U.P Board Class 12 General Hindi 302(HH) Question Paper 2025

U.P Board Class 12 General Hindi 302(HH) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2025
सामान्य हिंदी
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 70

नोट :

(1) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

(ii) इस प्रश्न-पत्र में दो खण्ड हैं। दोनों खण्डों के सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।

खण्ड ‘क’

1. (क) निम्नलिखित में से कौन सी रचना हिन्दी गद्य की प्रारम्भिक रचनाओं में गिनी जाती है ?

(A) गोरखबानी
(B) चर्यापद
(C) उक्ति व्यक्ति प्रकरण
(D) सत्यवती कथा

Ans. (C) उक्ति व्यक्ति प्रकरण

(ख) ‘हिन्दी प्रदीप’ नामक मासिक पत्र किस साहित्यकार द्वारा निकाला जाता था ?

(A) प्रतापनारायण मिश्र
(B) बालकृष्ण भट्ट
(C) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
(D) महावीरप्रसाद द्विवेदी

Ans. (B) बालकृष्ण भट्ट

(ग) ‘कलम का सिपाही’ के लेखक हैं –

(A) प्रेमचन्द
(B) रामवृक्ष बेनीपुरी
(C) अमृतराय
(D) रामविलास शर्मा

Ans. (C) अमृतराय

(घ) ‘शेखर : एक जीवनी’ रचना की विधा है –

(A) कहानी
(B) बालकृष्ण भट्ट
(C) भारतेन्दु हरिश्चंद्र
(D) महावीरप्रसाद द्विवेदी

Ans. (B) बालकृष्ण भट्ट

(ङ) निम्नलिखित में से ललित निबन्धकार हैं :

(A) रामचन्द्र शुक्ल
(B) सरदार पूर्ण सिंह
(C) कुबेरनाथ राय
(D) श्यामसुंदर दास

Ans. (C) कुबेरनाथ राय

2. (क) ‘प्रगतिशील लेखक संघ’ की स्थापना कब हुई ?

(A) 1943 ई.
(B) 1936 ई.
(C) 1954 ई.
(D) 1963 ई.

Ans. (B) 1936 ई.

(ख) महादेवी वर्मा की रचना है –

(A) धूप के धान
(B) पल्लव
(C) सांध्यगीत
(D) उर्वशी

Ans. (C) सांध्यगीत

(ग) ‘अष्टछाप’ के कवि नहीं हैं

(A) नन्ददास
(B) छीतस्वामी
(C) भिखारीदास
(D) सूरदास

Ans. (C) भिखारीदास

(घ) ‘तार सप्तक’ के प्रवर्तक हैं

(A) निराला
(B) दिनकर
(C) पन्त
(D) अज्ञेय

Ans. (D) अज्ञेय

(ङ) सूफी काव्यधारा के कवि हैं –

(A) रसखान
(B) रहीम
(C) जायसी
(D) नानक

Ans. (C) जायसी

3. दिये गये गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

मातृभूमि पर निवास करने वाले मनुष्य राष्ट्र का दूसरा अंग हैं। पृथ्वी हो और मनुष्य न हों, तो राष्ट्र की कल्पना असंभव है। पृथ्वी और जन दोनों के सम्मिलन से ही राष्ट्र का स्वरूप संपादित होता है। जन के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है। पृथ्वी माता है और जन सच्चे अर्थों में पृथ्वी का पुत्र है।

(i) पाठ का शीर्षक और लेखक का नाम लिखिए।
Ans.
पाठ का शीर्षक ‘राष्ट्र का स्वरूप’ तथा लेखक का नाम वासुदेवशरण अग्रवाल है।

(ii) राष्ट्र की कल्पना कब असंभव है ?
Ans.
जब पृथ्वी पर मनुष्य न हों, तब राष्ट्र की कल्पना असंभव है।

(iii) पृथ्वी और जन दोनों मिलकर क्या करते हैं ?
Ans.
पृथ्वी और जन दोनों के सम्मिलन से राष्ट्र का स्वरूप निर्मित होता है।

(iv) पृथ्वी कब मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है ?
Ans.
जन के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि की संज्ञा प्राप्त करती है।

(v) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans.
पृथ्वी को माता और उस पर निवास करने वाले मनुष्यों को उसकी संतान कहा गया है। मनुष्य के रहने और उससे भावनात्मक सम्बन्ध स्थापित होने के कारण ही पृथ्वी मातृभूमि कहलाती है। मनुष्य अपनी मातृभूमि से प्रेम करता है और उसकी रक्षा करना अपना कर्तव्य समझता है।

अथवा

नये शब्द, नये मुहावरे एवं नयी रीतियों के प्रयोगों से युक्त भाषा को व्यावहारिकता प्रदान करना ही भाषा में आधुनिकता लाना है। दूसरे शब्दों में केवल आधुनिक युगीन विचारधाराओं के अनुरूप नये शब्दों के गढ़ने मात्र से ही भाषा का विकास नहीं होता, बरन नये पारिभाषिक शब्दों एवं नूतन शैली प्रणालियों को व्यवहार में लाना ही भाषा को आधुनिकता प्रदान करना है।

(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
Ans.
प्रस्तुत गद्यांश हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक के भाषा-विकास एवं आधुनिकता से सम्बन्धित पाठ से लिया गया है। इसमें लेखक ने भाषा को आधुनिक बनाने के उपाय बताए हैं।

