U.P Board Class 12 General Hindi 302(HI) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2025
सामान्य हिंदी
समयः तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांकः 70
नोट :
(1) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(ii) इस प्रश्न-पत्र में दो खण्ड हैं। दोनों खण्डों के सभी प्रश्नों के उत्तर देना अनिवार्य है।
खण्ड ‘क’
1. (क) ‘भाषा योगवाशिष्ठ’ के लेखक हैं:
(A) मुंशी सदासुखलाल
(B) रामप्रसाद ‘निरञ्जनी’
(C) राजा शिवप्रसाद सिंह
(D) सदल मिश्र
Ans. (B) रामप्रसाद ‘निरञ्जनी’
(ख) ‘क्षण बोले कण मुस्काए’ रचना की विधा है:
(A) नाटक
(B) उपन्यास
(C) संस्मरण
(D) निबन्ध
Ans. (D) निबन्ध
(ग) चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’ द्वारा लिखित कहानी है:
(A) प्रणयिनी परिणय
(B) ग्राम
(C) सुखमय जीवन
(D) जासूस का धोखा
Ans. (C) सुखमय जीवन
(घ) शुक्लयुगीन लेखक हैं:
(A) उदयशंकर भट्ट
(B) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(C) राधाचरण गोस्वामी
(D) बालकृष्ण भट्ट
Ans. (B) महावीरप्रसाद द्विवेदी
(ङ) शुक्लोत्तर युगीन रचना है:
(A) रेल का विकट खेल
(B) कंकाल
(C) गोदान
(D) निराला की साहित्य-साधना
Ans. (C) गोदान
2. (क) ‘एकान्तवासी योगी कविता के रचनाकार हैं:
(A) बालमुकुन्द गुप्त
(B) अयोध्याप्रसाद खत्री
(C) श्रीधर पाठक
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (C) श्रीधर पाठक
(ख) द्विवेदी युग के कवि हैं:
(A) केदारनाथ अग्रवाल
(B) सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
(C) रामनरेश त्रिपाठी
(D) नरेश मेहता
Ans. (C) रामनरेश त्रिपाठी
(ग) ‘बादल को घिरते देखा है’ नागार्जुन की कविता का युग है:
(A) प्रयोगवाद
(B) छायावाद
(C) द्विवेदी युग
(D) प्रगतिवाद
Ans. (D) प्रगतिवाद
(घ) प्रयोगवाद के प्रवर्तक हैं:
(A) अज्ञेय
(B) मैथिलीशरण गुप्त
(C) सुमित्रानन्दन पन्त
(D) निराला
Ans. (A) अज्ञेय
(ङ) ‘तारसप्तक’ का प्रकाशन वर्ष है:
(A) 1959
(B) 1936
(C) 1951
(D) 1943
Ans. (D) 1943
3. दिये गये गद्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए :
रवीन्द्रनाथ ने इस भारतवर्ष को ‘महामानवसमुद्र’ कहा है। विचित्र देश है यह ! असुर आये, आर्य आये, शक आये, हूण आये, नाग आये, यक्ष आये, गन्दर्भ आये न जाने कितनी मानव जातियाँ यहाँ आर्थी और आज के भारतवर्ष को बनाने में अपना हाथ लग्गा गईं। जिसे हम हिन्दू रीति-नीति कहते हैं, ये अनेक आर्य और आर्येतर उपादानों का अद्भुत मिश्रण है भिरक-एक पशु और एक-एक पक्षी न जाने कितनी स्मृतियों का भार लेकर हमारे सामने उपस्थित हैं। अशोक की भी अपनी स्मृति-परम्परा है। आम की भी, बकुल की भी, चम्पे की भी है। सब क्या हमें मालूम है ?
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।
Ans. प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘भारतवर्ष की सांस्कृतिक एकता एवं विविधता’ विषयक निबन्ध से उद्धृत है। इसके लेखक आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हैं। इसमें लेखक ने भारत की मिली-जुली संस्कृति और अनेक जातियों के योगदान का वर्णन किया है।
(ii) रेखाङ्कित (बोल्ड) अंश की व्याख्या लिखिए।
Ans. लेखक का कहना है कि भारतवर्ष का निर्माण अनेक जातियों, संस्कृतियों और परम्पराओं के मेल से हुआ है। यहाँ आर्य, शक, हूण, नाग, यक्ष आदि अनेक जातियाँ आईं और उन्होंने भारतीय संस्कृति को समृद्ध बनाया। भारतीय संस्कृति किसी एक जाति की देन नहीं, बल्कि अनेक संस्कृतियों के समन्वय का परिणाम है।
(iii) रवीन्द्रनाथ ने किसे ‘महामानवसमुद्र’ कहा है?
Ans. रवीन्द्रनाथ ठाकुर ने भारतवर्ष को ‘महामानवसमुद्र’ कहा है।
(iv) भारतवर्ष के निर्माण में किन-किन जातियों का सहयोग रहा है ?
