U.P Board Class 12 Chemistry 347(GA) Question Paper 2024

U.P Board Class 12 Chemistry 347(GA) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2024
रसायन विज्ञान
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 70

निर्देश :

(i) प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्न-पत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

(ii) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं। प्रत्येक प्रश्न के निर्धारित अंक उसके समक्ष दिए गए हैं।

(iii) गणनात्मक प्रश्नों में, गणना के समस्त पद दीजिए ।

(iv) प्रश्नों के प्रासंगिक उत्तर दीजिए ।

(v) जहाँ आवश्यक हो, रासायनिक समीकरण दीजिए ।

1. इस प्रश्न के प्रत्येक खण्ड में चार विकल्प दिए गए हैं। सही विकल्प चुनकर उसे अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए ।

(क) Fe है:

(i) 8-ब्लॉक का तत्त्व
(ii) p-ब्लॉक का तत्त्व
(iii) d-ब्लॉक का तत्त्व
(iv) f-ब्लॉक का तत्त्व

Ans. (iii) d-ब्लॉक का तत्त्व

(ख) अधिकतम ऑक्सीकरण अवस्था प्रदर्शित करने वाला विन्यास है :

(i) 3d³, 4s2
(ii) 3d5, 4s2
(iii) 3d5, 4s¹
(iv) 3d6, 4s2

Ans. (ii) 3d5, 4s2

(ग) किसी भी गैल्वेनिक सेल में लवण सेतु को हटा देने पर सेल का बोल्टेज :

(i) अचानक शून्य हो जाता है
(ii) धीरे-धीरे घटता है
(iii) तीव्र गति से बढ़ता है
(iv) अपरिवर्तित रहता है

Ans. (i) अचानक शून्य हो जाता है

(घ) मानक हाइड्रोजन इलेक्ट्रोड का इलेक्ट्रोड विभव होता है:

(i) 0.34 वोल्ट
(ii) – 0.76 वोल्ट
(iii) 0.2 वोल्ट
(iv) 0.0 वोल्ट

Ans. (iv) 0.0 वोल्ट

(ङ) सूत्र K = Ae-Ea/RT के लिए सत्य कथन है :

(i) K साम्य स्थिरांक है
(ii) R रिडबर्ग नियतांक है
(iii) A अधिशोषण गुणांक है
(iv) Ea सक्रियण ऊर्जा है

Ans. (iv) Ea सक्रियण ऊर्जा है

(च) अभिक्रिया (1/2) A ➔ 2B  के लिए, A के विघटन की दर और B के बनने की दर से निम्न प्रकार से सम्बन्धित है:

(i) – d[A]/dt  = 1/2 * d[B]/dt
(ii) – d[A]/dt  = 1/4 * d[B]/dt
(iii) – d[A]/dt  = d[B]/dt
(iv) – d[A]/dt = 4 * d[B]/dt

Ans. (ii) – d[A]/dt  = 1/4 * d[B]/dt

2. (क) ऐनिलीन की विभिन्न अनुनादी संरचनाएँ लिखिए ।
Ans.
ऐनिलीन (C6H5NH2)(C_6H_5NH_2) में नाइट्रोजन के एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म का बेंजीन वलय के साथ अनुनाद होता है। अतः धनावेश नाइट्रोजन पर तथा ऋणावेश मुख्यतः ऑर्थो तथा पैरा स्थितियों पर प्रदर्शित होता है।

मुख्य अनुनादी रूप:C6H5−NH2↔o–C6H4−−NH2+↔p–C6H4−−NH2+↔o′–C6H4−−NH2+C_6H_5-NH_2 \leftrightarrow o\text{-}C_6H_4^- -NH_2^+ \leftrightarrow p\text{-}C_6H_4^- -NH_2^+ \leftrightarrow o’\text{-}C_6H_4^- -NH_2^+

इस अनुनाद के कारण ऐनिलीन में ऑर्थो तथा पैरा निर्देशण पाया जाता है।

(ख) अभिक्रिया के वेग पर ताप तथा सान्द्रता के प्रभाव को स्पष्ट कीजिए ।
Ans.
ताप का प्रभाव: ताप बढ़ाने पर सामान्यतः अभिक्रिया का वेग बढ़ता है। ताप बढ़ने पर अधिक अणुओं में सक्रियण ऊर्जा के बराबर या उससे अधिक ऊर्जा आ जाती है, जिससे प्रभावी टक्करों की संख्या बढ़ती है।

