U.P Board Class 12 Biology 348(GG) Question Paper 2024 का उत्तर आप यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। जिसका कोई भी शुल्क आपसे नहीं लिया जायेगा। आइये विस्तार से सभी प्रश्नो को जानते हैं।
सत्र – 2024
जीव विज्ञान
समयः तीन घण्टे 15 मिनट पूर्णांकः 70
नोट : प्रारम्भ के 15 मिनट परीक्षार्थियों को प्रश्नपत्र पढ़ने के लिए निर्धारित हैं।
(बहुविकल्पीय प्रश्न)
1. सही विकल्प चुनकर अपनी उत्तर-पुस्तिका में लिखिए :
(क) टेपीटम परत का कार्य होता है :
(i) परागकणों का पोषण
(ii) परागकणों का निर्माण
(iii) अन्तःस्तर (एण्डोथीलियम) का निर्माण
(iv) परागकणों को नष्ट करना
Ans. (i) परागकणों का पोषण
(ख) निम्न में से कौन एक अपरदाहारी है:
(i) केंचुआ
(ii) पक्षी
(iii) मेंढक
(iv) हाथी
Ans. (i) केंचुआ
(ग) डेंगू (हड्डी तोड़) बुखार का वाहक है:
(i) ऐनोफ़ेलीज़
(ii) क्यूलेक्स
(iii) ऐडीज
(iv) इनमें से कोई नहीं
Ans. (iii) ऐडीज
(घ) कौन-सा एंज़ाइम डीएनए को विशिष्ट स्थान पर काटता है ?
(i) पॉलिमरेज
(ii) एंडोन्यूक्लिएज़
(iii) एक्सोन्यूक्लिएज़
(iv) लाइगेज़
Ans. (ii) एंडोन्यूक्लिएज़
(अति-लघुउत्तरीय प्रश्न)
2. (क) शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करने वाली कोशिकाओं के नाम लिखिए ।
Ans. शुक्राणुओं को पोषण प्रदान करने वाली कोशिकाएँ सर्टोली कोशिकाएँ (Sertoli cells) कहलाती हैं। ये वृषण की शुक्रजनन नलिकाओं में पाई जाती हैं।
(ख) MTP और ZIFT का पूरा नाम लिखिए ।
Ans.
MTP — Medical Termination of Pregnancy (चिकित्सकीय गर्भसमापन)
ZIFT — Zygote Intra Fallopian Transfer (युग्मनज अंतः फैलोपियन स्थानान्तरण)
(ग) आनुवंशिकता की इकाई क्या है ?
Ans. आनुवंशिकता की मूल इकाई जीन (Gene) है।
(घ) आनुवंशिक कूट में कितने प्रकूट (कोडॉन) त्रिक होते हैं?
Ans. आनुवंशिक कूट में 64 त्रिक या कोडॉन होते हैं। इनमें 61 अमीनो अम्लों के लिए तथा 3 विराम कोडॉन होते हैं।
ङ) वाहित मल क्या है ?
Ans. मानव मल-मूत्र तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थों को जल के साथ नालियों द्वारा बहाकर ले जाने वाले मिश्रण को वाहित मल (Sewage) कहते हैं।
(लघु-उत्तरीय प्रश्न-I)
3. (क) अफीम क्या है? यह किस पौधे से प्राप्त होता है ?
Ans. अफीम एक मादक पदार्थ है, जो पोस्त या अफीम के पौधे (Papaver somniferum) के कच्चे फल के दूधिया रस से प्राप्त होता है। इससे मॉर्फीन, कोडीन आदि पदार्थ प्राप्त किए जाते हैं।
(ख) क्लाइनफेल्टर एवं टर्नर सिन्ड्रोम में गुणसूत्रों की संख्या कितनी होती है ?
Ans.
- क्लाइनफेल्टर सिन्ड्रोम — 47, XXY
- टर्नर सिन्ड्रोम — 45, XO
(ग) मानव में प्रतिरक्षा (इम्युनिटी) कितने प्रकार की होती है? उनके नाम लिखिए ।
Ans. मानव में प्रतिरक्षा मुख्यतः दो प्रकार की होती है—
- जन्मजात प्रतिरक्षा (Innate immunity)
- अर्जित प्रतिरक्षा (Acquired immunity)
(घ) प्रतिजैविक क्या हैं? किन्हीं दो सूक्ष्मजीवों के नाम लिखिए जिनका प्रयोग प्रतिजैविकों के उत्पादन में किया जाता है।
Ans. ऐसे रासायनिक पदार्थ जो कम सांद्रता में रोग उत्पन्न करने वाले सूक्ष्मजीवों की वृद्धि को रोकते हैं या उन्हें नष्ट करते हैं, प्रतिजैविक (Antibiotics) कहलाते हैं।
प्रतिजैविक उत्पादन में प्रयुक्त दो सूक्ष्मजीव हैं—
- Penicillium chrysogenum
- Streptomyces griseus
(ङ) वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार द्वारा क्या कदम उठाए गए हैं?