Ans. भारतवर्ष के निर्माण में असुर, आर्य, शक, हूण, नाग, यक्ष, गन्धर्व आदि अनेक जातियों का सहयोग रहा है।
(v) उपर्युक्त गद्यांश का उद्देश्य स्पष्ट कीजिए।
Ans. इस गद्यांश का उद्देश्य भारतीय संस्कृति की विविधता में एकता को स्पष्ट करना है। लेखक बताना चाहता है कि भारत की संस्कृति अनेक जातियों, परम्पराओं और विचारधाराओं के समन्वय से बनी है। यही समन्वय भारत की वास्तविक पहचान है।
अथवा
हमारी युवाशक्ति से सम्पर्क कायम करने के मेरे फैसले का आधार भी यही रहा है। उनके सपनों को जानना और उन्हें बताना कि अच्छे, भरे-पूरे और सुख-सुविधाओं से पूर्ण जीवन के सपने देखना तथा फिर स्वर्णिम युग के लिए काम करना सही है। आप जो कुछ जो कुछ भी करें वह आपके हृदय से किया गया हो, अपनी आत्मा को अभिव्यक्ति दें और इस तरह आप अपने आसपास प्यार तथा खुशियों का प्रसार कर सकेंगे।
(i) उपर्युक्त गद्यांश का सन्दर्भ लिखिए ।
Ans. प्रस्तुत गद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के युवाशक्ति और जीवन के आदर्शों से सम्बन्धित निबन्ध से उद्धृत है। इसमें लेखक ने युवाओं के सपनों, आत्मविश्वास और रचनात्मक कार्यों के महत्त्व को बताया है।
(ii) रेखाङ्कित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans. लेखक युवाओं को प्रेरित करते हुए कहता है कि प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में बड़े और अच्छे सपने देखने चाहिए। उसे अपने सपनों को पूरा करने के लिए पूरी लगन से प्रयास करना चाहिए। जब युवा अपनी प्रतिभा और आत्मा की आवाज के अनुसार कार्य करेंगे, तभी समाज में प्रेम, प्रसन्नता और खुशहाली का वातावरण बनेगा।
(iii) स्वर्णिम युग के लिए कार्य करना कब सही है
Ans. जब व्यक्ति अच्छे, सुखमय और सुविधापूर्ण जीवन के सपने देखकर उन्हें पूरा करने के लिए ईमानदारी तथा लगन से कार्य करता है, तब स्वर्णिम युग के लिए कार्य करना सही है।
(iv) लेखक का युवा शक्ति से सम्पर्क कायम करने के फैसले का आधार क्या रहा है ?
Ans. लेखक का आधार युवाओं के सपनों को जानना, उन्हें सकारात्मक दिशा देना तथा अपने जीवन और समाज को बेहतर बनाने के लिए प्रेरित करना रहा है।
(v) ‘अभिव्यक्ति’ तथा ‘प्रसार’ शब्द का अर्थ बताइए ।
Ans. अभिव्यक्ति – अपने विचारों को प्रकट करना।
प्रसार – फैलाव या विस्तार।
4. दिये गये पढ्यांश पर आधारित निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
यों प्यारे को विदित करके सर्व मेरी व्यथायें।
धीरे-धीरे वहन करके पाँव की धूलि लाना।
थोड़ी सी भी चरण-रज जो ला न देगी हमें तू ।
हा ! कैसे तू व्यथित चित को बोध मैं दे सकूँगी ।।
पूरी होवे न यदि तुझसे अन्य बातें हमारी ।
तो तू मेरी विनय इतनी मान ले और चली जा।
छू के प्यारे कमल-पग को प्यार के साथ आ जा।
जी जाऊँगी हृदय हृदयतल में मैं तुझी को लगा के ।।
(i) प्रस्तुत पद्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
Ans. प्रस्तुत पद्यांश हमारी पाठ्यपुस्तक के ‘पवन दूतिका’ कविता से उद्धृत है। इसमें राधा श्रीकृष्ण के वियोग में व्याकुल होकर पवन को दूत बनाकर उनके पास संदेश भेजती हैं।
(ii) राधा पवन दूतिका से किसकी धूल लाने को कहती है ?
Ans. राधा पवन दूतिका से श्रीकृष्ण के चरणों की धूल लाने को कहती हैं।
(iii) रेखाङ्कित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए ।
Ans. राधा कहती हैं कि यदि पवन दूतिका उनकी सभी बातें पूरी नहीं कर सकती, तो कम-से-कम श्रीकृष्ण के कमल समान चरणों को स्पर्श करके उनकी चरण-रज ही ले आए। उस चरण-रज को हृदय से लगाकर वह अपने विरह के दुःख को कम कर सकेंगी।
(iv) राधा पवन दूतिका से क्या-क्या प्रार्थना करती है ?
Ans. राधा पवन से प्रार्थना करती हैं कि वह श्रीकृष्ण तक उनकी विरह-वेदना पहुँचाए, उनके चरणों की धूल लेकर आए और उनके प्रिय के चरणों को स्पर्श करके लौटे।
(v) उपर्युक्त पढ्यांश का भाव स्पष्ट कीजिए।
Ans. इस पद्यांश में राधा की विरह-वेदना का मार्मिक चित्रण हुआ है। श्रीकृष्ण से बिछुड़कर राधा अत्यन्त दुखी हैं। वे पवन को दूत बनाकर अपने प्रियतम के पास भेजती हैं और उनके चरणों की धूल लाने की विनती करती हैं। इससे राधा का अनन्य प्रेम और समर्पण प्रकट होता है।
अथवा
मैं नाम-गोत्र से रहित पुष्प,
अंबर में उड़ती हुई मुक्त आनन्द शिखा
इतिवृत्तहीन,
सौन्दर्य चेतना की तरंग;
सुर-नर-किन्नर-गन्धर्व नहीं,
प्रिय! मैं, केवल अप्सरा
विश्वनर के अतृप्त इच्छा-सागर से समुद्भूत ।
(i) उपर्युक्त पढ्यांश का सन्दर्भ लिखिए।
Ans. प्रस्तुत पद्यांश रामधारी सिंह ‘दिनकर’ द्वारा रचित ‘उर्वशी’ काव्य से उद्धृत है। इसमें उर्वशी अपने स्वतंत्र, सौन्दर्यमय और अलौकिक स्वरूप का परिचय देती है।
(ii) रेखांकित (बोल्ड) अंश की व्याख्या कीजिए।
Ans. उर्वशी कहती है कि उसका कोई निश्चित नाम, गोत्र या सांसारिक इतिहास नहीं है। वह आकाश में उड़ती हुई स्वतंत्र आनन्द की ज्योति है। वह सौन्दर्य और चेतना की एक लहर है। उसका अस्तित्व स्वतंत्रता, सौन्दर्य और आनन्द का प्रतीक है।
(iii) इस पद्यांश में उर्वशी ने किसे अपना परिचय दिया है ?
Ans. इस पद्यांश में उर्वशी ने पुरुरवा को अपना परिचय दिया है।
(iv) आकाश में उड़ती हुई स्वच्छ आनन्द की शिखाए कौन है ?
