U.P Board Class 12 History 321(IG) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2025
इतिहास
समयः तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांकः 70
नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
निर्देश :
i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।
ii) इस प्रश्नपत्र में पाँच खण्ड हैं। खण्ड ‘क’ मे 10 बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, खण्ड ‘ख’ में 5 अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, खण्ड ‘ग’ में 6 लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, खण्ड ‘घ’ में 3 विस्तृत उत्तरीय प्रश्न हैं तथा खण्ड ‘ङ’ में 10 ऐतिहासिक तिथियों व 5 मानचित्र से सम्बन्धित प्रश्न हैं।
iii) सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सामने अंकित हैं।
खण्ड ‘क’
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के प्रथम डायरेक्टर जनरल कौन थे ?
i) जॉन मार्शल
ii) आर० व्हीलर
iii) कनिंघम
iv) वी०ए० स्मिथ
Ans. iii) कनिंघम
2. महाभारत के रचनाकार कौन हैं?
i) अर्जुन
ii) श्रीकृष्ण
iii) विदुर
iv) वेदव्यास
Ans. iv) वेदव्यास
3. निम्न में से कौन खालसा पंथ के संस्थापक थे ?
i) गुरु गोविन्द सिंह
ii) गुरु अर्जुन देव
iii) गुरु तेग बहादुर
iv) गुरु नानक देव जी
Ans. i) गुरु गोविन्द सिंह
4. बंगाल में स्थायी बन्दोबस्त व्यवस्था किसने लागू की थी ?
i) लॉर्ड वेलेजली
ii) लॉर्ड कार्नवालिस
iii) लॉर्ड एलनबरो
iv) लॉर्ड डलहौजी
Ans. ii) लॉर्ड कार्नवालिस
5. रामकृष्ण मिशन किससे सम्बन्धित है ?
i) ईश्वर चन्द्र विद्यासागर
ii) केशव चन्द्र सेन
iii) स्वामी विवेकानन्द
iv) राजा राममोहन राय
Ans. iii) स्वामी विवेकानन्द
6. निम्न में से किसने संथालों का नेतृत्व किया था ?
i) सिद्ध
ii) कान्हू
iii) भगत
iv) (i) और (ii) दोनों
Ans. iii) भगत
7. ‘भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम’ नामक पुस्तक के लेखक कौन थे ?
i) बाल गंगाधर तिलक
ii) वी० डी० सावरकर
iii) महात्मा गाँधी
iv) सुभाष चन्द्र बोस
Ans. ii) वी० डी० सावरकर
8. चौरी-चौरा घटना के बाद किस आन्दोलन को वापस लिया गया ?
i) चम्पारण सत्याग्रह
ii) बारदोली आन्दोलन
iii) असहयोग आन्दोलन
iv) होमरूल लीग आन्दोलन
Ans. iii) असहयोग आन्दोलन
9. भारत छोड़ो आन्दोलन कब शुरू हुआ ?
i) अगस्त, 1942
ii) सितम्बर, 1942
iii) अगस्त, 1944
iv) सितम्बर, 1944
Ans. i) अगस्त, 1942
10. महात्मा गाँधी को किसने सर्वप्रथम ‘राष्ट्रपिता’ कहकर सम्बोधित किया ?
i) सरदार वल्लभभाई पटेल
ii) जवाहरलाल नेहरू
iii) भगत सिंह
iv) सुभाष चन्द्र बोस
Ans. iv) सुभाष चन्द्र बोस
खण्ड – ‘ग’
(लघु उत्तरी प्रश्न)
16. अलवार एवं नयनार के विषय में आप क्या जानते हैं?
