राज्य से साम्राज्य : अध्याय -7

इस अध्याय में रोशन के रुपये वाली सामग्री बच्चे की तस्वीर के साथ लगाएं। हम जिन शेरों के चित्र रुपयों-पैसों पर देखते हैं उनका एक लंबा इतिहास है। उन्हें पत्थरों को काट कर बनाया गया और फिर उन्हें सारनाथ में एक विशाल स्तंभ पर स्थापित किया गया था। (इस विषय में तुमने अध्याय 6 में पढ़ा।)

इतिहास के महानतम राजाओं में से एक, अशोक के निर्देश पर इसके जैसे कई स्तंभों और पत्थरों पर अभिलेख उत्कीर्ण किए गए। इसके पहले कि हम यह जानें कि इन अभिलेखों में क्या लिखा है, यह समझने की कोशिश करें कि उनके राज्य को साम्राज्य क्यों कहा जाता है।

अशोक जिस साम्राज्य पर शासन करते थे उसकी स्थापना उनके दादा चन्द्रगुप्त मौर्य ने लगभग 2300 साल पहले की थी। चाणक्य या कौटिल्य नाम के एक बुद्धिमान व्यक्ति ने चन्द्रगुप्त की सहायता की थी। चाणक्य के कई विचार हमें अर्थशास्त्र नाम की किताब में मिलते हैं।

साम्राज्य में बहुत-से नगर थे। (मानचित्र में उन्हें काले बिन्दुओं से दिखाया गया है।) इनमें साम्राज्य की राजधानी पाटलिपुत्र, उज्जैन और तक्षशिला जैसे नगर प्रमुख थे। तक्षशिला उत्तर-पश्चिम और मध्य एशिया के लिए आने-जाने का मार्ग था। दूसरी तरफ़ उज्जैन उत्तरी भारत से दक्षिणी भारत जाने वाले रास्ते में पड़ता था। शायद नगरों में व्यापारी, सरकारी अधिकारी और शिल्पकार रहा करते थे।

वंश

जब एक ही परिवार के कई सदस्य एक के बाद एक राजा बनते हैं तो उन्हें एक ही वंश का कहा जाता है। मौर्य वंश में तीन महत्वपूर्ण राजा हुए चन्द्रगुप्त, उसका बेटा बिन्दुसार और बिन्दुसार का पुत्र अशोक।

साम्राज्य के बहुत बड़े क्षेत्रों में किसानों और पशुपालकों के गाँव बसे हुए थे। मध्य भारत जैसे इलाकों में. ज्यादातर हिस्सा जंगलों से भरा हुआ था। वहाँ पर लोग फल-फूल का संग्रहण और जानवरों का शिकार करके जीविका चलाते थे। साम्राज्य के अलग-अलग इलाकों में लोग भिन्न-भिन्न भाषाएँ बोलते थे। वे लोग शायद अलग-अलग प्रकार का भोजन करते थे और यहाँ तक कि अलग-अलग किस्म की पोशाक भी पहनते थे।

जिन जगहों पर अशोक के शिलालेख मिले हैं उन्हें लाल बिन्दुओं से दिखाया गया है। ये सारे इलाके साम्राज्य के भीतर थे। उन देशों के नाम बताओ जहाँ अशोक के अभिलेख मिले हैं। भारत के कौन-से राज्य मौर्य साम्राज्य से बाहर थे?

राज्य साम्राज्य से कैसे भिन्न है?

• चूँकि साम्राज्य राज्यों से बड़े होते हैं और उनकी रक्षा के लिए बड़ी सेनाओं की ज़रूरत होती है, इसीलिए सम्राटों को राजाओं की तुलना में ज़्यादा संसाधनों की ज़रूरत होती है।

• इसी कारण उन्हें बड़ी संख्या में कर इकट्ठा करने वाले अधिकारियों की ज़रूरत होती है।