Ans. आकाश में उड़ती हुई स्वच्छ आनन्द की शिखा उर्वशी है।
(v) उपर्युक्त पढ्यांश का भाव लिखिए।
Ans. इस पद्यांश में उर्वशी के अलौकिक सौन्दर्य, स्वतंत्रता और आनन्दमय स्वरूप का वर्णन है। वह स्वयं को किसी सांसारिक बन्धन में बँधी हुई नारी नहीं मानती, बल्कि सौन्दर्य और चेतना की स्वतंत्र अभिव्यक्ति मानती है।
5. (क) निम्नलिखित में से किसी एक लेखक का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए : (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)
(i) हजारीप्रसाद द्विवेदी
Ans. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध निबंधकार, आलोचक एवं उपन्यासकार थे। उनका जन्म सन् 1907 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में हुआ था। उनकी भाषा सरल, सरस एवं प्रभावशाली है। उनके साहित्य में भारतीय संस्कृति और इतिहास का सुंदर चित्रण मिलता है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— अशोक के फूल, कल्पलता, बाणभट्ट की आत्मकथा, अनामदास का पोथा तथा आलोक पर्व।
(ii) प्रो. जी. सुन्दर रेड्डी
Ans. प्रोफेसर जी. सुन्दर रेड्डी हिन्दी के प्रसिद्ध विद्वान एवं निबंधकार थे। वे दक्षिण भारत में हिन्दी भाषा के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध थे। उन्होंने हिन्दी और दक्षिण भारतीय भाषाओं के साहित्यिक संबंधों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी भाषा सरल, सहज एवं विचारपूर्ण है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— हिन्दी और उसकी विविध बोलियाँ, भाषा और संस्कृति तथा साहित्य और समाज।
(iii) डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
Ans. डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम भारत के महान वैज्ञानिक, विचारक एवं पूर्व राष्ट्रपति थे। उनका जन्म 15 अक्टूबर, 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम् में हुआ था। उन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है। उन्होंने भारत के वैज्ञानिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी भाषा सरल, प्रेरणादायक एवं प्रभावशाली है। उनकी प्रमुख रचनाएँ हैं— विंग्स ऑफ फायर, इग्नाइटेड माइंड्स, इंडिया 2020 तथा माय जर्नी।
(ख) निम्नलिखित कवियों में से किसी एक कवि का साहित्यिक परिचय देते हुए उनकी प्रमुख रचनाओं का उल्लेख कीजिए: (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)
(i) अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’
Ans. अयोध्या सिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध कवि थे। उनका जन्म 1865 ई. में आजमगढ़ में हुआ था। वे द्विवेदी युग के प्रमुख कवि थे। उन्होंने खड़ी बोली हिन्दी को काव्य की भाषा बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान दिया। उनकी भाषा संस्कृतनिष्ठ एवं साहित्यिक है। प्रमुख रचनाएँ – प्रियप्रवास, वैदेही वनवास, रसकलश तथा पारिजात।
(ii) रामधारी सिंह ‘दिनकर’
Ans. रामधारी सिंह ‘दिनकर’ हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध राष्ट्रवादी कवि थे। उनका जन्म 1908 ई. में बिहार के सिमरिया गाँव में हुआ था। उनकी कविताओं में वीरता, राष्ट्रीयता, सामाजिक चेतना और क्रान्ति की भावना मिलती है। उनकी भाषा ओजपूर्ण एवं प्रभावशाली है। प्रमुख रचनाएँ – रश्मिरथी, कुरुक्षेत्र, उर्वशी, हुंकार तथा रेणुका। उन्हें राष्ट्रकवि कहा जाता है।
(iii) महादेवी वर्मा
Ans. महादेवी वर्मा हिन्दी साहित्य की महान कवयित्री एवं छायावाद के चार प्रमुख स्तम्भों में से एक थीं। उनका जन्म 1907 ई. में फर्रुखाबाद में हुआ था। उनकी कविताओं में वेदना, करुणा, प्रेम और आध्यात्मिकता का सुन्दर चित्रण मिलता है। उनकी भाषा कोमल एवं भावपूर्ण है। प्रमुख रचनाएँ – यामा, नीहार, रश्मि, नीरजा, दीपशिखा तथा अतीत के चलचित्र।
(iv) सुमित्रानन्दन पन्त
Ans. सुमित्रानन्दन पन्त हिन्दी साहित्य के प्रसिद्ध छायावादी कवि थे। उनका जन्म 1900 ई. में कौसानी, उत्तराखण्ड में हुआ था। उनकी कविताओं में प्रकृति-सौन्दर्य, मानवता और कोमल भावनाओं का सुन्दर चित्रण मिलता है। उनकी भाषा मधुर, कोमल एवं संगीतात्मक है। प्रमुख रचनाएँ – पल्लव, वीणा, गुंजन, ग्राम्या, युगान्त तथा चिदम्बरा।
6 ‘पंचलाइट’ कहानी का कथासार अपने शब्दों में लिखिए। अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)
Ans. ‘पंचलाइट’ फणीश्वरनाथ रेणु की प्रसिद्ध कहानी है। इसमें ग्रामीण जीवन, जातिगत भेदभाव और सामाजिक प्रतिष्ठा का चित्रण है। गाँव की महतो टोली पंचलाइट खरीदती है, लेकिन उसे जलाना कोई नहीं जानता। गोधन पंचलाइट जलाना जानता है, परन्तु उससे पहले उसका बहिष्कार किया गया था। सरदार के कहने पर उसे बुलाया जाता है। गोधन पंचलाइट जला देता है और गाँव में उसका सम्मान बढ़ जाता है।
