प्रायद्वीपीय अपवाह (The Peninsular Drainage)
भारतीय प्रायद्वीपीय अपवाह की कतिपय विशिष्टताएँ हैं। यह एक प्राचीन स्थिर भूखण्ड है, अतएव प्रायद्वीप की नदियाँ हिमालय की तुलना में अधिक पुरानी हैं।* यह …
भारतीय प्रायद्वीपीय अपवाह की कतिपय विशिष्टताएँ हैं। यह एक प्राचीन स्थिर भूखण्ड है, अतएव प्रायद्वीप की नदियाँ हिमालय की तुलना में अधिक पुरानी हैं।* यह …
अपवाह का अभिप्राय जल धाराओं तथा नदियों द्वारा जल के धरातलीय प्रवाह से है। अपवाह तंत्र (Drainage System) का सन्दर्भ सरिताओं की उत्पत्ति तथा उनके …
द्वीप, स्थलखण्ड के ऐसे भाग हैं जिनके चारों ओर जल का विस्तार पाया जाता है। यह महासागर, सागर, झील व नदी में हो सकता है। …
प्रायद्वीपीय पठारी भाग के पूर्व व पश्चिम में दो संकरे तटीय मैदान मिलते हैं जिन्हें क्रमशः पूर्वी तटीय एवं पश्चिमी तटीय मैदान कहा जाता है। …
हिमालय पर्वत तथा दक्षिणी प्रायद्वीपीय पठार के बीच सिंधु, गंगा, ब्रह्मपुत्र तथा प्रायद्वीपीय भारत से आने वाली उत्तर प्रवाही नदियों की निक्षेप क्रिया द्वारा निर्मित …
यह त्रिभुजाकार पठार, पूर्वी तथा पश्चिमी घाटों, सतपुड़ा, मैकाल तथा राजमहल पहाड़ियों के मध्य 7 लाख वर्ग किमी क्षेत्र पर विस्तृत है। इसकी ऊँचाई 500-1000 मीटर है। …
इस लेख में हम मध्यवर्ती उच्च भूमियाँ के बारे में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। तो आइए नीचे दिए गए मुख्य श्रेणी एवं पठार के …
किसी पर्वत अथवा पहाड़ी में स्थित अनुप्रस्थ संकरी द्रोणी (Transverse Narrow Basin) व निचला भाग जिससे होकर स्थल मार्ग गुजरता है, ‘दर्श’ (Pass) की संज्ञा …
हिमालय की उत्तर से दक्षिण म्यांमार-भारत सीमा के सहारे फैली और अरूणाचल प्रदेश (तिराप मण्डल), नागालैण्ड, मणिपुर एवं मिजोरम से गुजरने वाली पहाड़ी श्रेणियों को …
भारत की भूगर्भिक संरचना की विविधता ने देश के उच्चावच तथा भौतिक लक्षणों की विविधता को जन्म दिया है। देश के लगभग 10.6% क्षेत्र पर पर्वत, 18.5% …