U.P Board Class 12 Shiksha Shastra 327(KO) Question Paper 2025

U.P Board Class 12 Shiksha Shastra 327(KO) Question Paper 2025 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।

सत्र – 2025
शिक्षा शास्त्र
समयः तीन घण्टे 15 मिनट            पूर्णांकः 100

नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।

निर्देश: i) सभी प्रश्न अनिवार्य हैं।

ii) प्रश्न संख्या 1 बहुविकल्पीय प्रकार का है। प्रश्न संख्या 2 से 6 तक निश्चित उत्तरीय प्रश्न हैं। प्रश्न संख्या 7 से 12 तक अति लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से प्रत्येक का उत्तर लगभग 25 शब्दों में, प्रश्न संख्या 13 से 18 तक लघु उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से प्रत्येक का उत्तर लगभग 50 शब्दों में तथा प्रश्न संख्या 19 से 21 तक विस्तृत उत्तरीय प्रश्न हैं, जिनमें से प्रत्येक का उत्तर लगभग 250 शब्दों में लिखना है।

iii) सभी प्रश्नों के निर्धारित अंक उनके सम्मुख अंकित हैं।

(बहुविकल्पीय प्रश्न )

1. प्रत्येक प्रश्न खण्ड में उत्तर के चार विकल्प दिए गहने, जिनमें से केवल एक उत्तर सही है। सही उत्तर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :

अ) मुस्लिम काल में प्राथमिक शिक्षा प्रदान की जाती थी-

i) मदरसा में
ii) मकतब में
iii) आश्रम में
iv) मठ में

Ans. ii) मकतब में

ब) शिक्षा में ‘छनाई सिद्धान्त’ किसने दिया ?

i) वुड ने
ii) मैकाले ने
iii) हण्टर ने
iv) हार्डिंग ने

Ans. ii) मैकाले ने

स) कौन प्राकृतिक आपदा नहीं है ?

i) बाढ़
ii) सूखा
iii) सुनामी
iv) बिजली संकट

Ans. iv) बिजली संकट

द) कोठारी शिक्षा आयोग का गठन किस वर्ष हुआ ?

i) 1960
ii) 1964
iii) 1955
iv) 1970

Ans. ii) 1964

य) स्पीयरमैन के अनुसार बुद्धि के तत्वों की संख्या है

i) 2
ii) 4
iii) 5
iv) 7

Ans. i) 2

( निश्चित उत्तरीय प्रश्न)

2. ‘पबज्जा संस्कार’ के बाद बालक को किस नाम से जाना जाता था ?
Ans.
पबज्जा संस्कार के बाद बालक को श्रमण अथवा बौद्ध परम्परा में नवदीक्षित भिक्षु कहा जाता था।

3. वुड का घोषणा-पत्र किस वर्ष प्रकाशित हुआ ?
Ans.
वुड का घोषणा-पत्र 1854 ई. में प्रकाशित हुआ था।

4. किन्हीं दो मानसिक विकारों को लिखिए ।
Ans.

  1. चिंता विकार।
  2. अवसाद।

5. ‘आर्मी बीटा परीक्षण’ बुद्धि परीक्षण के किस प्रकार में शामिल होता है ?
Ans.
आर्मी बीटा परीक्षण अशाब्दिक सामूहिक बुद्धि परीक्षण के अंतर्गत आता है।

6. इदम्, अहम्, पराहम् का विचार किसने दिया ?
Ans.
इदम् (Id), अहम् (Ego) तथा पराहम् (Superego) का विचार सिगमंड फ्रायड ने दिया था।

( अति लघु उत्तरीय प्रश्न)

7. वायु प्रदूषण के कारणों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
वायु प्रदूषण के प्रमुख कारण वाहनों का धुआँ, कारखानों से निकलने वाली गैसें, कोयला एवं पेट्रोलियम का दहन, कचरा जलाना, धूल तथा वनों की कटाई हैं।

8. मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
मानसिक स्वास्थ्य को आनुवंशिकता, पारिवारिक वातावरण, आर्थिक स्थिति, सामाजिक संबंध, शिक्षा, शारीरिक स्वास्थ्य, तनाव तथा जीवन की परिस्थितियाँ प्रभावित करती हैं।

9. भारत में निम्न शैक्षिक स्तर के कारणों पर प्रकाश डालिए ।
Ans.
गरीबी, अशिक्षा, विद्यालयों की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव, बाल श्रम, सामाजिक असमानता तथा शिक्षा के प्रति जागरूकता की कमी निम्न शैक्षिक स्तर के प्रमुख कारण हैं।

10. प्रेरणा की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Ans.
प्रेरणा व्यक्ति के व्यवहार को दिशा देती है, लक्ष्य प्राप्ति के लिए सक्रिय करती है, कार्य में रुचि बढ़ाती है तथा व्यक्ति को निरंतर प्रयास करने के लिए प्रोत्साहित करती है।

11. मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान के उद्देश्यों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
मानसिक स्वास्थ्य विज्ञान का उद्देश्य मानसिक संतुलन बनाए रखना, तनाव कम करना, समायोजन क्षमता बढ़ाना, मानसिक विकारों की रोकथाम करना तथा स्वस्थ व्यक्तित्व का विकास करना है।

12. बालिका शिक्षा के महत्व का वर्णन कीजिए ।
Ans.
बालिका शिक्षा से महिलाओं में आत्मनिर्भरता, जागरूकता और समानता बढ़ती है। यह परिवार के स्वास्थ्य, बच्चों की शिक्षा तथा समाज और राष्ट्र के विकास में सहायक है।

( लघु उत्तरीय प्रश्न)

13. टैगोर के पाठ्यक्रम सम्बन्धी विचारों का वर्णन कीजिए।
Ans.
रवीन्द्रनाथ टैगोर के अनुसार पाठ्यक्रम बालक की रुचियों, क्षमताओं तथा प्राकृतिक आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए। वे पुस्तकीय ज्ञान के स्थान पर प्रकृति के बीच शिक्षा, साहित्य, संगीत, कला, चित्रकला, नाटक, हस्तकला तथा शारीरिक गतिविधियों को महत्त्व देते थे। उनके अनुसार पाठ्यक्रम ऐसा होना चाहिए जो बालक के शारीरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक विकास में सहायक हो। वे मातृभाषा में शिक्षा तथा स्वतंत्र चिंतन के भी समर्थक थे।

14. शैक्षिक मानक के तत्वों पर प्रकाश डालिए ।
Ans.
शैक्षिक मानक वे निर्धारित स्तर हैं जिनके आधार पर शिक्षा की गुणवत्ता का मूल्यांकन किया जाता है। इसके प्रमुख तत्व हैं—

  1. उद्देश्य: शिक्षा के लक्ष्यों का स्पष्ट निर्धारण।
  2. पाठ्यक्रम: उपयोगी एवं व्यवस्थित अध्ययन सामग्री।
  3. शिक्षक: योग्य, प्रशिक्षित और कुशल शिक्षक।
  4. शिक्षण विधियाँ: प्रभावशाली एवं बाल-केंद्रित शिक्षण।
  5. मूल्यांकन: विद्यार्थियों की उपलब्धियों की जाँच।
  6. शैक्षिक वातावरण: सुरक्षित एवं सुविधायुक्त विद्यालय।

15. रुचि का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसकी विशेषताओं का वर्णन कीजिए ।
Ans.
रुचि वह मानसिक प्रवृत्ति है जिसके कारण व्यक्ति किसी कार्य, वस्तु या विषय की ओर आकर्षित होता है और उसे करने में आनंद अनुभव करता है।

रुचि की प्रमुख विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

  1. रुचि व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करती है।
  2. यह व्यक्ति-व्यक्ति में भिन्न होती है।
  3. रुचि जन्मजात तथा अर्जित दोनों हो सकती है।
  4. अनुभव और वातावरण से रुचि में परिवर्तन हो सकता है।
  5. रुचि सीखने की प्रक्रिया को सरल और आनंददायक बनाती है।

16. मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति की विशेषताओं का वर्ण कीजिए ।
Ans.
मानसिक रूप से स्वस्थ व्यक्ति में निम्नलिखित विशेषताएँ पाई जाती हैं—

  1. वह अपनी भावनाओं पर उचित नियंत्रण रखता है।
  2. उसमें आत्मविश्वास तथा आत्मसम्मान होता है।
  3. वह परिस्थितियों के साथ उचित समायोजन करता है।
  4. उसके दूसरों के साथ अच्छे सामाजिक संबंध होते हैं।
  5. वह कठिन परिस्थितियों का धैर्यपूर्वक सामना करता है।
  6. वह वास्तविकता को स्वीकार करता है और उचित निर्णय लेने में सक्षम होता है।

17. व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले कारकों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
व्यक्तित्व को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं—

  1. आनुवंशिकता: शारीरिक बनावट, स्वभाव और कुछ मानसिक क्षमताओं पर प्रभाव डालती है।
  2. परिवार: माता-पिता का व्यवहार, पारिवारिक संबंध और संस्कार व्यक्तित्व का निर्माण करते हैं।
  3. विद्यालय: शिक्षक, सहपाठी तथा विद्यालय का वातावरण व्यक्तित्व को विकसित करते हैं।
  4. समाज एवं संस्कृति: सामाजिक मान्यताएँ, परम्पराएँ और रीति-रिवाज व्यक्ति के व्यवहार को प्रभावित करते हैं।
  5. अनुभव: जीवन की सफलताएँ, असफलताएँ तथा व्यक्तिगत अनुभव व्यक्तित्व के विकास में योगदान देते हैं।

18. व्यावसायिक निर्देशन का अर्थ स्पष्ट करते हुए इसके महत्व का विवेचन कीजिए ।
Ans.
व्यावसायिक निर्देशन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा व्यक्ति को उसकी रुचि, योग्यता, क्षमता तथा परिस्थितियों के अनुसार उपयुक्त व्यवसाय चुनने में सहायता दी जाती है।

इसका महत्व निम्नलिखित है—

  1. यह सही व्यवसाय के चयन में सहायता करता है।
  2. व्यक्ति की रुचि और योग्यता के बीच सामंजस्य स्थापित करता है।
  3. समय, धन और श्रम की बर्बादी कम करता है।
  4. रोजगार प्राप्त करने की संभावनाएँ बढ़ाता है।
  5. कार्य के प्रति संतुष्टि और कुशलता विकसित करता है।
  6. बेरोजगारी कम करने तथा मानव संसाधन के उचित उपयोग में सहायक होता है।

(विस्तृत उत्तरीय प्रश्न)

19. रवीन्द्रनाथ टैगोर के शैक्षिक विचारों की विस्तार से विद्यग्रमा कीजिए ।
Ans.
रवीन्द्रनाथ टैगोर भारत के महान कवि, दार्शनिक तथा शिक्षाशास्त्री थे। वे ऐसी शिक्षा के समर्थक थे जो बालक के सर्वांगीण विकास में सहायक हो। उन्होंने शिक्षा को प्रकृति, स्वतंत्रता, आनंद और मानवीय मूल्यों से जोड़ने पर बल दिया।

1. प्रकृति के बीच शिक्षा: टैगोर का मानना था कि बालकों को प्रकृति के निकट रहकर शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। प्राकृतिक वातावरण से उनमें जिज्ञासा और निरीक्षण की क्षमता विकसित होती है।

2. स्वतंत्रता का सिद्धान्त: वे बालकों पर अनावश्यक अनुशासन तथा दबाव डालने के विरोधी थे। उनके अनुसार विद्यार्थियों को स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रश्न पूछने और अपनी प्रतिभा विकसित करने के अवसर मिलने चाहिए।