(ii) रेखांकित अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans.
लेखक के अनुसार भाषा का विकास केवल नये शब्द बनाने से नहीं होता, बल्कि उन शब्दों, मुहावरों और नयी अभिव्यक्ति शैलियों को दैनिक व्यवहार में अपनाने से होता है। भाषा तभी आधुनिक बनती है, जब उसका प्रयोग समय और समाज की आवश्यकताओं के अनुसार किया जाए।

(iii) भाषा में आधुनिकता कैसे लायी जा सकती है ?
Ans.
नये शब्दों, मुहावरों, पारिभाषिक शब्दावली तथा नवीन शैली प्रणालियों को व्यवहार में लाने से भाषा में आधुनिकता लाई जा सकती है।

(iv) किसके गढ़ने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता है ?
Ans.
आधुनिक युग की विचारधाराओं के अनुरूप नये शब्द गढ़ने मात्र से भाषा का विकास नहीं होता है।

(v) इस गद्यांश के माध्यम से लेखक ने किन बिन्दुओं पर प्रकाश डाला है ?
Ans.
लेखक ने भाषा की आधुनिकता, नये शब्दों के प्रयोग, पारिभाषिक शब्दावली, मुहावरों तथा नवीन अभिव्यक्ति शैलियों के व्यावहारिक महत्त्व पर प्रकाश डाला है।

4. दिये गये पद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

तुम मांसहीन, तुम रक्तहीन
हे अस्थिशेष ! तुम अस्थिहीन,
तुम शुद्ध बुद्ध आत्मा केवल,
हे चिर पुराण ! हे चिर नवीन !

तुम पूर्ण इकाई जीवन की
जिसमें असार भव-शून्य लीन,
आधार अमर, होगी जिस पर
भावी की संस्कृति समासीन।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
Ans.
प्रस्तुत पद्यांश हमारी हिन्दी पाठ्यपुस्तक में संकलित रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘बापू’ से सम्बन्धित है। इसमें कवि ने गांधीजी के व्यक्तित्व एवं महानता का वर्णन किया है।

(ii) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans.
कवि गांधीजी को शरीर से अत्यन्त दुर्बल, किन्तु आत्मा से महान बताते हैं। वे शुद्ध विचारों और आत्मिक शक्ति के प्रतीक हैं। उनका व्यक्तित्व प्राचीन भारतीय संस्कृति के आदर्शों को अपनाने वाला तथा नवीन युग को दिशा देने वाला है।

(iii) प्रस्तुत पद्यांश में कवि का आशय क्या है ?
Ans.
कवि का आशय है कि गांधीजी का महत्त्व उनके शारीरिक बल में नहीं, बल्कि उनकी आत्मिक शक्ति, सत्य, अहिंसा और महान विचारों में निहित है।

(iv) कौन अस्थियों का ढाँचा प्रतीत होता है ?
Ans.
महात्मा गांधी अस्थियों का ढाँचा प्रतीत होते हैं।

(v) गांधीजी का जीवन किसका आधार है ?
Ans.
गांधीजी का जीवन भावी संस्कृति का आधार है।

अथवा

समर्पण लो सेवा का सार
सजल संस्कृति का यह पतवार;
आज से यह जीवन उत्सर्ग
इसी पदतल में विगत विकार।
बनो संस्कृति के मूल रहस्य
तुम्हीं से फैलेगी वह बेल;
विश्वभर सौरभ से भर जाय
सुमन के खेलो सुन्दर खेल।

(i) उपर्युक्त पद्यांश का संदर्भ लिखिए।
Ans.
प्रस्तुत पद्यांश जयशंकर प्रसाद के प्रसिद्ध महाकाव्य ‘कामायनी’ के श्रद्धा सर्ग से सम्बन्धित है। इसमें श्रद्धा द्वारा मनु को सेवा, समर्पण और संस्कृति के विकास का संदेश दिया गया है।

(ii) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans.
श्रद्धा मनु को सेवा और समर्पण का महत्त्व समझाते हुए कहती है कि जीवन को श्रेष्ठ कार्यों के लिए समर्पित कर देना चाहिए। मनुष्य को अपने स्वार्थ और विकारों का त्याग करके मानवता तथा संस्कृति के विकास में योगदान देना चाहिए।

(iii) यह किन दो पात्रों का संवाद है ?
Ans.
यह श्रद्धा और मनु के बीच का संवाद है।

(iv) सृष्टि का क्रम कैसे बढ़ेगा ?
Ans.
प्रेम, सेवा, समर्पण तथा नारी-पुरुष के सहयोग से सृष्टि का क्रम आगे बढ़ेगा।

(v) ‘सजल संस्कृति’ का क्या अर्थ है ?
Ans.
सजल संस्कृति का अर्थ प्रेम, करुणा, संवेदना और मानवीय भावनाओं से परिपूर्ण संस्कृति है।

5. (क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उसकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)

(i) हजारीप्रसाद द्विवेदी
Ans.
आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के महान निबन्धकार, आलोचक एवं उपन्यासकार थे। उनका जन्म 1907 ई. में बलिया जिले के आरत दुबे का छपरा गाँव में हुआ था। उनकी भाषा सरल, प्रभावशाली एवं विद्वत्तापूर्ण थी। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – अशोक के फूल, कल्पलता, बाणभट्ट की आत्मकथा, चारुचन्द्रलेख तथा अनामदास का पोथा। हिन्दी साहित्य में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान है।

