साथी हाथ बढ़ाना : अध्याय 5

साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।
साथी हाथ बढ़ाना।

हम मेहनतवालों ने जब भी, मिलकर कदम बढ़ाया
सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाँहें
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें
साथी हाथ बढ़ाना।

मेहनत अपने लेख की रेखा, मेहनत से क्या डरना
कल गैरों की खातिर की, आज अपनी खातिर करना

अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक
अपनी मंजिल सच की मंज़िल, अपना रस्ता नेक
साथी हाथ बढ़ाना।

एक से एक मिले तो कतरा, बन जाता है दरिया
एक से एक मिले तो ज़र्रा, बन जाता है सेहरा
एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत
एक से एक मिले तो इंसाँ, बस में कर ले किस्मत
साथी हाथ बढ़ाना।

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प्रश्न-अभ्यास

गीत से

1. इस गीत की किन पंक्तियों को तुम अपने आसपास की में घटते हुए देख सकते हो?
Ans.
इस गीत की निम्नलिखित पंक्तियों को हम अपने आसपास की जिंदगी में घटते हुए देख सकते हैं-

साथी हाथ बढ़ाना
एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।
साथी हाथ बढ़ाना।
हम मेहनतवालों ने जब भी मिलकर कदम बढ़ाया।
सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया,
फ़ौलादी हैं सीने अपने, फ़ौलादी हैं बाँहें।
हम चाहें तो चट्टानों में पैदा कर दें राहें।

2. ‘सागर ने रस्ता छोड़ा, परबत ने सीस झुकाया’ साहिर ने ऐसा क्यों कहा है? लिखो।
Ans.
साहिर ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि एक साथ मिलकर काम करने से बड़ी से बड़ी बाधाओं में भी रास्ता निकल आता है, यानी काम आसान हो जाता है। साहसी व्यक्ति सभी बाधाओं पर आसानी से विजय पा लेता है क्योंकि एकता और संगठन में शक्ति होती है जिसके बल पर वह पर्वत और सागर को भी पार कर लेता है।

3. गीत में सीने और बाँहों को फौलादी क्यों कहा गया है?
Ans. सीने और बाँह को फ़ौलादी इसलिए कहा गया है क्योंकि हमारे इरादे मजबूत हैं। हमारे बाजुओं में आपार शक्ति है। हम ताकतवर हैं। हम बलवान हैं। हमारी बॉहें फ़ौलादी इसलिए भी हैं कि इसमें असीम कार्य क्षमता का पता चलता है। हमारी बाजुएँ काफ़ी शक्तिशाली भी हैं।

गीत से आगे

1. अपने आसपास तुम किसे ‘साथी’ मानते हो और क्यों? इससे मिलते-जुलते कुछ और शब्द खोजकर लिखो।
Ans.
हमारे माता-पिता, भाई-बहन, मित्र, सहपाठी, शिक्षक, पड़ोसी ये सभी हमारे साथी हैं। क्योंकि ये सब हमें किसी न किसी रूप में सहयोग करते हैं। साथी से मिलते-जुलते शब्द हैं-सहायक, सखा, संगी, सहचर, शुभचिंतक, मित्र, मीत आदि।

2. ‘अपना दुख भी एक है साथी, अपना सुख भी एक’ कक्षा, मोहल्ले और गाँव / शहर के किस-किस तरह के साथियों के बीच तुम्हें इस वाक्य की सच्चाई महसूस होती है और कैसे?
Ans.
कुछ बातों के संबंध में हम अपने साथियों से जुड़े होते हैं। इन मामलों में हमारी सोच एक होती है और हमारे सुख-दुख की अनुभूति भी एक होती है। उदाहरण के लिए। पानी-बिजली की कमी, ट्रैफिक जैसी रोजमर्रा की मुश्किलों से जब हमारा सामना होता है तो हमें लगता है जैसे हमारा दुख एक है। वहीं दूसरी ओर विद्यालय के लिए पदक जीतना, कक्षा में अच्छे अंक लाना और बड़े होकर कुछ बनने की चाह से पता चलता है कि हमारा सुख भी एक ही है।