3. मातृभाषा में शिक्षा: टैगोर मातृभाषा को शिक्षा का प्रभावशाली माध्यम मानते थे। इससे बालक विषयों को आसानी से समझ सकता है और अपने विचार व्यक्त कर सकता है।

4. पाठ्यक्रम सम्बन्धी विचार: वे साहित्य, संगीत, चित्रकला, नाटक, हस्तकला, खेलकूद तथा प्रकृति-अध्ययन को पाठ्यक्रम का आवश्यक अंग मानते थे। उनका उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं, बल्कि रचनात्मक क्षमताओं का विकास करना था।

5. करके सीखने पर बल: टैगोर अनुभव, गतिविधि और प्रयोग के माध्यम से सीखने के समर्थक थे। इससे विद्यार्थी ज्ञान को व्यवहार में उपयोग करना सीखते हैं।

6. अंतरराष्ट्रीय भावना: वे विश्वबंधुत्व, मानवता, सहयोग और विभिन्न संस्कृतियों के सम्मान के पक्षधर थे।

7. शिक्षक का स्थान: उनके अनुसार शिक्षक को मित्र, मार्गदर्शक और प्रेरक होना चाहिए। शिक्षक का कार्य बालक की स्वाभाविक प्रतिभा को विकसित करना है।

8. शान्तिनिकेतन की स्थापना: टैगोर ने 1901 में शान्तिनिकेतन में विद्यालय की स्थापना की। आगे चलकर 1921 में विश्वभारती की स्थापना हुई, जिसका उद्देश्य भारतीय और विश्व संस्कृतियों के बीच समन्वय स्थापित करना था।

निष्कर्ष: टैगोर की शिक्षा-दृष्टि बाल-केंद्रित, प्रकृति-आधारित, रचनात्मक और मानवतावादी थी। उनके विचार आज भी आनंदपूर्ण एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए उपयोगी हैं।

अथवा

एनी बेसेन्ट के शैक्षिक विचारों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
एनी बेसेन्ट एक प्रसिद्ध समाज सुधारक, शिक्षाविद् तथा भारतीय संस्कृति की समर्थक थीं। उन्होंने भारत में राष्ट्रीय शिक्षा के विकास और भारतीय परम्पराओं के संरक्षण के लिए महत्त्वपूर्ण योगदान दिया।

1. राष्ट्रीय शिक्षा: एनी बेसेन्ट ऐसी शिक्षा चाहती थीं जो भारतीय संस्कृति, परम्पराओं और राष्ट्रीय भावना पर आधारित हो। उनके अनुसार शिक्षा से विद्यार्थियों में देशप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व विकसित होना चाहिए।

2. धार्मिक एवं नैतिक शिक्षा: वे नैतिक मूल्यों, चरित्र निर्माण, सत्य, प्रेम, सहिष्णुता और सेवा भावना को शिक्षा का आवश्यक अंग मानती थीं।

3. भारतीय संस्कृति का संरक्षण: उनके अनुसार विद्यार्थियों को भारतीय इतिहास, दर्शन, साहित्य और संस्कृति का ज्ञान दिया जाना चाहिए, जिससे उनमें अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान उत्पन्न हो।

4. सर्वांगीण विकास: वे शिक्षा द्वारा बालक के शारीरिक, मानसिक, नैतिक तथा आध्यात्मिक विकास पर बल देती थीं।

5. स्त्री शिक्षा: एनी बेसेन्ट महिलाओं की शिक्षा और सामाजिक उन्नति की समर्थक थीं। वे मानती थीं कि शिक्षित महिलाएँ परिवार और राष्ट्र के विकास में महत्त्वपूर्ण योगदान देती हैं।

6. शिक्षक का महत्त्व: उनके अनुसार शिक्षक को आदर्श चरित्र वाला, योग्य तथा विद्यार्थियों के प्रति सहानुभूतिपूर्ण होना चाहिए।