(ii) पं. दीनदयाल उपाध्याय
Ans.
पं. दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 1916 ई. में मथुरा जिले के नगला चन्द्रभान गाँव में हुआ था। वे महान विचारक, लेखक, पत्रकार एवं समाजसेवी थे। उन्होंने एकात्म मानववाद का सिद्धान्त प्रस्तुत किया। उनकी भाषा सरल, विचारपूर्ण एवं प्रभावशाली थी। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – राष्ट्र जीवन की दिशा, एकात्म मानववाद, भारतीय अर्थनीति तथा जगद्गुरु शंकराचार्य।

(iii) वासुदेवशरण अग्रवाल
Ans.
वासुदेवशरण अग्रवाल हिन्दी के प्रसिद्ध साहित्यकार, पुरातत्त्ववेत्ता एवं इतिहासकार थे। उनका जन्म 1904 ई. में उत्तर प्रदेश के मेरठ में हुआ था। उन्होंने भारतीय संस्कृति, इतिहास और पुरातत्त्व पर महत्त्वपूर्ण लेखन किया। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ, विद्वत्तापूर्ण एवं प्रभावशाली थी। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – पृथ्वीपुत्र, कल्पवृक्ष, भारत की मौलिक एकता, कला और संस्कृति तथा पाणिनिकालीन भारतवर्ष।

(ख) निम्नलिखित में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख कृतियों का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)

(i) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
Ans.
अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म 1865 ई. में आजमगढ़ जिले में हुआ था। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ खड़ी बोली है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – प्रियप्रवास, वैदेही वनवास, रसकलश तथा चुभते चौपदे। ‘प्रियप्रवास’ उनकी प्रसिद्ध रचना है।

(ii) जयशंकर प्रसाद
Ans.
जयशंकर प्रसाद हिन्दी साहित्य के छायावाद के प्रमुख स्तम्भों में से एक थे। उनका जन्म 1889 ई. में वाराणसी में हुआ था। वे कवि, नाटककार, कहानीकार एवं उपन्यासकार थे। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ एवं भावपूर्ण है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – कामायनी, आँसू, लहर, झरना, स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त और ध्रुवस्वामिनी।

(iii) सच्चिदानन्द हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’
Ans.
अज्ञेय आधुनिक हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि, उपन्यासकार एवं निबन्धकार थे। उनका जन्म 1911 ई. में हुआ था। वे प्रयोगवाद एवं नई कविता के प्रवर्तक माने जाते हैं। उनकी भाषा आधुनिक, प्रतीकात्मक एवं प्रभावशाली है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं – हरी घास पर क्षण भर, आँगन के पार द्वार, शेखर : एक जीवनी, नदी के द्वीप तथा असाध्य वीणा।

6. ‘खून का रिश्ता’ अथवा ‘पंचलाइट’ कहानी का सारांश अपने शब्दों में लिखिए। (अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)
Ans.
फणीश्वरनाथ रेणु की कहानी ‘पंचलाइट’ ग्रामीण जीवन पर आधारित है। गाँव की महतो टोली पंचलाइट खरीदकर लाती है, लेकिन उसे जलाना कोई नहीं जानता। गाँव के लोग परेशान हो जाते हैं। अंत में गोधन, जिसे पहले पंचायत ने दण्डित किया था, पंचलाइट जला देता है। इससे उसका सम्मान वापस मिल जाता है। कहानी में ग्रामीण जीवन, सामाजिक प्रतिष्ठा और मानवीय भावनाओं का सुन्दर चित्रण है।

‘खून का रिश्ता’ कहानी का सारांश

इस कहानी में पारिवारिक सम्बन्धों, रक्त के रिश्तों तथा मानवीय संवेदनाओं का चित्रण किया गया है। कहानी यह संदेश देती है कि सच्चे रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, त्याग और अपनत्व से मजबूत बनते हैं।

अथवा

‘बहादुर’ अथवा ‘लाटी’ कहानी के कथानक पर प्रकाश डालिए।
(अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)

Ans. अमरकान्त की कहानी ‘बहादुर’ में एक नेपाली बालक बहादुर की कहानी प्रस्तुत की गई है। वह एक परिवार में नौकर का काम करता है। परिवार के लोग उससे कठोर व्यवहार करते हैं, फिर भी वह ईमानदारी से काम करता है। परिवार के दुर्व्यवहार से दुखी होकर वह एक दिन घर छोड़कर चला जाता है। कहानी में मानवीय संवेदना और नौकरों के प्रति अच्छे व्यवहार का संदेश दिया गया है।

अथवा – ‘लाटी’ कहानी का कथानक

इस कहानी में ग्रामीण समाज की सामाजिक परिस्थितियों, मानवीय संवेदनाओं तथा एक युवती के जीवन से जुड़ी समस्याओं का चित्रण किया गया है। कहानी समाज की रूढ़ियों और मानवीय व्यवहार पर विचार करने की प्रेरणा देती है।

7. स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर किसी एक खण्ड के एक प्रश्न का उत्तर दीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)

(i) ‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य की कथावस्तु लिखिए।
Ans.
मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य में भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन का वर्णन किया गया है। इसमें महात्मा गांधी के नेतृत्व में सत्याग्रह, असहयोग आन्दोलन, नमक सत्याग्रह तथा भारत छोड़ो आन्दोलन का चित्रण है। इसमें देशभक्तों के त्याग, बलिदान और संघर्ष को दर्शाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय चेतना और देशप्रेम की भावना जगाना है।

अथवा

‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य के आधार पर गांधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans.
गांधीजी सत्य, अहिंसा और प्रेम के पुजारी थे। वे महान देशभक्त, समाज सुधारक और मानवतावादी थे। उन्होंने बिना हिंसा के अंग्रेजी शासन का विरोध किया। वे सत्याग्रह और आत्मबल में विश्वास रखते थे। उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन देश की स्वतंत्रता और मानव कल्याण के लिए समर्पित कर दिया।