Ans. वन्यजीव संरक्षण के लिए सरकार ने निम्न कदम उठाए हैं—
- राष्ट्रीय उद्यान एवं वन्यजीव अभयारण्य स्थापित किए गए हैं।
- जैवमण्डल आरक्षित क्षेत्र बनाए गए हैं।
- शिकार पर कानूनी प्रतिबंध लगाया गया है।
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 लागू किया गया है।
- बाघ, हाथी आदि के संरक्षण के लिए विशेष परियोजनाएँ चलाई गई हैं।
(लघु-उत्तरीय प्रश्न-II)
4. (क) शारीरिक रोध और कोशिकीय रोध पर संक्षिप्त टिप्पणियाँ लिखिए ।
Ans. प्रतिरक्षा तंत्र की प्रथम सुरक्षा पंक्ति को रोध कहा जाता है।
शारीरिक रोध: त्वचा तथा शरीर की श्लेष्म झिल्लियाँ रोगजनक सूक्ष्मजीवों को शरीर में प्रवेश करने से रोकती हैं। त्वचा इसका प्रमुख उदाहरण है।
कोशिकीय रोध: कुछ श्वेत रक्त कणिकाएँ, विशेषकर न्यूट्रोफिल तथा मोनोसाइट/मैक्रोफेज, रोगजनकों को निगलकर नष्ट करती हैं। इसे कोशिकीय रोध कहते हैं।
(ख) विसंयोजन के नियम पर टिप्पणी लिखिए ।
Ans. मेण्डल के अनुसार किसी संकर जीव में किसी लक्षण के दोनों कारक युग्म के रूप में उपस्थित रहते हैं। युग्मक निर्माण के समय ये दोनों कारक अलग-अलग हो जाते हैं और प्रत्येक युग्मक में केवल एक कारक जाता है। निषेचन के समय ये पुनः जोड़ी बना लेते हैं। इसे विसंयोजन का नियम (Law of Segregation) कहते हैं।
(ग) कैंसर क्या है? इसके बचाव व उपचार का उल्लेख कीजिए ।
Ans. कैंसर एक ऐसी अवस्था है जिसमें शरीर की कुछ कोशिकाएँ अनियंत्रित एवं असामान्य रूप से विभाजित होने लगती हैं और ऊतक में असामान्य वृद्धि उत्पन्न कर सकती हैं।
बचाव:
- तम्बाकू एवं धूम्रपान से बचना।
- हानिकारक रसायनों एवं विकिरण से अनावश्यक संपर्क से बचना।
- संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना।
- समय पर चिकित्सकीय जाँच कराना।
उपचार: कैंसर का उपचार रोग की अवस्था के अनुसार शल्य चिकित्सा, विकिरण चिकित्सा और कीमोथेरेपी आदि से किया जाता है।
(घ) एक-संकर एवं द्वि-संकर टेस्ट क्रॉस को समझाइए ।
Ans. किसी प्रभावी लक्षण वाले अज्ञात जीनोटाइप वाले जीव का अप्रभावी जीनोटाइप वाले जीव से संकरण टेस्ट क्रॉस कहलाता है।
एक-संकर टेस्ट क्रॉस:
Tt × tt → Tt : tt = 1 : 1
अर्थात् संतति में 50% लम्बे और 50% बौने पौधे प्राप्त होते हैं।
द्वि-संकर टेस्ट क्रॉस:
RrYy × rryy → RrYy : Rryy : rrYy : rryy = 1 : 1 : 1 : 1
यह दो लक्षणों के स्वतंत्र अपव्यूहन को दर्शाता है।
5. (क) समजातता पर टिप्पणी लिखिए ।
Ans. विभिन्न जीवों के ऐसे अंग जिनकी आंतरिक संरचना एवं भ्रूणीय उत्पत्ति समान होती है, लेकिन उनके कार्य अलग-अलग हो सकते हैं, समजात अंग कहलाते हैं। उदाहरण के लिए मानव का हाथ, चमगादड़ का पंख तथा व्हेल का फ्लिपर। ये अपसारी विकास का प्रमाण हैं।
(ख) हार्डी-वेनवर्ग सिद्धान्त का वर्णन कीजिए ।
Ans. हार्डी-वेनबर्ग सिद्धान्त के अनुसार बड़ी समष्टि में यदि उत्परिवर्तन, जीन प्रवाह, आनुवंशिक अपव्यूहन, प्राकृतिक वरण तथा आनुवंशिक विचलन जैसे कारक कार्य न करें, तो जीन आवृत्तियाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी स्थिर रहती हैं।
यदि दो एलील की आवृत्तियाँ p और q हों, तो—
p + q = 1
तथा,
p² + 2pq + q² = 1
जीन आवृत्ति में परिवर्तन होने पर समष्टि में विकास होने का संकेत मिलता है।
(ग) लघु बीजाणुधानी (परागकोश) तथा गुरुबीजाणुधानी (बीजांड) के बीच कोई तीन अन्तर लिखिए ।
Ans.