आमतौर पर ताप में 10∘C10^\circ C की वृद्धि से अभिक्रिया का वेग लगभग 2 से 3 गुना हो सकता है।

सान्द्रता का प्रभाव: अभिकारकों की सान्द्रता बढ़ाने पर उनके बीच टक्करों की संख्या बढ़ती है और अभिक्रिया का वेग बढ़ जाता है।

वेग नियम:r=k[A]m[B]nr=k[A]^m[B]^n

(ग) K4 [Fe (CN)6 ] के जलीय विलयन में उत्पन्न आयनों को लिखिए। इस यौगिक में Fe की ऑक्सीकरण संख्या कितनी है ?
Ans.
पोटैशियम हेक्सासायनिडोफेरेट(II) जल में:K4[Fe(CN)6]→4K++[Fe(CN)6]4−K_4[Fe(CN)_6]\rightarrow4K^+ +[Fe(CN)_6]^{4-}

अतः आयन हैं:K+,[Fe(CN)6]4−K^+,\quad [Fe(CN)_6]^{4-}

Fe की ऑक्सीकरण संख्या मान लें xx:x+6(−1)=−4x+6(-1)=-4x−6=−4x-6=-4x=+2\boxed{x=+2}

अतः Fe की ऑक्सीकरण अवस्था +2 है।

(घ) गैल्वेनिक सेल तथा वैद्युत अपघटनी सेल में अन्तर स्पष्ट कीजिए ।
Ans.

गैल्वेनिक सेलवैद्युत अपघटनी सेल
रासायनिक ऊर्जा को विद्युत ऊर्जा में बदलता है।विद्युत ऊर्जा को रासायनिक ऊर्जा में बदलता है।
अभिक्रिया स्वतः होती है।अभिक्रिया बाहरी विद्युत स्रोत द्वारा कराई जाती है।
बाहरी विद्युत स्रोत आवश्यक नहीं।बाहरी विद्युत स्रोत आवश्यक है।
एनोड ऋणात्मक होता है।एनोड धनात्मक होता है।
कैथोड धनात्मक होता है।कैथोड ऋणात्मक होता है।

3. (क) 46 ग्रा. एथेनॉल को 54 ग्रा. जल में घोला गया है। एथेनॉल तथा जल के मोल अंश की गणना कीजिए ।
Ans.
एथेनॉल का मोलर द्रव्यमान = 46 g mol⁻¹nएथेनॉल=4646=1 moln_{एथेनॉल}=\frac{46}{46}=1\ mol

जल का मोलर द्रव्यमान = 18 g mol⁻¹nजल=5418=3 moln_{जल}=\frac{54}{18}=3\ mol

कुल मोल:1+3=41+3=4

एथेनॉल का मोल-अंश:Xएथेनॉल=14=0.25X_{एथेनॉल}=\frac14=\boxed{0.25}

जल का मोल-अंश:Xजल=34=0.75X_{जल}=\frac34=\boxed{0.75}

(ख) 1.325 ग्राम निर्जल सोडियम कार्बोनेट को जल में घोलकर 250मि.ली. विलयन बनाया गया है। निर्जल सोडियम कार्बोनेट का तुल्यांक भार 53 है। विलयन की नार्मलता की गणना कीजिए ।
Ans.
दिया है:

  • द्रव्यमान = 1.325 g
  • तुल्यांक भार = 53
  • आयतन = 250 mL = 0.25 L

N=दिए गए पदार्थ का भारतुल्यांक भार×आयतन (L)N=\frac{\text{दिए गए पदार्थ का भार}}{\text{तुल्यांक भार}\times \text{आयतन (L)}}N=1.32553×0.25N=\frac{1.325}{53\times0.25}N=1.32513.25N=\frac{1.325}{13.25}N=0.1N\boxed{N=0.1N}

अतः विलयन की नार्मलता 0.1 N है।

(ग) फीनॉल के महत्त्वपूर्ण अनुप्रयोगों का उल्लेख कीजिए ।
Ans.
फीनॉल के प्रमुख अनुप्रयोग निम्न हैं—

  1. इसका उपयोग कीटाणुनाशक तथा रोगाणुनाशक के रूप में किया जाता है।
  2. फीनॉल से प्लास्टिक तथा बैकेलाइट का निर्माण किया जाता है।
  3. इसका उपयोग रंजक पदार्थों के निर्माण में होता है।
  4. इससे विभिन्न औषधियों का निर्माण किया जाता है।
  5. इसका उपयोग विस्फोटक तथा सुगंधित पदार्थों के निर्माण में भी होता है।
  6. फीनॉल से पिक्रिक अम्ल जैसे यौगिक बनाए जाते हैं।