साम्राज्य का प्रशासन

चूँकि मौर्य साम्राज्य बहुत बड़ा था, इसलिए अलग-अलग हिस्सों पर अलग-अलग ढंग से शासन किया जाता था। पाटलिपुत्र और उसके आस-पास के इलाकों पर सम्राट का सीधा नियंत्रण था। इसका मतलब यह हुआ कि इस इलाके के गाँवों और शहरों के किसानों, पशुपालकों, शिल्पकारों और व्यापारियों से कर इकट्ठा करने के लिए राजा अधिकारियों की नियुक्ति करता था। जो राजा के आदेशों का उल्लंघन करते थे, अधिकारी उनको सज़ा भी देते थे। इनमें से कई अधिकारियों को वेतन भी दिया जाता था। संदेशवाहक एक जगह से दूसरी जगह घूमते रहते थे और राजा के जासूस अधिकारियों के कार्य-कलाप पर नज़र रखते थे। इन सबके ऊपर सम्राट था जो राज-परिवार एवं वरिष्ठ मंत्रियों की सहायता से सब पर नियंत्रण रखता था।

मौर्य साम्राज्य के भीतर कई छोटे क्षेत्र या प्रांत थे। इन पर तक्षशिला या उज्जैन जैसी प्रांतीय राजधानियों से शासन किया जाता था। कुछ हद तक पाटलिपुत्र से इन क्षेत्रों पर नियंत्रण रखा जाता था और अक्सर राजकुमारों को वहाँ का राज्यपाल (गवर्नर) बना कर भेजा जाता था। लेकिन ऐसा लगता है कि इन जगहों पर स्थानीय परंपराओं और नियमों को ही माना जाता था।

प्रादेशिक केंद्रों के बीच विस्तृत क्षेत्र थे। इनके इलाकों में मौर्य शासक सिर्फ़ मार्गों और नदियों पर नियंत्रण रखने की कोशिश करते थे जो कि आवागमन के लिए महत्वपूर्ण थे। यहाँ से उन्हें जो भी संसाधन कर और भेंट के रूप में मिलते थे, उसे इकट्ठा किया जाता था। उदाहरण के लिए अर्थशास्त्र में यह लिखा है कि उत्तर-पश्चिम कंबल के लिए और दक्षिण भारत सोने और कीमती पत्थरों के लिए प्रसिद्ध था। संभव है कि संसाधन नज़राने के रूप में इकट्ठे किए जाते थे।

और अंत में जंगल वाले इलाके आते थे, वहाँ रहने वाले लोग काफ़ी हद तक स्वतंत्र थे। उनसे यह उम्मीद की जाती थी कि वे मौर्य पदाधिकारियों को हाथी, लकड़ी, मधु और मोम जैसी चीजें लाकर दें।

नज़राना

जहाँ ‘कर’ नियमित ढंग से इकट्ठे किए जाते थे वहीं ‘नज़राना’ अनियमित रूप से जब भी संभव हो, इकट्ठा किया जाता था। ऐसे नज़राने विविध पदार्थों के रूप में प्रायः ऐसे लोगों से लिए जाते थे जो स्वेच्छा से इसे देते थे।

राजधानी में सम्राट

मेगस्थनीज़, चन्द्रगुप्त के दरबार में पश्चिम एशिया के यूनानी राजा सेल्युकस निकेटर का राजदूत था। मेगस्थनीज़ ने जो कुछ देखा उसका विवरण दिया।

यहाँ हम उसके विवरण का एक अंश दे दे रहे हैं:

सम्राट का, जनता के सामने आने के अवसरों पर शोभायात्रा रूप में जश्न मनाया जाता है। उन्हें एक सोने की पालकी में ले जाया जाता है। उनके अंगरक्षक सोने और चाँदी से अलंकृत हाथियों पर सवार रहते हैं। कुछ अंगरक्षक पेड़ों को लेकर चलते हैं। इन पेड़ों पर प्रशिक्षित तोतों का एक झुण्ड रहता है जो सम्राट के सिर के चारों तरफ चक्कर लगाता रहता है। राजा सामान्यतः हथियारबंद महिलाओं से घिरे होते हैं। वे हमेशा इस बात से डरे रहते हैं कि कहीं कोई उनकी हत्या करने की कोशिश न करे। उनके खाना खाने के पहले खास नौकर उस खाने को चखते हैं। वे लगातार दो रात एक ही कमरे में नहीं सोते थे।

और पाटलिपुत्र (आधुनिक पटना) के बारे में:

