U.P Board Class 12 Economics 329(FE) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
अर्थशास्त्र
समयः तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांकः 100
नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
निर्देश :
(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
(iii) प्रश्न संख्या 1 से 10 तक बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जिनका केवल सही उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखना है। प्रश्न संख्या 11 से 18 तक अति लघु-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 50 शब्दों में, प्रश्न संख्या 19 से 24 तक लघु-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येके लगभग 150 शब्दों में तथा प्रश्न संख्या 25 से 27 तक विस्तृत-उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनका उत्तर प्रत्येक लगभग 300 शब्दों में दीजिए ।
(iv) प्रत्येक प्रश्न के लिए निर्धारित अंक उनके सामने दिए गए हैं।
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
निम्नलिखित प्रश्नों के सही उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
1. निम्नलिखित दो कथनों के सन्दर्भ में सही विकल्प चुनिए :
कथन 1: देश में कीमतें बढ़ने पर निजी विद्यालयों में फीस बढ़ती हैं।
कथन II : विद्यालयों में फीस बढ़ना अन्यायपूर्ण है।
(अ) कथन I और कथन II, दोनों धनात्मक अर्थशास्त्र के कथन हैं।
(ब) कथन 1 और कथन II, दोनों आदर्शक अर्थशास्त्र के कथन हैं।
(स) कथन 1 धनात्मक अर्थशास्त्र का कथन और कथना, आदर्शक अर्थशास्त्र का कथन है।
(द) कथन 1 आदर्शक अर्थशास्त्र का कथन और कर्थन II, धनात्मक अर्थशास्त्र का कथन है।
Ans. (स) कथन 1 धनात्मक अर्थशास्त्र का कथन और कथना, आदर्शक अर्थशास्त्र का कथन है।
2. उपयोगिता की उस मात्रा को सीमान्त उपयोगिता कहते हैं, जो उपभोग की ………. प्राप्त होती है।
(अ) मर्वप्रथम इकाई में
(ब) भभी इकाइयों के योग से
(स) एक अतिरिक्त इकाई में
(द) मध्यवर्ती इकाई से
Ans. (स) एक अतिरिक्त इकाई में
3. उत्पादन के सन्दर्भ में, अल्पकाल वह परिस्थिति है, जिसमें :
(अ) उत्पादन के सभी साधनों को बदला जा सकता है
( ब) उत्पादन के सभी साधनों को बदला नहीं जा सकता है
(स) (अ) और (ब) दोनों सही हैं
(द) (अ) और (ब) दोनों ग़लत हैं
Ans. ( ब) उत्पादन के सभी साधनों को बदला नहीं जा सकता है
4. सामान्यतः किसी फर्म का अल्पकालीन पूर्ति वक्र होता है :
(अ) U आकार का
(ब) क्षैनिज रेखा के आकार का
(स) ऊर्ध्व रेखा के आकार का
(द) (∩) आकार का
Ans. (अ) U आकार का
5. किसी योजनाबद्ध अर्थव्यवस्था में, उत्पादन तथा वितरण सम्बन्धी निर्णय लिए जाते हैं :
(अ) सरकार द्वारा
(ब) बाज़ार द्वारा
(स) निगम-क्षेत्र द्वारा
(द) कीमत-तन्त्र द्वारा
Ans. (अ) सरकार द्वारा
6. सरकारी बजट में. ‘हस्तान्तरण भुगतान’ वह भुगतान हैं जो सरकार करती है:
(अ) कर्मचारियों के स्थानान्तरण पर
(ब) किसी वस्तु या सेवा के क्रय पर
(स) बिना किसी वस्तु या सेवा प्राप्त किए
(द) भूमि-सम्पत्ति के क्रय पर
Ans. (स) बिना किसी वस्तु या सेवा प्राप्त किए
7. भारत सरकार से करेन्सी नोट के विमुद्रीकरण (नोटबन्दी) की सिफारिश कौन करता है ?