(घ) हमारे शरीर में हॉर्मोन की भूमिका का उल्लेख कीजिए ।
Ans.
हॉर्मोन अंतःस्रावी ग्रंथियों द्वारा स्रावित रासायनिक संदेशवाहक होते हैं। ये रक्त के माध्यम से शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुँचकर उनकी क्रियाओं को नियंत्रित करते हैं।

हॉर्मोन शरीर में वृद्धि एवं विकास, उपापचय, प्रजनन, जल-संतुलन, रक्त में ग्लूकोज की मात्रा तथा तनाव की प्रतिक्रिया को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए, इंसुलिन रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है तथा थायरॉक्सिन उपापचय को नियंत्रित करता है।

4. (क) रोज़ेनमुण्ड अपचयन पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए। एथाइन पर H₂SO₄ एवं HgSO4 की उपस्थिति में जल की अभिक्रिया का केवल रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.
अम्ल क्लोराइड को हाइड्रोजन गैस के द्वारा Pd/BaSO₄ उत्प्रेरक की उपस्थिति में अपचयित करने पर ऐल्डिहाइड प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया को रोज़ेनमुण्ड अपचयन कहते हैं।RCOCl+H2→Pd/BaSO4RCHO+HCl\boxed{RCOCl+H_2\xrightarrow{Pd/BaSO_4}RCHO+HCl}

एथाइन पर जल की अभिक्रिया

HC≡CH+H2O→HgSO4/H2SO4CH3CHO\boxed{HC\equiv CH+H_2O \xrightarrow{HgSO_4/H_2SO_4} CH_3CHO}

यहाँ एथाइन से एथेनल (एसीटैल्डिहाइड) बनता है।

(ख) अभिक्रिया की आण्विकता तथा अभिक्रिया की कोटि में अन्तर का उल्लेख कीजिए । अभिक्रिया H₂ (g) + Cl2 (g) 2HCl (g) शून्य कोटि की अभिक्रिया है। इस अभिक्रिया का वेग समीकरण लिखिए ।
Ans.

आण्विकताअभिक्रिया की कोटि
किसी प्राथमिक चरण में भाग लेने वाले अणुओं/आयनों की संख्या आण्विकता कहलाती है।वेग समीकरण में सान्द्रता के घातांकों के योग को कोटि कहते हैं।
यह सदैव पूर्णांक होती है।यह शून्य, पूर्णांक अथवा भिन्नात्मक हो सकती है।
यह केवल प्राथमिक अभिक्रिया के लिए निश्चित होती है।यह प्रयोग द्वारा निर्धारित की जाती है।

दी गई अभिक्रिया:H2+Cl2→2HClH_2+Cl_2\rightarrow2HCl

यदि यह शून्य कोटि की है, तोr=k\boxed{r=k}

(ग) सेल के विशिष्ट प्रतिरोध तथा चालकत्व की परिभाषा लिखिए ।
Ans.
विशिष्ट प्रतिरोध: किसी पदार्थ के एकांक लम्बाई तथा एकांक अनुप्रस्थ काट वाले चालक का प्रतिरोध विशिष्ट प्रतिरोध कहलाता है।ρ=RAl\rho=R\frac{A}{l}

चालकत्व: प्रतिरोध के व्युत्क्रम को चालकत्व कहते हैं।G=1RG=\frac1R

इसकी SI इकाई सीमेंस (S) है।

(घ) ब्रोमोबेंज़ीन की तुलना में ब्रोमोएथेन का ब्रोमीन परमाणु अधिक अभिक्रियाशील क्यों होता है? शुष्क ईथर की उपस्थिति में ब्रोमोएथेन पर सोडियम (Na) की अभिक्रिया का केवल रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.
ब्रोमोबेंज़ीन में C–Br बंध अनुनाद के कारण आंशिक द्विबंध चरित्र प्राप्त कर लेता है। इसलिए यह बंध मजबूत होता है और आसानी से टूटता नहीं है।

ब्रोमोएथेन में C–Br बंध साधारण एकल बंध है, इसलिए Br अधिक आसानी से विस्थापित हो सकता है।