अथवा
‘बहादुर’ कहानी के उद्देश्य पर प्रकाश डालिए। (अधिकतम शब्द-सीमा: 80 शब्द)
Ans. ‘बहादुर’ कहानी के लेखक अमरकान्त हैं। इस कहानी का उद्देश्य घरेलू नौकरों के प्रति मानवीय व्यवहार की प्रेरणा देना है। कहानी में आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति के शोषण, उपेक्षा और अपमान को दिखाया गया है। लेखक बताता है कि नौकर भी हमारी तरह भावनाओं वाला मनुष्य है। उसके साथ प्रेम, सम्मान और सहानुभूति का व्यवहार करना चाहिए।
7. स्वपठित खण्डकाव्य के आधार पर किसी एक खण्ड के एक प्रश्न का उत्तर दीजिए: (अधिकतम शब्द-सीमा : 80 शब्द)
(क) (i) ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के नायक का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans. ‘त्यागपथी’ के नायक हर्षवर्धन हैं। वे वीर, साहसी, दयालु, त्यागी और प्रजावत्सल शासक थे। उनके हृदय में देशप्रेम तथा मानवता की भावना थी। वे अपनी प्रजा के सुख-दुःख को अपना सुख-दुःख समझते थे। उनका जीवन त्याग, सेवा, उदारता और कर्तव्यपरायणता का आदर्श है।
(ii) ‘त्यागपथी’ खण्डकाव्य के द्वितीय सर्ग की कथावस्तु लिखिए ।
Ans. द्वितीय सर्ग में हर्षवर्धन के जीवन की घटनाओं तथा उनके व्यक्तित्व के विकास का वर्णन मिलता है। इसमें पारिवारिक परिस्थितियों, राज्य की समस्याओं और प्रजा के प्रति उनके कर्तव्यबोध को दर्शाया गया है। इन घटनाओं से उनके त्याग, साहस और उदारता का परिचय मिलता है।
(ख) (i) ‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य का कथानक अपने शब्दों में लिखिए ।
Ans. ‘रश्मिरथी’ रामधारी सिंह दिनकर द्वारा रचित खण्डकाव्य है। इसमें महाभारत के महान योद्धा कर्ण की जीवन-कथा वर्णित है। कर्ण के जन्म, पालन-पोषण, शिक्षा, पराक्रम, दानशीलता और मित्रता का चित्रण किया गया है। अंत में महाभारत युद्ध में कर्ण अर्जुन के हाथों वीरगति प्राप्त करता है।
(ii) ‘रश्मिरथी’ खण्डकाव्य के आधार पर कर्ण का चरित्रांकन कीजिए।
Ans. कर्ण ‘रश्मिरथी’ का प्रमुख नायक है। वह वीर, साहसी, दानवीर, स्वाभिमानी और मित्रता निभाने वाला व्यक्ति है। वह भगवान परशुराम से शिक्षा प्राप्त करता है। दुर्योधन की मित्रता के प्रति वह जीवनभर निष्ठावान रहता है। अपमान सहने पर भी वह अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं करता। उसका चरित्र त्याग और उदारता का प्रतीक है।
(ग) (i) ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य का कथासार अपने शब्दों में लिखिए ।
Ans. ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य महाभारत की द्रौपदी से सम्बन्धित घटना पर आधारित है। इसमें द्रौपदी के अपमान, अन्याय के विरोध और सत्य की शक्ति का चित्रण किया गया है। द्रौपदी अन्याय के सामने झुकती नहीं है। अंततः यह खण्डकाव्य सत्य, न्याय और धर्म की विजय का संदेश देता है।
(ii) ‘सत्य की जीत’ खण्डकाव्य के आधार पर दुःशासन का चरित्र चित्रण कीजिए ।
Ans. दुःशासन महाभारत का नकारात्मक पात्र है। वह दुर्योधन का भाई और उसका सहयोगी था। वह क्रूर, अहंकारी, अन्यायी और अत्याचारी स्वभाव का था। उसने भरी सभा में द्रौपदी का अपमान किया। उसका चरित्र अधर्म, अहंकार और अन्याय का प्रतीक है। अंत में उसे अपने बुरे कर्मों का दण्ड मिलता है।
(घ) (i) ‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य के आधार पर दशरथ की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए ।
Ans. दशरथ अयोध्या के पराक्रमी और धर्मपरायण राजा थे। वे वीर, कर्तव्यनिष्ठ, दयालु तथा प्रजावत्सल थे। वे अपने माता-पिता का सम्मान करते थे और शिकार के समय हुई भूल के कारण उन्हें गहरा पश्चाताप हुआ। उनका चरित्र यह शिक्षा देता है कि मनुष्य को अपने कर्मों के प्रति उत्तरदायी होना चाहिए।
(ii) ‘श्रवणकुमार’ खण्डकाव्य के ‘श्रवण’ सर्ग का कथानक लिखिए ।
Ans. ‘श्रवण’ सर्ग में श्रवणकुमार की माता-पिता के प्रति भक्ति का वर्णन है। वह अपने अन्धे माता-पिता को तीर्थयात्रा कराने के लिए कंधे पर बैठाकर ले जाता है। मार्ग में राजा दशरथ के बाण से वह घायल हो जाता है। मृत्यु से पहले वह अपने माता-पिता के लिए जल माँगता है। यह प्रसंग अत्यन्त करुणापूर्ण है।
(ङ) (i) ‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य के षष्ठ सर्ग (नमक आन्दोलन) का कथानक लिखिए।
Ans. इस सर्ग में गाँधीजी द्वारा चलाए गए नमक आन्दोलन का वर्णन है। अंग्रेज सरकार ने नमक पर कर लगाकर जनता का शोषण किया था। गाँधीजी ने इसका विरोध करने के लिए दांडी यात्रा की और समुद्र से नमक बनाकर अंग्रेजी कानून तोड़ा। इस आन्दोलन ने देशभर में स्वतंत्रता की भावना को जागृत किया।
(ii) ‘आलोकवृत्त’ खण्डकाव्य के आधार पर गाँधीजी का चरित्र-चित्रण कीजिए।