यह एक विशाल और खूबसूरत नगर है। यह एक विशाल प्राचीर से घिरा है जिसमें 570 बुर्ज और 64 द्वार हैं। दो और तीन मंज़िल वाले घर, लकड़ी और कच्ची ईंटों से बने हैं। राजा का महल भी काठ से बना है जिसे पत्थर की नक्काशी से अलंकृत किया गया है। यह चारों तरफ़ से उद्यानों और चिड़ियों के लिए बने बसेरों से घिरा है।

राजा द्वारा खाना खाने के पहले खास नोकर उस खाने को क्यों चखत थे? पाटलिपुत्र मोहनजोदड़ो से किस तरह भिन्न था? (संकेतः अध्याय 3 देखा)

अशोक-एक अनोखा सम्राट

अशोक मौर्य वंश के सबसे प्रसिद्ध शासक थे। वह ऐसे पहले शासक थे जिन्होंने अभिलेखों द्वारा जनता तक अपने संदेश पहुँचाने की कोशिश की। अशोक के ज़्यादातर अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में हैं।

अशोक का कलिंग युद्ध

कलिंग तटवर्ती उड़ीसा का प्राचीन नाम है (मानचित्र 5, पृष्ठ 64 देखो)। अशोक ने कलिंग को जीतने के लिए एक युद्ध लड़ा। लेकिन युद्धजनित हिंसा और खून-खराबा देखकर उन्हें युद्ध से वितृष्णा हो गई। उन्होंने निर्णय लिया कि वे भविष्य में कभी युद्ध नहीं करेंगे।

कलिंग युद्ध का वर्णन करता हुआ अशोक का अभिलेख

अपने एक अभिलेख में अशोक ने यह बात कही:

‘राजा बनने के आठ साल बाद मैंने कलिंग विजय की।
लगभग डेढ़ लाख लोग बंदी बना लिए गए। एक लाख से भी ज्यादा लोग मारे गए।

इससे मुझे अपार दुख हुआ। क्यों?

जब किसी स्वतंत्र देश को जीता जाता है तो लाखों लोग मारे जाते हैं और बहुत सारे बंदी बनाए जाते हैं। इसमें ब्राह्मण और श्रमण भी मारे जाते हैं।

जो लोग अपने सगे-संबंधियों और मित्रों को बहुत प्यार करते हैं तथा दासों और मृतकों के प्रति दयावान होते हैं, वे भी युद्ध में या तो मारे जाते हैं या अपने प्रियजनों को खो देते हैं।

इसीलिए मुझे पश्चाताप हो रहा है। अब मैंने धम्म पालन करने एवं दूसरों को इसकी शिक्षा देने का निश्चय किया है।

मैं मानता हूँ कि धम्म के माध्यम से लोगों का दिल जीतना बलपूर्वक विजय पाने से ज्यादा अच्छा है। मैं यह अभिलेख भविष्य के लिए एक संदेश के रूप में इसलिए उत्कीर्ण कर रहा हूँ कि मेरे बाद मेरे बेटे और पोते भी युद्ध न करें।

इसके बदले उन्हें यह सोचना चाहिए कि धम्म को कैसे बढ़ाया जाए।”

कलिंग की लड़ाई से युद्ध को लेकर अशोक के विचारों में कैसे परिवर्तन हुआ?

(‘धम्म’ संस्कृत शब्द ‘धर्म’ का प्राकृत रूप है)।

अशोक का धम्म क्या था?

अशोक के धम्म में किसी देवता की पूजा अथवा किसी कर्मकांड की आवश्यकता नहीं थी। उन्हें लगता था कि जैसे पिता अपने बच्चों को अच्छे व्यवहार की शिक्षा देते हैं वैसे ही यह उनका कर्तव्य था कि अपनी प्रजा को निर्देश दें। वे बुद्ध के उपदेशों से भी प्रेरित हुए थे।

ऐसी कई समस्याएँ थीं जिनके लिए उनमें संवेदना थी। उनके साम्राज्य में अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग थे और इससे कई बार टकराव पैदा हो जाता था। जानवरों की बलि चढ़ाई जाती थी। दासों और नौकरों के साथ क्रूर व्यवहार किया जाता था। इनके अलावा परिवार में व पड़ोसियों के बीच भी झगड़े होते रहते थे। अशोक ने यह महसूस किया कि इन समस्याओं का निदान उनका कर्तव्य है। इसीलिए उन्होंने धम्म-महामात्त नाम के अधिकारियों की नियुक्ति की जो जगह-जगह जाकर धम्म की शिक्षा देते थे।