सोडियम के साथ अभिक्रिया:2C2H5Br+2Na→dry etherC2H5−C2H5+2NaBr2C_2H_5Br+2Na \xrightarrow{dry\ ether} C_2H_5-C_2H_5+2NaBr

5. (क) (i) ऐमीन किसे कहते हैं? प्राथमिक ऐमीन, द्वितीयक ऐमीन तथा तृतीयक ऐमीन में विभेद के लिए एक परीक्षण लिखिए ।
Ans.
अमोनिया के एक या अधिक हाइड्रोजन परमाणुओं को ऐल्किल या एरिल समूहों द्वारा प्रतिस्थापित करने पर प्राप्त कार्बनिक यौगिक ऐमीन कहलाते हैं।

विभेद — हिंसबर्ग परीक्षण

ऐमीन को बेंज़ीन सल्फोनिल क्लोराइड (C6H5SO2Cl)(C_6H_5SO_2Cl) तथा NaOH से अभिक्रिया कराई जाती है।

  • प्राथमिक ऐमीन: घुलनशील सल्फोनामाइड बनाता है।
  • द्वितीयक ऐमीन: अघुलनशील सल्फोनामाइड बनाता है।
  • तृतीयक ऐमीन: सल्फोनामाइड नहीं बनाता।

(ii) (x) एथेनेमीन पर HCI की अभिक्रिया तथा (y) ऐनिलीन पर सोडियम नाइट्राइट (NaNO2) एवं तनु HCl की 0°C ताप पर अभिक्रिया के रासायनिक समीकरण लिखिए ।
Ans.
(x) एथेनेमीन/एथिलऐमीन की HCl से अभिक्रिया:C2H5NH2+HCl→C2H5NH3ClC_2H_5NH_2+HCl\rightarrow C_2H_5NH_3Cl

(y) ऐनिलीन की NaNO2+HClNaNO_2+HCl, 0°C से अभिक्रिया:C6H5NH2+NaNO2+2HCl→C6H5N2Cl+NaCl+2H2OC_6H_5NH_2+NaNO_2+2HCl \rightarrow C_6H_5N_2Cl+NaCl+2H_2O

उत्पाद: बेंज़ीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड

(ख) (i) d-ब्लॉक तथा f-ब्लॉक के तत्त्व क्या हैं?
Ans.
वे तत्त्व जिनके परमाणुओं या आयनों में अंतिम इलेक्ट्रॉन (n−1)d-कक्षक में प्रवेश करता है, d-ब्लॉक के तत्त्व कहलाते हैं। उदाहरण— Sc, Ti, V, Cr, Mn, Fe, Co, Ni, Cu आदि।

वे तत्त्व जिनके परमाणुओं में अंतिम इलेक्ट्रॉन (n−2)f-कक्षक में प्रवेश करता है, f-ब्लॉक के तत्त्व कहलाते हैं। इनमें मुख्यतः लैन्थेनाइड तथा ऐक्टिनाइड तत्त्व शामिल हैं।

(ii) d-ब्लॉक तथा f-ब्लॉक के तत्त्वों के सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखिए ।
Ans.
d-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:(n−1)d1−10ns0−2\boxed{(n-1)d^{1-10}ns^{0-2}}

f-ब्लॉक के तत्त्वों का सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास:(n−2)f1−14(n−1)d0−1ns2\boxed{(n-2)f^{1-14}(n-1)d^{0-1}ns^2}

(ग) क्या होता है जब : (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए)

(i) एथेनॉल को सोडियम ब्रोमाइड तथा सान्द्र सल्फ्यूरिक अम्ल (H₂SO₄) के साथ गर्म किया जाता है ?
Ans.
(i) एथेनॉल + NaBr + सान्द्र H2SO4H_2SO_4

C2H5OH+NaBr+H2SO4→C2H5Br+NaHSO4+H2OC_2H_5OH+NaBr+H_2SO_4 \rightarrow C_2H_5Br+NaHSO_4+H_2O

(ii) टॉलूईन की अभिक्रिया Fe चूर्ण की उपस्थिति में तथा अंधकार में Cl₂ गैस से कराई जाती है ?
Ans.
(ii) टॉलूईन + Cl2Cl_2, Fe तथा अंधकार

C6H5CH3+Cl2→Fe, darknesso–ClC6H4CH3+p–ClC6H4CH3+HClC_6H_5CH_3+Cl_2 \xrightarrow{Fe,\ darkness} o\text{-}ClC_6H_4CH_3+p\text{-}ClC_6H_4CH_3+HCl