7. शैक्षिक संस्थाओं की स्थापना: उन्होंने भारतीय शिक्षा के विकास के लिए कार्य किया तथा 1898 में वाराणसी में सेंट्रल हिन्दू स्कूल की स्थापना में प्रमुख भूमिका निभाई। इस संस्था ने आगे चलकर बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना की पृष्ठभूमि तैयार करने में योगदान दिया।

निष्कर्ष: एनी बेसेन्ट के शैक्षिक विचार राष्ट्रीयता, नैतिकता, भारतीय संस्कृति तथा सर्वांगीण विकास पर आधारित थे। उनके प्रयासों ने भारत में राष्ट्रीय शिक्षा की भावना को प्रोत्साहित किया।

20. प्रदूषण का अर्थ स्पष्ट कीजिए। पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में शिक्षक की भूमिका का उल्लेख कीजिए।
Ans.
प्रदूषण वह स्थिति है जिसमें वायु, जल, भूमि आदि के प्राकृतिक गुणों में हानिकारक परिवर्तन हो जाता है तथा वह मनुष्य, जीव-जंतुओं और पर्यावरण के लिए नुकसानदायक बन जाता है। प्रदूषण के प्रमुख प्रकार वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, मृदा प्रदूषण तथा ध्वनि प्रदूषण हैं।

पर्यावरण प्रदूषण के निवारण में शिक्षक की भूमिका

शिक्षक विद्यार्थियों तथा समाज में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

1. पर्यावरण शिक्षा: शिक्षक विद्यार्थियों को प्रदूषण के कारणों, दुष्परिणामों और रोकथाम के उपायों का ज्ञान देता है।

2. वृक्षारोपण: वह विद्यालय तथा आसपास के क्षेत्रों में पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित करता है।

3. स्वच्छता की आदतें: शिक्षक विद्यार्थियों को विद्यालय, घर तथा सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता बनाए रखने की शिक्षा देता है।

4. प्लास्टिक का कम उपयोग: वह एकल-उपयोग प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के बारे में बताता है और कपड़े या जूट के थैलों के प्रयोग को प्रोत्साहित करता है।

5. जल संरक्षण: शिक्षक विद्यार्थियों को पानी की बर्बादी रोकने, वर्षा जल संचयन तथा जल स्रोतों को स्वच्छ रखने की प्रेरणा देता है।

6. वायु प्रदूषण पर नियंत्रण: वह सार्वजनिक परिवहन, साइकिल के उपयोग तथा कचरा न जलाने के महत्त्व को समझाता है।

7. जागरूकता कार्यक्रम: शिक्षक रैली, निबंध, भाषण, पोस्टर प्रतियोगिता तथा स्वच्छता अभियान आयोजित कर सकता है।

8. आदर्श व्यवहार: शिक्षक स्वयं पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार अपनाकर विद्यार्थियों के सामने उदाहरण प्रस्तुत करता है।

निष्कर्ष: पर्यावरण प्रदूषण को रोकने के लिए शिक्षक, विद्यार्थी और समाज का सहयोग आवश्यक है। पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिक ही स्वच्छ एवं सुरक्षित भविष्य का निर्माण कर सकते हैं।

अथवा

बाढ़ आने के कारणों और उससे बचाव के उपायों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
बाढ़ एक प्राकृतिक आपदा है, जिसमें किसी क्षेत्र में नदी, नाले या अन्य जल स्रोतों का पानी फैलकर सामान्य भूमि को जलमग्न कर देता है। इससे जनजीवन, कृषि, पशुधन तथा सम्पत्ति को नुकसान पहुँच सकता है।

बाढ़ आने के प्रमुख कारण

  1. अत्यधिक वर्षा: कम समय में बहुत अधिक वर्षा होने से नदियों और नालों में जलस्तर बढ़ जाता है।
  2. नदियों में गाद जमा होना: नदी की जलधारण क्षमता कम होने से पानी बाहर फैल सकता है।
  3. बाँध का टूटना: बाँध टूटने या अचानक अधिक पानी छोड़े जाने से बाढ़ आ सकती है।
  4. वनों की कटाई: पेड़ों की कमी से वर्षा का पानी तेजी से बहता है और मिट्टी का कटाव बढ़ता है।
  5. जल निकासी की कमी: शहरों में नालियों के बंद होने तथा जल निकासी की अपर्याप्त व्यवस्था से जलभराव होता है।
  6. नदी के किनारों पर अतिक्रमण: बाढ़ के मैदानों में अनियोजित निर्माण से नुकसान बढ़ता है।