| आधार | लघु बीजाणुधानी/परागकोश | गुरुबीजाणुधानी/बीजांड |
|---|---|---|
| 1. स्थिति | पुंकेसर में पाई जाती है | अंडप में पाई जाती है |
| 2. बीजाणु | लघुबीजाणु बनते हैं | गुरुबीजाणु बनते हैं |
| 3. परिणाम | परागकण बनते हैं | मादा युग्मकोद्भिद बनता है |
(घ) समष्टि की किन्हीं तीन महत्त्वपूर्ण विशेषताओं की व्याख्या कीजिए ।
Ans. समष्टि की प्रमुख विशेषताएँ हैं—
- समष्टि घनत्व: किसी निश्चित क्षेत्र या आयतन में उपस्थित जीवों की संख्या को समष्टि घनत्व कहते हैं।
- जन्मदर: एक निश्चित समय में समष्टि में उत्पन्न होने वाले नए जीवों की संख्या जन्मदर कहलाती है।
- मृत्युदर: एक निश्चित समय में समष्टि में मरने वाले जीवों की संख्या मृत्युदर कहलाती है।
6. निम्नलिखित से आप क्या समझते हैं:
(क) जीवन की उत्पत्ति
Ans. पृथ्वी पर प्रथम जीवन की उत्पत्ति लगभग 3.5–4 अरब वर्ष पूर्व हुई मानी जाती है। रासायनिक विकास की अवधारणा के अनुसार प्रारम्भिक पृथ्वी के वातावरण में सरल अकार्बनिक पदार्थों से जटिल कार्बनिक अणुओं का निर्माण हुआ और लंबे समय में इनसे प्रथम जीवन-रूपों का विकास हुआ।
(ख) ऑस्ट्रेलोपिथेसिन (आदिमानव)
Ans. ऑस्ट्रेलोपिथेसिन प्रारम्भिक मानव-सदृश जीव थे, जो अफ्रीका में रहते थे। वे सीधे खड़े होकर चल सकते थे तथा उनके मस्तिष्क का आकार आधुनिक मानव की अपेक्षा छोटा था। इन्हें मानव विकास की महत्वपूर्ण प्रारम्भिक कड़ी माना जाता है।
(ग) संक्रामक रोग
Ans. ऐसे रोग जो रोगजनक सूक्ष्मजीवों द्वारा उत्पन्न होते हैं और संक्रमित व्यक्ति, जल, वायु, भोजन या वाहक के माध्यम से एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक फैल सकते हैं, संक्रामक रोग कहलाते हैं। उदाहरण—हैजा, मलेरिया, टाइफाइड तथा डेंगू।
(घ) डार्विनवाद
Ans. चार्ल्स डार्विन द्वारा प्रतिपादित विकासवाद का सिद्धान्त डार्विनवाद कहलाता है। इसके अनुसार जीवों में विभिन्नताएँ पाई जाती हैं और प्रकृति में संघर्ष के कारण अनुकूल लक्षण वाले जीव अधिक समय तक जीवित रहते तथा प्रजनन करते हैं। इसे प्राकृतिक वरण का सिद्धान्त कहा जाता है।
(विस्तृत-उत्तरीय प्रश्न)
7. मनुष्य के नर जनन तंत्र का वर्णन कीजिए तथा शुक्राणु निर्माण की क्रिया समझाइए ।
Ans. मानव का नर जनन तंत्र मुख्यतः वृषण, सहायक नलिकाएँ, सहायक ग्रंथियाँ तथा बाह्य जननांग से बना होता है।
वृषण: वृषण उदरगुहा के बाहर अंडकोश में स्थित होते हैं। इनमें शुक्रजनन नलिकाएँ होती हैं, जहाँ शुक्राणुओं का निर्माण होता है। इनके बीच स्थित लेडिग कोशिकाएँ टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्राव करती हैं।
सहायक नलिकाएँ: इनमें शुक्रजनन नलिकाएँ, रेटे टेस्टिस, वासा इफेरेंशिया, एपिडिडिमिस तथा शुक्रवाहिनी शामिल हैं। ये शुक्राणुओं के परिवहन में सहायता करती हैं।
