5CH(OH)CH2CHOC_6H_5CHO+CH_3CHO \xrightarrow{dil.NaOH} C_6H_5CH(OH)CH_2CHO

7. (क) ऐरिलऐमीन की अनुनादी संरचना लिखिए। ऐरिलऐमीन क्षारकीय गुणों को क्यों प्रदर्शित करते हैं ? नाइट्रो तथा नाइट्राइल यौगिकों से ऐमीन के विरचन की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.
ऐरिलऐमीन की अनुनादी संरचना

ऐनिलीन में नाइट्रोजन का एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म बेंजीन वलय के साथ अनुनाद करता है।C6H5NH2↔ortho/para आवेश-वियुक्त अनुनादी संरचनाएँC_6H_5NH_2 \leftrightarrow \text{ortho/para आवेश-वियुक्त अनुनादी संरचनाएँ}

नाइट्रोजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म के वलय में विस्थापित होने से oo– तथा pp-स्थानों पर इलेक्ट्रॉन घनत्व बढ़ता है।

ऐरिलऐमीन क्षारकीय क्यों हैं?

नाइट्रोजन पर उपस्थित एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म H+H^+ को ग्रहण कर सकता है—C6H5NH2+H+→C6H5NH3+C_6H_5NH_2+H^+ \rightarrow C_6H_5NH_3^+

इसलिए ऐरिलऐमीन क्षारकीय गुण प्रदर्शित करते हैं। हालांकि अनुनाद के कारण ऐनिलीन की क्षारकीयता ऐल्किल ऐमीनों की अपेक्षा कम होती है।

नाइट्रो यौगिक से ऐमीन

नाइट्रो यौगिक का अपचयन—RNO2+6[H]→Sn/HClRNH2+2H2ORNO_2+6[H] \xrightarrow{Sn/HCl} RNH_2+2H_2O

उदाहरण—C6H5NO2+6[H]→C6H5NH2+2H2OC_6H_5NO_2+6[H] \rightarrow C_6H_5NH_2+2H_2O

नाइट्राइल से ऐमीन

RCN+4[H]→LiAlH4RCH2NH2RCN+4[H] \xrightarrow{LiAlH_4} RCH_2NH_2

उदाहरण—C6H5CN+4[H]→C6H5CH2NH2C_6H_5CN+4[H] \rightarrow C_6H_5CH_2NH_2

अथवा

निम्नलिखित का रासायनिक समीकरण लिखिए :

(i) गैब्रिएल थैलिमाइड संश्लेषण
Ans.
पहले पोटैशियम थैलिमाइड बनाया जाता है—C6H4(CO)2NH+KOH→C6H4(CO)2NK+H2OC_6H_4(CO)_2NH+KOH \rightarrow C_6H_4(CO)_2NK+H_2O

फिर ऐल्किल हैलाइड से—C6H4(CO)2NK+RX→C6H4(CO)2NR+KXC_6H_4(CO)_2NK+RX \rightarrow C_6H_4(CO)_2NR+KX

जल अपघटन से प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है—C6H4(CO)2NR→H2ORNH2C_6H_4(CO)_2NR \xrightarrow{H_2O} RNH_2

(ii) हॉफमान ब्रोमामाइड अभिक्रिया
Ans.
अमाइड को Br2/KOHBr_2/KOH से गर्म करने पर एक कार्बन कम वाला प्राथमिक ऐमीन प्राप्त होता है।RCONH2+Br2+4KOH→RNH2+K2CO3+2KBr+2H2ORCONH_2+Br_2+4KOH \rightarrow RNH_2+K_2CO_3+2KBr+2H_2O

उदाहरण—CH3CONH2→Br2/KOHCH3NH2CH_3CONH_2 \xrightarrow{Br_2/KOH} CH_3NH_2

(iii) कार्बिलऐमीन अभिक्रिया
Ans.
प्राथमिक ऐमीन, क्लोरोफॉर्म तथा alcoholic KOH के साथ अभिक्रिया करके दुर्गन्धयुक्त आइसोसाइनाइड बनाता है।RNH2+CHCl3+3KOH→RNC+3KCl+3H2ORNH_2+CHCl_3+3KOH \rightarrow RNC+3KCl+3H_2O