बाढ़ से बचाव के उपाय

  1. नदियों तथा नालों की नियमित सफाई की जानी चाहिए।
  2. तटबंधों और बाँधों का उचित रखरखाव किया जाना चाहिए।
  3. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय रहते चेतावनी जारी करनी चाहिए।
  4. लोगों को सुरक्षित ऊँचे स्थानों तथा राहत शिविरों में पहुँचाना चाहिए।
  5. नदी के किनारे वृक्षारोपण करना और वनों की कटाई रोकना आवश्यक है।
  6. बाढ़ संभावित क्षेत्रों में निर्माण कार्यों की उचित योजना बनानी चाहिए।
  7. आपातकालीन स्थिति के लिए भोजन, स्वच्छ पेयजल, दवाइयों तथा प्राथमिक उपचार की व्यवस्था रखनी चाहिए।
  8. बाढ़ के समय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना चाहिए तथा बाढ़ के पानी में चलने या वाहन चलाने से बचना चाहिए।

निष्कर्ष: बाढ़ को पूरी तरह रोकना हमेशा संभव नहीं है, लेकिन उचित योजना, पूर्व चेतावनी, सुरक्षित निकासी और जन-जागरूकता से इससे होने वाली जन-धन की हानि को कम किया जा सकता है।

21. अधिगम से आप क्या समझते हैं? सीखने के मुख्य और गौण नियमों का वर्णन कीजिए ।
Ans.
अधिगम या सीखना वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा अनुभव, अभ्यास तथा प्रशिक्षण के परिणामस्वरूप व्यक्ति के व्यवहार, ज्ञान, कौशल या दृष्टिकोण में अपेक्षाकृत स्थायी परिवर्तन होता है। उदाहरण के लिए, अभ्यास द्वारा साइकिल चलाना या गणित के प्रश्न हल करना सीखना अधिगम है।

अमेरिकी मनोवैज्ञानिक एडवर्ड एल. थॉर्नडाइक ने सीखने के अनेक नियम बताए। इनमें मुख्य नियम तथा गौण नियम प्रमुख हैं।

1. सीखने के मुख्य नियम

(क) तत्परता का नियम: जब व्यक्ति सीखने के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार होता है, तो वह अधिक अच्छी तरह सीखता है। इसलिए शिक्षक को विद्यार्थियों की रुचि और तैयारी के अनुसार शिक्षण करना चाहिए।

(ख) अभ्यास का नियम: अभ्यास करने से सीखी हुई बात मजबूत होती है। बार-बार अभ्यास करने से ज्ञान और कौशल में सुधार होता है। हालाँकि अभ्यास तभी अधिक प्रभावी होता है जब वह सही विधि और उचित प्रतिक्रिया के साथ किया जाए।

(ग) प्रभाव का नियम: जिन कार्यों के परिणाम सुखद और संतोषजनक होते हैं, उन्हें व्यक्ति दोहराने की अधिक संभावना रखता है। सफलता और प्रोत्साहन सीखने को बढ़ावा देते हैं।

2. सीखने के गौण नियम

(क) बहु-अनुक्रिया का नियम: किसी समस्या के समाधान के लिए व्यक्ति अनेक प्रयास करता है और उचित प्रतिक्रिया मिलने पर सही तरीका सीखता है।

(ख) मनोवृत्ति या अभिवृत्ति का नियम: व्यक्ति की रुचि, दृष्टिकोण और मानसिक स्थिति उसके सीखने को प्रभावित करती है।

(ग) आंशिक क्रिया का नियम: व्यक्ति किसी जटिल कार्य को छोटे-छोटे भागों में बाँटकर अधिक सरलता से सीख सकता है।