(ii) ‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans.
रामधारी सिंह दिनकर के खण्डकाव्य ‘रश्मिरथी’ के नायक कर्ण हैं। वे दानवीर, वीर, पराक्रमी, स्वाभिमानी तथा मित्रता निभाने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने भगवान परशुराम से शिक्षा प्राप्त की। कर्ण ने दुर्योधन की मित्रता को जीवनभर निभाया। वे जानते हुए भी कि पाण्डव उनके भाई हैं, अपने वचन से पीछे नहीं हटे। उनका चरित्र त्याग और उदारता का प्रतीक है।

अथवा

‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य की कथावस्तु को संक्षेप में लिखिए।
Ans.
‘रश्मिरथी’ महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन पर आधारित खण्डकाव्य है। इसमें कर्ण के जन्म, शिक्षा, पराक्रम, दानशीलता, मित्रता और संघर्ष का वर्णन है। कवि ने सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाई है। अन्त में महाभारत के युद्ध में कर्ण वीरगति को प्राप्त होते हैं।

(iii) ‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Ans.
‘आलोकवृत्त’ के नायक में देशप्रेम, त्याग, साहस, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्शवाद जैसे गुण दिखाई देते हैं। वह समाज और राष्ट्र के हित को व्यक्तिगत स्वार्थ से ऊपर रखता है। वह कठिन परिस्थितियों में भी अपने सिद्धान्तों का पालन करता है।

अथवा

‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य की कथावस्तु को अपने शब्दों में वर्णित कीजिए।
Ans.
‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य में राष्ट्रीय चेतना, स्वतंत्रता, त्याग और संघर्ष की भावना का चित्रण किया गया है। इसमें नायक के जीवन के माध्यम से आदर्शों और कर्तव्यपालन का संदेश दिया गया है।

(iv) ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के आधार पर राज्यश्री का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans.
राज्यश्री त्यागपथी खण्डकाव्य की प्रमुख नारी पात्र है। वह साहसी, धैर्यवान, स्वाभिमानी और त्यागशील है। विपरीत परिस्थितियों में भी वह धैर्य नहीं खोती। उसमें आत्मसम्मान, कर्तव्यनिष्ठा तथा देशप्रेम की भावना विद्यमान है।

अथवा

‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के चतुर्थ सर्ग का कथानक लिखिए।
Ans.
चतुर्थ सर्ग में राज्यश्री के जीवन की कठिन परिस्थितियों और उसके संघर्ष का वर्णन है। इसमें उसके धैर्य, त्याग, साहस तथा आत्मसम्मान का परिचय मिलता है। यह सर्ग त्याग और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देता है।

(v) ‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य के आधार पर दशरथ का चरित्रांकन कीजिए।
Ans.
दशरथ अयोध्या के राजा तथा भगवान राम के पिता थे। वे वीर, पराक्रमी, दयालु और प्रजापालक राजा थे। वे अपने माता-पिता के प्रति श्रद्धा रखने वाले थे। श्रवणकुमार की मृत्यु का समाचार सुनकर वे अत्यन्त दुखी हुए। उन्होंने अपने अपराध को स्वीकार किया और श्रवण के माता-पिता के शाप को सहन किया।

अथवा

‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य के ‘संदेश सर्ग’ की कथावस्तु संक्षेप में वर्णित कीजिए।
Ans.
संदेश सर्ग में श्रवणकुमार अपने माता-पिता के प्रति प्रेम, सेवा और कर्तव्यभावना का परिचय देता है। वह अपने माता-पिता की सेवा को सबसे बड़ा धर्म मानता है। इस सर्ग में मातृ-पितृ भक्ति और सेवा का प्रेरणादायक संदेश दिया गया है।

(vi) ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य की कथावस्तु संक्षेप में लिखिए।
Ans.
‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य महाभारत की द्रौपदी से सम्बन्धित घटना पर आधारित है। इसमें द्रौपदी के अपमान, उसके संघर्ष और न्याय प्राप्ति के प्रयासों का वर्णन है। द्रौपदी अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाती है। यह खण्डकाव्य सत्य, नारी सम्मान और न्याय की विजय का संदेश देता है।

अथवा

‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य के आधार पर द्रौपदी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans.
द्रौपदी साहसी, स्वाभिमानी, बुद्धिमती और न्यायप्रिय नारी थी। वह अन्याय और अत्याचार का विरोध करती थी। अपमानित होने पर भी उसने धैर्य और साहस नहीं छोड़ा। वह अपने अधिकारों के प्रति जागरूक थी। उसका चरित्र नारी सम्मान और आत्मसम्मान का प्रतीक है।

खण्ड – ख


8. (क) दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

अथैक: शकुनि: सर्वेषां मध्यादाशयगृह्णार्थं त्रिकृत्व: अश्रावयत् । तत: एक: काक: उत्थाय ‘तिष्ठ तावत्, अस्य एतस्मिन् राज्याभिषेककाले एवं रूपं मुखं, क्रुद्धस्य च कीदृशं भविष्यति ? अनेन हि क्रुद्धेन अवलोकिता: वयं तप्तकटाहे प्रक्षिप्तास्तिला: इव तत्र घड़क्ष्याम: । ईदृशो राजां मह्यं न रोचते’ इत्याह ।
Ans.
इसके बाद सभी पक्षियों में से एक कौए ने राजा के अभिषेक के उद्देश्य से तीन बार अपनी बात सुनाई। तब एक कौआ उठकर बोला – ठहरो! राज्याभिषेक के समय ही इस राजा का मुख ऐसा दिखाई दे रहा है, तो क्रोधित होने पर इसका चेहरा कैसा होगा? इसके क्रोधित होकर देखने मात्र से हम सभी उसी प्रकार जल जाएँगे, जैसे तपते हुए कड़ाहे में डाले गए तिल जल जाते हैं। ऐसा राजा मुझे पसन्द नहीं है।