Ans. गाँधीजी सत्य, अहिंसा और प्रेम के पुजारी थे। वे महान देशभक्त, त्यागी, कर्मयोगी तथा मानवतावादी नेता थे। उन्होंने सत्याग्रह और अहिंसा के माध्यम से स्वतंत्रता आन्दोलन का नेतृत्व किया। वे गरीबों और कमजोरों के हितैषी थे। उनका जीवन सादगी, सेवा और नैतिकता का आदर्श है।
(च) (i) ‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य के नायक की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Ans. ‘मुक्तियज्ञ’ के नायक का चरित्र देशप्रेम, साहस, त्याग और बलिदान की भावना से परिपूर्ण है। वह अन्याय और अत्याचार का विरोध करता है। उसके हृदय में स्वतंत्रता प्राप्त करने की तीव्र इच्छा है। वह व्यक्तिगत सुखों का त्याग करके देश और समाज की मुक्ति के लिए संघर्ष करता है।
(ii) ‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य की कथावस्तु लिखिए ।
Ans. ‘मुक्तियज्ञ’ खण्डकाव्य में भारत के स्वतंत्रता संघर्ष और देशभक्तों के त्याग एवं बलिदान का वर्णन है। इसमें विदेशी शासन के अत्याचारों, स्वतंत्रता सेनानियों के संघर्ष और राष्ट्रीय चेतना को प्रस्तुत किया गया है। यह खण्डकाव्य देशप्रेम, साहस, एकता और स्वतंत्रता का संदेश देता है।
खण्ड – ‘ख’
8. (क) दिये गये संस्कृत गद्यांशों में से किसी एक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए :
पत्युः कामाय पतिः प्रियो भवति । आत्मनस्तु वै कामाय पतिः प्रियो भवति । न वा अरे, जायायाः कामाय जागा पिया भवति, आत्मनस्तु वै कामाय जाया प्रिया भवति। न वा अरे, पुत्रस्य वित्तस्य च कामाय पुत्रा वित्तं वा प्रियं भवति, आत्मनस्तु वै कामाय पुत्रो वित्तं वा प्रियं भवति ।
Ans. सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश बृहदारण्यक उपनिषद् से लिया गया है। इसमें आत्मा के महत्त्व का वर्णन किया गया है।
हिन्दी अनुवाद – पति पत्नी को प्रिय होता है, परन्तु पति के लिए नहीं, बल्कि अपनी आत्मा के सुख के लिए। इसी प्रकार पत्नी पति को प्रिय होती है, परन्तु पत्नी के लिए नहीं, बल्कि अपनी आत्मा के सुख के लिए। पुत्र और धन भी अपने लिए प्रिय नहीं होते, बल्कि आत्मा के सुख के लिए प्रिय होते हैं। अतः संसार की सभी वस्तुएँ आत्मा के सुख के लिए प्रिय होती हैं।
अथवा
हिन्दी-संस्कृताङ्ग्लभाषासु अस्य समानः अधिकारः आसीत्। हिन्दी-हिन्दुहिन्दुस्थानानामुत्थाय अयं निरन्तरं प्रयत्नमकरोत् । शिक्षयैवदेशे समाजे च नवीनः प्रकाशः उदेति, अतः श्रीमालवीयः वाराणस्यां काशीहिन्दूविश्वविद्यालयस्य संस्थापनमकरोत् । अस्य निर्माणाय अयं जनान् धनम् अयाचत् जनाश्च महत्यस्मिन् ज्ञानयज्ञे प्रभूतं धनमस्मै प्रायच्छन् ।
Ans. सन्दर्भ – प्रस्तुत गद्यांश महामना मदनमोहन मालवीय के व्यक्तित्व एवं शिक्षा के प्रति उनके योगदान से सम्बन्धित है।
हिन्दी अनुवाद – उन्हें हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान के उत्थान के लिए निरन्तर प्रयत्न करने का समान अधिकार था। वे देश और समाज में शिक्षा के माध्यम से नवीन प्रकाश फैलाना चाहते थे। इसलिए श्री मालवीय जी ने वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके निर्माण के लिए उन्होंने लोगों से धन माँगा और लोगों ने इस महान ज्ञान-यज्ञ में उन्हें बहुत धन दिया।
(ख) दिये गये श्लोकों में से किसी एक श्लोक का ससन्दर्भ हिन्दी में अनुवाद कीजिए:
प्रीणाति यः सुचरितैः पितरं स पुत्रो यद्भर्तुमेव हितमिच्छति तत् कलत्रम् । तन्मित्रमापदि सुखे च समक्रियं यद् एतत्त्रयं जगति पुण्यकृतो लभन्ते ।।
Ans. सन्दर्भ – प्रस्तुत श्लोक संस्कृत के नीति-विषयक श्लोकों में से लिया गया है। इसमें पुत्र, पत्नी और मित्र के आदर्श गुणों का वर्णन है।
हिन्दी अनुवाद – जो पुत्र अपने अच्छे आचरण से पिता को प्रसन्न करता है, वही सच्चा पुत्र है। जो पत्नी अपने पति का हित चाहती है, वही सच्ची पत्नी है। जो मित्र विपत्ति और सुख दोनों परिस्थितियों में समान व्यवहार करता है, वही सच्चा मित्र है। संसार में पुण्यात्मा व्यक्ति को ही ये तीनों उत्तम सम्बन्ध प्राप्त होते हैं।
अथवा
अये लाजानुच्चैः पथि वचनमाकर्ण्य गृहिणी शिशोः कर्णौ यत्नात् सुपिहितवती दीनवदना ।। मणि क्षीणोपाये यदकृतं दृशावश्रुबहुले तदन्तःशल्यं मे त्वमसि पुनरुद्धर्तुमुचितः ।।
Ans. सन्दर्भ – प्रस्तुत श्लोक में एक गृहिणी की करुणामय मनःस्थिति तथा उसके हृदय की पीड़ा का वर्णन किया गया है।
हिन्दी अनुवाद – मार्ग में ऊँचे स्वर से लाजाओं (भुने हुए धान) के बारे में कही गई बात सुनकर दुःखी मुख वाली गृहिणी ने सावधानीपूर्वक अपने बच्चे के कान बन्द कर दिए। जब मेरी आशा समाप्त हो गई और मेरी आँखें आँसुओं से भर गईं, तब मेरे हृदय में उत्पन्न पीड़ा को दूर करने के लिए तुम ही समर्थ हो।
