न्याय : पाठ -9

न्याय

पहला दृश्य (रंगमंच पर राज-उद्यान का एक दृश्य। संध्याकाल। मंच पर लालिमा। किरणें चित्र बनाती हैं। पुष्प झूमते हैं। दूर नेपथ्य में वन से लौटती …

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काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा : पाठ -8

काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान की यात्रा

प्रिय बच्चो, यह पत्र मैं तुम्हें काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान से लिख रहा हूँ। काजीरंगा उद्यान असम में ब्रह्मपुत्र नदी के तट पर स्थित है। यहाँ …

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मेरा बचपन : पाठ -7

मेरा बचपन

हाय बचपन ! तेरी याद नहीं भूलती। वह कच्चा टूटा घर, वह पयाल का बिछौना, वह नंगे बदन, नंगे पाँव खेतों में घूमना, आम के …

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चतुर चित्रकार : पाठ -6

चतुर चित्रकार

चित्रकार सुनसान जगह में, बना रहा था चित्र,इतने ही में वहाँ आ गया, यम राजा का मित्र। उसे देखकर चित्रकार के, तुरंत उड़ गए होश,नदी, …

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सुंदरिया : पाठ -5

सुंदरिया

हरियाणा के किसी गाँव में हीरासिंह नामक एक किसान था। उसकी समझ में यह नहीं आता था कि वह अपने बीवी-बच्चों और अपनी प्यारी गाय …

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साङकेन : पाठ – 4

साङकेन

अरुणाचल प्रदेश में चौखाम के मंडल कार्यालय में वल्लरी के पिताजी एक अधिकारी हैं। इस बार उन्होंने दिल्ली से अपने परिवार को भी अपने पास …

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चाँद का कुरता : पाठ -3

चाँद का कुरता

हठ कर बैठा चाँद एक दिन, माता से यह बोला,“सिलवा दो माँ, मुझे ऊन का मोटा एक झिंगोला।सन-सन चलती हवा रात भर, जाड़े से मरता …

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न्याय की कुर्सी : पाठ -2

न्याय की कुर्सी

उज्जैन की प्राचीन और ऐतिहासिक नगरी के बाहर एक लंबा-चौड़ा मैदान था। यहाँ-वहाँ टीले थे। एक दिन लड़कों का एक झुंड वहाँ खेल रहा था। …

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किरन : पाठ -1

किरन

अरी किरन तू उठकर इतनीजल्दी आज चली आई।मैं तो बिस्तर में से अपनेअब तक निकल नहीं पाई। कल तो तेरे साथ शाम तकखेल बहुत से …

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