तुम कब जाओगे अतिथि : अध्याय 3

तुम कब जाओगे अतिथि

आज तुम्हारे आगमन के चतुर्थ दिवस पर यह प्रश्न बार-बार मन में घुमड़ रहा है- तुम कब जाओगे, अतिथि ? तुम जहाँ बैठे निस्संकोच सिगरेट …

Read more

दुःख का अधिकार : अध्याय 1

दुःख का अधिकार

मनुष्यों की पोशाके उन्हें विभिन्न श्रेणियों में बाँट देती है। प्रायः पोशाक ही समाज में मनुष्य का अधिकार और उसका दर्जा निश्चित करती है। वह …

Read more

मेघ आए : अध्याय 12

मेघ आए

मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर के।आगे-आगे नाचती-गाती बयार चली,दरवाजे-खिड़कियाँ खुलने लगीं गली-गली,पाहुन ज्यों आए हों गाँव में शहर के।मेघ आए बड़े बन-ठन के सँवर …

Read more

ग्राम श्री : अध्याय 11

ग्राम श्री

फैली खेतों में दूर तलक              मखमल की कोमल हरियाली,लिपटीं जिससे रवि की किरणें             चाँदी की सी उजली जाली!तिनकों के हरे हरे तन पर             हिल हरित …

Read more

कैदी और कोकिला : अध्याय 10

कैदी और कोकिला

क्या गाती हो?क्यों रह-रह जाती हो?कोकिल बोलो तो ! क्या लाती हो?संदेशा किसका है?कोकिल बोलो तो! ऊँची काली दीवारों के घेरे में,डाकू, चोरों, बटमारों के …

Read more

सवैये : अध्याय 9

सवैये

1 मानुष हौं तो वही रसखानि बसौं व्रज गोकुल गाँव के ग्वारन।जौ पसु हौं तो कहा बस मेरो चरौं नित नंद की धेनु मँझारन ।।पाहन …

Read more

वाख : अध्याय 8

वाख

1 रस्सी कच्चे धागे की, खींच रही मैं नाव।जाने कब सुन मेरी पुकार, करें देव भवसागर पार।पानी टपके कच्चे सकोरे, व्यर्थ प्रयास हो रहे मेरे।जी …

Read more