9. निम्नलिखित लोकोक्तियों एवं मुहावरों में से किसी एक का अर्थ लिखकर वाक्य में प्रयोग कीजिए:
(i) अन्त भला तो सब भला
Ans. अर्थ – जिसका परिणाम अच्छा होता है, उसकी सारी परेशानियाँ व्यर्थ हो जाती हैं।
वाक्य – परीक्षा की तैयारी में बहुत कठिनाई हुई, लेकिन अच्छे अंक आ गए, इसलिए कहते हैं अन्त भला तो सब भला।
(ii) घी का लड्डू टेढ़ा भला
Ans. अर्थ – अच्छी वस्तु का आकार-प्रकार कैसा भी हो, वह अच्छी ही होती है।
वाक्य – यह मकान देखने में साधारण है, लेकिन बहुत मजबूत है। सच है, घी का लड्डू टेढ़ा भला।
(iii) आग बबूला होना
Ans. अर्थ – अत्यधिक क्रोधित होना।
वाक्य – झूठ बोलने पर अध्यापक आग बबूला हो गए।
(iv) टेढ़ी खीर होना
Ans. अर्थ – कठिन काम होना।
वाक्य – बिना मेहनत के प्रतियोगी परीक्षा पास करना टेढ़ी खीर है।
10. अपठित गद्यांश पर आधारित दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए:
भारत भौतिक दृष्टि से पिछड़ गया और इसलिए उसकी आध्यात्मिकता नाममात्र रह गयी । अशक्त आत्मानुभूति नहीं कर सकता । बिना अभ्युदय के निःश्रेयस की सिद्धि नहीं होती। अतः आवश्यक है कि हम बल-संवर्द्धन करें, अभ्युदय के लिए प्रयत्नशील हों, जिससे अपने रोगों को दूर कर स्वास्थ्य लाभ कर सकें तथा विश्व के लिए भार न बनकर उसकी प्रगति में साधक और सहायक हो सकें।
(i) भौतिक दृष्टि से भारत की क्या स्थिति है ?
Ans. भौतिक दृष्टि से भारत पिछड़ गया है, जिसके कारण उसकी आध्यात्मिकता भी कमजोर हो गई है।
(ii) निःश्रेयस की सिद्धि किससे होती है ?
Ans. निःश्रेयस की सिद्धि अभ्युदय अर्थात भौतिक उन्नति और विकास से होती है।
(iii) सशक्त होना क्यों आवश्यक है ?
Ans. सशक्त होना इसलिए आवश्यक है ताकि हम अपने रोगों और कमजोरियों को दूर करके स्वस्थ बन सकें तथा विश्व पर बोझ बनने के बजाय उसकी प्रगति में सहायक बन सकें।
11. (क) निम्नलिखित शब्द-युग्मों का सही अर्थ चयन करके लिखिए:
(i) कृत – कृति
(A) रचना – पुस्तक
(B) किया हुआ – रचना
(C) कार्य – निर्मित
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (B) किया हुआ – रचना
(ii) श्रवण – श्रमण
(A) सुनना – भ्रमण
(B) भिक्षु – कर्ण
(C) कान – भिक्षु
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (C) कान – भिक्षु
(ख) निम्नलिखित शब्दों में से किसी एक शब्द के दो सही अर्थ लिखिए :
(i) नग – पर्वत, रत्न।
(ii) नाग – सर्प, हाथी।
(iii) द्विज – ब्राह्मण, पक्षी।
(iv) पवन – वायु, हवा।
(ग) निम्नलिखित वाक्यांशों के लिए एक सही शब्द चयन करके लिखिए :
(i) ईश्वर में विश्वास करने वाला-
(A) नास्तिक
(B) आस्तिक
(C) अजर
(D) अमर
Ans. (B) आस्तिक
(ii) जो नष्ट होने वाला हो-
(A) नश्वर
(B) अविनाशी
(C) अकिंचन
(D) इनमें से कोई नहीं
Ans. (A) नश्वर
(घ) निम्नलिखित में से किन्हीं दो वाक्यों को शुद्ध करके लिखिए :
(i) मोहन ने आलमारी खरीदा।
Ans. मोहन ने आलमारी खरीदी।
(ii) मेरा बाल सफेद हो रहा है।
Ans. मेरे बाल सफेद हो रहे हैं।
(iii) आज मेरा बड़ा भाई आ गया।
Ans. यह वाक्य शुद्ध है।
(iv) पक्षी पेड़ में हैं।
Ans. पक्षी पेड़ पर हैं।
12. (क) ‘शृंगार’ अथवा ‘वीर रस’ का लक्षण लिखते हुए एक उदाहरण लिखिए।
Ans. शृंगार रस का लक्षण एवं उदाहरण
लक्षण – जहाँ नायक और नायिका के प्रेम, सौन्दर्य, मिलन अथवा विरह का वर्णन होता है, वहाँ शृंगार रस होता है। इसका स्थायी भाव रति है।
उदाहरण –
मैया! मोहि दाऊ बहुत खिझायो।
वीर रस
लक्षण – जहाँ युद्ध, उत्साह, पराक्रम, साहस और शत्रु पर विजय प्राप्त करने की भावना का वर्णन होता है, वहाँ वीर रस होता है। इसका स्थायी भाव उत्साह है।
उदाहरण –
बुन्देले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी।
खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी।
(ख) ‘रूपक’ अथवा ‘अनुप्रास’ अलंकार का लक्षण लिखते हुए एक उदाहरण लिखिए।
Ans. लक्षण – जहाँ उपमेय और उपमान में भेद न बताकर दोनों को एक ही मान लिया जाता है, वहाँ रूपक अलंकार होता है।
उदाहरण –
चरण-कमल बन्दौं हरिराई।
यहाँ चरणों पर कमल का आरोप किया गया है।
अनुप्रास अलंकार
लक्षण – जहाँ एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति होने से काव्य में चमत्कार उत्पन्न होता है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
उदाहरण –
चारु चन्द्र की चंचल किरणें।
यहाँ ‘च’ वर्ण की बार-बार आवृत्ति हुई है।
(ग) ‘चौपाई’ अथवा ‘दोहा’ छन्द का लक्षण (मात्रा सहित) लिखकर एक उदाहरण लिखिए।
Ans. चौपाई छन्द का लक्षण एवं उदाहरण
लक्षण – चौपाई एक मात्रिक छन्द है। इसके प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं तथा चार चरण होते हैं।
उदाहरण –
बंदउँ गुरु पद पदुम परागा।
सुरुचि सुबास सरस अनुरागा॥
अथवा – दोहा छन्द