सहायक ग्रंथियाँ: वीर्य पुटिकाएँ, प्रोस्टेट ग्रंथि तथा बल्बोयूरेथ्रल ग्रंथियाँ स्राव करती हैं, जो शुक्राणुओं के लिए पोषक एवं उपयुक्त माध्यम प्रदान करते हैं।
शुक्राणु निर्माण
शुक्राणु निर्माण को शुक्रजनन (Spermatogenesis) कहते हैं। यह यौवनावस्था के बाद शुक्रजनन नलिकाओं में प्रारम्भ होता है।
शुक्राणुजन → प्राथमिक शुक्राणुकोशिका → द्वितीयक शुक्राणुकोशिका → शुक्राणुप्रसू (Spermatid) → शुक्राणु
प्राथमिक शुक्राणुकोशिका अर्धसूत्री विभाजन द्वारा द्वितीयक शुक्राणुकोशिकाएँ बनाती है। इनके आगे विभाजन से शुक्राणुप्रसू बनते हैं और शुक्राणुजनन (Spermiogenesis) द्वारा परिपक्व शुक्राणु बनते हैं।
अथवा
निम्नलिखित में अन्तर लिखिए :
(i) प्लाज्मिड डीएनए और गुणसूत्रीय डीएनए
Ans.
| आधार | प्लाज्मिड DNA | गुणसूत्रीय DNA |
|---|---|---|
| 1. स्थिति | सामान्यतः कोशिका के मुख्य गुणसूत्र से अलग | गुणसूत्र में उपस्थित |
| 2. आकार | अपेक्षाकृत छोटा | बहुत बड़ा |
| 3. प्रतिकृति | स्वतंत्र रूप से प्रतिकृति बना सकता है | कोशिका विभाजन के अनुसार प्रतिकृति बनाता है |
| 4. उपयोग | आनुवंशिक अभियांत्रिकी में वाहक के रूप में उपयोगी | कोशिका की मुख्य आनुवंशिक सूचना रखता है |
(ii) एक्सोन्यूक्लिएज़ और एंडोन्यूक्लिएज़ एंज़ाइम
Ans.
| आधार | एक्सोन्यूक्लिएज़ | एंडोन्यूक्लिएज़ |
|---|---|---|
| 1. कार्य | DNA के सिरों से न्यूक्लियोटाइड हटाता है | DNA की आंतरिक विशिष्ट जगह पर काटता है |
| 2. कटाव | 5′ या 3′ सिरे से | DNA के भीतर |
| 3. उपयोग | DNA को सिरों से छोटा करने में | पुनः संयोजक DNA तकनीक में DNA काटने में |
8. लिंग-सहलग्न लक्षण से आप क्या समझते हैं ? रेखांकित चित्रों की सहायता से मनुष्य में दो लिंग-सहलग्न लक्षणों की वंशागति का वर्णन कीजिए ।
Ans. वे लक्षण जिनके जीन लिंग गुणसूत्रों, विशेषकर X या Y गुणसूत्र पर स्थित होते हैं, लिंग-सहलग्न लक्षण कहलाते हैं। मनुष्य में हीमोफीलिया और लाल-हरी वर्णान्धता इसके उदाहरण हैं।
1. हीमोफीलिया
यह X-सहलग्न अप्रभावी आनुवंशिक रोग है। इसे Xʰ से प्रदर्शित कर सकते हैं।
यदि वाहक माता का विवाह सामान्य पुरुष से हो—
XᴴXʰ × XᴴY
तो संतानों में—
- XᴴXᴴ — सामान्य पुत्री
- XᴴXʰ — वाहक पुत्री
- XᴴY — सामान्य पुत्र
- XʰY — हीमोफीलिया से प्रभावित पुत्र
अतः यह रोग पुरुषों में अधिक दिखाई देता है।
2. लाल-हरी वर्णान्धता
यह भी X-सहलग्न अप्रभावी लक्षण है। इसमें व्यक्ति लाल और हरे रंगों में अंतर करने में कठिनाई अनुभव करता है। इसका जीन X गुणसूत्र पर स्थित होता है और इसकी वंशागति हीमोफीलिया के समान होती है।
अथवा
अथवा
समष्टि से आप क्या समझते हैं? इसकी पारस्परिक क्रियाओं का वर्णन कीजिए ।