अथवा

याज्ञवल्क्य उवाच – न वा अरे मैत्रेयि ! पत्यु: कामाय पति: प्रियो भवति । आत्मनस्तु वै कामाय पति: प्रियो भवति । न वा अरे, जायाया: कामाय जाया प्रिया भवति, आत्मनस्तु वै जाया प्रिया भवति । न वा अरे, पुत्रस्य वित्तस्य च कामाय पुत्रे वित्तं वा प्रियं भवति, आत्मनस्तु वै कामाय पुत्रो वित्तं वा प्रियं भवति । न वा अरे, सर्वस्य कामाय सर्वं प्रियं भवति, आत्मनस्तु वै कामाय सर्वं प्रियं भवति ।
Ans.
याज्ञवल्क्य ने कहा – हे मैत्रेयी! पति पत्नी को पति के लिए प्रिय नहीं होता, बल्कि अपने आत्मा के लिए प्रिय होता है। इसी प्रकार पत्नी पति को अपने लिए प्रिय नहीं होती, बल्कि अपने आत्मा के लिए प्रिय होती है। पुत्र अपने लिए प्रिय नहीं होता, बल्कि आत्मा के लिए प्रिय होता है। धन भी अपने लिए प्रिय नहीं होता, बल्कि आत्मा के लिए प्रिय होता है। संसार की सभी वस्तुएँ अपने लिए प्रिय नहीं होतीं, बल्कि आत्मा के लिए प्रिय होती हैं।

(ख) दिये गये श्लोकों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :

सहसा विदधीत न क्रियामविवेक: परमापदां पदम् ।
वृणुते हि विमृश्यकारिणं गुणलुब्धा: हि स्वयमेव सम्पद: ॥
Ans.
मनुष्य को बिना सोचे-समझे कोई कार्य अचानक नहीं करना चाहिए, क्योंकि अविवेक अर्थात बिना विचार किए काम करना अनेक विपत्तियों का कारण बनता है। जो व्यक्ति सोच-विचार करके कार्य करता है, सफलता और सम्पत्तियाँ स्वयं उसका चुनाव करती हैं।

अथवा

वज्रादपि कठोराणि मृदूनि कुसुमादपि ।
लोकोत्तराणां चेतांसि को नु विज्ञातुमर्हति ॥
Ans.
महापुरुषों के हृदय कभी वज्र से भी अधिक कठोर और कभी फूलों से भी अधिक कोमल होते हैं। उनके मन की वास्तविक स्थिति को कौन जान सकता है? अर्थात महान व्यक्तियों के हृदय में कठोरता और कोमलता दोनों का अद्भुत समन्वय होता है।

9. निम्नलिखित मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए :

(i) हवा में तलवार चलाना
Ans.
अर्थ – बिना सोचे-समझे व्यर्थ प्रयास करना।

वाक्य – बिना तैयारी के परीक्षा में अच्छे अंक लाने की आशा करना हवा में तलवार चलाने के समान है।

(ii) अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनना
Ans.
अर्थ – अपनी प्रशंसा स्वयं करना।

वाक्य – रमेश हमेशा अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनता रहता है।

(iii) मिट्टी में मिलाना
Ans.
अर्थ – पूरी तरह नष्ट कर देना।

वाक्य – शत्रुओं ने हमारी मेहनत पर पानी फेरकर सारी योजना मिट्टी में मिला दी।

(iv) नौ दो ग्यारह होना
Ans.
अर्थ – भाग जाना।

वाक्य – पुलिस को देखते ही चोर नौ दो ग्यारह हो गया।

10. (क) निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ का चयन करके लिखिए :
(i) अविराम – अभिराम

(A) लगातार और रुचिकर
(B) बिना रुके और सुंदर
(C) अनवरत और कठिन
(D) गतिशील और सुगम

Ans. (B) बिना रुके और सुंदर

(ii) विहग – विहंग

(A) पक्षी और बालक
(B) पक्षी और तोता
(C) पक्षी और आकाश
(D) आकाश और पक्षी

Ans. दोनों शब्दों का अर्थ पक्षी है। दिए गए विकल्पों में कोई भी विकल्प दोनों शब्दों का सही अर्थ नहीं बताता। प्रश्न में सम्भवतः मुद्रण त्रुटि है।

(ख) निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो अर्थ लिखिए :

(i) पूत
Ans.

  1. पुत्र।
  2. पवित्र।

(ii) कनक
Ans.

  1. सोना।
  2. धतूरा।

(iii) अम्बर
Ans.

  1. आकाश।
  2. वस्त्र।

(iv) जलद
Ans.