लक्षण – दोहा अर्द्धसम मात्रिक छन्द है। इसके प्रथम और तृतीय चरण में 13-13 मात्राएँ तथा द्वितीय और चतुर्थ चरण में 11-11 मात्राएँ होती हैं।
उदाहरण –
बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥
13. विद्यालय में रिक्त लिपिक पद पर नियुक्ति हेतु विद्यालय-प्रबन्धक के नाम आवेदन-पत्र लिखिए।
Ans. सेवा में,
श्रीमान प्रबन्धक महोदय,
आदर्श इंटर कॉलेज,
कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)।
विषय – विद्यालय में रिक्त लिपिक पद पर नियुक्ति हेतु आवेदन-पत्र।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मुझे समाचार-पत्र के माध्यम से ज्ञात हुआ है कि आपके विद्यालय में लिपिक का एक पद रिक्त है। मैं उक्त पद के लिए अपना आवेदन प्रस्तुत कर रहा हूँ।
मैंने स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की है तथा मुझे कम्प्यूटर का भी अच्छा ज्ञान है। मुझे कार्यालय सम्बन्धी कार्यों, पत्र-व्यवहार एवं अभिलेखों के रख-रखाव की जानकारी है। मैं पूर्ण लगन, ईमानदारी एवं परिश्रम से कार्य करने में सक्षम हूँ।
अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि मेरी योग्यताओं को ध्यान में रखते हुए मुझे उक्त पद पर नियुक्त करने की कृपा करें। इसके लिए मैं आपका सदैव आभारी रहूँगा।
धन्यवाद।
भवदीय
प्रार्थी – अ ब स
दिनांक – …………
पता – …………
मोबाइल – …………
अथवा
बैंक-प्रबन्धक के नाम एक आवेदन-पत्र लिखिए, जिसमें किसी व्यवसाय को स्थापित करने हेतु ऋण की माँग की गई हो।
Ans. सेवा में,
श्रीमान शाखा प्रबन्धक महोदय,
भारतीय स्टेट बैंक,
कुशीनगर (उत्तर प्रदेश)।
विषय – व्यवसाय स्थापित करने हेतु ऋण प्राप्त करने के सम्बन्ध में।
महोदय,
सविनय निवेदन है कि मैं अपने क्षेत्र में एक छोटा व्यवसाय स्थापित करना चाहता हूँ। इसके लिए मुझे आर्थिक सहायता की आवश्यकता है। मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं है कि मैं अपने साधनों से व्यवसाय शुरू कर सकूँ।
अतः आपसे अनुरोध है कि मुझे बैंक की नियमानुसार व्यवसाय स्थापित करने हेतु उचित ऋण प्रदान करने की कृपा करें। मैं बैंक के सभी नियमों का पालन करूँगा तथा निर्धारित समय पर ऋण की किस्तें जमा करता रहूँगा।
आशा है कि आप मेरे आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेंगे।
धन्यवाद।
भवदीय
प्रार्थी – अ ब स
दिनांक – …………
पता – …………
मोबाइल – …………
14. निम्नलिखित विषयों में से किसी एक विषय पर अपनी भाषा-शैली में निबन्ध लिखिए :
(i) आतंकवाद की समस्या – कारण और निवारण
Ans. प्रस्तावना – आतंकवाद आज विश्व की सबसे गंभीर समस्याओं में से एक है। आतंकवाद का अर्थ है अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए हिंसा, भय और आतंक का वातावरण उत्पन्न करना। यह मानवता, शान्ति और विकास का सबसे बड़ा शत्रु है।
आतंकवाद के कारण – आतंकवाद के अनेक कारण हैं। धार्मिक कट्टरता, अशिक्षा, बेरोजगारी, गरीबी, राजनीतिक स्वार्थ, आपसी वैमनस्य तथा गलत विचारधारा इसके प्रमुख कारण हैं। कुछ लोग अपने स्वार्थ के लिए युवाओं को भड़काकर आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करते हैं।
आतंकवाद के दुष्परिणाम – आतंकवाद से निर्दोष लोगों की जान जाती है। देश की आर्थिक व्यवस्था कमजोर होती है। विकास कार्य रुक जाते हैं तथा लोगों में भय और असुरक्षा की भावना उत्पन्न होती है। इससे देश की शान्ति और एकता को भी खतरा पैदा होता है।
निवारण के उपाय – आतंकवाद को समाप्त करने के लिए शिक्षा का प्रसार, रोजगार के अवसर, सामाजिक समानता और राष्ट्रीय एकता आवश्यक है। सरकार को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी चाहिए। युवाओं को सही शिक्षा और संस्कार देने चाहिए। सभी देशों को मिलकर आतंकवाद के विरुद्ध कार्य करना चाहिए।
उपसंहार – आतंकवाद किसी समस्या का समाधान नहीं है। शान्ति, प्रेम, भाईचारे और मानवता से ही एक अच्छे समाज का निर्माण हो सकता है। हमें आतंकवाद का विरोध करके विश्व में शान्ति स्थापित करने का प्रयास करना चाहिए।
(ii) अन्तरिक्ष में भारत के बढ़ते कदम
Ans. प्रस्तावना – आज भारत विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में तेजी से प्रगति कर रहा है। अन्तरिक्ष विज्ञान में भारत ने विश्वभर में अपनी विशेष पहचान बनाई है। भारतीय अन्तरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने देश को गौरवान्वित किया है।
भारत की अन्तरिक्ष यात्रा – भारत ने 1975 में अपना पहला उपग्रह आर्यभट्ट अन्तरिक्ष में भेजा। इसके बाद भारत ने अनेक उपग्रहों का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इन उपग्रहों से संचार, मौसम, कृषि और शिक्षा के क्षेत्र में बहुत सहायता मिली है।