(iii) बेंज़ीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड की जल से अभिक्रिया कराई जाती है ?
Ans.
(iii) बेंज़ीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड + जल

C6H5N2Cl+H2O→ΔC6H5OH+N2+HClC_6H_5N_2Cl+H_2O \xrightarrow{\Delta} C_6H_5OH+N_2+HCl

(iv) 2-ब्रोमोपेन्टेन को ऐल्कोहॉलिक KOH के साथ गर्म किया जाता है ?
Ans.
(iv) 2-ब्रोमोपेन्टेन + ऐल्कोहॉलिक KOH

CH3CHBrCH2CH2CH3→alc.KOH,ΔCH3CH=CHCH2CH3+KBr+H2OCH_3CHBrCH_2CH_2CH_3 \xrightarrow{alc.KOH,\Delta} CH_3CH=CHCH_2CH_3+KBr+H_2O

(घ) वाष्प दाब में अवनमन सम्बन्धी राउल्ट के नियम का उल्लेख कीजिए। 293 K ताप पर शुद्ध जल का वाष्प दाब 17.535 mm Hg है। 293 K ताप पर 450 ग्राम जल में 25 ग्राम ग्लूकोज घोलने पर विलयन के वाष्प दाब की गणना कीजिए ।
Ans.
राउल्ट का नियम: अवाष्पशील विलेय वाले विलयन में विलायक के वाष्प दाब में आपेक्षिक अवनमन, विलेय के मोल-अंश के बराबर होता है।P0−PP0=X2\frac{P^0-P}{P^0}=X_2

दिया है:P0=17.535 mmHgP^0=17.535\ mmHg

जल = 450 gn1=45018=25 moln_1=\frac{450}{18}=25\ mol

ग्लूकोज = 25 g

ग्लूकोज का मोलर द्रव्यमान = 180 g mol⁻¹n2=25180=0.1389 moln_2=\frac{25}{180}=0.1389\ mol

ग्लूकोज का मोल-अंश:X2=0.138925+0.1389X_2=\frac{0.1389}{25+0.1389}X2≈0.00552X_2\approx0.00552

अतः17.535−P17.535=0.00552\frac{17.535-P}{17.535}=0.0055217.535−P=0.096817.535-P=0.0968P=17.535−0.0968P=17.535-0.0968P≈17.438 mmHg\boxed{P\approx17.438\ mmHg}

अतः विलयन का वाष्प दाब लगभग 17.44 mm Hg है।

6. (क) उपसहसंयोजन यौगिकों के संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (VBT) का उल्लेख कीजिए। इस सिद्धान्त की कमियों का भी उल्लेख कीजिए ।
Ans.
संयोजकता आबन्ध सिद्धान्त (Valence Bond Theory—VBT) के अनुसार उपसहसंयोजन यौगिकों में केन्द्रीय धातु आयन के रिक्त परमाणु कक्षक लिगैण्ड द्वारा दिए गए इलेक्ट्रॉन युग्म को स्वीकार करते हैं। धातु के कक्षकों तथा लिगैण्ड के कक्षकों के अतिव्यापन से उपसहसंयोजक बन्ध बनता है।

इस सिद्धान्त की प्रमुख बातें निम्न हैं—

  1. केन्द्रीय धातु आयन में आवश्यक संख्या में रिक्त कक्षक उपलब्ध होते हैं।
  2. लिगैण्ड अपने एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म को केन्द्रीय धातु आयन को प्रदान करता है।
  3. धातु के कक्षकों के संकरण से विभिन्न प्रकार की ज्यामिति प्राप्त होती है।
  4. spsp संकरण से रेखीय, sp3sp^3 से चतुष्फलकीय, dsp2dsp^2 से वर्ग-समतलीय तथा d2sp3d^2sp^3 से अष्टफलकीय संरचना प्राप्त होती है।
  5. धातु आयन के अयुग्मित इलेक्ट्रॉनों की संख्या से यौगिक के अनुचुम्बकीय या प्रतिचुम्बकीय होने का अनुमान लगाया जा सकता है।

VBT की कमियाँ

  1. यह उपसहसंयोजन यौगिकों के रंग की संतोषजनक व्याख्या नहीं करता।
  2. यह यौगिकों के इलेक्ट्रॉनिक स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं करता।
  3. यह उपसहसंयोजन यौगिकों की स्थायित्व की उचित व्याख्या नहीं करता।
  4. यह d-कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों के ऊर्जा-विभाजन की व्याख्या नहीं करता।
  5. यह कुछ यौगिकों के चुंबकीय गुणों की पूर्ण व्याख्या करने में असमर्थ है।