उदाहरण—C6H5NH2+CHCl3+3KOH→C6H5NC+3KCl+3H2OC_6H_5NH_2+CHCl_3+3KOH \rightarrow C_6H_5NC+3KCl+3H_2O

(iv) बेन्ज़ीनडाइऐज़ोनियम क्लोराइड की फ़ीनॉल तथा ऐनिलीन के साथ युग्मन अभिक्रिया
Ans.
फीनॉल के साथ

C6H5N2+Cl−+C6H5OH→p–HO−C6H4−N=N−C6H5+HClC_6H_5N_2^+Cl^-+C_6H_5OH \rightarrow p\text{-}HO-C_6H_4-N=N-C_6H_5+HCl

उत्पाद p-हाइड्रॉक्सीएजोबेन्जीन होता है।

ऐनिलीन के साथ

C6H5N2+Cl−+C6H5NH2→p–H2NC6H4−N=N−C6H5+HClC_6H_5N_2^+Cl^-+C_6H_5NH_2 \rightarrow p\text{-}H_2NC_6H_4-N=N-C_6H_5+HCl

उत्पाद p-अमीनोएजोबेन्जीन होता है।

(ख) न्यूक्लीक अम्ल की संरचना और इनके जैविक कार्य की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
न्यूक्लीक अम्ल मुख्यतः दो प्रकार के होते हैं—

  1. DNA — डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल
  2. RNA — राइबोन्यूक्लिक अम्ल

न्यूक्लीक अम्ल की मूल इकाई न्यूक्लियोटाइड है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड तीन भागों से बना होता है—

नाइट्रोजनी क्षार + पेन्टोज शर्करा + फॉस्फेट समूह

DNA में शर्करा डीऑक्सीराइबोज होती है तथा RNA में राइबोज।

DNA में एडेनिन, ग्वानिन, साइटोसिन तथा थाइमिन पाए जाते हैं। RNA में थाइमिन के स्थान पर यूरेसिल पाया जाता है।

DNA की संरचना द्विकुंडलित होती है। इसमें A, T के साथ तथा G, C के साथ हाइड्रोजन बन्ध बनाता है।

जैविक कार्य

  • DNA आनुवंशिक सूचना का भंडारण करता है।
  • DNA आनुवंशिक सूचना को अगली पीढ़ी तक पहुँचाता है।
  • RNA प्रोटीन संश्लेषण में सहायता करता है।
  • mRNA आनुवंशिक संदेश को राइबोसोम तक पहुँचाता है।
  • tRNA अमीनो अम्लों को राइबोसोम तक लाता है।
  • rRNA राइबोसोम की संरचना एवं कार्य में भाग लेता है।

अथवा

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए :

(i) विटामिन
Ans.
विटामिन ऐसे कार्बनिक यौगिक हैं जो शरीर के सामान्य वृद्धि, विकास एवं उपापचय के लिए अल्प मात्रा में आवश्यक होते हैं। शरीर सामान्यतः इन्हें पर्याप्त मात्रा में नहीं बना सकता, इसलिए इन्हें भोजन से प्राप्त करना पड़ता है।

विटामिन दो प्रकार के होते हैं—

1. वसा में घुलनशील: A, D, E तथा K
2. जल में घुलनशील: B-समूह तथा C

उदाहरण के लिए विटामिन A दृष्टि के लिए, विटामिन D हड्डियों के विकास के लिए तथा विटामिन C शरीर के ऊतकों के लिए महत्वपूर्ण है।

(ii) हॉर्मोन
Ans
. हॉर्मोन शरीर की अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। ये रक्त के माध्यम से लक्ष्य अंगों तक पहुँचकर विभिन्न जैविक क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।

उदाहरण—

  • इंसुलिन — रक्त में ग्लूकोज की मात्रा नियंत्रित करता है।
  • थायरॉक्सिन — उपापचय को नियंत्रित करता है।
  • एड्रेनालिन — आपातकालीन परिस्थितियों में शरीर की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करता है।
  • वृद्धि हॉर्मोन — शरीर की वृद्धि में सहायक होता है।

इस प्रकार हॉर्मोन शरीर की वृद्धि, उपापचय, प्रजनन तथा अन्य शारीरिक क्रियाओं के नियमन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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