  1. बादल।
  2. जल देने वाला।

(ग) निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द का चयन करके लिखिए :

(i) बिना वेतन लिए काम करने वाला –

(A) सवैतनिक
(B) अवैतनिक
(C) वेतनमुक्त
(D) सेवानिवृत्त

Ans. (B) अवैतनिक

(ii) प्रिय बोलने वाली –

(A) प्रिया
(B) प्रियाशा
(C) प्रियंवदा
(D) प्रीति

Ans. (C) प्रियंवदा

(घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए :

(i) शिवानी एक विद्वान् लेखिका थी।
Ans.
शिवानी एक विदुषी लेखिका थी।

(ii) सीता घर जाता है।
Ans.
सीता घर जाती है।

(iii) पुस्तक मेज में रखी है।
Ans.
पुस्तक मेज पर रखी है।


(iv) गोष्ठी में अनेकों विद्वानों के भाषण हुए।
Ans.
गोष्ठी में अनेक विद्वानों के भाषण हुए।

11. अपठित गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :

आचरण का विकास जीवन का परमोद्देश्य है । आचरण के विकास के लिए नाना प्रकार की सामग्रियों का, जो संसार सम्भूत शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में वर्तमान हैं, उन सबका आचरण के विकास के साधनों के संबंध में विचार करना होगा । आचरण के विकास के लिए जितने कर्म हैं, उन सबको आचरण के संघटनकर्त्ता धर्म के अंग मानना पड़ेगा । चाहे कोई कितना ही बड़ा महात्मा क्यों न हो, वह निश्चयपूर्वक यह नहीं कह सकता कि यों ही करो, और किसी तरह नहीं । आचरण की सभ्यता की प्राप्ति के लिए वह सबको एक पथ नहीं बता सकता ।

(क) जीवन का परम उद्देश्य क्या है ?
Ans.
जीवन का परम उद्देश्य आचरण का विकास करना है।

(ख) आचरण के विकास के संबंध में क्या विचार आवश्यक है ?
Ans.
आचरण के विकास के लिए शारीरिक, प्राकृतिक, मानसिक और आध्यात्मिक जीवन में उपलब्ध सभी साधनों एवं सामग्रियों पर विचार करना आवश्यक है।

(ग) ‘आध्यात्मिक’ और ‘संघटनकर्त्ता’ शब्दों का अर्थ स्पष्ट कीजिए ।
Ans.

  1. आध्यात्मिक – आत्मा अथवा परमात्मा से सम्बन्धित।
  2. संघटनकर्त्ता – संगठन करने वाला अथवा निर्माण करने वाला।

अथवा

कर्म में आनन्द अनुभव करने वालों का नाम ही कर्मण्य है । धर्म और उदारता उच्च कर्मों के विधान में ही एक ऐसा दिव्य आनन्द भरा रहता है कि कर्त्ता को वे ही फलस्वरूप लगते हैं । अत्याचार का दमन और क्लेश का शमन करते हुए चित्त में जो उल्लास और तुष्टि होती है, वही लोकोपकारी कर्मवीर का सच्चा सुख है ।

(क) कर्मण्य किन्हें कहा जाता है ?
Ans.
जो व्यक्ति अपने कार्यों को पूरी लगन, निष्ठा और उत्साह से करता है तथा कर्म में ही आनन्द अनुभव करता है, उसे कर्मण्य कहा जाता है।

(ख) किस विधान में दिव्य आनंद भरा रहता है ?
Ans.
धर्म और उदारता के उच्च कर्मों के विधान में दिव्य आनन्द भरा रहता है।

(ग) ‘लोकोपकारी कर्मवीर’ का आशय स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
लोकोपकारी कर्मवीर वह व्यक्ति है जो अपने कार्यों से समाज और संसार का कल्याण करता है। वह दूसरों के कष्ट दूर करने तथा अत्याचार मिटाने के लिए निरन्तर प्रयत्न करता है।

12. (क) ‘हास्य रस’ अथवा ‘वीर रस’ का स्थायी भाव के साथ उदाहरण अथवा परिभाषा लिखिए ।
Ans..
हास्य रस

परिभाषा – जहाँ किसी व्यक्ति की विचित्र वेशभूषा, वाणी, व्यवहार अथवा क्रियाकलाप से हँसी उत्पन्न होती है, वहाँ हास्य रस होता है।

स्थायी भाव – हास।

उदाहरण –

बंदर ने पहनी टोपी लाल,
देख उसे हँसने लगे सब बाल।

अथवा – वीर रस

परिभाषा – जहाँ युद्ध, उत्साह, पराक्रम और साहसपूर्ण कार्यों का वर्णन होता है, वहाँ वीर रस होता है।

स्थायी भाव – उत्साह।

उदाहरण –

बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।

(ख) ‘श्लेष’ अथवा ‘उत्प्रेक्षा’ अलंकार का लक्षण एवं उदाहरण लिखिए ।
Ans.
श्लेष अलंकार

लक्षण – जहाँ एक ही शब्द से एक से अधिक अर्थ प्रकट होते हैं, वहाँ श्लेष अलंकार होता है।

उदाहरण –

रहिमन पानी राखिए, बिन पानी सब सून।

यहाँ पानी शब्द के अनेक अर्थ हैं – जल, सम्मान और चमक।

अथवा – उत्प्रेक्षा अलंकार

लक्षण – जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना या कल्पना की जाती है, वहाँ उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।

उदाहरण –

मुख मानो चन्द्रमा है।

यहाँ मुख में चन्द्रमा की सम्भावना व्यक्त की गई है।

(ग) ‘सोरठा’ अथवा ‘चौपाई’ छन्द का लक्षण तथा उदाहरण लिखिए ।
Ans.
सोरठा छन्द

लक्षण – सोरठा अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 11-11 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 13-13 मात्राएँ होती हैं। यह दोहे का उलटा होता है।

उदाहरण –

जो सुमिरत सिधि होइ, गननायक करिबर बदन।
करउ अनुग्रह सोइ, बुद्धि रासि सुभ गुन सदन॥

अथवा – चौपाई छन्द

लक्षण – चौपाई एक मात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं तथा चार चरण होते हैं।

