कठपुतली : अध्याय 3
कठपुतलीगुस्से से उबलीबोली-ये धागेक्यों हैं मेरे पीछे-आगे?इन्हें तोड़ दो;मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। सुनकर बोलीं और-औरकठपुतलियाँकि हाँ,बहुत दिन हुएहमें अपने मन के छंद छुए। …
कठपुतलीगुस्से से उबलीबोली-ये धागेक्यों हैं मेरे पीछे-आगे?इन्हें तोड़ दो;मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो। सुनकर बोलीं और-औरकठपुतलियाँकि हाँ,बहुत दिन हुएहमें अपने मन के छंद छुए। …
अभी तक मैंने उन्हें दूर से देखा था। बड़ी गंभीर, शांत, अपने आप में अ खोई हुई लगती थीं। संभ्रांत महिला की भाँति वे प्रतीत …
हम पंछी उन्मुक्त गगन केपिंजरबद्ध न गा पाएँगे,कनक-तीलियों से टकराकरपुलकित पंख टूट जाएँगे। हम बहता जल पीनेवालेमर जाएँगे भूखे-प्यासे,कहीं भली है कटुक निबौरीकनक-कटोरी की मैदा …
यदि आप मानचित्र 1 और 2 को ध्यानपूर्वक देखेंगे तो आपको पता चलेगा कि अठारहवीं शताब्दी के पूर्वार्द्ध के दौरान उपमहाद्वीप में कुछ विशेष रूप …
लोगों का वर्णन करने का एक सबसे सामान्य तरीका है उनकी बोलचाल की भाषा से उन्हें परिभाषित करना। जब हम किसी व्यक्ति को तमिल या …
आपने लोगों को पूजा-पाठ करते अथवा भजन, कीर्तन या कव्वाली गाते या चुपचाप ईश्वर के नाम का जाप करते हुए देखा होगा। आपने यह भी …
अध्याय 2, 3 और 4 में आपने देखा कि किस प्रकार राज्यों का उत्थान और पतन हुआ। इस उठापटक के बीच ही कलाओं, दस्तकारियों और …
मध्यकाल में किसी भी शासक के लिए भारतीय उपमहाद्वीप जैसे बड़े क्षेत्र पर, जहाँ लोगों एवं संस्कृतियों में इतनी अधिक विविधताएँ हो, शासन कर पाना …
हमने अध्याय 2 में देखा कि कावेरी डेल्टा जैसे क्षेत्र बड़े राज्यों के केंद्र बन गये थे। क्या आपने गौर किया कि अध्याय 2 में …
सातवीं शताब्दी के बाद कई राजवंशों का उदय हुआ। मानचित्र । में उपमहाद्वीप के विभिन्न हिस्सों में सातवीं से बारहवीं शताब्दी के बीच शासन करनेवाले …