नीलकंठ : अध्याय 11

नीलकंठ

उस दिन एक अतिथि को स्टेशन पहुँचाकर मैं लौट रही थी कि चिड़ियों और खरगोशों की दुकान का ध्यान आ गया और मैंने ड्राइवर को …

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खानपान की बदलती तसवीर : अध्याय 10

खानपान की बदलती तसवीर

पिछले दस-पंद्रह वर्षों में हमारी खानपान की संस्कृति में एक बड़ा बदलाव आया है। इडली-डोसा-बड़ा-साँभर रसम अब केवल दक्षिण भारत तक सीमित नहीं हैं। ये …

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एक तिनका : अध्याय 9

एक तिनका

मैं घमंडों में भरा ऐंठा हुआ,एक दिन जब था मुंडेरे पर खड़ा।आ अचानक दूर से उड़ता हुआ,एक तिनका आँख में मेरी पड़ा। मैं झिझक उठा, …

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रहीम के दोहे : अध्याय 8

रहीम के दोहे

कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत।बिपति कसौटी जे कसे, तेई साँचे मीत।।।।। जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।रहिमन मछरी नीर …

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अपूर्व अनुभव : अध्याय 7

अपूर्व अनुभव

सभागार में शिविर लगने के दो दिन बाद तोत्तो-चान के लिए एक स बड़ा साहस करने का दिन आया। इस दिन उसे यासुकी-चान से मिलना …

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शाम – एक किसान : अध्याय 6

शाम - एक किसान

आकाश का साफ़ा बाँधकरसूरज की चिलम खींचताबैठा है पहाड़,घुटनों पर पड़ी है नदी चादर-सी,पास ही दहक रही हैपलाश के जंगल की अँगीठीअँधकार दूर पूर्व मेंसिमटा …

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पापा खो गए : अध्याय 5

पापा खो गए

सड़क। रात का समय। समुद्र के सामने फुटपाथ। वहीं पर एक स बिजली का खंभा। एक पेड़। एक लैटरबक्स। दूसरी ओर धीमे प्रकाश में एक …

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मिठाईवाला : अध्याय 4

मिठाईवाला

बहुत ही मीठे स्वरों के साथ वह गलियों में घूमता हुआ कहता- “बच्चों को बहलानेवाला, खिलौनेवाला।” इस अधूरे वाक्य को वह ऐसे विचित्र, किंतु मादक …

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कठपुतली : अध्याय 3

कठपुतली

कठपुतलीगुस्से से उबलीबोली-ये धागेक्यों हैं मेरे पीछे-आगे?इन्हें तोड़ दो;मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। सुनकर बोलीं और-औरकठपुतलियाँकि हाँ,बहुत दिन हुएहमें अपने मन के छंद छुए। …

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