U.P Board Class 12 Sociology 340(JN) Question Paper 2025

U.P Board Class 12 Sociology 340(JN) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2025
समाजशास्त्र
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 100

नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

निर्देश :

i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रश्नों के अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

ii) प्रश्न संख्या 1 से 10 तक बहुविकल्पीय है। प्रश्न  संख्या 11 से 20 अति लघु उत्तरीय हैं, जिनका प्रत्येक उत्तर लगभग 25 शब्दों में देना है । प्रश्न संख्या 21 से 26 तक लघु उत्तरीय हैं जिनकी शब्द सीमा 50 शब्द है। प्रश्न संख्या 27 से 29 तक विस्तृत उत्तरीय हैं जिनका प्रत्येक उत्तर 150 शब्दों में देना है।

(बहुविकल्पीय प्रश्न)

नोट : निम्नलिखित प्रश्नों में प्रत्येक के चार विकल्प दिये गये हैं, जिनमें से केवल एक उत्तर सही है। सही उत्तर चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिये ।

1. निम्न में से कौन समाजशास्त्री नहीं है ?

(A) अगस्त कॉम्टे
(B) मैकाईवर
(C) जी.एस. घुर्ये
(D) डार्बिन

Ans. (D) डार्बिन

2. ग्रामीण एवं नगरीय समुदाय को पृथक करने का मुख्य आधार है –

(A) व्यवसाय की प्रकृति
(B) जनसंख्या का आकार
(C) सामाजिक सम्बन्ध की प्रकृति
(D) इनमें से सभी

Ans. (D) इनमें से सभी

3. ‘चिपको आन्दोलन’ सम्बन्धित है-

(A) वृक्षों की रक्षा से
(B) जल की रक्षा से
(C) खनिजों की रक्षा से
(D) पशुओं की रक्षा से

Ans. (A) वृक्षों की रक्षा से

4. इनमें से किसको प्रजातन्त्र का चौथा स्तम्भ कहा जाता है ?

(A) कार्यपालिका
(B) विधायिका
(C) न्यायपालिका
(D) प्रेस

Ans. (D) प्रेस

5. आर्य समाज के संस्थापक कौन हैं ?

(A) राजा राममोहन राय
(B) स्वामी दयानन्द सरस्वती
(C) विवेकानन्द
(D) महात्मा गांधी

Ans. (B) स्वामी दयानन्द सरस्वती

6. निम्नलिखित में से कौन संस्कृति की विशेषता नहीं है ?

(A) अनुकूलनशीलता
(B) अघि वैयक्तिक
(C) सामाजिक गुण
(D) जैविक उत्तराधिकार

Ans. (D) जैविक उत्तराधिकार

7. उदारीकरण का सम्बन्ध है

(A) सामाजिक नीति से
(B) उपनिवेशवादी नीति से
(C) शैक्षिक नीति से
(D) आर्थिक नीति से

Ans. (D) आर्थिक नीति से

8. ‘चक्रीय सिद्धांत’ के प्रवर्तक कौन थे ?

(A) ओसवाल्ड स्पेंगलर और अर्नोल्ड जे.
(B) मैकाईवर एवं पेज
(C) दुखर्जीम एवं सोरोकिन
(D) कॉम्टे और वेबर

Ans. (A) ओसवाल्ड स्पेंगलर और अर्नोल्ड जे.

9. निम्नांकित में से कौन परियोजना कार्य का चरण हैं।

(A) अध्ययन विषय का चुनाव
(B) अध्ययन प्रविधियों का चुनाव
(C) तथ्यों का संकलन
(D) उपर्युक्त सभी

Ans. (D) उपर्युक्त सभी

10. संस्कृति को भौतिक और अभौतिक संस्कृतियों में किसने वर्गीकृत किया है ?