(अ) विश्व बैंक
(ब) अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष
(स) स्टेट बैंक ऑफ इण्डिया
(द) भारतीय रिज़र्व बैंक
Ans. (द) भारतीय रिज़र्व बैंक
8. किसी अर्थव्यवस्था का, पूर्ण-रोजगार आय स्तर राष्ट्रीय आय का बह स्तर है जहाँ :
(अ) सभी श्रमिकों को पूर्ण-रोजगार प्राप्त हो
(ब) उत्पादन के सभी साधनों को पूर्ण-रोजगार प्राप्त हो
(स) अर्थव्यवस्था की सालाना आय 5 ट्रिलियन डॉलर हो
(द) सभी नागरिकों को पर्याप्त आय प्राप्त है।
Ans. (ब) उत्पादन के सभी साधनों को पूर्ण-रोजगार प्राप्त हो
9. उपभोग की ओसत प्रवृत्ति (ए.पी.सी) की मां है:
(अ) C/Y
(ब) ∆C/∆Y
(स) S/Y
(द) ∆S/∆Y
Ans. (अ) C/Y
10. निम्नलिखित में में कौन-सा प्रत्यक्ष कर माना जाता है ?
(अ) कस्टम ड्यूटी
(ब) टोल टैक्स
(म) वस्तु एवं सेवा कर
(द) निगम कर
Ans. (द) निगम कर
(अति लघु-उत्तरीय, प्रश्न)
11. व्यष्टि अर्थशास्त्र का अर्थ स्पष्ट कीजिए ।
Ans. व्यष्टि अर्थशास्त्र अर्थशास्त्र की वह शाखा है जिसमें अर्थव्यवस्था की व्यक्तिगत इकाइयों का अध्ययन किया जाता है। इसमें उपभोक्ता, उत्पादक, फर्म, किसी वस्तु की कीमत, माँग, पूर्ति, उत्पादन तथा बाजार आदि का अध्ययन किया जाता है। इसे सूक्ष्म अर्थशास्त्र (Micro Economics) भी कहते हैं।

13. सामान्य वस्तुओं एवं निम्न-स्तरीय वस्तुओं में भेद कीजिए ।
Ans.
| आधार | सामान्य वस्तु | निम्न-स्तरीय वस्तु |
|---|---|---|
| आय में वृद्धि | माँग बढ़ती है | माँग घटती है |
| आय प्रभाव | धनात्मक | ऋणात्मक |
| माँग की आय लोच | धनात्मक | ऋणात्मक |
| उदाहरण | फल, दूध आदि | मोटे अनाज आदि |
14. हासमान सीमान्त उत्पादकता का नियम लिखिए ।
Ans. अन्य उत्पादन साधनों को स्थिर रखते हुए जब किसी परिवर्तनशील साधन की इकाइयाँ बढ़ाई जाती हैं, तो एक निश्चित बिंदु के बाद प्रत्येक अतिरिक्त इकाई से प्राप्त सीमान्त उत्पाद घटने लगता है। इसे हासमान सीमान्त उत्पादकता का नियम कहते हैं।
15. बाज़ार अर्थव्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ लिखिए ।
Ans. बाजार अर्थव्यवस्था की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- निजी स्वामित्व का होना।
- उत्पादन एवं उपभोग की स्वतंत्रता।
- कीमत-तंत्र की महत्वपूर्ण भूमिका।
- लाभ कमाना प्रमुख उद्देश्य।
- उत्पादकों के बीच प्रतिस्पर्धा।
- माँग और पूर्ति द्वारा कीमतों का निर्धारण।
16. ‘साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद’ से आप क्या समझते हैं ?
Ans. साधन लागत पर सकल घरेलू उत्पाद से आशय एक देश की घरेलू सीमा के भीतर एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के साधन लागत पर मौद्रिक मूल्य से है। इसे बाजार कीमत पर GDP में से शुद्ध अप्रत्यक्ष कर घटाकर प्राप्त किया जा सकता है।
सूत्र:
GDP at FC = GDP at MP − शुद्ध अप्रत्यक्ष कर
17. ‘मितव्ययिता के विरोधाभास’ का क्या अर्थ है ?