उदाहरण –

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर।
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥

13. अपने नगर में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के संबंध में स्थानीय निकाय के अधिकारी को एक पत्र लिखिए ।
Ans.
सेवा में,
श्रीमान नगर आयुक्त महोदय,
नगर निगम, _________।

विषय – नगर में संक्रामक बीमारियों की रोकथाम हेतु आवश्यक कार्यवाही करने के सम्बन्ध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि हमारे नगर के अनेक क्षेत्रों में गन्दगी, जलभराव तथा नालियों की नियमित सफाई न होने के कारण संक्रामक बीमारियाँ फैलने की आशंका बनी हुई है। मच्छरों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

अतः आपसे अनुरोध है कि नगर में नियमित सफाई कराई जाए, नालियों में कीटनाशक दवाओं का छिड़काव कराया जाए तथा जगह-जगह कूड़ेदान रखवाए जाएँ। इसके अतिरिक्त स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था तथा स्वास्थ्य जागरूकता अभियान भी चलाया जाए।

आशा है कि आप जनहित में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही करेंगे।

धन्यवाद।

भवदीय,
एक जागरूक नागरिक
नाम – __________
दिनांक – __________

अथवा

स्व-रोजगार प्रारम्भ करने हेतु ऋण-प्राप्ति के लिए निकटस्थ बैंक के शाखा-प्रबन्धक को एक आवेदन-पत्र लिखिए ।
Ans.
सेवा में,
श्रीमान शाखा प्रबन्धक महोदय,
________ बैंक,
________ शाखा।

विषय – स्व-रोजगार प्रारम्भ करने हेतु ऋण प्रदान करने के सम्बन्ध में।

महोदय,

सविनय निवेदन है कि मैं अपने क्षेत्र में एक छोटा व्यवसाय प्रारम्भ करना चाहता हूँ। इसके लिए मुझे आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं स्वयं व्यवसाय के लिए आवश्यक पूँजी की व्यवस्था कर सकूँ।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मुझे बैंक की स्व-रोजगार ऋण योजना के अन्तर्गत उचित धनराशि ऋण के रूप में प्रदान करने की कृपा करें। मैं बैंक के सभी नियमों एवं शर्तों का पालन करूँगा तथा निर्धारित समय पर ऋण की किस्तें जमा करूँगा।

इसके लिए मैं आपका आभारी रहूँगा।

धन्यवाद।

भवदीय,
नाम – __________
पता – __________
दिनांक – __________
मोबाइल नम्बर – __________

14. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए :

(i) वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण
Ans.
प्रस्तावना – वृक्ष प्रकृति का अमूल्य उपहार हैं। मानव जीवन का आधार वृक्ष हैं। वृक्ष हमें ऑक्सीजन, फल, फूल, लकड़ी, औषधियाँ तथा छाया प्रदान करते हैं। इनके बिना पृथ्वी पर जीवन की कल्पना करना कठिन है।

वृक्षों का महत्त्व – वृक्ष पर्यावरण को शुद्ध रखते हैं। ये वायुमण्डल से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करके ऑक्सीजन छोड़ते हैं। वृक्ष वर्षा कराने, मिट्टी के कटाव को रोकने तथा जलवायु को संतुलित रखने में सहायता करते हैं। वन अनेक पशु-पक्षियों का निवास स्थान भी हैं।

वनों की कटाई के दुष्परिणाम – जनसंख्या वृद्धि, औद्योगीकरण और शहरीकरण के कारण वनों की अन्धाधुन्ध कटाई हो रही है। इससे प्रदूषण, ग्लोबल वार्मिंग, सूखा, बाढ़ तथा प्राकृतिक असन्तुलन जैसी समस्याएँ बढ़ रही हैं।

संरक्षण के उपाय – हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। वनों की अवैध कटाई रोकनी चाहिए तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लेना चाहिए।

उपसंहार – वृक्ष हैं तो जीवन है। अतः वृक्षारोपण एवं वन संरक्षण केवल सरकार का नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।

(ii) महिला सशक्तीकरण
Ans.
प्रस्तावना – महिला सशक्तीकरण का अर्थ महिलाओं को सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक एवं राजनीतिक रूप से सक्षम बनाना है। महिला और पुरुष दोनों समाज के समान महत्त्वपूर्ण अंग हैं। किसी भी देश की उन्नति महिलाओं की प्रगति के बिना सम्भव नहीं है।

महिलाओं की स्थिति – प्राचीन भारत में महिलाओं को सम्मान प्राप्त था, लेकिन समय के साथ बाल विवाह, दहेज प्रथा, अशिक्षा और भेदभाव जैसी कुरीतियों ने उनकी स्थिति को कमजोर किया। वर्तमान समय में महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति, चिकित्सा और सेना जैसे क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा दिखा रही हैं।

सशक्तीकरण का महत्त्व – महिलाओं को शिक्षित और आत्मनिर्भर बनाने से परिवार तथा समाज दोनों का विकास होता है। शिक्षित महिला अपने अधिकारों एवं कर्तव्यों को समझती है और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाती है।

सशक्तीकरण के उपाय – बालिका शिक्षा को बढ़ावा देना चाहिए। महिलाओं को समान अवसर, रोजगार, सुरक्षा और सम्मान प्रदान करना चाहिए। दहेज प्रथा, बाल विवाह और लैंगिक भेदभाव को समाप्त करना चाहिए।