Ans. अलवार और नयनार दक्षिण भारत के प्रमुख भक्ति सन्त थे। अलवार सन्त भगवान विष्णु के भक्त थे, जबकि नयनार सन्त भगवान शिव की उपासना करते थे। उन्होंने स्थानीय भाषाओं, विशेषकर तमिल, में भक्ति गीतों की रचना की। उन्होंने जातिगत भेदभाव और कर्मकाण्डों की अपेक्षा ईश्वर के प्रति प्रेम एवं समर्पण पर बल दिया। इनके उपदेशों से दक्षिण भारत में भक्ति आन्दोलन का प्रसार हुआ।
17. सूर्यास्त कानून के विषय में बताइए।
Ans. स्थायी बन्दोबस्त के अन्तर्गत बंगाल में जमींदारों को निश्चित तिथि तक सरकार को लगान जमा करना पड़ता था। यदि निर्धारित दिन सूर्यास्त तक लगान जमा नहीं किया जाता था, तो उनकी जमींदारी नीलाम की जा सकती थी। इस कठोर नियम को सूर्यास्त कानून कहा जाता था। इससे अनेक जमींदारों की जमीनें नीलाम हो गईं।
18. वयस्क मताधिकार पर आधारित लोकतन्त्र की परिभाषा दीजिए।
Ans. वयस्क मताधिकार पर आधारित लोकतन्त्र वह शासन व्यवस्था है जिसमें निर्धारित वयस्क आयु प्राप्त सभी नागरिकों को बिना धर्म, जाति, लिंग या आर्थिक स्थिति के भेदभाव के मतदान का समान अधिकार प्राप्त होता है। भारत में 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार है।
19. स्तूप का क्या अर्थ है ?
Ans. स्तूप बौद्ध धर्म से सम्बन्धित एक अर्द्धगोलाकार संरचना है, जिसमें सामान्यतः बुद्ध या बौद्ध भिक्षुओं के अवशेष अथवा उनसे सम्बन्धित पवित्र वस्तुएँ रखी जाती थीं। स्तूपों का निर्माण श्रद्धा, स्मृति और पूजा के उद्देश्य से किया जाता था। साँची का स्तूप इसका प्रसिद्ध उदाहरण है।
20. भारतीय इतिहास में बुकानन का विवरण (सर्वेक्षण) कितिमा मूल्यवान है ?
Ans. फ्रांसिस बुकानन एक चिकित्सक तथा सर्वेक्षक था, जिसने उन्नीसवीं शताब्दी के प्रारम्भ में ईस्ट इंडिया कम्पनी के क्षेत्रों का सर्वेक्षण किया। उसके विवरणों में कृषि, वनस्पति, पशुओं, जनसंख्या, स्थानीय व्यवसायों तथा ग्रामीण जीवन की जानकारी मिलती है। इसलिए उसके सर्वेक्षण इतिहासकारों के लिए आर्थिक और सामाजिक इतिहास के अध्ययन में उपयोगी हैं। हालाँकि, उसके विवरणों को औपनिवेशिक दृष्टिकोण की सीमाओं को ध्यान में रखकर पढ़ना चाहिए।
21. सिन्धु सभ्यता की दो विशेषताएँ लिखिये।
Ans.
- सुनियोजित नगर व्यवस्था: सिन्धु सभ्यता के नगर व्यवस्थित सड़कों, मकानों तथा योजनाबद्ध भवन निर्माण के लिए प्रसिद्ध थे।
- उन्नत जल निकासी व्यवस्था: यहाँ पक्की ईंटों से बनी नालियाँ थीं, जो घरों से निकलने वाले गन्दे पानी को बाहर ले जाती थीं।
खण्ड ‘घ’
(विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)
22. हड़प्पा शहरों की जल निकासी प्रणाली का वर्णन कीजिए।
Ans. हड़प्पा सभ्यता की जल निकासी प्रणाली अत्यन्त विकसित और व्यवस्थित थी। यह इस सभ्यता की नगर-योजना की प्रमुख विशेषता थी।
- सुनियोजित नालियाँ: नगरों में सड़कों के किनारे पक्की ईंटों से नालियाँ बनाई जाती थीं।
- घरों से जुड़ाव: अधिकांश घरों के स्नानघर तथा जल निकासी के रास्ते मुख्य नालियों से जुड़े होते थे।
- ढकी हुई नालियाँ: मुख्य नालियों को ऊपर से ईंटों या पत्थर की पट्टियों से ढका जाता था।
- सफाई की व्यवस्था: नालियों में जगह-जगह निरीक्षण एवं सफाई के लिए खुलने वाले स्थान बनाए जाते थे।
- गन्दे पानी की निकासी: घरों से निकलने वाला पानी छोटी नालियों से होकर बड़ी नालियों में पहुँचता था।
- स्वच्छता पर ध्यान: जल निकासी की सुव्यवस्थित व्यवस्था से नगरों को साफ रखने में सहायता मिलती थी।