3. इस गीत को तुम किस माहौल में गुनगुना सकते हो?
Ans. सीने और बाँह को फ़ौलादी इसलिए कहा गया है क्योंकि हमारे इरादे मजबूत हैं। हमारे बाजुओं में आपार शक्ति है।
हम ताकतवर हैं। हम बलवान हैं। हमारी बाँहें फ़ौलादी इसलिए भी हैं कि इसमें असीम कार्य क्षमता का पता चलता है। हमारी बाजुएँ काफ़ी शक्तिशाली भी हैं।

4. ‘एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना’-

(क) तुम अपने घर में इस बात का ध्यान कैसे रख सकते हो?

(ख) पापा के काम और माँ के काम क्या-क्या है?

(ग) क्या वे एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं?

Ans.
(क) अपने घर के छोटे-बड़े कामों में माता-पिता का हाथ बँटा कर हम इस बात की। ध्यान रख सकते हैं।

(ख) पापा और माँ को बहुत से काम करने होते हैं। जहाँ एक ओर पापा कार्यालय जाते हैं और घर के लिए आवश्यक बाहरी कामों का ध्यान रखते हैं वहीं माँ घर की सफाई, खाना बनाना, कपड़े धोना, हम सबों को पढ़ाना, खरीदारी करना और कई छोटे-बड़े कामों की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेती है।

(ग) हाँ, वे इन कामों से एक-दूसरे का हाथ बंटाते हैं।

5. यदि तुमने ‘नया दौर’ फ़िल्म देखी है तो बताओ कि यह गीत फ़िल्म में कहानी के किस मोड़ पर आता है? यदि तुमने फ़िल्म नहीं देखी है तो फ़िल्म देखो और बताओ।
Ans.
नया दौर फिल्म में जब कच्ची सड़क को पक्का करने के लिए सब मिल जुल कर काम करते हैं तब यह गीत आता है। यह गीत उनके सहयोग, उत्साह और जोश को प्रदर्शित करता है।

कहावतों की दुनिया

1. • अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता।

• एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं।

(क) ऊपर लिखी कहावतों का अर्थ गीत की किन पंक्तियों से मिलता-जुलता है?

(ख) इन दोनों कहावतों का अर्थ कहावत-कोश में देखकर समझों और उनका वाक्यों में प्रयोग करो।

Ans. (क)

• एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना।
• एक से मिले तो कतरा, बन जाता जाता है दरिया एक से एक मिले तो ज़र्रा, बन जाती है सेहरी एक से एक मिले तो राई, बन सकती है परबत एक से एक मिले तो इंसाँ बस में कर ले किस्मत।

(ख)
• अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता- भले ही तुम बलवान और बहादुर हो, पर अकेले दुश्मनों का सामना नहीं कर सकते। तुम्हें पता है कि अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ता ।

• एक और एक मिलकर ग्यारह होते हैं- अगर हम मिलकर युद्ध करें तो हमारी विजय निश्चित है। आखिर एक और एक ग्यारह होते हैं।

2. नीचे हाथ से संबंधित कुछ मुहावरे दिए है। इनके अर्थ समझो और प्रत्येक मुहावरे से वाक्य बनाओ- 

(क) हाथ को हाथ न सूझना
(ख) हाथ साफ़ करना
(ग) हाथ-पैर फूलना
(घ) हाथों-हाथ लेना
(ङ) हाथ लगना

Ans. 1. बिजली चली जाने के बाद इतना अँधेरा हो गया कि हाथ को हाथ नहीं सूझ रहा था।

2. मौका मिलते ही चोर ने गहनों पर अपना हाथ साफ कर दिया।

3. पुलिस को देख कर चोर के हाथ-पैर फूल गए।

4. नई किताब के बाजार में आते ही सबने उसे हाथों-हाथ लिया।

5. तुम नहीं जान सकते कि कितने इंतजार के बाद यह इनामी राशि मेरे हाथ लगी।

भाषा की बात

1. हाथ और हस्त एक ही शब्द के दो रूप हैं। नीचे दिए गए शब्दों में हस्त और हाथ छिपे हैं। शब्दों को पढ़कर बताओ कि हाथों का इनमें क्या काम है-