(घ) सादृश्य द्वारा प्रतिक्रिया का नियम: व्यक्ति किसी नई परिस्थिति में पहले के अनुभवों के आधार पर प्रतिक्रिया करना सीखता है।

(ङ) साहचर्यात्मक परिवर्तन का नियम: किसी प्रतिक्रिया को नए उद्दीपन से जोड़ने पर व्यक्ति धीरे-धीरे नए उद्दीपन के प्रति भी वही प्रतिक्रिया करना सीख सकता है।

निष्कर्ष: अधिगम के नियम शिक्षण को प्रभावी बनाने में सहायक हैं। शिक्षक को विद्यार्थियों की तत्परता, अभ्यास, रुचि और अनुभवों को ध्यान में रखकर शिक्षण करना चाहिए।

अथवा

सीखने के अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त का विवेचन कीजिए ।
Ans.
सीखने का अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त सामान्यतः रूसी वैज्ञानिक इवान पावलॉव के शास्त्रीय अनुबंधन सिद्धान्त से संबंधित है। इस सिद्धान्त के अनुसार, जब किसी स्वाभाविक उद्दीपन के साथ किसी तटस्थ उद्दीपन को बार-बार प्रस्तुत किया जाता है, तो तटस्थ उद्दीपन भी स्वाभाविक उद्दीपन जैसी प्रतिक्रिया उत्पन्न करने लगता है।

प्रयोग: पावलॉव ने कुत्ते पर प्रयोग किया। भोजन देखकर कुत्ते के मुँह में स्वाभाविक रूप से लार आती थी। भोजन को स्वाभाविक उद्दीपन तथा लार आने को स्वाभाविक अनुक्रिया कहा गया।

प्रयोग के दौरान पावलॉव ने भोजन देने से पहले घंटी बजाई। घंटी और भोजन को बार-बार साथ प्रस्तुत किया गया। कुछ समय बाद केवल घंटी बजाने पर भी कुत्ते के मुँह में लार आने लगी। इस प्रकार घंटी अनुबंधित उद्दीपन और लार आना अनुबंधित अनुक्रिया बन गया।

सिद्धान्त की प्रमुख प्रक्रियाएँ

  1. अर्जन: उद्दीपन और प्रतिक्रिया के बीच संबंध स्थापित होना।
  2. विलोपन: अनुबंधित उद्दीपन बार-बार बिना स्वाभाविक उद्दीपन के प्रस्तुत करने पर प्रतिक्रिया का कमजोर होना।
  3. स्वतः पुनर्प्राप्ति: कुछ समय बाद अनुबंधित प्रतिक्रिया का फिर दिखाई देना।
  4. उद्दीपन सामान्यीकरण: समान उद्दीपनों पर भी मिलती-जुलती प्रतिक्रिया होना।
  5. उद्दीपन विभेदन: विभिन्न उद्दीपनों के बीच अंतर करना सीखना।

शिक्षा में उपयोग: शिक्षक विद्यालय के वातावरण को सुखद बनाकर, अच्छे अनुभवों को सीखने से जोड़कर तथा भय और अप्रिय अनुभवों को कम करके अधिगम को प्रभावी बना सकता है। उदाहरण के लिए, किसी विषय को रोचक गतिविधियों से जोड़ने पर विद्यार्थियों में उस विषय के प्रति सकारात्मक भावना विकसित हो सकती है।

निष्कर्ष: अनुकूलित अनुक्रिया सिद्धान्त बताता है कि सीखने में उद्दीपनों और प्रतिक्रियाओं के बीच संबंध महत्त्वपूर्ण होता है। यह सिद्धान्त आदतों, भावनात्मक प्रतिक्रियाओं तथा शिक्षण-अधिगम की प्रक्रिया को समझने में उपयोगी है।

मेरा नाम सुनीत कुमार सिंह है। मैं कुशीनगर, उत्तर प्रदेश का निवासी हूँ। मैं एक इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हूं।

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