फल (Fruits)
पुष्प के अण्डाशय के परिवर्धित भाग को फल (Fruits) कहते हैं। फल के दो भाग होते हैं- प्रथम – फलभित्ति (Pericorp) तथा दूसरा – बीज …
पुष्प के अण्डाशय के परिवर्धित भाग को फल (Fruits) कहते हैं। फल के दो भाग होते हैं- प्रथम – फलभित्ति (Pericorp) तथा दूसरा – बीज …
तेल (oil) एवं वसा (Fats) मानव को पूर्व ऐतिहासिक काल से ही ज्ञात थे। मिश्र (Egypt) में प्राचीन सभ्यता के लोग वनस्पति तेलों (vegetable oils) …
लेयुग्म (Legume) कुल की फसलों को दलहनी फसल की संज्ञा प्रदान की जाती है। ये फसलें तीन मौसमों में उगायी जाती हैं। यथा- • खरीफ …
मनुष्य के जीवन-यापन, सुख-शान्ति व समृद्धि के लिये पौधे एवं उनके उत्पाद आवश्यक हैं। जीवन की आधारभूत आवश्यकताएँ भोजन, वस्त्र व मकानों में प्रयोग आने …
जीवित पौधों की एक विशेषता यह है कि वातावरण के प्रभाव से अथवा कुछ आन्तरिक कारणों से या तो उनका सम्पूर्ण शरीर या शरीर का …
पौधों में वृद्धि, आकार एवं आयतन का चिरस्थायी (irreversible = permanent) वर्धन है जिसके साथ-साथ प्रायः शुष्क भार का तथा जीवद्रव्य (protoplasm) का भी वर्धन …
सभी जीवधारियों को चाहे वह पौधा हो या सूक्ष्मजीवी या जन्तु, अपनी क्रियाशीलता (वृद्धि, गति, जल एवं खनिज पदार्थों का अवशोषण, इत्यादि) के लिए ऊर्जा …
जन्तुओं की भाँति पौधों को भी भोजन की आवश्यकता होती है। हरी पत्तियों वाले पौधे अपने भोजन स्वयं बनाते हैं। कुछ पौधे ऐसे होते हैं …
“हरे पौधों की कोशिकाओं में सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में कार्बन डाई आक्साइड (CO₂) एवं जल (H₂O) के संयोग से कार्बन युक्त यौगिकों (कार्बोहाइड्रेट्स …
विसरण (Diffusion) “गैसों, द्रवों तथा विलेयों (solutes) आदि पदार्थों के स्वतन्त्र अणुओं का अधिक सान्द्रता (concentration) वाले क्षेत्र से कम सान्द्रता वाले क्षेत्र की ओर …