Ans. मितव्ययिता का विरोधाभास वह स्थिति है जिसमें व्यक्ति द्वारा अधिक बचत करने का प्रयास अर्थव्यवस्था में कुल माँग और आय को कम कर देता है। परिणामस्वरूप कुल बचत में अपेक्षित वृद्धि नहीं होती, बल्कि कभी-कभी बचत का स्तर पहले जैसा ही रह सकता है। इसे मितव्ययिता का विरोधाभास कहते हैं।
18. विदेशी मुद्रा बाज़ार में, मुद्रा के अवमूल्यन और अधिमूल्यन का अर्थ स्पष्ट कीजिए ।
Ans. अवमूल्यन (Devaluation): सरकार द्वारा विदेशी मुद्राओं की तुलना में घरेलू मुद्रा के आधिकारिक मूल्य को कम करना अवमूल्यन कहलाता है।
अधिमूल्यन (Revaluation): सरकार द्वारा विदेशी मुद्राओं की तुलना में घरेलू मुद्रा के आधिकारिक मूल्य को बढ़ाना अधिमूल्यन कहलाता है।
(लघु-उत्तरीय प्रश्न)

20. ‘कुल स्थिर लागत’, ‘कुल परिवर्ती लागत’ तथा ‘कुल लागत’ की अवधारणाओं को समझाइए ।
Ans. उत्पादन प्रक्रिया में फर्म को विभिन्न प्रकार की लागतों का वहन करना पड़ता है। लागत के प्रमुख प्रकार निम्नलिखित हैं—
1. कुल स्थिर लागत (Total Fixed Cost—TFC):
वह लागत जो उत्पादन की मात्रा में परिवर्तन होने पर भी स्थिर रहती है, कुल स्थिर लागत कहलाती है। उत्पादन शून्य होने पर भी यह लागत देनी पड़ती है। जैसे—भवन का किराया, मशीनों का बीमा आदि।
2. कुल परिवर्ती लागत (Total Variable Cost—TVC):
वह लागत जो उत्पादन की मात्रा के साथ बदलती है, कुल परिवर्ती लागत कहलाती है। उत्पादन बढ़ने पर यह लागत बढ़ती है और उत्पादन घटने पर घटती है। जैसे—कच्चे माल, बिजली, ईंधन आदि की लागत।
3. कुल लागत (Total Cost—TC):
कुल स्थिर लागत तथा कुल परिवर्ती लागत के योग को कुल लागत कहते हैं।
सूत्र:
TC = TFC + TVC
अतः कुल लागत उत्पादन की किसी मात्रा पर फर्म द्वारा की गई कुल लागत को प्रदर्शित करती है।
21. ‘पूर्ण प्रतिम्यधीं बाज़ार’ की विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
Ans. पूर्ण प्रतियोगिता वह बाजार है जिसमें बहुत बड़ी संख्या में क्रेता एवं विक्रेता होते हैं तथा सभी विक्रेताओं द्वारा समरूप वस्तु का उत्पादन एवं विक्रय किया जाता है। इस बाजार में किसी एक फर्म का वस्तु की कीमत पर नियंत्रण नहीं होता। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—
- क्रेताओं एवं विक्रेताओं की अधिक संख्या — बाजार में क्रेता और विक्रेता इतने अधिक होते हैं कि कोई एक क्रेता या विक्रेता कीमत को प्रभावित नहीं कर सकता।
- समरूप वस्तु — सभी फर्में समान गुण, आकार और गुणवत्ता वाली वस्तु का उत्पादन करती हैं।
- कीमत की एकरूपता — बाजार में एक ही वस्तु की एक ही कीमत प्रचलित होती है।
- फर्म का कीमत स्वीकारक होना — प्रत्येक फर्म बाजार द्वारा निर्धारित कीमत को स्वीकार करती है। इसलिए फर्म को कीमत स्वीकारक (Price Taker) कहा जाता है।
- प्रवेश एवं निकास की स्वतंत्रता — नई फर्में बाजार में आसानी से प्रवेश कर सकती हैं और पुरानी फर्में बाजार से बाहर जा सकती हैं।
- पूर्ण जानकारी — क्रेताओं और विक्रेताओं को वस्तु की कीमत तथा बाजार की परिस्थितियों की पूर्ण जानकारी होती है।
- साधनों की पूर्ण गतिशीलता — उत्पादन के साधन एक उद्योग से दूसरे उद्योग में आसानी से स्थानांतरित हो सकते हैं।
- विक्रय लागत का अभाव — वस्तु समरूप होने के कारण विज्ञापन आदि पर विशेष व्यय करने की आवश्यकता नहीं होती।
निष्कर्ष:
इस प्रकार पूर्ण प्रतियोगिता बाजार में अधिक क्रेता-विक्रेता, समरूप वस्तु, स्वतंत्र प्रवेश-निकास तथा पूर्ण बाजार-ज्ञान जैसी विशेषताएँ पाई जाती हैं।
22. ‘आय के वर्तुल प्रवाह’ को चित्र द्वारा दर्शाइए ।
Ans.