(A) मॉर्गन
(B) वेबर
(C) सोरोकिन
(D) ऑगबर्न

Ans. (D) ऑगबर्न

(अति लघु-उत्तरीय प्रश्न)

11. ग्रामीण समाज की तीन विशेषताओं का उल्लेख कीजिये।
Ans.
ग्रामीण समाज की प्रमुख विशेषताएँ हैं— कृषि प्रधान व्यवसाय, जनसंख्या का कम घनत्व तथा लोगों के बीच घनिष्ठ और प्राथमिक सामाजिक सम्बन्ध। यहाँ परम्पराओं का भी अधिक प्रभाव होता है।

12. ‘नातेदारी’ को परिभाषित कीजिए ।
Ans.
नातेदारी वह सामाजिक सम्बन्ध है जो रक्त-संबंध, विवाह अथवा गोद लेने के आधार पर व्यक्तियों के बीच स्थापित होता है। जैसे— माता-पिता, भाई-बहन आदि।

13. ‘सामाजिक स्तरीकरण’ क्या है ?
Ans.
समाज का व्यक्तियों या समूहों में उच्चता-निम्नता के क्रम में विभिन्न स्तरों में विभाजन सामाजिक स्तरीकरण कहलाता है। जाति और वर्ग इसके प्रमुख आधार हैं।

14. ‘सांप्रदायिकता’ क्या है ?
Ans.
जब कोई धार्मिक समुदाय अपने हितों को अन्य समुदायों के हितों से अलग और सर्वोपरि मानकर संघर्ष या विरोध करता है, तो उसे सांप्रदायिकता कहते हैं।

15. ‘वर्ग’ से आप क्या समझते हैं ?
Ans.
वर्ग ऐसे व्यक्तियों का समूह है जिनकी आर्थिक स्थिति, आय, व्यवसाय या सामाजिक स्थिति लगभग समान होती है। वर्ग की सदस्यता सामान्यतः खुली होती है।

16. ‘हरित क्रांति’ के किन्हीं तीन प्रमुख प्रभावों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
हरित क्रांति से कृषि उत्पादन में वृद्धि हुई, खाद्यान्न के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ी तथा किसानों की आय में वृद्धि हुई। इसके साथ क्षेत्रीय आर्थिक असमानता भी बढ़ी।

17. औद्योगिकीकरण से आप क्या समझते हैं ?
Ans.
मशीनों, कारखानों और आधुनिक तकनीक के व्यापक प्रयोग द्वारा बड़े पैमाने पर वस्तुओं के उत्पादन की प्रक्रिया को औद्योगिकीकरण कहते हैं। इससे आर्थिक और सामाजिक संरचना में परिवर्तन होता है।

18. सामाजिक आन्दोलन क्या है ?
Ans.
किसी सामाजिक परिवर्तन, सुधार या अधिकार की प्राप्ति के लिए व्यक्तियों का संगठित एवं सामूहिक प्रयास सामाजिक आन्दोलन कहलाता है। उदाहरण— चिपको आन्दोलन।

19. समाज में ‘कानून’ की क्या भूमिका है ?
Ans.
कानून सामाजिक व्यवस्था बनाए रखता है, नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है तथा अपराध और सामाजिक अन्याय को नियंत्रित करता है। यह सामाजिक नियंत्रण का महत्वपूर्ण साधन है।

20. ‘साप्ताहिक बाजार से आप क्या समझते हैं ?
Ans.
ऐसा बाजार जो किसी निश्चित दिन सप्ताह में एक बार लगता है और जहाँ स्थानीय व्यापारी तथा उपभोक्ता वस्तुओं का क्रय-विक्रय करते हैं, साप्ताहिक बाजार कहलाता है।

(लघु-उत्तरीय प्रश्न)

21. आधुनिक जनसंपर्क माध्यम के लाभ-हानि स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
आधुनिक जनसंपर्क माध्यमों में टेलीविजन, इंटरनेट, मोबाइल, सोशल मीडिया और समाचार-पत्र प्रमुख हैं। इनके द्वारा सूचना शीघ्र प्राप्त होती है और दूर बैठे लोगों से सम्पर्क आसान होता है। शिक्षा और जागरूकता में भी इनका योगदान है। दूसरी ओर, इनके अत्यधिक प्रयोग से गलत सूचना, अफवाह, समय की बर्बादी और सामाजिक तनाव जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

22. भारत में ‘राष्ट्रीय एकीकरण’ की प्रमुख समस्याएं क्या है ?
Ans.
भारत में राष्ट्रीय एकीकरण के सामने जातिवाद, सांप्रदायिकता, भाषावाद, क्षेत्रवाद, आर्थिक असमानता और अलगाववादी प्रवृत्तियाँ प्रमुख समस्याएँ हैं। इनसे राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव प्रभावित होते हैं। लोकतांत्रिक मूल्यों, समान अवसर और आपसी सहयोग द्वारा इन समस्याओं को कम किया जा सकता है।