निष्कर्ष: हड़प्पा सभ्यता की जल निकासी प्रणाली से पता चलता है कि वहाँ के निवासी स्वच्छता, सार्वजनिक स्वास्थ्य और नगर नियोजन के प्रति जागरूक थे।
अथवा
जैन धर्म की महत्वपूर्ण शिक्षाओं का वर्णन कीजिए।
Ans. जैन धर्म भारत के प्राचीन धर्मों में से एक है। इसके 24वें तीर्थंकर महावीर स्वामी ने इसकी शिक्षाओं के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जैन धर्म की प्रमुख शिक्षाएँ निम्नलिखित हैं।
- अहिंसा: किसी भी जीव को मन, वचन और कर्म से कष्ट नहीं पहुँचाना चाहिए।
- सत्य: मनुष्य को सदैव सत्य बोलना चाहिए।
- अस्तेय: बिना अनुमति किसी दूसरे की वस्तु नहीं लेनी चाहिए।
- अपरिग्रह: आवश्यकता से अधिक धन-संपत्ति और वस्तुओं का संग्रह नहीं करना चाहिए।
- ब्रह्मचर्य: इन्द्रियों पर संयम रखना चाहिए।
- कर्म सिद्धान्त: मनुष्य अपने कर्मों के अनुसार फल प्राप्त करता है।
- मोक्ष: जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति प्राप्त करना जीवन का परम लक्ष्य है।
- त्रिरत्न: सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र मोक्ष प्राप्ति के प्रमुख साधन हैं।
निष्कर्ष: जैन धर्म ने अहिंसा, सत्य, संयम और जीवों के प्रति दया का संदेश दिया।
23. अल-बिरुनी कौन था ? इतिहास में वह क्यों प्रसिद्ध है ?
Ans. अल-बिरुनी मध्य एशिया का एक प्रसिद्ध विद्वान था। उसका जन्म 973 ईस्वी में ख्वारिज्म क्षेत्र में हुआ था। वह गणित, खगोल विज्ञान, भूगोल, दर्शन और इतिहास का ज्ञाता था। महमूद गजनवी के समय वह भारतीय उपमहाद्वीप के संपर्क में आया।
इतिहास में उसकी प्रसिद्धि के प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं।
- भारत का अध्ययन: उसने भारतीय समाज, धर्म, दर्शन और संस्कृति का गहन अध्ययन किया।
- प्रमुख ग्रन्थ: उसने किताब-उल-हिन्द नामक प्रसिद्ध ग्रन्थ की रचना की।
- धार्मिक एवं सामाजिक जानकारी: उसने भारतीय धार्मिक मान्यताओं, जाति व्यवस्था, रीति-रिवाजों और त्योहारों का वर्णन किया।
- संस्कृत का ज्ञान: उसने संस्कृत भाषा सीखी और भारतीय ग्रन्थों का अध्ययन किया।
- तुलनात्मक दृष्टिकोण: उसने भारतीय परम्पराओं की तुलना अन्य समाजों की मान्यताओं से की।
- ऐतिहासिक महत्व: उसके विवरणों से ग्यारहवीं शताब्दी के भारतीय समाज और संस्कृति को समझने में सहायता मिलती है।
निष्कर्ष: अल-बिरुनी का किताब-उल-हिन्द मध्यकालीन भारत के सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास का महत्वपूर्ण स्रोत है।
अथवा
भक्ति आन्दोलन के प्रमुख सिद्धान्तों का वर्णन कीजिए।
Ans. भक्ति आन्दोलन मध्यकालीन भारत का एक महत्वपूर्ण धार्मिक एवं सामाजिक आन्दोलन था। इसके सन्तों ने ईश्वर के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण को मुक्ति का प्रमुख साधन बताया।
इसके प्रमुख सिद्धान्त निम्नलिखित हैं।
- ईश्वर के प्रति भक्ति: ईश्वर की सच्ची भक्ति को जीवन का प्रमुख उद्देश्य माना गया।
- एकेश्वरवाद: अनेक सन्तों ने ईश्वर को एक और सर्वव्यापी माना।
- गुरु का महत्व: आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त करने में गुरु को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया।
- जातिगत भेदभाव का विरोध: अनेक सन्तों ने जाति के आधार पर ऊँच-नीच का विरोध किया।
- कर्मकाण्डों का विरोध: बाहरी आडम्बर की अपेक्षा सच्चे मन से ईश्वर की आराधना पर बल दिया गया।