इसके अतिरिक्त अशोक ने अपने संदेश कई स्थानों पर शिलाओं और स्तंभों पर खुदवा दिए। अधिकारियों को यह निर्देश दिया गया कि वे राजा के संदेश को उन लोगों को पढ़कर सुनाएँ जो खुद पढ़ नहीं सकते थे। अशोक ने धम्म के विचारों को प्रसारित करने के लिए सीरिया, मित्र, ग्रीस में दूत भेजे। अपने पुत्र महेन्द्र और पुत्री संघमित्रा को इसी कार्य हेतु उसने श्रीलंका भेजा।

उन्होंने सड़कें बनवाई, कुएँ खुदवाए और विश्राम-गृह बनवाए। इसके अतिरिक्त उन्होंने मनुष्यों व जानवरों की चिकित्सा की भी व्यवस्था की।

उत्कृष्ट पॉलिश वाले पत्थर की इस मूर्ति को देखो।

यह बिहार के रामपुरवा में मिले एक मौर्यकालीन स्तंभ का हिस्सा है। अभी इसे राष्ट्रपति भवन में रखा गया है। यह उस समय की मूर्तिकला का एक नमूना है।

अपनी प्रजा के लिए अशोक का संदेश

लोग विभिन्न अवसरों पर अनुष्ठान करते हैं। उदाहरण के लिए जब वे बीमार होते हैं, जब उनके बच्चों का विवाह होता है, बच्चों के जन्म पर और जब यात्रा शुरू करते हैं, तब वे तरह-तरह के अनुष्ठान करते हैं।

ये कर्मकांड किसी काम के नहीं।

इसके बदले यदि लोग दूसरी रीतियों को मानें तो वह ज्यादा फलदायी होंगी। ये अन्य प्रकार की रीतियाँ क्या हैं?

ये हैं – अपने दासों और नौकरों के साथ अच्छा व्यवहार करना, बड़ों का आदर करना, सभी जीवों पर दया करना और ब्राह्मणों तथा श्रमणों को दान देना।

अपने धम्म की प्रशंसा या दूसरों के धम्म की निन्दा करना, दोनों ही बातें गलत हैं। हर किसी को दूसरे धर्म का आदर करना चाहिए। यदि कोई अपने धर्म की बड़ाई और दूसरों के धर्म की बुराई करता है तो वह वास्तव में अपने धर्म को ज़्यादा नुकसान पहुँचा रहा है।

इसीलिए हर किसी को दूसरे के धर्म के प्रमुख विश्वासों को समझने की कोशिश करते हुए उसका आदर करना चाहिए।

अशोक के संदेश के उन हिस्सों को बताओ जो आज भी प्रासंगिक हैं।

ब्राह्मी लिपि

आधुनिक भारत की ज़्यादातर लिपियाँ पिछले सैकड़ों वर्षों में ब्राह्मी लिपि से उत्पन्न हुईं। यहाँ आप ‘अ’ अक्षर को अलग-अलग भाषाओं की लिपियों में देख सकते हैं।

यह भी पढ़ें: नए प्रश्न नए विचार : अध्याय -6

आओ याद करें

1. मौर्य साम्राज्य में विभिन्न काम-धंधों में लगे हुए लोगों की सूची बनाओ।
Ans.
मौर्य साम्राज्य में विभिन्न काम-धंधों में लगे लोगों की सूची निम्नलिखित है।
• सरकारी अधिकारी
• कृषक
• पशुपालक
• शिल्पकार
• व्यापारी
• संदेशवाहक
• जासूस
• फल-फूल संग्राहक
• शिकारी।

2. रिक्त स्थानों को भरो

(क) जहाँ पर सम्राटों का सीधा शासन था वहाँ अधिकारी कर वसूलते थे।

(ख) राजकुमारों को अक्सर प्रांतों में गवर्नर के रूप में भेजा जाता था।

(ग) मौर्य शासक आवागमन के लिए महत्वपूर्ण मार्गों और नदियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करते थे।