Ans. किसी निश्चित क्षेत्र में एक ही प्रजाति के ऐसे जीवों का समूह, जो एक-दूसरे के साथ प्रजनन कर सकते हैं, समष्टि (Population) कहलाता है।
समष्टि में जीवों के बीच निम्न पारस्परिक क्रियाएँ होती हैं—
- प्रतिस्पर्धा (+/−): दो जीव समान संसाधनों के लिए प्रतिस्पर्धा करते हैं।
- परभक्षण (+/−): एक जीव दूसरे जीव को भोजन के रूप में ग्रहण करता है।
- परजीविता (+/−): परजीवी को लाभ होता है और पोषक को हानि।
- सहजीविता (+/+): दोनों जीवों को लाभ होता है।
- सहभोजिता (+/0): एक जीव को लाभ होता है, जबकि दूसरे पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ता।
- अमेनसेलिज्म (−/0): एक जीव को हानि होती है जबकि दूसरे पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
9. मेण्डल के प्रभाविता के नियम की व्याख्या कीजिए। अपूर्ण प्रभाविता पर टिप्पणी कीजिए ।
Ans. मेण्डल के अनुसार किसी संकर में विपरीत लक्षणों के युग्म में एक लक्षण प्रभावी तथा दूसरा अप्रभावी होता है। विषमयुग्मजी अवस्था में प्रभावी लक्षण व्यक्त होता है और अप्रभावी लक्षण दबा रहता है।
उदाहरण के लिए मटर में लम्बापन T प्रभावी तथा बौनापन t अप्रभावी है।
TT × tt → सभी F₁ = Tt (लम्बे)
F₁ का स्वपरागण:
Tt × Tt → TT : Tt : Tt : tt
जीनोटाइप अनुपात = 1 : 2 : 1
फीनोटाइप अनुपात = 3 लम्बे : 1 बौना
अपूर्ण प्रभाविता
जब विषमयुग्मजी अवस्था में कोई भी एलील पूर्ण रूप से प्रभावी नहीं होता और दोनों के बीच का मध्यवर्ती लक्षण प्रकट होता है, तो इसे अपूर्ण प्रभाविता (Incomplete dominance) कहते हैं।
उदाहरण—स्नैपड्रैगन (Antirrhinum) में लाल फूल RR तथा सफेद फूल rr के संकरण से F₁ में गुलाबी फूल Rr प्राप्त होते हैं।
RR × rr → Rr (गुलाबी)
F₂ में:
RR : Rr : rr = 1 : 2 : 1
फीनोटाइप भी 1 लाल : 2 गुलाबी : 1 सफेद होता है।
अथवा
आवृतबीजी पौधों में निषेचन कैसे होता है? निषेचन पश्च संरचनाओं का वर्णन कीजिए ।
Ans. आवृतबीजी पौधों में परागकण वर्तिकाग्र पर पहुँचने के बाद अंकुरित होकर परागनलिका बनाता है। परागनलिका वर्तिका से होती हुई अंडाशय तक पहुँचती है और बीजांड में प्रवेश करती है। परागनलिका के माध्यम से दो नर युग्मक भ्रूणकोष में पहुँचते हैं।
एक नर युग्मक अंड कोशिका से मिलकर युग्मनज (Zygote) बनाता है। दूसरे नर युग्मक का संलयन दो ध्रुवीय नाभिकों से होकर प्राथमिक भ्रूणपोष नाभिक बनाता है। इस प्रकार आवृतबीजियों में द्विनिषेचन (Double fertilization) होता है।
निषेचन-पश्च संरचनाएँ
- युग्मनज → भ्रूण
- प्राथमिक भ्रूणपोष नाभिक → भ्रूणपोष
- बीजांड → बीज
- बीजावरण → बीजचोल
- अंडाशय → फल
- अंडाशय की भित्ति → फलभित्ति (Pericarp)
इस प्रकार निषेचन के बाद बीज तथा फल का निर्माण होता है।