अथवा

उपसहसंयोजन यौगिकों के महत्त्व को समझाइए ।
Ans.
उपसहसंयोजन यौगिकों का रसायन, उद्योग, चिकित्सा तथा जैविक प्रक्रियाओं में बहुत महत्त्व है। इनके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित हैं—

  1. धातुओं के निष्कर्षण में: सोना तथा चाँदी के निष्कर्षण में उपसहसंयोजन यौगिकों का उपयोग किया जाता है।
  2. धातुओं के शोधन में: निकेल आदि धातुओं के शोधन में समन्वय यौगिक उपयोगी हैं।
  3. विश्लेषणात्मक रसायन में: विभिन्न धातु आयनों की पहचान तथा पृथक्करण में इनका उपयोग होता है।
  4. विद्युत लेपन में: धातुओं पर समान एवं चिकनी परत चढ़ाने के लिए इनका प्रयोग किया जाता है।
  5. चिकित्सा में: कुछ उपसहसंयोजन यौगिक औषधियों के रूप में प्रयुक्त होते हैं।
  6. जैविक महत्त्व: हीमोग्लोबिन, क्लोरोफिल तथा विटामिन B12B_{12} जैसे महत्त्वपूर्ण जैव-अणुओं में धातु-समन्वय पाया जाता है।
  7. औद्योगिक उपयोग: अनेक रासायनिक अभिक्रियाओं में उपसहसंयोजन यौगिक उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते हैं।

(ख) ऐमीनो अम्ल तथा न्यूक्लिक अम्ल पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
Ans.
ऐमीनो अम्ल: वे कार्बनिक यौगिक जिनमें एक ही अणु में अमीनो समूह (−NH2)(-NH_2) तथा कार्बोक्सिल समूह (−COOH)(-COOH) उपस्थित होते हैं, ऐमीनो अम्ल कहलाते हैं। इनका सामान्य सूत्र है—NH2−CHR−COOHNH_2-CHR-COOH

उदाहरण— ग्लाइसिन (NH2CH2COOH)(NH_2CH_2COOH) तथा ऐलानीन (CH3CHNH2COOH)(CH_3CHNH_2COOH)। ऐमीनो अम्ल प्रोटीन के निर्माण की मूल इकाइयाँ हैं। ये अम्लीय तथा क्षारीय दोनों प्रकार के गुण प्रदर्शित कर सकते हैं।

न्यूक्लिक अम्ल: न्यूक्लिक अम्ल जटिल जैव-अणु हैं, जो जीवित कोशिकाओं में आनुवंशिक सूचनाओं के संचरण तथा संरक्षण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इनके दो प्रमुख प्रकार हैं—

  1. DNA — डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल
  2. RNA — राइबोन्यूक्लिक अम्ल

न्यूक्लिक अम्ल की मूल संरचनात्मक इकाई न्यूक्लियोटाइड होती है। प्रत्येक न्यूक्लियोटाइड में शर्करा, फॉस्फेट तथा नाइट्रोजनयुक्त क्षारक होता है।

अथवा

निम्नलिखित विटामिन के स्रोत तथा इन विटामिनों की कमी के कारण होने वाले रोगों का उल्लेख कीजिए :

(i) विटामिन A
Ans.
स्रोत: गाजर, पालक, हरी पत्तेदार सब्जियाँ, दूध, मक्खन तथा अंडे की जर्दी।

कमी से रोग: रतौंधी (Night blindness) तथा आँखों से सम्बन्धित अन्य विकार हो सकते हैं।

(ii) विटामिन C
Ans.
स्रोत: आँवला, नींबू, संतरा, अमरूद, टमाटर तथा हरी सब्जियाँ।

कमी से रोग: स्कर्वी रोग होता है। इसमें मसूड़ों से रक्तस्राव तथा घाव भरने में कठिनाई हो सकती है।

(iii) विटामिन D
Ans.
स्रोत: सूर्य का प्रकाश, मछली का तेल, दूध, मक्खन तथा अंडे की जर्दी।

कमी से रोग: बच्चों में रिकेट्स तथा वयस्कों में ऑस्टियोमलेशिया हो सकता है।

(iv) विटामिन E
Ans.
स्रोत: वनस्पति तेल, गेहूँ के अंकुर, बादाम, मूँगफली तथा विभिन्न बीज।