23. उपनिवेशवाद की अवधारणा का वर्णन कीजिये ।
Ans.
जब कोई शक्तिशाली देश किसी कमजोर देश या क्षेत्र पर राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक नियंत्रण स्थापित करके उसके संसाधनों का अपने हित में उपयोग करता है, तो इसे उपनिवेशवाद कहते हैं। भारत में ब्रिटिश शासन उपनिवेशवाद का प्रमुख उदाहरण है।

24. भारत में ग्राम पंचायतों की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
Ans.
ग्राम पंचायत ग्रामीण स्थानीय स्वशासन की प्रमुख संस्था है। यह गाँव में सड़क, स्वच्छता, पेयजल, प्रकाश, शिक्षा और विकास कार्यों में योगदान देती है। यह सरकारी योजनाओं को लागू करने तथा ग्रामीण समस्याओं के समाधान में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

25. भारत में ‘विविधता में एकता’ की अवधारणा क्या है ?
Ans.
भारत में विभिन्न धर्म, भाषाएँ, जातियाँ, संस्कृतियाँ, रीति-रिवाज और जीवन-शैलियाँ होने के बावजूद लोगों में राष्ट्रीय एकता की भावना विद्यमान है। अनेकता के बीच यह सामाजिक और राष्ट्रीय एकता ही ‘विविधता में एकता’ कहलाती है।

26. भारत में लैंगिक असमानता के प्रभावों की विवेचना कीजिए ।
Ans.
लैंगिक असमानता से महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और निर्णय लेने के अवसरों में भेदभाव का सामना करना पड़ता है। इससे उनकी आर्थिक निर्भरता और सामाजिक पिछड़ापन बढ़ता है तथा देश के मानव संसाधन और विकास की गति भी प्रभावित होती है।

(विस्तृत-उत्तरीय प्रश्न)

27. भारत में जन्मदर एवं मृत्युदर के उत्तरदायी कारकों की विवेचना कीजिए ।
Ans.
भारत में जन्मदर और मृत्युदर अनेक सामाजिक, आर्थिक तथा स्वास्थ्य संबंधी कारकों से प्रभावित होती हैं।

जन्मदर के प्रमुख कारक—

  1. कम आयु में विवाह।
  2. अशिक्षा और परिवार नियोजन की कम जानकारी।
  3. पुत्र प्राप्ति की इच्छा।
  4. ग्रामीण एवं कृषि प्रधान जीवन।
  5. परिवार नियोजन साधनों का सीमित उपयोग।
  6. सामाजिक एवं धार्मिक मान्यताएँ।

मृत्युदर के प्रमुख कारक—

  1. गरीबी और कुपोषण।
  2. चिकित्सा सुविधाओं की कमी।
  3. संक्रामक रोग।
  4. अशुद्ध पेयजल एवं अस्वच्छता।
  5. मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य की समस्याएँ।
  6. प्राकृतिक आपदाएँ और दुर्घटनाएँ।

निष्कर्ष: शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार, पोषण, स्वच्छता और परिवार नियोजन के प्रति जागरूकता से जन्मदर एवं मृत्युदर को प्रभावित करने वाले प्रतिकूल कारकों को कम किया जा सकता है।

अथवा

भारतीय समाज में आधुनिकीकरण की भूमिका की विवेचना कीजिए ।
Ans.
आधुनिकीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें समाज में वैज्ञानिक दृष्टिकोण, तर्कशीलता, तकनीकी विकास, शिक्षा, औद्योगिकीकरण और लोकतांत्रिक मूल्यों का विस्तार होता है।

भारतीय समाज में आधुनिकीकरण ने अनेक महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। शिक्षा के प्रसार से वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जागरूकता बढ़ी है। औद्योगिकीकरण एवं नगरीकरण से रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए हैं। महिलाओं की शिक्षा और रोजगार में भागीदारी बढ़ी है। जाति, लिंग और परम्परागत रूढ़ियों के प्रभाव में भी परिवर्तन आया है। लोकतंत्र, समानता और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के विचार मजबूत हुए हैं।

हालाँकि आधुनिकीकरण के कारण पारिवारिक तनाव, उपभोक्तावाद और सांस्कृतिक परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हुई हैं। फिर भी सामाजिक और आर्थिक विकास में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।

