मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ (The central upland)
इस लेख में हम मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए नीचे दिए गए मुख्य श्रेणी एवं पठार के …
इस लेख में हम मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए नीचे दिए गए मुख्य श्रेणी एवं पठार के …
किसी पर्वत अथवा पहाड़ी में स्थित अनुप्रस्थ संकरी द्रोणी (Transverse Narrow Basin) व निचला भाग जिससे होकर स्थल मार्ग गुजरता है, ‘दर्श’ (Pass) की संज्ञा …
हिमालय की उत्तर से दक्षिण म्यांमार-भारत सीमा के सहारे फैली और अरूणाचल प्रदेश (तिराप मण्डल), नागालैण्ड, मणिपुर एवं मिजोरम से गुजरने वाली पहाड़ी श्रेणियों को …
भारत की भूगर्भिक संरचना की विविधता ने देश के उच्चावच तथा भौतिक लक्षणों की विविधता को जन्म दिया है। देश के लगभग 10.6% क्षेत्र पर पर्वत, 18.5% …
हिमालय का निर्माण एक लम्बे भू-गर्भिक ऐतिहासिक काल से गुजरकर सम्पन्न हुआ है। इसके निर्माण के सम्बन्ध में कोबर का भू- सन्नति का सिद्धान्त (Geo-syncline …
प्रायद्वीपीय भारत प्राचीनतम से लेकर प्राचीन चट्टानों का बना है। इसका निर्माण प्री-कैम्ब्रियन काल में भू-पृष्ठ के शीतलन और दृढ़ीकरण से हुआ। यह भाग कभी …
भूगर्भ में चट्टानों की प्रकृति, उनके क्रम तथा व्यवस्था को भूगर्भिक संरचना कहते हैं। यह संरचना सामान्यतः पृथ्वी के भीतर होने वाली शक्तिशाली विवर्तनिक शक्तियों …
भारत में जनगणना का आधार जनसंख्या की संरचना है। जनसंख्या की संरचना से अर्थ जनसंख्या के ढांचे से है अर्थात् जन की संख्या उसकी आयु, …
15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता के पश्चात् भारत सरकार ने फ्रांस तथा पुर्तगाल द्वारा शासित कई क्षेत्रों को सफलतापूर्वक समाहित करने का प्रयास किया। यथा- अगस्त, 1961 में दादरा …
हमारा देश हिन्द महासागर एवं हिमालय पर्वत के मध्य स्थित है। इसका सबसे उत्तरी बिन्दु जम्मू-कश्मीर राज्य में 37°6′ उत्तरी अक्षांश पर स्थित ‘इंदिरा कॉल’ …