हाथघड़ी, हथौड़ा, हस्तशिल्प, हस्तक्षेप, निहत्था, हथकंडा, हस्ताक्षर, हथकरघा

उत्तर

• हाथघड़ी- हाथघड़ी हाथ की कलाई पर पहनी जाती है।

• हथौड़ा- एक ऐसा लोहे का औज़ार है जिसे हाथ से पकड़कर चलाया जाता है।

• हस्तशिल्प- इस शिल्पकारी को हाथ (हस्त) से किया जाता है।

• हस्तक्षेप-बीच-बचाव करने के लिए। इसका अर्थ है दखल देना।

• निहत्या- जिसके हाथ में कोई हथियार न हो, उसे निहत्था कहते हैं।

• हथकंडा-किसी कार्य को पूरा करने के लिए अनुचित तरीका अपनाने को हथकंडा कहते हैं। इसमें ना हाथ का कार्य नहीं है।

• हस्ताक्षर- हाथ से अपना नाम लिखकर किसी कार्य हेतु स्वीकृति देना।

• हथकरघा- हाथ से किए जाने वाले छोटे-मोटे उद्योग धंधे, जैसे चरखा चलाना, कपड़ा बुनना, टोकरी बुनना आदि।

2. इस गीत में परबत, सीस, रस्ता, इंसाँ शब्दों के प्रयोग हुए हैं। इन शब्दों के प्रचलित रूप लिखो।

उत्तर
• परबत – पहाड़, पर्वत
• सीस – शीश, सिर, माथा
• रस्ता – रास्ता
• इंसाँ – इंसान, मनुष्य

FAQs

Q1. यह गीत किसको संबोधित है?
Ans.
यह गीत देशवासियों को संबोधित है।

Q2. ‘साथी हाथ बढ़ाना वाक्य किस ओर संकेत करता है?
Ans.
साथी हाथ बढ़ाना वाक्य का संकेत है-मिलकर कार्य करना।

Q3. इंसान चाहे तो क्या कर सकता है?
Ans.
इंसान चाहे तो चट्टानों में भी रास्ता निकाल सकता है।

Q4. गैरों के लिए हमने क्या किया है?
Ans.
  गैरों के लिए हमने अपनी सुख-सुविधाओं की परवाह न करके उनके कार्यों को पूरा किया है।

Q5. हमारा लक्ष्य क्या है?
Ans.
हमारा लक्ष्य सत्य की प्राप्ति है। हमें मिल-जुलकर उन्नति के रास्ते पर चलना चाहिए।

Q6. इस गीत का आशय क्या है?
Ans.
इस गीत का आशय यह है कि हमें आपस में मिल-जुलकर काम करना चाहिए। अकेला व्यक्ति काम करते-करते धक भी सकता है। संगठन और शक्ति के सामने बड़ी-बड़ी बाधाएँ दूर हो जाती हैं। मिल-जुलकर मेहनत करने से भाग्य भी बदल सकते हैं।

Q7. क्या बिना सहयोग के आगे बढ़ा जा सकता है?
Ans.
बिना किसी के सहयोग के अकेले आगे बढ़ना कठिन कार्य है। जीवन में हर पल पर हमें किसी न किसी के मदद की आवश्यकता होती है। इसका समाधान हमारे जीवन में कई लोगों के सहयोग एवं मार्गदर्शन से होता है। अतः बिना सहयोग के आगे बढ़ना असंभव सा लगता है।

Q8. इस गीत से हमें क्या प्रेरणा मिलती है?
Ans.
इस गीत से हमें प्रेरणा मिलती है कि हमें प्रत्येक कार्य मिल-जुलकर करना चाहिए, परिश्रम से कभी घबराना नहीं चाहिए। और सभी के सुख-दुख में सहयोग देना चाहिए। यह कविता हमें एकता और संगठन की शक्ति के बारे में भी बताती है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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