चन्द्रयान और मंगलयान – भारत ने चन्द्रयान अभियान के माध्यम से चन्द्रमा के अध्ययन में महत्त्वपूर्ण सफलता प्राप्त की। 23 अगस्त 2023 को चन्द्रयान-3 ने चन्द्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफलतापूर्वक सॉफ्ट लैंडिंग की। मंगलयान अभियान ने भी भारत को विश्व में विशेष पहचान दिलाई।
गगनयान अभियान – भारत का गगनयान कार्यक्रम मानव को अन्तरिक्ष में भेजने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण प्रयास है। इससे भारत की वैज्ञानिक क्षमता और तकनीकी विकास को नई दिशा मिलेगी।
उपसंहार – भारत की अन्तरिक्ष यात्रा निरन्तर आगे बढ़ रही है। वैज्ञानिकों की मेहनत और प्रतिभा से भारत भविष्य में अन्तरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊँचाइयाँ प्राप्त करेगा। हमें अपने वैज्ञानिकों पर गर्व है।
(iii) बढ़ती जनसंख्या और रोजगार की समस्या
Ans. प्रस्तावना – जनसंख्या किसी भी देश की शक्ति होती है, लेकिन जब जनसंख्या उपलब्ध संसाधनों से अधिक बढ़ जाती है, तब यह समस्या बन जाती है। भारत में बढ़ती जनसंख्या के कारण रोजगार की समस्या भी गंभीर होती जा रही है।
जनसंख्या वृद्धि के कारण – अशिक्षा, गरीबी, जागरूकता की कमी, बाल विवाह तथा परिवार नियोजन के प्रति उदासीनता जनसंख्या वृद्धि के प्रमुख कारण हैं।
रोजगार की समस्या – जनसंख्या बढ़ने से रोजगार की माँग बढ़ती है। लेकिन रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण बेरोजगारी की समस्या उत्पन्न होती है। इससे गरीबी, आर्थिक असमानता और सामाजिक समस्याएँ बढ़ती हैं।
समाधान के उपाय – जनसंख्या नियंत्रण के लिए शिक्षा और जागरूकता का प्रसार करना चाहिए। युवाओं को तकनीकी एवं व्यावसायिक शिक्षा देनी चाहिए। नए उद्योग स्थापित करने चाहिए तथा स्वरोजगार को प्रोत्साहित करना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए।
उपसंहार – जनसंख्या और बेरोजगारी की समस्या का समाधान शिक्षा, जागरूकता और उचित सरकारी योजनाओं से सम्भव है। हमें छोटे परिवार और आत्मनिर्भरता का महत्त्व समझना चाहिए।
(iv) विद्यार्थी-जीवन में अनुशासन का महत्त्व
Ans. प्रस्तावना – विद्यार्थी जीवन मनुष्य के भविष्य निर्माण का सबसे महत्त्वपूर्ण समय होता है। इस समय सीखी गई अच्छी आदतें जीवनभर काम आती हैं। विद्यार्थी जीवन में अनुशासन का विशेष महत्त्व है।
अनुशासन का अर्थ – अनुशासन का अर्थ है नियमों का पालन करना, समय का सदुपयोग करना और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से पूरा करना।
विद्यार्थी जीवन में महत्त्व – अनुशासन विद्यार्थी को समय का पाबन्द, परिश्रमी और जिम्मेदार बनाता है। अनुशासित विद्यार्थी नियमित रूप से विद्यालय जाता है, शिक्षकों का सम्मान करता है और मन लगाकर पढ़ाई करता है। वह अपने जीवन का लक्ष्य निर्धारित करके उसे प्राप्त करने का प्रयास करता है।
अनुशासन के लाभ – अनुशासन से आत्मविश्वास, एकाग्रता, अच्छे संस्कार और कर्तव्यनिष्ठा का विकास होता है। अनुशासित विद्यार्थी भविष्य में एक अच्छा नागरिक बनता है।
उपसंहार – अनुशासन सफलता की पहली सीढ़ी है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने जीवन में अनुशासन अपनाना चाहिए। अनुशासित विद्यार्थी ही अपने परिवार, समाज और देश का नाम रोशन कर सकता है।
(v) पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता
Ans. प्रस्तावना – पर्यावरण हमारे चारों ओर उपस्थित प्राकृतिक वातावरण है। इसमें वायु, जल, भूमि, पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सभी शामिल हैं। स्वस्थ जीवन के लिए स्वच्छ पर्यावरण अत्यन्त आवश्यक है।
पर्यावरण प्रदूषण के कारण – आज औद्योगीकरण, वनों की कटाई, वाहनों से निकलने वाला धुआँ, प्लास्टिक का अत्यधिक प्रयोग तथा नदियों में कचरा डालने के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है।
पर्यावरण प्रदूषण के दुष्परिणाम – प्रदूषण से अनेक बीमारियाँ फैलती हैं। जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग, अनियमित वर्षा और प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएँ बढ़ती हैं। इससे मनुष्य, पशु-पक्षी और वनस्पतियों का जीवन प्रभावित होता है।
पर्यावरण संरक्षण के उपाय – हमें अधिक से अधिक पेड़ लगाने चाहिए। जल और बिजली की बचत करनी चाहिए। प्लास्टिक का प्रयोग कम करना चाहिए। नदियों और तालाबों को स्वच्छ रखना चाहिए। सार्वजनिक परिवहन का प्रयोग करना चाहिए तथा लोगों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना चाहिए।
उपसंहार – पर्यावरण की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यदि हम आज पर्यावरण की रक्षा करेंगे, तभी आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ और सुरक्षित भविष्य दे पाएँगे। इसलिए हमें संकल्प लेना चाहिए – ‘स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ जीवन’।