(घ) प्रदेशों में रहने वाले लोग मौर्य अधिकारियों को नजराना दिया करते थे।

3. बताओ कि निम्नलिखित वाक्य सही हैं या गलत

(क) उज्जैन उत्तर-पश्चिम की तरफ़ आवागमन के मार्ग पर था। ( गलत )

(ख) आधुनिक पाकिस्तान और अफ़गानिस्तान के इलाके मौर्य साम्राज्य के अंदर थे। ( सही )

(ग) चन्द्रगुप्त के विचार अर्थशास्त्र में लिखे गए हैं। ( गलत )

(घ) कलिंग बंगाल का प्राचीन नाम था। ( गलत )

(ङ) अशोक के ज्यादातर अभिलेख ब्राह्मी लिपि में हैं। ( सही )

आओ चर्चा करें

4. उन समस्याओं की सूची बनाओ जिनका समाधान अशोक धम्म द्वारा करना चाहता था।
Ans.
धम्म द्वारा दूर की जाने वाली समस्याएँ निम्नलिखित हैं :

• अलग-अलग धर्म को मानने वाले लोगों के बीच आपसी टकराव।
• जानवरों की बलि।
• दासों और नौकरों के साथ क्रूर व्यवहार।
• परिवार और पड़ोसियों के बीच के झगड़े।

5. धम्म के प्रचार के लिए अशोक ने किन साधनों का प्रयोग किया?
Ans.
अशोक के धम्म प्रचार के साधन

• धम्म महामात्त की नियुक्ति की।
• विदेशों में धम्म प्रचारक और प्रतिनिधियों को भेजा।
• अशोक ने अपने संदेश को कई स्थानों में शिलाओं पर खुदवाए।
• कुछ अधिकारियों को नियुक्त किया जो राजा के संदेशों को उन लोगों को पढ़कर सुनाते थे, जो खुद पढ़ नहीं सकते थें।

6. तुम्हारे अनुसार दासों और नौकरों के साथ बुरा व्यवहार क्यों किया जाता होगा? क्या तुम्हें ऐसा लगता है कि सम्राट के आदेशों से उनकी स्थिति में सुधार हुआ होगा? अपने जवाब के लिए कारण बताओ।
Ans.
दासों के साथ बुरा व्यवहार किया जाता था, क्योंकि वे प्रायः युद्धबंदी या खरीदे हुए स्त्री-पुरुष होते थे। इनका । स्थान वर्ण-व्यवस्था में सबसे नीचे होता था। इनकी समस्याओं के निराकरण हेतु कोई भी सामाजिक तथा राजनीतिक संगठन नहीं होता था।

सम्राट अशोक के आदेशों से दासों की स्थिति में अवश्य सुधार आया होगा, क्योंकि धम्म के द्वारा दासों की समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया था।

आओ करके देखें

7. रौशन को यह बताते हुए कि हमारे रुपयों पर शेर क्यों दिखाए गए हैं एक पैराग्राफ लिखो। कम से कम एक और चीज़ का नाम लो जिस पर इन्हीं शेरों के चित्र बने हैं।
Ans.
हमारे रुपयों पर बने शेरों चित्र का ऐतिहासिक महत्त्व है। सम्राट अशोक के शासनकाल के दौरान चार शेरों। की मूर्ति बनाई गई और फिर उन्हें सारनाथ में एक विशाल स्तंभ पर स्थापित किया गया। यह चित्र हम रुपयों-सिक्कों के अतिरिक्त भारत सरकार के द्वारा प्रयोग किए जाने वाले सभी दस्तावेजों अंतर्देशीय पत्रों तथा स्टैंप पेपर पर भी देखते हैं।

8. अगर तुम्हारे पास अपना अभिलेख जारी करने की शक्ति होती तो तुम कौन-सी चार राजाज्ञाएँ देते?
Ans. 
निम्नलिखित चार राजाज्ञाएँ देते

• किसी विशेष वर्ण के प्रति भेदभाव नहीं किया जाएगा।
• सभी धर्मों का सम्मान किया जाएगा।
• सभी को शिक्षा का समान अवसर दिया जाएगा।
• स्त्रियों को पुरुषों के बराबर का अधिकार प्राप्त होंगे।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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