कमी से रोग: इसकी कमी से मुख्यतः मांसपेशीय कमजोरी तथा प्रजनन संबंधी विकार हो सकते हैं।

(v) विटामिन K
Ans.
स्रोत: पालक, पत्तागोभी तथा अन्य हरी पत्तेदार सब्जियाँ; यह आंतों के जीवाणुओं द्वारा भी बनाया जाता है।

कमी से रोग: रक्त का थक्का बनने में विलम्ब होता है तथा रक्तस्राव की प्रवृत्ति बढ़ सकती है।

7. (क) अणुसूत्र C4H8O2 वाले कार्बनिक यौगिक का जब तनु H₂SO₄ से जल-अपघटन कराया जाता है, तब एक कार्बोक्सिलिक अम्ल A तथा एक ऐल्कोहॉल B प्राप्त होता है। B को क्रोमिक अम्ल के साथ ऑक्सीकृत करने पर कार्बोक्सिलिक अम्ल A प्राप्त होता है। A को P2O5 के साथ गर्म करने पर इस अम्ल का एनहाइड्राइड C प्राप्त होता है। इस एनहाइड्राइड का जल-अपघटन कराने पर पुनः अम्ल A प्राप्त होता है। A, B, C को पहचानिए तथा उनसे सम्बन्धित रासायनिक समीकरण भी लिखिए ।
Ans.
अणुसूत्र C₄H₈O₂ वाला यौगिक एक एस्टर है। दिए गए संकेतों के आधार पर—

  • A = एथेनोइक अम्ल (एसीटिक अम्ल), CH₃COOH
  • B = एथेनॉल (एथिल अल्कोहॉल), C₂H₅OH
  • C = एसीटिक एनहाइड्राइड, (CH₃CO)₂O

रासायनिक समीकरण :

(1) एस्टर का जल-अपघटन :CH3COOC2H5+H2O→dil. H2SO4CH3COOH+C2H5OHCH_3COOC_2H_5 + H_2O \xrightarrow{dil.\ H_2SO_4} CH_3COOH + C_2H_5OH

एथिल एसीटेट → एसीटिक अम्ल (A) + एथेनॉल (B)

(2) एथेनॉल का क्रोमिक अम्ल द्वारा ऑक्सीकरण :C2H5OH+2[O]→H2CrO4CH3COOH+H2OC_2H_5OH + 2[O] \xrightarrow{H_2CrO_4} CH_3COOH + H_2O

अर्थात् B से A प्राप्त होता है।

(3) एसीटिक अम्ल का P₂O₅ द्वारा निर्जलीकरण :2CH3COOH→P2O5, Δ(CH3CO)2O+H2O2CH_3COOH \xrightarrow{P_2O_5,\ \Delta} (CH_3CO)_2O + H_2O

अर्थात् A से एसीटिक एनहाइड्राइड (C) प्राप्त होता है।

(4) एसीटिक एनहाइड्राइड का जल-अपघटन :(CH3CO)2O+H2O→2CH3COOH(CH_3CO)_2O + H_2O \rightarrow 2CH_3COOH

अतः A = एसीटिक अम्ल, B = एथेनॉल तथा C = एसीटिक एनहाइड्राइड।

अथवा

निम्नलिखित को कैसे प्राप्त किया जाएगा? (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए):

(i) बेंज़ोइक अम्ल से बेंज़ीन
Ans.

C6H5COOH→NaOHC6H5COONa→soda lime,ΔC6H6+Na2CO3C_6H_5COOH \xrightarrow{NaOH} C_6H_5COONa \xrightarrow{soda\ lime,\Delta} C_6H_6+Na_2CO_3

(ii) थैलिक अम्ल से थैलिमाइड
Ans.

C6H4(COOH)2+NH3→ΔC6H4(CO)2NH+2H2OC_6H_4(COOH)_2+NH_3 \xrightarrow{\Delta} C_6H_4(CO)_2NH+2H_2O

(iii) बेंज़ैल्डिहाइड से m-नाइट्रोबेंज़ैल्डिहाइड
Ans.

C6H5CHO+HNO3→conc.H2SO4m–NO2C6H4CHO+H2OC_6H_5CHO+HNO_3 \xrightarrow{conc.H_2SO_4} m\text{-}NO_2C_6H_4CHO+H_2O

(iv) बेंज़ीन से बेंज़ैल्डिहाइड
Ans.