उपसंहार – महिला सशक्तीकरण के बिना विकसित भारत का सपना पूरा नहीं हो सकता। इसलिए हमें महिलाओं को समान अधिकार और सम्मान देना चाहिए।

(iii) आधुनिक जीवन की विसंगतियाँ
Ans.
प्रस्तावना – आधुनिक युग विज्ञान, तकनीक और विकास का युग है। आज मनुष्य ने जीवन को सुविधाजनक बनाने के लिए अनेक आविष्कार किए हैं। मोबाइल, इंटरनेट, कम्प्यूटर और यातायात के साधनों ने जीवन को सरल बनाया है। फिर भी आधुनिक जीवन अनेक विसंगतियों से घिरा हुआ है।

आधुनिक जीवन की प्रमुख विसंगतियाँ – आज मनुष्य के पास सुविधाएँ तो बहुत हैं, लेकिन मानसिक शान्ति का अभाव है। लोग धन कमाने की दौड़ में परिवार और रिश्तों को समय नहीं दे पाते। संयुक्त परिवार टूटकर एकल परिवारों में बदल रहे हैं। भौतिकवाद और स्वार्थ की भावना बढ़ रही है।

प्रदूषण, बेरोजगारी, भ्रष्टाचार, महँगाई, नशाखोरी और साइबर अपराध जैसी समस्याएँ भी आधुनिक जीवन की प्रमुख विसंगतियाँ हैं। सोशल मीडिया के अत्यधिक प्रयोग से वास्तविक सामाजिक सम्बन्ध कमजोर हो रहे हैं।

समाधान – हमें आधुनिक तकनीक का सही उपयोग करना चाहिए। परिवार और समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को समझना चाहिए। नैतिक शिक्षा, ईमानदारी, सहयोग और मानवीय मूल्यों को अपनाना चाहिए।

उपसंहार – आधुनिकता का अर्थ केवल भौतिक सुविधाएँ प्राप्त करना नहीं है, बल्कि विचारों और व्यवहार में भी श्रेष्ठ बनना है। हमें विज्ञान के साथ मानवीय मूल्यों का भी सम्मान करना चाहिए।

(iv) काकोरी एक्शन डे का महत्त्व
Ans.
प्रस्तावना – भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में काकोरी एक्शन का विशेष महत्त्व है। यह घटना 9 अगस्त 1925 को उत्तर प्रदेश के काकोरी नामक स्थान के निकट हुई थी। इसमें क्रान्तिकारियों ने अंग्रेजी सरकार के खजाने को ले जा रही रेलगाड़ी से सरकारी धन प्राप्त किया था।

घटना का परिचय – हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के क्रान्तिकारियों ने स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए धन की आवश्यकता को देखते हुए इस योजना को बनाया। इस ऐतिहासिक कार्य में रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी, चन्द्रशेखर आजाद तथा अन्य क्रान्तिकारियों ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई।

क्रान्तिकारियों का बलिदान – अंग्रेजी सरकार ने इस घटना के बाद अनेक क्रान्तिकारियों को गिरफ्तार किया। रामप्रसाद बिस्मिल, अशफाक उल्ला खाँ, राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी और रोशन सिंह को फाँसी की सजा दी गई। अन्य क्रान्तिकारियों को भी कठोर दण्ड दिया गया।

महत्त्व – काकोरी एक्शन ने भारतीय युवाओं में देशभक्ति और स्वतंत्रता की भावना को मजबूत किया। इस घटना ने अंग्रेजी शासन को चुनौती दी और क्रान्तिकारी आन्दोलन को नई दिशा प्रदान की।

उपसंहार – काकोरी एक्शन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का गौरवशाली अध्याय है। हमें इन वीर क्रान्तिकारियों के त्याग और बलिदान से प्रेरणा लेनी चाहिए।

(v) गोस्वामी तुलसीदास
Ans.
प्रस्तावना – गोस्वामी तुलसीदास हिन्दी साहित्य के महान भक्तिकालीन कवि थे। वे भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त थे। हिन्दी साहित्य में उनका स्थान अत्यन्त ऊँचा है। उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीय संस्कृति, आदर्श और मर्यादा का प्रचार किया।

जीवन परिचय – तुलसीदास के जन्म के सम्बन्ध में विद्वानों में मतभेद हैं। सामान्यतः उनका जन्म संवत् 1554 में राजापुर, चित्रकूट में माना जाता है। उनके पिता का नाम आत्माराम दुबे तथा माता का नाम हुलसी था। उनके गुरु नरहरिदास थे।

साहित्यिक परिचय – तुलसीदास की भाषा अवधी और ब्रजभाषा है। उनकी रचनाओं में भक्ति, प्रेम, लोकमंगल, आदर्श जीवन और मर्यादा का सुन्दर चित्रण मिलता है।

प्रमुख रचनाएँ – रामचरितमानस, विनयपत्रिका, कवितावली, गीतावली, दोहावली, जानकीमंगल, पार्वतीमंगल और हनुमान बाहुक उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं।

रामचरितमानस का महत्त्व – रामचरितमानस उनकी सर्वश्रेष्ठ रचना है। इसमें भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन का वर्णन किया गया है। यह ग्रन्थ भारतीय समाज को धर्म, प्रेम, त्याग, सेवा और मर्यादा की शिक्षा देता है।

उपसंहार – तुलसीदास हिन्दी साहित्य के अमर कवि हैं। उनकी रचनाएँ आज भी भारतीय समाज को नैतिकता, भक्ति और आदर्श जीवन की प्रेरणा देती हैं।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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