- लोकभाषाओं का प्रयोग: सन्तों ने हिन्दी, पंजाबी, बंगाली और तमिल जैसी भाषाओं में उपदेश दिए।
- मानव समानता: प्रेम, दया, सद्भाव और भाईचारे को महत्व दिया गया।
- नाम-स्मरण: ईश्वर के नाम का स्मरण और कीर्तन भक्ति के प्रमुख साधन माने गए।
निष्कर्ष: भक्ति आन्दोलन ने धार्मिक विचारों को जनसाधारण तक पहुँचाया और भारतीय समाज में समानता, प्रेम तथा धार्मिक सहिष्णुता की भावना को बढ़ावा दिया।
24. संथालों के विद्रोह के कारण, प्रकृति और महत्व की विवेचना कीजिए।
Ans संथाल विद्रोह 1855–56 में ब्रिटिश शासन और शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध हुआ। इसका प्रमुख क्षेत्र राजमहल की पहाड़ियाँ और वर्तमान झारखंड के संथाल-बहुल इलाके थे। सिद्धू और कान्हू इसके प्रमुख नेता थे। चाँद और भैरव ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
1. विद्रोह के कारण
- जमींदारों का शोषण: जमींदार संथालों से अधिक लगान वसूलते थे।
- महाजनों का अत्याचार: महाजन ऊँची ब्याज दरों पर ऋण देते और धोखाधड़ी से उनकी भूमि पर कब्जा कर लेते थे।
- ब्रिटिश प्रशासन: औपनिवेशिक कानून और प्रशासन संथालों के हितों की रक्षा नहीं कर पा रहे थे।
- भूमि से बेदखली: बाहरी लोगों के हस्तक्षेप से संथालों की पारम्परिक भूमि और आजीविका खतरे में पड़ गई।
- आर्थिक शोषण: व्यापारियों, ठेकेदारों और अन्य बाहरी लोगों के शोषण से संथालों में असन्तोष बढ़ा।
2. विद्रोह की प्रकृति
- जून 1855 में सिद्धू और कान्हू के नेतृत्व में विद्रोह का व्यापक आरम्भ हुआ।
- संथालों ने शोषणकारी महाजनों, जमींदारों और ब्रिटिश अधिकारियों के विरुद्ध संघर्ष किया।
- विद्रोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया।
- अंग्रेजों ने सैन्य शक्ति का प्रयोग करके विद्रोह को दबा दिया।
- इस संघर्ष में अनेक संथाल मारे गए और विद्रोह का दमन किया गया।
3. विद्रोह का महत्व
- इसने औपनिवेशिक शासन और शोषणकारी आर्थिक व्यवस्था के विरुद्ध आदिवासी प्रतिरोध को प्रकट किया।
- इसने भूमि, आजीविका और सांस्कृतिक स्वायत्तता की रक्षा की भावना को मजबूत किया।
- विद्रोह के बाद संथाल क्षेत्रों के प्रशासन में बदलाव किए गए और संथाल परगना क्षेत्र के गठन की दिशा में कदम उठे।
- यह भारत के प्रमुख आदिवासी विद्रोहों में गिना जाता है।
निष्कर्ष: संथाल विद्रोह केवल आर्थिक शोषण के विरुद्ध संघर्ष नहीं था, बल्कि अपनी भूमि, स्वतंत्रता और सामाजिक पहचान की रक्षा का महत्वपूर्ण आन्दोलन भी था।
अथवा
भारत के संविधान की मूलभूत विशेषताओं पर लेख लिखिये।
Ans. भारतीय संविधान देश का सर्वोच्च कानून है। इसे संविधान सभा ने 26 नवम्बर 1949 को अंगीकृत किया और यह 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसकी प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं।
- लिखित एवं विस्तृत संविधान: भारतीय संविधान में शासन व्यवस्था, नागरिकों के अधिकारों और संस्थाओं के कार्यों का विस्तृत वर्णन है।
- संप्रभुता: भारत अपने आन्तरिक और बाहरी मामलों में स्वतंत्र है।
- समाजवादी एवं पंथनिरपेक्ष राज्य: संविधान सामाजिक-आर्थिक न्याय और सभी धर्मों के प्रति समान व्यवहार की व्यवस्था करता है।
- लोकतांत्रिक गणराज्य: भारत में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव करती है और राष्ट्राध्यक्ष निर्वाचित होता है।