C6H6+CO+HCl→AlCl3/CuClC6H5CHOC_6H_6+CO+HCl \xrightarrow{AlCl_3/CuCl} C_6H_5CHO

(v) C6H5CHO से रजत दर्पण
Ans.

C6H5CHO+2[Ag(NH3)2]OH→C6H5COONH4+2Ag+3NH3+H2OC_6H_5CHO+2[Ag(NH_3)_2]OH \rightarrow C_6H_5COONH_4+2Ag+3NH_3+H_2O

(ख) क्यूमीन से फीनॉल प्राप्त करने की अभिक्रिया का रासायनिक समीकरण लिखिए। फीनॉल की निम्नलिखित से क्या अभिक्रिया होती है ? (केवल रासायनिक समीकरण लिखिए)

Ans. क्यूमीन को वायु द्वारा ऑक्सीकृत करने पर क्यूमीन हाइड्रोपरॉक्साइड बनता है, जिसका अम्लीय माध्यम में अपघटन करने पर फीनॉल प्राप्त होता है।C6H5CH(CH3)2→O2C6H5C(CH3)2OOHC_6H_5CH(CH_3)_2 \xrightarrow{O_2} C_6H_5C(CH_3)_2OOHC6H5C(CH3)2OOH→H+C6H5OH+CH3COCH3C_6H_5C(CH_3)_2OOH \xrightarrow{H^+} C_6H_5OH+CH_3COCH_3

(i) ज़िंक चूर्ण
Ans.
C6H5OH+Zn→ΔC6H6+ZnOC_6H_5OH+Zn \xrightarrow{\Delta} C_6H_6+ZnO

(ii) सान्द्र HNO3
Ans.
C6H5OH+3HNO3→conc.C6H2(NO2)3OH+3H2OC_6H_5OH+3HNO_3 \xrightarrow{conc.} C_6H_2(NO_2)_3OH+3H_2O

उत्पाद: पिक्रिक अम्ल

(iii) ब्रोमीन जल
Ans.
C6H5OH+3Br2→C6H2Br3OH+3HBrC_6H_5OH+3Br_2 \rightarrow C_6H_2Br_3OH+3HBr

उत्पाद: 2,4,6-ट्राइब्रोमोफीनॉल

अथवा

निम्नलिखित पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए :

(i) जल गैस से मेथेनॉल का औद्योगिक निर्माण (चित्र की आवश्यकता नहीं है)
Ans.
जल गैस मुख्यतः CO तथा H2H_2 का मिश्रण है। इसे उपयुक्त उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च दाब तथा ताप पर अभिक्रिया कराने से मेथेनॉल प्राप्त होता है।CO+2H2→ZnO/Cr2O3CH3OHCO+2H_2 \xrightarrow{ZnO/Cr_2O_3} CH_3OH

इस प्रकार प्राप्त मेथेनॉल को आसवन द्वारा शुद्ध किया जाता है।

(ii) सुक्रोज के ऐल्कोहॉलिक किण्वन से एथेनॉल का निर्माण
Ans.
सुक्रोज पहले इन्वर्टेज एंजाइम की सहायता से ग्लूकोज तथा फ्रक्टोज में बदलता है।C12H22O11+H2O→invertaseC6H12O6+C6H12O6C_{12}H_{22}O_{11}+H_2O \xrightarrow{invertase} C_6H_{12}O_6+C_6H_{12}O_6

इसके बाद ग्लूकोज/फ्रक्टोज का जाइमेज एंजाइम की उपस्थिति में किण्वन होता है:C6H12O6→zymase2C2H5OH+2CO2C_6H_{12}O_6 \xrightarrow{zymase} 2C_2H_5OH+2CO_2

इस प्रकार एथेनॉल प्राप्त होता है।

(iii) एथेनॉल के अनुप्रयोग
Ans.

  1. एथेनॉल का उपयोग विलायक के रूप में किया जाता है।
  2. इसका उपयोग औषधियों तथा सुगंधित पदार्थों के निर्माण में होता है।
  3. इसका उपयोग ईंधन के रूप में भी किया जाता है।
  4. यह विभिन्न कार्बनिक यौगिकों के निर्माण में कच्चे पदार्थ के रूप में प्रयुक्त होता है।
  5. इसका उपयोग वार्निश, पेंट तथा कॉस्मेटिक उद्योग में किया जाता है।
  6. प्रयोगशालाओं में भी एथेनॉल का व्यापक उपयोग होता है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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