23. ‘राजस्व घाटा, ‘राजकोषीय घाटा’ तथा ‘प्राथमिक घाटा’ की अवधारणाओं को समझाइए ।
Ans. 1. राजस्व घाटा (Revenue Deficit):
जब सरकार की कुल राजस्व प्राप्तियाँ उसकी कुल राजस्व व्यय से कम होती हैं, तो इस अन्तर को राजस्व घाटा कहते हैं।
सूत्र:
राजस्व घाटा = राजस्व व्यय − राजस्व प्राप्तियाँ
2. राजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit):
जब सरकार की कुल व्यय और कुल प्राप्तियों (उधार को छोड़कर) के बीच का अन्तर धनात्मक होता है, तो उसे राजकोषीय घाटा कहते हैं। यह सरकार की कुल उधारी की आवश्यकता को दर्शाता है।
सूत्र:
राजकोषीय घाटा = कुल व्यय − (कुल प्राप्तियाँ − उधार)
3. प्राथमिक घाटा (Primary Deficit):
राजकोषीय घाटे में से ब्याज भुगतान को घटाने पर जो राशि बचती है, उसे प्राथमिक घाटा कहते हैं।
सूत्र:
प्राथमिक घाटा = राजकोषीय घाटा − ब्याज भुगतान
निष्कर्ष: ये तीनों घाटे सरकार की वित्तीय स्थिति तथा सरकारी व्यय और आय के बीच असन्तुलन को समझने के महत्वपूर्ण मापदण्ड हैं।
24. भुगतान सन्तुलन से आप क्या समझते हैं ? इससे सम्बन्धित चालू खाते और पूँजी खाते की मुख्य मदें लिखिए।
Ans. भुगतान सन्तुलन (Balance of Payments) से आशय किसी देश के निवासियों और विदेशों के निवासियों के बीच एक निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में हुए सभी आर्थिक लेन-देन का व्यवस्थित लेखा-जोखा है। इसमें देश के विदेशी व्यापार, सेवाओं, आय तथा पूँजी से सम्बन्धित लेन-देन दर्ज किए जाते हैं।
भुगतान सन्तुलन के दो प्रमुख खाते हैं—
1. चालू खाता (Current Account) की मुख्य मदें—
- वस्तुओं का आयात एवं निर्यात।
- सेवाओं का आयात एवं निर्यात।
- विदेशों से प्राप्त तथा विदेशों को किए गए आय भुगतान।
- विदेशों से प्राप्त एवं विदेशों को दिए गए हस्तान्तरण भुगतान।
2. पूँजी खाता (Capital Account) की मुख्य मदें—
- विदेशी ऋण एवं उधार।
- विदेशी निवेश तथा देश से बाहर किया गया निवेश।
- बैंकिंग पूँजी एवं अन्य पूँजीगत लेन-देन।
- विदेशी परिसम्पत्तियों एवं देनदारियों में परिवर्तन।
निष्कर्ष: इस प्रकार चालू खाता मुख्यतः वस्तुओं, सेवाओं और आय के लेन-देन को तथा पूँजी खाता पूँजी के आवागमन से सम्बन्धित लेन-देन को दर्शाता है।