- संसदीय शासन प्रणाली: केन्द्र में राष्ट्रपति संवैधानिक प्रमुख और प्रधानमंत्री तथा मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका हैं।
- संघात्मक व्यवस्था: केन्द्र और राज्यों के बीच शक्तियों का संवैधानिक विभाजन किया गया है।
- मौलिक अधिकार: नागरिकों को समानता, स्वतंत्रता और धार्मिक स्वतंत्रता सहित विभिन्न मौलिक अधिकार प्राप्त हैं।
- राज्य के नीति-निदेशक तत्व: ये सरकार को सामाजिक और आर्थिक न्याय पर आधारित कल्याणकारी राज्य बनाने का मार्गदर्शन देते हैं।
- स्वतंत्र न्यायपालिका: न्यायपालिका संविधान की रक्षा करती है तथा कानूनों की संवैधानिकता की समीक्षा कर सकती है।
- सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार: 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के पात्र नागरिकों को मतदान का अधिकार प्राप्त है।
- मौलिक कर्तव्य: नागरिकों के लिए संविधान, राष्ट्रीय प्रतीकों और देश की एकता का सम्मान करने सहित कर्तव्य निर्धारित किए गए हैं।
- संशोधन की व्यवस्था: संविधान में समय और परिस्थितियों के अनुसार संशोधन किया जा सकता है, लेकिन उसकी मूल संरचना नष्ट नहीं की जा सकती।
निष्कर्ष: भारतीय संविधान लोकतन्त्र, स्वतंत्रता, समानता, न्याय और बन्धुत्व के आदर्शों पर आधारित है। यह देश की एकता और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है।
25. निम्नलिखित ऐतिहासिक तिथियों से सम्बन्धित घटनाओं का उल्लेख कीजिए :
क) 321 ई०पू०
Ans. चन्द्रगुप्त मौर्य ने मगध में मौर्य साम्राज्य की स्थापना की। इसे मौर्य सत्ता के उदय से सम्बन्धित माना जाता है।
ख) 1829 ई०
Ans. लॉर्ड विलियम बेंटिंक ने बंगाल में सती प्रथा को कानून द्वारा प्रतिबन्धित किया।
ग) 973 ई०
Ans. तैलप द्वितीय ने राष्ट्रकूट सत्ता को समाप्त करके कल्याणी के पश्चिमी चालुक्य वंश की स्थापना की।
घ) 1336 ई०
Ans. हरिहर और बुक्का ने विजयनगर साम्राज्य की स्थापना की।
ङ) 1605 ई०
Ans. मुगल सम्राट अकबर की मृत्यु हुई और जहाँगीर मुगल सम्राट बना।
च) 1875 ई०
Ans. स्वामी दयानन्द सरस्वती ने बम्बई में आर्य समाज की स्थापना की।
छ) 1885 ई०
Ans. भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना हुई। इसके प्रथम अधिवेशन की अध्यक्षता डब्ल्यू. सी. बनर्जी ने की।
ज) 1907 ई०
Ans. सूरत अधिवेशन में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस नरम दल और गरम दल में विभाजित हो गई।
झ) 1942 ई०
Ans. महात्मा गाँधी के नेतृत्व में भारत छोड़ो आन्दोलन आरम्भ हुआ। 8 अगस्त को प्रस्ताव पारित किया गया और 9 अगस्त से व्यापक गिरफ्तारियाँ शुरू हुईं।
ञ) 1935 ई०
Ans. ब्रिटिश संसद ने भारत शासन अधिनियम, 1935 पारित किया। इसमें प्रान्तीय स्वायत्तता तथा संघीय व्यवस्था का प्रस्ताव था।
26. मानचित्र सम्बन्धी प्रश्न :
दिये गए भारत के रेखा-मानचित्र में निम्नलिखित स्थानों को चिह्न द्वारा दर्शाइए तथा उनके नाम भी लिखिए।
सही नाम तथा सही स्थान दर्शाने के लिए 1 + 1 अंक निर्धारित हैं।
i) वह स्थान जहाँ हर्षवर्धन की परवर्ती राजधानी स्थित थी।
Ans. कन्नौज
ii) वह स्थान जहाँ ताजमहल स्थित है।
Ans. आगरा
iii) वह स्थान जहाँ हिंसा होने पर महात्मा गाँधी ने असहयोग आन्दोलन वापस ले लिया।
Ans. चौरी-चौरा
iv) वह स्थान जहाँ 1929 ई० में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन हुआ था।
Ans. लाहौर
v) वह स्थान जहाँ बुद्ध को ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।
Ans. बोधगया