28. जाति व्यवस्था की विशेषताओं की व्याख्या कीजिये ।
Ans.
जाति भारतीय समाज की एक प्रमुख सामाजिक व्यवस्था रही है। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. जन्म पर आधारित सदस्यता — व्यक्ति जिस जाति में जन्म लेता है, सामान्यतः उसी जाति का सदस्य माना जाता है।
  2. सामाजिक स्तरीकरण — जातियों में उच्च और निम्न का क्रम पाया जाता है।
  3. अन्तर्विवाह — परम्परागत रूप से विवाह अपनी जाति के भीतर किया जाता था।
  4. वंशानुगत व्यवसाय — प्रत्येक जाति से कुछ विशेष व्यवसाय जुड़े होते थे।
  5. सामाजिक प्रतिबन्ध — खान-पान और सामाजिक मेल-जोल पर अनेक प्रतिबन्ध पाए जाते थे।
  6. सामाजिक नियंत्रण — जातीय नियमों का पालन कराने के लिए जाति पंचायतों की भूमिका रही है।

आधुनिक शिक्षा, नगरीकरण, औद्योगिकीकरण और कानूनों के कारण जाति व्यवस्था में काफी परिवर्तन आया है।

अथवा

‘जनजातीय संघर्ष’ को स्पष्ट कीजिए तथा इसके प्रमुख कारणों की व्याख्या कीजिए ।
Ans.
जनजातीय समुदायों द्वारा अपने जल, जंगल, जमीन, संस्कृति, अधिकारों और संसाधनों की रक्षा के लिए किया जाने वाला सामूहिक विरोध या आन्दोलन जनजातीय संघर्ष कहलाता है।

इसके प्रमुख कारण हैं—

  1. भूमि से विस्थापन।
  2. जंगल एवं प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण।
  3. खनन और औद्योगिक परियोजनाओं से विस्थापन।
  4. साहूकारों एवं बिचौलियों का शोषण।
  5. जनजातीय संस्कृति और परम्पराओं में हस्तक्षेप।
  6. रोजगार तथा विकास के अवसरों की कमी।
  7. राजनीतिक एवं प्रशासनिक उपेक्षा।

जनजातीय संघर्षों का मुख्य उद्देश्य अपनी भूमि, संसाधनों, संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की रक्षा करना रहा है।

29. भूमण्डलीकरण द्वारा घटित परिवर्तनों की विवेचना कीजिए।
Ans.
भूमण्डलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ, बाजार, तकनीक, संचार और समाज एक-दूसरे से अधिक जुड़ते जा रहे हैं।

भारत में भूमण्डलीकरण से अनेक परिवर्तन हुए हैं। विदेशी निवेश और बहुराष्ट्रीय कम्पनियों का विस्तार हुआ तथा बाजार में वस्तुओं और सेवाओं की विविधता बढ़ी। सूचना एवं संचार तकनीक के विकास से विश्व के विभिन्न भागों से सम्पर्क आसान हुआ। रोजगार के नए अवसर तथा नई तकनीक उपलब्ध हुई। शिक्षा और व्यापार के अंतरराष्ट्रीय अवसर भी बढ़े।

इसके साथ उपभोक्तावाद, प्रतिस्पर्धा और स्थानीय उद्योगों पर दबाव बढ़ा। आर्थिक असमानता तथा पारम्परिक जीवन-शैली में परिवर्तन जैसी समस्याएँ भी सामने आईं।

इस प्रकार भूमण्डलीकरण ने भारतीय समाज और अर्थव्यवस्था में व्यापक परिवर्तन किए हैं।

अथवा

लोकतंत्र को परिभाषित कीजिए। लोकतंत्र में दबाव समूहों की भूमिका का वर्णन कीजिए ।
Ans.
लोकतंत्र शासन की वह व्यवस्था है जिसमें जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और शासन जनता की इच्छा के अनुसार संचालित होता है। लोकतंत्र में समानता, स्वतंत्रता, अधिकार और कानून का शासन महत्वपूर्ण होते हैं।

दबाव समूहों की भूमिका—

  1. ये सरकार को जनहित से जुड़े विषयों पर निर्णय लेने के लिए प्रभावित करते हैं।
  2. विभिन्न सामाजिक और आर्थिक समूहों के हितों को सरकार तक पहुँचाते हैं।
  3. जनमत निर्माण में सहायता करते हैं।
  4. सरकार की नीतियों और कार्यों की आलोचना करते हैं।
  5. नागरिकों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करते हैं।
  6. लोकतांत्रिक भागीदारी को बढ़ावा देते हैं।

इस प्रकार दबाव समूह लोकतंत्र में जनता और सरकार के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में कार्य करते हैं।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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